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  • JSSC-CJL 2023: हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, परिणामों पर रोक, डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन जारी रहेगा

    RANCHI: झारखंड हाईकोर्ट ने जेएसएससी सीजीएल 2023 परीक्षा के परिणामों पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। हालांकि, डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन प्रक्रिया पहले की तरह जारी रहेगी।

    चीफ जस्टिस एमएस रामाचंद्र राव और जस्टिस दीपक रोशन की बेंच ने मंगलवार, 17 दिसंबर को याचिका पर सुनवाई की। याचिकाकर्ता प्रकाश कुमार और अन्य ने परीक्षा में पेपर लीक और धांधली का आरोप लगाया था। उनकी मुख्य मांग थी कि परीक्षा को रद्द कर सीबीआई जांच कराई जाए। अदालत ने सभी पक्षों को सुनने के बाद फिलहाल परिणामों पर रोक लगाते हुए अगली सुनवाई 22 जनवरी को तय की है।

    क्या है मामला?
    21 और 22 सितंबर को झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा आयोजित सीजीएल परीक्षा में धांधली के आरोप लगे। अभ्यर्थियों का कहना है कि परीक्षा में पेपर लीक हुआ है, जिसके चलते निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं।

    डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन पर हाईकोर्ट का रुख. 
    हालांकि अदालत ने परीक्षा के परिणामों पर रोक लगाई है, लेकिन डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन प्रक्रिया पर रोक नहीं लगाई गई। यह प्रक्रिया सोमवार, 16 दिसंबर से शुरू हो चुकी है।

    छात्रों का विरोध और प्रशासन की सख्ती. 
    परीक्षा में गड़बड़ी के आरोपों को लेकर अभ्यर्थियों ने परीक्षा रद्द कराने की मांग पर जोर दिया। विरोध के मद्देनजर प्रशासन ने जेएसएससी कार्यालय के आसपास धारा 144 लागू कर दी और इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया। बावजूद इसके, छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया, जिस पर पुलिस ने लाठीचार्ज कर उन्हें खदेड़ दिया।

    हाईकोर्ट का यह आदेश परीक्षा में गड़बड़ी के आरोपों की गंभीरता को दिखाता है। अब सबकी निगाहें 22 जनवरी की अगली सुनवाई पर टिकी हैं। तब तक परिणाम जारी नहीं होंगे, लेकिन डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन चलता रहेगा।

  • झारखंड हाईकोर्ट का कड़ा रुख: पुलिस के दो अफसरों को जेल की सजा

    RANCHI:झारखंड हाईकोर्ट ने पुलिसिया कार्यशैली पर सख्त रुख अपनाते हुए जगन्नाथपुर थाना के तत्कालीन प्रभारी हरिदेव प्रसाद और सब-इंस्पेक्टर राजीव रंजन को एक महीने की जेल की सजा सुनाई है। दोनों अधिकारियों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।

    यह मामला रांची के रहने वाले इरशाद से जुड़ा है। इरशाद ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि चोरी के एक मामले में उसे बिना कानूनी प्रक्रिया के गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। इसके साथ ही पुलिस हिरासत में दुर्व्यवहार और प्रताड़ना का भी आरोप लगाया गया था।

    चीफ जस्टिस की बेंच ने मामले की सुनवाई के बाद पाया कि पुलिस अधिकारियों ने कानून का उल्लंघन किया है और अपनी जिम्मेदारियों का सही निर्वहन नहीं किया। अदालत ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए सजा सुनाई।

    यह फैसला न केवल पुलिस प्रशासन के लिए एक चेतावनी है, बल्कि नागरिक अधिकारों के हनन पर न्यायपालिका के सख्त तेवर को भी दिखाता है।

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  • झारखंड की कोयला रॉयल्टी का सच… सवालों का जवाब या विवाद का नया अध्याय ?

    परवेज़ आलम की विश्लेषणात्मक रिपोर्ट…..

