Category: RANCHI

  • JPSC-JSSC आंदोलन के बीच झारखंड में सियासी हलचल तेज

    परवेज़ आलम.

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    रांची। झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। सड़क से लेकर अस्पताल तक और सरकार से लेकर राजभवन तक—हर स्तर पर हलचल बढ़ गई है। इसी बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रोजेक्ट बिल्डिंग में अपने कैबिनेट सहयोगियों के साथ अहम बैठक बुलाई है। दूसरी ओर, CID ने बड़ी कार्रवाई करते हुए JPSC की पूर्व सदस्य अजीता भट्टाचार्य के PA ब्रज कुमार दास को हिरासत में लिया है। CID की टीम उनसे पूछताछ कर रही है।

    सरकार और छात्रों के बीच चौथे दौर की बातचीत

    छात्र आंदोलन के बीच सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच सोमवार को चौथे दौर की वार्ता शुरू हुई। बातचीत शाम करीब साढ़े सात बजे शुरू हुई। इससे पहले छात्रों को मोरहाबादी स्थित स्टेट गेस्ट हाउस बुलाया गया था।

    प्रशासन की ओर से छात्रों के प्रतिनिधियों को गाड़ियों से गेस्ट हाउस ले जाया गया, लेकिन वहां पहुंचने के बाद उन्हें बताया गया कि मुख्यमंत्री पहले मंत्रियों के साथ बैठक करेंगे। इसके बाद छात्रों के साथ बातचीत की जाएगी।

    अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार और छात्रों के बीच होने वाली यह वार्ता किसी ठोस समाधान तक पहुंचती है या नहीं।

    CID की कार्रवाई, पूर्व JPSC अध्यक्ष से भी हुई पूछताछ

    जांच के सिलसिले में JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांगते से करीब 48 घंटे तक पूछताछ की गई। CID ने 15 अगस्त को उन्हें पूछताछ के लिए रिमांड पर लिया था। पूछताछ पूरी होने के बाद सोमवार को उन्हें अदालत में पेश किया गया। न्यायालय के आदेश के बाद उन्हें दोबारा न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

    इसके साथ ही JPSC की पूर्व सदस्य अजीता भट्टाचार्य के PA ब्रज कुमार दास को हिरासत में लेकर पूछताछ किए जाने से जांच का दायरा और बढ़ता दिखाई दे रहा है।

    चयनित अभ्यर्थियों की सरकार से अपील

    इधर, JSSC-CGL के चयनित अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर उनके भविष्य पर गंभीरता से विचार करने की अपील की है।

    चयनित अभ्यर्थियों ने प्रोजेक्ट भवन के निकट मानव श्रृंखला बनाकर अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की। उनका कहना है कि चयन प्रक्रिया को लेकर पैदा हुई परिस्थितियों का सीधा असर उनके भविष्य पर पड़ रहा है।

    16वें दिन भी जारी देवेंद्र महतो का अनशन

    छात्र आंदोलन के बीच देवेंद्र नाथ महतो का आमरण अनशन भी लगातार जारी है। भूख हड़ताल के 16वें दिन उनकी स्वास्थ्य स्थिति चिंताजनक बताई गई। सोमवार को उनका रक्तचाप 84/39 mmHg दर्ज किया गया।

    15 अगस्त के बाद से लगातार जांच में उनका BP कम पाया जा रहा था और सोमवार को यह और नीचे चला गया। फिलहाल सदर अस्पताल में उनकी मेडिकल जांच और निगरानी की जा रही है।

    आंदोलनकारियों की मांग है कि देवेंद्र महतो को अस्पताल से वापस सत्याग्रह स्थल लाया जाए, हालांकि उनकी लगातार बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति के बीच यह मांग भी चर्चा का विषय बनी हुई है।

    राजभवन पहुंचा विपक्ष, राज्यपाल से मुलाकात

    छात्र आंदोलन को लेकर राजनीतिक सरगर्मी भी तेज हो गई है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी और संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह ने लोकभवन में राज्यपाल से मुलाकात की।

    भाजपा नेताओं ने राज्यपाल के सामने छात्र आंदोलन से उपजे हालात समेत प्रदेश के अन्य ज्वलंत मुद्दों को रखा। उनका आरोप है कि छात्र पिछले 24 दिनों से रांची में न्याय की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं और कई छात्र आमरण अनशन के कारण गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती हैं।

    भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार बातचीत के नाम पर छात्रों को गुमराह कर रही है। उन्होंने राज्यपाल से मामले में हस्तक्षेप करते हुए छात्रों की जायज मांगों का जल्द समाधान कराने की मांग की।

    राज्यपाल ने भाजपा नेताओं को आश्वस्त किया कि पूरे घटनाक्रम और राज्य की परिस्थितियों पर उनकी पैनी नजर है।

    अब बड़ा सवाल—क्या निकलेगा समाधान?

