Category: Jharkhand

  • झारखंड में नगर निकाय चुनाव का रास्ता साफ, विधानसभा चुनाव की वोटर लिस्ट से होगी वोटिंग

    झारखंड में नगर निकाय चुनाव का रास्ता साफ, हाईकोर्ट ने दिया संकेत

    झारखंड में नगर निकाय चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने के संकेत मिल रहे हैं। शुक्रवार को झारखंड हाईकोर्ट में जस्टिस आनंद सेन की अदालत ने इस मामले में दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई की। अदालत ने प्रार्थी, राज्य सरकार, राज्य निर्वाचन आयोग और भारत निर्वाचन आयोग की दलीलें सुनीं। सुनवाई के दौरान भारत निर्वाचन आयोग ने अपने शपथ पत्र में बताया कि झारखंड विधानसभा चुनाव में उपयोग की गई मतदाता सूची ही अद्यतन (अपडेटेड) सूची है, जिसके आधार पर नगर निकाय चुनाव कराए जा सकते हैं।

    राज्य निर्वाचन आयोग ने भी कोर्ट को जानकारी दी कि उसे भारत निर्वाचन आयोग से आवश्यक मतदाता सूची प्राप्त हो चुकी है और अब चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। आयोग ने बताया कि वार्डवार मतदाता सूची तैयार करने और अधिसूचना जारी करने में लगभग 75 दिन का समय लगेगा। सभी पक्षों की सुनवाई के बाद अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 12 सप्ताह बाद निर्धारित करने का निर्देश दिया।

    सुनवाई के दौरान न्यायाधीश आनंद सेन की अदालत ने स्पष्ट किया कि नगर निकाय चुनाव कराने में अब कोई तकनीकी बाधा नहीं है। हाईकोर्ट के रुख को देखते हुए संभावना जताई जा रही है कि चुनाव की अधिसूचना अप्रैल के अंत तक जारी हो सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए राज्य निर्वाचन आयोग ने शहरी निकाय चुनाव की तैयारियां तेज कर दी हैं। आयोग अब भारत निर्वाचन आयोग से प्राप्त मतदाता सूची को वार्डवार विभाजित करने और वार्डों के गठन की प्रक्रिया पूरी करने में जुटा है।

    गौरतलब है कि प्रार्थी रोशनी खलखो व अन्य ने अवमानना याचिका दायर कर अदालत के पूर्व आदेश का पालन सुनिश्चित करने की मांग की थी। हाईकोर्ट की एकल पीठ ने 4 जनवरी 2024 को आदेश दिया था कि तीन सप्ताह के भीतर निकाय चुनाव की अधिसूचना जारी की जाए। हालांकि, पिछली सुनवाई में राज्य सरकार ने चुनाव कराने के लिए चार माह का समय मांगा था। अब, अदालत के सख्त रुख के बाद नगर निकाय चुनाव जल्द होने की संभावना प्रबल हो गई है।

  • डिजिटल अरेस्ट का शिकार होते पढ़े-लिखे लोग, युवती के साथ हुआ 24 घंटे का साइबर टॉर्चर

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट ……………

    हर दिन मोबाइल पर गृह मंत्रालय द्वारा जारी एडवाइजरी के तहत डिजिटल अरेस्ट को लेकर जागरूकता कॉलर ट्यून सुनाई देती है। अखबारों और विभिन्न कार्यक्रमों में भी इसके बारे में चर्चा होती रहती है। बावजूद इसके, पढ़े-लिखे लोग भी साइबर अपराधियों के जाल में फंसते जा रहे हैं। ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला देवघर में सामने आया, जहां पीजी तक पढ़ाई कर चुकी एक युवती को डिजिटल अरेस्ट का शिकार बनाया गया।

    कैसे हुआ साइबर क्राइम?

    शुक्रवार को देवघर के विलियम्स टाउन इलाके की एक युवती को ठगों ने सीबीआई अधिकारी बनकर वीडियो कॉल पर 24 घंटे तक कैद रखा। अपराधी उसे लगातार मानसिक यातनाएं देते रहे और हर उस निर्देश का पालन करवाया, जो उन्होंने दिया। इस दौरान युवती सोई, खाई, पी और यहां तक कि अपने पिता से बात कराकर बैंक अकाउंट की डिटेल्स भी साझा कर दी।

    सौभाग्य से, वह ठगी से बच गई, लेकिन जब वह पुलिस थाने शिकायत दर्ज कराने पहुंची, तो उसका डर उसके कांपते हाथों और सहमे हुए चेहरे पर साफ झलक रहा था।

    “तुम्हारे खिलाफ केस दर्ज है” – एक फोन कॉल जिसने जिंदगी बदल दी!

