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  • मंत्री रामदास सोरेन को विधानसभा में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई

    घाटशिला में होगा अंतिम संस्कार.

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क

    रांची/घाटशिला: झारखंड के शिक्षा एवं निबंधन मंत्री और झामुमो के वरिष्ठ नेता रामदास सोरेन को शनिवार सुबह झारखंड विधानसभा परिसर में राजकीय सम्मान के साथ विदाई दी गई।
    राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार, विधानसभा अध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी, संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर, कई सांसद, विधायक और मंत्रियों ने उनके पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।

    रामदास सोरेन का पार्थिव शरीर सुबह करीब 10 बजे दिल्ली से रांची एयरपोर्ट पहुंचा, जहां से सीधे विधानसभा लाया गया। इसके बाद दोपहर में उनका अंतिम संस्कार पूर्वी सिंहभूम जिले के पैतृक गांव में पूरे रीति-रिवाज और सम्मान के साथ किया जाएगा\

    राजनीतिक हस्तियों की श्रद्धांजलि.

    • राज्यसभा सांसद महुआ माजी ने कहा – “रामदास सोरेन ने गरीबों और वंचितों के अधिकारों के लिए जीवनभर संघर्ष किया। उनकी कमी झामुमो और राज्य दोनों के लिए गहरी है।”
    • नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने शोक जताते हुए कहा – “उनका निधन प्रदेश की राजनीति और समाज के लिए अपूरणीय क्षति है।”
    • पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा – “बाबा बैद्यनाथ उनकी आत्मा को शांति दें और परिवार को शक्ति प्रदान करें।”
    • कांग्रेस नेत्री और मंत्री दीपिका पांडे सिंह ने कहा कि सोरेन का योगदान हमेशा याद किया जाएगा।
    • पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय ने कहा – “शिबू सोरेन के निधन से राज्य अभी उबरा भी नहीं था कि एक और जननेता का जाना बेहद दुखद है।”
    • भाजपा प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष रवींद्र राय ने उन्हें “जमीन से जुड़े नेता और ईमानदार मंत्री” बताया।
    • मंत्री दीपक बिरुआ ने कहा – “उनकी रिक्तता को भरना बेहद कठिन होगा।”

    राजनीतिक सफर: ग्राम प्रधान से मंत्री तक.

    रामदास सोरेन ने राजनीति की शुरुआत ग्राम प्रधान से की थी। उनके पिता घोड़ाबांधा गांव के ग्राम प्रधान रहे, और उनके निधन के बाद परंपरा अनुसार रामदास को यह दायित्व मिला।

    • वे झामुमो के जमशेदपुर ब्लॉक कमेटी से सक्रिय राजनीति में जुड़े।
    • 1990 में जिलाध्यक्ष बने और लंबे समय तक संगठनात्मक कार्यों में सक्रिय रहे।
    • 2024 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने घाटशिला सीट से भाजपा प्रत्याशी और पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन के पुत्र बाबूलाल सोरेन को हराया था।
      • परिणाम: रामदास सोरेन को 98,356 वोट, जबकि बाबूलाल सोरेन को 75,910 वोट मिले।
      • जीत का अंतर: 22,446 वोट।

    वे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और झामुमो के संस्थापक शिबू सोरेन के करीबी माने जाते थे। जब चंपई सोरेन भाजपा में चले गए, तब हेमंत सोरेन ने राजनीतिक संतुलन साधने के लिए रामदास को कैबिनेट में शामिल किया।

    • रामदास सोरेन का निधन ऐसे समय हुआ है, जब हाल ही में शिबू सोरेन का श्राद्धकर्म संपन्न हो रहा है ।
    • उनकी असमय मृत्यु से झामुमो को बड़ा राजनीतिक नुकसान हुआ है।
    • अब सवाल है कि शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी किसे दी जाएगी।

    संभावना जताई जा रही है कि सुदिव्य कुमार सोनू  (जो फिलहाल उच्च शिक्षा मंत्री हैं) को       इसका प्रभार मिल सकता है।

    मुख्यमंत्री की भावुक श्रद्धांजलि.

