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  • लालू यादव फिर चुने गए RJD  के राष्ट्रीय अध्यक्ष का कब्जा, 13वीं बार निर्विरोध चुनाव

    परवेज़ आलम. By The News Post4u.

    राष्ट्रीय जनता दल (राजद) में नेतृत्व को लेकर चल रही प्रक्रिया एक बार फिर उसी बिंदु पर पहुंची, जहां से पार्टी की पहचान शुरू होती है। पार्टी संस्थापक लालू प्रसाद यादव को लगातार 13वीं बार राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में निर्विरोध चुन लिया गया है। यह घोषणा पार्टी के निर्वाचन पदाधिकारी रामचंद्र पूर्वे ने अधिसूचना जारी कर की।

    सोमवार, 23 जून को लालू यादव ने राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल किया था। मंगलवार, 24 जून को दोपहर 2 बजे नामांकन पत्रों की जांच की गई और दोपहर 3 बजे तक नाम वापस लेने की समयसीमा तय थी। लेकिन जब किसी अन्य उम्मीदवार ने न तो नामांकन दाखिल किया और न ही लालू यादव ने अपना नाम वापस लिया, तो उन्हें निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया गया।

    कब सौंपा जाएगा प्रमाण पत्र?

    निर्वाचन पदाधिकारी रामचंद्र पूर्वे ने बताया कि लालू यादव को निर्वाचन का आधिकारिक प्रमाण पत्र 5 जुलाई 2025 को आयोजित होने वाली पार्टी की राष्ट्रीय परिषद की बैठक में सौंपा जाएगा। इसी बैठक में उनका आधिकारिक रूप से कार्यभार भी घोषित किया जाएगा।

    इसका राजनीतिक महत्व क्या है?

    राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, लालू प्रसाद यादव का एक बार फिर राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना यह दर्शाता है कि पार्टी अब भी पूरी तरह उनके नेतृत्व में विश्वास रखती है। हालांकि लालू यादव सक्रिय राजनीति से स्वास्थ्य कारणों से थोड़ा पीछे रहे हैं, फिर भी उनका करिश्माई प्रभाव, संगठन पर पकड़ और सामाजिक न्याय की राजनीति में उनकी गूंज अब भी बनी हुई है।

     RJD के अंदरूनी समीकरण.

    राजद में लंबे समय से यह अटकलें थीं कि अब पार्टी की कमान तेजस्वी यादव को सौंप दी जाएगी, लेकिन इस बार फिर से लालू यादव की ताजपोशी यह संकेत देती है कि वह अभी भी पार्टी का चेहरा बने रहेंगे और संगठन को अपनी निगरानी में आगे बढ़ाएंगे। संभवतः पार्टी की रणनीति यह है कि वरिष्ठता का नेतृत्व और युवाओं का संचालन साथ-साथ चले।
    लालू प्रसाद यादव का निर्विरोध निर्वाचन न केवल राजद की एकजुटता को दर्शाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि पार्टी अभी भी अपने संस्थापक के अनुभव और रणनीतिक कौशल पर भरोसा करती है। आने वाले समय में राजद किस तरह से अपनी राजनीति को आगे बढ़ाएगा, इस पर सबकी निगाहें टिकी रहेंगी।

  • बिहार में लगेगा न्यूक्लियर पावर प्लांट, ऊर्जा मंत्रियों के पांचवें क्षेत्रीय सम्मेलन  मे शामिल हुये मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू

    परवेज़ आलम. By The News Post4u.

