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  • सीएम हेमंत सोरेन ने नव-नियुक्त अभ्यर्थियों को सौंपा नियुक्ति पत्र

    झारखंड पर्यटन कालोगो, वेबसाइट और नई एप्लीकेशन का शुभारंभ.

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    रांची : झारखंड मंत्रालय में गुरुवार को एक अहम अवसर देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने नगर विकास एवं आवास विभाग के अंतर्गत विभिन्न पदों पर चयनित 19 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए। इस अवसर पर नगर विकास एवं पर्यटन मंत्री सुदिव्य कुमार भी मौजूद रहे।

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने झारखंड पर्यटन एवं झारखंड पर्यटन विकास निगम का नया लोगो, आधिकारिक वेबसाइट और सांस्कृतिक दल प्रबंधन प्रणाली एप्लीकेशन लॉन्च किया। इस पहल को राज्य के सांस्कृतिक एवं पर्यटन विकास की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार का प्रमुख लक्ष्य झारखंड का समग्र विकास सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा,

    “हमारी प्रतिबद्धता सिर्फ शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि गांवों के अंतिम व्यक्ति तक विकास की किरण पहुँचाना है। राज्य में रोज़ नए कार्य हो रहे हैं और विभिन्न क्षेत्रों में प्रगति की राह मजबूत हो रही है। प्रकृति ने झारखंड को धरती के नीचे खनिज संपदा और ऊपर अद्भुत प्राकृतिक सौंदर्य से नवाज़ा है। हमारा प्रयास है कि इन संसाधनों को सहेजते हुए झारखंड को देश और दुनिया के पर्यटन मानचित्र पर और सशक्त पहचान दिलाई जाए।”

    उन्होंने नवनियुक्त अभ्यर्थियों को भविष्य के लिए शुभकामनाएं भी दीं और कहा कि युवाओं की ऊर्जा ही राज्य के विकास की असली ताकत है।

    नगर विकास एवं पर्यटन मंत्री सुदिव्य कुमार ने भी इस अवसर पर अभ्यर्थियों और विभागीय कर्मियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि झारखंड अब डिजिटल युग में कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा,

    “कलाकारों का डाटा संग्रह, पर्यटन विभाग का नया लोगो, वेबसाइट और एप्लीकेशन—ये सभी पहल न केवल राज्यवासियों के लिए लाभकारी होंगे बल्कि झारखंड की पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मजबूत करेंगे। अब डॉक्यूमेंटेशन और डिजिटल माध्यमों से देश-दुनिया के लोग झारखंड की सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन स्थलों के बारे में आसानी से जान पाएंगे।”

    यह कार्यक्रम राज्य सरकार की दोहरी प्राथमिकताओं—युवाओं के लिए रोजगार सृजन और पर्यटन एवं संस्कृति को बढ़ावा देने—का जीवंत उदाहरण रहा। नियुक्ति पत्र वितरण से जहां नई पीढ़ी को अवसर मिले हैं, वहीं पर्यटन एवं संस्कृति से जुड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म राज्य की संभावनाओं को नई ऊँचाइयों तक ले जाने में सहायक साबित होंगे। इस मौके पर मुख्य सचिव अल्का तिवारी और सांसद महुआ माझी भी मंच पर उपस्थित थी ।

     

  • झारखंड पर्यटन को मिलेगी नई रफ्तार-सुदिव्य कुमार

    केंद्रीय पर्यटन मंत्री से मुलाकात में लिए गए कई अहम फैसले.

    परवेज़ आलम.

    For The News Post4U.

    रांची /नई दिल्ली, 22 जुलाई
    झारखंड में पर्यटन विकास को नई दिशा देने के उद्देश्य से आज नई दिल्ली में झारखंड पर्यटन मंत्री सुदिव्य कुमार और केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक हुई । यह शिष्टाचार भेंट झारखंड को एक उभरते हुए पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक ठोस पहल मानी जा रही है।

    बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने राज्य में पर्यटन के सर्वांगीण विकास से संबंधित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श किया और केंद्र सरकार से सक्रिय सहयोग का आश्वासन प्राप्त हुआ।

    बैठक में लिए गए मुख्य निर्णय.