    JPSC-JSSC आंदोलन, CID की कार्रवाई, पूर्व अधिकारियों से पूछताछ, छात्रों की भूख हड़ताल, चयनित अभ्यर्थियों का प्रदर्शन और राजभवन तक पहुंचा राजनीतिक विवाद—इन सबके बीच झारखंड की सियासत और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज है।

    अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या सरकार और छात्रों के बीच चौथे दौर की वार्ता से कोई ठोस समाधान निकलेगा, या झारखंड का छात्र आंदोलन अभी और बड़ा रूप लेगा?

     

  • झारखंड के माइका उद्योग को नई उड़ान देने की तैयारी, दिल्ली में होगी बड़ी बैठक

    परवेज़ आलम.

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    नई दिल्ली/गिरिडीह: झारखंड के बहुचर्चित माइका उद्योग को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। कोडरमा सांसद एवं केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने इस मुद्दे को गंभीरता से उठाते हुए केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी से नई दिल्ली में मुलाकात की। इस उच्चस्तरीय बैठक में संबंधित मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों की भी मौजूदगी रही, जिससे इस पहल की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

    बैठक के दौरान कोडरमा और गिरिडीह के माइका बेल्ट की मौजूदा स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई। खासतौर पर माइका खनन से जुड़े श्रमिकों की समस्याएं, उद्योग में पारदर्शिता की कमी, रोजगार के सीमित अवसर और माइका एसोसिएशन व वर्कर संगठनों की लंबित मांगों पर फोकस किया गया।

    दोनों केंद्रीय मंत्रियों ने इस बात पर सहमति जताई कि माइका उद्योग को नई दिशा देने के लिए सभी हितधारकों—उद्योग प्रतिनिधियों, श्रमिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों—को एक मंच पर लाना जरूरी है। इसी कड़ी में जल्द ही नई दिल्ली में एक व्यापक बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया गया है, जहां ठोस और दीर्घकालिक समाधान पर विचार किया जाएगा।

    केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि माइका खनन को पारदर्शी, सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा। साथ ही श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा, रोजगार के अवसरों में वृद्धि और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर विशेष जोर रहेगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल झारखंड के माइका बेल्ट—खासकर गिरिडीह और कोडरमा—के लिए गेमचेंजर साबित हो सकती है। इससे न केवल उद्योग को नई रफ्तार मिलेगी, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते भी खुलेंगे।

    इस पहल का स्वागत करते हुए भाजपा महानगर कोषाध्यक्ष मुकेश जालान ने कहा कि “यह कदम माइका उद्योग के पुनरुत्थान की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है। वर्षों से चली आ रही समस्याओं के समाधान की उम्मीद जगी है। केंद्र सरकार के प्रयासों से न केवल उद्योग मजबूत होगा, बल्कि हजारों श्रमिक परिवारों का भविष्य भी सुरक्षित होगा।”

    उन्होंने विश्वास जताया कि प्रस्तावित दिल्ली बैठक से ठोस परिणाम सामने आएंगे और गिरिडीह–कोडरमा क्षेत्र के समग्र विकास को नई गति मिलेगी।

  • गिरिडीह के युवा नेता की राहुल गांधी से खास मुलाकात

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.
    GIRIDIH : नई दिल्ली में गुरुवार को  NSUI के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर Ayush Sinha ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व लोक सभा मे विपक्ष के नेता  Rahul Gandhi से खास मुलाकात की। यह मुलाकात सिर्फ औपचारिक नहीं, बल्कि झारखंड के भविष्य को लेकर एक गंभीर और सार्थक संवाद साबित हुई।

