Category: Jharkhand

  • गिरिडीह: सुभाष इंस्टीट्यूट के BBA-BCA छात्रों ने फिर लहराया परचम

    गिरिडीह :सुभाष इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, गिरिडीह के BBA और BCA चतुर्थ सेमेस्टर (सत्र 2022-25) का परीक्षा परिणाम घोषित कर दिया गया है। इस बार भी छात्रों ने शानदार प्रदर्शन किया है। संस्थान का रिजल्ट 100% रहा। कुल 46 छात्रों ने परीक्षा दी थी, जिसमें 13 BBA और 33 BCA के छात्र शामिल थे।

    BCA में 4 छात्रों को 8 SGPA, 12 को 7 SGPA और 17 छात्रों को 6 SGPA मिला। वहीं BBA में नूरी परवीन ने 9 SGPA और 504 अंक के साथ कॉलेज टॉप किया। नीलू कुमारी ने 8.83 SGPA (505 अंक) लाकर दूसरा और मो. हसमुख ने 8.83 SGPA (490 अंक) के साथ तीसरा स्थान हासिल किया।

    BBA ब्रांच में तसबीह परवीन 8.30 SGPA (471 अंक) के साथ टॉपर बनीं। आदित्य राज और तनीषा गुप्ता ने भी अच्छे अंक प्राप्त कर टॉप-3 में जगह बनाई।

    संस्थान के निदेशक डॉ. बिजय सिंह ने सभी छात्रों को बधाई दी और कहा कि संस्थान पढ़ाई के साथ-साथ उन्हें आत्मनिर्भर भी बना रहा है। विभागाध्यक्ष सुधाकर शरण और मकबूल आलम ने शिक्षकों को सफलता का श्रेय दिया।

  • झारखंड कांग्रेस को राहुल गांधी की सख्त हिदायत, जनहित पर मुखर रहें

    –कार्यकर्ताओं का सम्मान करें, गठबंधन में सामंजस्य बनाए रखें

    परवेज आलम

    For The News Post4u.

    RANCHI : लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कांग्रेस पार्टी को झारखंड में नई दिशा देने के मकसद से नई  दिल्ली में एक महत्वपूर्ण बैठक की , जिसमें झारखंड के सभी कांग्रेस विधायक और सभी  मंत्री  शामिल हुये ।  इस बैठक को कांग्रेस की राज्य इकाई में संगठनात्मक मजबूती और गठबंधन सरकार में प्रभावशाली भूमिका सुनिश्चित करने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है।

    जनहित के मुद्दों को प्राथमिकता, भाजपा को मौका न देने की सलाह.

    बैठक की शुरुआत में राहुल गांधी ने स्पष्ट तौर पर कहा कि झारखंड के कांग्रेसी नेता जनता से जुड़े मुद्दों पर आक्रामक और सक्रिय रुख अपनाएं। उन्होंने कहा कि पेसा कानून, ओबीसी आरक्षण और सरना धर्म कोड जैसे संवेदनशील मसलों पर कांग्रेस को स्पष्ट और मज़बूत रुख दिखाना होगा, ताकि भाजपा को जनता के बीच जगह बनाने का कोई मौका न मिले।

    उन्होंने यह भी चेताया कि अगर कांग्रेस जनहित से जुड़ी आवाजें नहीं उठाएगी, तो भाजपा इन मुद्दों को हथियाने की कोशिश करेगी, जो पार्टी की राजनीतिक स्थिति को कमजोर कर सकता है।

    विधायकों को विधानसभा में सक्रियता और जनता से जुड़ाव का निर्देश.

    राहुल ने साफ शब्दों में कहा कि विधायक पहले जनता के प्रतिनिधि हैं, फिर मंत्री। इसलिए उन्हें अपनी विधानसभा में सक्रिय रहकर लोगों की समस्याओं को सीधे सुनना और समाधान के लिए प्रयास करना चाहिए। उन्होंने विधायकों को निर्देश दिया कि वे विधानसभा में मजबूती से अपनी बात रखें और सरकार की योजनाओं को सही तरीके से जनता तक पहुंचाएं।

    गठबंधन धर्म का पालन और झामुमो के साथ समन्वय पर जोर.

    बैठक में राहुल गांधी ने खास तौर पर गठबंधन सहयोगी झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के साथ बेहतर तालमेल बनाए रखने की बात कही। उन्होंने नेताओं से कहा कि कांग्रेस को गठबंधन धर्म का सम्मान करते हुए झामुमो के साथ किसी भी प्रकार की टकराव या टकराहट से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे जनता के बीच संयुक्त सरकार की सकारात्मक छवि बनती है।

    संगठनात्मक मजबूती और कार्यकर्ताओं की भूमिका को बताया केंद्रीय बिंदु.

