Month: December 2024

  • झारखंड में इको टूरिज्म सीएम हेमंत सोरेन ने दिए अहम निर्देश

    झारखंड में इको टूरिज्म सीएम हेमंत सोरेन ने दिए अहम निर्देश

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट …………………
    झारखंड, जो अपनी घनी हरियाली और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जाना जाता है, अब इको टूरिज्म के क्षेत्र में एक नई पहचान बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोमवार को झारखंड मंत्रालय में एक अहम बैठक की, जिसमें इको टूरिज्म के विकास पर विस्तृत चर्चा हुई।  मुख्य सचिव अलका तिवारी, वन पर्यावरण विभाग के सचिव अबू बकर सिद्दीकी, और पर्यटन विभाग के सचिव मनोज कुमार की मौजूदगी में मुख्यमंत्री ने झारखंड में इको टूरिज्म की अपार संभावनाओं को रेखांकित किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि राज्य में ऐसे स्थलों की पहचान करें जहां इको टूरिज्म को विकसित किया जा सके।

    प्रकृति और रोजगार का होगा संगम। 
    मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा, “इको टूरिज्म को इस तरह से विकसित किया जाए कि न केवल झारखंड की प्राकृतिक धरोहर संरक्षित रहे, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा हों।” मुख्यमंत्री ने वन पर्यावरण और पर्यटन विभाग को आपसी समन्वय के साथ एक ठोस कार्य योजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि झारखंड की प्राकृतिक सुंदरता को देश और दुनिया के सामने लाने का यह बेहतरीन मौका है।

    अन्य राज्यों और देशों के मॉडल से सीखने पर जोर। 
    मुख्यमंत्री सोरेन ने अधिकारियों से यह भी कहा कि देश के उन राज्यों या विदेशों का अध्ययन करें, जहां इको टूरिज्म के क्षेत्र में बेहतरीन कार्य हुआ है। उन्होंने उदाहरणों से सीखकर झारखंड में अंतरराष्ट्रीय स्तर का इको टूरिज्म विकसित करने की बात कही।

    वैश्विक मानचित्र पर झारखंड की पहचान। 
    मुख्यमंत्री का कहना था कि राज्य में इको टूरिज्म को बढ़ावा देने से झारखंड की प्राकृतिक सुंदरता को एक वैश्विक पहचान मिलेगी। उन्होंने वन विभाग और पर्यटन विभाग से प्रतिबद्धता के साथ इस दिशा में कार्य करने को कहा।

    झारखंड, जहां प्राकृतिक संसाधनों और विविधता की कोई कमी नहीं है, अब इको टूरिज्म के जरिए न केवल अपनी धरोहर को संरक्षित करने बल्कि उसे दुनिया के सामने लाने के लिए पूरी तरह तैयार है। आने वाले समय में यह पहल राज्य की अर्थव्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण, दोनों के लिए मील का पत्थर साबित हो सकती है।

  • ‘जीनत’ का रोमांचक सफर खत्म, पश्चिम बंगाल के बांकुरा में पकड़ी गई

    ‘जीनत’ का रोमांचक सफर खत्म, पश्चिम बंगाल के बांकुरा में पकड़ी गई

    ओडिशा के टाइगर रिजर्व  की बाघिन ‘जीनत’, जो बीते कई दिनों से  सुर्खियों में थी, आखिरकार रविवार को पश्चिम बंगाल के बांकुरा में पकड़ ली गई। 21 दिनों तक तीन राज्यों—ओडिशा, झारखंड और पश्चिम बंगाल—में लगभग 300 किलोमीटर की यात्रा कर, जीनत ने वन विभाग की नींद उड़ा दी। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस बड़ी खबर को साझा करते हुए एक वीडियो ट्वीट किया। माना जा रहा है कि बाघिन को कुछ समय निगरानी में रखा जाएगा और फिर उसे वापस ओडिशा के टाइगर रिजर्व भेजा जाएगा।

