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  • विधायक जयराम महतो और उनके समर्थकों पर मुकदमा

    झारखंड के डुमरी  के विधायक जयराम महतो और उनके समर्थकों पर सीसीएल के क्वार्टर पर कब्जा करने, सरकारी काम में बाधा डालने और क्वार्टर में रखें सामान की चोरी करने के आरोप लगे हुए हैं. बोकारो जिले के चंद्रपुरा थाने में सीसीएल के ढोरी क्षेत्र, फुसरो (बोकारो) में सुरक्षा पदाधिकारी सुरेश कुमार सिंह ने विधायक जयराम महतो और उनके समर्थकों पर केस दर्ज करवाया है. पुलिस ने बताया कि डी /02 सेंट्रल कॉलोनी, ढोरी, मकोली के एक क्वार्टर पर जेएलकेएम पार्टी के विधायक जयराम महतो के समर्थकों ने कब्जा कर लिया था. इतना ही नहीं विधायक के समर्थकों ने कथित तौर पर वहां रह रहे प्रशिक्षु पदाधिकारियों को  जबरन भागया और उनका सामान हटा दिया. इधर जैसे ही मामले की सूचना सुरक्षा पदाधिकारी को मिली तो वह मौके पर पहुंचे. जेएलकेएम पार्टी के 20 से 25 अज्ञात कार्यकर्ता हंगामा कर रहे थे और बार-बार कह रहे थे कि डुमरी के विधायक जयराम महतो के निर्देश पर वे लोग यहां क्वार्टर पर कब्जा करने आए हैं.

    सीसीएल के क्वार्टर के अंदर जबरन प्रवेश कर चुके जेएलकेएम पार्टी के कार्यकर्ताओं को सुरक्षाकर्मी निकल रहे थे. मामला बिगड़ता देख वहां चंद्रपुरा थाना प्रभारी अमन कुमार पुलिस बल के साथ पहुंचे और उपद्रव मचा रहे युवकों को शांत कराने की कोशिश की. हालांकि उपद्रवी लड़के कुछ भी सुनने को तैयार नहीं थे. इसके बाद प्रखंड कार्यालय बेरमो से प्रशासनिक अमला पहुंचा और उपद्रवियों को बाहर निकालने का निर्देश दिया.

    देर रात डुमरी के जयराम महतो भी मौके पर पहुंचे और प्रशासन को सहयोग करने के बजाय उपद्रवी लड़कों का सहयोग करते हुए पुलिस पदाधिकारियों भिड़ने लगे. सीसीएल ढोरी क्षेत्र के सुरक्षा पदाधिकारी सुरेश कुमार सिंह ने हंगामे के बाद विधायक जयराम महतो और उनके करीब 30-40 समर्थकों के खिलाफ क्वार्टर में जबरन घुसने, वहां रह रहे प्रशिक्षुओं का सामान गायब करने, सरकारी काम में बाधा डालने, उपस्थित मजिस्ट्रेट, पुलिस कर्मी, सीसीएल कर्मी और सीआईएसएफ कर्मी के साथ गाली-गलौज करने सहित कई आरोप लगाते हुए चंद्रपुरा थाना में शिकायत दी है.

  • तुम्हारी जीत से ज्यादा मेरी हार के चर्चे

    परवेज़ आलम
    झारखंड की राजनीति में इस बार ये लाइन जेएलकेएम यानी झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा पर बिल्कुल सटीक बैठती है। 71 सीटों पर लड़ाई लड़ी, लेकिन जीते सिर्फ एक। और उस एक जीत के बाद भी उनके चर्चे उनकी हार से ज्यादा हैं। जीत तो बस डुमरी की थी, लेकिन हार ने बीजेपी और आजसू का समीकरण बिगाड़ दिया।

    एक जीत और 70 हार की कहानी
    दो महीने पुरानी पार्टी। चुनाव आयोग में रजिस्टर्ड और सीधे विधानसभा चुनाव में 71 उम्मीदवार। सुनने में लगा था कि जयराम महतो कोई बड़ा राजनीतिक तूफान लाने वाले हैं, लेकिन उन्होंने खुद डुमरी से जीतकर और बाकी 70 सीटों पर हारकर एनडीए का गणित जरूर हिला दिया।

    एनडीए की लुटिया डुबोने वाला खेल
    एनडीए को उम्मीद थी कि कुर्मी समाज के वोट आजसू और बीजेपी के पक्ष में जाएंगे। लेकिन जयराम महतो ने वोट काटकर वह खेल खराब कर दिया।

    जेएमएम की जीती 34 सीटों में से 15 सीटों पर जेएलकेएम तीसरे स्थान पर रही।
    कांग्रेस की 16 सीटों में से 6 सीटों और भाकपा माले की 2 सीटों पर भी जेएलकेएम ने वोट काटे।
    एनडीए की जीती 24 सीटों में से भी 9 सीटों पर जेएलकेएम ने तीसरा स्थान हासिल किया।
    सुदेश महतो का दर्द
    अब आइए सिल्ली सीट पर। यहां सुदेश महतो, जो कुर्मी समाज के सबसे बड़े चेहरे माने जाते हैं, उन्हें 23,867 वोटों से हार का सामना करना पड़ा। और हराने वाले थे जेएलकेएम के उम्मीदवार देवेंद्रनाथ महतो, जिन्होंने 41,725 वोट लेकर सुदेश महतो का खेल खत्म कर दिया।

    राजनीतिक संदेश
    झारखंड की 81 सीटों में एनडीए सिर्फ 24 पर सिमट गई, जबकि इंडिया गठबंधन ने 56 सीटें जीत लीं। जेएलकेएम ने भले ही सिर्फ एक सीट जीती, लेकिन उसकी छाया हर तरफ रही। कैंची छाप के उम्मीदवारों ने कई जगह एनडीए को नुकसान पहुंचाया। जयराम महतो ने कुर्मी समाज के 15% वोट बैंक को साधने की कोशिश की, लेकिन उनके पास संसाधन और राजनीतिक नेटवर्क की कमी थी। यह चुनाव यह बताता है कि छोटे दल सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि बड़े दलों के लिए भी कितना बड़ा खतरा बन सकते हैं।   झारखंड में इस बार की राजनीति एक बड़ा संदेश देती है। जयराम महतो की जीत से ज्यादा उनकी हार ने सुर्खियां बटोरीं। कभी-कभी राजनीति में हार जीत से बड़ी कहानी बन जाती है। एनडीए को समझना होगा कि क्षेत्रीय पार्टियों के उभार को नजरअंदाज करना उनके लिए भारी पड़ सकता है। क्योंकि राजनीति में एक सीट भी पूरा गणित बदल सकती है।