    घटना 6 फरवरी की है, जब युवती की सामान्य दिनचर्या चल रही थी। तभी अचानक एक अनजान नंबर से कॉल आया। कॉलर ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताते हुए कहा कि “तुम्हारे खिलाफ सोशल मीडिया पर अश्लील तस्वीरें पोस्ट करने का केस दर्ज हुआ है!”

    जब युवती ने यह कहकर इनकार किया कि “मैंने ऐसा कुछ नहीं किया,” तो कॉलर ने उसे एक सीनियर अधिकारी से बात करवाई।

    इसके बाद…

    🔹 फोन पर ही एक ‘फर्जी अरेस्ट वारंट‘ भेज दिया गया।
    🔹 वीडियो कॉल पर युवती को कैद कर लिया गया।
    🔹 कहा गया कि ‘तुम्हारे घर की निगरानी की जा रही है, बाहर मत निकलना!‘
    🔹 डराने के लिए वर्दी में फोटो भी दिखाया गया।
    🔹 “अगर किसी को बताया, तो पूरे परिवार की जान खतरे में पड़ जाएगी” – धमकी दी गई।

    24 घंटे तक साइबर टॉर्चर – पिता तक को झांसे में लिया!

    गुरुवार से शुक्रवार तक युवती पूरी तरह ठगों के जाल में फंसी रही। इस दौरान उसने किसी से संपर्क करने की हिम्मत नहीं की। जब सुबह उसने बड़ी मुश्किल से अपने पिता से बात करने की गुहार लगाई, तो अपराधियों ने पिता को भी अपने जाल में फंसा लिया।

    पिता से एक बैंक अकाउंट की डिटेल्स भी ले ली गईं। लेकिन इस बीच युवती के भाई को इस घटना की जानकारी हो गई। उसने अपने दोस्त को युवती के घर भेजा, जिसने किसी तरह समझा-बुझाकर युवती को साइबर थाना जाने के लिए तैयार किया।

    अगर युवती समय रहते पुलिस के पास नहीं पहुंचती, तो वह गलत कदम उठा सकती थी।

    क्या है डिजिटल अरेस्ट?

    👉 डिजिटल अरेस्ट भारतीय कानून में मान्य नहीं है।
    👉 यह साइबर क्राइम का नया तरीका है।
    👉 अपराधी सोशल मीडिया प्रोफाइल से जानकारी चुराते हैं और फिर पीड़ित को मानसिक रूप से प्रताड़ित करते हैं।
    👉 गिरफ्तारी का डर दिखाकर वीडियो कॉल के जरिए ‘घर में नजरबंद‘ कर देते हैं।
    👉 बैकग्राउंड में पुलिस स्टेशन, सीबीआई ऑफिस जैसी तस्वीरें दिखाकर पीड़ित को भ्रमित करते हैं।
    👉 किसी ऐप को डाउनलोड कराकर या डिजिटल फॉर्म भरवाकर पैसे ट्रांसफर करवाते हैं।

    कैसे बचें डिजिटल अरेस्ट से?

    ✔️ अज्ञात नंबरों से आए कॉल पर सतर्क रहें।
    ✔️ किसी भी फर्जी अरेस्ट वारंट या केस के नाम पर डरें नहीं।
    ✔️ अगर कोई आपको डराकर बैंक डिटेल्स मांग रहा है, तो तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर संपर्क करें।
    ✔️ सोशल मीडिया पर अपनी निजी जानकारी, फोटो और नंबर शेयर न करें।
    ✔️ अगर कोई वीडियो कॉल पर आपको ‘कैद‘ कर रहा है, तो तुरंत किसी भरोसेमंद व्यक्ति को जानकारी दें।

    डिजिटल दुनिया में सतर्क रहना ही सुरक्षा है!

    देवघर की यह घटना सिर्फ एक चेतावनी नहीं, बल्कि सबक है कि साइबर ठग कितने शातिर हो सकते हैं। पढ़े-लिखे लोग भी इन अपराधियों के जाल में फंस सकते हैं। इसलिए जरूरी है कि सतर्क रहें, जागरूक रहें और जरूरत पड़ने पर तुरंत पुलिस की मदद लें!

