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  • आज़रबैजान से प्रत्यर्पण के बाद कुख्यात गैंगस्टर मयंक सिंह भारत लाया गया

    परवेज़ आलम.

    द न्यूज़ पोस्ट4यू

    रांची एयरपोर्ट शनिवार को पुलिस के लिए ऐतिहासिक दिन का गवाह बना। कुख्यात गैंगस्टर सुनील मीणा उर्फ मयंक सिंह को आज़रबैजान से प्रत्यर्पण कर भारत लाया गया। झारखंड एटीएस (Anti-Terrorist Squad) के एसपी ऋषभ झा के नेतृत्व में एक विशेष टीम मयंक को लेकर रांची पहुंची। एयरपोर्ट से उसे कड़ी सुरक्षा के बीच बख़्तरबंद गाड़ी से सीधे रामगढ़ ले जाया गया।

    यह झारखंड पुलिस का पहला सफल प्रत्यर्पण है, और इस वजह से इसे बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

    अपराधों का लंबा इतिहास.

    पुलिस रिकॉर्ड्स बताते हैं कि मयंक सिंह पर हत्या, रंगदारी, धमकी, फायरिंग और आपराधिक षड्यंत्र जैसे 45 से अधिक संगीन मामले दर्ज हैं। वह कई सालों से फरार था और विदेश जाकर अपने नेटवर्क को सक्रिय रखे हुए था।

    सूत्रों का कहना है कि मयंक झारखंड, बंगाल और छत्तीसगढ़ में कोयला व परिवहन कारोबारियों से वसूली करता था। उसके इशारे पर हत्या और फायरिंग की घटनाएँ होती थीं।

    गैंग कनेक्शन.

    पुलिस के अनुसार, मयंक का सीधा संबंध लॉरेंस बिश्नोई और अमन साहू जैसे बड़े गैंगस्टरों से है। यही वजह थी कि उसे सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर ख़तरा माना जाता था।

    जांच में सामने आया कि सुनील मीणा पहले काम के सिलसिले में मलेशिया गया, जहां उसकी मुलाकात रोहित गोदारा, गोल्डी बरार और संपत नेहरा के ज़रिए लॉरेंस बिश्नोई से हुई। इसके बाद उसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपराध की दुनिया में कदम रखा।

    लॉरेंस के कहने पर उसने राजस्थान और पंजाब में हत्या, रंगदारी और गोलीबारी जैसी वारदातें अंजाम दीं। वह तब चर्चा में आया जब उसने राजस्थान के तत्कालीन मंत्री व कांग्रेस विधायक गोविंद राम मेघवाल से रंगदारी मांगी थी। यही नहीं, उसने राजस्थान के एक पेट्रोल पंप मालिक से पांच करोड़ रुपये की वसूली की मांग की थी और पैसे न देने पर फायरिंग करवा दी थी।

    विदेश भागकर भी अपराध जारी.

    पासपोर्ट रद्द होने के बाद सुनील ने डंकी रूट के जरिए सिंगापुर, ईरान, मैक्सिको और फिर अमेरिका तक का सफर तय किया। वहीं से वह अमन साहू गिरोह के लिए पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली में युवाओं को भर्ती करता रहा।

    इसी दौरान उसने मयंक सिंह के साथ मिलकर झारखंड व आसपास के राज्यों में कोयला और परिवहन कंपनियों से वसूली की योजना बनाई।

    प्रत्यर्पण की पूरी प्रक्रिया.

    पुलिस सूत्रों के मुताबिक, इंटरपोल की मदद से पहले उसका लोकेशन ट्रैक किया गया। इसके बाद भारत सरकार के विदेश मंत्रालय और सीबीआई की इंटरपोल शाखा के सहयोग से प्रत्यर्पण की कानूनी प्रक्रिया शुरू हुई। कई महीनों की मेहनत के बाद आखिरकार अक्टूबर 2024 में मयंक सिंह आज़रबैजान के दातू में गिरफ्तार हुआ और अब भारत लाया गया।

    रांची एयरपोर्ट पर पहुंचे एसपी ऋषभ झा ने कहा –
    “यह झारखंड पुलिस के इतिहास का पहला प्रत्यर्पण है। हमें उम्मीद है कि विदेश में छिपे बाकी अपराधियों को भी जल्द प्रत्यर्पण या निर्वासन के जरिए वापस लाया जाएगा। इस सफलता का श्रेय पुलिस महानिदेशक, मुख्यमंत्री और राज्य व केंद्र सरकार के सहयोग को जाता है।”

