Tag: corruption in Jharkhand

  • झारखंड के पूर्व मंत्री एनोस एक्का समेत 10 दोषी, सात-सात साल की सजा

    परवेज़ आलम. द न्यूज़ पोस्ट4यू.

    रांची: झारखंड की राजनीति में लंबे समय से चर्चा में रहे बहुचर्चित जमीन घोटाले मामले में बड़ा फैसला आया है। रांची स्थित सीबीआई की विशेष अदालत ने पूर्व मंत्री एनोस एक्का, उनकी पत्नी मेनन एक्का, तत्कालीन भूमि सुधार उप समाहर्ता (एलआरडीसी) कार्तिक कुमार प्रभात, तत्कालीन सीआई राजकिशोर सिंह, फिरोज अख्तर, अनिल कुमार, राजस्व कर्मचारी ब्रजेश मिश्रा, मणिलाल महतो और परशुराम को दोषी करार देते हुए सात-सात साल की सजा सुनाई है। सभी पर जुर्माना भी लगाया गया है और यदि वे यह राशि नहीं चुकाते हैं, तो उन्हें अतिरिक्त एक-एक साल की कैद भुगतनी होगी।

    कोर्ट का निर्णय और बचाव पक्ष की दलील.

    सजा पर बहस के बाद विशेष जज श्याम नंदन तिवारी की अदालत ने सभी आरोपियों को दोषी मानते हुए सजा सुनाई। फैसले के तुरंत बाद सभी को न्यायिक हिरासत में ले लिया गया।
    एनोस एक्का के वकील अनिल कंठ ने कहा कि इस निर्णय को हाईकोर्ट में चुनौती दी जाएगी।

    15 साल पुराना जमीन घोटाला.

    यह मामला करीब 15 साल पुराना है। आरोप है कि मंत्री रहते हुए एनोस एक्का ने सीएनटी एक्ट का उल्लंघन कर फर्जी पते और दस्तावेजों का इस्तेमाल कर बड़े पैमाने पर आदिवासी जमीन खरीदी। जांच में सामने आया कि मार्च 2006 से मई 2008 के बीच उनकी पत्नी मेनन एक्का के नाम पर रांची और आसपास कई जमीनें खरीदी गईं—

    • हिनू में 22 कट्ठा
    • ओरमांझी में 12 एकड़
    • नेवरी में 4 एकड़
    • चुटिया के सिरम टोली मौजा में 9 डिसमिल

    तत्कालीन एलआरडीसी कार्तिक कुमार प्रभात और अन्य अधिकारियों की मिलीभगत से इन सौदों को अंजाम दिया गया।

    सीबीआई जांच और चार्जशीट.

    हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने अगस्त 2010 में एफआईआर दर्ज की थी।

    • 2012 में चार्जशीट दाखिल हुई।
    • नवंबर 2019 में आरोप तय हुए।
      आख़िरकार 29 अगस्त 2025 को कोर्ट ने सभी आरोपियों को दोषी करार दिया। हालांकि, साक्ष्य के अभाव में गोवर्धन बैठा को बरी कर दिया गया।

    एनोस एक्का की राजनीतिक यात्रा और विवाद.

    एनोस एक्का झारखंड की राजनीति का बड़ा चेहरा रहे हैं।

    • उन्होंने 2005, 2009 और 2014 में सिमडेगा के कोलेबिरा से लगातार चुनाव जीते।
    • मधु कोड़ा सरकार के दौरान वे सत्ता संतुलन में अहम भूमिका निभाते थे।
    • लेकिन आय से अधिक संपत्ति और पारा शिक्षक मनोज कुमार की हत्या जैसे मामलों ने उनकी राजनीति पर काला साया डाल दिया।
      2014 में पारा शिक्षक हत्याकांड में गिरफ्तार हुए एनोस एक्का को 2018 में उम्रकैद की सजा मिली थी। फिलहाल वे जमानत पर थे, लेकिन अब इस मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद जेल भेज दिए गए।

    क्यों महत्वपूर्ण है सीएनटी एक्ट?

    छोटानागपुर टेनेंसी एक्ट (1908) ब्रिटिश शासनकाल में आदिवासियों की जमीन को बचाने के लिए लागू किया गया था। इस कानून के तहत—

    • आदिवासी जमीन को गैर-आदिवासी को बेचना, गिरवी रखना या ट्रांसफर करना पूरी तरह प्रतिबंधित है।
    • यहां तक कि एक आदिवासी भी अपने थाना क्षेत्र से बाहर किसी अन्य आदिवासी को जमीन नहीं बेच सकता।

    कोर्ट ने माना कि एनोस एक्का और उनके सहयोगियों ने इस कानून का खुलेआम उल्लंघन किया और निजी लाभ के लिए अपने पद का दुरुपयोग किया।

     

  • झारखंड: आखिर कब रुकेगा भ्रष्टाचार का सिलसिला ? भ्रष्टाचार के इस काले पन्ने पर आईएएस ऑफिसरों की फेरहिस्त बढती जा रही है  

    उत्पाद विभाग के अधिकारियों की चल-अचल संपत्ति का आकलन करने में जुटी है एसीबी की टीम.

    परवेज़ आलम.

    झारखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत एक और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी, विनय कुमार चौबे, अब आरोपों के घेरे में हैं। राज्य गठन के बाद से अब तक भ्रष्टाचार के मामलों में गिरफ्तार आईएएस अधिकारियों की सूची में चौबे का नाम छठे नंबर पर दर्ज हो गया है। खास बात यह है कि इन छह में से चार अधिकारी रांची के उपायुक्त रह चुके हैं, जिससे राजधानी में प्रशासनिक स्तर पर लंबे समय से भ्रष्टाचार के पैठ की पुष्टि होती है।

    भ्रष्टाचार की जद में रांची के पूर्व डीसी

    विनय कुमार चौबे, जो झारखंड राज्य बेवरेजेस कॉरपोरेशन लिमिटेड (JSBCL) के प्रबंध निदेशक और उत्पाद विभाग के प्रधान सचिव रह चुके हैं, को 20 मई को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने गिरफ्तार किया। उनके साथ संयुक्त आयुक्त उत्पाद गजेंद्र सिंह को भी जेल भेजा गया है। दोनों पर आरोप है कि उन्होंने प्लेसमेंट एजेंसियों के चयन में निर्धारित प्रक्रिया का उल्लंघन करते हुए फर्जीवाड़ा किया, जिससे राज्य को तकरीबन 38 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

    जालसाजी की रकम एक अरब तक पहुंचने की आशंका

    ACB की प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि यह घोटाला महज 38 करोड़ रुपये तक सीमित नहीं है। यह आंकड़ा एक अरब रुपये तक पहुंच सकता है। इन अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने नियमों की अनदेखी करते हुए कुछ प्लेसमेंट एजेंसियों को लाभ पहुंचाया। यही नहीं, बाद में जिन एजेंसियों को अनुबंध दिया गया, उनमें भी कथित रूप से गड़बड़ी हुई। संबंधित एजेंसियों की बैंक गारंटी तक जब्त की गई, लेकिन कार्रवाई अधूरी रही।

    कौन-कौन आईएएस घोटाले में गए जेल

    इससे पहले रांची के उपायुक्त रह चुके आईएएस सजल चक्रवर्ती को चारा घोटाले में जेल भेजा गया था। फिर सीबीआई ने दवा घोटाले में डॉ. प्रदीप कुमार को, और ईडी ने जमीन घोटाले में छवि रंजन को हिरासत में लिया। इसके अतिरिक्त पूजा सिंघल और सियाराम प्रसाद सिन्हा भी भ्रष्टाचार मामलों में जेल जा चुके हैं और वर्तमान में जमानत पर हैं।

    चारा घोटाले से जुड़े मामलों में अब तक पांच आईएएस – सजल चक्रवर्ती, महेश प्रसाद, के. अरुणगम, फूल चंद्र सिंह और बेक जुलियस – को दोषी ठहराया जा चुका है।

    एसीबी की सक्रियता, सीबीआई-ईडी को भी मिलेगा लाभ

    ACB की यह कार्रवाई अब केंद्रीय जांच एजेंसियों – CBI और ED – के लिए भी महत्वपूर्ण सबूत उपलब्ध करा सकती है। ED जल्दी ही इस प्राथमिकी को टेकओवर कर नया ECIR दर्ज कर सकती है। वहीं CBI पहले से ही भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत इस पूरे मामले की जांच कर रही है।

    नेताओं की मांग: अब हो सीबीआई जांच

    भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने इस मामले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि उन्होंने अप्रैल 2022 में ही इस घोटाले की आशंका जाहिर कर राज्य सरकार को पत्र लिखा था। मरांडी का आरोप है कि यह घोटाला छत्तीसगढ़ के शराब घोटाले की तर्ज पर, योजनाबद्ध तरीके से किया गया है। उन्होंने एसीबी की कार्रवाई को अपर्याप्त बताते हुए सीबीआई जांच की मांग की है।

    मरांडी ने सवाल उठाया, “क्या केवल एसीबी की जांच से घोटाले की पूरी सच्चाई सामने आ सकेगी? ऐसा प्रतीत होता है कि बड़ी मछलियों को बचाने के लिए कुछ लोगों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है।”

    आरोपियों की संपत्ति की जांच शुरू

    ACB अब गिरफ्तार अधिकारियों की चल-अचल संपत्तियों और बैंक खातों की जांच में जुट गई है। पिछले दस वर्षों के दौरान उनकी आय-व्यय की समीक्षा की जा रही है। उनके पैन कार्ड, बैंक स्टेटमेंट और घोषित संपत्तियों की भी पड़ताल की जा रही है।

    स्वास्थ्य जांच में सामने आई हाई बीपी की समस्या

    गिरफ्तारी के बाद ACB कार्यालय में विनय कुमार चौबे और गजेंद्र सिंह की स्वास्थ्य जांच की गई। दोनों की स्थिति सामान्य पाई गई, हालांकि चौबे का ब्लड प्रेशर थोड़ा बढ़ा हुआ मिला। डॉक्टरों ने उन्हें नमक कम करने की सलाह दी है।

    आखिर कब रुकेगा भ्रष्टाचार का सिलसिला?

    झारखंड में लगातार सामने आ रहे घोटाले राज्य प्रशासन की पारदर्शिता और जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा करते हैं। रांची जैसे प्रमुख जिले से बार-बार अधिकारियों की गिरफ्तारी इस बात की ओर संकेत करती है कि भ्रष्टाचार यहां संस्थागत रूप ले चुका है। ऐसे में सवाल यह है कि क्या केवल गिरफ्तारी से हालात सुधरेंगे या अब वक्त आ गया है कि राज्य सरकार और जांच एजेंसियां मिलकर बड़े सुधार की ओर कदम बढ़ाएं?