Category: Politics

  • JPSC-JSSC आंदोलन के बीच झारखंड में सियासी हलचल तेज

    परवेज़ आलम.

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    रांची। झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। सड़क से लेकर अस्पताल तक और सरकार से लेकर राजभवन तक—हर स्तर पर हलचल बढ़ गई है। इसी बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रोजेक्ट बिल्डिंग में अपने कैबिनेट सहयोगियों के साथ अहम बैठक बुलाई है। दूसरी ओर, CID ने बड़ी कार्रवाई करते हुए JPSC की पूर्व सदस्य अजीता भट्टाचार्य के PA ब्रज कुमार दास को हिरासत में लिया है। CID की टीम उनसे पूछताछ कर रही है।

    सरकार और छात्रों के बीच चौथे दौर की बातचीत

    छात्र आंदोलन के बीच सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच सोमवार को चौथे दौर की वार्ता शुरू हुई। बातचीत शाम करीब साढ़े सात बजे शुरू हुई। इससे पहले छात्रों को मोरहाबादी स्थित स्टेट गेस्ट हाउस बुलाया गया था।

    प्रशासन की ओर से छात्रों के प्रतिनिधियों को गाड़ियों से गेस्ट हाउस ले जाया गया, लेकिन वहां पहुंचने के बाद उन्हें बताया गया कि मुख्यमंत्री पहले मंत्रियों के साथ बैठक करेंगे। इसके बाद छात्रों के साथ बातचीत की जाएगी।

    अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार और छात्रों के बीच होने वाली यह वार्ता किसी ठोस समाधान तक पहुंचती है या नहीं।

    CID की कार्रवाई, पूर्व JPSC अध्यक्ष से भी हुई पूछताछ

    जांच के सिलसिले में JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांगते से करीब 48 घंटे तक पूछताछ की गई। CID ने 15 अगस्त को उन्हें पूछताछ के लिए रिमांड पर लिया था। पूछताछ पूरी होने के बाद सोमवार को उन्हें अदालत में पेश किया गया। न्यायालय के आदेश के बाद उन्हें दोबारा न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

    इसके साथ ही JPSC की पूर्व सदस्य अजीता भट्टाचार्य के PA ब्रज कुमार दास को हिरासत में लेकर पूछताछ किए जाने से जांच का दायरा और बढ़ता दिखाई दे रहा है।

    चयनित अभ्यर्थियों की सरकार से अपील

    इधर, JSSC-CGL के चयनित अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर उनके भविष्य पर गंभीरता से विचार करने की अपील की है।

    चयनित अभ्यर्थियों ने प्रोजेक्ट भवन के निकट मानव श्रृंखला बनाकर अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की। उनका कहना है कि चयन प्रक्रिया को लेकर पैदा हुई परिस्थितियों का सीधा असर उनके भविष्य पर पड़ रहा है।

    16वें दिन भी जारी देवेंद्र महतो का अनशन

    छात्र आंदोलन के बीच देवेंद्र नाथ महतो का आमरण अनशन भी लगातार जारी है। भूख हड़ताल के 16वें दिन उनकी स्वास्थ्य स्थिति चिंताजनक बताई गई। सोमवार को उनका रक्तचाप 84/39 mmHg दर्ज किया गया।

    15 अगस्त के बाद से लगातार जांच में उनका BP कम पाया जा रहा था और सोमवार को यह और नीचे चला गया। फिलहाल सदर अस्पताल में उनकी मेडिकल जांच और निगरानी की जा रही है।

    आंदोलनकारियों की मांग है कि देवेंद्र महतो को अस्पताल से वापस सत्याग्रह स्थल लाया जाए, हालांकि उनकी लगातार बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति के बीच यह मांग भी चर्चा का विषय बनी हुई है।

    राजभवन पहुंचा विपक्ष, राज्यपाल से मुलाकात

    छात्र आंदोलन को लेकर राजनीतिक सरगर्मी भी तेज हो गई है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी और संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह ने लोकभवन में राज्यपाल से मुलाकात की।

    भाजपा नेताओं ने राज्यपाल के सामने छात्र आंदोलन से उपजे हालात समेत प्रदेश के अन्य ज्वलंत मुद्दों को रखा। उनका आरोप है कि छात्र पिछले 24 दिनों से रांची में न्याय की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं और कई छात्र आमरण अनशन के कारण गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती हैं।

    भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार बातचीत के नाम पर छात्रों को गुमराह कर रही है। उन्होंने राज्यपाल से मामले में हस्तक्षेप करते हुए छात्रों की जायज मांगों का जल्द समाधान कराने की मांग की।

    राज्यपाल ने भाजपा नेताओं को आश्वस्त किया कि पूरे घटनाक्रम और राज्य की परिस्थितियों पर उनकी पैनी नजर है।

    अब बड़ा सवाल—क्या निकलेगा समाधान?

