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  • गजराज के कहर से खौफजदा ग्रामीण, मंत्री ने दिया मदद

    गिरिडीह जिले के पीरटांड़ प्रखंड में जंगली हाथियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। हर बार की तरह इस बार भी गजराज ने अपने रास्ते में आने वाले हर चीज को बर्बाद कर दिया। शनिवार देर रात जंगली हाथियों का झुंड पीरटांड़ के पालगंज पंचायत के सुगवाटांड़ टोला में घुस आया।
    हाथियों ने गीता देवी, विलसी देवी और कौशल्या देवी के घरों को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया।
    हाथियों ने घर में रखा धान, अनाज और खेतों में लगी आलू की फसल को रौंद डाला।
    हाथियों के झुंड की यह हरकत गांव के लोगों के लिए डर और परेशानी का कारण बन ई।
    कहां से आए ये हाथी?
    घटना से पहले, हाथियों का झुंड जलेबिया घाटी के पास देखा गया था। वन विभाग नजर बनाए हुए था, लेकिन देर रात ये झुंड जंगल के रास्ते सुगवाटांड़ पहुंच गया।
    मंत्री का दौरा:
    घटना की सूचना मिलते ही झारखंड सरकार के मंत्री व गिरिडीह विधायक सुदिव्य कुमार सोनू घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने पीड़ित परिवार से मुलाकात  हाथियों द्वारा क्षतिग्रस्त किये गए तीन घरों के परिवार को दस दस हजार का चेक और एक एक पेटी चावल दिया। उन्होंने पीड़ित परिवार को हरसंभव मदद का आश्वासन दिया। वन विभाग ने कहा है कि हाथियों को भगाने के लिए बांकुड़ा से विशेषज्ञ टीम बुलाई जा रही है। यह पहली घटना नहीं है। बदगांव पंचायत के बसगदवा टोला में हाथियों ने दो घरों को क्षतिग्रस्त किया था।
    32 हाथियों का झुंड लेड़वा, मंझलाडीह और पथलघटिया में कई किसानों के खलिहान पहुंचकर धान चट कर गया। पीड़ित किसानों और स्थानीय मुखिया ने वन विभाग से क्षतिपूर्ति मुआवजे की मांग की है।
    सुरक्षा की गुहार:
    जंगल और पहाड़ों के नजदीक बसे गांवों के लोग हाथियों के डर से अपने घरों में भी सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं।
    क्न विभाग को ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए पुख्ता इंतजाम करने चाहिए? जो अभी तक हो नहीं पाया है ।

     

  • विधिक सहायता केंद्र की पहल से बीमार वृद्ध को मिला त्वरित इलाज

    गिरिडीह में चल रहे 90 दिवसीय जागरूकता एवं आउटरीच कार्यक्रम के दौरान एक मानवीय पहल की, जिसने यह साबित कर दिया कि सामाजिक जिम्मेदारी के तहत मदद हमेशा सबसे पहले आती है।

    क्या है पूरा मामला?

    गिरिडीह जिले में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार अरविंद कुमार पांडेय के नेतृत्व में 90 दिवसीय जागरूकता एवं आउटरीच कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत डोर-टू-डोर कार्यक्रम और विधिक सहायता केंद्रों में लगातार जागरूकता फैलाने का काम हो रहा है।

    वृद्ध की तबीयत बिगड़ी, मिला तुरंत इलाज

    इस अभियान के दौरान स्नेह दीप वृद्धाश्रम गिरिडीह में रह रहे सुरेंद्र सिंह, जिनका मूल निवास औरंगाबाद के भवानीपुर गांव में है, अचानक बीमार पड़ गए। डोर-टू-डोर टीम को जैसे ही इस बात की जानकारी मिली, उन्होंने त्वरित कार्रवाई शुरू की। टीम ने डॉ. शिव प्रसाद मिश्रा सिविल सर्जन गिरिडीह, से संपर्क किया। सिविल सर्जन के निर्देश पर एंबुलेंस तुरंत वृद्धाश्रम पहुंचाई गई।

