Category: Jharkhand

  • गिरिडीह : ज्वेलर्स लूटकांड का पुलिस ने किया खुलासा, छह अपराधी गिरफ्तार, हथियार और जेवरात बरामद

    By The News Post4U

    गिरिडीह : जमुआ थाना क्षेत्र के पोबी मोड़ के पास 22 मई को ज्वेलर्स से हुई लूट और गोलीबारी की सनसनीखेज वारदात का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। गिरिडीह पुलिस को इस मामले में बड़ी सफलता मिली है। इस कांड में शामिल छह आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि एक आरोपी अब भी फरार है, जिसकी तलाश में लगातार छापेमारी जारी है।

    पुलिस अधीक्षक डॉ. विमल कुमार ने आज मीडिया को  जानकारी दी कि घटना के तुरंत बाद एसडीपीओ खोरीमहुआ राजेन्द्र प्रसाद के नेतृत्व में एक विशेष छापामारी टीम गठित की गई थी। टीम ने त्वरित और गुप्त कार्रवाई कर मामले में संलिप्त सभी छह आरोपियों को धर दबोचा।

    गौर तलब है कि 22 मई 2025 की शाम को विशाल ज्वेलर्स के मालिक विशाल कुमार सोनी, अपनी दुकान बंद कर द्वारपहरी चौक से घर लौट रहे थे, पोबी मोड़ के आगे सुनसान रास्ते पर तीन अज्ञात अपराधियों ने उन्हें ओवरटेक कर रोका। अपराधी एक सफेद रंग की Apache बाइक पर सवार थे। उन्होंने पिस्टल दिखाकर विशाल को डराया और उनके पास से ₹5000 नकद और कीमती जेवरात से भरा बैग लूटने की कोशिश की। विरोध करने पर अपराधियों ने उन पर गोली चला दी, जिससे विशाल घायल हो गए। इसके बाद अपराधी बैग लेकर फरार हो गए।

    घटना की प्राथमिकी जमुआ थाना कांड संख्या 102/2025, दिनांक 22.05.2025 को धारा 300(5) BNS 2023 और 27 Arms Act के तहत दर्ज की गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए गिरिडीह पुलिस ने जांच को तेज़ किया।

    कई पुराने मामलों का भी खुलासा:
    गिरफ्तार आरोपियों ने पुलिस पूछताछ में अन्य तीन घटनाओं में भी अपनी संलिप्तता स्वीकार की है। इनमें शामिल हैं:

    1. जमुआ थाना कांड संख्या 60/2025, दिनांक 29.03.2025, धारा 300(4) BNS 2023
    2. जमुआ थाना कांड संख्या 90/2025, दिनांक 14.05.2025, धारा 304(2)/62/134/307 BNS 2023 एवं 27 Arms Act
    3. धनवार थाना कांड संख्या 43/2025, दिनांक 16.02.2025, धारा 309(4) BNS 2023

    बरामदगी:
    गिरफ्तार अभियुक्तों की निशानदेही पर लूट के जेवरात, दो देसी पिस्तौल, और दो मोटरसाइकिलें भी बरामद की गई हैं। इनका इस्तेमाल अपराध में किया गया था।
    गिरफ्तार सभी छह अभियुक्तों को 14 जून 2025 को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस शेष एक फरार अभियुक्त की गिरफ्तारी के लिए सघन छापामारी अभियान चला रही है।

    इस कार्रवाई ने गिरिडीह में लूट और गोलीबारी जैसे अपराधों पर लगाम कसने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित किया है। पुलिस अधीक्षक ने जनता से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें, ताकि अपराधियों पर समय रहते कार्रवाई की जा सके।

  • हेमंत सोरेन-जद यू नेता अशोक चौधरी की मुलाकात ने बढ़ाई सियासी सरगर्मी

    महागठबंधन में अनदेखी से गुस्से मे JMM.

    परवेज़ आलम,राजनीतिक विश्लेषक , द न्यूज़ पोस्ट4U

    बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर महागठबंधन की तैयारियां ज़ोरों पर हैं, लेकिन इन बैठकों में झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की गैरमौजूदगी ने सियासी समीकरणों में हलचल पैदा कर दी है। इसी बीच बिहार सरकार के वरिष्ठ मंत्री और JDU नेता अशोक चौधरी की झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात ने राजनीतिक तापमान और बढ़ा दिया है।

    शिष्टाचार मुलाकात या रणनीतिक संदेश?

    अशोक चौधरी की यह मुलाकात 13 जून को हुई और इसकी जानकारी खुद झारखंड मुख्यमंत्री कार्यालय ने सोशल मीडिया पर दी। कहा गया कि यह केवल “शिष्टाचार भेंट” थी, लेकिन इस मुलाकात की टाइमिंग  ने राजनीतिक विश्लेषकों को चौकन्ना कर दिया है।

    एक दिन पहले यानी 12 जून को पटना में महागठबंधन की अहम बैठक आयोजित हुई थी, जिसमें RJD, कांग्रेस और अन्य दलों ने हिस्सा लिया, मगर JMM को आमंत्रित नहीं किया गया। इससे पार्टी की नाराजगी अब सार्वजनिक हो गई है।

    JMM ने उठाए सवाल, भेजा सियासी संदेश.

