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  • झारखंड : रहस्यमयी खदानों की दुनिया को अब नजदीक से देखेंगे पर्यटक

    झारखंड : रहस्यमयी खदानों की दुनिया को अब नजदीक से देखेंगे पर्यटक

    पहली बार शुरू होगा माइनिंग टूरिज्म.

    By: परवेज़ आलम.

    For The News Post4u.

    रांची : झारखंड सरकार ने देश में पहली बार एक अनोखी और साहसिक पहल की शुरुआत की है। अब तक बंद दरवाज़ों के पीछे रही खदानों की दुनिया आम जनता के लिए खोली जा रही है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अगुवाई में राज्य ने माइनिंग टूरिज्म (खनन पर्यटन) की शुरुआत की है, जो न सिर्फ राज्य की औद्योगिक पहचान को मजबूत करेगा, बल्कि पर्यटन क्षेत्र को भी नया आयाम देगा।

    खनन क्षेत्र अब बनेगा दर्शनीय स्थल.

    इस योजना के तहत राज्य सरकार और कोल इंडिया लिमिटेड की अनुषंगी कंपनी सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL) के बीच एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। यह साझेदारी झारखंड पर्यटन विकास निगम (JTDC) और CCL के बीच हुई है। प्रारंभिक तौर पर यह परियोजना उत्तर उरीमारी खदान (North Urimari Mines) से शुरू की जाएगी।

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि इस पहल से लोगों को खदानों की कार्यप्रणाली, खनिज संपदा और श्रमिकों की मेहनत को नजदीक से देखने और समझने का मौका मिलेगा। उन्होंने यह फैसला हाल ही में स्पेन के गावा संग्रहालय के दौरे के बाद लिया, जहां उन्होंने प्राचीन खनन तकनीकों को देखा और उनसे प्रेरित हुए।

    क्या होगा इस खनन पर्यटन में खास.

    • पर्यटन संचालन: JTDC पर्यटकों की ऑनलाइन बुकिंग करेगा। सप्ताह में दो दिन पर्यटन की सुविधा मिलेगी। प्रत्येक ग्रुप में 10 से 20 पर्यटक शामिल हो सकेंगे।
    • सुरक्षा और निर्देश: पर्यटकों को खदान में प्रवेश से पहले CCL के सुरक्षा प्रोटोकॉल और स्वास्थ्य मानकों का पालन करना होगा। अंतिम अनुमति CCL द्वारा दी जाएगी।
    • गाइड सुविधा: CCL खदान की कार्यशैली, तकनीकी प्रक्रिया और सुरक्षा उपायों को समझाने के लिए प्रशिक्षित गाइड उपलब्ध कराएगा।
    • समझौते की अवधि: यह MoU पांच वर्षों के लिए लागू रहेगा, जिसे आगे पांच साल और बढ़ाया जा सकता है।
    • विस्तार की योजना: भविष्य में अन्य खदानों को भी इस पर्यटन सर्किट में जोड़ा जाएगा।

    खान पर्यटन के पीछे सरकार का मकसद.

    पर्यटन मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा, “झारखंड खनन राज्य के रूप में जाना जाता है। अब हम उस पहचान को एक नए रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं। खनन पर्यटन आम जनता, छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए एक ज्ञानवर्धक अनुभव बनेगा। इससे न केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी बल्कि राज्य की औद्योगिक विरासत और ऊर्जा इतिहास को भी वैश्विक मंच पर पहचान मिलेगी।”

    उन्होंने आगे कहा कि भविष्य में सरकार भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) के साथ मिलकर एक और माइनिंग टूरिज्म ज़ोन विकसित करने की योजना पर काम कर रही है।

    समारोह में बड़ी भागीदारी.

    इस ऐतिहासिक अवसर पर CCL के चेयरमैन-कम-मैनेजिंग डायरेक्टर निलेंदु कुमार सिंह, JTDC के एमडी प्रेम रंजन, पर्यटन निदेशक विजया जाधव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि इस प्रोजेक्ट को सफल बनाने के लिए सरकार और CCL के बीच तीन दौर की मैराथन बैठकें हुईं, जिसके बाद यह समझौता साकार हुआ।

    राज्य को मिलेंगे बहुआयामी लाभ.

    झारखंड खनिज संसाधनों से भरपूर राज्य है। देश के कुल खनिज भंडार का करीब 40% हिस्सा यहीं स्थित है। ऐसे में यह पहल राज्य को सिर्फ पर्यटन के क्षेत्र में ही नहीं, शिक्षा, रोजगार, सांस्कृतिक धरोहर और उद्योग के क्षेत्र में भी लाभ पहुंचाएगी।


    माइनिंग टूरिज्म के जरिए झारखंड अब सिर्फ ‘खनन राज्य’ नहीं, बल्कि ‘टूरिस्ट फ्रेंडली खनन राज्य’ बनने की ओर बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी सरकार का यह कदम देशभर में अन्य राज्यों के लिए भी एक मिसाल बन सकता है।

    अगर आप रहस्यमयी खदानों की दुनिया को नजदीक से देखना चाहते हैं, तो झारखंड अब आपके स्वागत के लिए तैयार है।

  • सहारा इंडिया ज़मीन घोटाला: झारखंड CID की जांच में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर

    सहारा इंडिया ज़मीन घोटाला: झारखंड CID की जांच में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर

    -दर्जनों शहरों में फंड ट्रांसफर और ज़मीनों की हेराफेरी का खुलासा.

    Edited By: परवेज़ आलम

    For The News Post4u.