    पीएलवी (पैरा लीगल वालंटियर) श्रीमती रंजना सिन्हा और श्रीमती उषा कुमारी ने बीमार सुरेंद्र सिंह को एंबुलेंस के माध्यम से सदर अस्पताल गिरिडीह पहुंचाया।
    इलाज में सहयोग देने वाले श्रीमती सीमा देवी, गुफरान आलम, मुकेश कुमार वर्मा का योगदान सराहनीय रहा।

    मानवीयता का उत्कृष्ट उदाहरण

    यह घटना न केवल जागरूकता अभियान की सफलता को दिखाती है, बल्कि यह भी बताती है कि जब संस्थाएं और लोग मिलकर काम करते हैं, तो किसी भी समस्या का समाधान तुरंत किया जा सकता है।

     

  • मंईयां सम्मान योजना के अयोग्य लाभुकों पर गिरी गाज,जानिए कब मिलेगा 2500 रुपए

    RANCHI: झारखंड की महिलाओं के लिए मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना का बढ़ा हुआ लाभ क्रिसमस से पहले उनके खातों में पहुंचने वाला है। लेकिन हर किसी को यह राहत नहीं मिलेगी। सामाजिक सुरक्षा विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि अयोग्य लाभुकों की पहचान कर उनके खातों में यह राशि रोक दी जाएगी।

    स्क्रीनिंग शुरू, अयोग्य लाभुकों पर शिकंजा। 

    राज्यभर में मंईयां सम्मान योजना के तहत 50 लाख से अधिक महिलाओं को 2500 रुपये की सहायता राशि मिलनी है। लेकिन कई महिलाएं जो इस योजना के दायरे में नहीं आतीं, फिर भी इसका लाभ ले रही थीं। ऐसे मामलों की स्क्रीनिंग शुरू कर दी गई है।

    सामाजिक सुरक्षा विभाग ने सभी उपायुक्तों को निर्देश देते हुए कहा है कि:

    1. गलत तरीके से लाभ लेने वालों से वसूली की जाएगी।
    2. जिन्हें पहले से किसी अन्य सामाजिक सुरक्षा पेंशन का लाभ मिल रहा है, उन्हें इस योजना से बाहर किया जाएगा।
    3. अयोग्य लाभुकों पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

    किन्हें नहीं मिलेगा मंईयां सम्मान योजना का लाभ?

    निम्नलिखित श्रेणियों की महिलाओं को योजना का लाभ नहीं मिलेगा:

    • आयकर दाता महिलाएं।
    • सरकारी कर्मी या रिटायर सरकारी कर्मियों के परिवार की महिलाएं।
    • ईपीएफओ धारक या उनके परिवार के सदस्य।
    • झारखंड से बाहर की निवासी महिलाएं।
    • एक से अधिक जिलों में लाभ लेने वाले लाभुक।

    कैबिनेट की मुहर और योजना का विस्तार। 

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विधानसभा चुनाव से पहले इस योजना की राशि को 1000 रुपये से बढ़ाकर 2500 रुपये करने का ऐलान किया था। कैबिनेट में इस प्रस्ताव पर मुहर लगने के बाद अब इसे लागू किया जा रहा है।

    सख्ती से हो रही जांच। 

    विभाग ने सभी जिलों में स्क्रीनिंग प्रक्रिया तेज कर दी है। यदि जांच के दौरान कोई अयोग्य लाभुक पाया गया, तो उसकी राशि वापस ली जाएगी और उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    महिलाओं को मिलेगा सीधा लाभ। 

    मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना के तहत योग्य लाभुक महिलाओं के खातों में यह राशि जल्द ही ट्रांसफर की जाएगी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन खुद एक कार्यक्रम के दौरान इस राशि को जारी करेंगे।

  • जंगल में अपराध की साजिश रचते 6 अपराधी गिरफ्तार, देसी कट्टे बरामद

    गिरिडीह:  गिरिडीह जिले के बिरनी थाना क्षेत्र में पुलिस ने अपराध की योजना बना रहे छह अपराधियों को गिरफ्तार किया है। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने उनके पास से दो देसी कट्टे भी बरामद किए।

    गुप्त सूचना पर पुलिस की कार्रवाई. 