    JMM के महासचिव विनोद पांडे ने साफ तौर पर कहा कि पार्टी बिहार विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी में है, लेकिन उन्हें अब तक न तो बैठक में बुलाया गया और न ही चर्चा में शामिल किया गया। उन्होंने यह भी जोड़ा कि गठबंधन में झामुमो की उपेक्षा करना कई सवाल खड़े करता है।
    झामुमो प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि पार्टी बड़े फैसले पर विचार कर रही है और जल्द ही अगला कदम उठाया जाएगा।

    RJD की दो टूक – ‘जहां गठबंधन, वहीं बैठक’

    दूसरी ओर RJD ने भी स्पष्ट कर दिया है कि बिहार की गठबंधन बैठकें उन्हीं दलों के साथ होंगी, जो महागठबंधन का सक्रिय हिस्सा हैं। RJD के नेताओं ने JMM को सीधी चुनौती देते हुये कहा है कि अगर झारखंड मुक्ति मोर्चा को खुद पर इतना भरोसा है, तो अकेले चुनाव मैदान में उतरकर अपनी ताकत दिखाए। झामुमो की बिहार में चुनाव लड़ने की इच्छा पर RJD के तेवर साफ तौर पर ‘आर या पार’ के संकेत दे रहे हैं।

    JMM की नजर सीमावर्ती सीटों पर.

    JMM बिहार के झारखंड से सटे सीमावर्ती क्षेत्रों की कुछ सीटों पर चुनाव लड़ना चाहता है। इन इलाकों में पार्टी का आधार मजबूत आधार का दावा किया जा रहा है , पार्टी का दावा है कि पहले भी पार्टी के विधायक इन इलाकों से चुने जा चुके हैं। जिन सीटों पर झामुमो की नजर है, उनमें शामिल हैं:तारापुर, कटोरिया, मनिहारी, झाझा, बांका, ठाकुरगंज,रूपौली, रामपुर, बनमनखी, जमालपुर, पीरपैंती, व चकाई.

    BJP का तंज – “फुफकारता है, काटता नहीं”

    इस सियासी तकरार के बीच बीजेपी ने मौके को भुनाते हुए तंज कसा। पार्टी के बिहार सह प्रभारी दीपक प्रकाश ने JMM पर कटाक्ष करते हुए कहा, “झामुमो सिर्फ फुफकारता है, काटता नहीं। पहले भी चुनाव लड़ने की बात की थी, लेकिन न समर्थन मिला, न सीट।” बीजेपी इस पूरे घटनाक्रम को महागठबंधन की कमजोर होती एकता के संकेत के तौर पर देख रही है।

    क्या दरक रही है तेजस्वी-हेमंत की दोस्ती?

    राजनीतिक समीक्षक अब यह सवाल भी उठा रहे हैं कि क्या तेजस्वी यादव और हेमंत सोरेन के बीच की ‘पुरानी दोस्ती’ में दरार आ चुकी है? क्या JMM को महागठबंधन में अब कोई खास भूमिका नहीं दी जाएगी?
    इस मुलाकात के बाद अटकलें हैं कि हेमंत सोरेन जेडीयू या तीसरे मोर्चे के साथ नई संभावनाएं तलाश सकते हैं, जिससे बिहार की राजनीति में नया मोड़ आ सकता है।
    बिहार के चुनावी दंगल में अभी बहुत कुछ तय होना बाकी है, लेकिन झामुमो की नाराजगी और अशोक चौधरी की हेमंत सोरेन से मुलाकात ने संकेत दे दिया है कि पर्दे के पीछे बड़ी हलचल जारी है। आने वाले हफ्तों में यह साफ हो जाएगा कि झामुमो महागठबंधन का हिस्सा रहेगा, या कोई नया गठजोड़ तैयार होगा।

  • नाइजर में अपहृत गिरिडीह के पांचों मजदूर सुरक्षित,विदेश मंत्रालय वापसी के लिए सक्रिय

    की पॉइंट :

    • घटना: 25 अप्रैल 2025
    • जगह: सकोइरा, तिल्लाबेरी, नाइजर, पश्चिम अफ्रीकी
    • अपहृत मजदूर: संजय महतो, चंद्रिका महतो, फलजीत महतो, राजू महतो, उत्तम महतो
    • कंपनी: कल्पतरु प्रोजेक्ट्स इंटरनेशनल लिमिटेड
    • संभावित लोकेशन: माली सीमा क्षेत्र
    • कूटनीतिक संपर्क: भारत के राजदूत, नाइजर सेना प्रमुख, ICRC, माली राजनयिक चैनल

    परवेज़ आलम.  

    गिरिडीह/रांची: पश्चिम अफ्रीकी देश नाइजर में आतंकियों के हाथों अपहृत झारखंड के पांच मजदूरों की सुरक्षित वापसी के प्रयास तेज़ हो गए हैं। बगोदर (गिरिडीह) के रहने वाले ये सभी मजदूर अब भी सुरक्षित हैं। यह जानकारी विदेश मंत्रालय द्वारा संजय मेहता को भेजे गए औपचारिक पत्र में दी गई है। संजय मेहता लगातार इस मामले को लेकर विदेश मंत्रालय, कंपनी अधिकारियों और नाइजर स्थित भारतीय राजनयिकों के संपर्क में बने हुए हैं।

    25 अप्रैल को आतंकियों ने मजदूरों को किया था अपहृत.

    25 अप्रैल 2025 को नाइजर की राजधानी नियामे से करीब 115 किमी दूर तिल्लाबेरी प्रांत के सकोइरा इलाके में यह घटना हुई थी , जब एक पावर ट्रांसमिशन परियोजना पर काम कर रहे भारतीय मजदूरों का आतंकियों ने अपहरण कर लिया। इस हमले में 12 नाइजर सैनिक मारे गए। झारखंड के संजय महतो, चंद्रिका महतो, फलजीत महतो, राजू महतो और उत्तम महतो उस समय वहां कार्यरत थे, जिन्हें आतंकियों ने अगवा कर लिया।

    ये सभी कल्पतरु प्रोजेक्ट्स इंटरनेशनल लिमिटेड (KPIL) के तहत एक पावर ट्रांसमिशन परियोजना में कार्यरत थे।

    संजय मेहता की पहल से विदेश मंत्रालय हुआ सक्रिय.

