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  • श्री कबीर ज्ञान मंदिर में 721 यूनिट रक्तदान, महिलाओं ने दिखाया नया संकल्प

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    गिरिडीह : भाद्र शुक्ल चतुर्थी के अवसर पर सद्गुरु मां ज्ञान का पावन जन्मोत्सव श्री कबीर ज्ञान मंदिर में बड़े ही हर्षोल्लास और भक्तिभाव से मनाया गया। हजारों की संख्या में श्रद्धालु सुबह से ही मंदिर परिसर में एकत्र हुए और पंक्तिबद्ध होकर अपने आराध्य सद्गुरु मां ज्ञान का पूजन-अर्चन किया।

    इस विशेष अवसर पर श्री कबीर ज्ञान मंदिर ट्रस्ट के तत्वावधान में रक्तदान महायज्ञ का आयोजन किया गया। इस वर्ष रक्तदान में नया इतिहास रचते हुए कुल 721 यूनिट रक्त एकत्र किया गया, जो अब तक के सभी रिकॉर्ड को पार कर गया।

    ट्रस्ट के अनुसार, मंदिर राज्य में रक्तदान के क्षेत्र में लगातार प्रथम स्थान पर रहा है। हर वर्ष सद्गुरु मां के जन्मोत्सव पर रक्तदान शिविर आयोजित होता है और प्रत्येक बार संस्था अग्रणी स्थान पर रहती है। इस बार की खासियत यह रही कि 721 यूनिट रक्तदान में से 270 यूनिट रक्त महिलाओं द्वारा दान किया गया। खासकर तीज व्रत सम्पन्न करने के तुरंत बाद इतने बड़े पैमाने पर महिलाओं का रक्तदान करना समाज के लिए एक प्रेरणादायी मिसाल माना जा रहा है।

    सद्गुरु मां ज्ञान ने इस अवसर पर कहा—
    “बहनें परिवार का स्तंभ होती हैं। उनका स्वस्थ रहना पूरे परिवार के स्वास्थ्य की गारंटी है। रक्तदान से उनका हीमोग्लोबिन स्तर संतुलित रहता है और वे स्वयं को हमेशा ऊर्जावान महसूस करती हैं। जिस प्रकार मेहंदी बांटने वाले के हाथ अपने आप रंग जाते हैं, उसी प्रकार रक्तदान करने से दाता स्वयं अप्रत्याशित लाभ पाता है। यह न केवल शरीर को स्वस्थ रखता है बल्कि मानसिक संतोष और आशीर्वाद भी देता है।”

    उन्होंने आगे कहा कि जब किसी मरीज को रक्त की आवश्यकता होती है, तब उसका परिवार किस मानसिक स्थिति से गुजरता है, यह वही समझ सकता है जो इस परिस्थिति में रहा हो। ऐसे में किसी अनजान व्यक्ति से मिला रक्त उनके लिए जीवनदान होता है और दाता को उनका सच्चा आशीर्वाद मिलता है।

    कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर वरिष्ठ अधिवक्ता सुब्रत कुमार मित्रा, सेवानिवृत्त आईएएस रामानंद जी, आईएमए अध्यक्ष डॉ. रितेश सिन्हा, रेड क्रॉस अध्यक्ष अरविंद कुमार, माहुरी वैश्य महामंडल के अध्यक्ष राजेश गुप्ता, सांसद प्रतिनिधि दिनेश यादव, डॉ. विकास माथुर, ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. सोहल, मदन लाल विश्वकर्मा, अरुण माथुर, अशोक राम, सेवानिवृत्त फौजी जनार्दन राय, किशोर सिंह समेत समाज के अनेक प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।

    कार्यक्रम के दौरान सद्गुरु मां ने यह भी कहा—
    “रक्तदान केवल एक चिकित्सीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि मानवता का उत्सव है। यह वह क्षण है जब आपके द्वारा दिया गया रक्त किसी अन्य के जीवन में धड़कन बनकर दौड़ने लगता है। इसमें न कोई खर्च है, न कोई हानि—बस लाभ ही लाभ है।”

    इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने संकल्प लिया—
    “करेंगे रक्तदान, बनेंगे किसी के मुस्कान; यही है पुण्य महान।”

    पुस्तक विमोचन.

    जन्मोत्सव पर सद्गुरु मां द्वारा रचित पुस्तक “कबीर वाणी में रहस्यमयी अध्यात्म” का विमोचन भी किया गया। इस पुस्तक में सद्गुरु कबीर की वाणियों को नए दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया गया है। सद्गुरु मां ने बताया कि यह कृति आधुनिक जीवन की परिस्थितियों में आध्यात्मिक मार्गदर्शन का काम करेगी और यह सिखाएगी कि गृहस्थ जीवन में रहते हुए भी व्यक्ति कैसे आत्मिक गहराइयों में उतर सकता है।

     

  • श्री कबीर ज्ञान मंदिर में सद्गुरु विवेक साहब निर्वाण महोत्सव का शुभारंभ, श्रद्धालुओं का उमड़ा जनसैलाब

    चंदन पांडे की रिपोर्ट…………

    गिरिडीह : श्रद्धा, समर्पण और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरे माहौल में श्री कबीर ज्ञान मंदिर में सद्गुरु विवेक साहब निर्वाण महोत्सव का दो दिवसीय आयोजन बड़े श्रद्धा भाव से आरंभ हुआ। संत कबीर साहब द्वारा रचित साखीग्रंथ के अखंड पाठ के साथ इस महोत्सव की शुरुआत हुई, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया और आध्यात्मिक शांति का अनुभव किया।

