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  • पत्रकार अमरनाथ सिन्हा पर हमला, विरोध में पत्रकारों की एकजुटता

    गिरिडीह: गिरिडीह में शुक्रवार को नगर निगम के अजीडीह टॉल वसूली केंद्र पर पत्रकार अमरनाथ सिन्हा पर हुए जानलेवा हमले के खिलाफ शनिवार को नया परिषद भवन में पत्रकारों की बैठक हुई। बैठक में गिरिडीह के पत्रकार समुदाय ने एकजुट होकर हमले की कड़ी निंदा की और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

    बैठक के बाद पत्रकारों के एक प्रतिनिधिमंडल ने गिरिडीह उपायुक्त से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। पत्रकारों ने उपायुक्त को याद दिलाया कि माननीय उच्च न्यायालय ने 18 दिसंबर को नगर निगम क्षेत्र में टॉल वसूली पर रोक लगाने का आदेश दिया था, बावजूद इसके अजीडीह केंद्र पर अवैध वसूली जारी थी। इसी मुद्दे को उजागर करने पर पत्रकार अमरनाथ पर हमला हुआ।

    इस बैठक में कई वरिष्ठ पत्रकार शामिल हुए, जिनमें राकेश सिन्हा ,अरविंद कुमार, प्रवीण कुमार राय, लक्ष्मी अग्रवाल, रमेश प्रभाकर, सुनील मंथन शर्मा, आलोक रंजन, सूरज सिन्हा,मीरा कुमारी, शाहिद रजा, प्रकाश श्रीवास्तव, नफीस अजहर, एजाज अहमद, कैफ जद्दी, दानिश अहमद, मृणाल सिन्हा और अन्य प्रमुख नाम शामिल हैं।

    घटना के बाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने पपरवाटांड स्थित अमरनाथ सिन्हा के घर पहुंचकर उनसे मुलाकात की। उन्होंने चौथे स्तंभ पर इस हमले की निंदा करते हुए प्रशासन से दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

    इसी बीच धनवार के पूर्व विधायक राजकुमार यादव ने भी समाहरणालय पहुंचकर अमरनाथ सिन्हा से मुलाकात की और घटना की निंदा की। उन्होंने इसे लोकतंत्र पर हमला करार दिया।

  • विधायक जयराम महतो ने दिया भरोसा, “हर संभव मदद करेंगे”

    गिरिडीह:गिरिडीह के जिलिमटांड़ गांव में हुए दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। ठंड से बचने के लिए जलाए गए अलाव ने मां-बेटे की झोपड़ी को जला दिया, जिसमें उनकी जिंदा जलकर मौत हो गई। इस दुखद घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय विधायक जयराम महतो घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने मृतकों के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी और मदद का भरोसा दिलाया।

    मां-बेटे की झोपड़ी में लगी आग, मौत बनकर आई ठंड की रात. 

    गुरुवार देर रात हुई इस घटना में नुनिया देवी और उनका 12 वर्षीय बेटा बाबूचंद मुर्मू खलिहान मे बनाईगयी पुवाल की अस्थायी झोपड़ी में सो रहे थे। झोपड़ी के पास अलाव जलाया गया था ताकि ठंड से राहत मिल सके। लेकिन अलाव से उठी चिंगारी ने झोपड़ी को अपनी चपेट में ले लिया। आग इतनी तेजी से फैली कि मां-बेटे को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला। झोपड़ी में फंसे इन दोनों की दर्दनाक मौत हो गई।

    घटना स्थल पर पहुंची पुलिस, शव के अवशेष किए बरामद. 

    डुमरी थाने की पुलिस ने घटना की जानकारी मिलते ही मौके पर पहुंचकर आग बुझाई। शवों के अवशेष बरामद कर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजे गए हैं। थाना प्रभारी जगन्नाथ पान ने बताया कि ग्रामीणों ने इसे एक हादसा बताया है और पुलिस मामले की जांच कर रही है।

    विधायक ने प्रशासन से की मुआवजे की मांग.

    विधायक जयराम महतो ने इस हृदयविदारक घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए जिला प्रशासन से मृतकों के परिजनों को अनुग्रह राशि देने और आग से हुए नुकसान का उचित मुआवजा सुनिश्चित करने की मांग की। उन्होंने आश्वासन दिया कि पीड़ित परिवार को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

    झारखंड में बढ़ती आगजनी की घटनाएं.

    ठंड के मौसम में झारखंड के धान के खलिहानों में आग लगने की घटनाएं बढ़ रही हैं। हाल ही में गोड्डा और हजारीबाग में भी ऐसी घटनाओं ने किसानों को भारी नुकसान पहुंचाया। यह घटना सरकार और प्रशासन के लिए एक चेतावनी है कि ठंड से जुड़े खतरों से निपटने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

    सवाल उठते हैं: कब होगा समाधान?

    जिलिमटांड़ की यह घटना सिर्फ एक दर्दनाक हादसा नहीं, बल्कि गरीब परिवारों के संघर्षों की कहानी भी है। ठंड से बचने के लिए अलाव जलाना उनकी मजबूरी थी, लेकिन यही मजबूरी उनकी मौत का कारण बन गई। क्या प्रशासन ऐसे हादसों को रोकने के लिए कोई ठोस योजना बना पाएगा, या यह सिलसिला यूं ही चलता रहेगा?