    जैसे ही इस घटना की सूचना मिली, हजारीबाग लोकसभा के पूर्व प्रत्याशी और सामाजिक कार्यकर्ता संजय मेहता ने इस मामले को गंभीरता से लिया। उन्होंने पीड़ितों के परिजनों से मिलकर उन्हें सांत्वना दी और विदेश मंत्रालय को विस्तृत पत्र लिखकर मामले की संवेदनशीलता से अवगत कराया।

    इसके बाद विदेश मंत्रालय ने संज्ञान लेते हुए भारत के राजदूत, नाइजर की सरकार और सेना के शीर्ष अधिकारियों से संपर्क साधा।

    भारत के राजदूत की सेना प्रमुख से मुलाकात, मिला भरोसा.

    नाइजर में भारत के राजदूत सीता राम मीना  ने 9 मई 2025  को नाइजर के सेना प्रमुख कर्नल अब्दुर्रहमान तियानी से विशेष मुलाकात की। इस बैठक में नाइजर सेना प्रमुख ने भरोसा दिलाया कि भारतीय मजदूर सुरक्षित हैं और उनकी रिहाई के प्रयास जारी हैं। सेना प्रमुख ने संकेत दिए कि ये मजदूर माली की सीमा के आसपास हो सकते हैं।

    विदेश मंत्रालय ने ICRC और अन्य एजेंसियों को किया सक्रिय.

    विदेश मंत्रालय ने संजय मेहता को भेजे पत्र में बताया कि भारतीय राजनयिकों ने माली और नाइजर में इंटरनेशनल रेड क्रॉस (ICRC) के अधिकारियों से मुलाकात की है। साथ ही नई दिल्ली स्थित ICRC और माली कार्यालय को भी सूचित किया गया है ताकि मानवीय आधार पर रिहाई सुनिश्चित कराई जा सके।

    संजय मेहता ने लिखा कई पत्र, मंत्रालय में की उच्च स्तरीय वार्ता.

    संजय मेहता ने 30 अप्रैल, 2 मई, 4 मई, 22 मई और 23 मई को विदेश मंत्रालय को पांच अलग-अलग पत्र भेजे। उन्होंने विदेश मंत्रालय के अवर सचिव बीएन पांडे, अफ्रीकी मामलों के प्रभारी सेवाला नाइक मुड़े, OSD लेफ्टिनेंट कर्नल संजीव कुमार से भी वार्ताएं कीं। इसके अलावा KPIL कंपनी के उच्चाधिकारियों से भी संपर्क साधा गया।

    सुरक्षित हैं मजदूर, सरकार निगरानी में जुटी.

    विदेश मंत्रालय ने पत्र में लिखा है कि मजदूर सुरक्षित हैं, और उनके जीवन को कोई तात्कालिक खतरा नहीं है। उन्हें संभवतः माली सीमा क्षेत्र में रखा गया है, जिसे ध्यान में रखते हुए माली में भी राजनयिक प्रयास तेज कर दिए गए हैं।
    मंत्रालय ने कल्पतरु प्रोजेक्ट्स इंटरनेशनल को भी ICRC और स्थानीय सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय बनाने के निर्देश दिए हैं।

  • सीएम हेमंत ने सिरमटोली फ्लाईओवर का किया उद्घाटन , रांची को जाम से मिलेगी राहत

     – रैंप विवाद के कारण यह फ्लाईओवर रहा  सुर्खियों मे.   

    परवेज़ आलम.

    रांची: झारखंड की राजधानी रांची में गुरुवार को एक ऐतिहासिक क्षण तब दर्ज हुआ जब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 2.34 किलोमीटर लंबे सिरमटोली फ्लाईओवर का विधिवत उद्घाटन किया। चार लेन वाले इस आधुनिक फ्लाईओवर के चालू होते ही शहरवासियों को जाम की भीषण समस्या से काफी हद तक राहत मिलने की उम्मीद है।

    मुख्यमंत्री ने इस फ्लाईओवर को आदिवासी नेता बाबा कार्तिक उरांव के नाम समर्पित करते हुए घोषणा की कि अब इसे “कार्तिक उरांव पथ” के नाम से जाना जाएगा। उद्घाटन समारोह मेकॉन गोलचक्कर के निकट वन भवन परिसर में आयोजित किया गया, जहां मुख्यमंत्री ने पर्यावरण दिवस के अवसर पर वृक्षारोपण कर लोगों को पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया.

    क्या है इस फ्लाईओवर की खासियत ?

    • लंबाई: 2.34 किलोमीटर, डिज़ाइन: 132 मीटर लंबा एक्सट्रा-डोज्ड केबल-स्टे ब्रिज और 42 मीटर ऊंचे चार पायलन
    • तकनीकी विशेषताएं:
      • प्रीकास्ट पाइल कैप, प्रीकास्ट गर्डर का प्रयोग
      • माइक्रो पाइलिंग व बोरोपाइलिंग जैसी आधुनिक तकनीक
      • रेलवे की सख्त मंजूरी और हाई कोर्ट केस के बीच सुरक्षित निर्माण
      • शून्य दुर्घटना रिकॉर्ड
    • यातायात समाधान:
      • राजेंद्र चौक और सुजाता चौक को जोड़ने से 40% ट्रैफिक डायवर्जन
      • पहले जहाँ सफर में आधे घंटे लगते थे, अब महज 5 मिनट में पूरा होगा सफर

    पर्यावरण और भावनात्मक संतुलन पर जोर.