    सूत्रों के मुताबिक, आयुष सिन्हा ने झारखंड से जुड़े कई अहम मुद्दों—जैसे शिक्षा व्यवस्था की चुनौतियाँ, युवाओं के रोजगार के अवसर और संगठन को मजबूत करने की रणनीतियाँ—को विस्तार से राहुल गांधी के सामने रखा।

    राहुल गांधी ने इन सभी मुद्दों को गंभीरता से सुना और भरोसा दिलाया कि झारखंड के विकास और युवाओं के हितों को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य के युवाओं की आवाज़ को राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूती से उठाया जाएगा।

    इस मुलाकात का एक दिलचस्प और मानवीय पहलू भी सामने आया, जब आयुष सिन्हा ने राहुल गांधी को अपने विवाह समारोह में शामिल होने का न्योता दिया। राहुल गांधी ने इस निमंत्रण को सहर्ष स्वीकार करते हुए उन्हें शुभकामनाएँ दीं।
    कुल मिलाकर, यह मुलाकात न सिर्फ संगठनात्मक दृष्टि से अहम मानी जा रही है, बल्कि झारखंड के युवाओं की आवाज़ को देश की राजनीति के केंद्र तक पहुँचाने की दिशा में एक मजबूत कदम भी साबित हो रही है।

  • 23 परिवारों के लिए हो गयी “हैप्पी होली”

    परवेज़ आलम.

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    रांची : मुख्य मंत्री हेमंत सोरेन  की अध्यक्षता में सोमवार को हुई राज्य सजा पुनरीक्षण परिषद की 36वीं बैठक में 23 आजीवन कारावास की सजा काट रहे कैदियों की रिहाई को मंजूरी दे दी गई। मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में हुई इस अहम बैठक के बाद इन कैदियों के लिए जेल के दरवाजे खुलने का रास्ता साफ हो गया है।

    34 मामलों की समीक्षा, 23 को मिली राहत.

    बैठक में सिर्फ नए मामलों पर ही नहीं, बल्कि पिछली बैठकों में अस्वीकृत किए गए 34 मामलों की भी बिंदुवार और गहन समीक्षा की गई। हर केस को अपराध की प्रकृति, अदालतों की टिप्पणियों, संबंधित जिलों के पुलिस अधीक्षकों, जेल अधीक्षकों और प्रोबेशन अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर परखा गया। लंबे विचार-विमर्श के बाद 23 कैदियों की रिहाई पर सहमति बनी। यह निर्णय सिर्फ भावनात्मक नहीं, बल्कि कानूनी प्रावधानों, सामाजिक सुरक्षा और कारा अधिनियमों के अनुरूप सुनिश्चित किया गया।

    रिहाई के बाद क्या ?

    मुख्यमंत्री ने साफ निर्देश दिया कि रिहा होने वाले कैदियों का एक व्यवस्थित डाटा बेस तैयार किया जाए। खासकर डायन-बिसाही जैसे मामलों में सजा काट चुके कैदियों के लिए महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाने पर जोर दिया गया, ताकि समाज में फिर से अंधविश्वास की जड़ें न पनपें। इतना ही नहीं, अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया कि रिहा होने वाले कैदियों को सरकार की कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ा जाए, उनके आय सृजन के साधन सुनिश्चित किए जाएं और जिला स्तर पर समन्वयकों की जिम्मेदारी तय की जाए, ताकि उनका सामाजिक पुनर्वास प्रभावी ढंग से हो सके। सरकार का संदेश साफ है — सजा पूरी करने के बाद समाज में सम्मानजनक वापसी का अवसर मिलना चाहिए।

    बैठक में कौन-कौन रहे मौजूद ?

    इस महत्वपूर्ण बैठक में मुख्य सचिव अविनाश कुमार, गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग की प्रधान सचिव वंदना दादेल, डीजीपी तदाशा मिश्रा, विधि विभाग के प्रधान सचिव-परामर्शी नीरज कुमार श्रीवास्तव, कारा एवं सुधारात्मक सेवाएं के महानिरीक्षक सुदर्शन प्रसाद मंडल, न्यायिक आयुक्त अनिल कुमार मिश्रा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

     

  • झारखंड बजट… गिरिडीह को मेडिकल कॉलेज, डेयरी प्लांट और स्टेडियम की सौगात, विपक्ष का हमला—“ये बजट नहीं, बड़ा ढोल है !”

