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  • जयराम महतो, हेमंत सोरेन की सरकार में मंत्री बनेंगे !

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट………

    डुमरी विधायक जयराम महतो, हेमंत सोरेन की सरकार में मंत्री बनेंगे ! चौक गए न  । हेमंत सोरेन सरकार में जयराम महतो का मंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है। ऐसा क्यों? क्योंकि उनकी पार्टी जेएलकेएम ने झारखंड चुनाव में धमाकेदार प्रदर्शन किया है। 15 से ज़्यादा सीटों पर एनडीए का खेल बिगाड़ने वाली इस पार्टी के प्रदर्शन को हर राजनीतिक दल ने सराहा है। अब सवाल यह है कि हेमंत सोरेन इस फैसले के पीछे क्या रणनीति रख रहे हैं?
    दरअसल, जयराम महतो 15% कुर्मी वोटों के बड़े नेता बनकर उभरे हैं। अगर वह सरकार में शामिल होते हैं, तो इसका फायदा इंडिया गठबंधन को कुर्मी समुदाय के वोटों के रूप में मिल सकता है।
    चलिए अब झारखंड मंत्रिमंडल की संभावित तस्वीर पर बात करते हैं।
    आपको बता दें, झारखंड विधानसभा में कुल 81 विधायक हैं और मुख्यमंत्री समेत 12 मंत्री बनाए जा सकते हैं। झामुमो के खाते से 5 से 6 मंत्री, कांग्रेस के 3 से  4 मंत्री, और राजद – माले से 1- 1 मंत्री बनाए जाने की संभावना है।
    झामुमो से किनके नाम  हैं?
    दीपक बिरुवा, हफीजुल हसन, और रामदास सोरेन का नाम चल रहा है। महिला कोटा से कल्पना सोरेन को मंत्री बनाने का दबाव झामुमो पर है। अभी पार्टी के अंदर इस बात का मंथन चल रहा है की कल्पना मुर्मू सोरेन को मंत्रिमंडल में शामिल किया जाए या नहीं। ज्यादातर विधायकों का दबाव है की कल्पना सोरेन को मंत्रिमंडल में स्थान मिलना चाहिए क्योंकि उनके जबरदस्त परफॉर्मेंस की वजह से ही विधायक बड़ी संख्या में जीत कर आए हैं तो अब सवाल यह है की कल्पना मुर्मू सोरेन मंत्रिमंडल में शामिल होती है या नहीं अभी इंतजार करना होगा और अगर कल्पना मुर्मू सोरेन मंत्री नहीं बनती है तो महिला कोटे से जामा से जीत कर आई लुईस मरांडी और इचागढ़ से जीती सविता महतो में से किसी एक को मंत्री बनाया जा सकता है

    इधर कांग्रेस से इरफान अंसारी और दीपिका सिंह पांडे का  नाम मंत्री के लिए चल  रहा है। वहीं, प्रदीप यादव, ममता देवी, और जयमंगल सिंह भी रेस में हैं। सूत्रों के मुताबिक, अगर जयराम महतो को जगह मिलती है, तो कांग्रेस को तीन मंत्री और  एक भारी-भरकम मंत्रालय देकर संतुलन साधा जा सकता है ।
    राजद की स्थिति क्या है?
    राजद से सिर्फ 1 मंत्री बनाए जाने की चर्चा है। इस दौड़ में सुरेश पासवान और संजय यादव के नाम हैं। लेकिन फाइनल फैसला तेजस्वी यादव करेंगे।
    सीपीआई(माले) का क्या होगा?
    पिछली बार समर्थन देने के बावजूद माले सरकार में शामिल नहीं हुआ था। इस बार, अरुप चटर्जी को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है।