    फ्लाईओवर उद्घाटन के साथ ही मुख्यमंत्री ने पर्यावरण दिवस पर जनजागृति का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि “पर्यावरण संकट गंभीर होता जा रहा है, शहरों में स्थिति बेहद चिंताजनक है।” इस अवसर पर उन्होंने एक पेड़ जरूर बचाने की अपील भी की और कहा कि सरकार चाहे जितना कानून बनाए, असली परिवर्तन नागरिकों की जागरूकता से ही आएगा।

     रैंप विवाद और आदिवासी संगठनों का विरोध.

    इस परियोजना के रैंप का एक सिरा सरना धर्मस्थल के समीप होने के कारण बीते कई महीनों से विवाद में रहा। 4 जून को इसी को लेकर झारखंड बंद का आह्वान हुआ था। आदिवासी संगठनों का कहना था कि इससे धार्मिक स्थल की पवित्रता भंग होगी। सरकार ने उनकी भावनाओं का सम्मान करते हुए रैंप की ऊंचाई 124 फीट से घटाकर 84 फीट कर दी, और बैरिकेडिंग के लिए विशेष व्यवस्था की।

    इस संदर्भ में मुख्यमंत्री ने मंच से दो टूक कहा, “किसी की भावना को ठेस पहुंचाना या किसी की पहचान की बलि देना हमारे एजेंडे में नहीं है। सरकार विकास और सामाजिक संवेदनशीलता के बीच संतुलन बनाए रखने को प्रतिबद्ध है।”

    राजनीतिक और प्रशासनिक उपस्थिति.

    फ्लाईओवर उद्घाटन कार्यक्रम में राज्य के कई मंत्री, विधायक और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे, जिनमें नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ,कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की, मंत्री संजय प्रसाद यादव,सहित अन्य प्रतिनिधि व अधिकारी शामिल थे।

    355.76 करोड़ की लागत से बनी शानदार उपलब्धि.

    करीब 355.76 करोड़ रुपए की लागत से तैयार हुआ यह फ्लाईओवर न सिर्फ रांची को यातायात की परेशानी से निजात दिलाएगा, बल्कि झारखंड में इंजीनियरिंग और निर्माण की दिशा में भी एक मील का पत्थर साबित होगा।

    यह फ्लाईओवर मुख्यमंत्री द्वारा 29 अगस्त 2022 को शिलान्यास किया गया था और तीन साल से कम समय में बनकर तैयार हो गया। इससे पहले अक्टूबर 2024 में 2.24 किलोमीटर लंबे कांटाटोली फ्लाईओवर का भी उद्घाटन किया गया था।

    सिरमटोली फ्लाईओवर केवल एक इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना नहीं, बल्कि झारखंड की नई रफ्तार का प्रतीक बन चुका है। यह राज्य सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति, आधुनिक तकनीक और सामाजिक संवेदनशीलता के संतुलन का एक सुंदर उदाहरण है।

    अब यह देखना दिलचस्प होगा कि यह सफलता राज्य के अन्य हिस्सों में भी इसी प्रकार दोहराई जा सकेगी या नहीं।

     

  • गिरिडीह : सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस ने रचा कीर्तिमान-कल्पना सोरेन

    पर्यावरण दिवस पर भी दिया गया जागरूकता का संदेश

    By The News Post4u.

    गिरिडीह: सर जेसी बोस मुख्यमंत्री बालिका उत्कृष्ट विद्यालय, गिरिडीह में बुधवार को दोहरा उत्सव देखने को मिला। एक ओर जहां विद्यालय के छात्रों ने सीबीएसई 10वीं और 12वीं की परीक्षा में शानदार प्रदर्शन कर जिले का मान बढ़ाया, वहीं दूसरी ओर विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर वृक्षारोपण कर हरित संदेश दिया गया।

    इस विशेष कार्यक्रम की मुख्य अतिथि रहीं गांडेय विधायक श्रीमती कल्पना सोरेन, जिनका स्वागत विद्यालय की बाल संसद की छात्राओं ने पारंपरिक तरीके से तिलक और पुष्प वर्षा कर किया। इस मौके पर जिले के उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक, उप विकास आयुक्त, जेएमएम नेता संजय सिंह, पूर्व विधायक केदार हाजरा सहित अन्य लोग उपस्थित थे ।

    सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस : एक सपने की उड़ान

    समारोह की मुख्य अतिथि कल्पना सोरेन ने विद्यालय के तीन छात्राओं के राज्य टॉपर्स में शामिल होने पर स्कूल के प्राचार्य, शिक्षकों और कर्मचारियों को बधाई दी। उन्होंने कहा, “राज्य के 80 सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस में से सिर्फ एक विद्यालय से तीन टॉपर्स का आना इस स्कूल की मेहनत और ईमानदारी का परिचायक है। इससे पूरे गिरिडीह का नाम रोशन हुआ है।”

    उन्होंने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा, “आपका भविष्य एक पौधे की तरह है। सिर्फ रोपने से वह नहीं बढ़ता, उसे पानी, देखभाल और ध्यान चाहिए। वैसे ही आप पढ़ाई और अनुशासन से अपने जीवन को बड़ा बना सकते हैं।”

    पर्यावरण संरक्षण की शपथ.

