Tag: PURVI KSRTRIY PRISHAD MEETING

  • पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की बैठक मे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति मे हेमंत सोरेन ने गिनाई राज्य की पीड़ा

    Edited By: परवेज़ आलम.

    For The News Post4u.

    रांची की वह दोपहर इतिहास के दस्तावेज़ों में दर्ज होगी। जब पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की 27 वीं बैठक के मंच पर झारखंड की जमीन से उठी आवाज़ ने राष्ट्रीय सियासत के गलियारों में एक नई दस्तक दी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने न केवल अपने प्रदेश की पीड़ा को शब्दों में पिरोया, बल्कि दिल्ली को यह भी बताया कि देश के संसाधनों पर सिर्फ़ दिल्ली और मुंबई का हक नहीं है। जंगलों, पहाड़ों और आदिवासियों की भी साझेदारी है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में आयोजित पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की बैठक मे झारखंड राज्य की समस्याओं, विकास की जरूरतों और लंबित मामलों को विस्तार से रखा गया । मुख्यमंत्री ने झारखंड की ओर से 31 अहम मुद्दों को उठाते हुए राज्य के विकास के लिए केंद्र सरकार से सहयोग की अपेक्षा जताई। बैठक में बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और झारखंड के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया।

    कोयले की राख में दबे करोड़ों के सवाल.

    सबसे बड़ा प्रश्न था कोयला कंपनियों के ऊपर झारखंड सरकार का 1.40 लाख करोड़ रुपये का बकाया। न कोई ब्याज, न कोई माफी – सिर्फ़ मांग। हेमंत सोरेन ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के सामने सवाल रखा कि जब कोयले की खुदाई झारखंड की धरती से होती है, तो मुनाफा दिल्ली और कोलकाता के बहीखातों में क्यों दर्ज होता है?

    212 अस्पताल और आयुष्मान भारत की ठहरी साँसे.

    झारखंड के 212 निजी अस्पताल आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत इलाज तो कर रहे हैं, लेकिन भुगतान अटका हुआ है। वजह ? ईडी की जांच। हेमंत सोरेन ने दो टूक कहा – “भ्रष्टाचार की जांच होनी चाहिए, लेकिन मरीजों की जान बचाने वालों को सज़ा क्यों ?” इस पर अमित शाह ने जांच तेज़ करने और भुगतान सुनिश्चित करने का भरोसा दिलाया।

    मसानजोर डैम: पानी वहीं, प्यासा झारखंड.

    मयूराक्षी नदी पर बना मसानजोर डैम। पूरा सबमर्ज एरिया झारखंड में, लेकिन सिंचाई का लाभ बंगाल को। यह 1949 के समझौते की असंतुलित विरासत है। झारखंड को जहां मात्र 53 एमसीएम पानी मिलता है, जरूरत है 457 एमसीएम की। सोरेन ने मांग की – डैम का नियंत्रण साझा हो और जलस्तर 378 फीट से नीचे न जाने दिया जाए।

    “सहकारी संघवाद” का असली मतलब.

    मुख्यमंत्री ने मंच से एक स्पष्ट संदेश दिया – “यह परिषद केवल चर्चा का मंच नहीं, समाधान का प्रयोगशाला होनी चाहिए।” उन्होंने कहा कि झारखंड, बिहार, बंगाल और ओडिशा का साझा अतीत, साझा समस्याएं हैं, और इसलिए समाधान भी मिलकर ही होंगे।

    प्रमुख मांगें – हर क्षेत्र, हर वर्ग की आवाज़.

    हेमंत सोरेन की 360 डिग्री अपील में हर तबके की झलक थी:

    • खनिज संसाधनों का न्यायपूर्ण उपयोग: DMFT नीति में संशोधन, कोल कंपनियों द्वारा बकाया भुगतान और बंद खदानों का माइन क्लोजर।
    • महिलाओं के लिए “मुख्यमंत्री मईयां सम्मान योजना” के तहत 2500 रुपये मासिक सहायता।
    • शिक्षा में सामाजिक न्याय: वंचित वर्ग के छात्रों के लिए छात्रवृत्ति, जनजातीय विश्वविद्यालय, उच्च शिक्षा में नवाचार और पेटेंट सुविधा।
    • स्वास्थ्य व्यवस्था: RIMS-2 और छह नए मेडिकल कॉलेजों हेतु केंद्र की आर्थिक सहायता।
    • यातायात और संपर्क: रांची मेट्रो परियोजना, साहेबगंज एयर कार्गो हब, पूर्वोत्तर को जोड़ने वाले पुलों व एक्सप्रेसवे का प्रस्ताव।
    • मनरेगा में मजदूरी दर बढ़ाकर 405 रुपये करने की मांग।
    • कुपोषण और आंगनबाड़ी की समस्याओं पर केंद्र का ध्यान।
    • COMFED और होटल अशोक जैसे बिहार-झारखंड के साझा आस्तियों का विभाजन।