    कैसे पकड़ी गई जीनत?
    जीनत के पकड़े जाने का ऑपरेशन किसी रोमांचक फिल्म से कम नहीं था। मुख्य वन संरक्षक देबल रॉय ने बताया कि शनिवार रात तक जीनत गोपालपुर के जंगल में थी। उसे धीरे-धीरे जालों से घेरा गया। रविवार तड़के 1:20 बजे उसे बेहोशी का इंजेक्शन दिया गया, लेकिन वह पूरी तरह बेहोश नहीं हुई। अंततः रविवार शाम 4:09 बजे एक और डार्ट शॉट ने अपना काम कर दिखाया। रॉय ने कहा, “जीनत काफी उत्तेजित थी, इसलिए उसे बेहोश करने में बार-बार परेशानी हो रही थी। फिलहाल उसे आराम दिया गया है, और तीन पशु चिकित्सक उसकी निगरानी कर रहे हैं।”

     ‘मेहमान’ से जंगल की ‘राहगीर’
    ज़ीनत  को कुछ ही समय पहले महाराष्ट्र के ताडोबा-अंधारी टाइगर रिजर्व (टीएटीआर) सेओडिशा के सिमिलिपाल लाया गया था। लेकिन ऐसा लगता है कि सिमिलिपाल का जंगल उसे भा नहीं पाया। वहां से निकलकर जीनत ने झारखंड और फिर पश्चिम बंगाल के घने जंगलों का रुख किया।जीनत ने 27 दिसंबर को बंदवान से मनबाजार ब्लॉक के जंगलों तक का 15 किलोमीटर का सफर तय किया। वन विभाग ने उसके हर कदम पर नजर रखी, लेकिन उसे पकड़ने में पसीने छूट गए।

    अब क्या होगा जीनत का?
    वन्यजीव अधिकारियों के मुताबिक, जीनत को फिलहाल अस्थायी आवास में रखा जाएगा। उसकी स्वास्थ्य जांच के बाद उसे वापस सिमिलिपाल भेजने का निर्णय लिया जाएगा।

    जंगल की इस ‘राहगीर’ का सफर भले ही खत्म हो गया हो, लेकिन उसकी कहानी ने हमें यह जरूर सिखाया कि जंगल के जानवरों की अपनी दुनिया, अपनी चुनौतियां होती हैं।

  • झारखंड  शिक्षकों के ट्रांसफर नियमों में होगा सुधार-मंत्री

    झारखंड  शिक्षकों के ट्रांसफर नियमों में होगा सुधार-मंत्री

    झारखंड के शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन कहा है कि  शिक्षक ट्रांसफर नियमों में सुधार  किया जाएगा और  जनजातीय भाषाओं में शिक्षकों की बहाली की जाएगी ।

    शिक्षकों के ट्रांसफर नियमों में बदलाव। 

    शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य में शिक्षकों के ट्रांसफर से जुड़े नियमों में बदलाव किया जाएगा। यह कदम शिक्षकों की गृह जिले में तैनाती को सरल बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है। उन्होंने कहा, “वर्तमान नियमों की वजह से म्यूचुअल ट्रांसफर और अन्य स्थानांतरण प्रक्रियाएं अटक गई हैं। शिक्षकों से लगातार मिल रही शिकायतों को देखते हुए नियमों की समीक्षा की जा रही है।”

    2022 के नियमों में क्या थे बदलाव?

    वर्ष 2022 में अंतर-जिला स्थानांतरण के लिए उम्र, तैनाती क्षेत्र और प्राथमिकता के आधार पर अंक तय किए गए थे। लेकिन अब इन प्रावधानों को और अधिक व्यावहारिक बनाने की तैयारी है। विशेष रूप से महिला शिक्षकों और गंभीर बीमारियों से पीड़ित शिक्षकों के लिए प्राथमिकताओं को बदला जाएगा।

    सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस में सुरक्षा और रखरखाव।

    शिक्षा मंत्री ने सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस की सुरक्षा पर जोर दिया। उन्होंने पाया कि स्कूलों में सुरक्षाकर्मी और माली की कमी है। हर स्कूल में दो सिक्योरिटी गार्ड और एक माली की बहाली की जाएगी। यह प्रक्रिया आउटसोर्सिंग के माध्यम से जल्द शुरू होगी।

    गांव से शहर तक ‘प्रतिनियोजन’ की राजनीति

    गांव के स्कूलों में तैनात कई शिक्षकों ने सेटिंग-गेटिंग के जरिए शहरों में प्रतिनियोजन करा लिया है। मंत्री ने इसे शिक्षा तंत्र के साथ धोखा बताते हुए कहा, “ऐसे शिक्षकों की सूची बनाकर उनका प्रतिनियोजन रद्द किया जाएगा।”

    10,000 शिक्षकों की होगी नियुक्ति: जनजातीय भाषाओं में नई पहल

    झारखंड के प्राथमिक विद्यालयों में जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं में शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी। नौ जनजातीय और छह क्षेत्रीय भाषाओं में 10,000 शिक्षक बहाल होंगे।

    झारखंड की शिक्षा का भविष्य: उम्मीद या सवाल?