    JPSC-JSSC आंदोलन, CID की कार्रवाई, पूर्व अधिकारियों से पूछताछ, छात्रों की भूख हड़ताल, चयनित अभ्यर्थियों का प्रदर्शन और राजभवन तक पहुंचा राजनीतिक विवाद—इन सबके बीच झारखंड की सियासत और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज है।

    अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या सरकार और छात्रों के बीच चौथे दौर की वार्ता से कोई ठोस समाधान निकलेगा, या झारखंड का छात्र आंदोलन अभी और बड़ा रूप लेगा?

     

  • ओबीसी का जनगणना को लेकर गिरिडीह में प्रदर्शन, 2027 की जनगणना में अलग कॉलम की मांग

    द न्यूज़ पोस्ट फॉर यू  डेस्क

    गिरिडीह । वर्ष 2027 की जनगणना में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए अलग कॉलम शामिल करने तथा सभी जातियों की जाति आधारित जनगणना कराने की मांग को लेकर गिरिडीह में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा के बैनर तलेप्रदर्शन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व जिला अध्यक्ष दिलीप कुमार पटवा ने किया, जबकि राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा विशेष रूप से मौजूद रहे।

    रैली के उपरांत मोर्चा के प्रतिनिधिमंडल ने महामहिम राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन उपायुक्त को सौंपते हुए आगामी जनगणना में ओबीसी वर्ग के लिए पृथक कॉलम और व्यापक जातिगत जनगणना की मांग उठाई।

    सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि जनगणना की प्रक्रिया डिजिटल माध्यम के बजाय जमीनी स्तर पर भौतिक रूप से कराई जानी चाहिए, ताकि आंकड़ों की विश्वसनीयता और पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा कि वर्ष 1931 तक देश में नियमित रूप से जाति आधारित जनगणना होती थी, लेकिन स्वतंत्रता के बाद इस व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया, जिससे विभिन्न वर्गों की वास्तविक जनसंख्या का आंकलन प्रभावित हुआ।

    नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र में रही विभिन्न सरकारों ने जाति आधारित जनगणना के मुद्दे पर ओबीसी समाज की अपेक्षाओं को पूरा नहीं किया। उन्होंने कहा कि उनकी लड़ाई किसी एक वर्ग के लिए नहीं, बल्कि सभी समुदायों को उनकी आबादी के अनुपात में अधिकार, प्रतिनिधित्व और भागीदारी दिलाने के लिए है।

    कार्यक्रम को बहुजन मुक्ति पार्टी, राष्ट्रीय मुस्लिम मोर्चा, भारत मुक्ति मोर्चा और बहुजन क्रांति मोर्चा का भी समर्थन प्राप्त हुआ। रैली में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता एवं समर्थक शामिल हुए, जिससे शहर का माहौल आंदोलनमय बना रहा।

    सभा को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा, प्रो. जागेश्वर यादव, अधिवक्ता कामेश्वर प्रसाद यादव, मुखिया दामोदर कुमार साहू, रीतलाल प्रसाद वर्मा, जयनारायण दास, भीखी राम पासवान, अरविंद नागवंशी, सूरज यादव, संतोष प्रसाद यादव और शाहिद रजा समेत कई वक्ताओं ने संबोधित किया। कार्यक्रम के अंत में प्रवीण कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

    इस अवसर पर बिनोद कुमार स्वर्णकार, गुलाम शाकिर, सुरेश दास, दामोदर राणा, निर्मल बौद्ध, किशोरी रविदास, महेंद्र रजक, शक्ति पासवान, अजय दास, विश्वनाथ साव, मुमताज अंसारी, बजरंगी दास, मो. असलम, मुख्तार अंसारी, प्रकाश दास, राजेश कुमार रवि, सतीश कुमार और रुपलाल दास सहित सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

     

  • SIR को लेकर JMM की बैठक, एक भी मतदाता न छूटे: संजय सिंह

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    गिरिडीह में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर झारखंड मुक्ति मोर्चा ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी ने साफ संदेश दिया है कि जिले का एक भी पात्र मतदाता मतदाता सूची से बाहर नहीं रहना चाहिए। इसी मुद्दे को लेकर शुक्रवार को सर्किट हाउस में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।

