Category: Jharkhand
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किसान मेला: नई तकनीक और संभावनाओं का संगम
गिरिडीह के झंडा मैदान में जिला स्तरीय किसान मेला-सह-फसल प्रदर्शनी कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि उपायुक्त नमन प्रियेश लकड़ा और जिला परिषद अध्यक्ष मुनिया देवी ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर जिले के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, प्रखंड स्तरीय पदाधिकारी, और सैकड़ों किसान उपस्थित थे। -
झारखंड की बेटी सलीमा टेटे को ‘अर्जुन पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने हॉकी खिलाड़ी सलीमा टेटे को हॉकी में उनकी असाधारण उपलब्धियों के लिए प्रतिष्ठित ‘अर्जुन पुरस्कार 2024’ से सम्मानित किया। इस पुरस्कार से कुल 32 खिलाड़ियों को नवाजा गया, जिनमें झारखंड के सिमडेगा की बेटी सलीमा टेटे का नाम भी शामिल है। सभी खिलाड़ियों को यह सम्मान 17 जनवरी 2025 को सुबह 11 बजे राष्ट्रपति भवन, दिल्ली में आयोजित एक विशेष समारोह में प्रदान किया गया।
सलीमा टेटे, जो सिमडेगा जिले के बड़की छापर गांव की रहने वाली हैं, वर्तमान में भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तान भी हैं। अर्जुन पुरस्कार के लिए उनके चयन के बाद झारखंड के खेल प्रेमियों में खुशी की लहर दौड़ गई है। हालांकि, सलीमा का सफर इतना आसान नहीं था। उन्होंने अपने जीवन में कई कठिनाइयों का सामना किया है और कठिन परिस्थितियों से लड़कर यह मुकाम हासिल किया है।
सलीमा टेटे झारखंड की पहली महिला हॉकी खिलाड़ी हैं, जिन्हें अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। इससे पहले झारखंड के ओलंपियन दिवंगत माइकल किंडो को यह पुरस्कार मिला था। पिछले 10 वर्षों में झारखंड के तीन हॉकी खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है—सिलबानुस डुंगडुंग और माइकल किंडो को मेजर ध्यानचंद अवार्ड से सम्मानित किया गया, और अब सलीमा टेटे को अर्जुन पुरस्कार प्राप्त हुआ है।
कल्पना सोरेन ने भी दिया बधाई।
बधाई सलीमा!
अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित होने पर झारखण्ड की बेटी सलीमा टेटे को हार्दिक बधाई, शुभकामनाएं और जोहार।
आपने अपने शानदार खेल से हॉकी के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छुआ है। आपकी यह उपलब्धि न केवल झारखण्ड बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का क्षण है। आप इसी तरह अपने खेल से युवा… pic.twitter.com/hbFi2KUiiS
— Kalpana Murmu Soren (@JMMKalpanaSoren) January 17, 2025
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सभी जिलों में जन शिकायत समाधान कार्यक्रम 22 जनवरी को-DGP
झारखंड में जन शिकायत समाधान कार्यक्रम एक बार फिर से सुर्खियों में है। आगामी 22 जनवरी को राज्य के सभी 24 जिलों में इस कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। डीजीपी अनुराग गुप्ता ने इस संबंधमें सभी जिलों के एसएसपी और एसपी को निर्देश जारी किए हैं। खास बात यह है कि कार्यक्रम उन्हीं स्थानों पर आयोजित किया जाएगा, जहां पहले इसे सफलतापूर्वक संपन्न किया गया था।
यह कार्यक्रम इससे पहले 18 दिसंबर 2024 और 10 सितंबर 2024 को आयोजित हो चुका है। कार्यक्रम का उद्देश्य नागरिकों की पुलिस से संबंधित शिकायतों को न केवल पंजीकृत करना है, बल्कि त्वरित और प्रभावी समाधान प्रदान करना भी है।
कार्यक्रम के मुख्य उद्देश्य:
- शिकायतों का पंजीकरण और समाधान: पुलिस से जुड़ी समस्याओं को दर्ज कर समाधान प्रक्रिया से नागरिकों को अवगत कराना।
- कार्रवाई की जानकारी: शिकायतों पर पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई की स्थिति से शिकायतकर्ताओं को अपडेट देना।
- समयबद्ध कार्रवाई: यदि किसी शिकायत का समाधान तय समयसीमा में नहीं होता, तो उसे वरिष्ठ अधिकारियों को