  • मैट्रिक और इंटर के एडमिट कार्ड आज से जारी,7 लाख से ज्यादा छात्र परीक्षा में होंगे शामिल

    झारखंड बोर्ड की मैट्रिक और इंटरमीडिएट परीक्षाएं 11 फरवरी 2025 से

    झारखंड एकेडमिक काउंसिल (JAC) ने घोषणा की है कि मैट्रिक और इंटरमीडिएट परीक्षाएं निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 11 फरवरी 2025 से शुरू होंगी। परिषद ने सभी स्कूलों के प्रधानाचार्यों को निर्देश दिया है कि वे छात्रों के एडमिट कार्ड परिषद की आधिकारिक वेबसाइट से डाउनलोड कर 11 फरवरी से पहले उन्हें वितरित करें। परीक्षा में बैठने के लिए एडमिट कार्ड अनिवार्य होगा, और बिना एडमिट कार्ड के किसी भी छात्र को परीक्षा देने की अनुमति नहीं दी जाएगी। ऐसे में स्कूल प्रबंधन की यह जिम्मेदारी होगी कि सभी छात्रों को समय पर एडमिट कार्ड उपलब्ध कराए जाएं।

    इस बीच, वित्त रहित संघर्ष मोर्चा ने सुझाव दिया है कि यदि एडमिट कार्ड में कोई त्रुटि पाई जाती है, तो उसे सुधारने का अधिकार स्कूल प्रधानाचार्यों को दिया जाना चाहिए। इससे छात्रों को अनावश्यक परेशानियों से बचाया जा सकेगा और समय की भी बचत होगी।

    गौरतलब है कि इस वर्ष मैट्रिक परीक्षा में 4,11,536 छात्र और इंटरमीडिएट परीक्षा में 3,31,616 छात्र शामिल होंगे। कुल मिलाकर, लगभग 7.83 लाख छात्र इन परीक्षाओं में भाग लेंगे।

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  • रांची में फिर बर्ड फ्लू का प्रकोप, बिरसा वेटनरी कॉलेज में H5N1 की पुष्टि

    रांची में एक बार फिर बर्ड फ्लू का खतरा मंडरा रहा है। बिरसा वेटनरी कॉलेज के पोल्ट्री फार्म में मुर्गों में एच5एन1 एवियन इन्फ्लूएंजा वायरस की पुष्टि हुई है। भोपाल स्थित आईसीएआर-एनएएसएडीइएच की जांच में 6 फरवरी को यह संक्रमण पाया गया। इस पर केंद्र सरकार के मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय ने झारखंड के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर एहतियाती कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। अब प्रशासन की ओर से संक्रमण को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।10 किमी के दायरे में रखी जाएगी सख्त निगरानी.

    संक्रमण की पुष्टि के बाद एक से दस किलोमीटर के दायरे में विशेष निगरानी रखी जाएगी। वन क्षेत्रों में भी पक्षियों के नमूने इकट्ठे किए जाएंगे ताकि संक्रमण का

    प्रसार रोका जा सके। आरआरटी टीम (रैपिड रिस्पांस टीम) बिरसा वेटनरी कॉलेज के शेष मुर्गों का वैज्ञानिक तरीके से निपटारा करेगी। साथ ही, संक्रमित क्षेत्र की पूरी तरह से सफाई और सैनिटाइजेशन किया जाएगा।

    इसके अलावा, संक्रमण केंद्र से 1 किलोमीटर के दायरे में कुक्कुट पालन सर्वेक्षण किया जाएगा। इस काम के लिए जिला प्रशासन की सहायता ली जाएगी। पूरे इलाके का डिजिटल नक्शा तैयार किया जाएगा, जिसमें एक से दस किलोमीटर तक का क्षेत्र सर्विलांस जोन घोषित होगा।

    सैनिटाइजेशन और नष्ट किए जाएंगे संक्रमित पक्षी.

