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  • नक्सली हमला: चालक सहित 9 जवान  शहीद, जानिए कहाँ है मामला

    By Perwez Alam……..

    छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले में आज एक बार फिर से भयावह नक्सली हमला हुआ। नक्सलियों ने सुरक्षाबलों की गाड़ी को IED विस्फोट से निशाना बनाया। इस हमले में 8 डीआरजी (डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड) के जवान और वाहन चालक शहीद हो गए। यह घटना बीजापुर के कुटरू मार्ग के बेदरे क्षेत्र में हुई, जब जवान एक सफल ऑपरेशन के बाद लौट रहे थे।

    IED विस्फोट की भयावहता।

    घटना की पुष्टि बस्तर रेंज के आईजी सुंदरराज पी ने की। उन्होंने बताया कि नक्सलियों ने घात लगाकर इस विस्फोट को अंजाम दिया। धमाके की तीव्रता इतनी जबरदस्त थी कि गाड़ी के परखच्चे उड़ गए। जवानों के शव बुरी तरह क्षत-विक्षत हो गए। मौके पर बने बड़े गड्ढे से इस विस्फोट की भयावहता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

    हमले के पीछे की रणनीति।

    यह हमला उस समय हुआ जब सुरक्षाबल नक्सलियों के खिलाफ एक बड़ी सफलता हासिल कर लौट रहे थे। इस ऑपरेशन में 5 नक्सलियों को मार गिराया गया था। लेकिन, ऐसा प्रतीत होता है कि नक्सलियों ने पहले से ही जवानों की मूवमेंट पर नजर रखी और उनकी वापसी पर हमला करने की योजना बनाई।

    क्या इंटेलिजेंस फेल हुआ?

    हमले के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या इंटेलिजेंस फेल हुआ। राज्य के गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि इस घटना की पूरी जांच की जाएगी। हालांकि, बस्तर रेंज के आईजी का कहना है कि जवान ऑपरेशन की सफलता के बाद लौट रहे थे। जिस जगह पर हमला हुआ, वहां से पहले भी सुरक्षाबलों का काफिला निकला था।

    नक्सलियों का मजबूत खुफिया तंत्र ।

    नक्सलियों का खुफिया तंत्र इतना मजबूत है कि उन्हें जवानों के मूवमेंट की जानकारी अक्सर बच्चों के माध्यम से मिल जाती है। बस्तर के अबूझमाड़ क्षेत्र को नक्सलियों का सबसे बड़ा गढ़ माना जाता है। यहां नक्सलियों ने कई सालों से IED बिछा रखी है, जिनकी जानकारी सुरक्षाबलों को नहीं होती।

    नक्सलवाद का घटता प्रभाव और बौखलाहट।

    पिछले एक साल में नक्सलियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई ने उनके प्रभाव को कमजोर कर दिया है। सुरक्षाबलों ने नक्सलियों के कई सुरक्षित गढ़ों पर हमला कर उन्हें हिला दिया है। इस हमले को नक्सलियों की बौखलाहट और अपनी मौजूदगी का अहसास कराने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

    बीजापुर की इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि नक्सलवाद से निपटना कितना चुनौतीपूर्ण है। यह लड़ाई केवल बंदूकों की नहीं, बल्कि सूझबूझ और बेहतर रणनीति की भी है।

  • झारखंड : बांग्लादेशी घुसपैठ के मुद्दे पर चौंकाने वाला खुलासा!

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट ………….

    बंगला देशी घुसपैठ के मुद्दे पर चौंकाने वाला खुलासा हुआ है । केंद्रीय गृह मंत्रालय  ने एक RTI  के जबाब में  साफ कहा कि उनके पास अवैध रूप से रह रहे बंगला  नागरिकों का कोई भी आंकड़ा मौजूद नहीं है। ये जानकारी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों या ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन के पास हो सकती है।

    सवालों की फेहरिस्त और मंत्रालय का जवाब। 
    झारखंड जनाधिकार महासभा से जुड़े सिरज दत्ता ने आरटीआई के जरिए गृह मंत्रालय से कई सवाल पूछे थे। इनमें हर राज्य में रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों की संख्या, ‘लव जिहाद’ और ‘लैंड जिहाद’ जैसे मामलों की जानकारी, और इन पर उठाए गए प्रशासनिक कदमों के बारे में पूछा गया था। जवाब में मंत्रालय ने कहा कि विदेशी अधिनियम 1939 और नागरिकता अधिनियम 1955 के तहत यह मामला आता है। लेकिन इस पर कोई केंद्रीय डाटा मौजूद नहीं है।

    राजनीतिक गलियारे में भूचाल। 
    इस खुलासे के बाद झारखंड की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विधानसभा चुनावों के दौरान भाजपा ने बांग्लादेशी घुसपैठ को जोरदार तरीके से उठाया था। पार्टी ने राज्य सरकार पर इसे रोकने में नाकाम रहने का आरोप लगाया, जबकि झामुमो और उसके सहयोगियों ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। अब भाजपा ने इस मुद्दे पर आंदोलन की धमकी दी है, जबकि झामुमो ने इसे समाज में नफरत फैलाने की साजिश बताया।

