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  • जन्मदिन पर दिखे ‘कैप्टन कूल’: फैंस को दिया माही ने खास तोहफा, फार्म हाउस से निकलकर लहराया हाथ

    Edited by – परवेज़ आलम.
    For – The News Post4u.

    भारतीय क्रिकेट के सबसे चहेते सितारे और देश को तीन आईसीसी ट्रॉफियां दिलाने वाले महेंद्र सिंह धोनी  ने 7 जुलाई को अपने जन्मदिन के मौके पर एक ऐसा पल रच दिया जिसे रांची कभी नहीं भूलेगा। सोमवार की सुबह, जब रांची हल्की बारिश और बादलों की चादर में लिपटी थी, धोनी अपने सिमलिया स्थित फार्म हाउस से बाहर निकले और अपने चाहने वालों को अपनी झलक देकर जन्मदिन को यादगार बना दिया।

    धोनी इस मौके पर अपनी नई चमचमाती कार में सवार थे। जैसे ही उन्होंने फार्म हाउस का गेट पार किया, वहां पहले से मौजूद सैकड़ों प्रशंसकों में उत्साह की लहर दौड़ गई। धोनी-धोनी!”  के नारों से इलाका गूंज उठा। माही ने भी अपने खास शांत और सादगीपूर्ण अंदाज़ में कार की स्पीड धीमी की और हाथ हिलाकर सबका अभिवादन किया।

    भीड़ में बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक, हर कोई अपनी आंखों से ‘कैप्टन कूल’ की एक झलक पाने को आतुर था। कुछ लोगों के हाथों में तख्तियां थीं जिन पर लिखा था – हैप्पी बर्थडे माही, झारखंड की शान, भारत की जान”। वहीं कुछ युवा अपने मोबाइल कैमरों से उस ऐतिहासिक क्षण को कैद करने में लगे थे।

    सुबह से जुटने लगी थी भीड़, बारिश भी नहीं रोक सकी जोश.

    धोनी के फैंस सुबह से ही उनके फार्म हाउस के बाहर जमा होने लगे थे। किसी ने केक साथ लाया था, तो कोई धोनी के पोस्टर लेकर खड़ा था। फैन क्लब्स ने वहीं सड़क किनारे छोटा-सा मंच बना रखा था जहां संगीत, उत्सव और जोश का माहौल था। बारिश रुक-रुक कर हो रही थी लेकिन लोगों के उत्साह में कोई कमी नहीं थी।

    सोशल मीडिया से लेकर गली-मोहल्लों तक मना जश्न.

    रांची ही नहीं, पूरे देश में माही का जन्मदिन किसी त्योहार से कम नहीं रहा। ट्विटर, इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म्स पर #HappyBirthdayDhoni ट्रेंड करता रहा। फैंस ने जगह-जगह केक काटकर जश्न मनाया और अपने-अपने अंदाज में धोनी के प्रति अपना प्यार जताया।

    एक नजर धोनी की उपलब्धियों पर.
    महेंद्र सिंह धोनी न सिर्फ भारतीय क्रिकेट के सबसे शांत कप्तानों में से हैं, बल्कि उनकी कप्तानी में भारत ने जो इतिहास रचा, वो कभी नहीं मिटाया जा सकता।

    • 2007 में टी20 वर्ल्ड कप.
    • 2011 में वनडे वर्ल्ड कप.
    • 2013 में चैंपियंस ट्रॉफी.

    इसके अलावा उन्होंने भारतीय टेस्ट टीम को भी नंबर-1 रैंकिंग तक पहुंचाया। आईपीएल में भी धोनी की टीम चेन्नई सुपर किंग्स ने उनके नेतृत्व में 5 बार खिताब जीता है, और आज CSK को सबसे सफल फ्रेंचाइज़ी में गिना जाता है.

    जन्मदिन पर धोनी ने कुछ कहा तो नहीं, लेकिन उनका एक इशारा – भीड़ को देखकर मुस्कुराना, हाथ हिलाना और कार की स्पीड धीमी करना – यही संदेश दे गया कि वह आज भी अपने फैंस को सबसे पहले रखते हैं। उनके लिए यह छोटा-सा लम्हा शायद एक दिन का किस्सा हो, लेकिन उनके फैंस के लिए यह यादगार बन गया।

  • महेंद्र सिंह: झारखंड के जननेता को शहादत दिवस पर नमन

    परवेज़ आलम की खास रिपोर्ट ………..

