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  • झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन ने लालू प्रसाद यादव से राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर की चर्चा

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    पटना: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सोमवार को बिहार की राजधानी पटना पहुंचे। यहाँ उन्होंने राबड़ी देवी के सरकारी आवास पर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के संस्थापक और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव से शिष्टाचार मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने लालू प्रसाद यादव के स्वास्थ्य की जानकारी ली और उनके हालचाल पूछे।

    मुलाकात के दौरान हेमंत सोरेन और लालू प्रसाद यादव के बीच देश की मौजूदा राजनीतिक परिस्थिति, सामाजिक न्याय की चुनौतियों और आर्थिक स्थिति पर गंभीर चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने शिक्षा, स्वास्थ्य और युवाओं के भविष्य जैसे मुद्दों पर भी विचार साझा किए। इस दौरान राबड़ी देवी समेत परिवार के अन्य सदस्य और राजद के कई वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहे।

    लालू यादव को बताया संघर्ष और न्याय की राजनीति का प्रतीक.

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मुलाकात के बाद कहा कि लालू प्रसाद यादव भारतीय राजनीति में संघर्ष और न्याय की राजनीति के सशक्त प्रतीक हैं। उन्होंने हमेशा गरीबों, पिछड़ों और वंचितों के अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी है। सोरेन ने कहा कि लालू यादव जैसे नेताओं के अनुभव और मार्गदर्शन से लोकतंत्र और सामाजिक न्याय की मजबूती होती है।
    उन्होंने यह भी कहा कि झारखंड और बिहार के रिश्ते ऐतिहासिक रूप से गहरे हैं। दोनों राज्य मिलकर काम करेंगे, तो विकास की गति और भी तेज होगी।

    वोटर अधिकार यात्रा में बोले सोरेन – “यह चुनाव देश का संकल्प होगा”

    इससे पहले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पटना में ‘वोटर अधिकार यात्रा’ के समापन अवसर पर जनसभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि बिहार में होने वाला आगामी विधानसभा चुनाव सिर्फ राज्य की दिशा तय नहीं करेगा, बल्कि यह देश की दशा और दिशा का भी निर्धारण करेगा।
    उन्होंने भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा धनबल और बाहुबल के सहारे सत्ता में आने की कोशिश करती है। केंद्रीय एजेंसियों – सीबीआई और ईडी – का दुरुपयोग कर विपक्षी नेताओं को डराया-धमकाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मुझे भी झूठे मामलों में जेल भेजा गया, लेकिन जेल जाने के बावजूद हमने झारखंड की जनता का हौसला टूटने नहीं दिया। अगर हम जेल में नहीं होते, तो झारखंड में लोकसभा चुनाव में भाजपा एक भी सीट नहीं जीत पाती।

    भाजपा पर ‘वोट चोरी‘ का आरोप.

    हेमंत सोरेन ने भाजपा पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि आज भाजपा सत्ता में ‘वोट चोरी’ के सहारे बनी हुई है। यह कोई नई बात नहीं है, बल्कि वर्षों से भाजपा इस गोरखधंधे का सहारा लेती रही है। फर्क सिर्फ इतना है कि आज इस खेल का पर्दाफाश सबके सामने हो गया है। उन्होंने कहा कि भाजपा का मुकाबला तभी संभव है जब विपक्ष और जनता एकजुट होकर इसका सामना करें। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा – “जब हम सब मिलकर खड़े होंगे, तो कोई ताकत हमें रोक नहीं पाएगी।”

    वोटर सूची पुनरीक्षण पर उठाए सवाल.

    बिहार की ऐतिहासिक धरती का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने मतदाता सूची संशोधन की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि विशेष और गहन पुनरीक्षण को एक साथ जोड़कर जो प्रक्रिया अपनाई गई है, वह गलत है और इससे मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।

     

  • लालू यादव फिर चुने गए RJD  के राष्ट्रीय अध्यक्ष का कब्जा, 13वीं बार निर्विरोध चुनाव

    परवेज़ आलम. By The News Post4u.