    हाईकोर्ट का आदेश और सरकार का रुख। 
    झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को इस मामले में फैक्ट फाइंडिंग कमेटी बनाने का आदेश दिया था। लेकिन राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में इसे चुनौती दी। वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने तर्क दिया कि झारखंड सीमावर्ती राज्य नहीं है और हाईकोर्ट का आदेश राज्य सरकार की स्वायत्तता में दखल है।

    राजनीतिक बयानबाजी या सुलझती गुत्थी?
    दानियल दानिश की जनहित याचिका से शुरू हुए इस विवाद ने अब नया मोड़ ले लिया है। गृह मंत्रालय के जवाब ने बांग्लादेशी घुसपैठ के दावों पर सवालिया निशान लगा दिया है। अब देखना होगा कि यह मामला राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रहता है या सच्चाई सामने लाने के लिए ठोस कदम उठाए जाते हैं।

    नफरत की राजनीति और आंकड़ों की चुप्पी।
    क्या बांग्लादेशी घुसपैठ वाकई एक बड़ी समस्या है या सिर्फ चुनावी भाषणों का मसाला? आंकड़ों की गैर-मौजूदगी और मंत्रालय का जवाब एक बार फिर इस मुद्दे पर राजनीतिक एजेंडे की परतें खोलता है। लेकिन जवाबदेही किसकी है? आने वाले समय में यह सवाल झारखंड और देश की राजनीति के केंद्र में रहेगा।

  • जामताड़ा से देवघर-दुमका-गिरिडीह तक फैला साइबर क्राइम का जाल

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट ……..

    गिरिडीह :एक समय साइबर अपराध के लिए कुख्यात जामताड़ा का नाम अब देवघर -दुमकाऔर गिरिडीह  के साथ लिया जा रहा है। देशभर में ठगी करने वाले इन जिलों के साइबर ठगों ने हर किसी को परेशान कर रखा है। गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाली इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (आईफोरसी) ने झारखंड पुलिस को 300 फोन नंबरों की लिस्ट भेजी है। इन नंबरों का इस्तेमाल साइबर फ्रॉड के लिए किया जा रहा है।

    आईफोरसी की कार्रवाई: क्या होगा इन नंबरों का?
    आईफोरसी का काम देश में साइबर अपराध को रोकना और पुलिस को तकनीकी मदद देना है। झारखंड पुलिस ने इन नंबरों को संबंधित जिलों की पुलिस को भेजने की तैयारी कर ली है, ताकि जांच शुरू की जा सके और ठगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके।

    झारखंड मॉडल पर केंद्र का ऐप।
    आईफोरसी ने झारखंड पुलिस के प्रतिबिंब ऐप की तर्ज पर एक ऐप तैयार किया है। इस ऐप की मदद से साइबर अपराधियों का पता लगाने में आसानी होगी। जांच में पता चला कि जामताड़ा, देवघर और दुमका के ठग 300 नंबरों के जरिए देशभर में फ्रॉड कर रहे थे। आईफोरसी ने इन्हीं नंबरों की लिस्ट झारखंड पुलिस को कार्रवाई के लिए सौंपी है।

    जामताड़ा: साइबर अपराध की ‘कैपिटल’
    जामताड़ा साइबर ठगी का पर्याय बन चुका है। यहां के अपराधियों के कारनामों पर एक वेब सीरीज भी बन चुकी है। नेटफ्लिक्स पर रिलीज़ इस सीरीज ने दिखाया कि कैसे संगठित तरीके से जामताड़ा के ठग पूरे देश में लोगों से धोखाधड़ी करते हैं। इसी वजह से जामताड़ा को साइबर क्राइम का कैपिटल ऑफ इंडिया कहा जाता है।

    अब देवघर -दुमका और गिरिडीह  भी चर्चा में। 
    जहां पहले जामताड़ा का नाम ही कुख्यात था, अब देवघर-दुमकाऔर गिरिडीह  भी इस लिस्ट में जुड़ गए हैं। इन जिलों के ठग नई तकनीकों का इस्तेमाल कर लोगों को ठग रहे हैं।

    पुलिस का दावा: जल्द होगी कार्रवाई
    झारखंड पुलिस का कहना है कि इन नंबरों का बारीकी से विश्लेषण किया जा रहा है। जिला पुलिस जल्द ही अपराधियों की पहचान करेगी और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेगी।

    साइबर अपराध के बढ़ते मामलों ने झारखंड पुलिस और प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। लेकिन आईफोरसी और स्थानीय पुलिस की संयुक्त कार्रवाई से उम्मीद है कि ठगों के इस संगठित नेटवर्क को तोड़ा जा सकेगा।