    विश्व पर्यावरण दिवस पर सभी अतिथियों ने वृक्षारोपण किया और एक स्वर में कहा – “पेड़ लगाओ, जीवन बचाओ।” यह संदेश न केवल विद्यालय परिसर के लिए था, बल्कि पूरे समाज को हरियाली और स्वच्छता की दिशा में प्रेरित करने वाला था।

    प्राचार्य मुन्ना प्रसाद कुशवाहा ने पूरे कार्यक्रम का सफल संचालन करते हुए अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापन किया । इस मौके पर जिले के तमाम प्रशासनिक अधिकारी, शिक्षा विभाग के प्रतिनिधि, शिक्षकगण, छात्र-छात्राएं और विद्यालय परिवार उपस्थित रहा।

    मारवाड़ी युवा मंच प्रेरणा शाखा का पौधारोपण अभियान.

    इसी क्रम में, मारवाड़ी युवा मंच – प्रेरणा शाखा, गिरिडीह ने भी विश्व पर्यावरण दिवस पर समाज को हरियाली का संदेश दिया। संगठन ने 51 पौधों का रोपण कर यह संकल्प लिया कि वे आने वाली पीढ़ियों को एक हरा-भरा भविष्य देंगे।

    इस अभियान में रिया अग्रवाल और  बरखा बालासिया का योगदान सरहनीय  रहा। दोनों ने न केवल कार्यक्रम की रूपरेखा तय की, बल्कि स्वयं सक्रिय रहकर उसे सफल बनाया।

    मारवाड़ी युवा मंच प्रेरणा शाखा सामाजिक और पर्यावरणीय विषयों पर लगातार कार्य कर रहा है। यह कार्यक्रम भी उसी श्रृंखला की एक मजबूत कड़ी है, जिसमें उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का संदेश दिया।

  • रांची में आदिवासी आक्रोश: फ्लाईओवर रैंप को लेकर झारखंड बंदका मिलाजुला असर  रहा

    By The News Post4u.

    रांची: झारखंड की राजधानी रांची बुधवार को फिर एक बार आदिवासी संगठनों के आह्वान पर ठहर गई है। सरना धार्मिक स्थल के पास बन रहे फ्लाईओवर के रैंप को लेकर उपजा विवाद अब सड़कों तक आ पहुंचा है। ‘आदिवासी बचाओ मोर्चा’ और ‘केंद्रीय सरना स्थल सिरमटोली बचाओ मोर्चा’ जैसे संगठनों के नेतृत्व में राज्यव्यापी झारखंड बंद का आयोजन किया गया। इस दौरान राजधानी सहित कई जिलों में सड़कें जाम रहीं, बाजार बंद रहे और यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ।

    क्या है विवाद की जड़?

    रांची के सिरमटोली स्थित सरना स्थल, जो कि आदिवासी समुदाय का एक महत्वपूर्ण धार्मिक केंद्र है, उसके पास एक फ्लाईओवर का रैंप बनाया गया है। यह फ्लाईओवर 2.34 किलोमीटर लंबा है, जिसमें रेलवे लाइन के ऊपर से गुजरता 132 मीटर का हिस्सा भी शामिल है। इसका उद्देश्य सिरमटोली को मेकॉन इलाके से जोड़कर ट्रैफिक जाम से निजात दिलाना है।

    हालांकि, आदिवासी संगठनों का कहना है कि यह रैंप उनके पवित्र स्थल की पवित्रता को आहत कर रहा है और सरहुल जैसे धार्मिक आयोजनों के दौरान हजारों श्रद्धालुओं की आवाजाही में रुकावट बनेगा। समुदाय का यह भी दावा है कि यह धार्मिक स्थल तक जाने के मार्ग में सीधी बाधा बन रहा है।

    मांगें क्या हैं?

    प्रदर्शन कर रहे संगठनों की मांगें केवल रैंप तक सीमित नहीं हैं। उनकी प्रमुख मांगों में शामिल हैं:

    • फ्लाईओवर रैंप को तत्काल हटाया जाए
    • आदिवासी धार्मिक स्थलों की सुरक्षा की गारंटी दी जाए
    • पेसा (PESA) अधिनियम को सख्ती से लागू किया जाए
    • आदिवासी जमीनों से अवैध कब्जे हटाए जाएं

    विरोध का स्वर तेज, रांची बंद का असर व्यापक.

    बंद के समर्थन में मंगलवार शाम रांची में मशाल जुलूस निकाला गया था, जिसके बाद बुधवार सुबह से ही पूरे राज्य, खासकर राजधानी रांची में असर देखा गया। आदिवासी समुदाय के सैकड़ों लोग सड़कों पर उतर आए और कई स्थानों पर चक्का जाम किया गया।

    रांची-डाल्टनगंज मार्ग को बिजूपाड़ा के पास अवरुद्ध कर दिया गया, वहीं टाटीसिलवे, कांके, मांडर, ओरमांझी, रातू समेत ग्रामीण इलाकों में भी सड़कें जाम कर दी गईं। रामगढ़ के कुजू में पुलिस ने सड़क जाम कर रहे एक दर्जन से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। वहीं, सिमडेगा में एनएच-143 को सुबह-सुबह जाम कर दिया गया। बंद के मद्देनजर रांची समेत सभी संवेदनशील इलाकों में भारी सुरक्षा बल की तैनाती की गई थी ।

    पहले भी हो चुके हैं ऐसे विरोध.