    समाधि पर चादर अर्पण, भजन-कीर्तन से गूंजा मंदिर परिसर।

    प्रातः कालीन सत्र के पश्चात श्रद्धालुओं ने सद्गुरु विवेक साहब की पावन समाधि पर चादर अर्पित कर अपनी श्रद्धा व्यक्त की। वहीं, शाम के सत्र में नन्हे-मुन्ने बच्चों ने भक्ति भाव से ओत-प्रोत भावनृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी। साथ ही ‘जागो हिंदू जागो’ नाटक का मंचन किया गया, जिसने हिंदू संस्कृति पर आक्रमण और भारत भूमि पर मुगल आक्रांताओं की विभीषिका को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।

    महोत्सव में विशेष आकर्षण का केंद्र रहा सद्गुरु मां का दिव्य भजन, जिसे सुनकर भक्तजन भक्ति भाव में डूब गए। इसके बाद महा आरती और भंडारे के साथ प्रथम दिवस का समापन किया गया।

    गुरु गोविंद धाम मंदिर की वर्षगांठ, 21 वर्षों का आध्यात्मिक सफर।

    इस शुभ अवसर पर बताया गया कि श्री कबीर ज्ञान मंदिर परिसर में स्थित ‘गुरु गोविंद धाम मंदिर’ का आज 21वां स्थापना दिवस भी है। मंदिर, जहां भगवान नारायण और सद्गुरु कबीर के भव्य विग्रह विराजमान हैं, इस खास मौके पर दिव्य और भव्य साज-सज्जा से जगमगा रहा है।

    सद्गुरु मां का संदेश: समाज और राष्ट्र को मजबूत करने का आह्वान

    इस दौरान सद्गुरु मां ने कहा कि ऐसे आध्यात्मिक कार्यक्रम समाज में नई चेतना और जागृति लाते हैं। उन्होंने कहा, “हमारा धर्म, हमारा समाज और हमारा राष्ट्र मजबूत हो, यही संतों का संकल्प है। आज का दिन एक दिव्य दिवस है, और हम सब इसके साक्षी बन रहे हैं।”

    उन्होंने आगे कहा कि सद्गुरु विवेक साहब एक अलौकिक संत थे, और वे भक्तजन सौभाग्यशाली हैं, जिन्हें उनका सानिध्य प्राप्त हुआ।

    भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक जागरण का संगम

    संपूर्ण आयोजन में श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति, भक्ति संगीत, धार्मिक अनुष्ठान और आध्यात्मिक संदेशों का अद्भुत समागम देखने को मिला। आयोजन समिति ने बताया कि महोत्सव के दूसरे दिन भी कई भक्ति कार्यक्रम और प्रवचन आयोजित किए जाएंगे, जिसमें दूर-दूर से श्रद्धालु भाग लेंगे।

    धर्म, श्रद्धा और संस्कृति की इस दिव्य यात्रा में सम्मिलित होने का सौभाग्य जिन श्रद्धालुओं को प्राप्त हुआ, वे स्वयं को भाग्यशाली मान रहे हैं।

  • कबीर ज्ञान मंदिर में शुरू होगा सद्गुरु विवेक साहब निर्वाण महोत्सव, श्रद्धालुओं का उमड़ेगा जनसैलाब

    By Chandan Pandey

    गिरिडीह के पावन धरा पर एक बार फिर आध्यात्मिक आस्था का सैलाब उमड़ने वाला है। श्री कबीर ज्ञान मंदिर में सद्गुरु विवेक साहब निर्वाण महोत्सव का भव्य दो दिवसीय आयोजन गुरुवार से प्रारंभ हो रहा है। श्रद्धालु संत कबीर साहब के साखी पाठ के साथ इस महोत्सव का शुभारंभ करेंगे।

    महोत्सव का प्रमुख आकर्षण सद्गुरु मां का दिव्य उद्बोधन होगा, जो भक्तों को अध्यात्म और भक्ति की नई ऊंचाइयों तक ले जाने का कार्य करेगा। इसके साथ ही ‘जागो हिंदू जागो’ नामक नाट्य मंचन भी होगा, जो उपस्थित श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देगा।

    इस आयोजन में गिरिडीह, झारखंड, बिहार सहित अन्य राज्यों से श्रद्धालुओं के बड़ी संख्या में आने की संभावना जताई जा रही है। मंदिर को भव्य रूप से सजाया गया है, जिससे पूरा परिसर एक अद्भुत दिव्यता का अनुभव करा रहा है।

    ब्रह्मलीन संत विवेक साहब: एक दिव्य संत

    सद्गुरु विवेक साहब महाराज पूर्ण आत्मज्ञानी, त्रिकालदर्शी और दिव्यद्रष्टा संत थे। उनके हृदय में समस्त मानवता के लिए प्रेम और करुणा का भाव था। भक्तों के बीच वे ‘सरकार प्रभु’ के नाम से प्रसिद्ध थे। वर्ष 2000 में उन्होंने गिरिडीह में अपने शरीर का त्याग किया था।

    उनकी समाधि श्री कबीर ज्ञान मंदिर प्रांगण में स्थित है, जहां हर वर्ष निर्वाण तिथि—माघ शुक्ल पक्ष द्वितीया के दिन श्रद्धालु श्रद्धा सुमन अर्पित करने के लिए एकत्रित होते हैं।

    इस बार भी श्रद्धा, भक्ति और दिव्यता का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा!