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  • झारखंड हाईकोर्ट का अहम फैसला: दो वर्षीय B.Ed धारकों को शिक्षक भर्ती में मिलेगा मौका

    -JSSC को सभी अभ्यर्थियों को फिर से शामिल करने का निर्देश.

    By The News Post4u.

    रांची:  झारखंड में शिक्षक भर्ती को लेकर बड़ी राहत की खबर आई है। झारखंड हाईकोर्ट ने एक अहम निर्णय में स्पष्ट कर दिया है कि दो वर्षीय B.Ed (बैचलर ऑफ एजुकेशन) डिग्रीधारी अभ्यर्थियों को सहायक आचार्य (Assistant Professor) भर्ती प्रक्रिया से बाहर नहीं किया जा सकता। इससे राज्य के हजारों B.Ed धारकों को राहत मिली है जिन्हें पहले एक वर्षीय B.Ed की शर्त के कारण चयन प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया था।

    क्या है मामला?

    झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) ने सहायक आचार्य की नियुक्ति के लिए वर्ष 2023 में विज्ञापन निकाला था, जिसमें न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता के रूप में एक वर्षीय B.Ed कोर्स का उल्लेख था। इस आधार पर विभिन्न विश्वविद्यालयों से दो वर्षीय B.Ed की पढ़ाई कर चुके कई अभ्यर्थियों को दस्तावेज सत्यापन के दौरान अयोग्य घोषित कर दिया गया।

    याचिकाकर्ताओं की ओर से उठाई गई बात.

    इस निर्णय को विप्लव दत्ता सहित अन्य अभ्यर्थियों ने झारखंड हाईकोर्ट में चुनौती दी। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत कुमार और अधिवक्ता अपराजिता भारद्वाज ने अदालत को बताया कि:

    • वर्ष 2014 में वर्मा आयोग की रिपोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के आधार पर NCTE (राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद) ने B.Ed कोर्स की समयावधि एक से बढ़ाकर दो वर्ष कर दी थी।
    • इसके बाद देशभर में और झारखंड में भी सभी मान्यता प्राप्त संस्थानों व विश्वविद्यालयों ने दो वर्षीय B.Ed पाठ्यक्रम लागू कर दिया है।
    • वर्ष 2019 में NCTE की अधिसूचना के अनुसार दो वर्षीय डिग्री पूरी तरह से वैध व मान्य है।

    कोर्ट ने दिया निर्देश.

    इस मामले में सुनवाई पूरी करने के बाद, जस्टिस दीपक रोशन की एकल पीठ ने सोमवार को अपना फैसला सुनाया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि:

    “दो वर्षीय B.Ed डिग्री रखने वाले अभ्यर्थियों को केवल इस आधार पर चयन प्रक्रिया से बाहर करना अनुचित है कि विज्ञापन में एक वर्षीय कोर्स का उल्लेख था।”

    कोर्ट ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) को निर्देश दिया है कि:

    • ऐसे सभी उम्मीदवारों के दस्तावेजों का पुनः सत्यापन किया जाए।
    • योग्य पाए जाने पर उन्हें चयन प्रक्रिया में शामिल किया जाए।

    भविष्य की भर्तियों के लिए भी संकेत.

    हाईकोर्ट के इस फैसले का असर न केवल वर्तमान भर्ती प्रक्रिया पर पड़ेगा, बल्कि यह भविष्य में जारी होने वाले शिक्षक नियुक्तियों के विज्ञापनों की भाषा और शर्तों को लेकर भी एक न्यायिक मार्गदर्शन प्रदान करता है। इस आदेश से यह स्पष्ट होता है कि जो भी शैक्षणिक योग्यता मान्यता प्राप्त निकाय (जैसे NCTE) द्वारा निर्धारित है, उसे ही कानूनी रूप से मान्य माना जाएगा — भले ही विज्ञापन में कुछ और लिखा हो।

    झारखंड हाईकोर्ट का यह फैसला राज्य के हजारों योग्य B.Ed अभ्यर्थियों के लिए न्याय की उम्मीद की एक बड़ी जीत है। यह न केवल भर्ती में पारदर्शिता और न्यायिक दखल का उदाहरण है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं में अद्यतन शैक्षणिक दिशा-निर्देशों की अनदेखी नहीं की जा सकती।

  • झारखंड में बड़ी कार्रवाई: 143 डॉक्टर सेवा से बर्खास्त

    स्वास्थ्य विभाग ने जारी की अधिसूचना.