    बर्ड फ्लू की पुष्टि होते ही स्वास्थ्य विभाग की टीमें एक्टिव हो गईं। संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए संबंधित इलाके को सैनिटाइज करना शुरू कर दिया गया है।

    शनिवार को प्रशासन द्वारा एक किलोमीटर के दायरे में आने वाले सभी पोल्ट्री फार्म के पक्षियों को मार दिया जाएगा और उसके बाद पूरे क्षेत्र को अच्छी तरह से सैनिटाइज किया जाएगा। यह कदम इसलिए उठाया जा रहा है ताकि संक्रमण को अन्य क्षेत्रों तक फैलने से रोका जा सके।

    बर्ड फ्लू: सतर्कता बेहद जरूरी.

    बर्ड फ्लू एक गंभीर बीमारी है, जो सिर्फ पक्षियों तक ही सीमित नहीं रहती बल्कि इंसानों तक भी पहुंच सकती है। इसलिए, एहतियात बरतना बेहद जरूरी है।

    👉 अगर आप किसी मरे हुए या बीमार पक्षी को देखें, तो उसे हाथ न लगाएं और तुरंत प्रशासन को सूचना दें।
    👉 अपने हाथों को बार-बार साबुन और पानी से धोएं।
    👉 कच्चा मांस और अंडे अच्छी तरह पका कर ही खाएं।
    👉 संक्रमित इलाके में जाने से बचें और पूरी सतर्कता बरतें।

    बर्ड फ्लू के लक्षणों में बुखार, खांसी, गले में खराश, सांस लेने में दिक्कत, मांसपेशियों में दर्द और थकान शामिल हैं। अगर इनमें से कोई भी लक्षण महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

    सरकार और प्रशासन मुस्तैद, जनता भी सतर्क रहे.

    सरकार और स्थानीय प्रशासन बर्ड फ्लू को नियंत्रित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए विशेष निगरानी टीमों को तैनात किया गया है।

    सावधानी बरतें, सतर्क रहें और अफवाहों से बचें। याद रखें, सतर्कता ही बचाव है!

  • झारखंड से कोयला आपूर्ति रोक दी तो पूरा देश अंधकार में डूब जाएगा-हेमंत सोरेन

    झारखंड के मुख्यमंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने पार्टी के 53वें स्थापना दिवस पर केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कोयला रॉयल्टी के बकाया 1.36 लाख करोड़ रुपये की वसूली के लिए यदि जरूरी हुआ, तो राज्य में कोयला खदानों को बंद करने से भी पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे मे कहा कि अगर झारखंड से कोयला आपूर्ति रोक दी गई, तो पूरा देश अंधकार में डूब जाएगा।

    धनबाद के गोल्फ मैदान में आयोजित झामुमो के 53वें स्थापना दिवस समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल ही में कोयला मंत्री रांची आए थे। हमने उनसे स्पष्ट कर दिया कि झारखंड में चल रही कोयला खदानों की जमीन के बदले मुआवजा राज्य सरकार द्वारा निर्धारित दर पर ही दिया जाना चाहिए। यदि यह शर्त मंजूर नहीं है, तो केंद्र सरकार कोयला खदानों को बंद कर सकती है।

    हेमंत सोरेन ने कहा, “हम सत्ता में हैं, लेकिन अपने अधिकारों के लिए लड़ना जानते हैं। मांगने से अधिकार नहीं मिलता, लड़ना पड़ता है। अभी तो हक मांगना शुरू किया है। यहां की जिन जमीनों से कोयला निकाला जा चुका है, उस जमीन को भी वापस लेंगे।”

    भ्रष्टाचार के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में बीडीओ और सीओ कार्यालय बिचौलियों के अड्डे बन गए हैं, विशेषकर अंचल कार्यालयों में जमीन दलाल सक्रिय हैं। सरकार इस पर कड़ी नजर रखे हुए है और जल्द ही कुछ भ्रष्ट अंचल अधिकारियों को बर्खास्त किया जाएगा।

    महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना के तहत पहली बार पूरे देश में एक साथ 50 लाख से अधिक महिलाओं के खाते में राशि भेजी जा रही है। हेमंत सोरेन ने महिलाओं से अपील की कि इस राशि का सदुपयोग करें, छोटी-छोटी बचत कर गाय खरीद सकती हैं, जिससे वे आर्थिक रूप से स्वावलंबी बन सकें।

    गांडेय की विधायक कल्पना सोरेन ने कहा कि केंद्र के पास 56 इंच वाले हैं, उनसे निबटने के लिए हमारे पास 56 विधायक हैं, जो हर तरह से सक्षम हैं। उन्होंने कहा कि हेमंत सरकार ने विपरीत परिस्थितियों में भी बेहतर कार्य किया है।

    इस अवसर पर राज्य के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री हफीजुल हसन, पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री योगेंद्र प्रसाद महतो, विधायक मथुरा महतो और उमाकांत रजक सहित कई अन्य नेता उपस्थित थे।

  • JMM : संघर्ष से सत्ता तक, 53 साल का सफर

    धनबाद मे स्थापना दिवस आज 

    परवेज़ आलम की खास रिपोर्ट ………..

    झारखंड की राजनीति में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) का नाम सिर्फ एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि संघर्ष और सफलता की कहानी है। 4 फरवरी 1972 को धनबाद के गोल्फ ग्राउंड में हुई एक ऐतिहासिक रैली के दौरान इस पार्टी की नींव रखी गई थी।  53 साल बाद, झामुमो न केवल सत्ता का केंद्र बना हुआ है, बल्कि झारखंड की पहचान और राजनीतिक धारा को भी निर्धारित कर रहा है।

    34 वर्षों से शिबू सोरेन के हाथों में झामुमो की बागडोर।

    पार्टी के संस्थापक शिबू सोरेन पिछले 34 वर्षों से झामुमो के अध्यक्ष हैं। यह भारतीय राजनीति में एक दुर्लभ घटना है कि एक ही व्यक्ति इतने लंबे समय तक किसी पार्टी की कमान संभाले रहे। 2021 में हुए अधिवेशन में उन्हें 10वीं बार अध्यक्ष और हेमंत सोरेन को तीसरी बार कार्यकारी अध्यक्ष चुना गया।

    शिबू सोरेन: उम्र भले बढ़ी, पर प्रभाव बरकरार।

    हालांकि, बढ़ती उम्र के कारण शिबू सोरेन की सक्रियता कम हो गई है, लेकिन वह आज भी झारखंड की राजनीति के अहम किरदार हैं। जब तक वह हैं, झामुमो की अध्यक्षता को लेकर कोई दूसरी चर्चा नहीं हो सकती। उनके बाद उनके बेटे हेमंत सोरेन पार्टी के सबसे बड़े नेता बनकर उभरे हैं और बीते एक दशक से कार्यकारी अध्यक्ष की भूमिका निभा रहे हैं।

    पांच बार सत्ता में झामुमो, हर बार सोरेन परिवार का दबदबा।

    15 नवंबर 2000 को झारखंड अलग राज्य बनने के बाद, झामुमो अब तक पांच बार सत्ता में आ चुका है। दिलचस्प बात यह है कि हर बार मुख्यमंत्री सोरेन परिवार से ही बना।

    • शिबू सोरेन ने 2005, 2008 और 2009 में मुख्यमंत्री पद संभाला।
    • हेमंत सोरेन ने 2013-14 में पहली बार और फिर 2019 से लगातार सत्ता में बने हुए हैं।

    हालांकि, झामुमो की चार सरकारें अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सकीं। कुछ महज़ कुछ दिन टिकीं, कुछ 6 महीने तो कुछ 14 महीने चलीं।

    2019 और 2024 में झामुमो की ऐतिहासिक जीत।

    2019 के चुनाव में हेमंत सोरेन की अगुवाई में झामुमो ने 81 में से 30 सीटों पर जीत हासिल कर कांग्रेस और आरजेडी के साथ सरकार बनाई।

    2024 में झामुमो ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया।

    • पार्टी ने 34 सीटों पर जीत दर्ज की।
    • गठबंधन ने 81 में से 56 सीटें जीतकर लगातार दूसरी बार सत्ता में वापसी की।

    संघर्ष के दिन: जब शिबू सोरेन को अंडरग्राउंड होना पड़ा।

    शिबू सोरेन जब 12 साल के थे, तब सूदखोरों ने उनके पिता सोबरन मांझी की हत्या कर दी। इसके बाद उन्होंने महाजनों और शोषण के खिलाफ संघर्ष शुरू किया, जिसने कई बार हिंसक रूप ले लिया। वह कई बार अंडरग्राउंड भी रहे। धनबाद के जिलाधिकारी के.बी. सक्सेना और कांग्रेस नेता ज्ञानरंजन की पहल से उन्होंने आत्मसमर्पण किया और दो महीने जेल में बिताने के बाद बाहर आए।