    रामदास सोरेन की इन घोषणाओं से झारखंड के शिक्षा तंत्र में सुधार की उम्मीद जगी है। लेकिन सवाल यह है कि क्या ये सुधार केवल कागजों तक सीमित रह जाएंगे, या फिर यह वाकई झारखंड के शिक्षा तंत्र में बदलाव लाने में सफल होंगे?

  • पटना: BPSC परीक्षा विवाद पर राजनीति और प्रदर्शन का संग्राम

    पटना: BPSC परीक्षा विवाद पर राजनीति और प्रदर्शन का संग्राम

    परवेज़ आलम की  विश्लेषणात्मक रिपोर्ट ………..
    पटना की सड़कों पर गूंजते नारों और गांधी मैदान की दीवारों पर गिरी बैरिकेडिंग ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है: क्या छात्रों की आवाज़ें राजनीति के गलियारों में गुम हो जाएंगी?

    प्रदर्शन के पीछे की कहानी। 
    13 दिसंबर 2024 को हुई 70वीं बीपीएससी प्रीलिम्स परीक्षा से उपजा विवाद अब सड़कों पर उतर आया है। बापू केंद्र पर पेपर देरी से मिलने के आरोपों ने अभ्यर्थियों को आक्रोशित कर दिया। बीपीएससी ने परीक्षा को आंशिक रूप से रद्द करते हुए 4 जनवरी को फिर से परीक्षा कराने का आदेश दिया। लेकिन छात्रों की मांग है कि परीक्षा को पूरी तरह रद्द किया जाए।

    गांधी मैदान बना ‘संघर्ष का मंच’। 
    रविवार को अभ्यर्थियों ने गांधी मैदान में प्रदर्शन किया। इस मार्च ने प्रशासन के पसीने छुड़ा दिए। बिना अनुमति प्रदर्शन करने पर प्रशासन ने सख्ती दिखाई। बैरिकेडिंग तोड़कर अभ्यर्थी मैदान में घुस गए, जिससे स्थिति बेकाबू हो गई। गांधी मैदान में प्रदर्शन के खिलाफ प्रशांत किशोर समेत 700 लोगों पर प्राथमिकी दर्ज की गयी है। बीपीएससी अभ्यर्थियों का प्रदर्शन को लेकर पटना डीएम डॉ चंद्रशेखर सिंह ने मीडिया को बताया कि “गांधी मैदान में प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गयी थी। इसके बावजूद अभ्यर्थी गांधी मैदान में जमाहुए थे।”

    लाठीचार्ज और नाराजगी। 
    प्रदर्शनकारियों की भीड़ जब सीएम हाउस की ओर बढ़ी, तो पुलिस ने लाठीचार्ज किया। लेकिन बवाल तब और बढ़ गया जब पुलिस ने माइक पर ऐलान किया, “आपके नेता (प्रशांत किशोर) लौट चुके हैं। अब आप भी लौट जाइए।” प्रदर्शनकारी उग्र हो गए और प्रशांत किशोर पर राजनीतिक लाभ के लिए छात्रों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया।

    प्रशांत किशोर के पांच सवाल
    प्रशांत किशोर ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार के खिलाफ पांच मांगें रखीं:

    1. बीपीएससी पीटी परीक्षा को रद्द कर फिर से आयोजित किया जाए।
    2. अनियमितताओं की न्यायिक जांच हो।
    3. छात्रों पर दर्ज मुकदमे वापस लिए जाएं।
    4. लाठीचार्ज के आदेश देने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई हो।
    5. आत्महत्या करने वाले छात्र सोनू यादव के परिजनों को न्याय मिले।

    उन्होंने कहा, “अगर सरकार बात नहीं मानेगी, तो 2 जनवरी से अनिश्चितकालीन अनशन शुरू करूंगा।”