    राष्ट्रीय जनता दल (राजद) में नेतृत्व को लेकर चल रही प्रक्रिया एक बार फिर उसी बिंदु पर पहुंची, जहां से पार्टी की पहचान शुरू होती है। पार्टी संस्थापक लालू प्रसाद यादव को लगातार 13वीं बार राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में निर्विरोध चुन लिया गया है। यह घोषणा पार्टी के निर्वाचन पदाधिकारी रामचंद्र पूर्वे ने अधिसूचना जारी कर की।

    सोमवार, 23 जून को लालू यादव ने राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल किया था। मंगलवार, 24 जून को दोपहर 2 बजे नामांकन पत्रों की जांच की गई और दोपहर 3 बजे तक नाम वापस लेने की समयसीमा तय थी। लेकिन जब किसी अन्य उम्मीदवार ने न तो नामांकन दाखिल किया और न ही लालू यादव ने अपना नाम वापस लिया, तो उन्हें निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया गया।

    कब सौंपा जाएगा प्रमाण पत्र?

    निर्वाचन पदाधिकारी रामचंद्र पूर्वे ने बताया कि लालू यादव को निर्वाचन का आधिकारिक प्रमाण पत्र 5 जुलाई 2025 को आयोजित होने वाली पार्टी की राष्ट्रीय परिषद की बैठक में सौंपा जाएगा। इसी बैठक में उनका आधिकारिक रूप से कार्यभार भी घोषित किया जाएगा।

    इसका राजनीतिक महत्व क्या है?

    राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, लालू प्रसाद यादव का एक बार फिर राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना यह दर्शाता है कि पार्टी अब भी पूरी तरह उनके नेतृत्व में विश्वास रखती है। हालांकि लालू यादव सक्रिय राजनीति से स्वास्थ्य कारणों से थोड़ा पीछे रहे हैं, फिर भी उनका करिश्माई प्रभाव, संगठन पर पकड़ और सामाजिक न्याय की राजनीति में उनकी गूंज अब भी बनी हुई है।

     RJD के अंदरूनी समीकरण.

    राजद में लंबे समय से यह अटकलें थीं कि अब पार्टी की कमान तेजस्वी यादव को सौंप दी जाएगी, लेकिन इस बार फिर से लालू यादव की ताजपोशी यह संकेत देती है कि वह अभी भी पार्टी का चेहरा बने रहेंगे और संगठन को अपनी निगरानी में आगे बढ़ाएंगे। संभवतः पार्टी की रणनीति यह है कि वरिष्ठता का नेतृत्व और युवाओं का संचालन साथ-साथ चले।
    लालू प्रसाद यादव का निर्विरोध निर्वाचन न केवल राजद की एकजुटता को दर्शाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि पार्टी अभी भी अपने संस्थापक के अनुभव और रणनीतिक कौशल पर भरोसा करती है। आने वाले समय में राजद किस तरह से अपनी राजनीति को आगे बढ़ाएगा, इस पर सबकी निगाहें टिकी रहेंगी।

  • मानहानि की जंग में सियासी तकरार: लालू यादव के साले साधु यादव ने भेजा ₹5 करोड़ का कानूनी नोटिस

    ‘Broken Promises’ किताब बनी विवाद की जड़

    परवेज़ आलम for The News Post4u.

    राजनीति और लेखनी के टकराव में अब कानूनी लड़ाई की आहट सुनाई देने लगी है। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के साले और चर्चित राजनीतिक शख्सियत अनिरुद्ध प्रसाद उर्फ साधु यादव ने झारखंड भाजपा के चुनाव प्रबंधन प्रमुख मृत्युंजय शर्मा को ₹5 करोड़ का मानहानि नोटिस भेजा है। यह नोटिस शर्मा द्वारा लिखी गई किताब ‘Broken Promises: Caste, Crime and Politics in Bihar’ और हाल ही में एक पॉडकास्ट में दिए गए बयान के संबंध में भेजा गया है।

    क्या है विवाद?

    20 जून 2024 को एक पॉडकास्ट में मृत्युंजय शर्मा ने साधु यादव से जुड़ी कुछ घटनाओं का जिक्र किया था, जिन्हें साधु यादव ने “गंभीर, आधारहीन और उनकी छवि को धूमिल करने वाला” बताया है। नोटिस में तीन प्रमुख आरोपों को गलत, बेबुनियाद और अपमानजनक बताते हुए माफी की मांग की गई है।

    ये हैं वे तीन विवादित आरोप:

    1. गौतम-शिल्पी हत्याकांड में साधु यादव की कथित संलिप्तता, जबकि उनका कहना है कि इस मामले में CBI और न्यायालय दोनों ने उन्हें क्लीन चिट दी है।
    2. छात्र नेता चंद्रशेखर की हत्या के विरोध में JNU छात्रों द्वारा दिल्ली स्थित बिहार भवन पर किए गए प्रदर्शन के दौरान, गोली चलवाने का आदेश देने का आरोप। साधु यादव ने इसे भी  पूरी तरह मनगढ़ंत बताया है।
    3. रोहिणी आचार्य की शादी के समय एक शो-रूम से कार, गहने और फर्नीचर जबरन उठवाने का दावा, जिसे भी वे झूठा और अपमानजनक करार देते हैं।

    साधु यादव की मांगें.

    मानहानि नोटिस के तहत साधु यादव ने मृत्युंजय शर्मा से बिना शर्त माफी मांगने की बात कही है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि ऐसा नहीं किया गया तो वे कानूनी कार्रवाई के लिए बाध्य होंगे।

     

    मृत्युंजय शर्मा का पलटवार.

    इधर, मृत्युंजय शर्मा ने किसी भी प्रकार की माफी मांगने से साफ इनकार करते हुए कहा,

    “जो किताब मैंने लिखी है, वह तथ्यात्मक शोध और ऐतिहासिक दस्तावेजों पर आधारित है। साधु यादव जैसे व्यक्ति किस ‘प्रतिष्ठा‘ की बात कर रहे हैं, यह पूरा बिहार जानता है।” मृत्युंजय शर्मा का कहना है कि लालू यादव के साले साधु यादव ने जिन तीन मामलों का जिक्र कर मानहानि का नोटिस भेजा है, उससे हर बिहारी वाकिफ है. इनके पास कौन सी प्रतिष्ठा है जिसको ठेस पहुंची है. यही तो वह संस्कृति है- गुंडागर्दी, डर और परिवारवाद की, जिसने लालू यादव के राज में बिहार को बर्बाद किया था और अब सच बोलने वालों को डराने के लिए कानूनी नोटिस भेजा जा रहा है.

    शर्मा का यह भी आरोप है कि साधु यादव ने उन्हें फोन कर दबाव डालने की कोशिश की थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि “यदि मुझे या मेरे परिवार को कोई नुकसान पहुंचता है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी साधु यादव की होगी।”

    किताब, चुनाव और राजनीति.

    11 मार्च 2024 को प्रकाशित हुई यह पुस्तक उस समय सामने आई थी जब देश में लोकसभा चुनावों का माहौल गर्म था। अब जबकि बिहार विधानसभा चुनाव नजदीक हैं, साधु यादव द्वारा भेजा गया यह नोटिस राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर रहा है।

    मृत्युंजय शर्मा का दावा है कि वे सच के पक्ष में खड़े हैं और उनके लेखन का उद्देश्य बिहार की जातीय राजनीति, अपराध और सत्ता के समीकरणों को उजागर करना है। उन्होंने कहा,

    “डराने, धमकाने और मानहानि के नोटिस भेजने से सच्चाई नहीं रुकती।”

    कौन हैं मृत्युंजय शर्मा ?

    • झारखंड भाजपा के इलेक्शन मैनेजमेंट प्रमुख हैं।
    • बीआईटी मेसरा और एक्सएलआरआई, जमशेदपुर से पढ़ाई की है।
    • पूर्व में एशियन पेंट्स में काम कर चुके हैं और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के साथ भाजपा संगठन में कार्यरत रहे हैं।
    • ‘Broken Promises’ किताब के ज़रिए उन्होंने बिहार की राजनीति की कथित काली परतों को सामने लाने की कोशिश की है।

    यह मामला केवल एक मानहानि नोटिस का नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रतिष्ठा, इतिहास के पुनर्पाठ और सियासी समीकरणों के टकराव का प्रतीक बन चुका है। अब देखना यह है कि यह विवाद अदालत की चौखट तक पहुंचता है या सियासत की गलियों में और गहराता है।

     

  • तेज प्रताप यादव RJD और परिवार से 6 साल के लिए निष्कासित

    लालू प्रसाद यादव का बड़ा फैसला, बिहार की राजनीति में मचा हलचल

    परवेज़ आलम.

