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  • उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल में आजसू की बैठक, संगठन विस्तार समेत विभिन्न मुद्दों पर मंथन

    झारखंड की राजनीति में नई दिशा: आजसू पार्टी की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित

    झारखंड की राजनीति में नया मार्ग प्रशस्त करने के उद्देश्य से आजसू पार्टी ने उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल की एक अहम बैठक गिरिडीह के मधुबन में आयोजित की। इस बैठक में धनबाद, गिरिडीह, कोडरमा, हजारीबाग और चतरा जिलों के केंद्रीय समिति पदाधिकारी, केंद्रीय सदस्य, जिला और नगर स्तर के प्रतिनिधि शामिल हुए।

    बैठक में राज्य की वर्तमान राजनीतिक स्थिति, संगठन के विस्तार, आगामी चुनावी रणनीतियों और जनसंपर्क अभियानों पर विस्तार से चर्चा हुई। पार्टी के सुप्रीमो सुदेश महतो की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में उन्होंने कार्यकर्ताओं से झारखंड की जनता के प्रहरी के रूप में खड़े होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पार्टी को एक मजबूत विपक्ष के रूप में उभरने के लिए सरकार की नीतियों और घोषणाओं का आकलन करना होगा, ताकि यह पता चल सके कि वे जमीनी स्तर पर कितनी प्रभावी हैं।

    बैठक में गिरिडीह सांसद चंद्रप्रकाश चौधरी, मांडू विधायक तिवारी महतो, गोमिया के पूर्व विधायक डॉ. लम्बोदर महतो और केंद्रीय मुख्य प्रवक्ता डॉ. देवशरण भगत ने भी अपने विचार साझा किए। बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि झारखंड को सामूहिक नेतृत्व से आगे बढ़ाया जाएगा और संगठन के विस्तार को प्राथमिकता दी जाएगी। विशेष रूप से उत्तरी छोटानागपुर क्षेत्र के गांवों, विधानसभा और लोकसभा क्षेत्रों में पार्टी को मजबूत करने पर जोर दिया गया।

    इसके अलावा, नगर निकाय चुनावों के मद्देनजर शहरी क्षेत्रों में संगठन के विस्तार पर विशेष ध्यान देने की रणनीति बनाई गई। युवाओं को पार्टी से जोड़ने के लिए “युवा संवाद” कार्यक्रम की शुरुआत की जाएगी, जिसमें सुदेश महतो जिले और प्रखंड स्तर पर युवाओं से संवाद करेंगे। महिलाओं की सक्रिय भागीदारी बढ़ाने के लिए भी कार्ययोजना तैयार की गई।

    साथ ही, सोशल मीडिया के प्रभावी उपयोग पर भी चर्चा हुई, ताकि पार्टी की नीतियों और कार्यक्रमों को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाया जा सके। बैठक में शामिल सभी सदस्यों ने झारखंड के सबसे बड़े विपक्षी दल के रूप में पार्टी को मजबूती से स्थापित करने और जनता के हक-अधिकारों के लिए संघर्ष को और धार देने के संकल्प को दोहराया।

    हेमंत सरकार पर आजसू का प्रहार

    झारखंड में एक बार फिर हेमंत सरकार के सत्ता में आते ही विकास और विनाश की परिभाषा स्पष्ट हो गई है। सरकार न तो विस्थापन नीति बना पाई, न नियोजन नीति, न स्थानीय नीति, और न ही महिलाओं को 2500 रुपये देने का वादा पूरा हुआ। JPSC और JSSC ने अब तक परीक्षा कैलेंडर जारी नहीं किया, जिससे युवा असमंजस में हैं। महिलाओं और आम जनता की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

    अब झारखंड में पहली बार मैट्रिक परीक्षा के पेपर लीक का मामला सामने आया है, जिससे लाखों छात्रों के भविष्य पर संकट मंडरा रहा है। इस गंभीर मुद्दे पर सरकार कार्रवाई करने के बजाय आरोप-प्रत्यारोप में उलझी हुई है।

    आजसू पार्टी का आरोप है कि हेमंत सरकार के कार्यकाल में बांग्लादेशी घुसपैठियों को संरक्षण दिया जा रहा है, अपराध बढ़ रहे हैं, पेपर लीक हो रहे हैं, और माफियाओं को बढ़ावा मिल रहा है। सरकार की नीतियां पूरी तरह जनविरोधी हैं, जिससे प्रदेश में अस्थिरता का माहौल बना हुआ है।

    आजसू पार्टी का कहना है कि उनका संघर्ष हमेशा जनता के हक-अधिकारों के लिए रहेगा। पार्टी ने अन्य राज्यों में विस्थापितों के लिए “ट्रिब्यूनल एक्ट” लागू करवाने में अहम भूमिका निभाई, लेकिन झारखंड में अब तक इसे लागू नहीं किया गया।

    पार्टी ने झारखंड आंदोलन के संघर्ष को याद करते हुए कहा कि वे आने वाले समय में राजनीतिक परिदृश्य बदलने के संकल्प के साथ आगे बढ़ते रहेंगे। इस कार्यक्रम में पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष सुदेश कुमार महतो, मांडू विधायक तिवारी महतो, पूर्व विधायक डॉ. लंबोदर महतो, केंद्रीय प्रवक्ता डॉ. देवशरण भगत समेत बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता शामिल हुए।

  • सुदेश महतो को खाली करना होगा सरकारी घर, बनेगा हेमंत सोरेन का नया ठिकाना 

    RANCHI: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आवासीय कार्यालय को अस्थायी रूप से कांके रोड के आवास संख्या-05 में शिफ्ट किया जा रहा है। ये वही आवास है, जिसमें पिछले कई सालों से आजसू प्रमुख सुदेश महतो रह रहे थे। अब उन्हें यह घर खाली करना होगा।

