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  • एनडीए विधायक दल की बैठक में सूर्या हांसदा एनकाउंटर से लेकर बनी रणनीति

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क

    रांची : राज्य विधानसभा के मानसून सत्र को लेकर शुक्रवार को एनडीए विधायक दल की महत्वपूर्ण बैठक भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने की। इसमें भाजपा, आजसू, जदयू और लोजपा के विधायक शामिल हुए।

    सूर्या हांसदा एनकाउंटर पर हंगामे की तैयारी.

    बैठक के बाद भाजपा के मुख्य सचेतक नवीन जायसवाल ने मीडिया से कहा कि गोड्डा के युवा आदिवासी नेता सूर्या हांसदा की पुलिस मुठभेड़ का मामला सत्र में जोरशोर से उठाया जाएगा। भाजपा का दावा है कि यह मुठभेड़ पूरी तरह फर्जी है और सरकार इस पर पर्दा डालने की कोशिश कर रही है। पार्टी ने इस घटना की सीबीआई जांच कराने की मांग को सदन में प्रमुख मुद्दा बनाने का फैसला किया है।

    शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल.

    जायसवाल ने राज्य की प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह ध्वस्त बताते हुए कहा कि विद्यालयों में न तो पर्याप्त शिक्षक हैं और न ही बुनियादी सुविधाएं। उन्होंने आरोप लगाया कि अब सरकार विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक के जरिए उच्च शिक्षा को भी कमजोर करना चाहती है। इस बिल के माध्यम से सरकार राज्यपाल के अधिकार खत्म कर कुलपतियों की नियुक्ति अपने हाथ में लेना चाहती है।

    अटल क्लीनिक का नाम बदलने पर विरोध.

    बैठक में यह भी तय हुआ कि भाजपा और एनडीए के विधायक सदन में अटल क्लीनिक का नाम बदलकर मदर टेरेसा क्लीनिक करने के फैसले का कड़ा विरोध करेंगे। नेताओं ने कहा कि यह कदम पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की विरासत को मिटाने की कोशिश है।

    सुरक्षा और धमकी का मुद्दा

    बैठक में यह आरोप भी लगा कि सत्ता पक्ष अपने प्रखंड स्तरीय नेताओं को बड़ी संख्या में बॉडीगार्ड उपलब्ध करा रहा है, जबकि एनडीए के पूर्व विधायकों की सुरक्षा वापस ली जा रही है।
    आजसू विधायक निर्मल महतो ने बताया कि पूर्व उप मुख्यमंत्री सुदेश महतो को जान से मारने की धमकी मिल रही है, जिसे उन्होंने बेहद गंभीर करार देते हुए सदन में उठाने की बात कही।

    बैठक में शामिल प्रमुख विधायक.

    इस रणनीतिक बैठक में भाजपा के अलावा सहयोगी दलों के विधायक भी मौजूद रहे। इनमें जदयू विधायक सरयू राय, आजसू विधायक निर्मल महतो, लोजपा विधायक जनार्दन पासवान सहित भाजपा विधायक सी.पी. सिंह, राज सिन्हा, नागेंद्र महतो, सत्येंद्र तिवारी, आलोक चौरसिया, शशिभूषण मेहता, मनोज यादव, देवेंद्र कुंवर, प्रदीप प्रसाद, रोशनलाल चौधरी, पूर्णिमा दास साहू, मंजू कुमारी और उज्ज्वल दास शामिल रहे।

    एनडीए ने साफ संकेत दिया है कि मानसून सत्र के दौरान विपक्ष सरकार को एक के बाद एक मुद्दों पर घेरेगा। सूर्या हांसदा का एनकाउंटर, शिक्षा संकट, किसानों की दुर्दशा, सुरक्षा व्यवस्था और राजनीतिक बदले की कार्रवाई जैसे विषयों पर सत्र में भारी हंगामा होने की संभावना है।

     

  • झारखंड विधानसभा का मानसून सत्रशुरू,सरकार ने 4,296 करोड़ का अनुपूरक बजट पेश किया

    शिबू सोरेन को भारत रत्न देने की मांग की  गूंज विधान सभा मे सुनाई दी.

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    रांची : झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र शुक्रवार को पुनः आरंभ हुआ। सदन की कार्यवाही की शुरुआत दिवंगत नेताओं और हाल की प्राकृतिक आपदाओं में जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि देने से हुई। इसके बाद झारखंड आंदोलन के प्रणेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिशोम गुरु शिबू सोरेन को भारत रत्न देने की मांग ने पूरे सदन का ध्यान अपनी ओर खींचा।

    सदन में शिबू सोरेन को भारत रत्न देने की मांग.

    कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने शोक प्रस्ताव पर बोलते हुए कहा कि शिबू सोरेन सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि आदिवासी, वंचित और शोषित समाज के हक-हकूक की आवाज रहे हैं। झारखंड आंदोलन की नींव से लेकर राज्य निर्माण तक उनका योगदान अनुपम है। उन्होंने मांग की कि सदन की ओर से सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को शिबू सोरेन को भारत रत्न दिए जाने की सिफारिश करनी चाहिए।

    इस मांग का सदन में मौजूद कई सदस्यों ने जोरदार समर्थन किया।

    • जदयू विधायक सरयू राय ने कहा कि शिबू सोरेन का योगदान राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता का पात्र है।

    • आजसू विधायक निर्मल महतो ने भी समर्थन जताते हुए कहा कि सदन को इस पर प्रस्ताव पारित कर केंद्र को भेजना चाहिए।

    • जयराम महतो (झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा) ने सुझाव दिया कि झारखंड की पहचान पारसनाथ की चोटी पर गुरुजी और प्रमुख आंदोलनकारियों की प्रतिमा स्थापित की जाए।

    • प्रदीप यादव ने गुरुजी को भारत रत्न देने के साथ ही उनके शराबबंदी के सपने को पूरा करने की भी मांग रखी।

    सदन के नेता मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और प्रतिपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने भी गुरुजी के व्यक्तित्व और उनके आंदोलनों की सराहना की। दोनों नेताओं ने कहा कि गुरुजी की सोच और संघर्ष झारखंड की अस्मिता के प्रतीक हैं।

    विधानसभा अध्यक्ष का बयान.

    विधानसभा अध्यक्ष रवींद्र नाथ महतो ने शिबू सोरेन के निधन को “एक युग का अंत” बताया। उन्होंने कहा कि गुरुजी को केवल एक राजनेता मान लेना उनके योगदान को सीमित करना होगा। उनका जीवन झारखंड आंदोलन की आत्मा और संस्कृति का ध्वजवाहक है। उन्होंने गुरुजी के टुंडी आश्रम और चेताब बैसी जैसे ऐतिहासिक आंदोलनों की भी चर्चा की।

    अनुपूरक बजट पेश.

    वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने सदन में 4,296.62 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट पेश किया। यह चालू वित्त वर्ष 2025-26 का पहला अनुपूरक बजट है। इस पर चर्चा 25 अगस्त को होगी।

    गौरतलब है कि यह अनुपूरक बजट मूल रूप से 4 अगस्त को पेश होना था, लेकिन उसी दिन शिबू सोरेन के निधन के कारण सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई थी। इससे पहले मार्च 2025 में राज्य सरकार ने 1.45 लाख करोड़ रुपये का वार्षिक बजट पेश किया था।

    श्रद्धांजलि और कार्यवाही स्थगित.

    सदन ने इस दौरान राज्य के दिवंगत शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन, पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मल्लिक, वरिष्ठ पत्रकार हरिनारायण सिंह और उत्तराखंड व जम्मू-कश्मीर की हालिया प्राकृतिक आपदाओं में मारे गए लोगों को भी श्रद्धांजलि दी।

    श्रद्धांजलि प्रस्ताव और शोक संदेशों के बाद सदन की कार्यवाही सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी गई।

    पूरक मानसून सत्र का कार्यक्रम.

    झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र पहले 1 अगस्त से 7 अगस्त 2025 तक चलना था, लेकिन 4 अगस्त को शिबू सोरेन के निधन के कारण इसे अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करना पड़ा। अब यह पूरक मानसून सत्र 22 अगस्त से 28 अगस्त 2025 तक आयोजित किया जा रहा है।

  • झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र 22 से 28 अगस्त तक

    शिबू सोरेन के निधन के बाद दोबारा तय हुआ कार्यक्रम.

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क

    रांची : झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र, जो दिशोम गुरु और झारखंड आंदोलन के प्रणेता शिबू सोरेन के निधन के बाद अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया था, अब नए कार्यक्रम के अनुसार 22 अगस्त से 28 अगस्त 2025 तक आयोजित होगा। विधानसभा सचिवालय ने गुरुवार को इसकी आधिकारिक अधिसूचना जारी की।

    इस संबंध में निर्णय विधानसभा अध्यक्ष रबींद्र नाथ महतो ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के प्रस्ताव पर लिया। नए कार्यक्रम के अनुसार सत्र में चार कार्य दिवस होंगे। हालांकि सचिवालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि आवश्यकता पड़ने पर सत्र की अवधि 28 अगस्त के बाद भी बढ़ाई जा सकती है, जिसके लिए अलग से अधिसूचना जारी की जाएगी।

    मानसून सत्र का संशोधित कार्यक्रम

    • 22 अगस्त (शुक्रवार): 4 अगस्त को निर्धारित कार्य पूरे किए जाएंगे, प्रश्नकाल को छोड़कर। इस दिन वित्तीय वर्ष 2025-26 का प्रथम अनुपूरक बजट पेश होगा। साथ ही शोक प्रस्ताव भी पारित किए जाएंगे।

    • 25 अगस्त (सोमवार): प्रश्नकाल, अनुपूरक बजट पर सामान्य चर्चा, मतदान और विनियोग विधेयक का पारण किया जाएगा।
    • 26 अगस्त (मंगलवार): प्रश्नकाल, राजकीय विधेयकों की प्रस्तुति और अन्य शासकीय कार्य होंगे।

    • 28 अगस्त (गुरुवार): प्रश्नकाल और गैर-सरकारी संकल्पों पर चर्चा, लेकिन केवल उन प्रस्तावों पर जिनकी सूचना 23 जुलाई तक दी गई है।

    क्यों हुआ था स्थगित?

    झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र मूल रूप से 1 अगस्त से 7 अगस्त 2025 तक निर्धारित था। लेकिन 4 अगस्त को पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड आंदोलन के जननायक शिबू सोरेन के निधन के कारण पूरे सत्र को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करना पड़ा।
    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बाद में विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर यह आग्रह किया था कि शेष बचे महत्वपूर्ण विधायी और वित्तीय कार्यों को पूरा करने के लिए पुनः अनुपूरक सत्र आयोजित किया जाए।

    इस प्रकार, अब यह अनुपूरक सत्र न केवल राज्य के वित्तीय कार्यों को पूरा करने का अवसर बनेगा बल्कि गुरुजी शिबू सोरेन के योगदान को याद करने और उनके निधन पर शोक प्रस्ताव पारित करने का भी मंच होगा।

  • झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र शुरू, पहले दिन शोक प्रस्ताव

    सदन के बाहर SIR पर चलती रही सियासत.

    रांची ब्यूरो रिपोर्ट The News Post4u.

    रांची : झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र शुक्रवार से प्रारंभ हो गया। सत्र की शुरुआत विधानसभा अध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो के संबोधन से हुई, जिसमें उन्होंने लोकतंत्र के मूल मूल्यों को रेखांकित करते हुए कहा कि सदन में अल्पमत का भी उतना ही सम्मान होना चाहिए जितना बहुमत का। उन्होंने रचनात्मक बहस, लोकतांत्रिक संवाद और जन आकांक्षाओं की पूर्ति पर जोर दिया।

    सत्र 7 अगस्त तक चलेगा और इस दौरान वित्तीय वर्ष 2025-26 का पहला अनुपूरक बजट सदन में पेश किया जाएगा।

    पहले दिन दिवंगत आत्माओं को दी गई श्रद्धांजलि.

    सत्र की शुरुआत शोक प्रस्तावों के साथ हुई। पूर्व सांसद चंद्रशेखर सिंह, तिलकधारी सिंह और वैज्ञानिक डॉ. के. कस्तूरीरंगन सहित हाल में दिवंगत कई प्रतिष्ठित व्यक्तियों को सदन ने याद किया। इसके अलावा अहमदाबाद विमान हादसे और जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में मारे गए लोगों को भी श्रद्धांजलि दी गई। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने उनके योगदानों को याद किया। सदन में दो मिनट का मौन रखकर शोक प्रकट किया गया, जिसके बाद कार्यवाही सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी गई।

    स्पीकर ने दी संवैधानिक मूल्यों की याद.

    अध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो ने कहा, “हमें संविधान सभा की उस भावना को हमेशा याद रखना चाहिए, जिसमें यह कहा गया था कि हमने इस संविधान के माध्यम से देश की जनता को अपनी तकदीर खुद लिखने की ताकत दी है। उन्होंने दिशोम गुरु शिबू सोरेन के जल्द स्वस्थ होने की कामना की और उनके राज्य के लिए योगदान को स्मरण किया।

    सत्र के दौरान स्पीकर ने पांच सभापतियों — स्टीफन मरांडी, सीपी सिंह, निरल पूर्ति, रामचंद्र सिंह और नीरा यादव — के नामों की घोषणा की। कार्यमंत्रणा समिति में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी समेत कई सदस्य शामिल हैं। दीपक बिरूआ और मथुरा महतो जैसे कई लोगों को विशेष आमंत्रित सदस्य भी नामित किया गया है।

    सदन के बाहर गरमाई सियासत SIR और अटल क्लीनिक पर घमासान.

    विधानसभा सत्र की शुरुआत के साथ ही सदन के बाहर राजनीतिक माहौल गरमा गया। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए अटल मोहल्ला क्लीनिक’ का नाम बदलकर मदर टेरेसा क्लीनिक’ किए जाने को “राजनीतिक गुंडागर्दी” बताया। उन्होंने कहा कि यह तुष्टिकरण की पराकाष्ठा है और अटल बिहारी वाजपेयी जैसे नेता का अपमान है, जो झारखंड के निर्माता माने जाते हैं।

    राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने भी भाजपा के बांग्लादेशी घुसपैठ के आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि पिछली बार भी ऐसे दावे झूठे साबित हुए थे और राज्य में एक भी बांग्लादेशी घुसपैठिया नहीं मिला। उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह SIR के माध्यम से आम जनता का मतदान अधिकार छीनना चाहती है।

    अगले हफ्ते सदन में बढ़ेगी राजनीतिक गरमी.

    सत्र का पहला दिन भले ही शोक प्रस्तावों और श्रद्धांजलियों के साथ शांतिपूर्ण रहा हो, लेकिन सदन के बाहर जिस तरह से SIR और नाम परिवर्तन जैसे मुद्दों पर टकराव दिखा, उससे साफ है कि आने वाले दिनों में सदन की कार्यवाही तीखी बहस और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से भरपूर रहने वाली है।