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  • Jharkhand weather update: 3 दिन लगातार बारिश, 50KM की रफ्तार से चलेंगी हवाएं

    झारखंड में मौसम का बदलेगा मिजाज, ओलावृष्टि और तेज हवा को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी

    रांची समेत पूरे झारखंड में 22 फरवरी तक गरज, तेज हवा और हल्की बारिश के साथ ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग ने इसको लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। अनुमान के मुताबिक, इस दौरान हवा की गति 40 से 50 किमी प्रतिघंटा तक हो सकती है, जिससे दिन के तापमान में 1 से 3 डिग्री की गिरावट संभव है। हालांकि, रात के तापमान में बड़े बदलाव की संभावना नहीं है।

    पश्चिमी विक्षोभ का असर, बदलेगा मौसम का रुख

    मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, देश के उत्तरी भाग में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से पश्चिम बंगाल से तेलंगाना तक निम्न दबाव क्षेत्र बना है, जिससे हवा की दिशा बदल रही है। इसका असर झारखंड में अगले तीन दिनों तक देखने को मिलेगा।

    इन जिलों में अधिक प्रभाव

    20 और 21 फरवरी को सरायकेला, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, सिमडेगा, खूंटी, रांची, रामगढ़ और बोकारो में ओलावृष्टि, तेज हवा और हल्की बारिश की संभावना है। वहीं, 22 फरवरी को पूर्वी और पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला, रांची, खूंटी, सिमडेगा, रामगढ़, बोकारो, गिरिडीह, धनबाद, देवघर, दुमका, जामताड़ा और लोहरदगा में ओलावृष्टि के साथ तूफानी हवाएं चल सकती हैं। इस दिन पूरे राज्य में बारिश होने की संभावना जताई गई है।

    बादल छाए, तापमान में हल्का उतार-चढ़ाव

    राज्य में मौसम में बदलाव के संकेत पहले से ही दिखने लगे हैं। बुधवार को कई इलाकों में बादल छाए रहे, जिससे न्यूनतम तापमान में वृद्धि दर्ज की गई। रांची का न्यूनतम तापमान 16.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि गुमला में सबसे कम 11.6 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा।

    मौसम विभाग के वैज्ञानिक अभिषेक आनंद के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ के कारण अगले तीन दिनों तक झारखंड के कई हिस्सों में गरज, तेज हवा और ओलावृष्टि की संभावना बनी हुई है। 20 से 22 फरवरी तक बारिश का पूर्वानुमान है, जबकि 23 फरवरी तक बादल छाए रहने की संभावना है।

  • HC ने पारसनाथ मामले में राज्य सरकार को दिया अतिरिक्त समय, अगली सुनवाई 18 मार्च को

    पारसनाथ पहाड़ संरक्षण को लेकर झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई, राज्य सरकार को मिला समय

    झारखंड हाईकोर्ट में बुधवार को पारसनाथ पहाड़ को जैन धर्मावलंबियों की धार्मिक भावनाओं के अनुरूप संरक्षित करने से जुड़ी जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। इस दौरान राज्य सरकार ने अदालत से जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। अब इस मामले की अगली सुनवाई 18 मार्च को होगी।

    जैन संस्था ज्योत ने दायर की याचिका

    इस जनहित याचिका को जैन संस्था ज्योत की ओर से दायर किया गया है, जिसकी सुनवाई मुख्य न्यायाधीश एमएस रामचंद्र राव और जस्टिस दीपक रोशन की खंडपीठ ने की। याचिका में गिरिडीह स्थित पारसनाथ पहाड़ को लेकर गंभीर चिंता जताई गई है।

    याचिकाकर्ता का कहना है कि यह स्थल जैन समुदाय के लिए अत्यंत पवित्र है, लेकिन बीते कुछ वर्षों से यहां शराब और मांस की बिक्री हो रही है, साथ ही अतिक्रमण और पिकनिक जैसी गतिविधियां भी बढ़ी हैं। इससे धार्मिक आस्थाओं को ठेस पहुंच रही है।

    पर्यटन स्थल के रूप में विकास पर आपत्ति

    याचिका में यह भी कहा गया है कि राज्य सरकार पारसनाथ पहाड़ को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित कर रही है, जिससे जैन धर्मावलंबियों की धार्मिक भावनाओं का उल्लंघन हो रहा है।