    अशोक होटल के हस्तांतरण पर सहमति.
    रांची स्थित अशोक होटल को झारखंड सरकार को सौंपने के संबंध में सैद्धांतिक सहमति बनी है। इससे होटल क्षेत्र में राज्य सरकार की सक्रियता बढ़ेगी और स्थानीय पर्यटन व्यवसाय को बल मिलेगा।

    इको-टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा.
    स्वदेश दर्शन 2.0 योजना के अंतर्गत छनडील, नेतरहाट और तेनुघाट में इको-टूरिज्म परियोजनाएं विकसित की जाएंगी, जो पर्यावरण-संवेदनशील पर्यटन को प्रोत्साहित करेंगी।

    ADVT.

    पर्यटन संस्थान की स्थापना.
    राज्य में IITTM मॉडल पर आधारित एक उच्च स्तरीय पर्यटन संस्थान स्थापित किया जाएगा, जो पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र में युवाओं को व्यावसायिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराएगा।

    राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मेलों का आयोजन.
    झारखंड में पर्यटन को वैश्विक मंच देने के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मेलों का संयुक्त आयोजन किया जाएगा, जिससे राज्य की सांस्कृतिक और प्राकृतिक विविधताओं को व्यापक पहचान मिलेगी।

    विरासत स्थलों का संरक्षण.
    राज्य के पुरातात्विक और ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण पर भी विशेष जोर दिया गया। यह पहल न केवल सांस्कृतिक विरासत को संजोएगी, बल्कि इन्हें आकर्षक पर्यटन स्थल के रूप में भी विकसित करेगी।

    पर्यटन के नए युग की शुरुआत.

    बैठक के बाद यह स्पष्ट हुआ कि झारखंड को पर्यटन के मानचित्र पर नई पहचान दिलाने के लिए राज्य और केंद्र मिलकर ठोस प्रयास करेंगे। पर्यटन से जुड़े ये सभी प्रोजेक्ट्स न केवल झारखंड की आर्थिक संरचना को मजबूत करेंगे, बल्कि स्थानीय रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि करेंगे।

  • झारखंड: बदलते वक़्त की नई तस्वीर

    गुजरात के कच्छ उत्सव की तरह झारखंड मे होगा  ‘नेतरहाट उत्सव’

    परवेज़ आलम की खास रपट

    झारखंड—एक ऐसी धरती, जो खनिजों की दौलत और अपार संभावनाओं से भरी हुई है। लेकिन क्या यह हिंदुस्तान के पर्यटन नक्शे पर उतना दमकता है, जितना इसे दमकना चाहिए? जवाब है—नहीं! मगर यह बदलने जा रहा है।

    झारखंड की ऐतिहासिक धरोहर

    साल 2000 में बिहार से अलग होकर एक नया राज्य बना झारखंड। तब इसे हेल्थ रिसॉर्ट के तौर पर जाना जाता था। बंगाल के नामचीन चेहरे गर्मियों में यहीं सुकून पाते थे। यही वह जगह है जहां सर जेसी बोस ने ‘क्रेस्कोग्राफ मशीन’ बनाई और साबित किया कि पेड़ों में भी जीवन होता है। मशहूर गणितज्ञ पीसी महलनोबिस ने यहां भारतीय सांख्यिकी संस्थान की स्थापना की। और गोमो रेलवे स्टेशन—जहां से नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने अंग्रेजों को चकमा देकर विदा ली थी—अब ‘सुभाष चंद्र बोस गोमो रेलवे स्टेशन’ कहलाता है।

    बदलाव की नई बयार

    पिछले चार महीनों में झारखंड सरकार ने कई नए कदम उठाए हैं। जमशेदपुर में स्काईडाइविंग शो हुआ , मेक माय ट्रिप के साथ साझेदारी हो चुकी है, चार ग्लास के शानदार पुल को मंजूरी मिल गई है, माइन टूरिज्म, नाइट सफारी और जंगल सफारी जैसी योजनाएं पाइपलाइन में हैं। इन बदलावों को लेकर पर्यटन मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने अपने विचार साझा किए ।

    पर्यटन मंत्री की रणनीति

    जब पर्यटन मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने पद संभाला, तो देखा कि पर्यटन का 70% बजट धार्मिक स्थलों पर खर्च हो रहा है, जबकि बाकी पर्यटन क्षेत्र उपेक्षित हैं। उनका मकसद संतुलन बनाना है। साथ ही, एक और बड़ी समस्या यह थी कि झारखंड के ज्यादातर पर्यटन स्थल जंगलों में हैं, लेकिन पर्यटन और वन विभागों के बीच तालमेल की कमी के चलते बुनियादी सुविधाएं प्रभावित हो रही थीं।