    इससे पहले 22 मार्च 2024 को भी इसी मुद्दे को लेकर राजधानी में 18 घंटे का बंद रखा गया था, जिसमें हिनू, अरगोड़ा, कांटाटोली, हरमू, कोकर जैसे इलाकों में भारी प्रदर्शन हुआ था। उस समय पुलिस और आंदोलनकारियों के बीच कई स्थानों पर झड़प भी हुई थी। रांची-लोहरदगा रोड समेत कई मार्गों पर बांस की बैरिकेडिंग कर रास्ता रोका गया था, जिससे बस, ऑटो और टैक्सी सेवाएं भी प्रभावित हुई थीं।

    अब क्या आगे?

    फ्लाईओवर लगभग बनकर तैयार है, लेकिन विवाद अभी थमा नहीं है। आदिवासी संगठनों की ओर से साफ कहा गया है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा। राज्य सरकार की तरफ से अब तक कोई निर्णायक बयान नहीं आया है।                  राजनीति और समाज के लिए यह आंदोलन एक गंभीर संकेत है। यह केवल एक रैंप का विरोध नहीं है, बल्कि आदिवासी अस्मिता, धार्मिक स्वतंत्रता और भूमि अधिकारों से जुड़ा एक व्यापक मुद्दा है। सरकार को चाहिए कि वह बातचीत के माध्यम से समाधान निकाले, ताकि विकास और परंपरा दोनों के बीच संतुलन कायम रह सके।

     

  • देश में फिर बढ़ने लगे कोरोना के मामले: 24 घंटे में 7 मौतें

    एक्टिव केस 4300 के पार, जानिए नया वेरिएंट और लक्षण

    By The News Post4u.

    देश एक बार फिर कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों की चपेट में आ रहा है। स्वास्थ्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, पिछले 24 घंटों में कोरोना वायरस संक्रमण के कारण 7 लोगों की मौत हुई है और देशभर में कुल सक्रिय मामले 4,302 तक पहुंच गए हैं।

    इन मौतों में महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा 4, दिल्ली में 1, गुजरात में 1 और तमिलनाडु में 1 व्यक्ति की मृत्यु हुई है। सबसे चिंता की बात यह है कि संक्रमितों की मौत कई गंभीर बीमारियों के साथ कोविड संक्रमण होने के कारण हुई है, जिससे इस वायरस की गंभीरता को एक बार फिर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

    राज्यों में एक्टिव केस की स्थिति (स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार):

    • केरल – 1373 ,महाराष्ट्र – 510,गुजरात – 461,दिल्ली – 457,पश्चिम बंगाल – 432,कर्नाटक – 324,तमिलनाडु – 216,उत्तर प्रदेश – 201

    देश के अधिकांश राज्यों में केस लगातार बढ़ रहे हैं, हालांकि कुछ राज्यों जैसे केरल में मामूली गिरावट दर्ज की गई है।

    बीते 24 घंटे में जिन मरीजों की मौत हुई, उनकी हेल्थ हिस्ट्री:

    दिल्ली:एक 22 वर्षीय महिला जो फेफड़ों की टीबी (Pulmonary Koch), निमोनिया और टाइप 1 रेस्पिरेटरी फेल्योर से जूझ रही थी, कोरोना संक्रमण के बाद दम तोड़ बैठी।

    तमिलनाडु:76 वर्षीय पुरुष जिन्हें तीव्र श्वसन संकट (ARDS), कोविड-19 निमोनिया, सेप्सिस और मल्टी ऑर्गन फेल्योर की स्थिति थी।

    गुजरात:1 संक्रमित व्यक्ति की मौत की पुष्टि हुई है, लेकिन उसकी मेडिकल डिटेल्स स्पष्ट नहीं की गईं।

    महाराष्ट्र:55 वर्षीय पुरुष – कार्डियक एरिथमिया, COPD, पुरानी ब्रोंकाइटिस के रोगी थे। 73 वर्षीय पुरुष – कार्डियोजेनिक शॉक, पार्किंसन, हाई ब्लड प्रेशर और कोविड निमोनिया से पीड़ित थे। 23 वर्षीय महिला – डायबिटीज़ और हाई ब्लड प्रेशर की मरीज थीं। 27 वर्षीय पुरुष – इस्केमिक हार्ट डिज़ीज़, पुराना टीबी, शराब छोड़ने के कारण दौरे, और निचले श्वसन तंत्र के संक्रमण से जूझ रहे थे।

    इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि जिन मरीजों की मौत हुई है, वे पहले से ही गंभीर बीमारियों से ग्रसित थे, लेकिन कोरोना संक्रमण ने उनकी स्थिति को और जटिल बना दिया।

    कोरोना की वापसी का कारण: नया सब-वेरिएंट NB.1.8.1.

    भारत में कोरोना की वापसी की सबसे बड़ी वजह इसके नए सब-वेरिएंट NB.1.8.1 को माना जा रहा है। यह ओमिक्रॉन वेरिएंट का अत्यधिक रूपांतरित और तेज़ी से फैलने वाला रूप है।

    भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के अनुसार, NB.1.8.1 की विशेषता इसकी तेज संक्रमण दर और रूपांतरण क्षमता है, जिससे यह आसानी से बड़ी आबादी को प्रभावित कर सकता है।

    इस नए वेरिएंट के लक्षण क्या हैं?

    इस वेरिएंट के लक्षण ओमिक्रॉन जैसे ही हैं, लेकिन कभी-कभी ज्यादा तीव्र भी हो सकते हैं। आम लक्षणों में शामिल हैं:

    • बुखार,बदन दर्द,खांसी,थकान,भूख न लगना,सिरदर्द,गले में खराश, नाक बहना

    विशेषज्ञों का कहना है कि हल्के लक्षणों को भी नजरअंदाज न करें, खासकर अगर व्यक्ति पहले से किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हो।

    सावधानी जरूरी, नहीं तो नुकसान भारी.