    रांची: झारखंड CID ने सहारा समूह से जुड़े एक बड़े घोटाले का खुलासा किया है, जिसमें करोड़ों रुपये की जमीनें फर्जी कंपनियों और व्यक्तियों के माध्यम से बेच दी गईं। यह घोटाला सिर्फ झारखंड तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार कोलकाता, गुवाहाटी, पटना, लखनऊ और दिल्ली जैसे बड़े शहरों से भी जुड़ते दिख रहे हैं।

    जांच एजेंसी ने सहारा इंडिया के अधिकारी शैलेंद्र शुक्ला से पूछताछ की, जिसमें उन्होंने कबूल किया कि रांची और बोकारो जोन से नियमित रूप से बड़ी मात्रा में धनराशि कंपनी के मुख्यालय के निर्देश पर विभिन्न शहरों में ट्रांसफर की जाती थी। फंड ट्रांसफर के आदेश कंपनी के मंडल प्रमुख नीरज कुमार पाल और मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारी एस.बी. सिंह द्वारा दिए जाते थे।

    जमीन की हेराफेरी का तरीका और खुलासे:

    CID की रिपोर्ट के अनुसार, सहारा समूह ने फर्जी कंपनियों और व्यक्तियों के नाम पर जमीनों की बिक्री की। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ये जमीनें SEBI द्वारा तय मूल्यों से कई गुना कम कीमत पर बेची गईं, और इससे अर्जित राशि ना तो निवेशकों को वापस लौटाई गई और ना ही SEBI में जमा की गई। इसके बजाय यह पैसा निजी खर्चों में उपयोग किया गया।

    उदाहरण स्वरूप कुछ बड़े सौदे:

    • बेगूसराय में 28.39 एकड़ जमीन, जिसकी कीमत 2013 में 41.17 करोड़ रुपये आंकी गई थी, महज 2.15 करोड़ रुपये में बेच दी गई।
    • 3.77 एकड़ दूसरी जमीन को भी 3.36 करोड़ रुपये में बेचा गया, जबकि उस वक्त बाजार दर इससे कई गुना अधिक थी।
    • पटना में 65.28 एकड़ जमीन, जिसकी कीमत SEBI ने 44.80 करोड़ रुपये तय की थी, रणकौशल प्रताप सिंह नामक व्यक्ति को केवल 2.52 करोड़ रुपये में बेच दी गई। यहां तक कि सरकारी गाइडलाइन के अनुसार भी इस जमीन की कीमत 5.05 करोड़ रुपये थी।
    • बोकारो में 68.14 एकड़ जमीन, जिसकी अनुमानित कीमत 2013 में 61.33 करोड़ रुपये थी, आज भी सहारा इंडिया के नाम पर ही दर्ज है। इससे यह संकेत मिलता है कि कई सौदों के दस्तावेजों में भी अनियमितता हो सकती है।

    धनबाद में अस्पताल निर्माण पर सवाल:

    धनबाद के गोविंदपुर स्थित रेगुनी मौजा में सहारा की ज़मीन पर अस्पताल का निर्माण किया जा रहा है। CID इस प्रकरण की भी जांच कर रही है कि यह ज़मीन कैसे उपयोग में लाई गई, जबकि यह ज़मीन अब भी कंपनी के नाम पर दर्ज है।

    CID की कार्रवाई और सिफारिश:

    इस घोटाले को लेकर CID ने FIR दर्ज करने की सिफारिश की है। इसके साथ ही संबंधित विभागों से सभी आवश्यक दस्तावेज और सौदों की जानकारी तलब की गई है। पोस्टिंग अधिकारी, अंचल अधिकारी और थाना प्रभारियों से विशेष सहयोग की अपील की गई है ताकि जांच तेजी से पूरी हो सके।

    CID की टीम अब इस घोटाले से जुड़े हर छोटे-बड़े सौदे की जांच कर रही है। कई फर्जी कंपनियों के नाम और उनसे जुड़े व्यक्तियों की पहचान की जा रही है। जल्द ही इस मामले से जुड़े और बड़े नामों का पर्दाफाश होने की उम्मीद है।

    कहानी सिर्फ जमीन की नहीं है… कहानी है एक सुनियोजित लूट की।

    जांच में खुलासा हुआ है कि सहारा समूह ने झारखंड सहित कई राज्यों में जमीनों की बिक्री फर्जी नामों, फर्जी कंपनियों के ज़रिए की। और ये कोई मामूली गलती नहीं थी – ये एक ठोस योजना थी, जिसमें निवेशकों की कमाई को कौड़ियों के दाम बेचकर, उसकी रकम से अपनी जेबें भरी गईं।

    न निवेशकों को पैसा, SEBI को हिसाब… तो गया कहाँ पैसा?

    CID की रिपोर्ट में साफ कहा गया है – इन जमीनों की बिक्री से जो पैसा आया, न वो सेबी में जमा हुआ, न निवेशकों को वापस मिला। वो पैसा गया कहाँ? निजी खर्चों में – मतलब किसी के बंगले बने, किसी के चुनाव खर्च निकले, किसी की गाड़ी चली।

    यह जांच सिर्फ कागज़ों में रह जाएगी या सचमुच कोई बड़ी कार्रवाई होगी?
    क्या जिन लोगों ने भरोसे के नाम पर हजारों लोगों की कमाई लूटी, वो जेल में होंगे या फिर अगला चुनाव लड़ेंगे?

     

  • झारखंड में भारी बारिश की चेतावनी, 13 से 15 जुलाई तक येलो अलर्ट जारी

    झारखंड में भारी बारिश की चेतावनी, 13 से 15 जुलाई तक येलो अलर्ट जारी

    – मौसम विभाग ने दी सतर्क रहने की सलाह

    Edited By: परवेज़ आलम

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    रांची:  झारखंड में 13 से 15 जुलाई के बीच भारी बारिश की संभावना को देखते हुए भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने राज्य के कई हिस्सों के लिए येलो अलर्ट’ जारी किया है। मौसम विभाग ने लोगों को अगले कुछ दिनों तक विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है।

    छह जिलों में येलो अलर्ट.

    IMD के अनुसार, 13 जुलाई को गुमला, खूंटी, सिमडेगा, सरायकेला-खरसावां, पूर्वी सिंहभूम और पश्चिमी सिंहभूम में भारी बारिश की आशंका है। इन जिलों के निवासियों को निचले इलाकों में जलभराव और वज्रपात से सतर्क रहने की हिदायत दी गई है।

    झारखंड के मध्य और पूर्वी जिलों पर असर.

    14 जुलाई को गिरिडीह, बोकारो, धनबाद, देवघर, दुमका, जामताड़ा, सरायकेला-खरसावां, पूर्वी सिंहभूम और पश्चिमी सिंहभूम में येलो अलर्ट लागू रहेगा। इन क्षेत्रों में लगातार बारिश और आंधी-तूफान की आशंका जताई गई है।

    उत्तर-पूर्वी जिलों में भारी बारिश की संभावना

    मौसम विभाग का पूर्वानुमान है कि 15 जुलाई को देवघर, जामताड़ा, दुमका, पाकुड़, गोड्डा और साहेबगंज में भारी बारिश हो सकती है। स्थानीय प्रशासन को अलर्ट रहने और राहत इंतजाम दुरुस्त रखने को कहा गया है।

    औसत से 69% अधिक वर्षा

    रांची मौसम विज्ञान केंद्र के उपनिदेशक अभिषेक आनंद के मुताबिक, “1 जून से 12 जुलाई के बीच राज्य में 499.6 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि सामान्य औसत 296.4 मिमी होती है। यह सामान्य से लगभग 69 प्रतिशत अधिक है।”

    इन जिलों में रिकॉर्डतोड़ बारिश

    • पूर्वी सिंहभूम: सामान्य से 157% अधिक वर्षा
    • रांची: सामान्य से 150% अधिक बारिश
    • सरायकेला-खरसावां: 130% ज्यादा वर्षा

    इन पांच जिलों में बारिश में कमी.