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने ट्विटर पर लिखा –
    “रामदास दा का जाना झारखंड के लिए अपूरणीय क्षति है। अंतिम जोहार दादा।”

    जगरनाथ महतो के बाद रामदास सोरेन दूसरे ऐसे शिक्षा मंत्री रहे जो अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सके. रामदास सोरेन लगभग 8 महीने ही मंत्री रह पाए.

    रामदास सोरेन बड़े झारखंड आंदोलनकारी और झारखंड मुक्ति मोर्चा के कद्दावर नेता थे. स्वर्गीय शिबू सोरेन और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के करीबी थे. कोल्हान टाइगर के नाम से मशहूर पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन जब झारखंड मुक्ति मोर्चा छोड़कर भाजपा में गए तो मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने चंपई सोरेन के बदले रामदास सोरेन को मंत्रिमंडल में शामिल कर कोल्हान में राजनीतिक क्षतिपूर्ति की भरपाई करने की कोशिश की.

    चंपई के बदले रामदास सोरेन को आगे किया गया. लेकिन दुर्भाग्य से रामदास सोरेन अब हमारे बीच नहीं रहे. उनके जाने से झारखंड मुक्ति मोर्चा को भी भारी नुकसान हुआ है. रामदास सोरेन ऐसे समय पर दुनिया छोड़ गए जब गुरु जी का श्रद्धा कर्म भी संपन्न हो रहा है. अलग राज्य बनने के बाद से अभी तक संभवत किसी भी विधानसभा का कार्यकाल ऐसा नहीं रहा जिसमें उपचुनाव नहीं हुआ हो. हर विधानसभा का कार्यकाल पूरा होने से पूर्व किसी न किसी कारण से उपचुनाव होता रहा है. अब रामदास सोरेन के निधन के बाद घाटशिला विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव चुनाव होना तय है. 6 महीना के अंदर यहां चुनाव होगा. संभव है अक्टूबर में जब बिहार विधानसभा चुनाव की घोषणा हो तो घाटशिला में भी चुनाव की घोषणा हो जाए.

  • मंत्री रामदास सोरेन के निधन पर झारखंड सरकार ने घोषित किया राजकीय शोक

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    रांची: झारखंड सरकार ने राज्य के मंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के वरिष्ठ नेता रामदास सोरेन के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए 16 अगस्त, शुक्रवार को पूरे राज्य में राजकीय शोक की घोषणा की है। सरकार के आदेश के मुताबिक इस दिन पूरे राज्यभर के सभी सरकारी कार्यालयों, शैक्षणिक संस्थानों और उन सभी भवनों पर, जहां नियमित रूप से राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाता है, तिरंगा अधमस्तूल (आधे झुके) रहेगा।

    इसके अलावा, शोक की अवधि में कोई भी सरकारी उत्सव, सांस्कृतिक कार्यक्रम या औपचारिक आयोजन नहीं किए जाएंगे। यह निर्णय राज्य सरकार ने मंत्री रामदास सोरेन के योगदान और उनके सम्मान में लिया है।

    गौरतलब है कि 15 अगस्त की देर रात रामदास सोरेन का दिल्ली के इंद्रप्रस्थ स्थित अपोलो अस्पताल में निधन हो गया। वे पिछले दो हफ्तों से गंभीर रूप से बीमार थे।

    • 2 अगस्त की सुबह करीब 4:30 बजे वे जमशेदपुर के घोड़ाबांधा स्थित अपने आवास के बाथरूम में गिर पड़े।
    • तत्काल उन्हें टाटा मोटर्स अस्पताल ले जाया गया, जहां सीटी स्कैन में ब्रेन स्ट्रोक की पुष्टि हुई।
    • हालत नाजुक देख उन्हें उसी दिन एयरलिफ्ट कर दिल्ली अपोलो अस्पताल ले जाया गया।