    16 जनवरी झारखंड के लिए एक खास तारीख है। यह दिन उस नेता की याद दिलाता है, जिसने गरीबों, मजदूरों और शोषितों की आवाज़ को बुलंद किया। स्वर्गीय महेंद्र सिंह की शहादत दिवस पर आज झारखंड उन्हें नमन कर रहा है।

    सादगी और संघर्ष से भरा जीवन।

    महेंद्र सिंह का जन्म 1944 में गिरिडीह के छोटे से गांव खंभरा में हुआ। सीमित शिक्षा के बावजूद, उनका ज्ञान और जागरूकता बेमिसाल थी। किताबों और अखबारों से उनका गहरा लगाव था। वह राजनीति को कुर्सी का खेल नहीं, बल्कि जनसेवा का माध्यम मानते थे।

    महेंद्र सिंह ने अपने करियर की शुरुआत लाल सेना के गुरिल्ला नेता के रूप में की। शुरुआत में चुनावी राजनीति के खिलाफ रहने वाले महेंद्र सिंह ने वक्त के साथ अपने विचार बदले और बिहार विधानसभा चुनाव में कूद पड़े। गिरिडीह के बगोदर विधानसभा क्षेत्र से उन्होंने लगातार जीत दर्ज की और गरीबों के सच्चे रहनुमा बने।वे सीपीआई(एमएल) के नेता थे, लेकिन उनकी पहचान केवल पार्टी तक सीमित नहीं थी।

    ईमानदारी और साहस की मिसाल।

    महेंद्र सिंह के लिए राजनीति का मतलब था अन्याय के खिलाफ लड़ाई। उन्होंने खदान मालिकों, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाहियों के खिलाफ आवाज़ उठाई। सत्ता पर तीखा वार करना और जनता के हक की बात करना उनकी पहचान थी। यही वजह है कि वह नक्सल प्रभावित इलाकों में भी उतने ही लोकप्रिय थे जितने ग्रामीण क्षेत्रों में।

    झूठे मामलों में फंसाए गए, पर हिम्मत नहीं हारी।

    1980 के दशक में सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में उन्होंने प्रभावशाली लोगों को चुनौती दी। इसके चलते उन्हें झूठे हत्या के मामले में फंसा दिया गया। निचली अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई, लेकिन हाईकोर्ट ने उन्हें बाइज्जत बरी कर दिया। जेल में भी उन्होंने अन्य कैदियों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया।

    शहादत: विचारधारा को कुचलने की कोशिश।

    2005 में 16 जनवरी को महेंद्र सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह घटना उस वक्त हुई, जब वे चुनावी सभा को संबोधित कर रहे थे। उनकी हत्या केवल एक व्यक्ति पर हमला नहीं थी, बल्कि एक विचारधारा को खत्म करने की कोशिश थी। लेकिन महेंद्र सिंह के विचार आज भी हर उस व्यक्ति के दिल में जिंदा हैं, जो न्याय और समानता की बात करता है।

    झारखंड को एक नई राह दिखाने वाले नेता। 

    महेंद्र सिंह की सादगी, ईमानदारी और साहस आज भी झारखंड के लोगों को प्रेरणा देते हैं। उनकी याद में हर साल बगोदर और उनके गांव खंभरा में लोग जुटते हैं। यह साबित करता है कि महेंद्र सिंह का आंदोलन कभी खत्म नहीं होगा।उनकी मौत के सालों बाद आज भी बगोदर विधान सभा में “महेंद्र सिंह तुम जिंदा हो खेतों व खलिहानों में, जनता के अरमानो में नारे गाँव में गूंजती है”.

    महेंद्र सिंह को नमन। उनकी विरासत हमें यह सिखाती है कि राजनीति केवल सत्ता का खेल नहीं, बल्कि जनता के लिए एक मिशन हो सकता है।