    पुलिस मयंक सिंह से लॉरेंस बिश्नोई और अमन साहू गैंग से जुड़े रहस्यों की पड़ताल करेगी। उसे जल्द ही रामगढ़ की अदालत में पेश किया जाएगा, जहां पुलिस उसकी हिरासत की मांग करेगी।

    पुलिस अधिकारियों का मानना है कि मयंक की गिरफ्तारी से झारखंड और पड़ोसी राज्यों में सक्रिय संगठित अपराध नेटवर्क को तोड़ने में बड़ी मदद मिलेगी।

     

  • नगर विकास मंत्री ने दो करोड़ की 14 विकास योजनाओं का किया शिलान्यास

     

    नई पेयजल योजना पर भी काम जल्द-मंत्री

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क

    गिरिडीह : नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने शनिवार को नगर निगम क्षेत्र के विकास को नई दिशा देने के उद्देश्य से करीब दो करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली 14 योजनाओं का शिलान्यास किया।

    इस मौके पर मंत्री ने सबसे पहले स्टेशन रोड स्थित वीर कुंवर सिंह चौक पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बाबू वीर कुंवर सिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इसके बाद नगर निगम द्वारा आयोजित कार्यक्रम में सभी योजनाओं की आधारशिला रखी।

    कार्यक्रम में उपनगर आयुक्त प्रशांत कुमार लायक, झामुमो नेता अजीत कुमार पप्पू, राकेश रंजन, रॉकी सिंह, सईद अख्तर, सैफ अली गुड्डु सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और स्थानीय लोग मौजूद रहे।

    दुर्गा पूजा से पहले मिलेगी राहत.

    सभा को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि इन योजनाओं का क्रियान्वयन शहरी परिवहन और नागरिक सुविधा मद की राशि से किया जा रहा है। आगामी दुर्गा पूजा के दौरान शहरवासियों को किसी तरह की दिक्कत न हो, इसके लिए ही प्राथमिकता के आधार पर इन योजनाओं का चयन किया गया है।

    पेयजल संकट के समाधान की दिशा में पहल.

    मंत्री सुदिव्य कुमार ने गिरिडीह नगर निगम क्षेत्र में पुराने शहरी पेयजलापूर्ति योजना को वर्तमान परिस्थितियों के लिए अपर्याप्त बताते हुए कहा कि बढ़ती आबादी के हिसाब से अब नई योजना की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि कई वार्डों में अभी भी नियमित जलापूर्ति नहीं हो रही है, जिसके कारण नागरिक परेशान हैं।

    उन्होंने आश्वासन दिया कि गिरिडीह शहर को एक नई पेयजल आपूर्ति योजना की सौगात जल्द मिलेगी। इसके लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने पर विचार चल रहा है।

    मंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि बुनियादी नागरिक सुविधाओं को मजबूत किया जाए और हर घर तक स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जा सके।

     

  • जेलों में बंद आजीवन कारावास की सजा काट रहे 51 कैदियों को झारखंड सरकार रिहा करेगी

    राज्य सजा पुनरीक्षण पर्षद की बैठक.

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क

    रांची:  राज्य की विभिन्न जेलों में बंद आजीवन कारावास की सजा काट रहे 51 कैदियों को झारखंड सरकार ने रिहा करने  का फैसला किया है । मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई झारखंड राज्य सजा पुनरीक्षण पर्षद (State Sentence Review Board) की 35वीं बैठक में निर्णय लिया गया।

    103 मामलों की समीक्षा, 51 को मिली राहत.

    बैठक में कुल 103 कैदियों के मामलों की समीक्षा की गई। इनमें से 37 मामले नए थे, जबकि 66 कैदियों के मामले पहले भी पर्षद की बैठक में गए थे लेकिन अस्वीकृत हो गए थे।
    सभी कैदियों की व्यक्तिगत फाइलों का गहन अध्ययन करने के बाद यह निर्णय लिया गया कि 51 कैदियों को रिहाई की मंजूरी दी जाए।

    कई पहलुओं पर हुई जांच-पड़ताल.