    राहुल गांधी ने इस बात पर भी जोर दिया कि पार्टी के स्थानीय संगठनों को सक्रिय और सशक्त किया जाए। उन्होंने मंत्रियों और विधायकों को निर्देश दिया कि वे पार्टी कार्यकर्ताओं का सम्मान करें, नियमित संवाद रखें और उनकी समस्याओं को प्राथमिकता दें।

    उन्होंने कहा, “कार्यकर्ता ही पार्टी की रीढ़ होते हैं। यदि कार्यकर्ता उत्साहित और संलग्न रहेंगे तो चुनावी सफलता भी सुनिश्चित होगी।” उन्होंने आगामी निकाय चुनावों की तैयारी में कार्यकर्ताओं की भूमिका को केंद्रीय बताया।

    भाजपा की आलोचना और कांग्रेस की वैकल्पिक भूमिका पर बल.

    राहुल गांधी ने कहा कि भाजपा आमजन से जुड़े मुद्दों को दबाने का प्रयास करती है, लेकिन कांग्रेस को चाहिए कि वह इन मुद्दों को मजबूती से उठाकर जनता के बीच खुद को उनका सच्चा प्रतिनिधि साबित करे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को झारखंड में एक प्रभावशाली और जनहितैषी की भूमिका निभानी होगी, भले ही वह सत्ता का हिस्सा हो।

    प्रदेश अध्यक्ष से असंतोष पर राहुल की समझदारी भरी सलाह.

    बैठक के दौरान कुछ विधायकों ने झारखंड प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के खिलाफ अपनी असहमति भी जाहिर की, जिस पर राहुल गांधी ने नेताओं से सुलह और सामंजस्य की नीति अपनाने को कहा। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत मतभेद संगठन की एकता को प्रभावित न करें।

    रणनीतिक संदेश और भविष्य की तैयारी.

    इस उच्चस्तरीय बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल भी मौजूद रहे। उन्होंने झारखंड में पार्टी की वर्तमान स्थिति और गठबंधन सरकार के प्रदर्शन की समीक्षा की।

    बैठक मे  राहुल गांधी ने सभी विधायकों और मंत्रियों से कहा कि वे एकजुटता, प्रतिबद्धता और जनसेवा की भावना के साथ काम करें। उन्होंने कहा कि यही समय है जब कांग्रेस को झारखंड में अपनी ताकत को फिर से स्थापित करना है ।

    राहुल गांधी की यह बैठक झारखंड कांग्रेस के लिए एक नई रणनीतिक दिशा, संगठनात्मक पुनर्गठन और गठबंधन धर्म के प्रति प्रतिबद्धता का स्पष्ट संकेत है। यह पहल आगामी चुनावों और राजनीतिक समीकरणों के मद्देनजर कांग्रेस के लिए एक फोकस्ड रोडमैप की तरह काम करेगी।

     

  • झारखंड हाईकोर्ट का अहम फैसला: दो वर्षीय B.Ed धारकों को शिक्षक भर्ती में मिलेगा मौका

    -JSSC को सभी अभ्यर्थियों को फिर से शामिल करने का निर्देश.

    By The News Post4u.

    रांची:  झारखंड में शिक्षक भर्ती को लेकर बड़ी राहत की खबर आई है। झारखंड हाईकोर्ट ने एक अहम निर्णय में स्पष्ट कर दिया है कि दो वर्षीय B.Ed (बैचलर ऑफ एजुकेशन) डिग्रीधारी अभ्यर्थियों को सहायक आचार्य (Assistant Professor) भर्ती प्रक्रिया से बाहर नहीं किया जा सकता। इससे राज्य के हजारों B.Ed धारकों को राहत मिली है जिन्हें पहले एक वर्षीय B.Ed की शर्त के कारण चयन प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया था।

    क्या है मामला?

    झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) ने सहायक आचार्य की नियुक्ति के लिए वर्ष 2023 में विज्ञापन निकाला था, जिसमें न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता के रूप में एक वर्षीय B.Ed कोर्स का उल्लेख था। इस आधार पर विभिन्न विश्वविद्यालयों से दो वर्षीय B.Ed की पढ़ाई कर चुके कई अभ्यर्थियों को दस्तावेज सत्यापन के दौरान अयोग्य घोषित कर दिया गया।

    याचिकाकर्ताओं की ओर से उठाई गई बात.

    इस निर्णय को विप्लव दत्ता सहित अन्य अभ्यर्थियों ने झारखंड हाईकोर्ट में चुनौती दी। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत कुमार और अधिवक्ता अपराजिता भारद्वाज ने अदालत को बताया कि:

    • वर्ष 2014 में वर्मा आयोग की रिपोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के आधार पर NCTE (राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद) ने B.Ed कोर्स की समयावधि एक से बढ़ाकर दो वर्ष कर दी थी।
    • इसके बाद देशभर में और झारखंड में भी सभी मान्यता प्राप्त संस्थानों व विश्वविद्यालयों ने दो वर्षीय B.Ed पाठ्यक्रम लागू कर दिया है।
    • वर्ष 2019 में NCTE की अधिसूचना के अनुसार दो वर्षीय डिग्री पूरी तरह से वैध व मान्य है।

    कोर्ट ने दिया निर्देश.