    याचिकाकर्ताओं ने केंद्र सरकार की 5 जनवरी 2023 की अधिसूचना का हवाला देते हुए कहा कि पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने स्पष्ट किया था कि पारसनाथ पहाड़ी पर किए जाने वाले सभी कार्य जैन धर्म की धार्मिक भावनाओं के अनुरूप होने चाहिए।

    अब अदालत इस मामले की अगली सुनवाई 18 मार्च को करेगी, जिससे तय होगा कि पारसनाथ पहाड़ को किस तरह संरक्षित किया जाएगा।

  • कैबिनेट बैठक मे लिए गए कुछ अहम फाइसले, जानिए कौन-कौन से फैसले लिए गए

    महिलाओं को फैक्ट्रियों में रात की शिफ्ट में काम करने की अनुमति

    राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए फैक्ट्रियों में महिलाओं को रात में काम करने की अनुमति प्रदान कर दी है। अब महिलाएं अपनी सहमति से शाम 7 बजे से सुबह 6 बजे तक कार्य कर सकेंगी। मंगलवार को कैबिनेट द्वारा इस फैसले को मंजूरी दी गई, जिससे औद्योगिक इकाइयों की स्थापना और संचालन में सुगमता आएगी। इस पहल से निवेश को बढ़ावा मिलेगा और औद्योगीकरण की गति तेज होगी।

    महंगाई भत्ते में वृद्धि

    राज्य सरकार ने कर्मचारियों और पेंशनधारियों के महंगाई भत्ते (डीए) में बढ़ोतरी की घोषणा की है। छठे वेतनमान के तहत आने वाले कर्मचारियों का डीए 239% से बढ़ाकर 246% कर दिया गया है, जबकि पांचवें वेतनमान के अंतर्गत डीए 443% से बढ़ाकर 455% कर दिया गया है।

    कैबिनेट के अन्य अहम फैसले

    • आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका नियमावली में संशोधन को मंजूरी।
    • पेयजल विभाग के सात कर्मचारियों की सेवा नियमित की गई।
    • बिहार राज्य औद्योगिक विकास निगम और बीएसइडीईएल को 1.27 करोड़ रुपये के बकाया भुगतान की स्वीकृति मिली।
    • हजारीबाग के भूसंरक्षण उपनिदेशक सुनील कुमार के दंड पुनर्विचार आवेदन को अस्वीकार किया गया।
    • एसटीएफ अधिकारी राजेश कुमार के परिवार को सेवा लाभ प्रदान करने की स्वीकृति मिली।

    ये सभी निर्णय राज्य में औद्योगीकरण को गति देने और कर्मचारियों की सुविधाओं में सुधार लाने के उद्देश्य से लिए गए हैं।

  • झारखंड कैबिनेट का बड़ा फैसला: MSME उद्योगों को तीन साल तक ट्रेड लाइसेंस से मिलेगी छूट

    रांची: झारखंड सरकार ने सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों (एमएसएमई) को प्रोत्साहन देने के लिए एक अहम फैसला लिया है। अब प्रदेश में इन उद्योगों को पहले तीन साल तक ट्रेड लाइसेंस लेने की आवश्यकता नहीं होगी। केवल उद्योग विभाग की सहमति मिलने से ही कारोबार शुरू किया जा सकेगा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।

    इसके साथ ही सरकार ने पांचवे और छठे वेतनमान के तहत कार्यरत कर्मचारियों और पेंशनधारियों के महंगाई भत्ते (डीए) में बढ़ोतरी का भी निर्णय लिया है। अब छठे वेतनमान पर काम करने वाले कर्मियों, पेंशनधारियों और पारिवारिक पेंशनधारियों का डीए 239 प्रतिशत से बढ़ाकर 246 प्रतिशत कर दिया गया है, जबकि पांचवे वेतनमान पर काम करने वाले कर्मचारियों के लिए यह 443 प्रतिशत से बढ़ाकर 455 प्रतिशत किया गया है।

    कैबिनेट बैठक में महिलाओं को कारखानों में रात में काम करने की अनुमति देने के लिए कारखाना अधिनियम-1948 में संशोधन को भी मंजूरी दी गई। अब महिलाएं अपनी सहमति से शाम 7 बजे से सुबह 6 बजे तक काम कर सकेंगी।

    कौन होगा लाभार्थी?