    समीक्षा के दौरान कैदियों के अपराध की प्रकृति, न्यायालय की टिप्पणियां, जिलों के एसपी व जेल अधीक्षक की रिपोर्ट, प्रोबेशन अधिकारियों की राय और कैदियों के जेल में आचरण को ध्यान में रखा गया।

    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जिन कैदियों की रिहाई हो रही है, उन्हें हर हाल में सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ा जाए ताकि वे समाज में बेहतर जीवन जी सकें।

    14 वर्ष से अधिक कैद काट चुके और बुजुर्ग कैदी होंगे रिहा.

    सीएम हेमंत सोरेन ने कहा कि इस बैठक का उद्देश्य ऐसे कैदियों को अवसर देना है जिन्होंने जेल में 14 वर्ष या उससे अधिक समय बिताया है, उम्रदराज हैं और जेल में उनका आचरण अच्छा रहा है।
    इसके अलावा कुछ कैदी गंभीर बीमारी या मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से भी जूझ रहे हैं। ऐसे मामलों में कैदियों को उचित चिकित्सा प्रदान कर, डॉक्टर की रिपोर्ट के आधार पर उनकी रिहाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।

    2019 से अब तक 619 कैदी रिहा.

    बैठक में अधिकारियों ने जानकारी दी कि वर्ष 2019 से अब तक राज्य की विभिन्न जेलों से 619 कैदियों को रिहा किया गया है। इनमें से 558 कैदियों का भौतिक सत्यापन पूरा हो चुका है, जबकि 61 का सत्यापन अभी शेष है।

    रिहा हुए कैदियों में से 470 को सरकार ने विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं जैसे—

    • वृद्धावस्था पेंशन
    • विधवा पेंशन
    • राशन कार्ड
    • आयुष्मान कार्ड
    • प्रधानमंत्री आवास योजना
    • मनरेगा ई-श्रम कार्ड
      से जोड़ा है।
      जिन कैदियों को अब तक इन योजनाओं का लाभ नहीं मिला है, उन्हें भी जल्द शामिल करने की प्रक्रिया चल रही है।

    इस महत्वपूर्ण बैठक में मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव अविनाश कुमार, गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग की प्रधान सचिव वंदना दादेल, डीजीपी अनुराग गुप्ता, प्रधान सचिव सह विधि परामर्शी (न्याय) नीरज कुमार श्रीवास्तव, कारा एवं सुधारात्मक सेवाओं के महानिरीक्षक सुदर्शन प्रसाद मंडल, न्यायिक आयुक्त अनिल कुमार मिश्रा और प्रधान प्रोबेशन पदाधिकारी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

  • एनडीए विधायक दल की बैठक में सूर्या हांसदा एनकाउंटर से लेकर बनी रणनीति

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क

    रांची : राज्य विधानसभा के मानसून सत्र को लेकर शुक्रवार को एनडीए विधायक दल की महत्वपूर्ण बैठक भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने की। इसमें भाजपा, आजसू, जदयू और लोजपा के विधायक शामिल हुए।

    सूर्या हांसदा एनकाउंटर पर हंगामे की तैयारी.

    बैठक के बाद भाजपा के मुख्य सचेतक नवीन जायसवाल ने मीडिया से कहा कि गोड्डा के युवा आदिवासी नेता सूर्या हांसदा की पुलिस मुठभेड़ का मामला सत्र में जोरशोर से उठाया जाएगा। भाजपा का दावा है कि यह मुठभेड़ पूरी तरह फर्जी है और सरकार इस पर पर्दा डालने की कोशिश कर रही है। पार्टी ने इस घटना की सीबीआई जांच कराने की मांग को सदन में प्रमुख मुद्दा बनाने का फैसला किया है।

    शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल.

    जायसवाल ने राज्य की प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह ध्वस्त बताते हुए कहा कि विद्यालयों में न तो पर्याप्त शिक्षक हैं और न ही बुनियादी सुविधाएं। उन्होंने आरोप लगाया कि अब सरकार विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक के जरिए उच्च शिक्षा को भी कमजोर करना चाहती है। इस बिल के माध्यम से सरकार राज्यपाल के अधिकार खत्म कर कुलपतियों की नियुक्ति अपने हाथ में लेना चाहती है।

    अटल क्लीनिक का नाम बदलने पर विरोध.

