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  • विकास की हकीकत: गर्भवती महिला फिर खाट पर ढोई गई अस्पताल

    परवेज़ आलम.

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    गिरिडीह जिले के देवरी प्रखंड से एक बार फिर झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलने वाली तस्वीर सामने आई है। सड़क और एंबुलेंस सुविधा के अभाव में ग्रामीणों को गर्भवती महिला को खाट पर डालकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, तिसरी तक पहुंचाना पड़ा।

    यह घटना सप्ताह भर में दूसरी बार हुई है। इससे पहले सलगी सोरेन को खाट पर टांगकर अस्पताल पहुंचाया गया था और अब तालको मरांडी को भी उसी स्थिति का सामना करना पड़ा। दोनों ही मामलों में ग्रामीणों ने खाट को स्ट्रेचर और अपने कंधों को एंबुलेंस का पहिया बनाकर महिला को कई किलोमीटर तक ढोया।

    सवालों के घेरे में स्वास्थ्य व्यवस्था.
    ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में न तो सड़कें ठीक हैं और न ही एंबुलेंस समय पर मिलती है। मजबूरी में खाट पर मरीजों को ले जाना पड़ता है। लोग कटाक्ष करते हुए कह रहे हैं कि अब “खटिया ही एंबुलेंस” बन चुकी है।

    सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने बढ़ाई किरकिरी.
    इधर, सोशल मीडिया पर एंबुलेंस से “रील्स” बनाने का एक वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो पर लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब मरीजों के लिए एंबुलेंस उपलब्ध नहीं है, तो रील्स बनाने के लिए एंबुलेंस कैसे उपलब्ध हो जाती है?

    राजनीतिक प्रतिक्रिया.
    नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने भी इस वायरल वीडियो को साझा कर राज्य सरकार को कठघरे में खड़ा किया है। उन्होंने कहा कि यह दृश्य बताता है कि स्वास्थ्य सेवाएँ कितनी लचर हो चुकी हैं। जब मरीजों के लिए एंबुलेंस नहीं है और उन्हें खाट पर लादकर अस्पताल ले जाया जा रहा है, तब “विकास” का असली चेहरा साफ दिखाई देता है।

  • वायरल वीडियो पर झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी की सफाई: “बेटे कृष को राजनीतिक साजिश के तहत घसीटा जा रहा है”

    By: परवेज़ आलम.

    For The News Post4u.

    रांची, 19 जुलाई 2025
    झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी के बेटे कृष अंसारी इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो को लेकर सुर्खियों में हैं। वीडियो में कृष अंसारी राजधानी रांची के प्रमुख अस्पतालों – रिम्स (RIMS) और पारस हॉस्पिटल में मरीजों से बातचीत करते हुए दिखाई दे रहे हैं। इस वीडियो को लेकर दावा किया जा रहा है कि कृष अस्पतालों का “निरीक्षण” कर रहे थे, जिससे सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं।

    क्या है वायरल वीडियो का मामला?

    वायरल हो रहे इस वीडियो में कृष अंसारी कुछ युवकों के साथ अस्पतालों में मरीजों से बातचीत करते नजर आ रहे हैं। वीडियो में उनके साथ मौजूद युवक कहते सुने जा सकते हैं – “ये मंत्री जी के बेटे हैं, अपनी समस्याएं बताइए।” इसके बाद से ही कृष पर “नेतागिरी” और “बिना अधिकार निरीक्षण” के आरोप लगने लगे।

    हालांकि, वीडियो की सत्यता की स्वतंत्र पुष्टि किसी न्यूज माध्यम द्वारा नहीं की गई है, लेकिन मामला तूल पकड़ता देख अब स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने खुद X (पूर्व ट्विटर) पर बयान जारी कर साफ-साफ जवाब दिया है।

    मंत्री इरफान अंसारी की प्रतिक्रिया: “तथ्यों को तोड़ा-मरोड़ा जा रहा है”