    इस मामले में सुनवाई पूरी करने के बाद, जस्टिस दीपक रोशन की एकल पीठ ने सोमवार को अपना फैसला सुनाया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि:

    “दो वर्षीय B.Ed डिग्री रखने वाले अभ्यर्थियों को केवल इस आधार पर चयन प्रक्रिया से बाहर करना अनुचित है कि विज्ञापन में एक वर्षीय कोर्स का उल्लेख था।”

    कोर्ट ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) को निर्देश दिया है कि:

    • ऐसे सभी उम्मीदवारों के दस्तावेजों का पुनः सत्यापन किया जाए।
    • योग्य पाए जाने पर उन्हें चयन प्रक्रिया में शामिल किया जाए।

    भविष्य की भर्तियों के लिए भी संकेत.

    हाईकोर्ट के इस फैसले का असर न केवल वर्तमान भर्ती प्रक्रिया पर पड़ेगा, बल्कि यह भविष्य में जारी होने वाले शिक्षक नियुक्तियों के विज्ञापनों की भाषा और शर्तों को लेकर भी एक न्यायिक मार्गदर्शन प्रदान करता है। इस आदेश से यह स्पष्ट होता है कि जो भी शैक्षणिक योग्यता मान्यता प्राप्त निकाय (जैसे NCTE) द्वारा निर्धारित है, उसे ही कानूनी रूप से मान्य माना जाएगा — भले ही विज्ञापन में कुछ और लिखा हो।

    झारखंड हाईकोर्ट का यह फैसला राज्य के हजारों योग्य B.Ed अभ्यर्थियों के लिए न्याय की उम्मीद की एक बड़ी जीत है। यह न केवल भर्ती में पारदर्शिता और न्यायिक दखल का उदाहरण है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं में अद्यतन शैक्षणिक दिशा-निर्देशों की अनदेखी नहीं की जा सकती।

  • झारखंड में बड़ी कार्रवाई: 143 डॉक्टर सेवा से बर्खास्त

    स्वास्थ्य विभाग ने जारी की अधिसूचना.

    By The News Post4u.

    रांची: झारखंड सरकार ने राज्य के स्वास्थ्य तंत्र में अनुशासन बहाल करने की दिशा में एक बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। वर्षों से ड्यूटी से गायब चल रहे 143 डॉक्टरों को राज्य सरकार ने सेवा से बर्खास्त कर दिया है। स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग ने इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है।

    इन सभी चिकित्सकों पर आरोप था कि वे बिना किसी पूर्व सूचना या अनुमति के लंबे समय से अपने कार्यस्थल से अनुपस्थित चल रहे थे। लगातार चेतावनियों और विभागीय नोटिसों के बावजूद इन डॉक्टरों ने अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं कराई, जिसके चलते विभाग को यह सख्त निर्णय लेना पड़ा।

    बर्खास्त डॉक्टरों की नियुक्ति जेपीएससी से हुई थी.

    जिन डॉक्टरों को सेवा से हटाया गया है, उनकी नियुक्ति झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) के माध्यम से की गई थी। वे राज्य के विभिन्न सरकारी अस्पतालों में कार्यरत थे, जिनमें प्रमुख जिले शामिल हैं:

    • रामगढ़, हजारीबाग, बोकारो, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम
    • धनबाद, जामताड़ा, दुमका, देवघर, चतरा
    • पाकुड़, गुमला, खूंटी, गढ़वा, गिरिडीह और गोड्डा

    कई वरिष्ठ और विशेषज्ञ डॉक्टर भी सूची में शामिल.

    बर्खास्त किए गए डॉक्टरों की सूची में कई विशेषज्ञ चिकित्सकों के नाम भी शामिल हैं, जो राज्य के प्रमुख सरकारी अस्पतालों में तैनात थे:

    • डॉ. अभिषेक जायसवाल – रेडियोलॉजिस्ट, जमशेदपुर सदर अस्पताल
    • डॉ. चंदेवर मंगेश महादेव – ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ
    • डॉ. विक्रम – पश्चिमी सिंहभूम सदर अस्पताल
    • डॉ. रूपा – रिनपास (रांची मानसिक आरोग्यशाला)
    • डॉ. अभिषेक – डर्मेटोलॉजिस्ट, जामताड़ा सदर अस्पताल
    • डॉ. अनीश कुमार गांधी और डॉ. मनीष कुमार – सर्जन, धनबाद सदर अस्पताल

    खाली पदों पर होगी नई नियुक्ति.

    स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि इन डॉक्टरों की नियुक्ति अधिसूचना को रद्द कर दिया गया है। इसके बाद अब इन पदों पर नई भर्तियों का रास्ता साफ हो गया है। सरकार का उद्देश्य है कि आम जनता को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें और स्वास्थ्य ढांचा और अधिक प्रभावी तरीके से काम करे।

    सरकार का संदेश स्पष्ट: लापरवाही बर्दाश्त नहीं.