    स्वास्थ्य मंत्रालय और विशेषज्ञ लगातार अपील कर रहे हैं कि भीड़भाड़ से बचें, मास्क का उपयोग करें, हाथों की सफाई का ध्यान रखें और जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है, वे अतिरिक्त सतर्कता बरतें।

    टीकाकरण करा चुके लोगों को भी सतर्क रहने की जरूरत है क्योंकि वेरिएंट का बदलता स्वरूप किसी भी समय स्थिति को गंभीर बना सकता है। कोरोना भले ही पुरानी महामारी लगने लगी हो, लेकिन उसकी वापसी बेहद खतरनाक हो सकती है, खासकर जब नया वेरिएंट सामने हो। बीते 24 घंटों की 7 मौतें हमें ये याद दिलाती हैं कि सतर्कता और सावधानी ही इससे बचने का सबसे मजबूत उपाय हैं।

    स्वस्थ रहें, सुरक्षित रहें।

  • AHPI कॉन्क्लेव: आयुष्मान के भुगतान विवाद पर स्वास्थ्य मंत्री ने लिया कड़ा रुख

    By The News Post4u

    राजधानी रांची स्थित रेडिसन ब्लू होटल में मंगलवार को एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स इंडिया (AHPI) की ओर से एक महत्वपूर्ण कॉन्क्लेव आयोजित किया गया, जिसमें झारखंड भर के निजी अस्पतालों के प्रतिनिधि, प्रशासक, और वरिष्ठ चिकित्सकों ने भाग लिया। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PMJAY) के तहत लंबित सरकारी भुगतान और उससे उत्पन्न हो रही समस्याओं पर चर्चा करना था।

    कॉन्क्लेव में बतौर मुख्य अतिथि झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी उपस्थित रहे। उन्होंने पूरे धैर्य के साथ अस्पताल संचालकों की समस्याएं सुनीं और विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि एक दिन के भीतर लंबित सभी बकाया भुगतान की प्रक्रिया पूरी की जाए।

    स्वास्थ्य मंत्री ने मंच से साफ शब्दों में कहा,

    “आयुष्मान कार्ड को एटीएम समझने की गलती न की जाए। कुछ अस्पताल कार्ड से पूरी राशि निकाल लेते हैं और मरीज को इलाज के बिना रिम्स रेफर कर देते हैं, यह बेहद निंदनीय है।“

    उन्होंने चेतावनी दी कि गरीबों के हक पर डाका डालने वाली मानसिकता को सरकार बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेगी। डॉ. अंसारी ने कहा कि इस योजना का उद्देश्य है कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को बिना किसी भेदभाव के गुणवत्तापूर्ण इलाज मिले, और इस मिशन में लापरवाही करने वालों पर कार्रवाई तय है।

    स्वास्थ्य मंत्री ने इस मौके पर यह भी दोहराया कि

    “झारखंड में हेमंत सोरेन सरकार गरीबों की सरकार है। हम उनकी उम्मीदों को टूटने नहीं देंगे।“

    उन्होंने आगे कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार को प्राथमिकता दे रही है और आने वाले समय में झारखंड को स्वास्थ्य सुविधाओं के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करना लक्ष्य है।

    इस सम्मेलन ने न केवल योजनाओं की वर्तमान स्थिति पर रोशनी डाली, बल्कि सरकार और निजी क्षेत्र के बीच समन्वय को बेहतर बनाने की दिशा में एक सकारात्मक पहल भी मानी जा रही है। सभी उपस्थित चिकित्सकों और प्रतिनिधियों ने सरकार के इस रुख का स्वागत किया और आशा जताई कि जल्द ही भुगतान से जुड़ी समस्याओं का समाधान होगा।

  • राहुल गांधी के खिलाफ गैर-जमानती वारंट

    2018 के मानहानि का है मामला

    परवेज़ आलम.

    रांची/चाईबासा:  लोकसभा मे विपक्ष के नेता  और काँग्रेस पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी एक बार फिर कानूनी संकट में घिरते नजर आ रहे हैं। झारखंड के चाईबासा कोर्ट ने उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया है। यह कार्रवाई 2018 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को लेकर दिए गए विवादास्पद बयान पर दर्ज मानहानि मामले में की गई है।

    चाईबासा के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (CJM) की अदालत ने राहुल गांधी को 26 जून 2025 को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया है। इसके खिलाफ राहुल गांधी ने झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर वारंट को रद्द करने की मांग की है।

    क्या है पूरा मामला?

    यह मामला 28 मार्च 2018 का है, जब कांग्रेस अधिवेशन के दौरान राहुल गांधी ने अपने भाषण में भाजपा और उस समय के अध्यक्ष अमित शाह के खिलाफ कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इसके बाद भाजपा नेता प्रताप कुमार ने जुलाई 2018 में राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का मुकदमा चाईबासा CJM कोर्ट में दायर किया था।

    कोर्ट में अनुपस्थिति बनी विवाद का कारण.

    मामले की सुनवाई के दौरान चाईबासा कोर्ट ने राहुल गांधी को कई बार समन जारी कर पेश होने का निर्देश दिया। लेकिन वे शारीरिक रूप से कोर्ट में उपस्थित नहीं हुए। कोर्ट ने पहले समन, फिर बेलबिल वारंट भेजा, लेकिन अनुपस्थिति जारी रहने पर आखिरकार 24 मई 2025 को गैर-जमानती वारंट जारी कर दिया गया।

    हाईकोर्ट में पहले से लंबित है एक याचिका.