    हेमंत मंत्रिमंडल में जातीय संतुलन को साधने की भी पूरी कोशिश हो रही है साथ ही प्रमंडलीय स्तर पर भी प्रतिनिधित्व मिले इसके भी कोशिश हो  रही है लेकिन सबसे बड़ा सवाल है की मुख्यमंत्री सहित 12 मंत्री में जयराम महतो की क्या भूमिका होगी क्या इंडिया ब्लॉक जयराम महतो को मंत्रिमंडल में शामिल करने पर सहमत है या सिर्फ हेमंत सोरेन ही चाहते हैं कि जयराम महतो मंत्रिमंडल में शामिल हो । क्या होगा मामला यह अभी देखना दिलचस्प होगा।

  • झारखंड: विधानसभा में एंग्लो इंडियन प्रतिनिधित्व का अंत

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट …..
    झारखंड की राजनीति में एक बड़ा बदलाव दर्ज हुआ है। राज्य की विधानसभा में सदस्यों की संख्या अब 82 से घटकर 81 हो गई है। वजह? एंग्लो इंडियन समुदाय को मिलने वाला विशेष प्रतिनिधित्व, जो 1952 से झारखंड ही नहीं, पूरे देश में एक पहचान बना रहा था, अब संवैधानिक रूप से समाप्त कर दिया गया है।

    ग्लेन जोसेफ गॉलस्टेन: आखिरी एंग्लो इंडियन विधायक
    2019 में झारखंड की पांचवीं विधानसभा का गठन हुआ था। उस दौरान मैकलुस्कीगंज के रहने वाले ग्लेन जोसेफ गॉलस्टेन को एंग्लो इंडियन समुदाय का प्रतिनिधि चुना गया था। वो विधानसभा के 82वें सदस्य बने। लेकिन, जैसे ही इस विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होगा, उनकी यह भूमिका भी खत्म हो जाएगी। खुद गॉलस्टेन कहते हैं, “दुख है कि अब हमारा समुदाय झारखंड विधानसभा में नहीं दिखेगा। ये एक परंपरा थी, जो अब खत्म हो गई।”

    संविधान में 1952 से लिखी गई थी ये व्यवस्था
    संविधान के अनुच्छेद 333 और 334बी ने एंग्लो इंडियन समुदाय को एक खास पहचान दी थी। अनुच्छेद 334बी के तहत, लोकसभा में दो एंग्लो इंडियन सदस्यों को राष्ट्रपति द्वारा नामांकित किया जा सकता था। वहीं, अनुच्छेद 333 के तहत, राज्यपाल को एक सदस्य को विधानसभा में नामांकित करने का अधिकार दिया गया था।

    126वें संविधान संशोधन ने किया इस व्यवस्था का अंत
    जनवरी 2020 में संसद में पारित 126वें संविधान संशोधन ने देशभर में इस व्यवस्था को समाप्त कर दिया। झारखंड सहित 13 राज्यों की विधानसभाओं और संसद में एंग्लो इंडियन समुदाय का प्रतिनिधित्व खत्म कर दिया गया।

    पिता-पुत्र की विरासत
    झारखंड के एंग्लो इंडियन समुदाय की राजनीतिक कहानी दिलचस्प रही है। 2000 में झारखंड राज्य के गठन के बाद, जोसेफ पंचोली ग्लेस्टिन 2005 और 2009 में एंग्लो इंडियन विधायक बने। फिर, 2014 और 2019 में उनके बेटे ग्लेन जोसेफ गॉलस्टेन ने यह विरासत संभाली। अब, इस समुदाय की राजनीतिक उपस्थिति सिर्फ इतिहास का हिस्सा बनकर रह जाएगी।

     

  • 28 नवंबर: झारखंड की राजनीति में रचने वाला है नया अध्याय!