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सरकार की योजनाओं को जनकल्याण के लिए प्रभावी बनाएँ अधिकारी -मंत्री अन्नपूर्णा देवी
गिरिडीह : जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति ‘दिशा’ की बैठक गुरुवार को समाहरणालय स्थित सभागार कक्ष में आयोजित हुई। इस बैठक की अध्यक्षता कोडरमा लोकसभा क्षेत्र की सांसद एवं केंद्रीय महिला और बाल विकास मंत्री, श्रीमतीने की। बैठक में जिले में चल रही विभिन्न सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर व्यापक चर्चा की गई। साथ ही, पूर्व में दिए गए निर्देशों की समीक्षा और उन पर विचार-विमर्श किया गया। उपायुक्त ने वर्तमान में संचालित योजनाओं की प्रगति के बारे में जानकारी दी।
चर्चा के मुख्य बिंदु और निर्देश:
बैठक में स्वास्थ्य, शिक्षा, ग्रामीण विकास और कल्याणकारी योजनाओं के क्षेत्र में प्रगति और चुनौतियों की समीक्षा की गई। केंद्रीय मंत्री ने निर्देश दिया कि वर्तमान वित्तीय वर्ष में सभी योजनाओं को निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा किया जाए। लंबित मुद्दों को तत्काल हल करने पर जोर दिया गया।
पेयजल और स्वच्छता:
पेयजल योजनाओं की गहन समीक्षा की गई। मंत्री ने उपायुक्त की अगुवाई में एक निगरानी समिति गठित करने के निर्देश दिए, जिसमें पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के अधिकारियों और स्थानीय प्रतिनिधियों को शामिल किया जाएगा। यह समिति परियोजनाओं की सतत निगरानी करेगी और क्षेत्रीय समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करेगी।
बुनियादी ढांचा विकास:
सड़क और पुल निर्माण परियोजनाओं के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए एक अलग समिति के गठन की घोषणा की गई। इस पहल का उद्देश्य पारदर्शिता को बढ़ावा देना और निर्माण कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करना है।
स्वास्थ्य क्षेत्र:
स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों, दवाइयों और उपकरणों की उपलब्धता को लेकर चर्चा हुई। सिविल सर्जन को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया कि सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हों। बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली लागू कर स्टाफ की उपस्थिति पर निगरानी रखी जाएगी।
सामाजिक कल्याण योजनाएं:
सामाजिक कल्याण विभाग की योजनाओं की समीक्षा करते हुए मंत्री ने आंगनबाड़ी केंद्रों और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के सतत निरीक्षण के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित होना चाहिए।
शिक्षा क्षेत्र:
जर्जर विद्यालय भवनों की स्थिति पर चर्चा हुई। जिला शिक्षा अधिकारी और संबंधित अभियंताओं को विद्यालय भवनों का आकलन कर आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया।
बिजली आपूर्ति:
बिजली बिल और आपूर्ति से संबंधित शिकायतों को लेकर चर्चा हुई। मंत्री ने कार्यपालक अभियंता को इन शिकायतों को त्वरित सुलझाने और सही बिलिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
जनप्रतिनिधियों की राय:
बैठक में विभिन्न जनप्रतिनिधियों ने स्वास्थ्य, मनरेगा, सामाजिक सुरक्षा पेंशन और कौशल विकास योजनाओं जैसे क्षेत्रों में विकास कार्यों की प्रगति पर अपने विचार साझा किए।
- बगोदर विधायक नागेंद्र महतो ने ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि, शिक्षा और स्वास्थ्य के विकास पर जोर देते हुए सभी विभागों से कल्याणकारी योजनाओं का लाभ सही लाभार्थियों तक पहुंचाने की अपील की।
- जमुआ विधायक मंजु कुमारी ने योजनाओं के क्रियान्वयन में गुणवत्ता बनाए रखने और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
- डुमरी विधायक जयराम महतो ने समयबद्ध तरीके से योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचाने पर जोर दिया।