    इस कार्रवाई के माध्यम से राज्य सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि सरकारी सेवा में अनुशासनहीनता और गैर-जिम्मेदाराना रवैये को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। लंबे समय से अनुपस्थित डॉक्टरों के खिलाफ यह अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है।

    स्वास्थ्य विभाग अब इन खाली पदों को भरने के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी कर रहा है ताकि राज्य की स्वास्थ्य सुविधाओं को और सशक्त किया जा सके।

  • हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस तारलोक सिंह चौहान होंगे झारखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश

    –देशभर के कई हाईकोर्टों में हुआ बड़ा प्रशासनिक फेरबदल.

    For The News Post4u.

    रांची: भारत के न्यायिक ढांचे में एक अहम बदलाव करते हुए राष्ट्रपति ने देश के कई उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों के तबादले और नई नियुक्तियों को मंजूरी दे दी है। इस क्रम में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस तारलोक सिंह चौहान को झारखंड हाईकोर्ट का नया मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया है।

    अब तक झारखंड हाईकोर्ट की कमान संभाल रहे मुख्य न्यायाधीश एम.एस. रामचंद्र राव को स्थानांतरित कर त्रिपुरा हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया है।

    इस बदलाव के साथ-साथ पटना हाईकोर्ट में भी महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव किए गए हैं।

    • जस्टिस विपुल मनुभाई पंचोली, जो अब तक पटना हाईकोर्ट में न्यायाधीश के रूप में कार्यरत थे, उन्हें अब मुख्य न्यायाधीश के पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
    • वहीं, अब तक पटना हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रहे जस्टिस आशुतोष कुमार को गुवाहाटी हाईकोर्ट का नया मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया है।

    सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश के बाद हुई नियुक्तियां.
    इन सभी नियुक्तियों को भारत के सर्वोच्च न्यायालय की कॉलेजियम द्वारा सिफारिश किए जाने के बाद भारत के राष्ट्रपति द्वारा अनुमोदित किया गया है। यह फेरबदल देश में न्यायिक प्रक्रिया की सुचारूता, न्यायपालिका में संतुलन बनाए रखने और अनुभवों के विविध आदान-प्रदान को ध्यान में रखते हुए किया गया है।

    न्यायिक सेवाओं के अनुभवी चेहरे.

    • जस्टिस तारलोक सिंह चौहान, जिन्होंने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में अपने न्यायिक निर्णयों से विशेष पहचान बनाई है, अब झारखंड में अपनी भूमिका निभाएंगे।
    • जस्टिस एम.एस. रामचंद्र राव को एक सुलझे हुए और अनुशासित न्यायिक अधिकारी के तौर पर जाना जाता है, और अब वे त्रिपुरा हाईकोर्ट का नेतृत्व करेंगे।
    • जस्टिस विपुल पंचोली और जस्टिस आशुतोष कुमार दोनों ने पटना हाईकोर्ट में उल्लेखनीय सेवाएं दी हैं, और अब वे नए राज्यों में न्याय व्यवस्था को दिशा देने का कार्य करेंगे।

    यह न्यायिक पुनर्संरचना न केवल विभिन्न राज्यों के न्यायिक तंत्र को नई ऊर्जा देने का कार्य करेगी, बल्कि नीतिगत स्थिरता और दक्ष न्यायिक कार्यप्रणाली को भी बढ़ावा देगी।

  • झारखंड में बारिश का कहर: बंगाल की खाड़ी में बने सिस्टम से बदला मौसम

    – कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट.

    For The News Post4u.

    रांची: बंगाल की खाड़ी में बन रहे चक्रवातीय सिस्टम के कारण झारखंड में मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल चुका है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने राज्य के कई जिलों में 14 जुलाई से 16 जुलाई तक भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। कुछ जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट और कुछ के लिए येलो अलर्ट घोषित किया गया है। इस दौरान तेज हवाएं चलने, बिजली गिरने और जलजमाव की आशंका भी जताई गई है।

    किन जिलों में कब और कितनी बारिश का अनुमान?
    मौसम विभाग के अनुसार 15 जुलाई को उत्तरी और पश्चिमी झारखंड, खासकर पलामू, गढ़वा, चतरा जिलों में मूसलधार बारिश की संभावना जताई गई है।

    • कुछ क्षेत्रों में 120 से 200 मिमी तक बारिश हो सकती है।
    • अन्य जिलों में 70 से 110 मिमी तक वर्षा की संभावना है।

    कम दबाव का क्षेत्र बना कारण.
    मौसम विभाग का कहना है कि बंगाल की खाड़ी के उत्तर-पश्चिमी हिस्से और उत्तरी ओडिशा तथा पश्चिम बंगाल के तटीय इलाकों में एक कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है। इसका प्रभाव झारखंड के मौसम पर साफ दिखाई दे रहा है। इसके चलते 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। लोगों से अपील की गई है कि वे बिना जरूरी कारण के घरों से बाहर न निकलें और खुले स्थानों पर बिजली गिरने से बचें।

