Tag: parsnath giridih

  • गिरिडीह :नक्सली बंकर से रायफल, SLR समेत भारी मात्रा में विस्फोटक बरामद

    By News Post4u

    GIRIDIH: नक्सलियों के खिलाफ चलाए जा रहे सघन सर्च अभियान में गिरिडीह पुलिस और सीआरपीएफ को एक बड़ी सफलता मिली है। खुखरा थाना क्षेत्र के जोकानाला जंगल में एक नक्सली बंकर का पर्दाफाश करते हुए सुरक्षा बलों ने भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक जब्त किए हैं।

    गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस और सीआरपीएफ की संयुक्त टीम ने पारसनाथ पर्वत की तराई में सर्च ऑपरेशन चलाया। इस दौरान जंगल के भीतर ज़मीन के नीचे छिपा एक बंकर मिला, जिसमें नक्सलियों ने हथियारों का जखीरा छुपा रखा था। बंकर से कुल 14 हथियार बरामद किए गए हैं, जिनमें .303 बोर की रायफल, एक एसएलआर, एक 12 बोर की बंदूक और 11 सिंगल शॉट बंदूकें शामिल हैं।

    इतना ही नहीं, बंकर से 7.62 एमएम की 38 गोलियां, 9 एमएम की 10 गोलियां, गन पाउडर, बारूद, वायर और अन्य विस्फोटक सामग्री भी मिली है। बरामद हथियारों में कुछ पर संदेह है कि वे पुलिस से लूटे गए हो सकते हैं।

    गिरिडीह के पुलिस अधीक्षक डॉ. विमल कुमार ने शुक्रवार को मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि इस ऑपरेशन में नक्सलियों के ठिकाने को ध्वस्त कर दिया गया है। उन्होंने कहा, “यह कार्रवाई एक लंबी तैयारी और पुख्ता खुफिया सूचना के बाद संभव हो सकी। इस इलाके में नक्सल विरोधी अभियान लगातार जारी रहेगा।”

    पुलिस की इस कार्रवाई को नक्सली नेटवर्क पर एक बड़ा प्रहार माना जा रहा है। पारसनाथ पर्वत की तराई में सुरक्षा बलों की सक्रियता बढ़ा दी गई है और आगे भी इस तरह के तलाशी अभियान चलाए जाते रहेंगे।

  • सम्मेद शिखर: भव्य स्मृति महोत्सव की धूम

    पारसनाथ [गिरिडीह ] : धार्मिक आस्था और श्रद्धा का केंद्र बना मधुबन का सम्मेद शिखर ।  आचार्य विमल सागर महाराज के समाधि स्थल पर इन दिनों भव्य स्मृति महोत्सव की धूम है। तीन दिवसीय इस आयोजन में देशभर से आए श्रद्धालु बाबा की भक्ति में मग्न हैं। जगह-जगह धार्मिक अनुष्ठान हो रहे हैं, और श्रद्धालुओं का उत्साह देखने लायक है। बता दे कि मधुबन का सम्मेद शिखर जैनियों का विश्व प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है ।

    समाधि स्थल पर श्रद्धा का सैलाब। 
    यहां 29 दिसंबर 1994 को साधना करते हुए आचार्य विमल सागर महाराज ने समाधि को प्राप्त किया था। उनकी स्मृति में भक्तों ने भव्य और आकर्षक समाधि स्थल बनाया है, जहां बाबा की प्रतिमा विराजमान है। इस समाधि स्थल को फूलों, पत्तियों और रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया है, जो श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है।

    तीन दिन का विशेष धार्मिक आयोजन। 
    स्मृति महोत्सव शुक्रवार से शुरू हुआ। इस दौरान साधु-संतों के सान्निध्य में बाबा की प्रतिमा का अभिषेक और धार्मिक विधियों का आयोजन किया गया। महाआरती और भजन संध्या, जिसमें स्थानीय और बाहरी कलाकारों ने श्रद्धालुओं को भक्ति रस में डुबो दिया।

    भक्तिभावना में लीन श्रद्धालु।
    देश के विभिन्न प्रांतों से पहुंचे श्रद्धालु बाबा की भक्ति में डूबे हुए हैं। समाधि स्थल पर श्रद्धालुओं का आना-जाना दिनभर जारी रहा। बाबा के प्रति श्रद्धा और आस्था का यह माहौल, हर किसी को अपनी ओर खींच रहा है।

    मधुबन में उत्सव जैसा माहौल। 
    स्मृति महोत्सव ने मधुबन को पूरी तरह भक्ति और उत्सव के रंग में रंग दिया है। हर कोना रोशनी और सजावट से जगमगा रहा है।

    आचार्य विमल सागर महाराज के प्रति यह अटूट आस्था और श्रद्धा, उनकी स्मृतियों को जीवंत बनाए रखने का एक प्रेरणादायक उदाहरण है। सम्मेद शिखर की यह पवित्र धरा, श्रद्धालुओं को भक्ति और शांति का अनमोल अनुभव दे रही है।