    सियासी बयानबाजी और सवाल। 
    प्रदर्शन के बीच प्रशांत किशोर का छात्रों के साथ मुलाकात का वीडियो वायरल हुआ। जहां पप्पू यादव ने उन पर राजनीति करने का आरोप लगाया, वहीं तेजस्वी यादव ने कहा, “प्रशांत किशोर छात्रों के आंदोलन को भटका रहे हैं।”

    छात्रों की परीक्षा या राजनीति की परीक्षा?
    पटना की सड़कों पर निकला यह मार्च केवल छात्रों के भविष्य का सवाल नहीं है। यह उस राजनीतिक सर्कस का हिस्सा बनता जा रहा है, जहां मुद्दे गुम हो जाते हैं और मंच नेताओं का हो जाता है।

    क्या सरकार और प्रशासन छात्रों की आवाज सुन पाएंगे? या यह प्रदर्शन भी सिर्फ राजनीति की गूंज बनकर रह जाएगा?

  • झारखंड : बांग्लादेशी घुसपैठ के मुद्दे पर चौंकाने वाला खुलासा!

    झारखंड : बांग्लादेशी घुसपैठ के मुद्दे पर चौंकाने वाला खुलासा!

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट ………….

    बंगला देशी घुसपैठ के मुद्दे पर चौंकाने वाला खुलासा हुआ है । केंद्रीय गृह मंत्रालय  ने एक RTI  के जबाब में  साफ कहा कि उनके पास अवैध रूप से रह रहे बंगला  नागरिकों का कोई भी आंकड़ा मौजूद नहीं है। ये जानकारी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों या ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन के पास हो सकती है।

    सवालों की फेहरिस्त और मंत्रालय का जवाब। 
    झारखंड जनाधिकार महासभा से जुड़े सिरज दत्ता ने आरटीआई के जरिए गृह मंत्रालय से कई सवाल पूछे थे। इनमें हर राज्य में रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों की संख्या, ‘लव जिहाद’ और ‘लैंड जिहाद’ जैसे मामलों की जानकारी, और इन पर उठाए गए प्रशासनिक कदमों के बारे में पूछा गया था। जवाब में मंत्रालय ने कहा कि विदेशी अधिनियम 1939 और नागरिकता अधिनियम 1955 के तहत यह मामला आता है। लेकिन इस पर कोई केंद्रीय डाटा मौजूद नहीं है।

    राजनीतिक गलियारे में भूचाल। 
    इस खुलासे के बाद झारखंड की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विधानसभा चुनावों के दौरान भाजपा ने बांग्लादेशी घुसपैठ को जोरदार तरीके से उठाया था। पार्टी ने राज्य सरकार पर इसे रोकने में नाकाम रहने का आरोप लगाया, जबकि झामुमो और उसके सहयोगियों ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। अब भाजपा ने इस मुद्दे पर आंदोलन की धमकी दी है, जबकि झामुमो ने इसे समाज में नफरत फैलाने की साजिश बताया।

    हाईकोर्ट का आदेश और सरकार का रुख। 
    झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को इस मामले में फैक्ट फाइंडिंग कमेटी बनाने का आदेश दिया था। लेकिन राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में इसे चुनौती दी। वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने तर्क दिया कि झारखंड सीमावर्ती राज्य नहीं है और हाईकोर्ट का आदेश राज्य सरकार की स्वायत्तता में दखल है।

    राजनीतिक बयानबाजी या सुलझती गुत्थी?
    दानियल दानिश की जनहित याचिका से शुरू हुए इस विवाद ने अब नया मोड़ ले लिया है। गृह मंत्रालय के जवाब ने बांग्लादेशी घुसपैठ के दावों पर सवालिया निशान लगा दिया है। अब देखना होगा कि यह मामला राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रहता है या सच्चाई सामने लाने के लिए ठोस कदम उठाए जाते हैं।

    नफरत की राजनीति और आंकड़ों की चुप्पी।
    क्या बांग्लादेशी घुसपैठ वाकई एक बड़ी समस्या है या सिर्फ चुनावी भाषणों का मसाला? आंकड़ों की गैर-मौजूदगी और मंत्रालय का जवाब एक बार फिर इस मुद्दे पर राजनीतिक एजेंडे की परतें खोलता है। लेकिन जवाबदेही किसकी है? आने वाले समय में यह सवाल झारखंड और देश की राजनीति के केंद्र में रहेगा।