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट……..
    28 नवंबर को रांची के मोरहाबादी मैदान में होने जा रहा है एक भव्य आयोजन। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के नेता हेमंत सोरेन चौथी बार राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे। आइए जानते हैं इस बड़े सियासी आयोजन से जुड़ी हर अहम बात।
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    हेमंत सोरेन: फिर करेंगे नई पारी की शुरुआत
    हेमंत सोरेन, जो झारखंड की राजनीति में एक मजबूत पहचान बना चुके हैं, चौथी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे।
    • उन्होंने बरहेट विधानसभा सीट से भाजपा के गमालियल हेम्ब्रम को 39,791 वोटों के बड़े अंतर से हराकर यह जीत दर्ज की।
    • झारखंड की जनता ने एक बार फिर से झामुमो के नेतृत्व पर भरोसा जताया है।
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    भव्य शपथ ग्रहण समारोह में जुटेंगे ‘इंडिया’ के दिग्गज नेता
    28 नवंबर को झारखंड की राजधानी रांची के मोरहाबादी मैदान में शपथ ग्रहण का आयोजन होगा।
    इंडिया गठबंधन के तमाम शीर्ष नेताओं को इस कार्यक्रम के लिए आमंत्रित किया गया है।
    संभावित बड़े नाम:
    1. राहुल गांधी (लोकसभा में विपक्ष के नेता)
    2. ममता बनर्जी (टीएमसी सुप्रीमो)
    3. तेजस्वी यादव (राजद नेता)
    यह शपथ ग्रहण केवल एक प्रशासनिक आयोजन नहीं होगा, बल्कि।

  • झारखंड में अपराधी विधायकों की बढ़ती संख्या पर बड़ा सवाल !

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट…….

    झारखंड विधानसभा में अपराधियों का जलवा!
    आपको जानकर हैरानी होगी, लेकिन झारखंड की राजनीति का चेहरा एक बार फिर दागदार हो गया है। हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में, 81 में से 43 विधायकों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं। ये हम नहीं कह रहे, बल्कि एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की रिपोर्ट चीख-चीख कर ये सच बयान कर रही है।

    महिलाओं के खिलाफ अपराध – शर्मनाक आंकड़े
    चौंकाने वाला तथ्य ये है कि पांच विधायकों पर महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले हैं। और हद तो तब हो गई, जब एक विधायक ने खुद बलात्कार के मामले (IPC 376) को अपने हलफनामे में स्वीकार किया।

    हत्या और हत्या के प्रयास के आरोप – खून-खराबे की राजनीति?
    हत्या के मामले: दो विधायकों ने IPC 302 के तहत हत्या के मामले घोषित किए।
    हत्या के प्रयास: 19 विधायकों ने IPC 307 के तहत हत्या के प्रयास के मामले कबूले हैं।
    पार्टीवार अपराधीकरण का आंकड़ा – कौन है सबसे आगे?
    झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM):
    34 विजयी उम्मीदवारों में से 12 (35%) पर आपराधिक मामले।
    9 (26%) पर गंभीर अपराध।
    भारतीय जनता पार्टी (BJP):
    21 विजयी उम्मीदवारों में से 13 (62%) पर आपराधिक मामले।
    11 (52%) पर गंभीर अपराध।
    कांग्रेस (INC):
    15 में से 8 (53%) पर आपराधिक मामले।
    6 (40%) पर गंभीर अपराध।
    राष्ट्रीय जनता दल (RJD):
    4 में से 4 (100%) पर आपराधिक मामले।
    तो क्या ऐसे होंगे जनता के प्रतिनिधि?
    ADR की ये रिपोर्ट सिर्फ आंकड़े नहीं, एक आईना है जो दिखाता है कि राजनीति का अपराधीकरण किस हद तक बढ़ चुका है। सवाल ये उठता है कि ऐसे ‘माननीय’ क्या जनता के हितों की रक्षा करेंगे या अपने ‘आपराधिक करियर’ को आगे बढ़ाएंगे?

  • झारखंड: 89% नवनिर्वाचित विधायक धनकुबेर !