    देश के ऊर्जा क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम की घोषणा मंगलवार को पटना में हुई, जब केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने बिहार में न्यूक्लियर पावर प्लांट (परमाणु बिजली घर) स्थापित करने के प्रस्ताव पर अपनी सहमति दे दी। यह घोषणा पूर्वी भारत के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के ऊर्जा मंत्रियों के पांचवें क्षेत्रीय सम्मेलन के दौरान हुई। इस  सम्मेलन में बिहार, झारखण्ड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल एवं अंडमान-निकोबार के ऊर्जा मंत्री उपस्थित रहे। बिहार से इसका प्रतिनिधित्व ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने किया जबकि झारखंड से  नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू इसमे शामिल हुये ।

    मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने सम्मेलन के बाद फोन पर The News Post4u को बताया कि  बैठक में राज्यों में संचालित विद्युत परियोजनाओं के त्वरित क्रियान्वयन, वितरण नेटवर्क को मजबूत करने तथा सेवा प्रदायगी में दक्षता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। साथ ही, निर्बाध और समान रूप से बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर भी गहन चर्चा हुई।
    देश के ऊर्जा क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन लाने के लिए यह सामूहिक प्रयास अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध होगा।

    बिहार को मिलेगा ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा बूस्ट.

    सम्मेलन के दौरान बिहार सरकार की ओर से राज्य में परमाणु ऊर्जा आधारित पावर प्लांट की मांग रखी गई थी। इस पर केंद्रीय मंत्री खट्टर ने सकारात्मक रुख दिखाते हुए कहा कि केंद्र सरकार हर आवश्यक तकनीकी और वित्तीय सहायता देने को तैयार है।

    साथ ही बिहार में अगले 6 महीनों के भीतर अतिरिक्त 500 मेगावाट बिजली की आपूर्ति करने का भी प्रस्ताव स्वीकार कर लिया गया है, जिससे राज्य की औद्योगिक और ग्रामीण जरूरतों को मजबूत आधार मिलेगा।

     केंद्रीय मंत्री ने क्या कहा?

    बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने बताया कि:

    • ऊर्जा क्षेत्र में थर्मल, सोलर, विंड और स्टोरेज प्रोजेक्ट्स पर तेजी से काम हो रहा है।
    • 2035 तक का राष्ट्रीय ऊर्जा विजन तैयार किया गया है, जिसमें हर राज्य में एक परमाणु ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने की योजना है।
    • बिहार में अब तक 80 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, जिसे उन्होंने “रिकॉर्ड” बताया।

    उन्होंने स्पष्ट किया कि “बिहार को कभी पिछड़ा समझा जाता था, लेकिन अब वह बिजली क्षेत्र में कई राज्यों से आगे निकल गया है।”

    बिजली स्टोरेज की भी मांग॰

    सम्मेलन के दौरान बिहार सरकार ने राज्य में 1000 मेगावाट की बिजली स्टोरेज क्षमता विकसित करने की मांग भी रखी। इस पर भी केंद्र सरकार ने भरोसा दिलाया कि जरूरत के मुताबिक हरसंभव मदद दी जाएगी।

    भारत अब बिजली निर्यातक देश.

    मंत्री खट्टर ने कहा कि कभी पावर डिफिसिट” (बिजली की कमी वाला) देश माने जाने वाला भारत, आज भूटान, म्यांमार, बांग्लादेश और नेपाल को बिजली निर्यात कर रहा है। देश के भीतर जरूरत के हिसाब से बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।

    इस सम्मेलन से स्पष्ट है कि बिहार अब पारंपरिक बिजली आपूर्ति से आगे बढ़कर विकसित ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर और वैकल्पिक स्रोतों की ओर बढ़ रहा है। न्यूक्लियर पावर प्लांट की स्थापना राज्य के लिए आर्थिक और औद्योगिक विकास का एक नया अध्याय खोल सकती है।

     

  • हेमंत सोरेन-जद यू नेता अशोक चौधरी की मुलाकात ने बढ़ाई सियासी सरगर्मी

    महागठबंधन में अनदेखी से गुस्से मे JMM.

    परवेज़ आलम,राजनीतिक विश्लेषक , द न्यूज़ पोस्ट4U

    बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर महागठबंधन की तैयारियां ज़ोरों पर हैं, लेकिन इन बैठकों में झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की गैरमौजूदगी ने सियासी समीकरणों में हलचल पैदा कर दी है। इसी बीच बिहार सरकार के वरिष्ठ मंत्री और JDU नेता अशोक चौधरी की झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात ने राजनीतिक तापमान और बढ़ा दिया है।

    शिष्टाचार मुलाकात या रणनीतिक संदेश?