    झारखंड विधानसभा चुनाव से लेकर अब तक, कोयला रॉयल्टी का 1.36 लाख करोड़ रुपये का मुद्दा गर्म है। हेमंत सोरेन कहते हैं, “झारखंड को उसका हक चाहिए,” तो प्रधानमंत्री को पत्र लिखते हैं। लेकिन जवाब क्या आता है? केंद्र कहता है- “कोई बकाया नहीं।”

    लोकसभा में सवाल उठा… पप्पू यादव ने पूछा- “झारखंड का हक कब मिलेगा?” जवाब आया- झारखंड को पिछले 3 साल में 7790 करोड़ रुपये मिल चुके हैं। कोयला राजस्व में “झारखंड का कोई हिस्सा बाकी नहीं”- यह बयान देता है केंद्रीय वित्त मंत्रालय।

    लेकिन सवाल वहीं का वहीं। झारखंड सरकार कहती है कि “1.48 लाख करोड़ का बकाया है।” इसमें 32,000 करोड़ रुपये एमएमडीआर के तहत, 29,000 करोड़ रॉयल्टी के नाम पर, और 1.01 लाख करोड़ भूमि अधिग्रहण के एवज में।

    “किसका सच, किसका झूठ?” यह सवाल अब झारखंड की जनता के मन में गूंज रहा है। हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया पर कहा-
    “झारखंड के बीजेपी सांसद क्यों चुप हैं? आवाज उठाइए। झारखंड का यह पैसा राज्य के विकास के लिए जरूरी है।”

    लेकिन दूसरी तरफ, केंद्र का जवाब साफ है। बकाया नहीं, भेदभाव नहीं। सवाल उठता है कि “तो फिर झारखंड सरकार ये आंकड़े कहां से ला रही है?”

    हेमंत सोरेन की सरकार कहती है, “कानूनी रास्ता अपनाया जाएगा।” केंद्र कहता है, “जो मिला, वही हक है।”

    अब सवाल यह है कि “झारखंड की जनता किस पर भरोसा करे?”
    क्या यह सिर्फ एक आंकड़ों का खेल है, या फिर राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा? झारखंड की धरती, खनिज, और कोयले के बीच… “विकास की गूंज सुनाई देगी, या सवाल ही सवाल बाकी रहेंगे?”

  • हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन ने उज्जैन स्थित महाकाल की पूजा

    झारखंड के मुख्य मंत्री हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी गांडेय विधायक कल्पना सोरेन ने आज उज्जैन स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में  शिव के दर्शन कर महाकाल की पूजा की और झारखण्ड वासियों की समृद्धि, सुख और कल्याण की प्रार्थना की।

  • हेमंत सोरेन: सीएम को झारखंड हाईकोर्ट से बड़ी राहत!

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट ……….

    झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन , जो ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) के निशाने पर तो हैं, लेकिन हाईकोर्ट से मिली राहत ने उनकी मुश्किलों को कुछ कम कर दिया है।

    क्या है मामला?
    हेमंत सोरेन पर ईडी ने जमीन घोटाले के मामले में 10 समन जारी किए थे। लेकिन इन 10 में से उन्होंने केवल दो बार ही अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इसके बाद ईडी ने समन की अवहेलना का मामला कोर्ट में ले जाकर शिकायतवाद दर्ज कराया।

    हाईकोर्ट का फैसला। 
    झारखंड हाईकोर्ट की जस्टिस ए.के. चौधरी की बेंच ने सोमवार को इस मामले में सुनवाई करते हुए हेमंत सोरेन को व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट दी। हाईकोर्ट ने ईडी को 16 जनवरी तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

    हाईकोर्ट ने पहले ही एमपी-एमएलए कोर्ट द्वारा जारी हेमंत सोरेन के खिलाफ हाजिरी के आदेश पर रोक लगा दी थी। अब इस राहत के बाद हेमंत सोरेन को फिलहाल अदालत में पेश होने की जरूरत नहीं है।