    ‘सोनोत संताल’ और ‘शिवाजी समाज’ के विलय से बनी झामुमो।

    1972 में सोनोत संताल और विनोद बिहारी महतो के नेतृत्व वाले शिवाजी समाज के विलय से झारखंड मुक्ति मोर्चा का गठन हुआ। इसमें ट्रेड यूनियन लीडर ए.के. राय की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

    • विनोद बिहारी महतो पार्टी के पहले अध्यक्ष बने।
    • शिबू सोरेन पहले महासचिव बने।

    1980 में पहली बार सांसद बने शिबू सोरेन।

    1980 में शिबू सोरेन दुमका से सांसद चुने गए। इसी साल, बिहार विधानसभा चुनाव में पार्टी ने संथाल परगना की 18 में से 9 सीटें जीतकर पहली बार अपने मजबूत राजनीतिक वजूद का एहसास कराया।

    1991 में विनोद बिहारी महतो के निधन के बाद शिबू सोरेन पार्टी के अध्यक्ष बने और तब से पार्टी की कमान उन्हीं के हाथों में है।

    हेमंत सोरेन की नई लीडरशिप।

    2015 में जमशेदपुर में हुए अधिवेशन में हेमंत सोरेन को पहली बार कार्यकारी अध्यक्ष चुना गया। इसके बाद झामुमो एक नए दौर में प्रवेश कर गया और आज वह झारखंड की सबसे प्रभावशाली राजनीतिक ताकत बना हुआ है।

    संघर्ष से सत्ता तक का सफर जारी…

    झामुमो की यह यात्रा सिर्फ सत्ता प्राप्ति तक सीमित नहीं है। यह झारखंड की आत्मा से जुड़ा आंदोलन है, जिसने झारखंड के लोगों को पहचान, हक और नेतृत्व देने का काम किया है। अब सवाल यह है कि पार्टी आने वाले वर्षों में अपनी सत्ता और सिद्धांतों के बीच कैसे संतुलन बनाए रखती है,यह वक्त बताएगा।

     

  • सहारा इंडिया: निवेशकों के 40 हजार करोड़ हड़पने का आरोप

    विदेश जाने पर रोक की मांग

    रांची: सहारा इंडिया के खिलाफ निवेशकों की परिपक्वता राशि न लौटाने का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। झारखंड पुलिस प्रमुख को लिखे गए पत्र में विश्व भारती जनसेना संस्थान ने मांग की है कि सहारा इंडिया के निदेशकों के पासपोर्ट ब्लॉक किए जाएं और उन्हें विदेश जाने से रोका जाए।

    निवेशकों के पैसे हड़पने का आरोप।
    बता दें कि झारखंड के अलग-अलग थानों में सहारा इंडिया के खिलाफ कई प्राथमिकियां दर्ज हैं, जिनमें निवेशकों के 40 करोड़ रुपये के भुगतान का मामला शामिल है। इसके अलावा, 40 हजार करोड़ रुपये की परिपक्वता राशि हड़पने की शिकायतें भी दर्ज कराई गई हैं। जनसेना संस्थान ने पत्र लिखकर कहा है कि सहारा इंडिया के खिलाफ जांच तेजी से आगे बढ़ रही है, जिससे उनके अधिकारियों में हड़कंप मचा हुआ है।

    विदेश भाग सकते हैं आरोपी अधिकारी।
    पत्र  में आशंका जताई गई है कि जिस तरह से जांच की गति तेज हो रही है, सहारा इंडिया के अधिकारी देश छोड़ सकते हैं। सुब्रत राय के निधन के बाद भी उनके दोनों पुत्र अब तक भारत नहीं लौटे हैं। इसी तरह, मामले में नामजद अन्य अधिकारी भी विदेश भाग सकते हैं। इसलिए, जब तक जांच पूरी न हो जाए, इन्हें देश छोड़ने से रोका जाए।

    15 दिन का अल्टीमेटम, फिर होगी गिरफ्तारी।
    डीजीपी की अध्यक्षता में 24 जनवरी को हुई बैठक में सहारा इंडिया के अधिकारियों को झारखंड के निवेशकों को उनकी परिपक्वता राशि लौटाने के लिए 15 दिनों का समय दिया गया था। समय सीमा समाप्त होने के बाद सभी निदेशकों की गिरफ्तारी की चेतावनी दी गई है।