    हालांकि झारखंड के देवघर, गढ़वा, गोड्डा, साहेबगंज और पाकुड़ जिलों में अब तक 21% से 29% तक कम वर्षा दर्ज की गई है, जिससे वहां खेती और जलस्तर को लेकर चिंता जताई जा रही है।

    IMD की लोगों को सलाह.

    • बारिश और वज्रपात के दौरान खुले स्थानों से दूर रहें
    • बिजली के खंभों और पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचें।
    • यात्रा करने से पहले मौसम अपडेट चेक करें

    मौसम विभाग की मानें तो झारखंड में अगले तीन दिन मूसलधार बारिश और तेज हवाओं के साथ चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। ऐसे में सतर्कता ही सुरक्षा का सबसे मजबूत उपाय है।

  • पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की बैठक मे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति मे हेमंत सोरेन ने गिनाई राज्य की पीड़ा

    पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की बैठक मे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति मे हेमंत सोरेन ने गिनाई राज्य की पीड़ा

    Edited By: परवेज़ आलम.

    For The News Post4u.

    रांची की वह दोपहर इतिहास के दस्तावेज़ों में दर्ज होगी। जब पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की 27 वीं बैठक के मंच पर झारखंड की जमीन से उठी आवाज़ ने राष्ट्रीय सियासत के गलियारों में एक नई दस्तक दी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने न केवल अपने प्रदेश की पीड़ा को शब्दों में पिरोया, बल्कि दिल्ली को यह भी बताया कि देश के संसाधनों पर सिर्फ़ दिल्ली और मुंबई का हक नहीं है। जंगलों, पहाड़ों और आदिवासियों की भी साझेदारी है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में आयोजित पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की बैठक मे झारखंड राज्य की समस्याओं, विकास की जरूरतों और लंबित मामलों को विस्तार से रखा गया । मुख्यमंत्री ने झारखंड की ओर से 31 अहम मुद्दों को उठाते हुए राज्य के विकास के लिए केंद्र सरकार से सहयोग की अपेक्षा जताई। बैठक में बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और झारखंड के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया।

    कोयले की राख में दबे करोड़ों के सवाल.

    सबसे बड़ा प्रश्न था कोयला कंपनियों के ऊपर झारखंड सरकार का 1.40 लाख करोड़ रुपये का बकाया। न कोई ब्याज, न कोई माफी – सिर्फ़ मांग। हेमंत सोरेन ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के सामने सवाल रखा कि जब कोयले की खुदाई झारखंड की धरती से होती है, तो मुनाफा दिल्ली और कोलकाता के बहीखातों में क्यों दर्ज होता है?

    212 अस्पताल और आयुष्मान भारत की ठहरी साँसे.

    झारखंड के 212 निजी अस्पताल आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत इलाज तो कर रहे हैं, लेकिन भुगतान अटका हुआ है। वजह ? ईडी की जांच। हेमंत सोरेन ने दो टूक कहा – “भ्रष्टाचार की जांच होनी चाहिए, लेकिन मरीजों की जान बचाने वालों को सज़ा क्यों ?” इस पर अमित शाह ने जांच तेज़ करने और भुगतान सुनिश्चित करने का भरोसा दिलाया।

    मसानजोर डैम: पानी वहीं, प्यासा झारखंड.

    मयूराक्षी नदी पर बना मसानजोर डैम। पूरा सबमर्ज एरिया झारखंड में, लेकिन सिंचाई का लाभ बंगाल को। यह 1949 के समझौते की असंतुलित विरासत है। झारखंड को जहां मात्र 53 एमसीएम पानी मिलता है, जरूरत है 457 एमसीएम की। सोरेन ने मांग की – डैम का नियंत्रण साझा हो और जलस्तर 378 फीट से नीचे न जाने दिया जाए।

    सहकारी संघवाद” का असली मतलब.

    मुख्यमंत्री ने मंच से एक स्पष्ट संदेश दिया – “यह परिषद केवल चर्चा का मंच नहीं, समाधान का प्रयोगशाला होनी चाहिए।” उन्होंने कहा कि झारखंड, बिहार, बंगाल और ओडिशा का साझा अतीत, साझा समस्याएं हैं, और इसलिए समाधान भी मिलकर ही होंगे।

    प्रमुख मांगें – हर क्षेत्र, हर वर्ग की आवाज़.

    हेमंत सोरेन की 360 डिग्री अपील में हर तबके की झलक थी:

    • खनिज संसाधनों का न्यायपूर्ण उपयोग: DMFT नीति में संशोधन, कोल कंपनियों द्वारा बकाया भुगतान और बंद खदानों का माइन क्लोजर।
    • महिलाओं के लिए “मुख्यमंत्री मईयां सम्मान योजना” के तहत 2500 रुपये मासिक सहायता।
    • शिक्षा में सामाजिक न्याय: वंचित वर्ग के छात्रों के लिए छात्रवृत्ति, जनजातीय विश्वविद्यालय, उच्च शिक्षा में नवाचार और पेटेंट सुविधा।
    • स्वास्थ्य व्यवस्था: RIMS-2 और छह नए मेडिकल कॉलेजों हेतु केंद्र की आर्थिक सहायता।
    • यातायात और संपर्क: रांची मेट्रो परियोजना, साहेबगंज एयर कार्गो हब, पूर्वोत्तर को जोड़ने वाले पुलों व एक्सप्रेसवे का प्रस्ताव।
    • मनरेगा में मजदूरी दर बढ़ाकर 405 रुपये करने की मांग।
    • कुपोषण और आंगनबाड़ी की समस्याओं पर केंद्र का ध्यान।
    • COMFED और होटल अशोक जैसे बिहार-झारखंड के साझा आस्तियों का विभाजन।

    एक मुख्यमंत्री की भूमिका से आगे.