    अपने आधिकारिक पोस्ट में स्वास्थ्य मंत्री ने कहा:

    “सच्चाई को समझें। मेरे बेटे कृष को बेवजह और दुर्भावनापूर्ण तरीके से एक झूठे विवाद में घसीटा जा रहा है। कुछ मीडिया संस्थानों और राजनीतिक स्वार्थी तत्वों द्वारा इस विषय को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।”

    मंत्री ने स्पष्ट किया कि कृष किसी सरकारी निरीक्षण या राजनीतिक उद्देश्य से अस्पताल नहीं गया था। उन्होंने बताया कि कृष रिम्स में अपने शिक्षक आदित्य कुमार झा के बीमार पिता का हालचाल लेने गया था।

    “मानवीय आधार पर की गई मदद को राजनीति का रंग दिया जा रहा”

    डॉ. इरफान अंसारी ने आगे बताया कि पिछली रात कुछ आदिवासी परिवार उनके सरकारी आवास पर मदद के लिए पहुंचे थे, जो रिम्स में इलाज के लिए परेशान थे। उनके आग्रह पर कृष मानवीय भाव से उनकी मदद के लिए अस्पताल गया, ताकि वे आवश्यक चिकित्सा सहायता प्राप्त कर सकें।

    उन्होंने यह भी जोड़ा कि संयोग से रिम्स में भर्ती एक वरिष्ठ पत्रकार के परिजन को भी चिकित्सकीय सहयोग की ज़रूरत थी, और कृष ने उन्हें भी पूरी संवेदनशीलता से सहयोग किया।

    “सेवा करना अपराध कब से हो गया?” – इरफान अंसारी

    मंत्री ने वीडियो के राजनीतिकरण पर गहरी नाराज़गी जताते हुए कहा:

    “आज जिस तरह से एक सामान्य मानवीय कर्तव्य को तोड़-मरोड़ कर राजनीति का रंग चढ़ाया जा रहा है, वह दुखद और चिंताजनक है। कृष एक होनहार छात्र है, जो छुट्टियों में रांची आया है। वह पूर्व सांसद फुरकान अंसारी का पोता है, जिन्होंने झारखंड के अलग राज्य आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। क्या ऐसे परिवार में सेवा की भावना होना कोई अपराध है?”

    विपक्ष ने उठाए सवाल, मंत्री ने ठहराया ‘राजनीतिक साजिश’

    इस पूरे विवाद को लेकर विपक्ष के कुछ नेताओं ने सरकार पर प्रशासनिक नियमों के उल्लंघन और राजनीतिक परिवारवाद का आरोप लगाया है। वहीं, इरफान अंसारी ने इसे साफ तौर पर एक राजनीतिक साजिश और चरित्र हनन का प्रयास बताया है।

    वायरल वीडियो के बहाने राज्य के स्वास्थ्य मंत्री के परिवार को लेकर उठे विवाद ने झारखंड की राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है। जहां एक ओर मंत्री इसे सेवा भावना बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ वर्ग इसे शक्ति का दुरुपयोग कहा जा रहा है ।

    अब यह देखना दिलचस्प होगा कि यह मामला राजनीतिक बहस तक सीमित रहता है या प्रशासनिक जाँच का विषय बनता है।

  • AHPI कॉन्क्लेव: आयुष्मान के भुगतान विवाद पर स्वास्थ्य मंत्री ने लिया कड़ा रुख

    By The News Post4u

    राजधानी रांची स्थित रेडिसन ब्लू होटल में मंगलवार को एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स इंडिया (AHPI) की ओर से एक महत्वपूर्ण कॉन्क्लेव आयोजित किया गया, जिसमें झारखंड भर के निजी अस्पतालों के प्रतिनिधि, प्रशासक, और वरिष्ठ चिकित्सकों ने भाग लिया। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PMJAY) के तहत लंबित सरकारी भुगतान और उससे उत्पन्न हो रही समस्याओं पर चर्चा करना था।