    बैठक में यह भी तय हुआ कि भाजपा और एनडीए के विधायक सदन में अटल क्लीनिक का नाम बदलकर मदर टेरेसा क्लीनिक करने के फैसले का कड़ा विरोध करेंगे। नेताओं ने कहा कि यह कदम पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की विरासत को मिटाने की कोशिश है।

    सुरक्षा और धमकी का मुद्दा

    बैठक में यह आरोप भी लगा कि सत्ता पक्ष अपने प्रखंड स्तरीय नेताओं को बड़ी संख्या में बॉडीगार्ड उपलब्ध करा रहा है, जबकि एनडीए के पूर्व विधायकों की सुरक्षा वापस ली जा रही है।
    आजसू विधायक निर्मल महतो ने बताया कि पूर्व उप मुख्यमंत्री सुदेश महतो को जान से मारने की धमकी मिल रही है, जिसे उन्होंने बेहद गंभीर करार देते हुए सदन में उठाने की बात कही।

    बैठक में शामिल प्रमुख विधायक.

    इस रणनीतिक बैठक में भाजपा के अलावा सहयोगी दलों के विधायक भी मौजूद रहे। इनमें जदयू विधायक सरयू राय, आजसू विधायक निर्मल महतो, लोजपा विधायक जनार्दन पासवान सहित भाजपा विधायक सी.पी. सिंह, राज सिन्हा, नागेंद्र महतो, सत्येंद्र तिवारी, आलोक चौरसिया, शशिभूषण मेहता, मनोज यादव, देवेंद्र कुंवर, प्रदीप प्रसाद, रोशनलाल चौधरी, पूर्णिमा दास साहू, मंजू कुमारी और उज्ज्वल दास शामिल रहे।

    एनडीए ने साफ संकेत दिया है कि मानसून सत्र के दौरान विपक्ष सरकार को एक के बाद एक मुद्दों पर घेरेगा। सूर्या हांसदा का एनकाउंटर, शिक्षा संकट, किसानों की दुर्दशा, सुरक्षा व्यवस्था और राजनीतिक बदले की कार्रवाई जैसे विषयों पर सत्र में भारी हंगामा होने की संभावना है।

     

  • झारखंड विधानसभा का मानसून सत्रशुरू,सरकार ने 4,296 करोड़ का अनुपूरक बजट पेश किया

    शिबू सोरेन को भारत रत्न देने की मांग की  गूंज विधान सभा मे सुनाई दी.

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    रांची : झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र शुक्रवार को पुनः आरंभ हुआ। सदन की कार्यवाही की शुरुआत दिवंगत नेताओं और हाल की प्राकृतिक आपदाओं में जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि देने से हुई। इसके बाद झारखंड आंदोलन के प्रणेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिशोम गुरु शिबू सोरेन को भारत रत्न देने की मांग ने पूरे सदन का ध्यान अपनी ओर खींचा।

    सदन में शिबू सोरेन को भारत रत्न देने की मांग.

    कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने शोक प्रस्ताव पर बोलते हुए कहा कि शिबू सोरेन सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि आदिवासी, वंचित और शोषित समाज के हक-हकूक की आवाज रहे हैं। झारखंड आंदोलन की नींव से लेकर राज्य निर्माण तक उनका योगदान अनुपम है। उन्होंने मांग की कि सदन की ओर से सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को शिबू सोरेन को भारत रत्न दिए जाने की सिफारिश करनी चाहिए।

    इस मांग का सदन में मौजूद कई सदस्यों ने जोरदार समर्थन किया।

    • जदयू विधायक सरयू राय ने कहा कि शिबू सोरेन का योगदान राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता का पात्र है।

    • आजसू विधायक निर्मल महतो ने भी समर्थन जताते हुए कहा कि सदन को इस पर प्रस्ताव पारित कर केंद्र को भेजना चाहिए।

    • जयराम महतो (झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा) ने सुझाव दिया कि झारखंड की पहचान पारसनाथ की चोटी पर गुरुजी और प्रमुख आंदोलनकारियों की प्रतिमा स्थापित की जाए।

    • प्रदीप यादव ने गुरुजी को भारत रत्न देने के साथ ही उनके शराबबंदी के सपने को पूरा करने की भी मांग रखी।

    सदन के नेता मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और प्रतिपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने भी गुरुजी के व्यक्तित्व और उनके आंदोलनों की सराहना की। दोनों नेताओं ने कहा कि गुरुजी की सोच और संघर्ष झारखंड की अस्मिता के प्रतीक हैं।

    विधानसभा अध्यक्ष का बयान.