    अशोक चौधरी की यह मुलाकात 13 जून को हुई और इसकी जानकारी खुद झारखंड मुख्यमंत्री कार्यालय ने सोशल मीडिया पर दी। कहा गया कि यह केवल “शिष्टाचार भेंट” थी, लेकिन इस मुलाकात की टाइमिंग  ने राजनीतिक विश्लेषकों को चौकन्ना कर दिया है।

    एक दिन पहले यानी 12 जून को पटना में महागठबंधन की अहम बैठक आयोजित हुई थी, जिसमें RJD, कांग्रेस और अन्य दलों ने हिस्सा लिया, मगर JMM को आमंत्रित नहीं किया गया। इससे पार्टी की नाराजगी अब सार्वजनिक हो गई है।

    JMM ने उठाए सवाल, भेजा सियासी संदेश.

    JMM के महासचिव विनोद पांडे ने साफ तौर पर कहा कि पार्टी बिहार विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी में है, लेकिन उन्हें अब तक न तो बैठक में बुलाया गया और न ही चर्चा में शामिल किया गया। उन्होंने यह भी जोड़ा कि गठबंधन में झामुमो की उपेक्षा करना कई सवाल खड़े करता है।
    झामुमो प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि पार्टी बड़े फैसले पर विचार कर रही है और जल्द ही अगला कदम उठाया जाएगा।

    RJD की दो टूक – ‘जहां गठबंधन, वहीं बैठक’

    दूसरी ओर RJD ने भी स्पष्ट कर दिया है कि बिहार की गठबंधन बैठकें उन्हीं दलों के साथ होंगी, जो महागठबंधन का सक्रिय हिस्सा हैं। RJD के नेताओं ने JMM को सीधी चुनौती देते हुये कहा है कि अगर झारखंड मुक्ति मोर्चा को खुद पर इतना भरोसा है, तो अकेले चुनाव मैदान में उतरकर अपनी ताकत दिखाए। झामुमो की बिहार में चुनाव लड़ने की इच्छा पर RJD के तेवर साफ तौर पर ‘आर या पार’ के संकेत दे रहे हैं।

    JMM की नजर सीमावर्ती सीटों पर.

    JMM बिहार के झारखंड से सटे सीमावर्ती क्षेत्रों की कुछ सीटों पर चुनाव लड़ना चाहता है। इन इलाकों में पार्टी का आधार मजबूत आधार का दावा किया जा रहा है , पार्टी का दावा है कि पहले भी पार्टी के विधायक इन इलाकों से चुने जा चुके हैं। जिन सीटों पर झामुमो की नजर है, उनमें शामिल हैं:तारापुर, कटोरिया, मनिहारी, झाझा, बांका, ठाकुरगंज,रूपौली, रामपुर, बनमनखी, जमालपुर, पीरपैंती, व चकाई.

    BJP का तंज – “फुफकारता है, काटता नहीं”

    इस सियासी तकरार के बीच बीजेपी ने मौके को भुनाते हुए तंज कसा। पार्टी के बिहार सह प्रभारी दीपक प्रकाश ने JMM पर कटाक्ष करते हुए कहा, “झामुमो सिर्फ फुफकारता है, काटता नहीं। पहले भी चुनाव लड़ने की बात की थी, लेकिन न समर्थन मिला, न सीट।” बीजेपी इस पूरे घटनाक्रम को महागठबंधन की कमजोर होती एकता के संकेत के तौर पर देख रही है।

    क्या दरक रही है तेजस्वी-हेमंत की दोस्ती?