    इको-टूरिज्म को बढ़ावा

    सरकार ने जेईटीए (Jharkhand Eco-tourism Amenities) को पुनर्जीवित किया, जिसे 2017 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बनाया गया था। अब यह झारखंड के पर्यटन स्थलों में इको-टूरिज्म की नई तस्वीर पेश करेगा। साथ ही, संयुक्त वन प्रबंधन समिति (JFMC) में महिलाओं की भागीदारी 33% से बढ़ाकर 50% करने का फैसला लिया गया है।

    स्थानीय युवाओं को ट्रेनिंग

    पर्यटन और आतिथ्य उद्योग को मजबूत करने के लिए होटल इंडस्ट्री के विशेषज्ञों से संपर्क किया गया है। स्थानीय युवाओं को पेशेवर ट्रेनिंग दी जा रही है ताकि झारखंड के पर्यटन स्थलों पर बेहतरीन सेवा सुनिश्चित की जा सके। इसके अलावा, होमस्टे कल्चर को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि बजट ट्रैवलर्स के लिए भी राज्य को आकर्षक बनाया जा सके।

    राजस्व मॉडल और नई योजनाएं

    इको-टूरिज्म से होने वाली आय का 60% जेईटीए को मिलेगा और 40% जेएफएमसी को, ताकि स्थानीय समुदायों को रोजगार मिल सके। इसके अलावा, झारखंड पर्यटन विकास निगम (JTDC) को आत्मनिर्भर बनाने के लिए केरल और ओडिशा के सफल मॉडल्स को अपनाया जा रहा है।

    नेतरहाट फेस्टिवल: झारखंड की पहचान

    गुजरात के कच्छ उत्सव से प्रेरित होकर झारखंड सरकार ‘नेतरहाट उत्सव’ शुरू कर रही है, जो 15 नवंबर से 15 जनवरी तक चलेगा। इसमें 80% स्थानीय खानपान होगा, और झारखंड की संस्कृति को दुनिया के सामने लाने का मौका मिलेगा।

    झारखंड का नया सफर

    बदलाव की यह लहर केवल झारखंड के लोगों के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश और दुनिया के लिए भी एक नया आयाम साबित होगी। पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की इस मुहिम में झारखंड खुद को एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में स्थापित करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

     

  • झारखंड में जल्द शुरू होगा ट्राइबल और माइनिंग टूरिज्म

    झारखंड में जल्द शुरू होगा ट्राइबल टूरिज्म, माइनिंग टूरिज्म को भी मिलेगा बढ़ावा

    झारखंड में जल्द ही ‘ट्राइबल टूरिज्म’ की शुरुआत की जाएगी। राज्य के नगर विकास, पर्यटन और उच्च शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार ने बताया कि इस पहल का पहला केंद्र तमाड़ के अड़की से उलिहातू तक विकसित होगा। यहां पर्यटक भगवान बिरसा मुंडा की जन्मस्थली के साथ-साथ आदिवासी संस्कृति, उनके रहन-सहन और पारंपरिक खानपान का अनुभव भी कर सकेंगे।

    खनन पर्यटन पर भी रहेगा फोकस

    मंत्री ने यह भी बताया कि राज्य में ‘माइनिंग टूरिज्म’ शुरू करने की योजना है। इसके तहत सीसीएल और बीसीसीएल की कोयला खदानों को पर्यटकों के लिए खोला जाएगा, जहां वे ‘ओपन कास्ट माइंस’ का दौरा कर सकेंगे। इसके साथ ही धार्मिक और दर्शनीय स्थलों को जोड़ते हुए एक विशेष पर्यटन सर्किट तैयार किया जाएगा। हर 25 किलोमीटर पर एक विश्राम केंद्र बनाया जाएगा, जहां यात्रियों के लिए खान-पान और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इन स्थलों का प्रबंधन स्थानीय ग्राम और वन समितियों को सौंपा जाएगा, जिससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और स्थानीय लोग पर्यटन से जुड़ सकेंगे।