    विधानसभा अध्यक्ष रवींद्र नाथ महतो ने शिबू सोरेन के निधन को “एक युग का अंत” बताया। उन्होंने कहा कि गुरुजी को केवल एक राजनेता मान लेना उनके योगदान को सीमित करना होगा। उनका जीवन झारखंड आंदोलन की आत्मा और संस्कृति का ध्वजवाहक है। उन्होंने गुरुजी के टुंडी आश्रम और चेताब बैसी जैसे ऐतिहासिक आंदोलनों की भी चर्चा की।

    अनुपूरक बजट पेश.

    वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने सदन में 4,296.62 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट पेश किया। यह चालू वित्त वर्ष 2025-26 का पहला अनुपूरक बजट है। इस पर चर्चा 25 अगस्त को होगी।

    गौरतलब है कि यह अनुपूरक बजट मूल रूप से 4 अगस्त को पेश होना था, लेकिन उसी दिन शिबू सोरेन के निधन के कारण सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई थी। इससे पहले मार्च 2025 में राज्य सरकार ने 1.45 लाख करोड़ रुपये का वार्षिक बजट पेश किया था।

    श्रद्धांजलि और कार्यवाही स्थगित.

    सदन ने इस दौरान राज्य के दिवंगत शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन, पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मल्लिक, वरिष्ठ पत्रकार हरिनारायण सिंह और उत्तराखंड व जम्मू-कश्मीर की हालिया प्राकृतिक आपदाओं में मारे गए लोगों को भी श्रद्धांजलि दी।

    श्रद्धांजलि प्रस्ताव और शोक संदेशों के बाद सदन की कार्यवाही सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी गई।

    पूरक मानसून सत्र का कार्यक्रम.

    झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र पहले 1 अगस्त से 7 अगस्त 2025 तक चलना था, लेकिन 4 अगस्त को शिबू सोरेन के निधन के कारण इसे अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करना पड़ा। अब यह पूरक मानसून सत्र 22 अगस्त से 28 अगस्त 2025 तक आयोजित किया जा रहा है।

  • उपराष्ट्रपति चुनाव : झामुमो ने खोला पत्ता, इंडिया गठबंधन उम्मीदवार को देगा समर्थन

    जस्टिस बी. सुदर्शन रेड्डी हैंइंडिया गठबंधन के उम्मीदवार.

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क

    रांची : आगामी उपराष्ट्रपति चुनाव को लेकर झारखंड की राजनीति में सक्रिय हलचल के बीच झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। पार्टी ने घोषणा की है कि वह इंडिया गठबंधन (I.N.D.I.A.) के उम्मीदवार और पूर्व न्यायाधीश बी. सुदर्शन रेड्डी का समर्थन करेगी। यह घोषणा झामुमो के केंद्रीय प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने गुरुवार को प्रेस से बातचीत में की।

    झामुमो का रुख और तर्क.

    प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि झामुमो की राजनीति हमेशा से संवैधानिक संस्थाओं की रक्षा, लोकतांत्रिक मूल्यों और जनता के अधिकारों की सुरक्षा पर आधारित रही है। इसी सोच और प्रतिबद्धता के साथ पार्टी ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि वह उपराष्ट्रपति चुनाव में इंडिया गठबंधन के उम्मीदवार के साथ खड़ी होगी।

    उम्मीदवारों की तस्वीर.

    • इंडिया गठबंधन (I.N.D.I.A.) → पूर्व न्यायाधीश बी. सुदर्शन रेड्डी को उम्मीदवार बनाया है।
    • एनडीए (NDA) → बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्यपाल सी. पी. राधाकृष्णन को चुनावी मैदान में उतारा है।

    झामुमो के समर्थन का महत्व.

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस चुनाव में झामुमो का समर्थन इंडिया गठबंधन के लिए बेहद अहम है।

    1. झारखंड की राजनीति में झामुमो की भूमिका हमेशा निर्णायक रही है।
    2. वर्तमान में झामुमो राज्य की सत्तारूढ़ गठबंधन सरकार का मुख्य घटक है।
    3. पार्टी का समर्थन न केवल संख्या बल बल्कि राजनीतिक संदेश के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    इस प्रकार, झामुमो का यह कदम झारखंड के भीतर और बाहर दोनों स्तरों पर इंडिया गठबंधन की एकजुटता और रणनीति को मजबूत करने वाला माना जा रहा है। वहीं यह चुनाव अब दो धुरंधर उम्मीदवारों — बी. सुदर्शन रेड्डी और सी. पी. राधाकृष्णन — के बीच सीधी टक्कर का रूप ले चुका है।

     

  • झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र 22 से 28 अगस्त तक

    शिबू सोरेन के निधन के बाद दोबारा तय हुआ कार्यक्रम.