    कैबिनेट के इस फैसले से एमएसएमई उद्योगों को बड़ी राहत मिलेगी। अब उद्यमियों को पहले तीन वर्षों तक ट्रेड लाइसेंस लेने की बाध्यता नहीं होगी। इसके बाद वे लाइसेंस प्राप्त कर सकते हैं। इससे उद्योगों की स्थापना और संचालन की प्रक्रिया सरल होगी, जिससे प्रदेश में नए उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा।

    सरकार के इन फैसलों से झारखंड में औद्योगिक विकास को गति मिलने की उम्मीद है।

  • गिरिडीह में भयंकर सड़क हादसा: स्कॉर्पियो और बाइक की टक्कर में छह लोगों की मौत

    डुमरी-गिरिडीह मार्ग पर एक भीषण सड़क हादसा हुआ, जिसमें बाइक और स्कॉर्पियो की जबरदस्त टक्कर हो गई। इस दर्दनाक दुर्घटना में छह लोगों की मौत हो गई। मृतकों में चार लोग स्कॉर्पियो में सवार थे, जबकि दो लोग बाइक पर थे। यह घटना मधुबन थाना क्षेत्र के लट्टकट्टो इलाके में घटी।

    घटनाक्रम के मुताबिक, मंगलवार की आधी रात के करीब स्कॉर्पियो और बाइक विपरीत दिशाओं से आ रही थीं। इस दौरान स्कॉर्पियो चालक लाइट की चकाचौंध से संतुलन खो बैठा, जिससे पहले उसने बाइक सवार को टक्कर मारी और फिर अनियंत्रित होकर एक पेड़ से जा भिड़ी।

    घटना की सूचना मिलते ही डुमरी एसडीपीओ सुमित कुमार ने मधुबन थाना पुलिस को मौके पर भेजा। पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद वाहनों से शवों को बाहर निकाला। एसडीपीओ सुमित कुमार ने हादसे की पुष्टि करते हुए बताया कि मृतकों में चार स्कॉर्पियो सवार और दो बाइक सवार थे। इनमें से एक शव की अब तक पहचान नहीं हो पाई है।

    मृतकों की पहचान

    पुलिस के अनुसार, स्कॉर्पियो में सवार मृतकों की पहचान मुंगेर मुफ्फसिल थाना क्षेत्र के दरियापुर निवासी 40 वर्षीय सोमेश चंद्रा (पिता रवि शंकर प्रसाद सिंह), 21 वर्षीय गोपाल कुमार (पिता नरेश प्रसाद सिंह) और गुलाब कुमार (इसरी बाजार) के रूप में हुई है, जबकि एक अन्य की पहचान नहीं हो सकी है।

    वहीं, बाइक सवार मृतकों में मधुबन थाना क्षेत्र के छछंदो निवासी 26 वर्षीय बबलू कुमार टुडू (पिता चेतलाल टुडू) और धावाटांड निवासी 55 वर्षीय हुसैनी मियां (पिता स्व. लाटो मियां) शामिल हैं।

    पुलिस मामले की जांच में जुटी है और मृतकों के परिजनों को सूचित कर दिया गया है।

  • गिरिडीह: शिवम स्टील ग्रुप के कई ठिकानों पर सेंट्रल GST की छापेमारी, जानें पूरा मामला

    सिस्कॉन टीएमटी पर जीएसटी टीम का छापा, टैक्स अनियमितताओं की जांच जारी

    शिवम स्टील ग्रुप की सरिया निर्माण इकाई सिस्कॉन टीएमटी के कई ठिकानों पर सेंट्रल जीएसटी की टीम ने बुधवार को एक साथ छापेमारी की। यह कार्रवाई डीजीजीएसटीआइ (डायरेक्टरेट जनरल ऑफ गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स इन्वेस्टिगेशन) की छह टीमों ने दोपहर 12 बजे एक साथ शुरू की।

    छापेमारी का नेतृत्व कोलकाता ईस्ट यूनिट के ज्वाइंट डायरेक्टर नितेश कुमार कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, जांच देर रात तक जारी रही और संभावना है कि गुरुवार को भी यह कार्रवाई चलेगी।

    उद्नाबाद स्थित  छड़ उत्पादन कंपनी शिवम स्टील समूह के तीन फैक्ट्रियों और शहर के दो बड़े घरों पर GST विभाग की ओर से बड़ी छापेमारी की गई है। यह कार्रवाई मंगलवार शाम करीब चार बजे शुरू हुई,