    ईडी का आरोप। 
    ईडी ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि हेमंत सोरेन ने समन की बार-बार अवहेलना की है। 10 समन में केवल 20 और 31 जनवरी को ही वे ईडी के सामने पेश हुए। ईडी इसे कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन मान रहा है।

    हेमंत सोरेन कहां हैं?
    जब झारखंड हाईकोर्ट से राहत की खबर आई, उस समय हेमंत सोरेन दिल्ली में थे। वे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से शिष्टाचार मुलाकात के लिए गए हैं। साथ में उनकी पत्नी कल्पना सोरेन भी मौजूद हैं।

    दिल्ली दौरे के दौरान उन्होंने पहले भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे जैसे दिग्गज नेताओं से मुलाकात की थी। अब वे उज्जैन जाकर महाकाल की पूजा-अर्चना करने की योजना में हैं।

    क्या यह राहत स्थायी है?
    हालांकि हेमंत सोरेन को हाईकोर्ट से मिली यह छूट एक अस्थायी राहत है। ईडी 16 जनवरी तक जवाब दाखिल करेगा, और उसके बाद अदालत का अगला कदम क्या होगा, यह देखना दिलचस्प होगा।

    बड़ा सवाल?

    • क्या ईडी का यह केस झारखंड की राजनीति को नया मोड़ देगा?
    • क्या यह मामला सिर्फ कानूनी है, या इसके पीछे राजनीतिक साजिशें भी हैं?
    • और सबसे अहम, क्या हाईकोर्ट से मिली राहत हेमंत सोरेन को लंबे समय तक बचा पाएगी?
  • JSSC परिसर की सुरक्षा को कड़ा किया गया, छात्रों के प्रदर्शन को देखते हुए धारा-144 लागू की गई।

    जेएसएससी सीजीएल परीक्षा के कथित पेपर लीक के मामले को लेकर आज रांची के नामकुम स्थित आयोग कार्यालय के बाहर भारी संख्या में छात्रों के एकत्र होने की संभावना है। छात्रों के संभावित प्रदर्शन को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने पूरी तैयारी कर ली है। जेएसएससी कार्यालय के आसपास धारा 144 लागू कर दी गई है, और सुरक्षा के लिए 1500 से अधिक सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। इन जवानों के पास लाठी, आंसू गैस, और रबर बुलेट जैसे उपकरण उपलब्ध हैं। पूरे क्षेत्र को छावनी में तब्दील कर दिया गया है।

    रांची डीसी कार्यालय द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि अनुमंडल पदाधिकारी, सदर रांची ने अपनी शक्तियों का उपयोग करते हुए झारखंड राज्य कर्मचारी चयन आयोग कार्यालय के पास धारा 144 (सीआरपीसी की धारा 163 के तहत) लागू की है। इसके तहत इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का प्रदर्शन या धरना देना अब अवैध होगा।

    छात्रों के प्रदर्शन को देखते हुए आयोग कार्यालय के आसपास के पूरे इलाके में सख्त पुलिस सुरक्षा व्यवस्था की गई है। नामकुम क्षेत्र में व्यापक बैरिकेडिंग की गई है ताकि प्रदर्शन को नियंत्रित किया जा सके। जिला प्रशासन ने छात्रों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार के आक्रामक या हिंसक प्रदर्शन से बचें। ऐसे कृत्य न केवल कानून व्यवस्था के लिए चुनौती बनते हैं, बल्कि छात्रों के शैक्षणिक रिकॉर्ड और करियर पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं।

    प्रशासन ने चेतावनी दी है कि किसी भी हिंसक या गैरकानूनी गतिविधि में शामिल पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी, जो छात्रों के भविष्य में पुलिस वेरिफिकेशन और नौकरी पाने की संभावनाओं को प्रभावित कर सकती है। आजकल सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य हो चुका है, और नकारात्मक रिकॉर्ड आपकी करियर संभावनाओं को बाधित कर सकता है।