    प्रमुख पर्यटन स्थलों का होगा विकास

    राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा। नेतरहाट के कोयल व्यू प्वाइंट पर ग्लास टावर और अन्य लोकप्रिय स्थलों जैसे दशम फॉल, जोन्हा फॉल, मैगनोलिया प्वाइंट और पतरातू वैली में ग्लास ब्रिज बनाए जाएंगे। इसके अलावा मसानजोर, गेतलसूद, पतरातु, चांडिल, तेनुघट और तिलैया डैम में पर्यटकों के लिए सुविधाएं बेहतर की जाएंगी। ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण पर भी ध्यान दिया जाएगा। पलामू किले के जीर्णोद्धार के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को पत्र लिखा जाएगा, जबकि हजारीबाग के मेगालिथ स्थल का भी विकास किया जाएगा।

    स्पेन से सीखने जाएगी झारखंड की टीम

    झारखंड के पर्यटन क्षेत्र को नई ऊंचाई देने के लिए मंत्री सुदिव्य कुमार और उनकी टीम स्पेन के मैड्रिड में 22-26 जनवरी तक आयोजित अंतरराष्ट्रीय पर्यटन ट्रेड फेयर (FITUR) में भाग ले रही है। इस टीम में पर्यटन सचिव मनोज कुमार, निदेशक अंजिल यादव और उपनिदेशक राजीव कुमार सिंह शामिल हैं। मंत्री 24-25 जनवरी को वापस लौटेंगे, जबकि अन्य अधिकारी 28 जनवरी को झारखंड आएंगे।

    झारखंड में ये नई पर्यटन योजनाएं राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के साथ-साथ स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार के अवसर भी प्रदान करेंगी।

  • झारखंड में अब पर्यटकों के लिए रोमांचक अनुभव का नया विकल्प जहां वे ग्लास ब्रिज पर स्काई वॉक का लुत्फ उठा सकेंगे।

    झारखंड में पर्यटन को मिलेगा नया आयाम, जल्द शुरू होगी ग्लास ब्रिज और स्काई वॉक की सुविधा

    झारखंड के पर्यटकों के लिए रोमांचक अनुभवों का दौर शुरू होने वाला है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर राज्य के तीन प्रमुख पर्यटन स्थलों पर ग्लास ब्रिज और स्काई वॉक का निर्माण किया जाएगा। यह पहल बिहार के राजगीर में बने प्रसिद्ध ग्लास ब्रिज की तर्ज पर की जा रही है।

    तीन पर्यटन स्थलों पर बनेगा ग्लास ब्रिज

    ग्लास ब्रिज के निर्माण के लिए रांची जिले के दशम फॉल, हुंडरू फॉल, और नेतरहाट के मंगोलिया प्वाइंट का चयन किया गया है। पर्यटन विभाग ने इन स्थलों पर निर्माण के लिए जमीन की उपलब्धता सुनिश्चित कर ली है। इसके साथ ही राजगीर में ग्लास ब्रिज का निर्माण करने वाली परामर्शी कंपनी से संपर्क स्थापित किया गया है। कंपनी को तीनों स्थलों पर ग्लास ब्रिज के लिए विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने का निर्देश दिया गया है।

    पर्यटकों की संख्या का आकलन और सुरक्षा पर जोर

    ग्लास ब्रिज निर्माण के दौरान संभावित पर्यटकों की संख्या का आकलन किया जाएगा। परामर्शी कंपनी को साइट की विस्तृत जानकारी जुटाने के साथ-साथ पर्यटकों की संख्या, जमीन अधिग्रहण, डिज़ाइन, सुरक्षा मानकों और रखरखाव के लिए एक मजबूत मॉडल तैयार करने को कहा गया है।

    देश में तीसरा ग्लास ब्रिज होगा झारखंड में

    वर्तमान में भारत में केवल दो ग्लास ब्रिज हैं। पहला ग्लास ब्रिज सिक्किम के पेलिंग में और दूसरा बिहार के राजगीर में है। अब झारखंड इन पर्यटन स्थलों की श्रेणी में शामिल होने जा रहा है। दुनिया का पहला ग्लास ब्रिज चीन के हेबई प्रांत में बना था, जिसने पर्यटकों के बीच इसे खासा लोकप्रिय बनाया।

    पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

    झारखंड में ग्लास ब्रिज और स्काई वॉक की योजना राज्य के पर्यटन को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह न केवल स्थानीय पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा बल्कि देश और विदेश से भी अधिक पर्यटकों को झारखंड की ओर खींचेगा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की यह पहल राज्य में पर्यटन उद्योग को नई पहचान दिलाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।