  • पटना मे छात्रों पर लाठी चार्ज : BPSC परीक्षा में गड़बडी के खिलाफ कर रहे थे प्रदर्शन

    पटना मे छात्रों पर लाठी चार्ज : BPSC परीक्षा में गड़बडी के खिलाफ कर रहे थे प्रदर्शन

    पटना: बिहार की राजधानी पटना मे 70वीं बीपीएससी परीक्षा दोबारा कराने की मांग को लेकर रविवार को पटना के गांधी मैदान में छात्र संसद हुई। जिसमें जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर भी शामिल हुए। जिसके बाद मार्च निकालने की सहमति बनी। गांधी मैदान से सीएम आवास तक मार्च निकलना था। जिसमें पीके भी शामिल थे। लेकिन जेपी गोलंबर के पास मार्च को रोक लिया गया है। भीड़ को तितर वितर करने के लिए पुलिस ने बल प्रयोग भी किया  छात्रों की मांग है कि दोबारा परीक्षा आयोजित कराई जाए। बीते कई दिनों से छात्र पटना के गर्दनीबाग में धरना प्रदर्शन कर रहे थे।के गांधी मैदान में बीते 15 दिनों से छात्र इकट्ठा हो रहे हैं। हाथों में तख्तियां, होठों पर नारे, और दिल में उम्मीद लिए। बीपीएससी की 70वीं परीक्षा में कथित गड़बड़ियों को लेकर छात्रों की मांग है – “परीक्षा दोबारा होनी चाहिए।”

    नीतीश कुमार का ‘शाम 4 बजे का’ लोकतंत्र.
    मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दिल्ली में हैं। पत्रकारों के सवाल पर उन्होंने जवाब दिया, “शाम 4 बजे के बाद बात करते हैं।” आप सोच रहे होंगे, 4 बजे का क्या है? क्या लोकतंत्र में जवाब का कोई टाइम टेबल होता है? या फिर यह सिर्फ वक़्त को टालने की राजनीति है?

    गांधी मैदान की छात्र संसद. 
    वहीं पटना में गांधी मैदान का माहौल बिल्कुल अलग है। यहां छात्र संसद हो रही है। हजारों की संख्या में जुटे अभ्यर्थी अपने अधिकार की लड़ाई लड़ रहे हैं। इस संसद का नेतृत्व खुद छात्रों के हाथ में है। इस बार कोई बड़ा नेता मंच पर नहीं, बल्कि मंच के नीचे छात्रों के बीच खड़ा है।

    प्रशांत किशोर, जिन्हें आमतौर पर रणनीतिकार के रूप में देखा जाता है, यहां समर्थन में मौजूद हैं। वह कहते हैं, “यह आंदोलन छात्रों का है, इसका नेतृत्व भी छात्रों को ही करना चाहिए। हम तो बस उनके साथ खड़े हैं।”

    बिहार की राजनीति: एक नया मोड़. 
    इस पूरे प्रकरण पर विपक्ष ने सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ी। तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री को चिट्ठी लिखी, लेकिन चिट्ठी का जवाब अभी बाकी है। दूसरी ओर डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी कहते हैं, “अगर परीक्षा में गड़बड़ी का कोई सबूत लाकर दिखा दे, तो 2 मिनट में फैसला होगा।” लेकिन सवाल यह है – क्या गड़बड़ी के सबूत देने की जिम्मेदारी सिर्फ छात्रों की है?

    दिल्ली में नीतीश, पटना में छात्र, और सियासत बीच में अटकी. 
    नीतीश कुमार दिल्ली में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के परिवार से मिलने जा सकते हैं। गांधी मैदान में छात्र अपनी लड़ाई लड़ रहे हैं। पटना और दिल्ली की इस दूरी में, सवाल यह उठता है कि छात्रों के सपनों की यह लड़ाई कब तक सियासत के गलियारों में भटकेगी?