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क

    रांची : झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र, जो दिशोम गुरु और झारखंड आंदोलन के प्रणेता शिबू सोरेन के निधन के बाद अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया था, अब नए कार्यक्रम के अनुसार 22 अगस्त से 28 अगस्त 2025 तक आयोजित होगा। विधानसभा सचिवालय ने गुरुवार को इसकी आधिकारिक अधिसूचना जारी की।

    इस संबंध में निर्णय विधानसभा अध्यक्ष रबींद्र नाथ महतो ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के प्रस्ताव पर लिया। नए कार्यक्रम के अनुसार सत्र में चार कार्य दिवस होंगे। हालांकि सचिवालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि आवश्यकता पड़ने पर सत्र की अवधि 28 अगस्त के बाद भी बढ़ाई जा सकती है, जिसके लिए अलग से अधिसूचना जारी की जाएगी।

    मानसून सत्र का संशोधित कार्यक्रम

    • 22 अगस्त (शुक्रवार): 4 अगस्त को निर्धारित कार्य पूरे किए जाएंगे, प्रश्नकाल को छोड़कर। इस दिन वित्तीय वर्ष 2025-26 का प्रथम अनुपूरक बजट पेश होगा। साथ ही शोक प्रस्ताव भी पारित किए जाएंगे।

    • 25 अगस्त (सोमवार): प्रश्नकाल, अनुपूरक बजट पर सामान्य चर्चा, मतदान और विनियोग विधेयक का पारण किया जाएगा।
    • 26 अगस्त (मंगलवार): प्रश्नकाल, राजकीय विधेयकों की प्रस्तुति और अन्य शासकीय कार्य होंगे।

    • 28 अगस्त (गुरुवार): प्रश्नकाल और गैर-सरकारी संकल्पों पर चर्चा, लेकिन केवल उन प्रस्तावों पर जिनकी सूचना 23 जुलाई तक दी गई है।

    क्यों हुआ था स्थगित?

    झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र मूल रूप से 1 अगस्त से 7 अगस्त 2025 तक निर्धारित था। लेकिन 4 अगस्त को पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड आंदोलन के जननायक शिबू सोरेन के निधन के कारण पूरे सत्र को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करना पड़ा।
    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बाद में विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर यह आग्रह किया था कि शेष बचे महत्वपूर्ण विधायी और वित्तीय कार्यों को पूरा करने के लिए पुनः अनुपूरक सत्र आयोजित किया जाए।

    इस प्रकार, अब यह अनुपूरक सत्र न केवल राज्य के वित्तीय कार्यों को पूरा करने का अवसर बनेगा बल्कि गुरुजी शिबू सोरेन के योगदान को याद करने और उनके निधन पर शोक प्रस्ताव पारित करने का भी मंच होगा।

  • जहरीले सांपों को गले में लपेटकर करते हैं पूजा, नहीं होता जहर का असर

    रांची के बुंडू में सदियों से जारी है अनोखी परंपरा.

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क

    रांची जिले के बुंडू अनुमंडल क्षेत्र में हर साल मनसा पूजा के मौके पर ऐसा अद्भुत नज़ारा देखने को मिलता है, जिसे सुनकर आम इंसान सहम जाए। यहां श्रद्धालु अपनी आस्था और परंपरा के तहत विषैले सांपों को गले में लपेटते हैं, यहां तक कि उन्हें खुद को डसने तक देते हैं। लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि इन ग्रामीणों पर सांप के जहर का कोई असर नहीं होता। श्रद्धालु इसे नागों की देवी और भगवान शिव की मानस पुत्री मां मनसा की कृपा मानते हैं।

    कैसे निभाई जाती है परंपरा?

    स्थानीय लोगों के अनुसार, रोहिणी नक्षत्र के दौरान जब खेती-बाड़ी का काम पूरा हो जाता है, तब गांववाले जंगलों में जाकर जहरीले सांप पकड़कर लाते हैं। इन्हें करीब एक महीने तक घरों में रखकर उनकी सेवा-देखभाल करते हैं। जब मनसा पूजा का समय आता है, तब ये श्रद्धालु उन्हीं सांपों को हाथों में लेकर, शरीर पर लपेटकर और यहां तक कि उनके डसने तक का सामना करते हैं।

    पूजा समाप्त होने के बाद इन्हीं सांपों को सम्मानपूर्वक दोबारा जंगलों में छोड़ दिया जाता है। इस दौरान ग्रामीण यह मानते हैं कि मां मनसा की शक्ति के कारण सांप उनके मित्र बन जाते हैं और उनके विष का असर नहीं होता।

    सिर्फ सांप नहीं, लोहे की छड़ भी शरीर में भोंकते हैं श्रद्धालु.