    सर्किट हाउस, गिरिडीह में आयोजित इस बैठक में झामुमो जिला अध्यक्ष संजय सिंह ने पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को निर्देश देते हुए कहा कि SIR अभियान को पूरी गंभीरता के साथ लिया जाए। उन्होंने कहा कि गिरिडीह जिले का एक भी मतदाता छूटना नहीं चाहिए।

    पार्टी द्वारा नियुक्त बीएलए-2 को बूथ लेवल अधिकारियों यानी बीएलओ के साथ समन्वय स्थापित कर घर-घर जाकर मतदाताओं की मैपिंग सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। साथ ही सभी प्रखंड और नगर कमेटियों को जल्द से जल्द बीएलए-2 की बैठक आयोजित करने को कहा गया है।

    “विशेष गहन पुनरीक्षण में बीएलए-2 और बीएलओ की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। दोनों को मिलकर घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क करना होगा और सूची में मौजूद त्रुटियों को दूर करना होगा।” संजय सिंह, जिला अध्यक्ष, झामुमो

    बैठक में यह भी बताया गया कि चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों की भागीदारी बढ़ाने के लिए बीएलए को बल्क में आवेदन जमा करने की अनुमति दी है। अब बीएलए प्रतिदिन 50 आवेदन अपने बीएलओ को सौंप सकेंगे।

    जमुआ के पूर्व विधायक केदार हाजरा ने कहा कि दो महीने तक चलने वाले इस अभियान में कार्यकर्ताओं को बूथ स्तर पर सक्रिय रहना होगा, ताकि कोई भी मतदाता सूची से वंचित न रहे।

    वहीं जिला उपाध्यक्ष शाहनवाज अंसारी ने कहा कि पार्टी कार्यकर्ता सभी विधानसभा क्षेत्रों में मतदाताओं की मदद के लिए तैयार हैं और दस्तावेजों में मौजूद त्रुटियों को दूर कराने के लिए जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा। जिला प्रवक्ता कृष्ण मुरारी शर्मा ने जानकारी दी कि आगामी 14 जून को जिले के सभी 2,586 बूथों के बीएलए-2 को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे पहले सभी प्रखंडों और नगर क्षेत्रों में बैठकें आयोजित कर अभियान को और मजबूत किया जाएगा।

    बैठक में केंद्रीय समिति सदस्य दिलीप मंडल, युवा मोर्चा जिला अध्यक्ष कोलेश्वर सोरेन, महानगर अध्यक्ष राकेश कुमार रॉकी सहित कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे।

    कुल मिलाकर, झामुमो ने SIR अभियान को लेकर अपनी तैयारियां पूरी तरह से तेज कर दी हैं और पार्टी का लक्ष्य स्पष्ट है—गिरिडीह का कोई भी पात्र मतदाता मतदाता सूची से बाहर न रहे।

  • झारखंड के माइका उद्योग को नई उड़ान देने की तैयारी, दिल्ली में होगी बड़ी बैठक

    परवेज़ आलम.

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    नई दिल्ली/गिरिडीह: झारखंड के बहुचर्चित माइका उद्योग को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। कोडरमा सांसद एवं केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने इस मुद्दे को गंभीरता से उठाते हुए केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी से नई दिल्ली में मुलाकात की। इस उच्चस्तरीय बैठक में संबंधित मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों की भी मौजूदगी रही, जिससे इस पहल की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

    बैठक के दौरान कोडरमा और गिरिडीह के माइका बेल्ट की मौजूदा स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई। खासतौर पर माइका खनन से जुड़े श्रमिकों की समस्याएं, उद्योग में पारदर्शिता की कमी, रोजगार के सीमित अवसर और माइका एसोसिएशन व वर्कर संगठनों की लंबित मांगों पर फोकस किया गया।

    दोनों केंद्रीय मंत्रियों ने इस बात पर सहमति जताई कि माइका उद्योग को नई दिशा देने के लिए सभी हितधारकों—उद्योग प्रतिनिधियों, श्रमिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों—को एक मंच पर लाना जरूरी है। इसी कड़ी में जल्द ही नई दिल्ली में एक व्यापक बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया गया है, जहां ठोस और दीर्घकालिक समाधान पर विचार किया जाएगा।

    केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि माइका खनन को पारदर्शी, सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा। साथ ही श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा, रोजगार के अवसरों में वृद्धि और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर विशेष जोर रहेगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल झारखंड के माइका बेल्ट—खासकर गिरिडीह और कोडरमा—के लिए गेमचेंजर साबित हो सकती है। इससे न केवल उद्योग को नई रफ्तार मिलेगी, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते भी खुलेंगे।

    इस पहल का स्वागत करते हुए भाजपा महानगर कोषाध्यक्ष मुकेश जालान ने कहा कि “यह कदम माइका उद्योग के पुनरुत्थान की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है। वर्षों से चली आ रही समस्याओं के समाधान की उम्मीद जगी है। केंद्र सरकार के प्रयासों से न केवल उद्योग मजबूत होगा, बल्कि हजारों श्रमिक परिवारों का भविष्य भी सुरक्षित होगा।”

    उन्होंने विश्वास जताया कि प्रस्तावित दिल्ली बैठक से ठोस परिणाम सामने आएंगे और गिरिडीह–कोडरमा क्षेत्र के समग्र विकास को नई गति मिलेगी।

  • गिरिडीह के युवा नेता की राहुल गांधी से खास मुलाकात

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.
    GIRIDIH : नई दिल्ली में गुरुवार को  NSUI के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर Ayush Sinha ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व लोक सभा मे विपक्ष के नेता  Rahul Gandhi से खास मुलाकात की। यह मुलाकात सिर्फ औपचारिक नहीं, बल्कि झारखंड के भविष्य को लेकर एक गंभीर और सार्थक संवाद साबित हुई।

    सूत्रों के मुताबिक, आयुष सिन्हा ने झारखंड से जुड़े कई अहम मुद्दों—जैसे शिक्षा व्यवस्था की चुनौतियाँ, युवाओं के रोजगार के अवसर और संगठन को मजबूत करने की रणनीतियाँ—को विस्तार से राहुल गांधी के सामने रखा।

    राहुल गांधी ने इन सभी मुद्दों को गंभीरता से सुना और भरोसा दिलाया कि झारखंड के विकास और युवाओं के हितों को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य के युवाओं की आवाज़ को राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूती से उठाया जाएगा।

    इस मुलाकात का एक दिलचस्प और मानवीय पहलू भी सामने आया, जब आयुष सिन्हा ने राहुल गांधी को अपने विवाह समारोह में शामिल होने का न्योता दिया। राहुल गांधी ने इस निमंत्रण को सहर्ष स्वीकार करते हुए उन्हें शुभकामनाएँ दीं।
    कुल मिलाकर, यह मुलाकात न सिर्फ संगठनात्मक दृष्टि से अहम मानी जा रही है, बल्कि झारखंड के युवाओं की आवाज़ को देश की राजनीति के केंद्र तक पहुँचाने की दिशा में एक मजबूत कदम भी साबित हो रही है।

  • गिरिडीह में चुनावी हिंसा : शहर की सियासत में अपराधियों की  एंट्री, सवालों के घेरे में शिवम आज़ाद

    परवेज़ आलम.

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    गिरिडीह:  झारखंड के कई जिलों की तरह गिरिडीह भी चुनावी तनाव और छिटपुट हिंसा का इतिहास देखता रहा है, लेकिन अब तक यह धारणा बनी हुई थी कि ऐसी घटनाएँ मुख्यतः नक्सल प्रभाव वाले ग्रामीण इलाकों तक सीमित रहती थी । गिरिडीह शहर को अपेक्षाकृत शांत और नियंत्रित माना जाता था। लेकिन 2026 के नगर निगम चुनाव में वार्ड नंबर 18 में हुई फायरिंग की घटना ने इस धारणा को तोड़ दिया है। मतदान के बीच चली गोलियों में दो लोग घायल हो गए। यह घटना सिर्फ एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि शहरी राजनीति के बदलते चरित्र का संकेत बनकर उभरी है।

    विवादों के केंद्र में शिवम आज़ाद.

    इस पूरे घटनाक्रम में जिस नाम की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, वह है शिवम श्रीवास्तव उर्फ शिवम आज़ाद । वे गिरिडीह नगर निगम के पूर्व वार्ड पार्षद रह चुके हैं। उनकी मां सरिता श्रीवास्तव भी वार्ड 18 से पार्षद रह चुकी हैं और इस बार भी चुनाव मैदान में थीं।

    स्थानीय स्तर पर शिवम का नाम लंबे समय से विवादों से जुड़ता रहा है। बस स्टैंड क्षेत्र में उनके कारोबार की चर्चा होती रही है। ठेकेदारी से लेकर अन्य गतिविधियों में उनकी सक्रियता को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न हिंदी अखबारों में उनके खिलाफ शराब कारोबार में कथित संलिप्तता, तड़ीपार होने के बाद गिरफ्तारी और अन्य मामलों का जिक्र सामने आता रहा है। सूत्रों का कहना है कि उनके खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामले दर्ज हैं, जिनमें सीसी एक्ट और अंतरराज्यीय शराब तस्करी से जुड़े आरोप भी शामिल रहे हैं। हालांकि सभी मामले अदालतों मे लंबित हैं।

    राजनीतिक सफर: भाजपा से झामुमो तक.