    पहले चर्चा थी कि आयकर विभाग की टीम ने रेड की है, लेकिन बाद में स्पष्ट हुआ कि यह GST विभाग की कार्रवाई है। सत्यम, शिवम, सुंदरम नामक तीनों फैक्ट्रियों और बाभनटोली स्थित दो आलीशान घरों में जांच जारी है।

    सूत्रों के मुताबिक, इस छापेमारी में पटना और झारखंड दोनों स्थानों के अधिकारी शामिल हैं। कई अधिकारियों की वर्दी पर GST बैज लगा हुआ देखा गया, जिससे पुष्टि हुई कि यह कार्रवाई GST से संबंधित है।

    शिवम स्टील समूह के मुख्य कार्यालय को किया सील

    GST अधिकारियों ने शिवम स्टील समूह की मुख्य फैक्ट्री के ऑफिस को सील कर दिया है। साथ ही, फैक्ट्री में मौजूद सभी कर्मचारियों और सुरक्षा गार्डों के मोबाइल फोन जब्त कर लिए गए हैं।

    इस कार्रवाई के दौरान CRPF के अर्धसैनिक बलों की भी तैनाती की गई है, और टीम में 50 से अधिक अधिकारी शामिल बताए जा रहे हैं। वहीं, घरों में मौजूद महिला अधिकारियों द्वारा GST चोरी से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही है।

    फिलहाल कोई भी अधिकारी इस मामले पर टिप्पणी करने से बच रहा है, वहीं शिवम स्टील समूह के मालिक विनोद अग्रवाल, प्रमोद अग्रवाल और शंभु अग्रवाल के मोबाइल भी स्विच ऑफ हैं।

    टैक्स डाटा में गड़बड़ी का शक

    सूत्रों के अनुसार, लौह उत्पाद के निर्यात से जुड़े टैक्स रिटर्न में अनियमितताएं पाई गई हैं। इसी के मद्देनजर शिवम आयरन एंड स्टील कंपनी लिमिटेड (गिरिडीह) समेत आसनसोल और पश्चिम बंगाल स्थित अन्य फैक्ट्रियों में भी टीमों ने जांच की।

    स्टॉक का सत्यापन और डिजिटल डेटा की जांच

    जीएसटी इन्वेस्टिगेशन टीम स्टॉक का सत्यापन कर रही है। इसके तहत लौह उत्पादों और कच्चे माल की गहन जांच की जा रही है। इस कार्रवाई में दो दर्जन से अधिक अधिकारी शामिल हैं।

    इसके अलावा, अधिकारियों ने कंप्यूटर और लैपटॉप जब्त कर डाटा खंगालना शुरू कर दिया है। डीजीजीएसटीआइ के सुपरिटेंडेंट देवाशीष होगी विश्वास ने पुष्टि की कि छापेमारी जारी है, लेकिन फिलहाल कोई आधिकारिक बयान देना संभव नहीं है।

  • नवडीहा प्रखंड की मांग फिर हुई बुलंद, मुख्यमंत्री को सौंपा गया ज्ञापन

     गिरिडीह में धरना – प्रदर्शन

    गिरिडीह: “अब और इंतज़ार नहीं होगा! नवडीहा को प्रखंड बनाना ही होगा!” – इसी गूंज के साथ मंगलवार को गिरिडीह झंडा मैदान में नवडीहा प्रखंड निर्माण संघर्ष समिति के बैनर तले सैकड़ों ग्रामीणों ने जोरदार धरना -प्रदर्शन किया। समिति ने एक बार फिर अपनी मांगों को लेकर सरकार के सामने आवाज बुलंद की है। समिति के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर गिरिडीह जिले के जमुआ प्रखंड के पूर्वी भाग को अलग कर नवडीहा को प्रखंड का दर्जा देने की मांग की है।

    क्या है मामला?

    गिरिडीह जिले के जमुआ प्रखंड के पूर्वी भाग को अलग कर नवडीहा को प्रखंड बनाने की मांग लंबे समय से की जा रही है। लोगों का कहना है कि नवडीहा प्रखंड बनने की सारी शर्तें पूरी करता है, फिर भी सरकार चुप क्यों है?

    क्या है मांग और क्यों जरूरी है नवडीहा प्रखंड?