    राजनीतिक समीक्षक अब यह सवाल भी उठा रहे हैं कि क्या तेजस्वी यादव और हेमंत सोरेन के बीच की ‘पुरानी दोस्ती’ में दरार आ चुकी है? क्या JMM को महागठबंधन में अब कोई खास भूमिका नहीं दी जाएगी?
    इस मुलाकात के बाद अटकलें हैं कि हेमंत सोरेन जेडीयू या तीसरे मोर्चे के साथ नई संभावनाएं तलाश सकते हैं, जिससे बिहार की राजनीति में नया मोड़ आ सकता है।
    बिहार के चुनावी दंगल में अभी बहुत कुछ तय होना बाकी है, लेकिन झामुमो की नाराजगी और अशोक चौधरी की हेमंत सोरेन से मुलाकात ने संकेत दे दिया है कि पर्दे के पीछे बड़ी हलचल जारी है। आने वाले हफ्तों में यह साफ हो जाएगा कि झामुमो महागठबंधन का हिस्सा रहेगा, या कोई नया गठजोड़ तैयार होगा।

  • तेज प्रताप यादव RJD और परिवार से 6 साल के लिए निष्कासित

    लालू प्रसाद यादव का बड़ा फैसला, बिहार की राजनीति में मचा हलचल

    परवेज़ आलम.

    बिहार की राजनीति एक बार फिर तेज हो गई है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने अपने बड़े बेटे तेज प्रताप यादव को न केवल पार्टी से छह वर्षों के लिए निष्कासित कर दिया, बल्कि उन्हें परिवार से भी अलग कर देने का ऐलान कर दिया है। इस फैसले ने न सिर्फ यादव परिवार में दरार की अटकलों को हवा दी है, बल्कि आरजेडी के भीतर आंतरिक कलह और सियासी समीकरणों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

    लालू यादव ने इस विषय पर ट्वीट करते  हुए लिखा “”निजी जीवन में नैतिक मूल्यों की अवहेलना करना हमारे सामाजिक न्याय के लिए सामूहिक संघर्ष को कमज़ोर करता है। ज्येष्ठ पुत्र की गतिविधि, लोक आचरण तथा गैर जिम्मेदाराना व्यवहार हमारे पारिवारिक मूल्यों और संस्कारों के अनुरूप नहीं है। अतएव उपरोक्त परिस्थितियों के चलते उसे पार्टी और परिवार से दूर करता हूं। अब से पार्टी और परिवार में उसकी किसी भी प्रकार की कोई भूमिका नहीं रहेगी। उसे पार्टी से 6 साल के लिए निष्कासित किया जाता है। अपने निजी जीवन का भला-बुरा और गुण-दोष देखने में वह स्वयं सक्षम है। उससे जो भी लोग संबंध रखेंगे वो स्वविवेक से निर्णय लें। लोकजीवन में लोकलाज का सदैव हिमायती रहा हूं। परिवार के आज्ञाकारी सदस्यों ने सावर्जनिक जीवन में इसी विचार को अंगीकार कर अनुसरण किया है।

    तेज प्रताप के निष्कासन की वजह मानी जा रही है हाल ही में वायरल हुआ वह वीडियो जिसमें वह अनुष्का यादव के साथ नजर आ रहे हैं। खबरों के मुताबिक तेज प्रताप ने इस रिश्ते को सार्वजनिक रूप से स्वीकार भी किया है। उन्होंने यह भी बताया कि वह पिछले 12 वर्षों से अनुष्का से प्रेम करते थे और अब उन्होंने उनसे विवाह कर लिया है

    तेज प्रताप की छवि: रंगीन, धार्मिक और विवादास्पद.

    तेज प्रताप यादव हमेशा से ही बिहार की राजनीति में अपनी अनोखी शैली, धार्मिक रूप और सोशल मीडिया पर सक्रियता के लिए चर्चा में रहे हैं। कभी भगवान शिव, तो कभी श्रीकृष्ण के रूप में दिखाई देना, होली पर पारंपरिक वेशभूषा पहनकर आयोजन करना—तेज प्रताप ने हमेशा खुद को अलग दिखाने की कोशिश की।

    राजनीतिक करियर की बात करें तो उन्होंने 2015 में महुआ सीट से जीत दर्ज की और नीतीश कुमार की सरकार में स्वास्थ्य मंत्री बने। फिर 2020 में हसनपुर से विधायक चुने गए और दूसरी बार नीतीश सरकार में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री का पद संभाला। हालांकि, उनकी कार्यशैली और विवादास्पद बयान अक्सर पार्टी की मुश्किलें बढ़ाते रहे।

    निजी जीवन में भी विवादों से घिरे रहे तेज प्रताप.