    “गांधी मैदान का कोना-कोना गवाह है कि यहां लड़ाई किसी नौकरी की नहीं, बल्कि उस सिस्टम की है जिसने छात्रों को सिर्फ प्रदर्शनकारी बना दिया है। सवाल सिर्फ 70वीं बीपीएससी की परीक्षा का नहीं है, सवाल यह है कि क्या वाकई इस देश का युवा खुद को अपनी सरकार के सामने सुना सकता है? या फिर लोकतंत्र में सवाल करने का टाइम टेबल भी ‘शाम 4 बजे के बाद’ तक सीमित है।”

  • 2024 :कल्पना सोरेन की सक्रिय राजनीति में हुई धमाकेदार एंट्री हमेशा याद रखा जाएगा

    2024 :कल्पना सोरेन की सक्रिय राजनीति में हुई धमाकेदार एंट्री हमेशा याद रखा जाएगा

    परवेज़ आलम की विश्लेषणात्मक  रिपोर्ट …………..

    झारखंड की राजनीति में वर्ष 2024 ने एक नया अध्याय लिखा। बदलाव की ऐसी बयार चली जिसने सत्ता समीकरणों को पूरी तरह से बदल दिया। लोकसभा चुनाव में बीजेपी को झटका लगा, लेकिन असली कहानी विधानसभा चुनाव के दौरान लिखी गई। इंडिया गठबंधन की ओर से कल्पना सोरेन ने मोर्चा संभाला और इतिहास रच दिया।

    हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी और कल्पना का उदय. 

    झारखंड की राजनीति में एक ऐसा मोड़ आया जब 31 जनवरी 2024 को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को ईडी ने गिरफ्तार कर लियाउस रात की कहानी कल्पना सोरेन बार-बार बताती हैं—”सोचा था, बस पूछताछ होगी, लेकिन सुबह की पहली किरण के साथ पूरा परिदृश्य बदल चुका था।”

    हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी के बाद जेएमएम के सामने सवाल खड़ा था—कौन नेतृत्व करेगा? गठबंधन के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने कल्पना सोरेन से कहा, “भाभी, भैया नहीं हैं, अब आपको ही जिम्मेदारी उठानी होगी।”

    राजनीति में कदम रखने की दास्तान। 


    कल्पना सोरेन, जो अब तक सामाजिक कार्यों और परिवार तक सीमित थीं, अचानक राजनीति के केंद्र में आ गईं। 4 मार्च 2024 को गिरिडीह में जेएमएम के स्थापना दिवस पर उन्होंने राजनीति में प्रवेश का ऐलान किया। पहली ही रैली में उनकी आंखों से आंसू छलके, लेकिन हाथ में झंडा थामे उन्होंने पार्टी को भरोसा दिलाया—“हम लड़ेगें और जीतेंगे।”

    लोकसभा चुनाव: कल्पना का असर। 

    हेमंत सोरेन की गैरमौजूदगी में कल्पना सोरेन ने इंडिया गठबंधन की कमान संभाली। धुर्वा के प्रभात तारा मैदान में उनकी रैली ने यह साफ कर दिया कि झारखंड की जनता उनके साथ है। नतीजों में इंडिया गठबंधन ने 14 में से 4 सीटें जीतीं। ये प्रदर्शन 2019 के मुकाबले दोगुना था और इसका श्रेय कल्पना की मेहनत को गया।

    गांडेय उपचुनाव: पहली जीत और बढ़ता प्रभाव। 

    लोकसभा चुनाव के साथ हुए गांडेय विधानसभा उपचुनाव में कल्पना सोरेन ने बाजी मारी। 4 जून 2024 को आए नतीजों में उन्होंने बीजेपी के दिलीप वर्मा को 27,149 वोटों से हराया। ये जीत न सिर्फ एक चुनावी आंकड़ा थी, बल्कि झारखंड में उनकी बढ़ती सियासी ताकत का सबूत भी थी।

    विधानसभा चुनाव: मैदान पर कल्पना और हेमंत की जोड़ी। 

    झारखंड विधानसभा चुनाव में हेमंत सोरेन की रिहाई के बावजूद कल्पना सोरेन गठबंधन की स्टार प्रचारक बनीं रहीं। उन्होंने 100 से अधिक सभाएं कीं और हर सभा में जनता से सीधा संवाद किया। उनकी नेतृत्व क्षमता और भावुकता ने जनता को अपने साथ जोड़ लिया।

    झारखंड की “नई शक्ति”

    कल्पना सोरेन के सियासी सफर की शुरुआत भले ही अप्रत्याशित परिस्थितियों में हुई हो, लेकिन उन्होंने साबित कर दिया कि झारखंड में बदलाव की बागडोर अब उनके हाथ में है।