    1. जनसंख्या और प्रशासनिक जरूरतें: 2011 की जनगणना के अनुसार जमुआ प्रखंड की कुल आबादी 2,11,843 है, जिसमें 42 पंचायतें शामिल हैं। प्रशासनिक सुविधा के लिए छोटे प्रखंडों का गठन आवश्यक माना जाता है।
    2. दूरी की समस्या: नवडीहा क्षेत्र के लोगों को प्रखंड मुख्यालय जाने के लिए 18-20 किमी तक का सफर तय करना पड़ता है। इससे सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे ग्रामीणों तक नहीं पहुंच पाता।
    3. बुनियादी सुविधाओं की कमी: प्रस्तावित नवडीहा प्रखंड से जुड़ने वाले कई गांवों में पक्की सड़कें तक नहीं हैं, जिससे लोगों को आवाजाही में दिक्कत होती है।
    4. विकास की संभावना: नवडीहा में सहायक थाना, उच्च विद्यालय, बैंक, स्वास्थ्य केंद्र जैसी बुनियादी सुविधाएं पहले से उपलब्ध हैं, जिससे इसे प्रखंड बनाए जाने की पूरी योग्यता है।

    📌 पहले भी बने हैं छोटे प्रखंड:

    • गढ़वा जिले का रंका प्रखंड केवल 3 पंचायतों का है!
    • चतरा जिले का कुंदा प्रखंड 5 पंचायतों को मिलाकर बना!
    • फिर नवडीहा के 7 पंचायतों और 77 गांवों को प्रखंड बनाने में इतनी देरी क्यों?

    दो दशकों से चल रहा आंदोलन.

    यह मांग कोई नई नहीं है। 8 जनवरी 2001 से ही नवडीहा प्रखंड निर्माण को लेकर संघर्ष जारी है। विभिन्न राजनीतिक दल भी इस मांग का समर्थन कर चुके हैं। 2002, 2005 और 2010 में विधानसभा में भी यह मुद्दा उठ चुका है, लेकिन अभी तक सरकार की ओर से ठोस कदम नहीं उठाया गया।

    क्या बोले नेता?

    धरने का नेतृत्व कर रहे समिति के सचिव ओमप्रकाश महतो ने कहा,
    “हम 2001 से लड़ रहे हैं! अब आर-पार की लड़ाई होगी। इस बार सरकार को झुकना ही होगा!”

    समिति की नेत्री देवंती भारती ने प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा,
    “जब लावालौंग को 8 पंचायतों में, गिद्धौर को 6 पंचायतों में और पथलगढ़ा को 5 पंचायतों में प्रखंड बना दिया गया, तो फिर नवडीहा के साथ भेदभाव क्यों?”

    पुरन किशोर तुरी ने साफ कहा,
    “अगर हमारी मांग नहीं मानी गई, तो हम उग्र आंदोलन करेंगे।”

    क्या हुआ धरने में?

    धरने के बाद एक 5 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल गिरिडीह समाहरणालय पहुंचा और मुख्यमंत्री के नाम उपायुक्त को मांग पत्र सौंपा। आंदोलन में सोहन राम, जगदीश बैठा, सरफुद्दीन अंसारी, महेंद्र सिंह, विजय कुमार, कुसुम देवी, लालमुनी तुरी समेत सैकड़ों लोग मौजूद थे।

    अब देखना होगा कि सरकार इस मांग को कब तक सुनेगी या फिर नवडीहा के लोगों को अपने अधिकार के लिए और लंबी लड़ाई लड़नी पड़ेगी।

    – संवाददाता, द न्यूज पोस्ट4यू

  • पारसनाथ पर्वत को लेकर विवाद गहराया

    गिरिडीह में पारसनाथ पर्वत को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। संथाल समाज ने अपने पारंपरिक देव स्थल, मरांग बुरु, पर कथित अतिक्रमण के खिलाफ आवाज बुलंद की है। उनका कहना है कि यह स्थान उनकी आस्था का केंद्र है, जहां वे सदियों से पूजा-अर्चना करते आ रहे हैं। लेकिन अब जैन समुदाय द्वारा इसे अपने धार्मिक स्थल के रूप में स्थापित करने की कोशिश की जा रही है, जिससे विवाद की स्थिति बन गई है।

    संथाल समाज का विरोध, राष्ट्रपति को सौंपेंगे ज्ञापन

    इस मुद्दे को लेकर संथाल समाज ने हाल ही में मरांग बुरु संस्थान गिरिडीह के बैनर तले बैठक की। इसमें विभिन्न जिलों से आए समाज के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि 7 मार्च को गिरिडीह के उपायुक्त के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा जाएगा, और 12 मार्च को जोरदार विरोध मार्च निकाला जाएगा।

