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  • मोहर्रम और ताजिया की परंपरा: शहादत का प्रतीक, गम और श्रद्धा की मिसाल

    परवेज़ आलम
    For The News Post4U

    इस्लाम धर्म में मोहर्रम  का महीना एक खास स्थान रखता है। यह इस्लामिक कैलेंडर  का पहला महीना होता है, लेकिन इस महीने की शुरुआत किसी जश्न से नहीं, बल्कि गम और मातम  से होती है। इसकी सबसे बड़ी वजह है पैगंबर मोहम्मद साहब के नवासे इमाम हुसैन  की कर्बला की जंग   में हुई शहादत, जिसे मुस्लिम समुदाय आज भी गहरे दुख के साथ याद करता है।

    मोहर्रम और अशूरा का महत्व.

    मोहर्रम की दसवीं तारीख  को अशूरा कहा जाता है, जो इस महीने का सबसे अहम दिन होता है। इस साल अशूरा 6 जुलाई 2025 को मनाया जा रहा है। इसी दिन 680 ईस्वी में इराक के कर्बला में इमाम हुसैन और उनके परिवार के सदस्यों ने यज़ीद की सेना से मुकाबला करते हुए शहादत  दी थी। यह लड़ाई सिर्फ सत्ता की नहीं, बल्कि सत्य, न्याय और धर्म की रक्षा के लिए थी। इसलिए मोहर्रम को त्याग और बलिदान का प्रतीक  माना जाता है।

    इस महीने में मुस्लिम समाज में कोई भी शुभ कार्य जैसे शादी-ब्याह  या अन्य उत्सव नहीं किए जाते। इसकी जगह मातम, रोजा और दुआ का आयोजन होता है।

    क्या है ताजिया और क्यों निकलता है इसका जुलूस ?

    मोहर्रम के महीने में देशभर में ताजिया का जुलूस  निकाला जाता है, जो अक्सर प्रतीकात्मक रूप से “कर्बला” में जाकर समाप्त होता है। ताजिया  दरअसल एक कलात्मक ढांचा  होता है, जिसे इमाम हुसैन की कब्र (रौज़ा-ए-मुबारक)  का प्रतीक माना जाता है। यह ढांचा बांस, लकड़ी, कागज, स्टील, रंगीन शीशे और कई बार चांदी-सोने की सजावट  से तैयार किया जाता है। इसे घरों, मोहल्लों और इमामबाड़ों में बनाया जाता है, और 10 मोहर्रम को मातमी धुनों और नारे या हुसैनके साथ जुलूस के रूप में निकाला जाता है।

    ताजिया की शुरुआत भारत में कैसे और कब हुई ?

    बहुत कम लोगों को यह पता है कि ताजिया निकालने की परंपरा की शुरुआत भारत  से ही हुई थी। इतिहासकारों के अनुसार, 14वीं सदी  में बादशाह तैमूरलंग  के समय (801 हिजरी, लगभग 1399 ई.) में भारत में पहला ताजिया तैयार किया गया था। तैमूर शिया संप्रदाय से ताल्लुक रखता था और हर साल इमाम हुसैन की कब्र की जियारत (यात्रा) के लिए कर्बला, इराक जाया करता था। लेकिन एक समय वह हृदय रोग से पीड़ित हो गया और लंबी यात्रा करने में असमर्थ हो गया।

    अपने शोक और श्रद्धा को व्यक्त करने के लिए, दरबारियों ने उनके सामने बांस और रंग-बिरंगे कागज  से इमाम हुसैन की मजार की प्रतिकृति  बनाकर पेश की। इस कलाकृति को देख बादशाह बेहद भावुक हो गया और यह परंपरा बन गई। तब से हर साल ताजिया बनाए जाने लगे और यह परंपरा भारत से होते हुए दुनिया भर के शिया मुसलमानों में फैल गई।

    आज ताजिया सिर्फ एक प्रतीक नहीं, बल्कि भावना है.