    2006 से 2024 तक: कल्पना का सफर।

    ओडिशा के मयूरभंज की रहने वाली कल्पना, झारखंड के सबसे बड़े राजनीतिक परिवार की बहू बनकर आईं थीं। एक आम महिला से एक सशक्त नेता तक का उनका सफर, झारखंड की जनता के लिए प्रेरणा है।

    तो सवाल यह है कि क्या झारखंड में यह नई नारी शक्ति राज्य को एक नई दिशा दे पाएगी? जवाब वक्त देगा, लेकिन एक बात तय है—कल्पना सोरेन की कहानी झारखंड की राजनीति का वह मोड़ है, जो शायद हमेशा याद रखा जाएगा।

  • सम्मेद शिखर: भव्य स्मृति महोत्सव की धूम

    सम्मेद शिखर: भव्य स्मृति महोत्सव की धूम

    पारसनाथ [गिरिडीह ] : धार्मिक आस्था और श्रद्धा का केंद्र बना मधुबन का सम्मेद शिखर ।  आचार्य विमल सागर महाराज के समाधि स्थल पर इन दिनों भव्य स्मृति महोत्सव की धूम है। तीन दिवसीय इस आयोजन में देशभर से आए श्रद्धालु बाबा की भक्ति में मग्न हैं। जगह-जगह धार्मिक अनुष्ठान हो रहे हैं, और श्रद्धालुओं का उत्साह देखने लायक है। बता दे कि मधुबन का सम्मेद शिखर जैनियों का विश्व प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है ।

    समाधि स्थल पर श्रद्धा का सैलाब। 
    यहां 29 दिसंबर 1994 को साधना करते हुए आचार्य विमल सागर महाराज ने समाधि को प्राप्त किया था। उनकी स्मृति में भक्तों ने भव्य और आकर्षक समाधि स्थल बनाया है, जहां बाबा की प्रतिमा विराजमान है। इस समाधि स्थल को फूलों, पत्तियों और रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया है, जो श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है।

    तीन दिन का विशेष धार्मिक आयोजन। 
    स्मृति महोत्सव शुक्रवार से शुरू हुआ। इस दौरान साधु-संतों के सान्निध्य में बाबा की प्रतिमा का अभिषेक और धार्मिक विधियों का आयोजन किया गया। महाआरती और भजन संध्या, जिसमें स्थानीय और बाहरी कलाकारों ने श्रद्धालुओं को भक्ति रस में डुबो दिया।

    भक्तिभावना में लीन श्रद्धालु।
    देश के विभिन्न प्रांतों से पहुंचे श्रद्धालु बाबा की भक्ति में डूबे हुए हैं। समाधि स्थल पर श्रद्धालुओं का आना-जाना दिनभर जारी रहा। बाबा के प्रति श्रद्धा और आस्था का यह माहौल, हर किसी को अपनी ओर खींच रहा है।

    मधुबन में उत्सव जैसा माहौल। 
    स्मृति महोत्सव ने मधुबन को पूरी तरह भक्ति और उत्सव के रंग में रंग दिया है। हर कोना रोशनी और सजावट से जगमगा रहा है।

    आचार्य विमल सागर महाराज के प्रति यह अटूट आस्था और श्रद्धा, उनकी स्मृतियों को जीवंत बनाए रखने का एक प्रेरणादायक उदाहरण है। सम्मेद शिखर की यह पवित्र धरा, श्रद्धालुओं को भक्ति और शांति का अनमोल अनुभव दे रही है।

  • झारखंड: अब सड़क सुरक्षा होगी और भी मजबूत !

    झारखंड: अब सड़क सुरक्षा होगी और भी मजबूत !