    तेज प्रताप का निजी जीवन भी सुर्खियों से अछूता नहीं रहा है। 2018 में उन्होंने बिहार के पूर्व मंत्री चंद्रिका राय की बेटी ऐश्वर्या राय से शादी की थी। यह रिश्ता ज्यादा लंबा नहीं चला और तलाक की प्रक्रिया अब भी अदालत में लंबित है। अब अनुष्का यादव के साथ उनकी नई शुरुआत ने राजनीतिक और पारिवारिक हलकों में भूचाल ला दिया है।

    पप्पू यादव ने तेज प्रताप का किया समर्थन, लालू के फैसले पर उठाए सवाल.

    तेज प्रताप यादव के निष्कासन के बाद जन अधिकार पार्टी (JAP) के नेता और पूर्णिया सांसद पप्पू यादव खुलकर उनके समर्थन में सामने आए हैं। उन्होंने तेज प्रताप को “ईमानदार प्रेमी” बताते हुए लालू प्रसाद यादव से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की है।

    तेज प्रताप ने कोई अपराध नहीं किया है। उन्होंने समाज के सामने सच स्वीकार किया। ऐसे में उन्हें सजा देना कहां तक उचित है?” पप्पू यादव

    उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि देश की राजनीति में ऐसे कई नेता हैं जिन पर गंभीर आपराधिक आरोप हैं, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं होती, जबकि तेज प्रताप को सिर्फ इसलिए निष्कासित किया गया क्योंकि उन्होंने प्रेम को स्वीकार किया

    राजनीतिक असर: RJD को फायदा या विरोधियों को मिलेगा मुद्दा?

    तेज प्रताप के निष्कासन से RJD को अनुशासन का संदेश देने का मौका मिला है, लेकिन साथ ही यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इससे पार्टी को चुनावी नुकसान होगा। बिहार विधानसभा चुनाव से पहले यह मुद्दा विरोधी दलों के लिए एक बड़ा हथियार बन सकता है। वहीं, तेज प्रताप यादव के समर्थकों में इस फैसले को लेकर नाराज़गी देखी जा रही है।

    अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या तेज प्रताप कोई नया राजनीतिक विकल्प तलाशेंगे, क्या वे बगावती रुख अपनाएंगे, या फिर यह पारिवारिक कलह समय के साथ शांत हो जाएगा ।

  • गिरिडीह : हथियार फैक्ट्री का भंडाफोड़, 6 गिरफ्तार! मुंगेर से मंगाए गए थे मिस्त्री!

    रिपोर्ट-परवेज़ आलम 

    गिरिडीह के जमुआ थाना क्षेत्र में पुलिस ने मिनी गन फैक्ट्री का पर्दाफाश किया है! जी हां, ये कोई मामूली वर्कशॉप नहीं, बल्कि एक ऐसी फैक्ट्री थी, जहां देसी कट्टे और पिस्टल बनाए जा रहे थे! पुलिस ने छापा मारकर यहां से 6 लोगों को गिरफ्तार किया है और भारी मात्रा में हथियार बनाने की सामग्री भी बरामद की है!

    गांव में ही चल रहा था पूरा नेटवर्क!

    पुलिस को सूचना मिली कि जमुआ थाना क्षेत्र के चपरियामो गांव में कुछ संदिग्ध गतिविधियां चल रही हैं! जब टीम ने शनिवार देर रात रेड डाली, तो वहां का नजारा चौंकाने वाला था! मो दयमुद्दीन के  अर्धनिर्मित मकान में पूरी गन फैक्ट्री चल रही थी! और खास बात ये कि यहां मुंगेर से मिस्त्री बुलाकर पिस्टल तैयार करवाई जा रही थी! पुलिस ने मौके से 10 नई पिस्टल, ड्रिलिंग मशीन, लोहे के सांचे, जेनरेटर समेत कई उपकरण बरामद किए हैं!