    शिवम आज़ाद की राजनीतिक यात्रा भी कम दिलचस्प नहीं रही। वे पहले भारतीय जनता पार्टी से जुड़े रहे, लेकिन 2024 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले उन्होंने झारखंड मुक्ति मोर्चा का दामन थाम लिया।

    स्थानीय राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे विवादित चेहरों का सत्तारूढ़ या प्रभावशाली दलों से जुड़ाव प्रशासनिक सख्ती को प्रभावित करता रहा है। चुनाव के दौरान आमतौर पर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्तियों पर नजर रखी जाती है, हथियारों की जांच होती है और आवश्यकतानुसार गिरफ्तारी की कार्रवाई भी की जाती है। ऐसे में वार्ड 18 की घटना ने पुलिस और प्रशासन की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    प्रशासन पर उठते सवाल.

    फायरिंग की घटना के बाद टाउन थाना प्रभारी ज्ञान रंजन  को निलंबित कर दिया गया है। इनके खिलफ़ आरोप है है कि इनहोने शिवम आज़ाद को संरक्षण दे रखा था । लेकिन घटना के 24 घंटे बाद तक किसी की गिरफ्तारी न होने को लेकर जिला प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।

    स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन न केवल हिंसा को रोकने में विफल रहा, बल्कि कार्रवाई में भी तेज़ी नहीं दिख रही है। गौरतलब है कि गिरिडीह का शहरी इलाका अब तक चुनावी गोलीबारी से लगभग अछूता माना जाता था। ऐसे में यह घटना कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा रही है।

    झामुमो की त्वरित कार्रवाई.

    घटना के बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा ने तत्काल कदम उठाते हुए शिवम आज़ाद को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया। साथ ही केंद्रीय कमेटी को उनके निलंबन के लिए पत्र भेजा गया है। राजनीतिक हलकों में इसे पार्टी की छवि बचाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। संदेश स्पष्ट है—कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं। हालांकि अंतिम परीक्षा प्रशासनिक कार्रवाई की होगी।

    पहले भी रहे हैं विवाद.

    शिवम आज़ाद का नाम पूर्व में मारपीट और अन्य आपराधिक मामलों में सामने आता रहा है। दिसंबर माह में भी एक मारपीट प्रकरण में उनका नाम चर्चा में आया था।

    स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि वर्षों से मामलों का सामना करने के बावजूद उनका प्रभाव बना रहना राजनीतिक संरक्षण की ओर इशारा करता है।

    वीडियो में पलटवार.

    इसी बीच शिवम आज़ाद ने एक वीडियो जारी कर ट्रांसपोर्टर राजू खान पर चुनावी हिंसा भड़काने का आरोप लगाया है। अब यह सिर्फ गोलीबारी का मामला नहीं, बल्कि आरोप-प्रत्यारोप की जंग बन चुका है।

    नजर जिला प्रशासन पर.

    अब सबकी नजर जिला प्रशासन पर है।

    • क्या फायरिंग के आरोपियों की गिरफ्तारी होगी?
    • और क्या भविष्य में शहरी इलाकों में चुनावी हिंसा रोकने के लिए ठोस रणनीति बनाई जाएगी?

    गिरिडीह, जिसे अब तक शहर के स्तर पर अपेक्षाकृत शांत माना जाता था, वहां हुई यह घटना आने वाले दिनों में न केवल स्थानीय राजनीति, बल्कि प्रशासन की साख को भी प्रभावित कर सकती है। अब देखना यह है कि यह घटना एक अपवाद साबित होती है या फिर शहर की चुनावी राजनीति के नए और खतरनाक दौर की शुरुआत।

  • झारखंड बजट… गिरिडीह को मेडिकल कॉलेज, डेयरी प्लांट और स्टेडियम की सौगात, विपक्ष का हमला—“ये बजट नहीं, बड़ा ढोल है !”