    गिरिडीह एसपी  डॉ. विमल कुमार ने रविवार को मीडिया को बताया कि घुज्जी जंगल में अपराधियों की गतिविधियों की गुप्त सूचना मिली थी। इस सूचना के आधार पर एसडीपीओ  धनंजय राम की अगुवाई में एक विशेष टीम का गठन किया गया। टीम ने तेजी से कार्रवाई करते हुए अपराधियों को मौके पर धर दबोचा।

    गिरफ्तार अपराधियों की पहचान। 

    गिरफ्तार अपराधियों में शामिल हैं:

    • मो. समीर अंसारी, रेहान अंसारी, और रिजवान अंसारी (धनवार )
    • फणीभूषण साव और शिबू साव (बिरनी )
    • सिराजुद्दीन अंसारी (लालबाजार,धनवार)

    बड़ी घटना को अंजाम देने की तैयारी। 

    पुलिस पूछताछ में अपराधियों ने स्वीकार किया कि वे इलाके में किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की योजना बना रहे थे।

    आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज। 

    पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ आर्म्स एक्ट और अन्य धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है। फिलहाल, उनसे पूछताछ जारी है ताकि अपराध की पूरी साजिश का खुलासा हो सके।

    एसपी की सराहना। 

    पुलिस अधीक्षक डॉ. विमल कुमार ने टीम की तत्परता और कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा, “गिरिडीह पुलिस अपराध पर नियंत्रण के लिए प्रतिबद्ध है। यह सफलता टीमवर्क और हमारी सतर्कता का परिणाम है।”

    इस कार्रवाई से इलाके में पुलिस की सख्ती और अपराधियों में खौफ का संदेश गया है।

  • खौफनाक हत्या कांड: गिरिडीह में जनता का गुस्सा चरम पर

    गिरिडीह : गिरिडीह के मुफ्फसिल थाना क्षेत्र में एक युवक की निर्मम हत्या ने इलाके में उबाल ला दिया है। धारदार हथियारों से हमला कर दामोदर यादव की हत्या कर दी गई, जिसके बाद पूरे इलाके में आक्रोश फैल गया है।

    गांव का गुस्सा पुलिस के दरवाजे पर.
    हत्या की खबर के बाद कबरीबाद-चुंजका क्षेत्र के सैकड़ों ग्रामीण मुफ्फसिल थाना पहुंचे। गुस्से से लाल लोगों ने मुख्य सड़क पर जाम लगा दिया और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। भीड़ में महिलाएं और बच्चे भी थे, जो न्याय की मांग कर रहे थे।

    मांग साफ है: आरोपी को फांसी दो।
    ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जब तक दोषियों को सख्त सजा नहीं दी जाती, उनका विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।

    हमले की खौफनाक तस्वीर।
    दामोदर यादव पर 20 से 25 युवकों के झुंड ने कबरीबाद माइंस के पास धारदार हथियारों से हमला किया। इस बर्बर हमले में गंभीर रूप से घायल दामोदर ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।

    पुलिस ने घटना के तुरंत बाद कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को मौके से गिरफ्तार किया। अब तक 11 आरोपियों को हिरासत में लिया जा चुका है, और अन्य की तलाश में छापेमारी जारी है।\

    जयराम महतो की इंट्री । 

    घटना की जानकारी मिलते ही डुमरी के विधायक जय राम महतो भी गिरिडीह पहुंचे और मामले की जानकारी ली और पुलिस प्रशासन से बात कर दोषियों के खिलाफ सख्त कारवाई की मांग की ।