    वक्त के साथ ताजिया सिर्फ एक कलात्मक प्रतीक नहीं रहा, बल्कि यह भक्ति, समर्पण और इंसाफ की लड़ाई  की मिसाल बन गया है। रांची ,लखनऊ , भोपाल या कोलकाता—हर शहर में ताजिए का अपना अनूठा स्वरूप होता है, लेकिन भावनाएं एक जैसी होती हैं: इमाम हुसैन की कुर्बानी को याद करना और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना।

    मोहर्रम और ताजिए की परंपरा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सत्य, बलिदान और निष्ठा की एक जीवंत कहानी है जो हर साल दुनिया को यह याद दिलाती है कि हक़ के लिए लड़ना और ज़ुल्म के आगे झुकना नहीं, यही इमाम हुसैन की सीख है।

  • मुहर्रम को लेकर पुलिस सख्त: डीजे पर पाबंदी, सोशल मीडिया पर खास नजर

    Edited By: परवेज़ आलम
    For: The News Post4U

    झारखंड में मोहर्रम पर्व को लेकर सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चाक-चौबंद कर दी गई है। राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) अनुराग गुप्ता ने सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों (SP) और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों (SSP) को कड़े निर्देश जारी किए हैं। उनका साफ कहना है कि शांति भंग करने की किसी भी कोशिश को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह सड़क पर हो या सोशल मीडिया पर।

    डीजे बजाने पर सख्त पाबंदी.

    DGP ने स्पष्ट कर दिया है कि मोहर्रम के जुलूस में डीजे बजाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि यह पर्व मातम का होता है, न कि जश्न का। ऐसे में डीजे बजाना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा, जैसा कि पहले रामनवमी के अवसर पर भी किया गया था। अगर किसी ने डीजे का इस्तेमाल किया, तो सीधी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम.

    पुलिस प्रमुख ने सभी जिलों में संभावित संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त बल की तैनाती, सीसीटीवी कैमरे, ड्रोन निगरानी, और वीडियोग्राफी के निर्देश दिए हैं। जुलूस के रूट्स की जांच की जा रही है और यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि किसी भी मार्ग पर पत्थर या ईंट जैसी चीजें न हों, ताकि किसी तरह के उपद्रव की संभावना को खत्म किया जा सके।

    पुराने उपद्रवियों पर कड़ी नजर.

    DGP ने आदेश दिया है कि पहले से चिन्हित उपद्रवियों पर नजर रखी जाए और उन पर निरोधात्मक कार्रवाई की जाए। साथ ही उन्होंने सभी थानों और जिलों को शांति समिति की बैठक आयोजित करने को भी कहा है।

    सोशल मीडिया पर सख्त निगरानी.

    DGP अनुराग गुप्ता ने सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ तुरंत एक्शन लेने का निर्देश दिया है। पुलिस को निर्देश दिए गए हैं कि अगर कोई असामाजिक तत्व अफवाह फैलाने की कोशिश करता है, तो तुरंत उसकी पहचान कर कार्रवाई की जाए

    पुलिस बलों के लिए व्यवस्था भी जरूरी.

    सिर्फ सुरक्षा नहीं, पुलिसकर्मियों की सुविधा का भी ख्याल रखा जा रहा है। DGP ने पुलिस बलों के लिए भोजन, आवास और पीने के पानी की व्यवस्था सुनिश्चित करने का आदेश भी दिया है। साथ ही एंटी-रायट ड्रिल, बॉडी प्रोटेक्टर, और दंगा नियंत्रण उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया है।

    हर जिले के एसपी होंगे ज़िम्मेदार.

    DGP ने डायल 112 इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम को एक्टिव मोड में रखने को कहा है। उन्होंने कहा कि अगर किसी जिले में कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ती है, तो सीधी जिम्मेदारी संबंधित SP की होगी। हर जिले के एसपी को क्षेत्र भ्रमण करने और स्थानीय स्तर पर कंट्रोल रूम स्थापित करने का निर्देश दिया गया है। DGP ने यह भरोसा जताया है कि पूरे झारखंड में मोहर्रम का त्योहार शांति और सौहार्द के माहौल में संपन्न होगा। लेकिन किसी भी तरह की लापरवाही या उकसावे को लेकर अब प्रशासन कतई माफ करने के मूड में नहीं है। जो नियम तोड़ेगा, उस पर कानून अपना काम करेगा।