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट ……….
    झारखंड में विधानसभा चुनाव के बाद एक बेहद दिलचस्प आंकड़ा सामने आया है। क्या आप जानते हैं कि इस बार झारखंड में 89% नवनिर्वाचित विधायक ‘करोड़पति’ हैं? चलिए आपको समझाते हैं इस रिपोर्ट का हर पहलू।
    झारखंड इलेक्शन वॉच और एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) ने  चुनाव जीतने वाले 81 विधायकों में से 80 ने अपने हलफनामों का विश्लेषण किया है  और क्या मिला? कुल 71 विधायक करोड़पति निकले !
    2019 के मुकाबले बड़ा इजाफा
    याद कीजिए, 2019 में ऐसे विधायकों की संख्या 56 थी। और 2014 में सिर्फ 41! यानी करोड़पति विधायकों का ग्राफ ऊपर ही जा रहा है। इस बार तो 20% ज्यादा करोड़पति विधायक चुनकर आए हैं।
    किसकी पार्टी में कितने करोड़पति?
    सबसे ज्यादा करोड़पति विधायकों का रिकॉर्ड झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के पास है।
    • JMM: 28
    • भाजपा: 20
    • कांग्रेस: 14
    • राजद: 4
    • भाकपा (माले): 2
    • लोजपा (रामविलास), जद (यू), आजसू पार्टी: 1-1
    सबसे अमीर विधायक कौन?
    यहां सबसे बड़ी सुर्खी हैं कांग्रेस के लोहरदगा विधायक रामेश्वर उरांव, जिनकी कुल संपत्ति 42.20 करोड़ रुपये है।
    औसत संपत्ति भी बढ़ी!
    चुनाव जीतने वाले हर विधायक की औसत संपत्ति 6.90 करोड़ रुपये निकली। 2019 में यह 3.87 करोड़ रुपये थी। यानी झारखंड की राजनीति में धनकुबेरों का दबदबा साफ दिख रहा है।
    तो सवाल उठता है…
    क्या राजनीति में धन कुबेर बनना ज़रूरी हो गया है ? या ये महज संयोग है? क्या करोड़ों की संपत्ति विकास का प्रतिबिंब है या राजनीति में बढ़ते खर्च का परिणाम?
    झारखंड की राजनीति के इन दिलचस्प पहलुओं पर आपकी क्या राय है? हमें कमेंट करके जरूर बताएं।

  • अयोध्या के बाद देवघर में भी बीजेपी को हारी

    परवेज़ आलम 
    RANCHI: झारखंड विधानसभा चुनाव में बीजेपी को एक और बड़ा झटका लगा है। भोले बाबा की नगरी देवघर में इस बार इंडिया गठबंधन ने कमल को मुरझा दिया। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रत्याशी सुरेश पासवान ने बीजेपी के नारायण दास को 39,000 से ज्यादा वोटों से हराकर यह सीट जीत ली। देवघर से मिली इस हार ने बीजेपी की हिंदुत्व राजनीति और उसके विकास मॉडल पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सुरेश पासवान ने 1,56,079 वोट हासिल किए, जबकि नारायण दास को 1,16,358 मतों पर ही संतोष करना पड़ा।
    बीजेपी की हिंदुत्व रणनीति फेल?
    देवघर, जिसे भोले बाबा की नगरी के नाम से जाना जाता है, हिंदुत्व की राजनीति के लिए एक अहम केंद्र माना जाता है। बीजेपी ने हमेशा धार्मिक स्थलों के विकास को अपने एजेंडे में प्राथमिकता दी है।
    • काशी विश्वनाथ कॉरिडोर हो,
    • उज्जैन का महाकाल लोक,
    • या अयोध्या में राम मंदिर निर्माण,
    बीजेपी ने धार्मिक नगरी में भारी निवेश किया।
    देवघर में भी एयरपोर्ट का निर्माण और कई अन्य विकास कार्य किए गए। लेकिन, इसके बावजूद देवघर की जनता ने बीजेपी को नकार दिया और इंडिया गठबंधन के साथ खड़ी हो गई।
    अयोध्या से देवघर तक हार का सिलसिला
    यह हार बीजेपी के लिए नई नहीं है। इसी साल लोकसभा चुनाव में भी अयोध्या के अंतर्गत आने वाली फैजाबाद लोकसभा सीट पर बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा था।
    समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार अवधेश प्रसाद ने बीजेपी को हराया था। अब देवघर में इंडिया गठबंधन ने यह सिलसिला जारी रखते हुए बीजेपी को करारी शिकस्त दी है।
    देवघर चुनाव: इंडिया गठबंधन का दबदबा
    झारखंड विधानसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन (जेएमएम, कांग्रेस, आरजेडी, सीपीआई-एमएल) ने सत्ता में अपनी पकड़ बरकरार रखी है।
    देवघर में इंडिया गठबंधन की बड़ी जीत
    देवघर की हार बीजेपी के लिए सिर्फ एक चुनावी परिणाम नहीं, बल्कि उसके धार्मिक और विकासवादी राजनीति पर बड़ा सवाल है।
    इंडिया गठबंधन इसे बड़ी जीत मानते हुए प्रचारित कर रहा है। क्या यह हार बीजेपी के हिंदुत्व एजेंडे का असर कम होने का संकेत है? या जनता ने विकास के नाम पर सिर्फ दावे करने वालों को नकार दिया है?
    राजनीतिक संदेश
    देवघर और अयोध्या जैसी धार्मिक नगरी में हार का सिलसिला बीजेपी के लिए चेतावनी है। जहां हिंदुत्व बीजेपी का कोर मुद्दा है, वहीं अब जनता इस मुद्दे से इतर वास्तविक विकास और जमीनी मुद्दों पर अपना निर्णय सुना रही है।