    क्यों हो रहा है बदलाव?
    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के वर्तमान आवासीय परिसर की मरम्मत का काम होना है। जब तक यह काम पूरा नहीं हो जाता, तब तक सीएम का आवासीय कार्यालय कांके रोड स्थित इस सरकारी भवन में शिफ्ट किया जाएगा। भवन निर्माण विभाग की ओर से इस फैसले को लेकर अधिसूचना जारी कर दी गई है। आदेश में कहा गया है कि आवास संख्या-05, जो पहले पूर्व मुख्य सचिव का घर था, अब मुख्यमंत्री का नया अस्थायी आवासीय कार्यालय होगा।
    साल 2009 में यह आवास आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो को आवंटित किया गया था। इस घर से आजसू पार्टी के सारे कामकाज होते थे, और सुदेश महतो खुद भी यहीं रहते थे। लेकिन अब यह घर सीएम हेमंत सोरेन को सौंपा जाएगा।

  • कैसे एक चिट्ठी ने AJSU का चुनावी माहौल खराब कर दिया, जानिए पूरी कहानी

    HAZARIBAGH :जब झारखंड में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हुआ, तो हर पार्टी अपने-अपने समीकरण साधने में जुटी थी। आजसू पार्टी भी पूरे दमखम से अपने वोट बैंक को साधने की कोशिशों में लगी थी। लेकिन इसी बीच एक चिट्ठी ने चुनावी माहौल को गर्म कर दिया। ये चिट्ठी कहां से आई, किसने लिखी, कोई नहीं जानता। लेकिन इसके असर से झारखंड की सियासत में भूचाल आ गया।

    इस चिट्ठी में कुरमी समाज के भीतर सालों से सुलग रही नाराजगी को शब्द दिए गए थे। हेडलाइन थी— “आखिर कुरमी समाज आजसू को वोट क्यों दे?” और जब नतीजे आए, तो साफ हो गया कि ये चिट्ठी आजसू पार्टी के लिए कितनी घातक साबित हुई। पार्टी महज एक सीट पर सिमट गई, और कुरमी समाज ने अपना नया नेता जयराम महतो को चुन लिया।

    क्यों नाराज हुआ कुरमी समाज?

    चिट्ठी ने आजसू पर सीधे-सीधे आरोप लगाए।

    • निर्मल महतो के परिवार का अपमान: शहीद निर्मल महतो के छोटे भाई सुधीर महतो की मृत्यु के बाद उनकी पत्नी सबिता महतो को चुनाव हराने के लिए आजसू ने पूरी ताकत झोंक दी। चिट्ठी का दावा है कि अगर आजसू वास्तव में निर्मल महतो का सम्मान करती, तो उनकी विधवा के खिलाफ उम्मीदवार ही नहीं उतारती।
    • दुख में दूर, सियासत में पास: जब शहीद सुनील महतो की बेटी का आकस्मिक निधन हुआ, तो आजसू का कोई नेता उनसे मिलने तक नहीं गया। लेकिन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उनकी इस मुश्किल घड़ी में साथ दिया।

    कुरमी नेताओं के खिलाफ साजिश के आरोप

    इस चिट्ठी में आजसू पर अपने ही समाज के नेताओं को खत्म करने का आरोप लगाया गया।

    • जगरनाथ महतो के निधन के बाद डुमरी उपचुनाव में आजसू ने पूरा जोर लगाया, लेकिन जयराम महतो ने चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया।
    • दामोदर महतो की पत्नी यशोदा देवी का टिकट काटने की कोशिश की गई, ताकि दुर्योधन महतो को मौका दिया जा सके।
    • तीन कुरमी विधायकों—योगेंद्र महतो, अमित महतो, और ममता देवी—को झूठे मामलों में जेल भिजवाने का आरोप लगाया गया। खासतौर पर ममता देवी को अपने दूधमुंहे बच्चे को छोड़कर जेल जाना पड़ा।

    आरोप: आजसू पूंजीपतियों की पार्टी बन गई है

    चिट्ठी ने सुदेश महतो और चंद्रप्रकाश चौधरी पर भी सीधा निशाना साधा।

    • सुदेश महतो पर आरोप है कि अपने भाई को डीएसपी बनवाने के लिए उन्होंने JPSC में पैरवी की, लेकिन गरीब कुरमी युवाओं के लिए कुछ नहीं किया।
    • आजसू को एक ऐसी पार्टी बताया गया, जो अब पूंजीपतियों और गैर-झारखंडी लोगों की समर्थक बन चुकी है।

    जयराम महतो की नई राजनीति

    चिट्ठी का सबसे बड़ा निशाना ये था कि जब कुरमी समाज का एक नया युवा नेता, जयराम महतो, उभर रहा है, तो आजसू उसे कुचलने की साजिश कर रही है। पार्टी के सोशल मीडिया वर्कर्स उस पर व्यक्तिगत हमले कर रहे हैं। लेकिन जनता ने अपना फैसला सुना दिया।

    क्या है इस हार का संदेश?

    आजसू के लिए ये नतीजे महज हार नहीं हैं, बल्कि कुरमी समाज की एक चेतावनी हैं। चिट्ठी ने उस दर्द को आवाज दी, जिसे समाज ने सालों से महसूस किया। अब सवाल ये है कि झारखंड की राजनीति इस नए समीकरण को कैसे संभालती है।

    तो क्या आजसू अपनी रणनीति पर फिर से विचार करेगी? क्या जयराम महतो के उभार के बाद कुरमी राजनीति का नया अध्याय शुरू हो चुका है? झारखंड के सियासी अखाड़े में ये सवाल अब गूंज रहे हैं।