    संथाल समुदाय का आरोप है कि जैन समाज मरांग बुरु देव स्थल पर कब्जा करने की कोशिश कर रहा है। यह स्थान संथाल समाज के लिए बेहद पवित्र है, जहां वे वर्षों से पूजा करते आ रहे हैं। वैशाख पूर्णिमा के अवसर पर यहां तीन दिवसीय धार्मिक आयोजन किया जाता है, जिसमें बलि भी दी जाती है। लेकिन जैन समुदाय इस बलि प्रथा का विरोध कर रहा है, जिससे संथाल समाज के लोगों में आक्रोश है।

    धार्मिक मान्यताओं को लेकर टकराव

    संथाल समाज के नेता रामलाल मुर्मू ने स्पष्ट कहा कि पारसनाथ पर्वत उनके लिए मरांग बुरु, यानी पहाड़ देवता का स्वरूप है। यह उनकी आस्था का केंद्र है और उनकी परंपराओं का हिस्सा भी। बलि प्रथा उनके धार्मिक रीति-रिवाजों में शामिल है और इसे रोकने की किसी भी कोशिश का वे पुरजोर विरोध करेंगे।

    इस विरोध प्रदर्शन की अगुवाई के लिए एक संयोजक मंडल भी बनाया गया है, जिसमें रामलाल मुर्मू, महेश मुर्मू, सुधीर बास्के, दुर्गा चरण मुर्मू, सुरेंद्र टुडू, एतो बास्के, सोनाराम मांझी, रमेश हेंब्रम, रमेश टुडू, अनिल टुडू और शंकर सोरेन जैसे प्रमुख नेता शामिल हैं।

    सरकार से हस्तक्षेप की मांग

    संथाल समाज के नेताओं का कहना है कि अब वे अपने देव स्थल की रक्षा के लिए पूरी तरह से एकजुट हो चुके हैं। उन्होंने सरकार से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है, ताकि उनके धार्मिक अधिकारों की रक्षा की जा सके।

    उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अपनी परंपराओं और संस्कृति को बचाने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। पारसनाथ पर्वत पर अपनी धार्मिक मान्यताओं की रक्षा के लिए उनका संघर्ष जारी रहेगा। अब देखना यह होगा कि सरकार इस विवाद को शांत करने के लिए क्या कदम उठाती है।

  • झारखंड: नई बहाली से खिले चेहरे, जेएसएससी के 289 अभ्यर्थियों को मिला नियुक्ति पत्र

    झारखंड में सरकारी नौकरी का इंतजार कर रहे युवाओं के लिए आज का दिन बेहद खास रहा। लंबे संघर्ष और इंतजार के बाद झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) से चयनित 289 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र सौंपा गया। राजधानी रांची के प्रोजेक्ट भवन में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने खुद इन अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र सौंपे। हालांकि, गले में खराश होने के कारण वे भाषण नहीं दे सके, लेकिन उनकी मौजूदगी ही अभ्यर्थियों के लिए सपनों के सच होने जैसा अहसास थी।

    राज्य को मिले नए राजस्व निरीक्षक, विधि सहायक और अन्य पदाधिकारी.

    नियुक्ति पत्र मिलने के साथ ही राज्य को 174 राजस्व निरीक्षक, 44 विधि सहायक, 12 सेनेटरी एंड फूड इंस्पेक्टर, 8 पशु चिकित्सा पदाधिकारी और 9 नए गार्डेन अधीक्षक मिल गए हैं। यह नियुक्ति राज्य के शहरी निकायों की ताकत को बढ़ाने के साथ-साथ प्रशासनिक कार्यों को भी सुचारू रूप से संचालित करने में मदद करेगी।

    मंत्रियों ने दिलाई जिम्मेदारी की याद.