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    गिरिडीह: झारखंड सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट मंगलवार को विधानसभा में पेश किया ।  कुल 1, 58, 560 करोड़ के बजट में महिलाओं की बल्ले-बल्ले है। इसमें गिरिडीह को भी कई सौगातें मिली है।

    JMM ज़िला उपाध्यक्ष अजीत कुमार पप्पू ने कहा कि गिरिडीह सदर अस्पताल को पीपीपी मोड में मेडिकल कॉलेज के रूप में विकसित किया जाएगा। गिरिडीह में 50 हजार लीटर क्षमता वाला एक नया डेयरी प्लांट की स्थापना की जाएगी। वहीं बेंगाबाद के कर्णपुरा में आउटडोर स्टेडियम बनेगा। उन्होंने कहा कि गिरिडीह सदर अस्पताल मेडिकल कॉलेज बनेगा तो इससे गरीबों को काफी लाभ मिलेगा। अबुआ सरकार गरीबों के लिए काम कर रही है।

    वहीं भाजपा नेता सुरेश साव ने बजट पर सवाल उठाते हुये कहा कि सरकार ने युवाओं को रोजगार देने का वादा किया था, लेकिन बजट में नई नौकरियों की ठोस व्यवस्था नहीं है। किसानों की आय बढ़ाने की बात कही गई, पर कृषि क्षेत्र के लिए ठोस संरचनात्मक सुधार का अभाव है। महिलाओं के नाम पर योजनाओं की घोषणा तो है, लेकिन उनके स्थायी आर्थिक सशक्तिकरण का कोई स्पष्ट मॉडल नहीं है। झारखंड की जनता को आंकड़ों का जाल नहीं, बल्कि रोजगार, उद्योग, शिक्षा और स्वास्थ्य में वास्तविक परिवर्तन चाहिए। यह बजट इन बुनियादी अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरता। भाजपा नेता सुरेश साव ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट आम जनता की उम्मीदों पर पूरी तरह पानी फेरने वाला व्यापारियों, कारोबारियों और दुकानदारों पर मंदी की मार और गहरा गयी है।

    गिरिडीह सदर अस्पताल  मेडिकल कॉलेज के रूप में होगा विकसित – संजय सिंह

    झारखंड सरकार के वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट मे गिरिडीह को भी कई सौगातें मिली है। जेएमएम जिला अध्यक्ष संजय सिंह ने कहा कि गिरिडीह सदर अस्पताल को पीपीपी मोड में मेडिकल कॉलेज के रूप में विकसित किया जाएगा। गिरिडीह में 50 हजार लीटर क्षमता वाला एक नया डेयरी प्लांट की स्थापना की जाएगी। वहीं बेंगाबाद के कर्णपुरा में आउटडोर स्टेडियम बनेगा। उन्होंने कहा कि गिरिडीह सदर अस्पताल मेडिकल कॉलेज बनेगा तो इससे गरीबों को काफी लाभ मिलेगा। अबुआ सरकार गरीबों के लिए काम कर रही है।

    झामुमो के जिला प्रवक्ता कृष्ण मुरारी शर्मा ने अबुआ बजट को महिलाओं के लिए विकासोन्मुखी बजट बताया। उन्होंने कहा कि अबुआ बजट में सरकार ने महिलाओं के लिए कई योजनाएं लेकर आई है। मंईयां योजना के लिए 14000 करोड़ रू का प्रावधान किया गया है। महिला किसानों के लिए महिला किसान खुशहाली योजना लाई गई है। वहीं झारखंड में 5  बालिका आवासीय विद्यालय बनेंगे। इन योजनाओं से महिला सशक्तिकरण को बल मिलेगा

    लोजपा के प्रदेश अध्यक्ष राजकुमार राज ने झारखंड सरकार द्वारा विधानसभा में प्रस्तुत किया गया बजट पूरी तरह निराशाजनक, जनविरोधी और विकास विरोधी प्रतीत होता है। राज्य की जनता को इस बजट से बड़ी उम्मीदें थीं कि महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत समस्याओं का ठोस समाधान सामने आएगा, लेकिन दुर्भाग्यवश यह बजट केवल हवा-हवाई घोषणाओं और आंकड़ों का खेल बनकर रह गया है।