  • कल बने विधायक अब देंगे इस्तीफा!

    परवेज़ आलम 

     

    झारखंड विधानसभा चुनावमें 10 सीटों पर दांव लगाने वाली आजसू पार्टी को इस बार सिर्फ एक सीट पर जीत मिली। लेकिन उनके इकलौते विधायक निर्मल महतो ने राजनीति के गलियारों में हलचल मचा दी है। जीत के बाद सोशल मीडिया पर उनका एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वह अपनी सीट छोड़ने की बात कर रहे हैं।

    निर्मल महतो की सीट छोड़ने की पेशकश

    निर्मल महतो, जिन्होंने मांडू विधानसभा सीट से जीत हासिल कर आजसू पार्टी का खाता खोला, अब चाहते हैं कि उनकी सीट से पार्टी सुप्रीमो सुदेश महतो चुनाव लड़ें। वीडियो में उन्होंने कहा,

    “झारखंड विधानसभा में सुदेश महतो जैसी शख्सियत की जरूरत है। वे जिस अंदाज में जनता के मुद्दे उठाते हैं, वैसा कोई दूसरा नेता नहीं करता। मैं स्वेच्छा से अपनी सीट उनके लिए छोड़ने को तैयार हूं।”

    निर्मल महतो ने अपनी जीत का श्रेय क्षेत्र की जनता, सुदेश महतो, और एनडीए के सहयोगी दलों के नेताओं को दिया। उन्होंने कहा कि जल्द ही वह सुदेश महतो से मुलाकात करेंगे और उनसे आग्रह करेंगे कि वे मांडू से चुनाव लड़ें।

    जनता से भी की अपील

    निर्मल महतो ने जनता से भी अनुरोध किया कि वे सुदेश महतो को मांडू से जिताकर विधानसभा भेजें। उन्होंने कहा कि झारखंड विधानसभा में आजसू पार्टी की ताकत बढ़ाने और जनता की आवाज बुलंद करने के लिए यह जरूरी है।

    आजसू पार्टी का प्रदर्शन

    इस बार के झारखंड विधानसभा चुनाव में आजसू पार्टी को उम्मीद के मुताबिक सफलता नहीं मिली। 10 सीटों पर लड़ने के बाद केवल मांडू से जीत मिली। निर्मल महतो की जीत के साथ ही पार्टी ने विधानसभा में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, लेकिन इस वीडियो बयान ने पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों को हैरान कर दिया है।

    क्या कहते हैं राजनीतिक समीक्षक?