    राहुल गांधी के वकीलों ने इस मामले में पहले ही झारखंड हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर रखी है, जिसमें शारीरिक उपस्थिति से छूट की मांग की गई है। यह याचिका फिलहाल लंबित है। इसी बीच चाईबासा कोर्ट द्वारा गैर-जमानती वारंट जारी कर दिए जाने के बाद, अब उन्होंने एक और याचिका दायर कर इस वारंट को कानूनी रूप से निरस्त करने की अपील की है।

    ग्रीष्मकालीन अवकाश बना बाधा.

    राहुल गांधी की याचिका झारखंड हाईकोर्ट में दाखिल हो चुकी है, लेकिन फिलहाल अदालत ग्रीष्मकालीन अवकाश पर है। ऐसे में इस पर तत्काल सुनवाई संभव नहीं है। यदि कोई विशेष पीठ गठित न की गई, तो यह मामला अवकाश के बाद ही सूचीबद्ध किया जा सकता है।

    राजनीतिक पृष्ठभूमि और संभावित असर.

    यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब कांग्रेस राज्य में विपक्ष को सक्रिय करने की रणनीति पर काम कर रही है। राहुल गांधी पर जारी यह वारंट न सिर्फ उनके खिलाफ कानूनी दबाव बढ़ाता है, बल्कि कांग्रेस की राज्य इकाई के लिए भी एक नई चुनौती खड़ी करता है। हालांकि कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह मामला राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा है।

    राहुल गांधी की ओर से हाईकोर्ट में राहत की उम्मीद की जा रही है, लेकिन कोर्ट की कार्यवाही अवकाश के कारण स्थगित है। आने वाले हफ्तों में यह देखना दिलचस्प होगा कि अदालत इस मामले में क्या रुख अपनाती है, और क्या राहुल गांधी को 26 जून को चाईबासा कोर्ट में पेश होना पड़ेगा या उन्हें राहत मिलती है।

  • रांची एयरपोर्ट पर बड़ा हादसा टला: पायलट की सूझबूझ से 175 यात्रियों की जान बची

    By The News Post4u.

    रांची: सोमवार को रांची के बिरसा मुंडा हवाई अड्डे पर एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया, जब पटना से आ रहा इंडिगो का एक विमान लैंडिंग से ठीक पहले पक्षी से टकरा गया। विमान में सवार सभी 175 यात्री पूरी तरह सुरक्षित हैं, और पायलट की सूझबूझ से विमान की आपात लैंडिंग कराई गई।

    एयरपोर्ट अधिकारियों के अनुसार, यह घटना दोपहर करीब 1:14 बजे घटी, जब एयरबस A320 विमान रांची एयरस्पेस में प्रवेश कर रहा था। उस समय विमान जमीन से लगभग 3000 से 4000 फीट की ऊंचाई पर, रनवे से करीब 10-12 नॉटिकल मील दूर था। अचानक एक गिद्ध से टक्कर हो गई, जिससे विमान की बाहरी संरचना को नुकसान पहुंचा।

    40 मिनट तक हवा में बनाए रखा नियंत्रण.
    पक्षी से टकराने के तुरंत बाद पायलट ने विमान को नियंत्रित रखा और आपातकालीन प्रोटोकॉल के तहत विमान को करीब 40 मिनट तक हवा में मंडराते हुए सुरक्षित स्थिति में लाया। इस दौरान एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) से सतत संपर्क बना रहा। आखिरकार पायलट ने अत्यंत सावधानीपूर्वक विमान की आपात लैंडिंग कराई।

    सिर्फ विमान को हुआ नुकसान, यात्री पूरी तरह सुरक्षित.
    विमानन अधिकारियों ने राहत की सांस लेते हुए बताया कि किसी भी यात्री को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। हालांकि, विमान के एक हिस्से में डेंट पाया गया है, जिसकी जांच एयरलाइंस के इंजीनियर कर रहे हैं। एयरपोर्ट निदेशक आर.आर. मौर्य ने बताया, “यह गनीमत रही कि केवल विमान को हल्का नुकसान हुआ, सभी यात्री पूरी तरह सुरक्षित हैं।”

    विमान की तकनीकी जांच जारी.
    फिलहाल विमान को तकनीकी जांच के लिए रनवे से हटा लिया गया है। विमानन विशेषज्ञ यह मूल्यांकन कर रहे हैं कि क्षति कितनी गंभीर है और विमान को दोबारा उड़ान के लिए कब तक तैयार किया जा सकता है।

    बर्ड हिट की घटनाओं पर बढ़ती चिंता.
    यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि हवाई अड्डों के आसपास पक्षियों की बढ़ती मौजूदगी विमानों की सुरक्षा के लिए कितनी गंभीर चुनौती बनती जा रही है। विशेष रूप से बड़े पक्षी, जैसे गिद्ध, विमान के इंजन या संरचना को गंभीर क्षति पहुँचा सकते हैं। इससे पहले भी कई बार बर्ड हिट की घटनाएं देश के विभिन्न एयरपोर्ट्स पर सामने आ चुकी हैं।
    इस घटना में कोई जानमाल का नुकसान नहीं हुआ, लेकिन यह घटना यह याद दिलाती है कि हवाई सुरक्षा में पायलटों की सतर्कता और तकनीकी कुशलता कितनी अहम होती है। साथ ही यह भी ज़रूरी है कि एयरपोर्ट्स के आसपास के क्षेत्रों में वन्यजीव नियंत्रण और निगरानी को और प्रभावी बनाया जाए।