    जमुआ से भाजपा विधायक मंजु कुमारी ने कहा है कि झारखंड सरकार द्वारा प्रस्तुत इस बजट में न तो युवाओं के रोजगार के लिए कोई ठोस योजना दिखाई देती है और न ही किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में कोई प्रभावी पहल नजर आती है। राज्य के लाखों युवा रोजगार की आस लगाए बैठे हैं, लेकिन बजट में उनके भविष्य को सुरक्षित करने के लिए कोई स्पष्ट रोडमैप प्रस्तुत नहीं किया गया है। किसान, जो राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, उनके लिए भी यह बजट उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका। खेती-किसानी की लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन किसानों को राहत देने के लिए ठोस प्रावधानों का अभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। महिलाओं के सशक्तिकरण और सुरक्षा के लिए भी केवल औपचारिक घोषणाएं की गई हैं, जबकि जमीनी स्तर पर प्रभावी योजनाओं की आवश्यकता है। छात्र-छात्राओं को बेहतर शिक्षा और रोजगार के अवसर देने के लिए भी कोई नई और ठोस पहल नहीं दिखाई देती। यह बजट स्पष्ट रूप से सरकार की दिशाहीन सोच और योजनाओं के अभाव को दर्शाता है।

  • निकाय  चुनाव “गैर-दलीय” है… लेकिन सियासत पूरी तरह दलीय हो चुकी है।

    परवेज़ आलम.

    द न्यूज़ पोस्ट4यू .
    राज्य के 48 शहरी स्थानीय निकायों के चुनाव इस बार सीधे मुकाबले से निकलकर त्रिकोणीय जंग में बदल गए हैं। 23 फरवरी को मतदान होगा और चार दिन बाद तस्वीर साफ हो जाएगी। पांच साल बाद हो रहे इन चुनावों की खास बात यह है कि ये कागज़ पर गैर-दलीय हैं, लेकिन ज़मीन पर राजनीतिक दल पूरी ताकत के साथ मैदान में हैं।

    सत्तारूढ़ इंडिया ब्लॉक के दो बड़े चेहरे—झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) और कांग्रेस—अब आमने-सामने दिखाई दे रहे हैं। संयुक्त उम्मीदवार पर सहमति नहीं बन पाई, और नतीजा यह कि दोनों दलों ने नौ नगर निगमों में महापौर पद के लिए अपने-अपने समर्थित उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया। इसके साथ ही 20 नगर परिषदों और 19 नगर पंचायतों में अध्यक्ष पद के लिए भी खुला समर्थन दिया गया है।

    गैर-दलीय चुनाव, पर दलीय रणनीति

    8 फरवरी को नाम वापसी की आखिरी तारीख बीतते ही तस्वीर साफ हो गई—गठबंधन की एकजुटता यहां नहीं दिखेगी। हालांकि, कांग्रेस और जेएमएम दोनों इसे “मतभेद” मानने से इनकार कर रहे हैं।
    कांग्रेस प्रवक्ता का कहना है—“यह विधानसभा या लोकसभा चुनाव नहीं है। यहां मुद्दे मोहल्लों के हैं, नालियों और सड़कों के हैं, हर वार्ड की अपनी प्राथमिकताएं हैं।”
    जेएमएम प्रवक्ताभी यही तर्क देते हैं—“जब चुनाव पार्टी चिन्ह पर नहीं हो रहा, तो स्थानीय चेहरा और उसकी स्वीकार्यता ज्यादा मायने रखती है।”

    लेकिन सवाल यह है कि अगर चुनाव पूरी तरह स्थानीय है, तो फिर इतने बड़े पैमाने पर दलों की सक्रियता क्यों?

    बीजेपी की शहरी पकड़

    राज्य के प्रमुख शहरी केंद्र—रांची, जमशेदपुर, धनबाद, बोकारो, देवघर, हजारीबाग, गिरिडीह और मेदिनीनगर—परंपरागत रूप से भाजपा के प्रभाव वाले क्षेत्र रहे हैं। एनडीए खेमे में भाजपा को अपने सहयोगियों एजेएसयू, जद(यू) और लोजपा (रामविलास) से खास चुनौती नहीं दिख रही।