    बिहार की राजनीति एक बार फिर तेज हो गई है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने अपने बड़े बेटे तेज प्रताप यादव को न केवल पार्टी से छह वर्षों के लिए निष्कासित कर दिया, बल्कि उन्हें परिवार से भी अलग कर देने का ऐलान कर दिया है। इस फैसले ने न सिर्फ यादव परिवार में दरार की अटकलों को हवा दी है, बल्कि आरजेडी के भीतर आंतरिक कलह और सियासी समीकरणों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

    लालू यादव ने इस विषय पर ट्वीट करते  हुए लिखा “”निजी जीवन में नैतिक मूल्यों की अवहेलना करना हमारे सामाजिक न्याय के लिए सामूहिक संघर्ष को कमज़ोर करता है। ज्येष्ठ पुत्र की गतिविधि, लोक आचरण तथा गैर जिम्मेदाराना व्यवहार हमारे पारिवारिक मूल्यों और संस्कारों के अनुरूप नहीं है। अतएव उपरोक्त परिस्थितियों के चलते उसे पार्टी और परिवार से दूर करता हूं। अब से पार्टी और परिवार में उसकी किसी भी प्रकार की कोई भूमिका नहीं रहेगी। उसे पार्टी से 6 साल के लिए निष्कासित किया जाता है। अपने निजी जीवन का भला-बुरा और गुण-दोष देखने में वह स्वयं सक्षम है। उससे जो भी लोग संबंध रखेंगे वो स्वविवेक से निर्णय लें। लोकजीवन में लोकलाज का सदैव हिमायती रहा हूं। परिवार के आज्ञाकारी सदस्यों ने सावर्जनिक जीवन में इसी विचार को अंगीकार कर अनुसरण किया है।

    तेज प्रताप के निष्कासन की वजह मानी जा रही है हाल ही में वायरल हुआ वह वीडियो जिसमें वह अनुष्का यादव के साथ नजर आ रहे हैं। खबरों के मुताबिक तेज प्रताप ने इस रिश्ते को सार्वजनिक रूप से स्वीकार भी किया है। उन्होंने यह भी बताया कि वह पिछले 12 वर्षों से अनुष्का से प्रेम करते थे और अब उन्होंने उनसे विवाह कर लिया है

    तेज प्रताप की छवि: रंगीन, धार्मिक और विवादास्पद.

    तेज प्रताप यादव हमेशा से ही बिहार की राजनीति में अपनी अनोखी शैली, धार्मिक रूप और सोशल मीडिया पर सक्रियता के लिए चर्चा में रहे हैं। कभी भगवान शिव, तो कभी श्रीकृष्ण के रूप में दिखाई देना, होली पर पारंपरिक वेशभूषा पहनकर आयोजन करना—तेज प्रताप ने हमेशा खुद को अलग दिखाने की कोशिश की।

    राजनीतिक करियर की बात करें तो उन्होंने 2015 में महुआ सीट से जीत दर्ज की और नीतीश कुमार की सरकार में स्वास्थ्य मंत्री बने। फिर 2020 में हसनपुर से विधायक चुने गए और दूसरी बार नीतीश सरकार में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री का पद संभाला। हालांकि, उनकी कार्यशैली और विवादास्पद बयान अक्सर पार्टी की मुश्किलें बढ़ाते रहे।

    निजी जीवन में भी विवादों से घिरे रहे तेज प्रताप.

    तेज प्रताप का निजी जीवन भी सुर्खियों से अछूता नहीं रहा है। 2018 में उन्होंने बिहार के पूर्व मंत्री चंद्रिका राय की बेटी ऐश्वर्या राय से शादी की थी। यह रिश्ता ज्यादा लंबा नहीं चला और तलाक की प्रक्रिया अब भी अदालत में लंबित है। अब अनुष्का यादव के साथ उनकी नई शुरुआत ने राजनीतिक और पारिवारिक हलकों में भूचाल ला दिया है।

    पप्पू यादव ने तेज प्रताप का किया समर्थन, लालू के फैसले पर उठाए सवाल.