    मनसा पूजा केवल सांपों तक सीमित नहीं है। इस अवसर पर भक्त अपने शरीर में लोहे की नुकीली छड़ भोंकते हैं। सामान्य व्यक्ति के लिए यह दृश्य विचलित कर देने वाला हो सकता है, लेकिन भक्तों का विश्वास है कि मां मनसा की कृपा से उन्हें दर्द महसूस नहीं होता। ग्रामीणों का कहना है कि इस पूजा से सांपदोष दूर होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

    पौराणिक मान्यताएं और मां मनसा का महत्व

    हिंदू मान्यता के अनुसार मां मनसा, भगवान शिव की मानस पुत्री और नागों की देवी मानी जाती हैं। उन्हें नागमाता, विष की देवी और कश्यप पुत्री के नाम से भी जाना जाता है। भक्तों का विश्वास है कि मां मनसा की आराधना करने से सर्पदंश और बिच्छू जैसे विषैले जीव-जंतुओं से सुरक्षा मिलती है।

    झारखंड के कोल्हान क्षेत्र – खासकर पूर्वी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां जिलों – में मनसा पूजा बड़े धूमधाम से आयोजित होती है। वहीं पश्चिम बंगाल और सीमावर्ती इलाकों में भी यह प्रमुख त्योहारों में गिनी जाती है।

    जांत और झापान : पूजा का खास आकर्षण.

    मनसा पूजा के दौरान दो प्रमुख आयोजन – जांत और झापान – होते हैं।

    • जांत में भक्त मंडली वाद्ययंत्रों के साथ मां मनसा के गुणगान करती है, भजन-कीर्तन होते हैं और देवी की कहानियां गीतों के रूप में सुनाई जाती हैं।
    • झापान में श्रद्धालु जहरीले सांपों के साथ हैरतअंगेज करतब दिखाते हैं। ग्रामीण बताते हैं कि यह परंपरा केवल दिखावे के लिए नहीं है, बल्कि देवी के प्रति उनकी गहरी आस्था का प्रतीक है।

    बलि और पारंपरिक अनुष्ठान.

    मनसा पूजा के दौरान कई जगहों पर बकरे, बतख और मुर्गे की बलि भी दी जाती है। मंदिरों में मां की भव्य प्रतिमा स्थापित की जाती है और चारों ओर मनसा मंगल और जात के गीतों की गूंज सुनाई देती है। पवित्र जलाशयों और नदियों से कलश लाकर मंदिर में स्थापित करने के बाद पारंपरिक रीति-रिवाजों से पूजा-अर्चना की जाती है।

    इस तरह झारखंड का बुंडू इलाका आज भी अपनी सदियों पुरानी लोकपरंपरा को जीवित रखे हुए है, जहां श्रद्धालु विषैले सांपों के साथ खेलते हुए भी अपनी आस्था को सर्वोपरि मानते हैं।

     

  • इनरव्हील क्लब ऑफ गिरिडीह सनशाइन ने शुरू किया एडल्ट लिटरेसी प्रोग्राम

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    गिरिडीह से एक प्रेरणादायक खबर सामने आई है। इनरव्हील क्लब ऑफ गिरिडीह सनशाइन ने पचंबा स्थित पचंबा गर्ल्स हाई स्कूल में एडल्ट लिटरेसी प्रोग्राम (वयस्क साक्षरता कार्यक्रम) की शुरुआत की है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य समाज की उन महिलाओं को पढ़ना-लिखना सिखाना है, जिन्हें अब तक शिक्षा प्राप्त करने का अवसर नहीं मिल सका।

    कार्यक्रम की शुरुआत.

    कार्यक्रम का उद्घाटन PDC पूनम सहाय ने किया। उन्होंने महिलाओं को साक्षरता का महत्व बताते हुए कहा कि पढ़ाई सिर्फ ज्ञान देने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास की नींव भी है। पूनम सहाय ने महिलाओं से खुलकर संवाद किया और उन्हें भरोसा दिलाया कि इस पहल से उनकी जिंदगी में सकारात्मक बदलाव आएगा।

    महिला सशक्तिकरण की दिशा में कदम.