    यानी मुकाबला असल में तीन कोनों वाला है—भाजपा, जेएमएम और कांग्रेस।

    जेएमएम की शहरी परीक्षा

    अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि यह दरअसल जेएमएम का “अर्बन एक्सपेरिमेंट” है। 81 सदस्यीय विधानसभा में जेएमएम की 34 सीटों में से करीब 90 प्रतिशत ग्रामीण इलाकों से आती हैं। ग्रामीण इलाकों में मजबूत पकड़ के बावजूद बड़े शहरों में पार्टी अब तक सीमित रही है।

    छह साल से सत्ता में रहने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में जेएमएम अब शहरों में भी अपनी जमीन तलाश रही है। यही वजह है कि पार्टी ने कई मजबूत स्थानीय चेहरों—यहां तक कि दूसरे दलों के बागी नेताओं—को भी समर्थन दिया है।

    गठबंधन पर असर?

    क्या यह नगर निकाय चुनाव भविष्य में इंडिया ब्लॉक की एकता को प्रभावित करेगा?
    फिलहाल दोनों दल इसे महज़ स्थानीय रणनीति बता रहे हैं। लेकिन राजनीतिक जानकार मानते हैं कि अगर नतीजे चौंकाने वाले रहे, तो इसका असर 2029 की बड़ी लड़ाइयों तक महसूस किया जा सकता है।

    फिलहाल तस्वीर साफ है—
    चुनाव भले ही “गैर-दलीय” हो,
    लेकिन सियासत पूरी तरह “दलीय” है।

    23 फरवरी को मतदाता तय करेंगे कि शहरों की कमान किसके हाथ जाएगी—परिणाम सिर्फ मेयर और अध्यक्ष नहीं चुनेंगे, बल्कि यह भी बताएंगे कि झारखंड की शहरी राजनीति किस करवट बैठ रही है।

     

  • आदित्य साहू बने भाजपा झारखंड के नए अध्यक्ष, संगठन को मिली नई कमान

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    रांची। झारखंड की सियासत में बुधवार को बड़ा संगठनात्मक बदलाव देखने को मिला, जब राज्यसभा सांसद आदित्य साहू को भारतीय जनता पार्टी की झारखंड प्रदेश इकाई का नया अध्यक्ष चुन लिया गया। पार्टी के केंद्रीय चुनाव पदाधिकारी और केंद्रीय मंत्री जुएल ओराम ने औपचारिक रूप से उनके निर्विरोध निर्वाचन की घोषणा की।

    मंगलवार को आदित्य साहू ने झारखंड प्रदेश भाजपा कार्यालय में केंद्रीय चुनाव पदाधिकारी जुएल ओराम के समक्ष अपना नामांकन पत्र दाखिल किया था। अध्यक्ष पद के लिए किसी अन्य नेता ने नामांकन नहीं किया, जिसके चलते उनका चयन निर्विरोध तय हो गया। जैसे ही इसकी घोषणा हुई, पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह और जोश देखने को मिला।

    आदित्य साहू वर्तमान में झारखंड से राज्यसभा सांसद हैं और जुलाई 2022 में वे उच्च सदन के लिए निर्वाचित हुए थे। इससे पहले वे झारखंड भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष की अहम जिम्मेदारी निभा चुके हैं। संगठन और संसद—दोनों स्तरों पर उनके अनुभव को देखते हुए पार्टी नेतृत्व ने उन्हें प्रदेश संगठन की कमान सौंपी है।

    राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, आदित्य साहू की नियुक्ति केवल संगठनात्मक बदलाव नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक संतुलन साधने की एक अहम रणनीति भी मानी जा रही है। वे वैश्य समुदाय से आते हैं, जिस समुदाय में भाजपा की परंपरागत रूप से मजबूत पकड़ रही है। ऐसे में आगामी चुनावों को देखते हुए उनका अध्यक्ष बनना पार्टी के लिए रणनीतिक रूप से अहम कदम माना जा रहा है।

    उनके निर्वाचन की घोषणा के मौके पर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी, राज्यसभा सांसद डॉ. प्रदीप वर्मा, पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा, पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा, सांसद बीडी राम समेत भाजपा के कई वरिष्ठ नेता और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे। सभी नेताओं ने आदित्य साहू को बधाई दी और उनके नेतृत्व में संगठन को और मजबूत करने की उम्मीद जताई।

    अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि नए प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर आदित्य साहू किस तरह संगठन को धार देते हैं और आने वाले राजनीतिक मुकाबलों में भाजपा को किस दिशा में ले जाते हैं।