    इन अधिकारियों पर केस दर्ज।
    प्राथमिकी में सहारा इंडिया के नौ निदेशकों के नाम शामिल हैं:

    1. स्वप्न राय (वाइस चेयरमैन)
    2. जयब्रत राय (डिप्टी चेयरमैन)
    3. सुशांतो राय (एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर)
    4. सिमांतो राय (एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर)
    5. ओमप्रकाश श्रीवास्तव (डिप्टी मैनेजिंग वर्कर)
    6. देवेंद्र कुमार श्रीवास्तव (सहारा इंडिया को-ऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड के चेयरमैन)
    7. नीरज कुमार पाल (रांची परिक्षेत्र प्रमुख सह निदेशक)
    8. सुंदर झा (पूर्व जोनल मैनेजर)
    9. संजीव कुमार (जोनल मैनेजर, रांची)

    क्राइम ब्रांच के नोटिस पर नहीं पहुंचे अधिकारी।
    क्राइम ब्रांच रांची ने इस मामले में 31 जनवरी को दो अधिकारियों को तलब किया था। इसमें सहारा इंडिया के निदेशक सह रांची टेरिटरी प्रमुख नीरज कुमार पाल और डिप्टी मैनेजर शैलेंद्र शुक्ला को बुलाया गया था। सूत्रों के अनुसार, शैलेंद्र शुक्ला रांची पहुंचे, लेकिन नीरज पाल ने पत्र लिखकर मां की तबीयत खराब होने का हवाला देते हुए अतिरिक्त समय की मांग की।

    निवेशकों के साथ हुआ सबसे बड़ा धोखा।
    यह मामला सहारा इंडिया के सबसे बड़े वित्तीय घोटालों में से एक माना जा रहा है। वर्ष 2009 में यह घोटाला तब सामने आया जब कंपनी ने निवेशकों को झूठे वादे और भ्रामक दावे करके भारी भरकम रकम जुटाई। निवेशकों को ऊंचे रिटर्न का सपना दिखाया गया, लेकिन हकीकत में उनकी गाढ़ी कमाई हड़प ली गई।

    अब देखना यह होगा कि झारखंड पुलिस की सख्ती के बाद सहारा इंडिया के अधिकारी कानून की गिरफ्त में आते हैं या फिर कोई नया दांव खेलते हैं।

  • झारखंड: गिरिडीह को मिलेगा मेडिकल कॉलेज !

    रांची :  झारखंड सरकार के आगामी बजट की तैयारियां अब अपने अंतिम दौर में हैं। तीन मार्च को पेश होने वाले इस बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र को प्राथमिकता दी जाएगी। खासतौर पर इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर जोर रहेगा। रांची, जामताड़ा, गिरिडीह और खूंटी में नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना के लिए बजट में विशेष राशि का प्रावधान किया जाना तय है।

    स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि राज्य में नए मेडिकल कॉलेज और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्थापना की जाएगी। वहीं, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी इस दिशा में बड़े फैसले ले चुके हैं और स्वास्थ्य विभाग को विशेष निर्देश दिए हैं।

    सूत्रों के मुताबिक, झारखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) के विस्तार के लिए भी बजट में खास व्यवस्था की जाएगी। मुख्यमंत्री पहले ही इसके लिए एक विस्तृत कार्य योजना तैयार करने का निर्देश दे चुके हैं।

    सरकार का मानना है कि नए मेडिकल कॉलेज और स्वास्थ्य केंद्रों की स्थापना से झारखंड के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी। खासकर ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति में सुधार आएगा। अब देखना यह होगा कि बजट में इन योजनाओं के लिए कितना बड़ा प्रावधान किया जाता है।

     

  • युवाओं को मिली नई फिटनेस फैक्ट्री, जिम का भव्य उद्घाटन !