    छात्रों को सलाह दी गई है कि वे अपनी पढ़ाई और उज्ज्वल भविष्य को प्राथमिकता दें। यदि परीक्षा से जुड़ी कोई समस्या या शिकायत है, तो उसे शांतिपूर्ण और कानूनी तरीके से उठाएं। आक्रामकता या हिंसक प्रदर्शन से कोई समाधान नहीं निकलेगा और यह न तो छात्रों के हित में है और न ही समाज के।

  • दिनदहाड़े मर्डर: रांची में व्यापारी को बदमाशों ने मारीं 10 गोलियां, मौके पर मौत

    रांची: झारखंड की राजधानी में अपराध का एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। नामकुम थाना क्षेत्र के रिंग रोड पर बदमाशों ने एक जमीन कारोबारी की गोली मारकर हत्या कर दी। मृतक की पहचान मधुसूदन राय के रूप में हुई है, जो राजा उलिहातू इलाके के रहने वाले थे।

    कैसे हुई घटना?
    मधुसूदन राय स्कूटी पर सवार होकर कहीं जा रहे थे। जैसे ही वह रिंग रोड के सुनसान इलाके में पहुंचे, घात लगाए बदमाशों ने उन पर अंधाधुंध गोलियां बरसा दीं। बताया जा रहा है कि कारोबारी को 10 से ज्यादा गोलियां मारी गईं, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

    पुलिस की जांच तेज
    घटना की जानकारी मिलते ही नामकुम थाना प्रभारी, डीएसपी अमर कुमार पांडे, और ग्रामीण एसपी सुमित अग्रवाल मौके पर पहुंचे। एसपी ने बताया कि हत्या की पूरी योजना रेकी करके बनाई गई थी। पुलिस ने इलाके के सीसीटीवी कैमरे खंगालने शुरू कर दिए हैं और डॉग स्क्वायड टीम भी जांच में जुट गई है।

    क्या कहती है शुरुआती जांच?
    डीएसपी अमर पांडे ने बताया कि मृतक मधुसूदन राय जमीन से जुड़े कामों में सक्रिय थे। शुरुआती जांच में दुश्मनी का शक भी जताया जा रहा है, लेकिन अभी कुछ ठोस जानकारी सामने नहीं आई है।

    क्या था घटनास्थल का हाल?
    जहां हत्या हुई, वह इलाका बेहद सुनसान है। रिंग रोड होने के कारण वहां से गुजरने वाले वाहन भी कम ही थे। पुलिस को शक है कि बदमाशों ने कई दिनों तक रेकी की होगी।


    दिनदहाड़े हुए इस हत्याकांड ने राजधानी की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोग दहशत में हैं और पुलिस से सुरक्षा की मांग कर रहे हैं।

    पुलिस का दावा है कि जल्द ही अपराधियों को पकड़ लिया जाएगा। फिलहाल मधुसूदन राय का शव पोस्टमॉर्टम के लिए रिम्स भेज दिया गया है। घटना के बाद से इलाके में तनाव का माहौल है।

  • 18 दिसंबर: राजभवन मार्च करेगी कांग्रेस, केंद्र के खिलाफ प्रदर्शन

    RANCHI: कांग्रेस ने केंद्र सरकार की “जनविरोधी नीतियों” के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए 18 दिसंबर को रांची स्थित राजभवन तक मार्च का ऐलान किया है। इस विरोध प्रदर्शन में पार्टी के कार्यकर्ता, मंत्री, सांसद, विधायक, और प्रदेश के वरिष्ठ नेता शामिल होंगे।

    प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश का बयान.
    कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने संगठन के पदाधिकारियों को इस मार्च को सफल बनाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा, “केंद्र सरकार की नीतियां आम जनता के खिलाफ हैं। महंगाई, बेरोजगारी, और पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने की नीतियां देश के संविधान के खिलाफ हैं। कांग्रेस पार्टी लगातार इन मुद्दों को उठा रही है, मगर केंद्र सरकार हर सवाल से बचने की कोशिश कर रही है।”