    हेमंत सोरेन ने अपनी बात न किसी तंज में रखी, न किसी घमंड में। नारेबाज़ी नहीं, तथ्य, तर्क और अनुभव के साथ झारखंड की मांगों को मंच पर उतारा। उन्होंने यह जता दिया कि एक राज्य का मुख्यमंत्री सिर्फ़ मुख्यमंत्री नहीं होता – वह उस भूभाग की आत्मा, चेतना और आवाज़ होता है।  झारखंड ने सिर्फ़ अपना पक्ष नहीं रखा, बल्कि केंद्र और पड़ोसी राज्यों के सामने एक आइना रखा है। सवाल यह नहीं कि झारखंड क्या मांग रहा है, सवाल यह है कि देश की नीति में झारखंड की कितनी हिस्सेदारी है। और जब तक इस हिस्सेदारी का हिसाब नहीं चुकता, तब तक सहकारी संघवाद अधूरा रहेगा।

  • गंगाराम अस्पताल में भर्ती शिबू सोरेन का  हालचाल लेने  पहुंची राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू

    गंगाराम अस्पताल में भर्ती शिबू सोरेन का हालचाल लेने पहुंची राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू

    परवेज़ आलम.By The News Post4u.

    झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संस्थापक शिबू सोरेन की तबीयत अचानक बिगड़ने के बाद उन्हें दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में भर्ती कराया गया है। 81 वर्षीय सोरेन लंबे समय से किडनी संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं और इस बार उनकी हालत कुछ ज्यादा गंभीर हो गई है। फिलहाल उन्हें अस्पताल के नेफ्रोलॉजी विभाग के चेयरमैन डॉ. ए.के. भल्ला की निगरानी में रखा गया है। डॉक्टरों के मुताबिक उनकी स्थिति स्थिर है, लेकिन पूरी तरह से खतरे से बाहर नहीं कही जा सकती

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने की मुलाकात, जताई चिंता.

    जैसे ही शिबू सोरेन के अस्वस्थ होने की खबर सामने आई, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू खुद सर गंगाराम अस्पताल पहुंचीं। उन्होंने ‘दिशोम गुरु’ के नाम से प्रसिद्ध शिबू सोरेन से मुलाकात की और उनकी सेहत के बारे में जानकारी ली। राष्ट्रपति ने उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की और उन्हें देश की एक अमूल्य धरोहर बताया। इस दौरान झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी कल्पना सोरेन भी अस्पताल में मौजूद रहे।

    राज्यपाल संतोष गंगवार ने भी जाना हाल.

    इससे पहले झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार भी दिल्ली पहुंचे और अस्पताल जाकर शिबू सोरेन से मुलाकात की। उन्होंने डॉक्टरों से इलाज की स्थिति पर बातचीत की और सोशल मीडिया पर ट्वीट कर लिखा कि दिशोम गुरु की हालत को लेकर वे चिंतित हैं और उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना करते हैं।

    झारखंड की राजनीति के स्तंभ हैं शिबू सोरेन.

    शिबू सोरेन झारखंड की राजनीति का एक बड़ा नाम हैं। आदिवासी अधिकारों की लड़ाई से लेकर झारखंड को बिहार से अलग राज्य के रूप में स्थापित करने तक, उन्होंने हमेशा संघर्ष का रास्ता अपनाया। वे तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और एक बार केंद्रीय कोयला मंत्री भी बने थे। आदिवासी समाज में उन्हें सम्मान से ‘दिशोम गुरु’ यानी ‘देश का गुरु’ कहा जाता है।

    परिवार और जनता की दुआएं.

    अस्पताल में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी कल्पना सोरेन लगातार शिबू सोरेन की देखरेख कर रहे हैं। हेमंत सोरेन ने झारखंड की जनता से अपील की है कि वे उनके पिता के लिए दुआ करें। सोशल मीडिया से लेकर गांव-शहरों तक, लोग दिशोम गुरु की सलामती की प्रार्थना कर रहे हैं।

    उम्मीद की जा रही है कि झारखंड के इस पुरोधा नेता की तबीयत जल्द सुधरे और वे एक बार फिर स्वस्थ होकर अपने राज्यवासियों के बीच लौटें।

  • झारखंड कैबिनेट के बड़े फैसले: हिन्दू न्यास बोर्ड को सालाना 3 करोड़ की मदद

    झारखंड कैबिनेट के बड़े फैसले: हिन्दू न्यास बोर्ड को सालाना 3 करोड़ की मदद

    HIV-एड्स फोरम का गठन, रांची में दो बड़े सड़क प्रोजेक्ट को मंजूरी.

    By The News Post4u.

    रांची: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में शुक्रवार को आयोजित झारखंड कैबिनेट की बैठक में राज्य के विकास और कल्याण से जुड़े कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक में कुल 26 प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की गई, जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क निर्माण और पुलिस पदक जैसे अनेक अहम विषय शामिल थे।

    हिन्दू न्यास बोर्ड को सालाना अनुदान.

    राज्य सरकार ने झारखंड हिन्दू धार्मिक न्यास बोर्ड को सालाना 3 करोड़ रुपये का अनुदान देने का निर्णय लिया है। यह अनुदान धार्मिक गतिविधियों के प्रबंधन और सामाजिक कल्याण से जुड़े कार्यों के संचालन के लिए दिया जाएगा।

    HIV-एड्स रोकथाम के लिए लेजिस्लेटिव फोरमका गठन.

    राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (NACO) के निर्देशों पर राज्य सरकार ने झारखंड लेजिस्लेटिव फोरम ऑन एचआईवी-एड्स के गठन को मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य HIV-एड्स के प्रति जनजागरूकता फैलाना, भेदभाव समाप्त करना और जिला स्तरीय तंत्र को मज़बूती देना है। इस फोरम के अध्यक्ष संबंधित विभाग के मंत्री होंगे और स्पीकर द्वारा नामित पांच विधायक इसके सदस्य होंगे। इसके अलावा विकास आयुक्त, विभागीय सचिव, परियोजना निदेशक जैसे अधिकारी भी इसमें शामिल होंगे।

    उच्च शिक्षा को बढ़ावा: दो नए कॉलेजों की मंजूरी.

    शिक्षा क्षेत्र में भी सरकार ने दो बड़े निर्णय लिए हैं। खूंटी जिले में महिला कॉलेज की स्थापना के लिए 57 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई, जबकि सरायकेला-खरसावां के ईचागढ़ क्षेत्र में डिग्री कॉलेज की स्थापना के लिए 38.76 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए।

    फार्मेसी कॉलेजों के लिए नई नियुक्तियां.