    दिल्ली पहुंचने के बाद से ही उन्हें लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया। उनकी स्थिति को देखते हुए दिल्ली के डॉक्टरों के साथ-साथ मुंबई और चेन्नई से भी विशेषज्ञों की टीम बुलाई गई थी। इतना ही नहीं, अमेरिका के चिकित्सकों से भी लगातार सलाह ली जा रही थी।

    इसके बावजूद डॉक्टर उनकी स्थिति को स्थिर नहीं कर पाए। गंभीर परिस्थितियों को देखते हुए डॉक्टर सर्जरी का निर्णय भी नहीं ले पाए। अंततः 15 अगस्त की रात करीब 11:30 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।

    राजनीतिक और सामाजिक जीवन.

    रामदास सोरेन झारखंड सरकार में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग और निबंधन विभाग के मंत्री थे। वे झारखंड की राजनीति में एक सक्रिय और महत्वपूर्ण चेहरा माने जाते थे। उनकी सादगी और कार्यशैली के कारण वे कार्यकर्ताओं और जनता के बीच विशेष पहचान रखते थे।

    उनके निधन से न केवल झारखंड मुक्ति मोर्चा, बल्कि पूरे राज्य की राजनीति को गहरी क्षति पहुंची है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सहित राज्य के तमाम राजनीतिक दलों के नेताओं ने गहरा शोक व्यक्त किया है ।

  • झारखंड में होगा वोटरों का ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ SIR

    गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे का बड़ा दावा.

    The News Post4u.

    देवघर/गोड्डा: गोड्डा के सांसद निशिकांत दुबे ने दावा किया कि बिहार की तर्ज पर अब झारखंड में भी चुनाव आयोग वोटरों का स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) करेगा। इस अभियान के तहत मतदाता सूची की व्यापक और विशेष समीक्षा की जाएगी, जिसमें दोहरे नाम, फर्जी वोट और मृत व्यक्तियों के नाम हटाए जाएंगे। श्री दुबे सोमवार को देवघर में मीडिया से मुखातिब थे ।

    श्री दुबे ने कहा कि अक्सर एक ही व्यक्ति का नाम तीन-चार जगह मतदाता सूची में दर्ज होता है। SIR के बाद ऐसी प्रवृत्ति पर रोक लगेगी और व्यक्ति को केवल उसी स्थान पर मतदान का अधिकार होगा, जहां वह वास्तविक रूप से निवास करता है। उन्होंने याद दिलाया कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने ही वोट देने की उम्र 18 वर्ष करने और एक मतदाता का नाम सिर्फ एक जगह रखने की व्यवस्था की थी, जिसे संसद ने मंजूरी दी थी।

    ‘बांग्लादेशियों से छीनेगा वोट डालने का अधिकार’
    सांसद ने दावा किया कि SIR लागू होने से झारखंड में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों के नाम मतदाता सूची से हटेंगे, जिससे उन्हें वोट डालने का अधिकार नहीं मिलेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि अतीत में कांग्रेस ने चुनाव आयोग का गलत इस्तेमाल किया है और अब विपक्ष राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी सस्ती राजनीति कर रहा है।

    राहुल गांधी पर निशाना.
    श्री दुबे ने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता पर सवाल खड़े करने वाली कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल राष्ट्रीय हितों से खिलवाड़ कर रहे हैं। उन्होंने राहुल गांधी पर चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाने का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें देश से माफी मांगनी चाहिए।

    क्या है SIR?
    स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (Special Intensive Revision) चुनाव आयोग की एक विशेष प्रक्रिया है, जिसके तहत—

    • मतदाता सूची को अपडेट किया जाता है
    • फर्जी और दोहरे नाम हटाए जाते हैं
    • मृत मतदाताओं के नाम सूची से बाहर किए जाते हैं
    • नए पात्र मतदाताओं के नाम जोड़े जाते हैं

    यह प्रक्रिया आमतौर पर विधानसभा या लोकसभा चुनाव से पहले की जाती है, ताकि चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शी हों तथा फर्जी वोटिंग पर रोक लगाई जा सके।