    सुरक्षा का दावा, लेकिन सवाल बरकरार। 
    हत्या के बाद मुफ्फसिल थाना क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। एसडीपीओ जितवाहन उरांव और डीएसपी नीरज कुमार सिंह के नेतृत्व में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। हालांकि, घटना ने इलाके में कानून व्यवस्था को लेकर गहरी चिंता पैदा कर दी है।

    ग्रामीणों का कहना है, “अगर पुलिस सतर्क होती तो यह घटना नहीं होती। हमें सुरक्षा चाहिए, सिर्फ दावे नहीं।”

    सामाजिक ताने-बाने पर असर। 
    इस निर्मम हत्या ने गिरिडीह के सामाजिक ताने-बाने को झकझोर कर रख दिया है। जहां एक ओर जनता का प्रशासन पर भरोसा कमजोर हुआ है, वहीं दूसरी ओर ऐसी घटनाओं ने भय और असुरक्षा का माहौल बना दिया है।

    पुलिस प्रशासन पर अब यह दबाव है कि वह दोषियों को जल्द से जल्द सजा दिलाए और इलाके में सुरक्षा का भरोसा बहाल करे।

  • तोपचांची झील बनेगा झारखंड का प्रमुख पर्यटन केंद्र, 76 करोड़ की आएगी लागत -मंत्री सुदिव्य कुमार

    धनबाद: झारखंड के धनबाद जिले में स्थित ऐतिहासिक तोपचांची झील जल्द ही आधुनिक पर्यटन स्थल के रूप में चमकेगी। नगर विकास एवं पर्यटन मंत्री सुदिव्य कुमार ने शनिवार को झील का निरीक्षण करते हुए इसकी नई परियोजना का खुलासा किया। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत झील का कायाकल्प करने के लिए 76 करोड़ रुपये की लागत निर्धारित की गई है, जो बढ़कर 100 करोड़ रुपये तक जा सकती है।

    झील को मिलेगी नई पहचान।
    झील को टूरिस्ट प्लेस के रूप में विकसित करने के लिए विस्तृत ब्लू प्रिंट तैयार कर लिया गया है। मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू  ने बताया कि परियोजना में आधुनिक स्ट्रीट लाइट, रिसॉर्ट, स्विमिंग पूल, और पर्यटकों के रहने के लिए उत्कृष्ट सुविधाएं शामिल होंगी। इसके साथ ही झील के चारों ओर थीम पार्क, वोटिंग और स्विमिंग जैसी आकर्षक सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी।

    पुराने ढांचे को तोड़कर बनेगा नया निर्माण। 
    झील के आसपास के पुराने और जर्जर भवनों को तोड़कर नए निर्माण किए जाएंगे। परियोजना से जुड़े इंजीनियरों ने मंत्री को विस्तार से बताया कि झील के चारों ओर के इलाकों को कैसे विकसित किया जाएगा। मंत्री ने लगभग एक घंटे तक ब्लू प्रिंट का निरीक्षण किया और आवश्यक निर्देश दिए।

    पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए खास। 
    मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू  ने कहा, “तोपचांची झील की प्राकृतिक सुंदरता पहले से ही आकर्षक है। इसे आधुनिक सुविधाओं से लैस कर पर्यटकों के लिए और भी आकर्षक बनाया जाएगा। इस परियोजना के तहत स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।”

    नए साल में शिलान्यास और काम की शुरुआत। 
    तोपचांची झील परियोजना को लेकर स्थानीय विधायक मथुरा प्रसाद महतो ने कहा, “नए साल में इसका शिलान्यास होगा और कार्य तेज़ी से शुरू किए जाएंगे। यह परियोजना न केवल झील की खूबसूरती को बढ़ाएगी, बल्कि क्षेत्र के आर्थिक विकास में भी अहम भूमिका निभाएगी।”