    40 देसी कट्टे पहले ही सप्लाई हो चुके थे!

    जांच में पता चला है कि पिछले महीने ही इस फैक्ट्री में बने 40 देसी कट्टे बिहार के मुंगेर में सलीम नाम के अपराधी को सप्लाई किए गए थे! यानी गिरिडीह से लेकर मुंगेर तक अवैध हथियारों का बड़ा नेटवर्क फैला हुआ था! पुलिस ने इस फैक्ट्री का संचालन कर रहे  मो दयमुद्दीन समेत 6 लोगों को धर दबोचा है! पूछताछ जारी है और पुलिस का कहना है कि इस मामले में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं!

    अब देखना होगा कि क्या पुलिस इस पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म कर पाएगी या नहीं? झारखंड और बिहार में फैले अवैध हथियार तस्करी के इस खेल का पूरा सच क्या है? ये आने वाले दिनों में साफ होगा!

     

  • BPSC अभ्यर्थियों का ‘शिक्षा सत्याग्रह’: परीक्षा पारदर्शिता पर उठे सवाल

    70वीं बीपीएससी परीक्षा के अभ्यर्थियों ने बुधवार शाम भागलपुर  सैंडिस कंपाउंड में कैंडल मार्च निकालकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। इस मार्च को ‘शिक्षा सत्याग्रह’ का नाम दिया गया, जिसमें अभ्यर्थियों ने “प्रोटेस्ट नहीं – रिक्वेस्ट, विवाद नहीं – संवाद, व्यवधान नहीं – समाधान” के नारों के साथ अपनी मांगें रखीं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि आयोग द्वारा आयोजित परीक्षा में पारदर्शिता और निष्पक्षता की कमी रही।

    परीक्षा में अनियमितताओं का आरोप। 
    अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि BPSC ने कदाचार मुक्त और धांधली मुक्त परीक्षा का दावा किया था, लेकिन इसके विपरीत कई जिलों से गड़बड़ियों की खबरें सामने आईं। बापू सभागार में आयोजित परीक्षा के दौरान अनियमितताओं की पुष्टि हुई, जिससे 12,000 परीक्षार्थियों की परीक्षा स्थगित करनी पड़ी। अभ्यर्थियों का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में परीक्षा स्थगन से पूरे रिजल्ट पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

    फिर से परीक्षा कराने की मांग। 
    अभ्यर्थियों ने BPSC से परीक्षा दोबारा कराने की मांग की। उनका कहना है कि सभी छात्रों को समान अवसर और पारदर्शी प्रक्रिया का लाभ मिलना चाहिए। उन्होंने बताया कि कई छात्रों को 200-300 किलोमीटर दूर परीक्षा केंद्र आवंटित किए गए, जिससे उनकी तैयारी और प्रदर्शन प्रभावित हुआ। इस दूरी का औचित्य समझ से परे है।

    आंदोलन की अगली रणनीति।
    कैंडल मार्च के बाद अभ्यर्थियों ने बैठकर अपनी आगे की रणनीति बनाई। उनका कहना है कि अगर जरूरत पड़ी, तो वे पटना जाकर अपनी बात रखेंगे।

    अभ्यर्थियों की अपील।
    BPSC अभ्यर्थियों ने इस प्रदर्शन को प्रोटेस्ट नहीं, बल्कि एक शांतिपूर्ण अपील के रूप में रखा है। उनका कहना है कि यह आंदोलन विवाद से ज्यादा समाधान की ओर ध्यान केंद्रित करता है। उनकी एकमात्र मांग है कि सभी छात्रों के साथ समान और पारदर्शी व्यवहार हो।

    इस शांतिपूर्ण प्रदर्शन ने एक बार फिर परीक्षा प्रणाली में सुधार और पारदर्शिता की जरूरत को रेखांकित किया है।