    अभी तक सामान्य से 61% अधिक वर्षा.
    राज्य में इस मानसून सीज़न में अब तक 61% अधिक वर्षा दर्ज की गई है। मौसम विभाग के मुताबिक, झारखंड में अब तक औसतन 510 मिमी बारिश हो चुकी है, जबकि सामान्य तौर पर इस समय तक सिर्फ 316 मिमी बारिश होती है। राजधानी रांची में हालात और भी ज्यादा चौंकाने वाले हैं—जहां सामान्य रूप से 327 मिमी बारिश होती है, वहां इस बार अब तक 779 मिमी बारिश दर्ज की गई है।

    जनता से अपील: अलर्ट का पालन करें, सतर्क रहें.
    प्रशासन और मौसम विभाग ने आमजन से अपील की है कि वे मौसम की ताज़ा जानकारी पर नज़र बनाए रखें, मोबाइल अलर्ट्स और रेडियो/टीवी की सूचनाओं पर ध्यान दें। निचले इलाकों में जलजमाव से बचने और बिजली की स्थिति पर सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।

    यह लगातार हो रही बारिश जहां किसानों के लिए लाभदायक साबित हो रही है, वहीं आम जनजीवन को इससे भारी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। यदि यह सिलसिला यूं ही जारी रहा, तो आने वाले दिनों में बाढ़ जैसी स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है।

     

  • सावन की पहली सोमवारी: भोलेनाथ की भक्ति में डूबा गिरिडीह

    – शिवालयों में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब

    बिनोद कुमार

    Edited by: परवेज़ आलम

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    गिरिडीह : सावन के पावन महीने की पहली सोमवारी को गिरिडीह जिले में शिवभक्ति की एक अद्भुत छवि देखने को मिली। शहर की फिजा “बम-बम भोले” और “हर-हर महादेव” के जयघोष से गूंज उठी। जिले के विभिन्न शिवालयों में सुबह होते ही श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। मंदिरों की ओर जाने वाले मार्गों पर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखी गईं, जो भगवान भोलेनाथ पर जलाभिषेक और पूजा-अर्चना के लिए घंटों से इंतज़ार कर रहे थे।

    शिवभक्ति में लीन दिखे श्रद्धालु.
    सुबह से ही श्रद्धालु अपने परिवार व मित्रों के साथ शिव मंदिरों का रुख करने लगे। पूरे जिले में शिवालयों की घंटियां बज रही थीं और भक्तों की भीड़ भक्तिभाव के साथ शिवलिंग पर बेलपत्र, दूध, गंगाजल और फूल चढ़ा रही थी। विशेष रूप से सदर प्रखंड के उदनाबाद स्थित प्रसिद्ध दुःखहरणनाथ मंदिर में अपार भीड़ उमड़ी। यहां की मान्यता है कि सावन में जो भी सच्चे मन से भोलेनाथ का पूजन करता है, उसकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

    पुजारी ने बताया सावन सोमवारी का महत्व.
    दुःखहरणनाथ मंदिर के पुजारी सर्वेश पांडेय ने बताया कि सावन मास शिव उपासना के लिए अत्यंत शुभ और प्रभावकारी माना जाता है। खासकर सोमवारी के दिन बेलपत्र, गंगाजल और दूध से भगवान शिव का अभिषेक करने से समस्त दोष समाप्त हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि इस पावन दिन पर यदि श्रद्धालु महामृत्युंजय मंत्र या गायत्री मंत्र का जाप करते हुए अभिषेक करें, तो जीवन के समस्त कष्टों का नाश होता है और मानसिक शांति प्राप्त होती है।

    सुरक्षा व्यवस्था रही चाक-चौबंद.
    सोमवारी को लेकर जिला प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था भी सख्त रखी गई थी। मंदिरों के बाहर पुलिस बल तैनात किए गए थे ताकि भीड़ में कोई अव्यवस्था न हो। नगर निगम की ओर से साफ-सफाई और जल की व्यवस्था भी की गई थी।

    भक्ति, आस्था और अनुशासन का अद्भुत संगम.
    सावन की पहली सोमवारी ने गिरिडीह में भक्ति, आस्था और अनुशासन का ऐसा अद्भुत संगम दिखाया, जो वर्षों तक लोगों की स्मृतियों में रहेगा। श्रद्धालुओं के चेहरों पर शिवभक्ति की चमक और मन में विश्वास का उजाला साफ नजर आ रहा था।

    यह दिन शिवभक्तों के लिए केवल पूजा-पाठ का नहीं, बल्कि आत्मिक शांति और प्रभु से जुड़ाव का भी पर्व बन गया।

  • सहारा इंडिया ज़मीन घोटाला: झारखंड CID की जांच में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर

    -दर्जनों शहरों में फंड ट्रांसफर और ज़मीनों की हेराफेरी का खुलासा.