उपायुक्त नमन प्रियेश लकड़ा ने कहा कि जिला प्रशासन की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि केंद्र और राज्य सरकार की योजनाएं आम जनता तक सुगमता से पहुंचे। उन्होंने कहा, “कार्य की गुणवत्ता के साथ समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता है। सभी अधिकारी सकारात्मक सोच के साथ अपनी जिम्मेदारी निभाएं।”

बैठक का समापन केंद्रीय मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी के इस संदेश के साथ हुआ कि योजनाओं के सफल क्रियान्वयन के लिए पारदर्शिता, गुणवत्ता, और सामूहिक जिम्मेदारी आवश्यक है। सभी अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से सरकार की योजनाओं को जनकल्याण के लिए प्रभावी बनाने का आह्वान किया गया।
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चार महीने में निकाय चुनाव होने चाहिए-झारखंड हाईकोर्ट
झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को नगर निकाय चुनाव चार महीने में कराने का सख्त आदेश दिया है। जस्टिस आनंद सेन की बेंच ने यह निर्देश अवमानना याचिका पर सुनवाई के बाद दिया। याचिका रोशनी खलखो और अन्य की ओर से दायर की गई थी। सुनवाई के दौरान राज्य की मुख्य सचिव अलका तिवारी और नगर विकास सचिव सुनील कुमार कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहे।
कोर्ट ने भारत निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया है कि वह अद्यतन मतदाता सूची राज्य निर्वाचन आयोग को प्रदान करे ताकि चुनाव की प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके। साथ ही, मुख्य सचिव को अगली सुनवाई में उपस्थित होने से छूट दे दी गई है।
कई जिलों में ट्रिपल टेस्ट की प्रक्रिया लगभग पूरी.
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने 4 जनवरी 2024 को दिए गए आदेश का पालन न करने पर नाराजगी जाहिर की। अदालत ने पूछा कि अब तक चुनाव की तारीखें क्यों घोषित नहीं हुईं। इसके जवाब में राज्य सरकार ने बताया कि नगर निकायों में पिछड़े वर्गों को आरक्षण देने के लिए ट्रिपल टेस्ट प्रक्रिया चल रही है, जो कई जिलों में पूरी हो चुकी है और कुछ में अंतिम चरण में है। इसके अलावा, भारत निर्वाचन आयोग से अब तक अद्यतन मतदाता सूची प्राप्त न होने को भी देरी का कारण बताया गया।
क्या ट्रिपल टेस्ट के बिना भी हो सकते हैं चुनाव?
याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेश के अनुसार, ट्रिपल टेस्ट की प्रक्रिया पूरी होने तक चुनाव टालना गैरकानूनी है। उन्होंने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार चुनाव कराने में रुचि नहीं रखती। इस आधार पर उन्होंने सरकार के खिलाफ अवमानना का मामला चलाने की मांग की।
चुनाव में देरी पर कोर्ट नाराज.
कोर्ट ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि नगर निकाय चुनाव न कराना अवमानना का स्पष्ट मामला है। हाईकोर्ट ने 13 जनवरी को हुई पिछली सुनवाई में भी कहा था कि ओबीसी आरक्षण के नाम पर चुनाव टालना स्वीकार्य नहीं है।
गौरतलब है कि झारखंड में नगर निकायों का कार्यकाल अप्रैल 2023 में समाप्त हो गया था। नए कार्यकाल के लिए चुनाव 27 अप्रैल 2023 तक हो जाने चाहिए थे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब हाईकोर्ट के सख्त आदेश के बाद राज्य सरकार पर चुनाव प्रक्रिया जल्द पूरी करने का दबाव बढ़ गया है।
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गिरिडीह में दर्दनाक हादसा तीन लोगों की मौत
गिरिडीह: जिले के डुमरी पथ पर चैनपुर में एक दर्दनाक हादसा हुआ, जिसने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया। बुधवार और गुरुवार की दरमियानी रात एक अज्ञात वाहन ने आइसक्रीम बेचने वालों की वैन को टक्कर मार दी। हादसे में वैन में सवार तीन लोगों की मौत हो गई। मृतकों की पहचान निमियाघाट थाना क्षेत्र के लक्ष्मणटुंडा निवासी 53 वर्षीय देवचंद साव, केंदुआडीह निवासी 16 वर्षीय थानू कुमार और रंगामाटी निवासी 38 वर्षीय घनश्याम साव के रूप में हुई है।
मेले से लौटते वक्त हुआ हादसा.