    इस कार्यक्रम को विशेष रूप से महिलाओं के लिए डिजाइन किया गया है। इसका मकसद उन्हें पढ़ने-लिखने योग्य बनाना, उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना और समाज में उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने योग्य बनाना है।
    इसकी शुरुआत गर्ल्स हाई स्कूल की प्रधानाचार्या और क्लब की सक्रिय सदस्य शमा परवीन के सहयोग से संभव हो पाई।

    कक्षाओं की व्यवस्था.

    योजना के तहत सप्ताह में तीन दिन कक्षाएं आयोजित होंगी। कक्षाओं का संचालन क्लब की सदस्याएं स्वयं करेंगी। यदि किसी कारणवश वे अनुपस्थित रहती हैं तो प्रधानाचार्या शमा परवीन स्वयं कक्षाओं को संचालित करेंगी।

    कार्यक्रम में शामिल हस्तियां.

    इस अवसर पर क्लब की अध्यक्ष कविता राजगढ़िया, सचिव स्मृति आनंद, सदस्य संगीता सिंह, शमा परवीन और अन्य सदस्य उपस्थित रहीं। सभी ने मिलकर संकल्प लिया कि इस पहल को लगातार आगे बढ़ाया जाएगा और अधिक से अधिक महिलाओं तक पहुंच बनाई जाएगी।

    भविष्य की उम्मीदें.

    इनरव्हील क्लब ऑफ गिरिडीह सनशाइन की यह पहल केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज में बदलाव की शुरुआत है। उम्मीद जताई जा रही है कि यह प्रयास आने वाले समय में अनेक महिलाओं के जीवन को नई रोशनी और दिशा देगा।

     

  • पारसनाथ के जंगल से भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री बरामद

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    गिरिडीह से नक्सल मोर्चे पर एक बड़ी सफलता की खबर सामने आई है। पुलिस और सीआरपीएफ की संयुक्त कार्रवाई ने नक्सलियों की बड़ी साजिश को विफल कर दिया है। दरअसल, गिरिडीह पुलिस और सीआरपीएफ की 154वीं बटालियन ने पारसनाथ पहाड़ी की तराई में चलाए गए विशेष अभियान के दौरान भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री बरामद की है।

    क्या मिला छापेमारी में?
    टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी की और जमीन में दबाकर रखे गए 300 मीटर कोडेक्स वायर और 13 लीटर विस्फोटक केमिकल लिक्विड को बरामद किया। अधिकारियों के मुताबिक यह सामग्री नक्सलियों द्वारा किसी बड़ी घटना को अंजाम देने के लिए जमा की गई थी।

    अभियान कैसे चला?
    गिरिडीह के एसपी डॉ. विमल कुमार ने मीडिया को बताया  कि इस अभियान का नेतृत्व सीआरपीएफ 154वीं बटालियन के कमांडेंट सुनील दत्त त्रिपाठी ने किया। वहीं, टीम में सीआरपीएफ के सेकंड कमांडेंट ओम प्रकाश सिंह, एएसपी अभियान सुरजीत कुमार और सहायक कमांडेंट तांबा शामिल थे। स्थानीय पुलिस, खुखरा थाना की टीम और डॉग स्क्वॉड की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही।

    कहां से बरामद हुआ विस्फोटक?
    अभियान के दौरान सुरक्षाबलों ने बड़ी सतर्कता के साथ पारसनाथ की तराई स्थित जोकाईनाला इलाके की घेराबंदी की। तलाशी के दौरान नक्सलियों द्वारा जमीन के भीतर छुपाए गए विस्फोटक उपकरण और रसायन बरामद किए गए।

    नक्सलियों की साजिश पर रोक.
    पुलिस के मुताबिक, बरामद विस्फोटक का इस्तेमाल नक्सली आईईडी और अन्य बम तैयार करने में करते। शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि इन सामग्रियों को किसी बड़ी हिंसक कार्रवाई के लिए एकत्रित किया गया था। गिरिडीह पुलिस ने इसे नक्सलियों के इरादों पर बड़ा प्रहार बताया है।  इस कार्रवाई को सुरक्षाबलों की एक अहम सफलता माना जा रहा है, क्योंकि पारसनाथ का इलाका नक्सलियों के लिए लंबे समय से सुरक्षित पनाहगाह रहा है।