    तेज प्रताप यादव के निष्कासन के बाद जन अधिकार पार्टी (JAP) के नेता और पूर्णिया सांसद पप्पू यादव खुलकर उनके समर्थन में सामने आए हैं। उन्होंने तेज प्रताप को “ईमानदार प्रेमी” बताते हुए लालू प्रसाद यादव से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की है।

    “तेज प्रताप ने कोई अपराध नहीं किया है। उन्होंने समाज के सामने सच स्वीकार किया। ऐसे में उन्हें सजा देना कहां तक उचित है?” – पप्पू यादव

    उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि देश की राजनीति में ऐसे कई नेता हैं जिन पर गंभीर आपराधिक आरोप हैं, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं होती, जबकि तेज प्रताप को सिर्फ इसलिए निष्कासित किया गया क्योंकि उन्होंने प्रेम को स्वीकार किया

    राजनीतिक असर: RJD को फायदा या विरोधियों को मिलेगा मुद्दा?

    तेज प्रताप के निष्कासन से RJD को अनुशासन का संदेश देने का मौका मिला है, लेकिन साथ ही यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इससे पार्टी को चुनावी नुकसान होगा। बिहार विधानसभा चुनाव से पहले यह मुद्दा विरोधी दलों के लिए एक बड़ा हथियार बन सकता है। वहीं, तेज प्रताप यादव के समर्थकों में इस फैसले को लेकर नाराज़गी देखी जा रही है।

    अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या तेज प्रताप कोई नया राजनीतिक विकल्प तलाशेंगे, क्या वे बगावती रुख अपनाएंगे, या फिर यह पारिवारिक कलह समय के साथ शांत हो जाएगा ।

  • झारखंड के मंत्री संजय यादव को लालू यादव ने क्या दिया टिप्स !

    पटना: झारखंड के नव-नियुक्त श्रम मंत्री संजय प्रसाद यादव ने पदभार ग्रहण करने के तुरंत बाद बिहार की राजधानी पटना में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, और बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव से मुलाकात की। इस खास मुलाकात में लालू यादव ने मंत्री संजय प्रसाद यादव को गरीबों के हक और अधिकार के लिए काम करने का आशीर्वाद दिया।

    गरीबों की तकदीर बदलने का निर्देश। 
    लालू प्रसाद यादव ने कहा, “गरीबों की तकदीर बदलना हमारा मुख्य लक्ष्य होना चाहिए।” उन्होंने संजय यादव को झारखंड के गांव-गांव जाकर गरीबों के दुख-दर्द समझने और उनकी समस्याओं का समाधान करने की सलाह दी। लालू यादव ने कहा कि विरोधियों को जवाब देने का सबसे अच्छा तरीका है विकास कार्य। उन्होंने जोर देकर कहा, “ईमानदारी और निष्ठा से जनता की सेवा करें, यही असली राजनीति है।”

    लालू-राबड़ी से आशीर्वाद लेकर दिखाया समर्पण । 
    पदभार संभालने के बाद मंत्री संजय प्रसाद यादव ने पटना जाकर अपने राजनीतिक गुरु लालू प्रसाद यादव से आशीर्वाद लिया। इस मौके पर राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव भी मौजूद रहे। आरजेडी के झारखंड प्रदेश प्रवक्ता डॉ. मनोज कुमार ने बताया कि मंत्री ने पार्टी नेतृत्व के प्रति अपनी आस्था प्रकट करते हुए गरीबों और मजदूरों के लिए समर्पित भाव से काम करने का वादा किया।

    झारखंड में श्रम विभाग की नई उम्मीदें । 
    संजय प्रसाद यादव ने लालू यादव से मुलाकात के दौरान राज्य में श्रम विभाग को नई दिशा देने का संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा कि झारखंड में श्रमिकों और बेरोजगारों के लिए कौशल विकास और रोजगार के नए अवसर लाने का काम प्राथमिकता पर रहेगा।

    राजनीतिक संदेश और सादगी का मेल । 
    लालू यादव के साथ इस मुलाकात को राजनीतिक संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है। मंत्री ने न केवल पार्टी नेतृत्व से आशीर्वाद लिया, बल्कि इस दौरान राजद की विचारधारा और गरीबों के लिए समर्पण को केंद्र में रखते हुए अपनी जिम्मेदारी को और अधिक गंभीरता से निभाने का संकेत दिया। झारखंड के श्रम मंत्री संजय प्रसाद यादव अब लालू यादव की सलाह और आशीर्वाद को अमल में लाते हुए झारखंड के श्रमिकों और गरीबों की आवाज बनने की तैयारी में हैं। जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने और विकास कार्यों के जरिए विरोधियों को जवाब देने की इस यात्रा में उनके लिए चुनौतियां और अवसर दोनों हैं।