    Edited By: परवेज़ आलम

    For The News Post4u.

    रांची: झारखंड CID ने सहारा समूह से जुड़े एक बड़े घोटाले का खुलासा किया है, जिसमें करोड़ों रुपये की जमीनें फर्जी कंपनियों और व्यक्तियों के माध्यम से बेच दी गईं। यह घोटाला सिर्फ झारखंड तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार कोलकाता, गुवाहाटी, पटना, लखनऊ और दिल्ली जैसे बड़े शहरों से भी जुड़ते दिख रहे हैं।

    जांच एजेंसी ने सहारा इंडिया के अधिकारी शैलेंद्र शुक्ला से पूछताछ की, जिसमें उन्होंने कबूल किया कि रांची और बोकारो जोन से नियमित रूप से बड़ी मात्रा में धनराशि कंपनी के मुख्यालय के निर्देश पर विभिन्न शहरों में ट्रांसफर की जाती थी। फंड ट्रांसफर के आदेश कंपनी के मंडल प्रमुख नीरज कुमार पाल और मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारी एस.बी. सिंह द्वारा दिए जाते थे।

    जमीन की हेराफेरी का तरीका और खुलासे:

    CID की रिपोर्ट के अनुसार, सहारा समूह ने फर्जी कंपनियों और व्यक्तियों के नाम पर जमीनों की बिक्री की। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ये जमीनें SEBI द्वारा तय मूल्यों से कई गुना कम कीमत पर बेची गईं, और इससे अर्जित राशि ना तो निवेशकों को वापस लौटाई गई और ना ही SEBI में जमा की गई। इसके बजाय यह पैसा निजी खर्चों में उपयोग किया गया।

    उदाहरण स्वरूप कुछ बड़े सौदे:

    • बेगूसराय में 28.39 एकड़ जमीन, जिसकी कीमत 2013 में 41.17 करोड़ रुपये आंकी गई थी, महज 2.15 करोड़ रुपये में बेच दी गई।
    • 3.77 एकड़ दूसरी जमीन को भी 3.36 करोड़ रुपये में बेचा गया, जबकि उस वक्त बाजार दर इससे कई गुना अधिक थी।
    • पटना में 65.28 एकड़ जमीन, जिसकी कीमत SEBI ने 44.80 करोड़ रुपये तय की थी, रणकौशल प्रताप सिंह नामक व्यक्ति को केवल 2.52 करोड़ रुपये में बेच दी गई। यहां तक कि सरकारी गाइडलाइन के अनुसार भी इस जमीन की कीमत 5.05 करोड़ रुपये थी।
    • बोकारो में 68.14 एकड़ जमीन, जिसकी अनुमानित कीमत 2013 में 61.33 करोड़ रुपये थी, आज भी सहारा इंडिया के नाम पर ही दर्ज है। इससे यह संकेत मिलता है कि कई सौदों के दस्तावेजों में भी अनियमितता हो सकती है।

    धनबाद में अस्पताल निर्माण पर सवाल:

    धनबाद के गोविंदपुर स्थित रेगुनी मौजा में सहारा की ज़मीन पर अस्पताल का निर्माण किया जा रहा है। CID इस प्रकरण की भी जांच कर रही है कि यह ज़मीन कैसे उपयोग में लाई गई, जबकि यह ज़मीन अब भी कंपनी के नाम पर दर्ज है।

    CID की कार्रवाई और सिफारिश:

    इस घोटाले को लेकर CID ने FIR दर्ज करने की सिफारिश की है। इसके साथ ही संबंधित विभागों से सभी आवश्यक दस्तावेज और सौदों की जानकारी तलब की गई है। पोस्टिंग अधिकारी, अंचल अधिकारी और थाना प्रभारियों से विशेष सहयोग की अपील की गई है ताकि जांच तेजी से पूरी हो सके।

    CID की टीम अब इस घोटाले से जुड़े हर छोटे-बड़े सौदे की जांच कर रही है। कई फर्जी कंपनियों के नाम और उनसे जुड़े व्यक्तियों की पहचान की जा रही है। जल्द ही इस मामले से जुड़े और बड़े नामों का पर्दाफाश होने की उम्मीद है।

    कहानी सिर्फ जमीन की नहीं है… कहानी है एक सुनियोजित लूट की।

    जांच में खुलासा हुआ है कि सहारा समूह ने झारखंड सहित कई राज्यों में जमीनों की बिक्री फर्जी नामों, फर्जी कंपनियों के ज़रिए की। और ये कोई मामूली गलती नहीं थी – ये एक ठोस योजना थी, जिसमें निवेशकों की कमाई को कौड़ियों के दाम बेचकर, उसकी रकम से अपनी जेबें भरी गईं।

    न निवेशकों को पैसा, न SEBI को हिसाब… तो गया कहाँ पैसा?

    CID की रिपोर्ट में साफ कहा गया है – इन जमीनों की बिक्री से जो पैसा आया, न वो सेबी में जमा हुआ, न निवेशकों को वापस मिला। वो पैसा गया कहाँ? निजी खर्चों में – मतलब किसी के बंगले बने, किसी के चुनाव खर्च निकले, किसी की गाड़ी चली।

    यह जांच सिर्फ कागज़ों में रह जाएगी या सचमुच कोई बड़ी कार्रवाई होगी?
    क्या जिन लोगों ने भरोसे के नाम पर हजारों लोगों की कमाई लूटी, वो जेल में होंगे या फिर अगला चुनाव लड़ेंगे?

     

  • झारखंड में भारी बारिश की चेतावनी, 13 से 15 जुलाई तक येलो अलर्ट जारी

    – मौसम विभाग ने दी सतर्क रहने की सलाह

    Edited By: परवेज़ आलम

    For The News Post4u.

    रांची:  झारखंड में 13 से 15 जुलाई के बीच भारी बारिश की संभावना को देखते हुए भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने राज्य के कई हिस्सों के लिए ‘येलो अलर्ट’ जारी किया है। मौसम विभाग ने लोगों को अगले कुछ दिनों तक विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है।

    छह जिलों में येलो अलर्ट.

    IMD के अनुसार, 13 जुलाई को गुमला, खूंटी, सिमडेगा, सरायकेला-खरसावां, पूर्वी सिंहभूम और पश्चिमी सिंहभूम में भारी बारिश की आशंका है। इन जिलों के निवासियों को निचले इलाकों में जलभराव और वज्रपात से सतर्क रहने की हिदायत दी गई है।

    झारखंड के मध्य और पूर्वी जिलों पर असर.

    14 जुलाई को गिरिडीह, बोकारो, धनबाद, देवघर, दुमका, जामताड़ा, सरायकेला-खरसावां, पूर्वी सिंहभूम और पश्चिमी सिंहभूम में येलो अलर्ट लागू रहेगा। इन क्षेत्रों में लगातार बारिश और आंधी-तूफान की आशंका जताई गई है।

    उत्तर-पूर्वी जिलों में भारी बारिश की संभावना

    मौसम विभाग का पूर्वानुमान है कि 15 जुलाई को देवघर, जामताड़ा, दुमका, पाकुड़, गोड्डा और साहेबगंज में भारी बारिश हो सकती है। स्थानीय प्रशासन को अलर्ट रहने और राहत इंतजाम दुरुस्त रखने को कहा गया है।

    औसत से 69% अधिक वर्षा

    रांची मौसम विज्ञान केंद्र के उपनिदेशक अभिषेक आनंद के मुताबिक, “1 जून से 12 जुलाई के बीच राज्य में 499.6 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि सामान्य औसत 296.4 मिमी होती है। यह सामान्य से लगभग 69 प्रतिशत अधिक है।”

    इन जिलों में रिकॉर्डतोड़ बारिश

    • पूर्वी सिंहभूम: सामान्य से 157% अधिक वर्षा
    • रांची: सामान्य से 150% अधिक बारिश
    • सरायकेला-खरसावां: 130% ज्यादा वर्षा

    इन पांच जिलों में बारिश में कमी.

    हालांकि झारखंड के देवघर, गढ़वा, गोड्डा, साहेबगंज और पाकुड़ जिलों में अब तक 21% से 29% तक कम वर्षा दर्ज की गई है, जिससे वहां खेती और जलस्तर को लेकर चिंता जताई जा रही है।

    IMD की लोगों को सलाह.

    • बारिश और वज्रपात के दौरान खुले स्थानों से दूर रहें।
    • बिजली के खंभों और पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचें।
    • यात्रा करने से पहले मौसम अपडेट चेक करें।

    मौसम विभाग की मानें तो झारखंड में अगले तीन दिन मूसलधार बारिश और तेज हवाओं के साथ चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। ऐसे में सतर्कता ही सुरक्षा का सबसे मजबूत उपाय है।

  • पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की बैठक मे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति मे हेमंत सोरेन ने गिनाई राज्य की पीड़ा

    Edited By: परवेज़ आलम.

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    रांची की वह दोपहर इतिहास के दस्तावेज़ों में दर्ज होगी। जब पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की 27 वीं बैठक के मंच पर झारखंड की जमीन से उठी आवाज़ ने राष्ट्रीय सियासत के गलियारों में एक नई दस्तक दी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने न केवल अपने प्रदेश की पीड़ा को शब्दों में पिरोया, बल्कि दिल्ली को यह भी बताया कि देश के संसाधनों पर सिर्फ़ दिल्ली और मुंबई का हक नहीं है। जंगलों, पहाड़ों और आदिवासियों की भी साझेदारी है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में आयोजित पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की बैठक मे झारखंड राज्य की समस्याओं, विकास की जरूरतों और लंबित मामलों को विस्तार से रखा गया । मुख्यमंत्री ने झारखंड की ओर से 31 अहम मुद्दों को उठाते हुए राज्य के विकास के लिए केंद्र सरकार से सहयोग की अपेक्षा जताई। बैठक में बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और झारखंड के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया।

    कोयले की राख में दबे करोड़ों के सवाल.

    सबसे बड़ा प्रश्न था कोयला कंपनियों के ऊपर झारखंड सरकार का 1.40 लाख करोड़ रुपये का बकाया। न कोई ब्याज, न कोई माफी – सिर्फ़ मांग। हेमंत सोरेन ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के सामने सवाल रखा कि जब कोयले की खुदाई झारखंड की धरती से होती है, तो मुनाफा दिल्ली और कोलकाता के बहीखातों में क्यों दर्ज होता है?

    212 अस्पताल और आयुष्मान भारत की ठहरी साँसे.

    झारखंड के 212 निजी अस्पताल आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत इलाज तो कर रहे हैं, लेकिन भुगतान अटका हुआ है। वजह ? ईडी की जांच। हेमंत सोरेन ने दो टूक कहा – “भ्रष्टाचार की जांच होनी चाहिए, लेकिन मरीजों की जान बचाने वालों को सज़ा क्यों ?” इस पर अमित शाह ने जांच तेज़ करने और भुगतान सुनिश्चित करने का भरोसा दिलाया।

    मसानजोर डैम: पानी वहीं, प्यासा झारखंड.

    मयूराक्षी नदी पर बना मसानजोर डैम। पूरा सबमर्ज एरिया झारखंड में, लेकिन सिंचाई का लाभ बंगाल को। यह 1949 के समझौते की असंतुलित विरासत है। झारखंड को जहां मात्र 53 एमसीएम पानी मिलता है, जरूरत है 457 एमसीएम की। सोरेन ने मांग की – डैम का नियंत्रण साझा हो और जलस्तर 378 फीट से नीचे न जाने दिया जाए।

    “सहकारी संघवाद” का असली मतलब.

    मुख्यमंत्री ने मंच से एक स्पष्ट संदेश दिया – “यह परिषद केवल चर्चा का मंच नहीं, समाधान का प्रयोगशाला होनी चाहिए।” उन्होंने कहा कि झारखंड, बिहार, बंगाल और ओडिशा का साझा अतीत, साझा समस्याएं हैं, और इसलिए समाधान भी मिलकर ही होंगे।

    प्रमुख मांगें – हर क्षेत्र, हर वर्ग की आवाज़.

    हेमंत सोरेन की 360 डिग्री अपील में हर तबके की झलक थी:

    • खनिज संसाधनों का न्यायपूर्ण उपयोग: DMFT नीति में संशोधन, कोल कंपनियों द्वारा बकाया भुगतान और बंद खदानों का माइन क्लोजर।
    • महिलाओं के लिए “मुख्यमंत्री मईयां सम्मान योजना” के तहत 2500 रुपये मासिक सहायता।
    • शिक्षा में सामाजिक न्याय: वंचित वर्ग के छात्रों के लिए छात्रवृत्ति, जनजातीय विश्वविद्यालय, उच्च शिक्षा में नवाचार और पेटेंट सुविधा।
    • स्वास्थ्य व्यवस्था: RIMS-2 और छह नए मेडिकल कॉलेजों हेतु केंद्र की आर्थिक सहायता।
    • यातायात और संपर्क: रांची मेट्रो परियोजना, साहेबगंज एयर कार्गो हब, पूर्वोत्तर को जोड़ने वाले पुलों व एक्सप्रेसवे का प्रस्ताव।
    • मनरेगा में मजदूरी दर बढ़ाकर 405 रुपये करने की मांग।
    • कुपोषण और आंगनबाड़ी की समस्याओं पर केंद्र का ध्यान।
    • COMFED और होटल अशोक जैसे बिहार-झारखंड के साझा आस्तियों का विभाजन।

    एक मुख्यमंत्री की भूमिका से आगे.

    हेमंत सोरेन ने अपनी बात न किसी तंज में रखी, न किसी घमंड में। नारेबाज़ी नहीं, तथ्य, तर्क और अनुभव के साथ झारखंड की मांगों को मंच पर उतारा। उन्होंने यह जता दिया कि एक राज्य का मुख्यमंत्री सिर्फ़ मुख्यमंत्री नहीं होता – वह उस भूभाग की आत्मा, चेतना और आवाज़ होता है।  झारखंड ने सिर्फ़ अपना पक्ष नहीं रखा, बल्कि केंद्र और पड़ोसी राज्यों के सामने एक आइना रखा है। सवाल यह नहीं कि झारखंड क्या मांग रहा है, सवाल यह है कि देश की नीति में झारखंड की कितनी हिस्सेदारी है। और जब तक इस हिस्सेदारी का हिसाब नहीं चुकता, तब तक सहकारी संघवाद अधूरा रहेगा।