    By The News Post4u.

    रांची: झारखंड सरकार ने राज्य के स्वास्थ्य तंत्र में अनुशासन बहाल करने की दिशा में एक बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। वर्षों से ड्यूटी से गायब चल रहे 143 डॉक्टरों को राज्य सरकार ने सेवा से बर्खास्त कर दिया है। स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग ने इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है।

    इन सभी चिकित्सकों पर आरोप था कि वे बिना किसी पूर्व सूचना या अनुमति के लंबे समय से अपने कार्यस्थल से अनुपस्थित चल रहे थे। लगातार चेतावनियों और विभागीय नोटिसों के बावजूद इन डॉक्टरों ने अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं कराई, जिसके चलते विभाग को यह सख्त निर्णय लेना पड़ा।

    बर्खास्त डॉक्टरों की नियुक्ति जेपीएससी से हुई थी.

    जिन डॉक्टरों को सेवा से हटाया गया है, उनकी नियुक्ति झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) के माध्यम से की गई थी। वे राज्य के विभिन्न सरकारी अस्पतालों में कार्यरत थे, जिनमें प्रमुख जिले शामिल हैं:

    • रामगढ़, हजारीबाग, बोकारो, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम
    • धनबाद, जामताड़ा, दुमका, देवघर, चतरा
    • पाकुड़, गुमला, खूंटी, गढ़वा, गिरिडीह और गोड्डा

    कई वरिष्ठ और विशेषज्ञ डॉक्टर भी सूची में शामिल.

    बर्खास्त किए गए डॉक्टरों की सूची में कई विशेषज्ञ चिकित्सकों के नाम भी शामिल हैं, जो राज्य के प्रमुख सरकारी अस्पतालों में तैनात थे:

    • डॉ. अभिषेक जायसवाल – रेडियोलॉजिस्ट, जमशेदपुर सदर अस्पताल
    • डॉ. चंदेवर मंगेश महादेव – ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ
    • डॉ. विक्रम – पश्चिमी सिंहभूम सदर अस्पताल
    • डॉ. रूपा – रिनपास (रांची मानसिक आरोग्यशाला)
    • डॉ. अभिषेक – डर्मेटोलॉजिस्ट, जामताड़ा सदर अस्पताल
    • डॉ. अनीश कुमार गांधी और डॉ. मनीष कुमार – सर्जन, धनबाद सदर अस्पताल

    खाली पदों पर होगी नई नियुक्ति.

    स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि इन डॉक्टरों की नियुक्ति अधिसूचना को रद्द कर दिया गया है। इसके बाद अब इन पदों पर नई भर्तियों का रास्ता साफ हो गया है। सरकार का उद्देश्य है कि आम जनता को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें और स्वास्थ्य ढांचा और अधिक प्रभावी तरीके से काम करे।

    सरकार का संदेश स्पष्ट: लापरवाही बर्दाश्त नहीं.

    इस कार्रवाई के माध्यम से राज्य सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि सरकारी सेवा में अनुशासनहीनता और गैर-जिम्मेदाराना रवैये को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। लंबे समय से अनुपस्थित डॉक्टरों के खिलाफ यह अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है।

    स्वास्थ्य विभाग अब इन खाली पदों को भरने के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी कर रहा है ताकि राज्य की स्वास्थ्य सुविधाओं को और सशक्त किया जा सके।