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    गिरिडीह: झारखंड सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट मंगलवार को विधानसभा में पेश किया ।  कुल 1, 58, 560 करोड़ के बजट में महिलाओं की बल्ले-बल्ले है। इसमें गिरिडीह को भी कई सौगातें मिली है।

    JMM ज़िला उपाध्यक्ष अजीत कुमार पप्पू ने कहा कि गिरिडीह सदर अस्पताल को पीपीपी मोड में मेडिकल कॉलेज के रूप में विकसित किया जाएगा। गिरिडीह में 50 हजार लीटर क्षमता वाला एक नया डेयरी प्लांट की स्थापना की जाएगी। वहीं बेंगाबाद के कर्णपुरा में आउटडोर स्टेडियम बनेगा। उन्होंने कहा कि गिरिडीह सदर अस्पताल मेडिकल कॉलेज बनेगा तो इससे गरीबों को काफी लाभ मिलेगा। अबुआ सरकार गरीबों के लिए काम कर रही है।

    वहीं भाजपा नेता सुरेश साव ने बजट पर सवाल उठाते हुये कहा कि सरकार ने युवाओं को रोजगार देने का वादा किया था, लेकिन बजट में नई नौकरियों की ठोस व्यवस्था नहीं है। किसानों की आय बढ़ाने की बात कही गई, पर कृषि क्षेत्र के लिए ठोस संरचनात्मक सुधार का अभाव है। महिलाओं के नाम पर योजनाओं की घोषणा तो है, लेकिन उनके स्थायी आर्थिक सशक्तिकरण का कोई स्पष्ट मॉडल नहीं है। झारखंड की जनता को आंकड़ों का जाल नहीं, बल्कि रोजगार, उद्योग, शिक्षा और स्वास्थ्य में वास्तविक परिवर्तन चाहिए। यह बजट इन बुनियादी अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरता। भाजपा नेता सुरेश साव ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट आम जनता की उम्मीदों पर पूरी तरह पानी फेरने वाला व्यापारियों, कारोबारियों और दुकानदारों पर मंदी की मार और गहरा गयी है।

    गिरिडीह सदर अस्पताल  मेडिकल कॉलेज के रूप में होगा विकसित – संजय सिंह

    झारखंड सरकार के वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट मे गिरिडीह को भी कई सौगातें मिली है। जेएमएम जिला अध्यक्ष संजय सिंह ने कहा कि गिरिडीह सदर अस्पताल को पीपीपी मोड में मेडिकल कॉलेज के रूप में विकसित किया जाएगा। गिरिडीह में 50 हजार लीटर क्षमता वाला एक नया डेयरी प्लांट की स्थापना की जाएगी। वहीं बेंगाबाद के कर्णपुरा में आउटडोर स्टेडियम बनेगा। उन्होंने कहा कि गिरिडीह सदर अस्पताल मेडिकल कॉलेज बनेगा तो इससे गरीबों को काफी लाभ मिलेगा। अबुआ सरकार गरीबों के लिए काम कर रही है।

    झामुमो के जिला प्रवक्ता कृष्ण मुरारी शर्मा ने अबुआ बजट को महिलाओं के लिए विकासोन्मुखी बजट बताया। उन्होंने कहा कि अबुआ बजट में सरकार ने महिलाओं के लिए कई योजनाएं लेकर आई है। मंईयां योजना के लिए 14000 करोड़ रू का प्रावधान किया गया है। महिला किसानों के लिए महिला किसान खुशहाली योजना लाई गई है। वहीं झारखंड में 5  बालिका आवासीय विद्यालय बनेंगे। इन योजनाओं से महिला सशक्तिकरण को बल मिलेगा

    लोजपा के प्रदेश अध्यक्ष राजकुमार राज ने झारखंड सरकार द्वारा विधानसभा में प्रस्तुत किया गया बजट पूरी तरह निराशाजनक, जनविरोधी और विकास विरोधी प्रतीत होता है। राज्य की जनता को इस बजट से बड़ी उम्मीदें थीं कि महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत समस्याओं का ठोस समाधान सामने आएगा, लेकिन दुर्भाग्यवश यह बजट केवल हवा-हवाई घोषणाओं और आंकड़ों का खेल बनकर रह गया है।