    दुमका और पलामू में स्थित राजकीय फार्मेसी संस्थानों में 28-28 नए पदों के सृजन को कैबिनेट ने हरी झंडी दी है, जिससे इन संस्थानों की शैक्षणिक गुणवत्ता और संचालन में सुधार होगा।

    पुलिस पदक की संख्या बढ़ी.

    झारखंड राज्यपाल पदक के तहत अब तक 11 पुलिस अधिकारियों-जवानों को सम्मानित किया जाता था, जिसे बढ़ाकर 21 कर दिया गया है। इसी प्रकार सराहनीय सेवा के लिए दी जाने वाली संख्या 31 से बढ़ाकर 60 कर दी गई है। यह निर्णय राज्य के पुलिस बल को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से लिया गया है।

    JSSC को 31 करोड़ की स्वीकृति.

    झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) को वर्ष 2025-26 में विभिन्न प्रतियोगिता परीक्षाओं के सफल आयोजन हेतु झारखंड अकस्मिता निधि से 31 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। साथ ही यह भी तय किया गया कि यदि किसी स्नातक स्तरीय परीक्षा में 50 हजार से अधिक आवेदन आते हैं, तो प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा दोनों कराई जाएंगी, अन्यथा केवल एक स्तर की परीक्षा ली जाएगी।

    रांची में दो बड़े सड़क प्रोजेक्ट को मिली मंजूरी.

    1. अरगोड़ा-रिंग रोड फोरलेन सड़क
      पथ निर्माण विभाग के एक प्रस्ताव के तहत रांची के अरगोड़ा से पुंदाग होते हुए रिंग रोड तक 6.17 किलोमीटर लंबी फोर लेन सड़क बनाई जाएगी। इसके लिए 141 करोड़ रुपये की प्रशासनिक मंजूरी दी गई है। इसमें मुआवजा, पुनर्वास और पौधारोपण जैसी गतिविधियाँ भी शामिल हैं।
    2. साइकिल ट्रैक और सर्विस रोड निर्माण
      एक अन्य प्रमुख परियोजना के तहत विवेकानंद स्कूल मोड़ से रिंग रोड तक साइकिल ट्रैक, सर्विस रोड और फुटपाथ का निर्माण किया जाएगा। इस पूरी परियोजना के लिए झारखंड राज्य राजमार्ग प्राधिकरण को 301.12 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिली है। यह परियोजना पुराने विधानसभा भवन, हाईकोर्ट और विधानसभा सचिवालय को जोड़ते हुए नईसराय लिंक रोड तक फैली होगी।

    अन्य महत्वपूर्ण निर्णय.

    • राजकीय प्राथमिक शिक्षक प्रोन्नति नियमावली 2025 को स्वीकृति मिली, जिससे शिक्षकों की पदोन्नति प्रक्रिया अब ज्यादा पारदर्शी और व्यवस्थित होगी।
    • सिमडेगा-कुरडेग से छत्तीसगढ़ सीमा तक 63.2 किलोमीटर सड़क के सुधार कार्य के लिए 38 करोड़ रुपये की प्रशासनिक मंजूरी दी गई।

    इन निर्णयों से स्पष्ट है कि राज्य सरकार बुनियादी ढांचे को मज़बूत करने, सामाजिक कल्याण, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार लाने के लिए ठोस कदम उठा रही है। रांची की सड़क परियोजनाएं राजधानी की यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाएंगी, वहीं HIV-एड्स जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सरकार की संजीदगी भी दिखाई देती है।

  • हेमंत सोरेन-जद यू नेता अशोक चौधरी की मुलाकात ने बढ़ाई सियासी सरगर्मी

    हेमंत सोरेन-जद यू नेता अशोक चौधरी की मुलाकात ने बढ़ाई सियासी सरगर्मी

    महागठबंधन में अनदेखी से गुस्से मे JMM.

    परवेज़ आलम,राजनीतिक विश्लेषक , द न्यूज़ पोस्ट4U

    बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर महागठबंधन की तैयारियां ज़ोरों पर हैं, लेकिन इन बैठकों में झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की गैरमौजूदगी ने सियासी समीकरणों में हलचल पैदा कर दी है। इसी बीच बिहार सरकार के वरिष्ठ मंत्री और JDU नेता अशोक चौधरी की झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात ने राजनीतिक तापमान और बढ़ा दिया है।

    शिष्टाचार मुलाकात या रणनीतिक संदेश?

    अशोक चौधरी की यह मुलाकात 13 जून को हुई और इसकी जानकारी खुद झारखंड मुख्यमंत्री कार्यालय ने सोशल मीडिया पर दी। कहा गया कि यह केवल “शिष्टाचार भेंट” थी, लेकिन इस मुलाकात की टाइमिंग  ने राजनीतिक विश्लेषकों को चौकन्ना कर दिया है।

    एक दिन पहले यानी 12 जून को पटना में महागठबंधन की अहम बैठक आयोजित हुई थी, जिसमें RJD, कांग्रेस और अन्य दलों ने हिस्सा लिया, मगर JMM को आमंत्रित नहीं किया गया। इससे पार्टी की नाराजगी अब सार्वजनिक हो गई है।

    JMM ने उठाए सवाल, भेजा सियासी संदेश.

    JMM के महासचिव विनोद पांडे ने साफ तौर पर कहा कि पार्टी बिहार विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी में है, लेकिन उन्हें अब तक न तो बैठक में बुलाया गया और न ही चर्चा में शामिल किया गया। उन्होंने यह भी जोड़ा कि गठबंधन में झामुमो की उपेक्षा करना कई सवाल खड़े करता है।
    झामुमो प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि पार्टी बड़े फैसले पर विचार कर रही है और जल्द ही अगला कदम उठाया जाएगा।

    RJD की दो टूक – ‘जहां गठबंधन, वहीं बैठक’

    दूसरी ओर RJD ने भी स्पष्ट कर दिया है कि बिहार की गठबंधन बैठकें उन्हीं दलों के साथ होंगी, जो महागठबंधन का सक्रिय हिस्सा हैं। RJD के नेताओं ने JMM को सीधी चुनौती देते हुये कहा है कि अगर झारखंड मुक्ति मोर्चा को खुद पर इतना भरोसा है, तो अकेले चुनाव मैदान में उतरकर अपनी ताकत दिखाए। झामुमो की बिहार में चुनाव लड़ने की इच्छा पर RJD के तेवर साफ तौर पर ‘आर या पार’ के संकेत दे रहे हैं।

    JMM की नजर सीमावर्ती सीटों पर.