    RANCHI: अब सड़क सुरक्षा होगी और भी मजबूत! झारखंड में चार पहिया, सार्वजनिक सेवा वाहन और व्यावसायिक वाहनों में ट्रैफिकिंग डिवाइस और इमरजेंसी पैनिक बटन लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। इससे न केवल सड़क दुर्घटनाओं को रोका जा सकेगा, बल्कि आपराधिक घटनाओं पर भी नज़र रखी जा सकेगी।

    क्या है खास:
    ट्रैफिकिंग डिवाइस और पैनिक बटन का एक्सेस सीधे परिवहन, ट्रैफिक और सड़क सुरक्षा अधिकारियों के पास रहेगा। इसका मतलब है कि किसी भी आपात स्थिति में वाहन की लाइव जानकारी तुरंत मिल सकेगी।

    नियम की खास बातें:

    • 1 जनवरी 2019 से पहले बने पुराने वाहनों में भी ये डिवाइस लगवाना अनिवार्य होगा।
    • वाहन निर्माता कंपनियां अब इन उपकरणों को फिट करके ही अपने वाहन बेचेंगी।

    सरकार ने उठाए ठोस कदम:
    सड़क सुरक्षा की लीड एजेंसियां वाहन निर्माता कंपनियों से सीधा संवाद करेंगी, ताकि इस नए नियम को सुचारू रूप से लागू किया जा सके। परिवहन विभाग ने इस पर अधिसूचना जारी कर दी है और अगले आदेश के बाद इसे लागू किया जाएगा।

    वाहन मालिकों की जिम्मेदारी:
    वाहन मालिकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके चालक ट्रैफिकिंग डिवाइस और पैनिक बटन का सही उपयोग जानें। छेड़छाड़ करने पर सख्त कार्रवाई होगी। अगर डिवाइस में कोई तकनीकी समस्या आती है, तो उसे ठीक कराना अनिवार्य होगा।

    स्कूल बसों में पहले से मौजूद ट्रैकिंग सिस्टम:
    वर्तमान में स्कूल बसों में ट्रैफिकिंग डिवाइस पहले से ही लगाया गया है, जिससे उनकी निगरानी की जा रही है। यह कदम बाकी वाहनों के लिए भी सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा बदलाव लाएगा।

    झारखंड सरकार का यह कदम सड़क सुरक्षा को एक नई दिशा देगा।

  • भारतीय रेलवे: ग्रुप D पदों की भर्ती प्रक्रिया शुरू,32,000 पद

    भारतीय रेलवे: ग्रुप D पदों की भर्ती प्रक्रिया शुरू,32,000 पद

    भारतीय रेलवे ने ग्रुप D पदों की भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिसमेंपदों पर आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। यह प्रक्रिया रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड (RRB) द्वारा संचालित की जाएगी, और इसकी आधिकारिक जानकारी रोजगार समाचार में प्रकाशित की गई है।

    महत्वपूर्ण जानकारी:

    1. पद का नाम: रेलवे ग्रुप D (तकनीकी और गैर-तकनीकी विभिन्न पद)
    2. कुल पद: लगभग 32,000
    3. शैक्षणिक योग्यता: न्यूनतम 10वीं कक्षा पास या ITI प्रमाणपत्र आवश्यक।
    4. आयु सीमा: सामान्यत: 18 से 33 वर्ष (आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों को आयु में छूट मिलेगी)।
    5. चयन प्रक्रिया:
      • चरण 1: कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT)
      • चरण 2: शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET)
      • चरण 3: दस्तावेज़ सत्यापन और चिकित्सा जांच

    आवेदन प्रक्रिया:
    आवेदन ऑनलाइन माध्यम से किए जाएंगे। इसके लिए रेलवे की आधिकारिक वेबसाइट पर जल्द ही प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है। आवेदन शुल्क सामान्य और ओबीसी वर्ग के लिए लागू होगा, जबकि SC/ST/PWD वर्ग के उम्मीदवारों को शुल्क में छूट प्रदान की जाएगी।

    तैयारी के सुझाव:

    1. पाठ्यक्रम की जानकारी: उम्मीदवारों को परीक्षा का सिलेबस और पैटर्न अच्छे से समझना चाहिए। इसमें सामान्य ज्ञान, गणित, सामान्य बुद्धिमत्ता और विज्ञान से जुड़े प्रश्न शामिल होंगे।
    2. समय का प्रबंधन: नियमित अध्ययन के लिए एक व्यवस्थित टाइम टेबल बनाएं।
    3. मॉक टेस्ट: मॉक टेस्ट का अभ्यास करने से परीक्षा की तैयारी और बेहतर हो सकती है।

    अधिक जानकारी और अपडेट के लिए संबंधित रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड की वेबसाइट या रोजगार समाचार का नियमित रूप से अवलोकन करें।