    अडाणी प्रकरण पर सरकार को घेरा। 
    कमलेश ने अडाणी मामले को लेकर केंद्र पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “जब देश के बाहर अडाणी समूह के खिलाफ मुकदमे चल रहे हैं, तब भारत सरकार उन्हें बचाने में जुटी है। यह दिखाता है कि मौजूदा सरकार केवल पूंजीपतियों की हितैषी है, न कि जनता की।”

    कांग्रेस का राष्ट्रीय नेतृत्व सक्रिय।
    कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी लगातार जन मुद्दों पर अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। कमलेश ने कहा, “हमारा संघर्ष संविधान की रक्षा और आम जनता के अधिकारों की लड़ाई है। केंद्र सरकार की चुप्पी इस बात का सबूत है कि वह देश के सवालों का सामना नहीं करना चाहती।”

    क्या है कांग्रेस का एजेंडा?
    इस राजभवन मार्च को कांग्रेस जनता से जुड़े मुद्दों पर एक बड़े संदेश के रूप में देख रही है। पार्टी ने इसे केंद्र सरकार के खिलाफ अपनी राष्ट्रीय रणनीति का हिस्सा बताया है।

    जनता से अपील। 
    प्रदेश कांग्रेस ने झारखंड की जनता से भी इस मार्च में शामिल होने की अपील की है। पार्टी का कहना है कि यह प्रदर्शन हर उस व्यक्ति की आवाज को बुलंद करेगा, जो महंगाई और अन्याय से परेशान है।

    क्या होगा असर?
    कांग्रेस के इस प्रदर्शन से झारखंड की राजनीति में हलचल तेज होने की संभावना है। 18 दिसंबर का दिन राजनीतिक रूप से अहम हो सकता है।

  • राष्ट्रीय लोक अदालत: 63,389 मामलों का हुआ ऑन द स्पॉट समाधान

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट

    गिरिडीह की धरती पर न्याय का ऐसा महाकुंभ लगा, जिसे कहते हैं राष्ट्रीय लोक अदालत। शनिवार को व्यवहार न्यायालय परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में 63,389 मामलों का समाधान हुआ। सोचिए, यह सिर्फ संख्या नहीं, बल्कि उन हजारों चेहरों पर लौटी मुस्कान की कहानी है।
    कितना हुआ समाधान?
    इस लोक अदालत में प्री-लिटिगेशन और लंबित मामलों का निपटारा किया गया। इसके साथ ही 20 करोड़ 40 लाख 74 हजार 719 रुपए की राशि संबंधित पक्षों को दी गई, जिसमें राजस्व के रूप में भी राशि शामिल है।
    कौन-कौन हुआ शामिल?
    कार्यक्रम का उद्घाटन हुआ दीप प्रज्वलन से। मंच पर थे प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार पांडेय, उपायुक्त नमन प्रियेश लकड़ा, एसपी डॉक्टर विमल कुमार, और बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रकाश सहाय। इनके साथ अन्य न्यायिक दंडाधिकारी भी शामिल हुए।
    क्या बोले न्यायाधीश?
    प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार पांडेय ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत का उद्देश्य छोटे-छोटे विवादों का ऑन द स्पॉट समाधान करना है। खासकर ग्रामीण इलाकों में, जहां लंबित मामलों का बोझ अक्सर परिवारों पर भारी पड़ता है।
    प्रशासन की भूमिका
    डीसी नमन प्रियेश लकड़ा और एसपी डॉक्टर विमल कुमार ने भी इस पहल की सराहना की। उन्होंने कहा, “यह सिर्फ विवाद सुलझाने का मंच नहीं, बल्कि विश्वास लौटाने की प्रक्रिया है।” जिला और पुलिस प्रशासन समय-समय पर लोगों को इस पहल के प्रति जागरूक करता है।
    अधिवक्ता संघ की अपील
    जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष प्रकाश सहाय ने लोक अदालत की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए पक्षकारों से अधिक से अधिक मामले निपटाने की अपील की।
    कार्यक्रम का संचालन
    कार्यक्रम को विधिक सेवा प्राधिकार की सचिव सोनम बिश्नोई ने कुशलता से संचालित किया।
    तोलोक अदालत से यह साफ हो गया कि समाधान मुश्किल नहीं, बस एक सही मंच की जरूरत है। गिरिडीह ने एक बार फिर यह साबित किया कि न्याय और आपसी सुलह से बड़ी कोई जीत नहीं।