    चंदन पांडे की रिपोर्ट………………

    गिरिडीह: फिटनेस को लेकर युवाओं में बढ़ती जागरूकता के बीच शहर के बरगंडा स्थित कृष्णा हाइट्स में फिटनेस फैक्ट्री जिम की शानदार शुरुआत हो गई है। सोमवार को भाजपा नेता  विनय सिंह ने फीता काटकर जिम का उद्घाटन किया। जिम खुलते ही युवाओं में जबरदस्त जोश और उत्साह देखा गया।

    “युवाओं की सेहत ही असली संपत्ति”

    उद्घाटन समारोह के दौरान विनय सिंह ने कहा, “आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में सेहत सबसे बड़ी पूंजी है। इस जिम से युवा वर्ग न सिर्फ फिट रहेगा, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली को भी अपनाएगा।” उन्होंने जिम संचालक रवि राज और पीयूष तिवारी समेत पूरी टीम को इस पहल के लिए बधाई दी।

    फिटनेस के साथ डाइट पर भी रहेगा खास फोकस।

    फिटनेस फैक्ट्री के संचालक रवि राज ने कहा कि इस जिम का मकसद सिर्फ बॉडी बिल्डिंग नहीं, बल्कि समग्र स्वास्थ्य सुधार है। यहां युवाओं को एक्सरसाइज के साथ-साथ उनके डाइट और डेली रूटीन की भी मॉनिटरिंग  की जाएगी, जिससे वे बेहतर नतीजे पा सकें।

    शहर के गणमान्य लोग भी रहे मौजूद।

    इस मौके पर कांग्रेस नेता समीर राज चौधरी, डॉ. सीके सिंह, डॉ. पूजा तिवारी, राजीव तिवारी, कुणाल सिंह, राजीव सिंह, मृगेंद्र सिंह, आशीष सिंह, साकेत सिंह और रोहित जमुआर समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

    युवाओं के लिए शानदार मौका!

    अब गिरिडीह के युवाओं को फिटनेस के लिए दूर जाने की जरूरत नहीं, फिटनेस फैक्ट्री

  • अनुराग गुप्ता बने झारखंड के रेगुलर DGP, सरकार की मुहर!

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट …………..

    झारखंड को आखिरकार अपना नियमित पुलिस महानिदेशक (DGP) मिल गया है! वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अनुराग गुप्ता को राज्य सरकार ने रेगुलर डीजीपी के रूप में नियुक्त करने की मंजूरी दे दी है। उनकी नियुक्ति दो साल के लिए होगी।

    प्रभारी डीजीपी थे,अब रेगुलर डीजीपी नियुक्त।
    1990 बैच के आईपीएस अधिकारी अनुराग गुप्ता पहले से ही झारखंड के प्रभारी डीजीपी की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। इससे पहले विधानसभा चुनाव के दौरान चुनाव आयोग ने उन्हें इस पद से हटा दिया था और अजय कुमार सिंह को डीजीपी नियुक्त कर दिया गया था। लेकिन, 28 नवंबर 2024 को सरकार ने दोबारा उन्हें प्रभारी डीजीपी बना दिया था और अब, सरकार ने उनकी स्थायी नियुक्ति पर मुहर लगा दी है।

    कब से शुरू होगा कार्यकाल?
    सरकार की ओर से जारी अधिसूचना में स्पष्ट रूप से यह नहीं बताया गया है कि उनके दो साल के कार्यकाल की गिनती कब से होगी। बस इतना कहा गया है कि यह नियुक्ति ‘महानिदेशक एवं पुलिस महानिरीक्षक, झारखंड (पुलिस बल प्रमुख) का चयन एवं नियुक्ति नियमावली 2025’ के नियम 10(1) के तहत की गई है, जिसके अनुसार कार्यकाल दो साल का होगा।

    कई अहम जिम्मेदारियों को संभाल चुके हैं।
    अनुराग गुप्ता के करियर की बात करें, तो उन्होंने गढ़वा, गिरिडीह और हजारीबाग में एसपी के रूप में सेवाएं दी हैं। इसके अलावा, वे रांची के एसएसपी भी रह चुके हैं। वर्तमान में वे सीआईडी और एसीबी के डीजी का अतिरिक्त प्रभार भी संभाल रहे हैं।

    एक मजबूत प्रशासनिक अधिकारी के रूप में पहचान।
    साल 2022 में उन्हें डीजी रैंक में प्रमोट कर डीजी ट्रेनिंग का पद सौंपा गया था। इसके बाद 26 जुलाई 2024 को उन्हें झारखंड का प्रभारी डीजीपी नियुक्त किया गया था। अब, उनकी स्थायी नियुक्ति के साथ झारखंड को एक अनुभवी और तेजतर्रार डीजीपी मिल गया है, जिनसे राज्य की कानून-व्यवस्था को और मजबूत करने की उम्मीद की जा रही है।