    JMM बिहार के झारखंड से सटे सीमावर्ती क्षेत्रों की कुछ सीटों पर चुनाव लड़ना चाहता है। इन इलाकों में पार्टी का आधार मजबूत आधार का दावा किया जा रहा है , पार्टी का दावा है कि पहले भी पार्टी के विधायक इन इलाकों से चुने जा चुके हैं। जिन सीटों पर झामुमो की नजर है, उनमें शामिल हैं:तारापुर, कटोरिया, मनिहारी, झाझा, बांका, ठाकुरगंज,रूपौली, रामपुर, बनमनखी, जमालपुर, पीरपैंती, व चकाई.

    BJP का तंज – “फुफकारता है, काटता नहीं”

    इस सियासी तकरार के बीच बीजेपी ने मौके को भुनाते हुए तंज कसा। पार्टी के बिहार सह प्रभारी दीपक प्रकाश ने JMM पर कटाक्ष करते हुए कहा, “झामुमो सिर्फ फुफकारता है, काटता नहीं। पहले भी चुनाव लड़ने की बात की थी, लेकिन न समर्थन मिला, न सीट।” बीजेपी इस पूरे घटनाक्रम को महागठबंधन की कमजोर होती एकता के संकेत के तौर पर देख रही है।

    क्या दरक रही है तेजस्वी-हेमंत की दोस्ती?

    राजनीतिक समीक्षक अब यह सवाल भी उठा रहे हैं कि क्या तेजस्वी यादव और हेमंत सोरेन के बीच की ‘पुरानी दोस्ती’ में दरार आ चुकी है? क्या JMM को महागठबंधन में अब कोई खास भूमिका नहीं दी जाएगी?
    इस मुलाकात के बाद अटकलें हैं कि हेमंत सोरेन जेडीयू या तीसरे मोर्चे के साथ नई संभावनाएं तलाश सकते हैं, जिससे बिहार की राजनीति में नया मोड़ आ सकता है।
    बिहार के चुनावी दंगल में अभी बहुत कुछ तय होना बाकी है, लेकिन झामुमो की नाराजगी और अशोक चौधरी की हेमंत सोरेन से मुलाकात ने संकेत दे दिया है कि पर्दे के पीछे बड़ी हलचल जारी है। आने वाले हफ्तों में यह साफ हो जाएगा कि झामुमो महागठबंधन का हिस्सा रहेगा, या कोई नया गठजोड़ तैयार होगा।

  • झारखंड में कोरोना की वापसी: लाल विजय शाहदेव संक्रमित, स्वास्थ्य मंत्री  की जनता से अपील.

    झारखंड में कोरोना की वापसी: लाल विजय शाहदेव संक्रमित, स्वास्थ्य मंत्री की जनता से अपील.

    By The News Post4u

    रांची :  झारखंड में एक बार फिर कोरोना वायरस ने दस्तक दे दी है। राज्य में कोविड के नए मामलों के बीच झारखंड फिल्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड के सदस्य और चर्चित फिल्ममेकर लाल विजय शाहदेव के कोरोना संक्रमित पाए जाने की खबर सामने आई है। झारखंड से लेकर मुंबई तक फिल्म इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बनाने वाले शाहदेव ने खुद इस जानकारी को साझा करते हुए सतर्कता की अपील की है।

    फ्लाइट में बिगड़ी तबीयत, रांची पहुंचने पर मिले पॉजिटिव.

    लाल विजय शाहदेव ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर एक पोस्ट करते हुए बताया कि वह हाल ही में मुंबई से रांची लौट रहे थे। इसी दौरान 22 मई को फ्लाइट में ही उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और वे बेहोश हो गए। बाद में जांच कराए जाने पर उनकी कोविड रिपोर्ट पॉजिटिव आई। उन्होंने लिखा, “भारत में अब तक कुल 257 लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। अब मैं भी उनमें शामिल हूं। मैं फिलहाल रांची के एक अस्पताल में भर्ती हूं और पहले से बेहतर महसूस कर रहा हूं।”

    फिल्मी काम रुका, अपील जारी.

    शाहदेव ने यह भी बताया कि उन्हें झारखंड फिल्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के सदस्य होने के नाते कुछ फिल्मों का प्रिव्यू करना था, लेकिन बीमारी के चलते वह यह कार्य नहीं कर सके। उन्होंने अपील की है कि जो भी लोग हाल के दिनों में उनके संपर्क में आए हैं और सिरदर्द, बदन दर्द, बुखार, खांसी या सर्दी जैसे लक्षण महसूस कर रहे हैं, वे तुरंत अपनी कोरोना जांच कराएं।

    स्वास्थ्य विभाग अलर्ट पर, मंत्री ने कहा – “घबराने की जरूरत नहीं”

    इधर देशभर में कोरोना के मामलों में फिर से बढ़ोतरी देखी जा रही है, खासकर दो नए वेरिएंट NB.1.8.1 और LF.7 के सामने आने के बाद। इस बीच बेंगलुरु में एक वरिष्ठ नागरिक की कोविड से मौत की खबर ने चिंता और बढ़ा दी है।

    झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने स्थिति पर संज्ञान लेते हुए राज्यभर के स्वास्थ्य तंत्र को अलर्ट मोड में डाल दिया है। उन्होंने कहा, “यह सामान्य स्थिति है। घबराने की कोई जरूरत नहीं है। हम पूरी तरह सतर्क हैं और सभी तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं।”

    मंत्री अंसारी ने बताया कि राज्य के सभी जिलों में विशेष जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे ताकि लोगों को कोविड से जुड़ी जरूरी जानकारियां दी जा सकें और अफवाहों से बचाया जा सके। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भीड़भाड़ वाले स्थानों पर मास्क पहनना अब भी एक जरूरी एहतियात है, जो अन्य संक्रमणों से भी बचाता है.