  • झारखंड में मंईयां सम्मान योजना :लाभुकों की संख्या में भारी बढ़ोतरी

    RANCHI: झारखंड सरकार की महत्वाकांक्षी मंईयां सम्मान योजना ने हेमंत सोरेन सरकार की सत्ता में वापसी में निर्णायक भूमिका निभाई। चुनाव के चार महीने पहले शुरू की गई इस योजना का असर अब साफ दिखाई दे रहा है। चुनावी नतीजों के बाद सिर्फ 15 दिनों में इस योजना के लाभुकों की संख्या में पांच लाख की बढ़ोतरी हुई, जो अब बढ़कर 64 लाख 62 हजार तक पहुंच चुकी है।

    चुनाव से पहले और बाद का अंतर
    महिला एवं बाल विकास कल्याण विभाग के अनुसार, चुनाव से पहले आचार संहिता लागू होने तक इस योजना के तहत पंजीकृत लाभुकों की संख्या 59 लाख थी। चुनाव के बाद 15 दिनों के भीतर यह आंकड़ा 64 लाख पार कर गया। इनमें से 53 लाख 65 हजार 345 लाभुकों को सहायता राशि प्रदान करने की स्वीकृति भी मिल चुकी है।

    क्रिसमस पर महिलाओं को मिलेगा बड़ा तोहफा
    दिसंबर में महिलाओं के खातों में इस योजना के तहत 1000 रुपये के बजाय 2500 रुपये ट्रांसफर किए जाएंगे। यह राशि 18 से 20 दिसंबर के बीच रिलीज होने की संभावना है, ताकि क्रिसमस से पहले इसे महिलाओं के बैंक खाते में पहुंचाया जा सके। इसके बाद हर महीने महिलाओं को 2500 रुपये की सहायता राशि दी जाएगी।

    गलत लाभ लेने वालों पर सख्त कार्रवाई
    सरकार ने इस योजना के तहत गलत तरीके से लाभ उठाने वालों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। समाज कल्याण आयुक्त ने सभी उपायुक्तों को निर्देश दिया है कि जो लोग केंद्र या राज्य सरकार से जुड़ी किसी भी संस्था में कार्यरत हैं, उन्हें योजना का लाभ लेने से रोका जाए। ऐसे मामलों में वसूली का आदेश भी जारी किया गया है।

    21 जिलों में लाभुकों की संख्या 1 लाख से अधिक
    राज्य के 24 में से 21 जिलों में योजना के लाभुकों की संख्या एक लाख से अधिक है। सबसे अधिक लाभुक रांची जिले में हैं, जहां 5.23 लाख महिलाओं ने पंजीकरण कराया है। इनमें से 4.29 लाख के खाते में राशि ट्रांसफर की जाएगी। वहीं, सबसे कम लाभ सिमडेगा जिले में है, जहां 83 हजार महिलाएं इस योजना से जुड़ी हैं।

    खूंटी, लोहरदगा और सिमडेगा पिछड़े
    केवल तीन जिले, लोहरदगा, खूंटी और सिमडेगा, ऐसे हैं जहां लाभुकों की संख्या एक लाख से कम है। बाकी जिलों में यह आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है।

    मंईयां सम्मान योजना ने न केवल महिलाओं के जीवन में आर्थिक सुधार लाया है बल्कि चुनावी राजनीति में भी अपनी अहमियत साबित की है।