    सरकार की बड़ी योजना। 
    मंत्री ने आश्वासन दिया कि तीन महीने के भीतर सरकार इस परियोजना पर काम शुरू करेगी। तोपचांची झील के कायाकल्प से झारखंड को एक नया पर्यटन केंद्र मिलेगा, जो राज्य की पर्यटन संभावनाओं को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।

    झील का यह विकास न केवल पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा, बल्कि झारखंड के इतिहास और प्राकृतिक सुंदरता को भी जीवंत बनाएगा।

  • झारखंड में कांग्रेस का ‘आभार समागम, अमित शाह पर जमकर बरसे नेता

    रांची: झारखंड काँग्रेस के  ‘आभार समागम’  बैठक मे मुख्य फोकस अदानी मुद्दे और केंद्रीय राजनीति पर रहा ।  शनिवार को रांची मे आयोजित ‘आभार समागम’  बैठक में पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं का धन्यवाद व्यक्त किया गया। इस कार्यक्रम में प्रदेश प्रभारी गुलाम अहमद मीर, प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश, मंत्री दीपिका पांडेय सिंह, इरफान अंसारी, सुबोधकांत सहाय, अंबा प्रसाद समेत कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए।

    नेताओं ने कहा कि इंटरनेशनल एजेंसियों की सनसनीखेज रिपोर्टों ने अदानी समूह की गतिविधियों पर सवाल खड़े किए हैं। राहुल गांधी ने इस मुद्दे को संसद में उठाया, लेकिन बीजेपी ने उनकी आवाज दबाने की कोशिश की। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार अदानी मामले की जांच कराने से बच रही है और इसके लिए तमाम तरीके अपनाए जा रहे हैं।

    कार्यक्रम में बीजेपी के प्रति आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा गया कि संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर का अपमान खुद गृह मंत्री अमित शाह ने किया। यह दिखाता है कि बीजेपी का संविधान और लोकतंत्र के प्रति क्या रवैया है। नेताओं ने सवाल उठाया कि ऐसे व्यक्ति को गृह मंत्री बने रहने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने अमित शाह से इस्तीफे की मांग की।

    कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि 70 मिनट के भाषण के बावजूद गृह मंत्री ने अंबेडकर साहब पर किए गए अपमान का जिक्र नहीं किया। जब जवाब नहीं सूझा, तो राहुल गांधी को बदनाम करने की साजिश रची गई।

    इसके साथ ही, बीजेपी के आंतरिक रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा गया कि पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी अस्पताल में आईसीयू में हैं, लेकिन बीजेपी का कोई बड़ा नेता उनसे मिलने नहीं गया।

    कांग्रेस नेताओं ने जोर देकर कहा कि यह लड़ाई केवल अदानी या अंबेडकर के मुद्दे तक सीमित नहीं है, बल्कि संविधान बचाने और गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग तक जाएगी। उन्होंने कहा कि ‘इंडिया गठबंधन’ इस मिशन को आगे भी मजबूती से जारी रखेगा।

    आभार समागम के जरिए कांग्रेस ने अपने कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा का संचार किया और साफ कर दिया कि वह संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए हर मोर्चे पर लड़ने को तैयार है।

  • पत्रकार अमरनाथ सिन्हा पर हमला, विरोध में पत्रकारों की एकजुटता

    गिरिडीह: गिरिडीह में शुक्रवार को नगर निगम के अजीडीह टॉल वसूली केंद्र पर पत्रकार अमरनाथ सिन्हा पर हुए जानलेवा हमले के खिलाफ शनिवार को नया परिषद भवन में पत्रकारों की बैठक हुई। बैठक में गिरिडीह के पत्रकार समुदाय ने एकजुट होकर हमले की कड़ी निंदा की और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

    बैठक के बाद पत्रकारों के एक प्रतिनिधिमंडल ने गिरिडीह उपायुक्त से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। पत्रकारों ने उपायुक्त को याद दिलाया कि माननीय उच्च न्यायालय ने 18 दिसंबर को नगर निगम क्षेत्र में टॉल वसूली पर रोक लगाने का आदेश दिया था, बावजूद इसके अजीडीह केंद्र पर अवैध वसूली जारी थी। इसी मुद्दे को उजागर करने पर पत्रकार अमरनाथ पर हमला हुआ।