    नई गाइडलाइंस का इंतजार, डॉक्टर की अपील – “सतर्क रहें, सुरक्षित रहें”

    स्वास्थ्य मंत्री ने भावुक अपील करते हुए कहा, “एक डॉक्टर के रूप में मेरी आपसे यही गुज़ारिश है – लापरवाही न करें। कोविड को हल्के में न लें। हमारी जिम्मेदारी है कि हम खुद भी सुरक्षित रहें और दूसरों को भी सुरक्षित रखें।”

    उन्होंने यह भी कहा कि झारखंड सरकार केंद्र सरकार द्वारा जारी होने वाली नई गाइडलाइंस का इंतजार कर रही है। जैसे ही दिशा-निर्देश प्राप्त होंगे, राज्य सरकार तुरंत आवश्यक कदम उठाएगी।

    बेंगलुरु में जिस वरिष्ठ नागरिक की कोविड से मृत्यु हुई, उनकी उम्र लगभग 85 वर्ष थी और उन्हें पहले से कई स्वास्थ्य समस्याएं थीं। मंत्री अंसारी ने इस मामले को लेकर लोगों से कहा कि घबराएं नहीं, बल्कि सतर्कता बनाए रखें

    सरकार तैयार, जनता से अपील – “हम साथ हैं, हम तैयार हैं”

    राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि अफवाहों से बचें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें। मंत्री ने आश्वासन दिया, “हम साथ हैं, हम तैयार हैं। कोविड को पहले की तरह इस बार भी हराएंगे।”

  • सीमा पर तनाव के बीच में मॉक ड्रिल: युद्धकालीन हालात से निपटने की रणनीतिक तैयारी

    सीमा पर तनाव के बीच में मॉक ड्रिल: युद्धकालीन हालात से निपटने की रणनीतिक तैयारी

    परवेज़ आलम.

    रांची : भारत-पाकिस्तान सीमा पर बढ़ते तनाव और हाल ही में हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद देशभर में नागरिक सुरक्षा को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है। इसी क्रम में गृह मंत्रालय के निर्देश पर बुधवार को देशभर के प्रमुख शहरों में मॉक ड्रिल (सुरक्षा अभ्यास) का आयोजन किया गया। झारखंड की राजधानी रांची,बोकारो, जमशेदपुर, गोड्डा और साहिबगंज जिलों में में भी यह ड्रिल पूरे जोर-शोर से की गई, जिसका उद्देश्य आम नागरिकों, प्रशासनिक अमले और राहत एजेंसियों को आपातकालीन परिस्थितियों के लिए तैयार करना था।

    मॉक ड्रिल का संचालन: युद्ध जैसी स्थिति की तैयारी.

    रांची के मेकॉन क्षेत्र में मुख्य मॉक ड्रिल आयोजित की गई, जहां सायरन बजते ही सुरक्षा बलों और प्रशासन की टीमें सक्रिय हो गईं। डोरंडा समेत आसपास के क्षेत्रों में आवाजाही रोक दी गई, सड़कें बंद कर दी गईं और दुकानों को अस्थायी रूप से बंद करा दिया गया। ड्रिल के दौरान शहर के विभिन्न हिस्सों में एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड, पुलिस बल और एनडीआरएफ की टीमों ने संयुक्त रूप से अपनी तैयारियों का प्रदर्शन किया।

    लाउडस्पीकर से दिशा-निर्देश, नागरिकों को जागरूक किया गया.

    प्रशासन ने पूरे अभ्यास के दौरान लाउडस्पीकर के माध्यम से मॉक ड्रिल में शामिल लोगों को दिशा-निर्देश देते हुए यह स्पष्ट किया कि यह अभ्यास नागरिक सुरक्षा के लिए किया जा रहा है। रांची के डीसी मंजूनाथ भजंत्री ने पहले ही नागरिकों से अपील की थी कि सायरन बजने पर घबराएं नहीं, यह सिर्फ एक अभ्यास है।

    सुरक्षा एजेंसियों की सक्रियता और समन्वय.

    ड्रिल में एनडीआरएफ ने मेकॉन भवन में आग लगने की स्थिति का अभ्यास किया, जहां फायर ब्रिगेड की मदद से आग बुझाने का प्रदर्शन हुआ और कर्मचारियों को सुरक्षित बसों से निकाला गया। एंबुलेंस के जरिए घायलों को अस्पताल तक पहुंचाने का मॉक अभ्यास किया गया। इस दौरान विभिन्न एजेंसियों के बीच तालमेल और त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली की परीक्षा ली गई।

    बच्चों और आम नागरिकों को भी दिया गया प्रशिक्षण.

    सुरक्षा ड्रिल में स्कूलों के बच्चों को भी शामिल किया गया। उन्हें बताया गया कि सायरन बजते ही किस तरह अपनी सुरक्षा करनी है – जैसे बेंच-टेबल के नीचे छिपना, खिड़कियों से दूरी बनाना और घबराए बिना सतर्क रहना। कुछ स्कूलों में बच्चों ने लाइव डेमोंस्ट्रेशन के ज़रिए बचाव तकनीकों का प्रदर्शन किया।

    एनसीसी और एनएसएस की भूमिका.

    राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) और राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के स्वयंसेवकों ने भी इस अभ्यास में सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने आम नागरिकों को राहत स्थल तक पहुंचाने और आपातकालीन स्थिति में आवश्यक सहयोग देने के तरीकों का प्रदर्शन किया।

    राज्य के 5 जिलों में चला व्यापक अभ्यास.

    रांची के अलावा झारखंड के बोकारो, जमशेदपुर, गोड्डा और साहिबगंज जिलों में भी इस तरह की मॉक ड्रिल आयोजित की गई। कुल छह स्थलों पर एक साथ यह अभ्यास हुआ, जहां सायरन की आवाज के साथ यातायात रोका गया और लोगों को घरों की लाइटें बंद करने, खिड़की-दरवाजे बंद रखने और किसी भी संभावित हमले की स्थिति में सतर्क रहने के निर्देश दिए गए।

    ड्रिल का उद्देश्य: दहशत नहीं, तैयारी जरूरी.

    इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य आम जनता को युद्ध या आतंकी हमलों जैसी परिस्थितियों में भयभीत होने से बचाना और उन्हें सटीक तरीके से प्रतिक्रिया करने के लिए प्रशिक्षित करना है। अधिकारियों का कहना है कि सायरन की आवाज से लोगों को ऐसे हालात में शांत और संगठित रहने की आदत डालनी चाहिए।

    भविष्य में और क्षेत्रों में भी होगा आयोजन.

    प्रशासन ने संकेत दिया है कि इस प्रकार की मॉक ड्रिल आगे भी समय-समय पर राज्य के विभिन्न हिस्सों में कराई जाएगी, ताकि किसी भी संभावित संकट की स्थिति में अफरा-तफरी से बचा जा सके और जान-माल की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।


     

  • खुफिया इनपुट के बावजूद नहीं हुई सुरक्षा तैयारी, पहलगाम हमले पर खरगे ने केंद्र सरकार को घेरा

    खुफिया इनपुट के बावजूद नहीं हुई सुरक्षा तैयारी, पहलगाम हमले पर खरगे ने केंद्र सरकार को घेरा

    परवेज़ आलम.