    निर्मल महतो के इस कदम को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। कुछ इसे उनकी निष्ठा और समर्पण का उदाहरण मानते हैं, तो कुछ इसे राजनीतिक रणनीति का हिस्सा बता रहे हैं।

    क्या सचमुच सुदेश महतो मांडू से चुनाव लड़ेंगे?
    क्या आजसू पार्टी अपने इकलौते विधायक को इस्तीफा देने देगी?
    इन सवालों के जवाब जल्द सामने आएंगे, लेकिन इतना तो तय है कि निर्मल महतो के इस बयान ने झारखंड की राजनीति को एक नई दिशा दे दी है।

  • झारखंड: 12 महिला विधायकों ने दर्ज कराई उपस्थिति

    परवेज़ आलम

    झारखंड की राजनीति में इस बार का चुनाव ऐतिहासिक रहा। महिलाओं ने वो कर दिखाया, जो पहले कभी नहीं हुआ। इस बार विधानसभा में 12 महिलाओं ने जीत का परचम लहराया। इनमें से 8 विधायक इंडिया गठबंधन से और 4 विधायक बीजेपी के टिकट पर विजयी रहीं।
    झामुमो की महिलाओं का दमदार प्रदर्शन
    झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने महिलाओं को न सिर्फ मौका दिया, बल्कि उन्होंने उसे भुनाया भी।
    • गांडेय: कल्पना मुर्मू सोरेन ने बीजेपी की मुनिया देवी को 17,142 वोटों से हराकर जीत दर्ज की।
    • जामा: पूर्व मंत्री लुईस मरांडी ने बीजेपी के सुरेश मुर्मू को 5,738 वोटों से मात दी।
    • इचागढ़: सविता महतो ने आजसू के हरेलाल महतो को 26,523 वोटों से हराया।
    कांग्रेस की महिलाओं की चमक
    कांग्रेस की महिला उम्मीदवारों ने भी शानदार प्रदर्शन किया।
    • पाकुड़: निसात आलम ने आजसू के अजहर इस्लाम को 86,029 वोटों से हराया।
    • महगामा: दीपिका पांडे सिंह ने बीजेपी के अशोक कुमार को 18,645 वोटों से हराया।
    • रामगढ़: ममता देवी ने आजसू की सुनीता चौधरी को 6,790 वोटों से मात दी।
    • बोकारो: श्वेता सिंह ने बीजेपी के बिरंची नारायण को 7,207 वोटों से हराया।
    • मांडर: शिल्पी नेहा तिर्की ने बीजेपी के सन्नी टोप्पो को 22,803 वोटों से हराया।
    बीजेपी की महिला उम्मीदवारों की जीत
    बीजेपी की ओर से भी 4 महिला विधायकों ने अपना दमखम दिखाया।
    • कोडरमा, झरिया, जमुआ और जमशेदपुर ईस्ट सीट पर महिला उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की, जो झारखंड की राजनीति में महिलाओं के बढ़ते कदम को दर्शाता है।
    इतिहास में पहली बार 12 महिलाएं बनीं विधायक
    झारखंड विधानसभा चुनाव के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है, जब इतनी बड़ी संख्या में महिलाओं ने जीत हासिल कर विधानसभा में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। यह जीत न सिर्फ झारखंड की राजनीति में महिलाओं की मजबूत होती पकड़ का प्रतीक है, बल्कि आने वाले समय में महिला नेतृत्व के बढ़ने का संकेत भी देती है।

     

     

  • 26 को नहीं 28 को होगा हेमंत सरकार का शपथ

    RANCHI : झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन मंगलवार को इंडिया गठबंधन के प्रतिनिधिमंडल के साथ राजभवन पहुंचे। उन्होंने राज्यपाल से मुलाकात कर नई सरकार बनाने का दावा पेश किया।

    राजभवन में बैठक के बाद हेमंत सोरेन ने प्रेस को संबोधित करते हुए कहा, “इंडिया गठबंधन की ओर से नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। हमने वर्तमान सरकार से इस्तीफा देते हुए आगामी सरकार बनाने का प्रस्ताव राज्यपाल को सौंपा है। अब अगली कार्यवाही की तैयारी की जाएगी।”