    इस बैठक में कई वरिष्ठ पत्रकार शामिल हुए, जिनमें राकेश सिन्हा ,अरविंद कुमार, प्रवीण कुमार राय, लक्ष्मी अग्रवाल, रमेश प्रभाकर, सुनील मंथन शर्मा, आलोक रंजन, सूरज सिन्हा,मीरा कुमारी, शाहिद रजा, प्रकाश श्रीवास्तव, नफीस अजहर, एजाज अहमद, कैफ जद्दी, दानिश अहमद, मृणाल सिन्हा और अन्य प्रमुख नाम शामिल हैं।

    घटना के बाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने पपरवाटांड स्थित अमरनाथ सिन्हा के घर पहुंचकर उनसे मुलाकात की। उन्होंने चौथे स्तंभ पर इस हमले की निंदा करते हुए प्रशासन से दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

    इसी बीच धनवार के पूर्व विधायक राजकुमार यादव ने भी समाहरणालय पहुंचकर अमरनाथ सिन्हा से मुलाकात की और घटना की निंदा की। उन्होंने इसे लोकतंत्र पर हमला करार दिया।

  • एमएस धोनी अपने घर से ही होंगे ‘आउट’?आवास बोर्ड भेजा जा सकता है नोटिस

    रांची :  भारतीय क्रिकेट के दिग्गज और झारखंड का गौरव एमएस धोनी को उनके पुराने आवासीय प्लॉट को लेकर मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। झारखंड राज्य आवास बोर्ड धोनी के हरमू रोड स्थित पुराने घर के प्लॉट पर नोटिस भेजने की तैयारी में है।

    धोनी को यह प्लॉट वर्ष 2009 में झारखंड सरकार ने आवासीय उपयोग के लिए गिफ्ट किया था। लेकिन अब इस प्लॉट पर एक लैब खुलने की खबर सामने आई है। आवास बोर्ड का कहना है कि यदि आवासीय प्लॉट का व्यावसायिक उपयोग हो रहा है, तो यह नियमों का उल्लंघन माना जाएगा।

    आवासीय प्लॉट का व्यावसायिक उपयोग पर सवाल.
    आवास बोर्ड के चेयरमैन संजय पासवान ने बताया कि धोनी को यह प्लॉट उनके खेल में उत्कृष्ट योगदान के लिए दिया गया था। उन्होंने कहा, “आवासीय प्लॉट का व्यावसायिक उपयोग नियमों का उल्लंघन है। हमने इस मामले की जांच के आदेश दिए हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।”

    बीजेपी कार्यालय को भी मिला था नोटिस. 
    संजय पासवान ने बताया कि यह पहली बार नहीं है जब बोर्ड ने इस तरह की कार्रवाई की है। उन्होंने कहा, “हरमू रोड में जहां बीजेपी का प्रदेश कार्यालय है, वहां भी भूखंड के दुरुपयोग का मामला सामने आया था। उस मामले में पहले ही नोटिस दिया जा चुका है।”

    धोनी का हरमू वाला घर: बीते वर्षों की कहानी. 
    2009 में झारखंड सरकार ने धोनी को पांच कट्ठा का यह प्लॉट गिफ्ट किया था। यहां उन्होंने शानदार घर बनवाया और कई वर्षों तक वहीं रहे। लेकिन बाद में वे रांची के सिमलिया स्थित अपने प्राइवेट फॉर्म हाउस में शिफ्ट हो गए।

    क्लिनिक लैब में तब्दील हो रहा है घर.
    धोनी के हरमू रोड स्थित पुराने घर में अब एक क्लिनिक लैब स्थापित की जा रही है। लंबे समय तक खाली पड़े इस मकान का उपयोग अब व्यावसायिक कार्यों के लिए किया जा रहा है। इस बात की जानकारी आवास बोर्ड को मिली, तो चेयरमैन ने इसकी जांच के आदेश दिए।