मधुबन थाना के चौकीदार इंद्रदेव महतो ने बताया कि बुधवार को मधुबन में मेले का आयोजन था। तीनों मृतक इसी मेले में आइसक्रीम बेचने आए थे। मेले का काम खत्म करने के बाद वे वैन में सवार होकर घर लौट रहे थे, लेकिन रास्ते में चैनपुर के पास अज्ञात वाहन ने वैन को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि वैन के परखच्चे उड़ गए।
पुलिस ने संभाला मोर्चा.
घटना की जानकारी मिलते ही मधुबन थाना पुलिस मौके पर पहुंची। शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेजा गया। गुरुवार दोपहर को पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिए गए।
परिजनों में मातम,
इस हादसे के बाद से मृतकों के परिवारों में कोहराम मचा हुआ है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं, स्थानीय लोगों ने प्रशासन से अज्ञात वाहन और उसके चालक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
यह घटना सिर्फ एक सड़क हादसा नहीं, बल्कि उन गरीब परिवारों की रोजी-रोटी छिन जाने का गम है। ऐसे में सवाल उठता है कि कब तक लापरवाही भरी ड्राइविंग मासूम जिंदगी को यूं खत्म करती रहेगी?
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झारखंड में होगा राज्य स्तरीय युवा महोत्सव- सुदिव्य कुमार सोनू
RANCHI: झारखंड के पर्यटन, कला-संस्कृति, खेलकूद व युवा कार्य मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने घोषणा की है कि राज्य सरकार झारखंड में भी राज्य स्तरीय युवा महोत्सव का आयोजन करेगी। इसमें पूरे राज्य से युवा प्रतिभागी शामिल होंगे और अपनी प्रतिभा और विचारों से राज्य के विकास में योगदान देंगे। मंत्री सोनू ने नई दिल्ली में 10 से 12 जनवरी 2025 तक आयोजित राष्ट्रीय युवा महोत्सव में भाग लेकर लौटे झारखंड के प्रतिभागियों का बुधवार को सम्मान समारोह आयोजित कर प्रतिभागियों को अंग वस्त्र और स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया।
राष्ट्रीय युवा महोत्सव में भाग लेने वाले युवाओं की सराहना करते हुए उन्होंने कहा, “आपने न केवल झारखंड का नाम रोशन किया है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा भी बने हैं। आपकी मेहनत और समर्पण ने यह साबित किया है कि झारखंड के युवा किसी से कम नहीं।”
मंत्री ने कहा, “झारखंड के युवाओं में असीमित प्रतिभा है। उनके पास हर क्षेत्र में परचम लहराने की क्षमता है। जरूरत है केवल सही मार्गदर्शन और प्रोत्साहन की। राज्य सरकार हर संभव प्रयास कर रही है कि युवाओं को उनके लक्ष्य तक पहुँचने में मदद मिले।”
युवाओं को दी किताबों से दोस्ती करने की सलाह।
मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने युवाओं को किताबों से दोस्ती करने की सलाह देते हुए कहा, “ज्ञान प्राप्त करने का सबसे सरल और प्रभावी तरीका किताबें हैं। ये न केवल हमारी सोच को व्यापक बनाती हैं, बल्कि हमें सही निर्णय लेने की क्षमता भी देती हैं। आज का युवा बहुत तेज है। उसे तर्क और सवाल करने की आदत विकसित करनी चाहिए। युवाओं का उत्साह और ऊर्जा राज्य और देश के विकास की नींव है।” उन्होंने यह भी कहा, “जब तक हमारे गांव, शहर और राज्य मजबूत नहीं होंगे, तब तक देश को मजबूती नहीं मिल सकती। राज्य के विकास के बिना देश के विकास की कल्पना अधूरी है।”
प्रतिभागियों ने बढ़ाया झारखंड का मान।
इस महोत्सव में दुमका की स्वाति राज ने भाषण प्रतियोगिता में दूसरा स्थान प्राप्त किया। वहीं, गुमला की शुभांगी क्षितिजा सौरभ और जमशेदपुर के ऋषित ने प्रधानमंत्री के समक्ष “विकास भी, विरासत भी” विषय पर प्रस्तुति दी। मंत्री ने इन प्रतिभागियों और उनकी टीम के लीडर्स को विशेष रूप से सम्मानित किया।