    जमुआ से भाजपा विधायक मंजु कुमारी ने कहा है कि झारखंड सरकार द्वारा प्रस्तुत इस बजट में न तो युवाओं के रोजगार के लिए कोई ठोस योजना दिखाई देती है और न ही किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में कोई प्रभावी पहल नजर आती है। राज्य के लाखों युवा रोजगार की आस लगाए बैठे हैं, लेकिन बजट में उनके भविष्य को सुरक्षित करने के लिए कोई स्पष्ट रोडमैप प्रस्तुत नहीं किया गया है। किसान, जो राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, उनके लिए भी यह बजट उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका। खेती-किसानी की लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन किसानों को राहत देने के लिए ठोस प्रावधानों का अभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। महिलाओं के सशक्तिकरण और सुरक्षा के लिए भी केवल औपचारिक घोषणाएं की गई हैं, जबकि जमीनी स्तर पर प्रभावी योजनाओं की आवश्यकता है। छात्र-छात्राओं को बेहतर शिक्षा और रोजगार के अवसर देने के लिए भी कोई नई और ठोस पहल नहीं दिखाई देती। यह बजट स्पष्ट रूप से सरकार की दिशाहीन सोच और योजनाओं के अभाव को दर्शाता है।

  • लोकतंत्र का सबसे बड़ा उत्सव अपने पूरे शबाब पर

    परवेज़ आलम.

    गिरिडीह में आज  है… सुबह के ठीक सात बजते ही मतदान शुरू हुआ और उसके साथ ही सड़कों से लेकर गलियों तक एक अलग ही ऊर्जा दिखाई दी।

    नगरपालिका आम निर्वाचन 2026 के तहत Giridih नगर निगम, बड़की सरैया और धनवार नगर पंचायत में सुबह-सुबह ही मतदान केंद्रों पर लंबी कतारें लग गईं। ऐसा लग रहा था मानो शहर का हर मतदाता अपने अधिकार को लेकर पूरी तरह सजग हो चुका है। युवा हों या बुजुर्ग, महिलाएं हों या पहली बार वोट डालने वाले मतदाता — हर चेहरा लोकतंत्र के इस पर्व में भागीदारी को लेकर उत्साहित दिखा।

    VVIP ने दिया संदेश

    सुबह के वक्त ही कई VVIP और प्रमुख प्रत्याशियों ने मतदान कर आम जनता को प्रेरित किया।
    नगर विकास मंत्री Sudivya Kumar Sonu अपनी पत्नी के साथ मतदान केंद्र पहुंचे और मतदान कर लोगों से अपील की कि वे बढ़-चढ़कर हिस्सा लें।
    वहीं भाजपा समर्थित मेयर प्रत्याशी डॉ. शैलेंद्र चौधरी भी अपनी पत्नी के साथ बूथ पहुंचे और मताधिकार का प्रयोग किया।
    मेयर पद की प्रत्याशी प्रमिला मेहरा ने भी सुबह-सुबह अपने निर्धारित बूथ पर मतदान कर लोकतंत्र में आस्था जताई।

    सभी नेताओं का एक ही संदेश था — “घर से निकलें, वोट करें, क्योंकि यही आपका अधिकार और आपकी ताकत है।”

    दोपहर में तनाव

    हालांकि लोकतंत्र के इस शांतिपूर्ण माहौल के बीच दोपहर तक वार्ड नंबर 27 और वार्ड 18 में प्रत्याशियों के समर्थकों के बीच हिंसक झड़प की खबर सामने आई। प्रशासन ने तुरंत हस्तक्षेप कर स्थिति को नियंत्रण में लिया। सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई ताकि मतदान प्रक्रिया प्रभावित न हो।

    प्रशासन पूरी तरह सतर्क

    मतदान शुरू होते ही जिला निर्वाचन पदाधिकारी-सह-उपायुक्त Ramnivas Yadav ने जिला कंट्रोल रूम का औचक निरीक्षण किया।
    सीसीटीवी मॉनिटरिंग, हेल्पलाइन व्यवस्था और सुरक्षा इंतजामों की उन्होंने खुद समीक्षा की।

    डीसी ने साफ कहा —

    “पारदर्शिता और निष्पक्षता हमारी पहली प्राथमिकता है। मतदाता निर्भीक होकर मतदान करें।”

    प्रशासन की ओर से सभी मतदान केंद्रों पर दिव्यांग और वरिष्ठ नागरिकों के लिए रैंप और विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। डीसी ने कई बूथों का दौरा कर सुरक्षा और निष्पक्षता का जायजा लिया। इस दौरान उप विकास आयुक्त स्मृता कुमारी, उप निर्वाचन पदाधिकारी तेज कुमार हांसदा, जिला नजारत उप समाहर्ता आशुतोष ठाकुर और जिला जनसंपर्क पदाधिकारी अंजना भारती समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

    लोकतंत्र का जश्न जारी

    गिरिडीह की गलियों में आज सिर्फ एक चर्चा है — वोट की।
    लोगों का उत्साह बता रहा है कि शहर अपने भविष्य को लेकर गंभीर है। अब नजरें शाम तक के मतदान प्रतिशत और उसके बाद आने वाले नतीजों पर टिक गई हैं।

    लोकतंत्र का यह उत्सव तभी सफल होगा जब हर मतदाता अपनी भागीदारी सुनिश्चित करेगा।
    तो सवाल यही है — क्या आपने वोट डाला?