    कॉन्क्लेव में बतौर मुख्य अतिथि झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी उपस्थित रहे। उन्होंने पूरे धैर्य के साथ अस्पताल संचालकों की समस्याएं सुनीं और विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि एक दिन के भीतर लंबित सभी बकाया भुगतान की प्रक्रिया पूरी की जाए।

    स्वास्थ्य मंत्री ने मंच से साफ शब्दों में कहा,

    “आयुष्मान कार्ड को एटीएम समझने की गलती न की जाए। कुछ अस्पताल कार्ड से पूरी राशि निकाल लेते हैं और मरीज को इलाज के बिना रिम्स रेफर कर देते हैं, यह बेहद निंदनीय है।“

    उन्होंने चेतावनी दी कि गरीबों के हक पर डाका डालने वाली मानसिकता को सरकार बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेगी। डॉ. अंसारी ने कहा कि इस योजना का उद्देश्य है कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को बिना किसी भेदभाव के गुणवत्तापूर्ण इलाज मिले, और इस मिशन में लापरवाही करने वालों पर कार्रवाई तय है।

    स्वास्थ्य मंत्री ने इस मौके पर यह भी दोहराया कि

    “झारखंड में हेमंत सोरेन सरकार गरीबों की सरकार है। हम उनकी उम्मीदों को टूटने नहीं देंगे।“

    उन्होंने आगे कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार को प्राथमिकता दे रही है और आने वाले समय में झारखंड को स्वास्थ्य सुविधाओं के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करना लक्ष्य है।

    इस सम्मेलन ने न केवल योजनाओं की वर्तमान स्थिति पर रोशनी डाली, बल्कि सरकार और निजी क्षेत्र के बीच समन्वय को बेहतर बनाने की दिशा में एक सकारात्मक पहल भी मानी जा रही है। सभी उपस्थित चिकित्सकों और प्रतिनिधियों ने सरकार के इस रुख का स्वागत किया और आशा जताई कि जल्द ही भुगतान से जुड़ी समस्याओं का समाधान होगा।

  •  झारखंड में वक्फ संशोधन कानून नहीं होगा लागू -मंत्री हफीजुल हसन का बड़ा बयान

    BJP पर साधा निशाना

    परवेज़ आलम. 

    झारखंड के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री हफीजुल हसन ने साफ़ तौर पर ऐलान किया है कि झारखंड में वक्फ संशोधित कानून लागू नहीं किया जाएगा। बुधवार को रांची स्थित हज हाउस में आयोजित हज प्रशिक्षण शिविर के दौरान मंत्री ने कहा कि यह कानून मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाने की एक कोशिश है, जिसे भारतीय जनता पार्टी ने राजनीतिक लाभ के उद्देश्य से संसद से पारित कराया है।

    हफीजुल हसन ने इस मौके पर कहा, “यह कानून मुसलमानों को परेशान करने के इरादे से लाया गया है। लेकिन झारखंड में इसे हम लागू नहीं होने देंगे।”

    हज यात्रा की तैयारियों की समीक्षा. 

    हज यात्रा पर रवाना होने वाले झारखंड के आज़मीन-ए-हज के लिए बुधवार को एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन हुआ, जिसमें रांची, खूंटी और सिमडेगा जिलों से आए कुल 248 हज यात्रियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में झारखंड सरकार के स्वास्थ्य मंत्री और राज्य हज कमेटी के चेयरमैन डॉ. इरफान अंसारी भी उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि सरकार हज यात्रियों को हर जरूरी सुविधा उपलब्ध कराएगी।

    “झारखंड से लेकर मक्का-मदीना तक, सरकार हर मोड़ पर ज़ायरीनों के साथ खड़ी रहेगी,” – डॉ. इरफान अंसारी ने कहा। उन्होंने हज यात्रियों से देश में अमन, चैन और भाईचारे की दुआ करने की अपील भी की।

    संसद से पारित हुआ वक्फ संशोधन कानून, देशभर में हो रहा विरोध. 