मंत्री ने इन सभी युवाओं को बधाई देते हुए कहा कि उनकी उपलब्धियां झारखंड के हर युवा के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। “आपकी मेहनत और सफलता झारखंड की ताकत है। हम चाहते हैं कि आने वाले समय में और भी युवा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर राज्य का नाम रोशन करें।”
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महेंद्र सिंह: झारखंड के जननेता को शहादत दिवस पर नमन
परवेज़ आलम की खास रिपोर्ट ………..
16 जनवरी झारखंड के लिए एक खास तारीख है। यह दिन उस नेता की याद दिलाता है, जिसने गरीबों, मजदूरों और शोषितों की आवाज़ को बुलंद किया। स्वर्गीय महेंद्र सिंह की शहादत दिवस पर आज झारखंड उन्हें नमन कर रहा है।
सादगी और संघर्ष से भरा जीवन।
महेंद्र सिंह का जन्म 1944 में गिरिडीह के छोटे से गांव खंभरा में हुआ। सीमित शिक्षा के बावजूद, उनका ज्ञान और जागरूकता बेमिसाल थी। किताबों और अखबारों से उनका गहरा लगाव था। वह राजनीति को कुर्सी का खेल नहीं, बल्कि जनसेवा का माध्यम मानते थे।

महेंद्र सिंह ने अपने करियर की शुरुआत लाल सेना के गुरिल्ला नेता के रूप में की। शुरुआत में चुनावी राजनीति के खिलाफ रहने वाले महेंद्र सिंह ने वक्त के साथ अपने विचार बदले और बिहार विधानसभा चुनाव में कूद पड़े। गिरिडीह के बगोदर विधानसभा क्षेत्र से उन्होंने लगातार जीत दर्ज की और गरीबों के सच्चे रहनुमा बने।वे सीपीआई(एमएल) के नेता थे, लेकिन उनकी पहचान केवल पार्टी तक सीमित नहीं थी।

ईमानदारी और साहस की मिसाल।
महेंद्र सिंह के लिए राजनीति का मतलब था अन्याय के खिलाफ लड़ाई। उन्होंने खदान मालिकों, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाहियों के खिलाफ आवाज़ उठाई। सत्ता पर तीखा वार करना और जनता के हक की बात करना उनकी पहचान थी। यही वजह है कि वह नक्सल प्रभावित इलाकों में भी उतने ही लोकप्रिय थे जितने ग्रामीण क्षेत्रों में।
झूठे मामलों में फंसाए गए, पर हिम्मत नहीं हारी।
1980 के दशक में सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में उन्होंने प्रभावशाली लोगों को चुनौती दी। इसके चलते उन्हें झूठे हत्या के मामले में फंसा दिया गया। निचली अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई, लेकिन हाईकोर्ट ने उन्हें बाइज्जत बरी कर दिया। जेल में भी उन्होंने अन्य कैदियों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया।
शहादत: विचारधारा को कुचलने की कोशिश।
2005 में 16 जनवरी को महेंद्र सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह घटना उस वक्त हुई, जब वे चुनावी सभा को संबोधित कर रहे थे। उनकी हत्या केवल एक व्यक्ति पर हमला नहीं थी, बल्कि एक विचारधारा को खत्म करने की कोशिश थी। लेकिन महेंद्र सिंह के विचार आज भी हर उस व्यक्ति के दिल में जिंदा हैं, जो न्याय और समानता की बात करता है।

झारखंड को एक नई राह दिखाने वाले नेता।
महेंद्र सिंह की सादगी, ईमानदारी और साहस आज भी झारखंड के लोगों को प्रेरणा देते हैं। उनकी याद में हर साल बगोदर और उनके गांव खंभरा में लोग जुटते हैं। यह साबित करता है कि महेंद्र सिंह का आंदोलन कभी खत्म नहीं होगा।उनकी मौत के सालों बाद आज भी बगोदर विधान सभा में “महेंद्र सिंह तुम जिंदा हो खेतों व खलिहानों में, जनता के अरमानो में नारे गाँव में गूंजती है”.