    इस मौके पर नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार, वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर और श्रम मंत्री संजय प्रसाद यादव ने नियुक्ति पाने वाले अभ्यर्थियों को बधाई देने के साथ-साथ उनकी जिम्मेदारियों की भी याद दिलाई।

    नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा कि झारखंड की 31% आबादी शहरी क्षेत्रों में रहती है, लेकिन मानव संसाधन की कमी के कारण सरकारी योजनाओं को लागू करने में दिक्कतें आती थीं। लेकिन अब इन नियुक्तियों से कामकाज में तेजी आएगी।

    वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि पिछली सरकार संविदा पर कर्मियों को नियुक्त करती थी, लेकिन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के दृढ़ संकल्प के चलते अब नियमित बहाली हो रही है। उन्होंने कहा कि यह तो सिर्फ शुरुआत है, आने वाले पांच सालों में और भी भर्तियां होंगी।

    श्रम मंत्री संजय प्रसाद यादव ने सभी नवनियुक्त कर्मियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सरकार आपके साथ है, बस समर्पित भाव से काम करें और राज्य के विकास में योगदान दें।

    संगठन और संघर्ष के बाद मिली जीत.

    चार साल तक नियुक्ति पत्र के इंतजार में संघर्ष करने वाले अभ्यर्थियों के चेहरे आज खुशी से खिल उठे। कई अभ्यर्थियों ने JSSC कार्यालय से लेकर राजभवन तक धरना प्रदर्शन किया, सरकार से बार-बार रिजल्ट जारी करने की मांग उठाई, और आज वह संघर्ष सफलता में बदल गया।

    अब झारखंड में नए सपनों की उड़ान

    सरकार की इस बहाली से जहां शहरी निकायों में विकास कार्यों को गति मिलेगी, वहीं युवाओं को अपने करियर को संवारने का मौका भी मिलेगा। सवाल यह भी है कि क्या यह बहाली अन्य लंबित भर्तियों का रास्ता साफ करेगी? अब देखना होगा कि सरकार अपने इस संकल्प को कितनी मजबूती से आगे बढ़ाती है।

    The News Post4U के लिए परवेज़ आलम की खास रिपोर्ट.

  • झारखंड में तंबाकू और गुटखे पर पूर्ण प्रतिबंध,अधिसूचना जारी

    स्वास्थ्य मंत्री ने कहा—अब बर्दाश्त नहीं होगी ज़हरीली लत!

    राज्य सरकार ने तंबाकू और निकोटिन युक्त गुटखा एवं पान मसाला पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। अब न तो राज्य में इसका निर्माण होगा, न भंडारण, न वितरण और न ही बिक्री। स्वास्थ्य विभाग ने मंगलवार को इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी, जिसमें स्पष्ट किया गया कि यह प्रतिबंध फिलहाल एक वर्ष के लिए लागू रहेगा, जिसे बाद में आगे भी बढ़ाया जा सकता है।

    स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने इस फैसले को जनस्वास्थ्य के हित में ऐतिहासिक कदम बताते हुए साफ किया कि राज्य के लोगों की सेहत के साथ कोई समझौता नहीं होगा। उन्होंने कहा—
    “गुटखा और पान मसाले के कारण कैंसर जैसी घातक बीमारी तेजी से फैल रही है, खासकर हमारे युवा सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। एक डॉक्टर होने के नाते मैं जानता हूं कि यह ज़हर किस हद तक शरीर को नुकसान पहुंचाता है। इसलिए, जो भी इसे बेचेगा, भंडारण करेगा या सेवन करेगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”

    गुटखा माफियाओं पर प्रशासन की सख्त नजर!

    सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि अवैध कारोबारियों और गुटखा माफियाओं पर विशेष नजर रखी जाएगी। किसी भी दुकान, गोदाम या व्यक्ति के पास गुटखा मिलने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई होगी और गोदाम सील कर दिए जाएंगे। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि इस आदेश का कठोरता से पालन कराया जाए।

    माताओं और बहनों की गुहार पर लिया गया बड़ा फैसला

    स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि महिलाओं की ओर से लगातार गुहार लगाई जा रही थी कि उनके बच्चे और भाई नशे की चपेट में आकर अपना जीवन बर्बाद कर रहे हैं। उन्होंने कहा—
    “मैंने उनकी पीड़ा को समझा और यह ठोस निर्णय लिया। अब झारखंड को गुटखा मुक्त बनाना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।”

    अब देखना होगा कि सरकार के इस सख्त फैसले के बाद राज्य में गुटखा का अवैध कारोबार कैसे खत्म किया जाता है, और क्या यह फैसला झारखंड को वास्तव में तंबाकू मुक्त बना पाएगा?

    The News Post4U के लिए परवेज़ आलम की खास रिपोर्ट