  • हजारीबाग में दर्दनाक हादसा: जमीन में दबे बम के विस्फोट से तीन की मौत, इलाके में दहशत

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    हजारीबाग:  झारखंड के हजारीबाग शहर में बुधवार शाम एक भयावह हादसे ने पूरे इलाके को दहला दिया। बड़ा बाजार थाना क्षेत्र के हबीबीनगर मोहल्ले में झाड़ी साफ करने के दौरान जमीन के अंदर छिपे बम में अचानक जोरदार विस्फोट हो गया। इस दर्दनाक घटना में पति-पत्नी समेत तीन लोगों की जान चली गई। मृतकों में दो महिलाएं और एक पुरुष शामिल हैं।

    घटना बुधवार शाम लगभग साढ़े चार बजे की बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार, मोहम्मद सद्दाम हुसैन अपनी जमीन पर झाड़ियां और घास साफ कर रहे थे। इसी दौरान उनकी पत्नी नन्ही परवीन और एक अन्य महिला रशीदा परवीन भी वहां मौजूद थीं। जैसे ही कुदाल जमीन में गड़ी, नीचे दबे बम में अचानक विस्फोट हो गया। धमाका इतना जबरदस्त था कि आसपास के लोग सहम गए और मौके पर अफरा-तफरी मच गई।

    विस्फोट के बाद दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि गंभीर रूप से घायल एक व्यक्ति को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां उसने दम तोड़ दिया। इस हादसे में जान गंवाने वालों की पहचान मोहम्मद सद्दाम (40 वर्ष), पिता मोहम्मद यूनुस, उनकी पत्नी नन्ही परवीन (32 वर्ष) तथा रशीदा परवीन (45 वर्ष), पति मोहम्मद मुश्ताक के रूप में हुई है।

    मकर संक्रांति जैसे पर्व के दिन हुए इस हादसे से पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है। घटना के बाद बड़ी संख्या में लोग घटनास्थल के आसपास जमा हो गए, जिसके बाद प्रशासन ने तत्काल अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर क्षेत्र को सील कर दिया। लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों से बचने की अपील की गई है।

    गौरतलब है कि हबीबीनगर इलाका पहले भी विस्फोट की घटनाओं को लेकर सुर्खियों में रह चुका है। अप्रैल 2016 में इसी क्षेत्र में बम बनाने के दौरान हुए विस्फोट में छह लोगों की मौत हो गई थी। एक बार फिर जमीन में दबे विस्फोटक के मिलने से सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

    घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम तत्काल मौके पर पहुंची। घायलों को आनन-फानन में सदर अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने तीनों को मृत घोषित कर दिया। विस्फोट के कारणों को लेकर स्थिति अब तक स्पष्ट नहीं हो सकी है। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि धमाका किसी पहले से रखे गए विस्फोटक के कारण हुआ या किसी अन्य वजह से। एहतियात के तौर पर पूरे इलाके को सील कर दिया गया है।

    फॉरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) की टीम को भी घटनास्थल पर बुलाया गया है, जो साक्ष्य जुटाकर जांच में जुटी हुई है। प्रशासन ने क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर मामले की गहन जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही विस्फोट की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल, घटना से स्थानीय लोगों में भय का माहौल है।

    झारखंड पुलिस के प्रवक्ता और आईजी ऑपरेशन माइकल राज ने धमाके में 3 लोगों की मौत की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि धमाके की वजह और प्रकृति का पता लगाया जा रहा है। पुलिस और फोरेंसिक टीमें मौके पर हैं।

  • रांची में टेक्नोलॉजी और इनोवेशन का महाकुंभ, 17–18 जनवरी को गूंजेगा RanchiHacks’26

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    रांची : राजधानी रांची अब सिर्फ राजनीति और संस्कृति की पहचान तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि टेक्नोलॉजी और इनोवेशन का नया हब बनने जा रही है। 17 और 18 जनवरी को रांची में होने जा रहा है RanchiHacks’26, जो तकनीकी प्रतिभाओं के लिए किसी महाकुंभ से कम नहीं है।