    हाल ही में संसद में वक्फ संशोधन विधेयक पारित किया गया, जिस पर राष्ट्रपति की मंज़ूरी भी मिल चुकी है। यानी यह विधेयक अब कानून बन चुका है। इस कानून के खिलाफ देशभर के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन जारी हैं। विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि यह कानून वक्फ संपत्तियों की स्वायत्तता पर हमला है और इससे अल्पसंख्यकों के अधिकारों में कटौती होगी।

    इस साल हज यात्रा पर 1301 जायरीन जाएंगे, रांची से नहीं मिलेगी सीधी उड़ान. 

    राज्य हज कमेटी के कार्यपालक पदाधिकारी आफताब अहमद ने जानकारी दी कि इस साल झारखंड से कुल 1301 हज यात्री मक्का-मदीना के लिए रवाना होंगे। हालांकि, इस बार भी रांची से कोई सीधी उड़ान सेवा उपलब्ध नहीं होगी। हज यात्रियों को पहले कोलकाता जाना होगा, और वहां से वे जेद्दा के लिए उड़ान भरेंगे।

    हज यात्रा पर खर्च और सुविधाएं.

    इस साल एक हज यात्री को लगभग ₹3.58 लाख खर्च करना होगा। इसके अतिरिक्त, कुर्बानी के लिए अलग से राशि देनी होगी। हज यात्रियों की सहायता के लिए 9 स्टेट हज इंस्पेक्टर नियुक्त किए गए हैं, जिनमें एक महिला इंस्पेक्टर भी शामिल हैं।

    हज प्रशिक्षण शिविर में यात्रियों को हज से जुड़ी प्रक्रियाएं, नियमावली, स्वास्थ्य संबंधी उपायों और यात्रा से जुड़े तमाम जरूरी दिशा-निर्देशों की जानकारी दी गई। शिविर का उद्देश्य हज यात्रा को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और सरल बनाना है।

    झारखंड सरकार ने वक्फ संशोधन कानून को राज्य में लागू न करने का ऐलान करके अल्पसंख्यक समुदाय को स्पष्ट संदेश दिया है कि वह उनके हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। वहीं, हज यात्रा की तैयारियों से यह भी स्पष्ट होता है कि सरकार धार्मिक यात्राओं में सहभागी जनता के लिए गंभीर प्रयास कर रही है, चाहे वह सुविधाओं की बात हो या मार्गदर्शन की।

     

  • झारखंड में तंबाकू और गुटखे पर पूर्ण प्रतिबंध,अधिसूचना जारी

    स्वास्थ्य मंत्री ने कहा—अब बर्दाश्त नहीं होगी ज़हरीली लत!

    राज्य सरकार ने तंबाकू और निकोटिन युक्त गुटखा एवं पान मसाला पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। अब न तो राज्य में इसका निर्माण होगा, न भंडारण, न वितरण और न ही बिक्री। स्वास्थ्य विभाग ने मंगलवार को इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी, जिसमें स्पष्ट किया गया कि यह प्रतिबंध फिलहाल एक वर्ष के लिए लागू रहेगा, जिसे बाद में आगे भी बढ़ाया जा सकता है।

    स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने इस फैसले को जनस्वास्थ्य के हित में ऐतिहासिक कदम बताते हुए साफ किया कि राज्य के लोगों की सेहत के साथ कोई समझौता नहीं होगा। उन्होंने कहा—
    “गुटखा और पान मसाले के कारण कैंसर जैसी घातक बीमारी तेजी से फैल रही है, खासकर हमारे युवा सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। एक डॉक्टर होने के नाते मैं जानता हूं कि यह ज़हर किस हद तक शरीर को नुकसान पहुंचाता है। इसलिए, जो भी इसे बेचेगा, भंडारण करेगा या सेवन करेगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”

    गुटखा माफियाओं पर प्रशासन की सख्त नजर!

    सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि अवैध कारोबारियों और गुटखा माफियाओं पर विशेष नजर रखी जाएगी। किसी भी दुकान, गोदाम या व्यक्ति के पास गुटखा मिलने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई होगी और गोदाम सील कर दिए जाएंगे। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि इस आदेश का कठोरता से पालन कराया जाए।

    माताओं और बहनों की गुहार पर लिया गया बड़ा फैसला

    स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि महिलाओं की ओर से लगातार गुहार लगाई जा रही थी कि उनके बच्चे और भाई नशे की चपेट में आकर अपना जीवन बर्बाद कर रहे हैं। उन्होंने कहा—
    “मैंने उनकी पीड़ा को समझा और यह ठोस निर्णय लिया। अब झारखंड को गुटखा मुक्त बनाना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।”

    अब देखना होगा कि सरकार के इस सख्त फैसले के बाद राज्य में गुटखा का अवैध कारोबार कैसे खत्म किया जाता है, और क्या यह फैसला झारखंड को वास्तव में तंबाकू मुक्त बना पाएगा?

    The News Post4U के लिए परवेज़ आलम की खास रिपोर्ट 

  • किडनी रोगियों के लिए राहत भरी खबर: अब पीएचसी में भी मिलेगी डायलिसिस सुविधा

    झारखंड के किडनी मरीजों के लिए राहत की खबर, डायलिसिस सुविधा अब पीएचसी स्तर तक

    झारखंड के किडनी मरीजों के लिए अच्छी खबर है। प्रधानमंत्री नेशनल डायलिसिस प्रोग्राम (PMNDP) के तहत स्वास्थ्य विभाग अब राज्यभर में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) तक डायलिसिस सुविधा पहुंचाने की तैयारी कर रहा है। अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने किडनी मरीजों की बढ़ती संख्या और डायलिसिस में हो रही समस्याओं को देखते हुए पीएचसी, सीएचसी, रेफरल और अनुमंडलीय अस्पतालों में डायलिसिस सेवा केंद्र स्थापित करने का निर्देश दिया है।

    इन केंद्रों में बीपीएल मरीजों को मुफ्त डायलिसिस की सुविधा मिलेगी, जबकि एपीएल मरीजों को नाममात्र शुल्क चुकाना होगा। फिलहाल, संजीवनी द्वारा संचालित 16 जिलों में एपीएल मरीजों से 1206 रुपये और डीसीडीसी एजेंसी द्वारा संचालित आठ जिलों में 1046 रुपये लिए जाते हैं।

    PMNDP कोषांग प्रभारी डॉ. अश्विनी कुमार ने सभी सिविल सर्जनों को पत्र जारी कर सीएचसी, पीएचसी, रेफरल हॉस्पिटल और अनुमंडलीय अस्पतालों की सूची मांगी है, जहां डायलिसिस केंद्र स्थापित किए जा सकते हैं। निर्देश दिया गया है कि डायलिसिस केंद्र केवल उन्हीं स्थानों पर खोले जाएं, जहां पर्याप्त जगह उपलब्ध हो।

    राज्य के आठ सदर अस्पतालों में डायलिसिस सेवा का संचालन कर रही डीसीडीसी हेल्थ केयर सर्विस का कार्यकाल समाप्त हो चुका है। मरीजों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए एजेंसी को अस्थायी अवधि विस्तार दिया गया है, जबकि राज्य स्तर पर निविदा प्रक्रिया के जरिए नई एजेंसी का चयन किया जाएगा।

    फिलहाल, राज्य के सभी मेडिकल कॉलेज और सदर अस्पतालों में पीपीपी मॉडल पर डायलिसिस केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। यह सेवा तीन एजेंसियों के माध्यम से दी जा रही है—संजीवनी 16 जिलों में, डीसीडीसी आठ जिलों में और हंस फाउंडेशन घाघरा, पालकोट, लातेहार तथा संत बरनवास अस्पताल में डायलिसिस सेवा संचालित कर रहा है।