    यदि जांच में यह पुष्टि होती है कि आवासीय प्लॉट का उपयोग व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है, तो धोनी को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। संजय पासवान ने संकेत दिया है कि नियमों के उल्लंघन की स्थिति में कठोर कार्रवाई की जाएगी।

    एमएस धोनी के प्रशंसकों के लिए यह खबर चौंकाने वाली हो सकती है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच के बाद क्या निर्णय लिया जाता है और धोनी इस मामले पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।

  • कांग्रेस की हार की पड़ताल: भितरघातियों पर गिरेगी गाज?

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट …………
    झारखंड में हालिया विधानसभा चुनावों के नतीजे कांग्रेस के लिए संतोषजनक रहे, लेकिन 14 सीटों पर मिली हार ने पार्टी को सोचने पर मजबूर कर दिया है। गठबंधन के तहत 30 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली कांग्रेस ने 16 सीटों पर जीत दर्ज की, लेकिन हार के कारणों की समीक्षा ने अंदरूनी कलह और रणनीतिक चूकों की पोल खोल दी है। 21 दिसंबर को रांची मे आयोजित बैठक मे पार्टी ने हार की समीक्षा की ।

    हार की असली वजहें:
    कांग्रेस की समीक्षा में स्पष्ट हुआ है कि कई सीटों पर पार्टी के ही नेताओं ने भितरघात कर प्रत्याशियों को हराने में कोई कसर नहीं छोड़ी। स्थानीय संगठनों और उम्मीदवारों के बीच समन्वय की कमी भी हार का बड़ा कारण बनी।

    जरमुंडी विधानसभा क्षेत्र:
    यहां पूर्व मंत्री बादल को भाजपा की मजबूत रणनीति और हरिनारायण राय की भाजपा से करीबी के कारण हार का सामना करना पड़ा। लंबे समय तक मंत्री रहने के दौरान उनके खिलाफ उपजा असंतोष भी उनकी हार की वजह बना।

    जमशेदपुर पश्चिम सीट:
    तत्कालीन मंत्री बन्ना गुप्ता वायरल वीडियो से उपजे विवाद के चलते प्रचार युद्ध में टिक नहीं पाए। जदयू के सरयू राय ने उनका पराजय दिलाने में अहम भूमिका निभाई।

    झरिया और धनबाद:
    इन क्षेत्रों में संगठनात्मक तालमेल की कमी और स्थानीय इकाई का असहयोग हार का कारण बना। झरिया में कांग्रेस को सिटिंग सीट पर भी हार का सामना करना पड़ा।

    जमशेदपुर पूर्वी सीट:
    यहां डॉ. अजय कुमार पार्टी के प्रत्याशी थे, लेकिन स्थानीय संगठन ने उनका साथ नहीं दिया। कई नेता अंदरूनी भितरघात में लगे रहे, जिससे पार्टी की संभावना धूमिल हो गई।

    भविष्य की राह:
    समीक्षा बैठक के बाद तैयार की गई रिपोर्ट कांग्रेस आलाकमान को भेजी जाएगी। पार्टी के वरिष्ठ नेता ने संकेत दिए हैं कि भितरघातियों पर कड़ी कार्रवाई होगी।

    चुनाव परिणाम:
    कांग्रेस ने 30 सीटों पर चुनाव लड़ा और 16 पर जीत हासिल की। पार्टी का मानना है कि बेहतर रणनीतिक तालमेल और आंतरिक समन्वय से सीटों की संख्या और बढ़ाई जा सकती थी।

    संघर्ष जारी:
    कांग्रेस ने यह भी स्वीकार किया है कि कमियों को सुधारने के बाद भविष्य में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद की जा सकती है। अब सबकी नजरें आलाकमान के फैसलों और भितरघातियों पर गिरने वाली गाज पर टिकी हैं।