महेंद्र सिंह को नमन। उनकी विरासत हमें यह सिखाती है कि राजनीति केवल सत्ता का खेल नहीं, बल्कि जनता के लिए एक मिशन हो सकता है।
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JPSC: हाईकोर्ट ने CBI को जांच रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने का निर्देश
झारखंड की बहुप्रतीक्षित प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी के आरोप एक बार फिर सुर्खियों में हैं। झारखंड हाईकोर्ट ने जेपीएससी की पहली और दूसरी संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा में अनियमितताओं की जांच को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की।
जस्टिस रंगन मुखोपाध्याय और जस्टिस अरुण कुमार राय की खंडपीठ ने इस मामले में सीबीआई को निर्देश देते हुए कहा कि जेपीएससी की प्रथम और द्वितीय परीक्षा की जांच के बाद दायर चार्जशीट को कोर्ट के रिकॉर्ड पर लाया जाए। इसके अलावा, केस की वर्तमान स्थिति को स्पष्ट करने के लिए स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की जाए। अगली सुनवाई के लिए कोर्ट ने 5 फरवरी की तारीख तय की है।
कोर्ट ने जताई सख्ती.
सीबीआई की ओर से बताया गया कि रांची स्थित विशेष अदालत में इन मामलों में पहले ही आरोप पत्र दाखिल किए जा चुके हैं। हालांकि, स्टेटस रिपोर्ट तैयार करने के लिए और समय देने का अनुरोध किया गया। पिछली सुनवाई में कोर्ट ने सीबीआई से आरसी-5/2012 और आरसी-6/2012 नंबर के मामलों की जांच की स्थिति पर जवाब मांगा था।
कौन-कौन हैं आरोपी?
सीबीआई ने इस मामले में जेपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष डॉ. दिलीप प्रसाद को मुख्य आरोपी बनाया है। उनके साथ वरीय सदस्य गोपाल प्रसाद, सदस्य राधा गोविंद नागेश, डॉ. शांति देवी, और परीक्षा नियंत्रक एलिस उषा रानी सिंह सहित कुल 37 लोगों को आरसी-5/2012 में आरोपित किया गया। वहीं, आरसी-6/2012 मामले में डॉ. दिलीप प्रसाद सहित 70 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया है।
क्या है मामला?
झारखंड लोक सेवा आयोग की प्रारंभिक परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी और अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। इन आरोपों में मैनिपुलेशन, अयोग्य उम्मीदवारों का चयन, और नियमों का घोर उल्लंघन शामिल हैं। जनहित याचिकाओं के माध्यम से इन मामलों की जांच की मांग वर्षों से की जा रही थी।
हाईकोर्ट ने इस मामले में स्पष्ट कर दिया है कि अब और देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कोर्ट के निर्देश के बाद सीबीआई की ओर से अगली सुनवाई में स्टेटस रिपोर्ट पेश करने की संभावना है।
क्या न्याय की उम्मीद कर रहे प्रतियोगी छात्रों को इंसाफ मिलेगा, या इस मामले में भी सियासत और कानूनी दांव-पेंच के चलते सच दबा रहेगा? 5 फरवरी की सुनवाई पर अब सबकी निगाहें टिकी हैं।