    यह 24 घंटे का ऑफलाइन हैकाथॉन राजधानी में नवाचार की नई लकीर खींचेगा। आयोजन का ग्रैंड फिनाले G. D. Birla Auditorium, Ranchi में होगा, जहाँ देशभर के युवा टेक्नोलॉजिस्ट अपनी प्रतिभा का दमखम दिखाएंगे।

    Google Developer Groups Ranchi द्वारा आयोजित इस हैकाथॉन को देश के हर कोने से जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला है।
    500 से अधिक टीमों ने रजिस्ट्रेशन कराया,
    350 से ज्यादा इनोवेटिव प्रोजेक्ट सबमिट किए गए,
    और कड़ी चयन प्रक्रिया के बाद टॉप 31 टीमों ने फाइनल राउंड में अपनी जगह बनाई है।

    RanchiHacks’26 की खास बात यह है कि इसे AI Impact Summit 2026 का आधिकारिक प्री-समिट इवेंट घोषित किया गया है। यह समिट भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के तत्वावधान में आयोजित हो रहा है, जिससे इस आयोजन की राष्ट्रीय अहमियत और भी बढ़ जाती है।

    हैकाथॉन के दौरान प्रतिभागी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्योरिटी, ब्लॉकचेन, IoT, रोबोटिक्स, Web3 और सस्टेनेबल डेवलपमेंट जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में समाधान पेश करेंगे।

    प्रतिभागियों को Google, Infosys, HP, American Express और Wipro जैसी दिग्गज कंपनियों से जुड़े अनुभवी मेंटर्स का मार्गदर्शन मिलेगा, वहीं देश-विदेश के विशेषज्ञों की जूरी फाइनल प्रोजेक्ट्स का मूल्यांकन करेगी।

    कुल मिलाकर RanchiHacks’26 न सिर्फ झारखंड बल्कि पूरे पूर्वी भारत के लिए टेक्नोलॉजी और इनोवेशन के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक पड़ाव साबित होने जा रहा है — जहाँ से भविष्य की टेक्नोलॉजी की नई कहानी लिखी जाएगी।

  • झारखंड नगर निकाय चुनाव पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार बोली — “हम पूरी तरह तैयार हैं”

    परवेज़ आलम.

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    रांची : झारखंड में लंबे समय से टलते नगर निकाय चुनावों पर आखिरकार मंगलवार को झारखंड हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया। जस्टिस आनंद सेन की अदालत में अवमाननावाद याचिका पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने साफ-साफ कहा — “हम तैयार हैं, बस आदेश का इंतजार है।”

    सुनवाई के दौरान राज्य के मुख्य सचिव समेत कई शीर्ष अधिकारी कोर्ट में उपस्थित रहे। सरकार की ओर से बताया गया कि राज्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति पूरी हो चुकी है और चुनाव से जुड़ा सारा डाटा और अभिलेख तैयार हैं। सभी जरूरी दस्तावेज अदालत के समक्ष पेश किए गए।

    सरकार की इस तैयारी पर अदालत ने संतोष जताया, लेकिन साथ ही तीन सप्ताह के भीतर चुनाव आयोग को औपचारिक अनुशंसा भेजने का सख्त निर्देश भी दे दिया। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अब किसी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    राज्य की ओर से महाधिवक्ता राजीव रंजन और अपर महाधिवक्ता सचिन कुमार ने पक्ष रखा। वहीं, राज्य चुनाव आयोग ने अपनी दलील में कहा कि चुनावी प्रक्रिया पूरी करने में लगभग तीन महीने का समय लगेगा। इस पर अदालत ने आयोग से पूछा — “तीन महीने क्यों चाहिए?” और कारणों की पूरी जानकारी शपथ पत्र के रूप में दाखिल करने को कहा।

    मामले की अगली सुनवाई अब 10 नवंबर को होगी।
    गौरतलब है कि इससे पहले नगर निकाय चुनाव में लगातार हो रही देरी पर अदालत ने राज्य सरकार को फटकार लगाई थी और रूल 393 के तहत मुख्य सचिव व नगर विकास विभाग के अधिकारियों के खिलाफ अवमानना नोटिस भी जारी किया था। यह याचिका रोशनी खलखो द्वारा दायर की गई थी।

    अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि क्या झारखंड सरकार तय समय पर चुनावी प्रक्रिया शुरू कर पाएगी या फिर यह मामला एक बार फिर अदालत के शिकंजे में फंस जाएगा।