    रांची: झारखंड की राजधानी रांची में आयोजित ‘संविधान बचाओ रैली’ के मंच से कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले का हवाला देते हुए खरगे ने दावा किया कि हमले से तीन दिन पहले प्रधानमंत्री को खुफिया रिपोर्ट भेजी गई थी। इसके आधार पर पीएम मोदी ने तो अपनी यात्रा रद्द कर दी, लेकिन आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर कोई कदम नहीं उठाया गया, जिसके कारण 26 निर्दोष लोगों की जान चली गई। खरगे ने कहा, हमले से तीन दिन पहले प्रधानमंत्री को इंटेलिजेंस इनपुट मिला था, जिसके बाद उन्होंने अपना कश्मीर दौरा रद्द कर दिया। लेकिन सवाल यह है कि अगर उन्हें खतरे की जानकारी थी, तो आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर क्या किया गया?”

    जब जानकारी थी, तो सुरक्षा क्यों नहीं ?

    खरगे ने सवाल किया कि यदि प्रधानमंत्री को खतरे की गंभीर जानकारी थी, तो उसी रिपोर्ट को सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय पुलिस के साथ क्यों नहीं साझा किया गया? उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री खुद खतरों से बच गए, लेकिन आम लोगों को क्यों मरने के लिए छोड़ दिया गया?” उन्होंने केंद्र को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि जब सरकार खुद इंटेलिजेंस फेल्योर को स्वीकार कर रही है, तो उसे इन मौतों की जवाबदेही भी लेनी चाहिए।

    आतंकवाद के खिलाफ समर्थन, लेकिन चूक पर सवाल जरूरी.

    कांग्रेस अध्यक्ष ने यह स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ सरकार के हर कड़े कदम का समर्थन करती है। लेकिन उन्होंने यह भी जोड़ा कि “समर्थन का मतलब यह नहीं कि सरकार अपनी लापरवाही पर पर्दा डाले।”

    मीडिया रिपोर्ट का हवाला, पीएम का दौरा रद्द.

    खरगे ने एक अखबार की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि 19 अप्रैल को प्रधानमंत्री को पहलगाम में खतरे की जानकारी मिली थी, जिसके बाद उन्होंने कश्मीर का दौरा रद्द कर दिया। “जब पीएम खुद नहीं गए, तो यह जानकारी आम लोगों को सुरक्षित रखने के लिए क्यों नहीं इस्तेमाल हुई?” उन्होंने पूछा।

    रोजगार और अर्थव्यवस्था पर भी उठाए सवाल.

    रैली में खरगे ने आर्थिक मोर्चे पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि देश में 30 लाख सरकारी पद खाली हैं, लेकिन मोदी सरकार इन्हें भरने में रुचि नहीं ले रही। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीति बन गई है – “PSU बंद करो और गरीबों की नौकरी छीनो।”

    उन्होंने यह भी कहा कि कई सरकारी उपक्रमों में कर्मचारियों को महीनों से वेतन नहीं मिला, जबकि सरकार दावा करती है कि देश की अर्थव्यवस्था मजबूत है। उन्होंने कहा, “अगर जमीन पर हालात नहीं सुधरते, तो आंकड़े महज भ्रम पैदा करने का जरिया बन जाते हैं।”

    जातीय जनगणना और सामाजिक न्याय की मांग.

    खरगे ने केंद्र सरकार से जल्द जातीय जनगणना शुरू करने की मांग की। उन्होंने कहा कि ओबीसी आरक्षण का दायरा बढ़ाया जाए और 50% की सीमा खत्म की जाए। उन्होंने कहा, “वोट हमारा और राज तुम्हारा – यह अब नहीं चलेगा। अब वोट भी हमारा होगा और सरकार भी हमारी होगी।” उन्होंने मोदी सरकार पर पिछड़े वर्गों और गरीबों की आवाज को दबाने का आरोप लगाया।

    सरना धर्मकोड और HEC की बदहाली का मुद्दा.

    रैली में खरगे ने झारखंड के अहम मुद्दों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि आगामी जनगणना में सरना धर्मकोड को मान्यता दिलाने के लिए संघर्ष जारी रखना होगा। साथ ही HEC (हैवी इंजीनियरिंग कॉर्पोरेशन) की खराब स्थिति के लिए भी उन्होंने केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा, “जहां दो-दो साल से वेतन नहीं मिला, वहां कर्मचारी कैसे काम करेंगे? मोदी सरकार की नीति एससी, एसटी और ओबीसी को हाशिए पर ढकेलने की है।”

    संगठन और संविधान की रक्षा का आह्वान.

    खरगे ने कार्यकर्ताओं से पार्टी को मजबूत करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि “अगर कांग्रेस कमजोर हुई, तो न कोई मंत्री रहेगा, न मुख्यमंत्री। संविधान को बचाना है तो एकजुट संघर्ष जरूरी है।”

    शहीद नेताओं को श्रद्धांजलि और जनता का धन्यवाद

    अपने संबोधन के अंत में खरगे ने महात्मा गांधी, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि “देश पहले है, जाति, धर्म और पार्टी बाद में।” उन्होंने झारखंड की जनता को इंडियागठबंधन को समर्थन देने के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि राज्य में जनहितैषी सरकार बेहतर ढंग से काम कर रही है।

    मंच पर दिखी कांग्रेस की ताकत

    संविधान बचाओ रैली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के अलावे कांग्रेस संगठन महासचिव के.सी.वेणुगोपाल, छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम भूपेश बघेल, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश, विधायक दल के नेता प्रदीप यादव, कार्यक्रम संयोजक और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप बलमुचू, पूर्व मंत्री सुबोधकांत सहाय, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर के अलावे कांग्रेस कोटे के हेमंत सरकार के मंत्री राधाकृष्ण किशोर, दीपिका पांडे सिंह, डॉ इरफान अंसारी, शिल्पी नेहा तिर्की आदि मौजूद थे

    इस दौरान कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ के बीच कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का जमकर स्वागत किया गया. रैली में भारी संख्या में कार्यकर्ताओं की उपस्थिति ने पार्टी के उत्साह को और मजबूती दी।