    एक मुख्यमंत्री की भूमिका से आगे.

    हेमंत सोरेन ने अपनी बात न किसी तंज में रखी, न किसी घमंड में। नारेबाज़ी नहीं, तथ्य, तर्क और अनुभव के साथ झारखंड की मांगों को मंच पर उतारा। उन्होंने यह जता दिया कि एक राज्य का मुख्यमंत्री सिर्फ़ मुख्यमंत्री नहीं होता – वह उस भूभाग की आत्मा, चेतना और आवाज़ होता है।  झारखंड ने सिर्फ़ अपना पक्ष नहीं रखा, बल्कि केंद्र और पड़ोसी राज्यों के सामने एक आइना रखा है। सवाल यह नहीं कि झारखंड क्या मांग रहा है, सवाल यह है कि देश की नीति में झारखंड की कितनी हिस्सेदारी है। और जब तक इस हिस्सेदारी का हिसाब नहीं चुकता, तब तक सहकारी संघवाद अधूरा रहेगा।

  • भारत-पाकिस्तान तनाव के बीच अमित शाह का  झारखंड दौरा टला, पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की बैठक रद्द

    BY THE NEWS POST4U

    RANCHI: भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के मद्देनज़र केंद्र सरकार ने कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। इन्हीं फैसलों की श्रृंखला में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का झारखंड दौरा और रांची में होने वाली पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की बैठक रद्द कर दी गई है। अमित शाह को 9 मई को रांची पहुंचना था और 10 मई को बैठक में भाग लेना था।

    केंद्र सरकार की बैठक पर लगा विराम

    सूत्रों के मुताबिक, 10 मई को रांची में पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की बैठक आयोजित होनी थी, जिसमें बिहार, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्रियों को शामिल होना था। बैठक में क्षेत्रीय विकास, आंतरिक सुरक्षा, सीमावर्ती क्षेत्रों की चुनौतियाँ और केंद्र-राज्य समन्वय जैसे मुद्दों पर चर्चा प्रस्तावित थी। हालाँकि बैठक रद्द करने का कोई आधिकारिक कारण सरकार की ओर से सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि भारत-पाकिस्तान के बीच उत्पन्न हुए संभावित सैन्य तनाव की पृष्ठभूमि में यह निर्णय लिया गया है।

    सीमावर्ती राज्यों के CM और LG के साथ हुई अहम बैठक

    गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में उन राज्यों के मुख्यमंत्रियों और उपराज्यपालों के साथ उच्च स्तरीय बैठक की, जिनकी सीमाएँ पाकिस्तान और नेपाल से लगती हैं। इस बैठक में सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की गई और संवेदनशील इलाकों में सतर्कता बढ़ाने के निर्देश दिए गए। केंद्र सरकार का उद्देश्य देश की सीमाओं को पूर्णतः सुरक्षित बनाए रखना है।

    झारखंड सरकार का केंद्र को समर्थन.

    झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार के प्रति समर्थन जताते हुए कहा, “यह समय देश की एकता और अखंडता के लिए एकजुट रहने का है। केंद्र और सेना जो भी निर्णय लेंगी, झारखंड सरकार उसका समर्थन करेगी।” उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा सर्वोपरि है और वर्तमान हालात में राजनीतिक बयानबाज़ी से परहेज़ करते हुए देशहित को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

    मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उनकी सरकार ने बैठक की सभी तैयारियाँ पूरी कर ली थीं और गृह मंत्री को राजकीय अतिथि घोषित किया गया था, लेकिन राष्ट्रीय हितों के मद्देनज़र जो भी फैसला लिया गया है, वह स्वागत योग्य है।