    हेमंत सोरेन ने यह भी घोषणा की कि नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह 28 नवंबर, गुरुवार को मोरहाबादी मैदान में आयोजित किया जाएगा। हालांकि, मंत्रीमंडल के गठन पर उन्होंने कोई जानकारी नहीं दी।

    इस राजनीतिक घटनाक्रम से झारखंड में सत्ता परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त हो गया है। अब सभी की नजरें नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह और कैबिनेट के गठन पर टिकी हैं।

  • तुम्हारी जीत से ज्यादा मेरी हार के चर्चे

    परवेज़ आलम
    झारखंड की राजनीति में इस बार ये लाइन जेएलकेएम यानी झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा पर बिल्कुल सटीक बैठती है। 71 सीटों पर लड़ाई लड़ी, लेकिन जीते सिर्फ एक। और उस एक जीत के बाद भी उनके चर्चे उनकी हार से ज्यादा हैं। जीत तो बस डुमरी की थी, लेकिन हार ने बीजेपी और आजसू का समीकरण बिगाड़ दिया।

    एक जीत और 70 हार की कहानी
    दो महीने पुरानी पार्टी। चुनाव आयोग में रजिस्टर्ड और सीधे विधानसभा चुनाव में 71 उम्मीदवार। सुनने में लगा था कि जयराम महतो कोई बड़ा राजनीतिक तूफान लाने वाले हैं, लेकिन उन्होंने खुद डुमरी से जीतकर और बाकी 70 सीटों पर हारकर एनडीए का गणित जरूर हिला दिया।

    एनडीए की लुटिया डुबोने वाला खेल
    एनडीए को उम्मीद थी कि कुर्मी समाज के वोट आजसू और बीजेपी के पक्ष में जाएंगे। लेकिन जयराम महतो ने वोट काटकर वह खेल खराब कर दिया।

    जेएमएम की जीती 34 सीटों में से 15 सीटों पर जेएलकेएम तीसरे स्थान पर रही।
    कांग्रेस की 16 सीटों में से 6 सीटों और भाकपा माले की 2 सीटों पर भी जेएलकेएम ने वोट काटे।
    एनडीए की जीती 24 सीटों में से भी 9 सीटों पर जेएलकेएम ने तीसरा स्थान हासिल किया।
    सुदेश महतो का दर्द
    अब आइए सिल्ली सीट पर। यहां सुदेश महतो, जो कुर्मी समाज के सबसे बड़े चेहरे माने जाते हैं, उन्हें 23,867 वोटों से हार का सामना करना पड़ा। और हराने वाले थे जेएलकेएम के उम्मीदवार देवेंद्रनाथ महतो, जिन्होंने 41,725 वोट लेकर सुदेश महतो का खेल खत्म कर दिया।

    राजनीतिक संदेश
    झारखंड की 81 सीटों में एनडीए सिर्फ 24 पर सिमट गई, जबकि इंडिया गठबंधन ने 56 सीटें जीत लीं। जेएलकेएम ने भले ही सिर्फ एक सीट जीती, लेकिन उसकी छाया हर तरफ रही। कैंची छाप के उम्मीदवारों ने कई जगह एनडीए को नुकसान पहुंचाया। जयराम महतो ने कुर्मी समाज के 15% वोट बैंक को साधने की कोशिश की, लेकिन उनके पास संसाधन और राजनीतिक नेटवर्क की कमी थी। यह चुनाव यह बताता है कि छोटे दल सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि बड़े दलों के लिए भी कितना बड़ा खतरा बन सकते हैं।   झारखंड में इस बार की राजनीति एक बड़ा संदेश देती है। जयराम महतो की जीत से ज्यादा उनकी हार ने सुर्खियां बटोरीं। कभी-कभी राजनीति में हार जीत से बड़ी कहानी बन जाती है। एनडीए को समझना होगा कि क्षेत्रीय पार्टियों के उभार को नजरअंदाज करना उनके लिए भारी पड़ सकता है। क्योंकि राजनीति में एक सीट भी पूरा गणित बदल सकती है।