    -,

  • नगर निगम चुनाव की उल्टी गिनती शुरू,शहर की सियासत चरम पर

    परवेज़ आलम.

     The News Post4U.

    गिरिडीह नगर निगम चुनाव की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। अब बस कुछ ही घंटे बचे हैं… और शहर की सियासत अपने चरम पर है। आपके शहर की सरकार कौन चलाएगा ? किसके हाथ होगी मेयर की कुर्सी? और कौन जीतेगा इस बार की “हॉट सीट”?

    चहुकोनिया मुकाबला… लेकिन असली टक्कर दो के बीच !

    कागज़ पर मुकाबला चार कोनों का दिख रहा है… लेकिन ज़मीन पर असली लड़ाई सिमटती दिख रही है दो चेहरों के बीच— भाजपा समर्थित उम्मीदवार डॉ शैलेन्द्र चौधरीऔर जेएमएम समर्थित प्रत्याशी प्रमिला मेहरा। लेकिन कहानी इतनी सीधी भी नहीं है…

    भाजपा के दो बागी चेहरे—नागेश्वर दास और प्रकाश दास—अब जेएमएम के पाले में जा चुके हैं। और भाजपा के ही बागी कामेश्वर पासवान… पार्टी के लिए गले की हड्डी बने हुए हैं। यानी…
    मुकाबला सिर्फ विरोधियों से नहीं, अपनों से भी है!

     कुल 16 उम्मीदवार मैदान में.

    मेयर पद के लिए 16 उम्मीदवार मैदान में हैं। तीन बड़े राजनीतिक समर्थन साफ दिख रहे हैं—

    • प्रमिला मेहरा को झामुमो का समर्थन
    • डॉ शैलेन्द्र चौधरी को भाजपा का समर्थन
    • समीर राज चौधरी को कांग्रेस का समर्थन

    पिछले चुनाव में समीर राज चौधरी 20,595 वोट लाकर दूसरे स्थान पर रहे थे। इस बार सवाल ये है—क्या वे उस वोट बैंक को फिर से समेट पाएंगे?

    बड़े नेताओं की प्रतिष्ठा भी दांव पर.

    यह चुनाव सिर्फ स्थानीय नहीं है… यह प्रतिष्ठा की लड़ाई भी है। झारखंड सरकार में मंत्री और नगर विकास विभाग संभाल रहे सुदीव्य कुमार सोनू—गिरिडीह उनके ही क्षेत्र में आता है। उनकी साख भी इस चुनाव से जुड़ी है।

    दूसरी ओर, पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी— साथ ही भाजपा के कई दिग्गज नेता—यहां आकर मोर्चा संभाल चुके हैं। यह लड़ाई मेयर की कुर्सी से आगे बढ़कर राजनीतिक संदेश की लड़ाई बन चुकी है।

    आंकड़ों की बात करें तो…

    गिरिडीह नगर निगम क्षेत्र 36 वार्डों में बंटा है। कुल 137 बूथ हैं।
    कुल मतदाता—1 लाख 50 हजार 992. महिला मतदाता—75,725
    पुरुष मतदाता—75,266 और एक किन्नर मतदाता भी इस लोकतंत्र का हिस्सा है। अब सवाल—किसका गणित बैठेगा?

    गैर-दलीय चुनाव… लेकिन पूरी तरह दलीय रणनीति.

    कागज़ पर यह “गैर-दलीय” चुनाव है। लेकिन ज़मीन पर? पूरी तरह दलीय! राज्य के 48 शहरी निकायों में यही तस्वीर है। 23 फरवरी को मतदान होगा… और चार दिन बाद तस्वीर साफ हो जाएगी।

    सत्तारूढ़ गठबंधन के दो चेहरे—
    झारखंड मुक्ति मोर्चा और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस— यहां आमने-सामने हैं और तीसरे कोने पर मजबूती से खड़ी है भारतीय जनता पार्टी। यानी सीधी त्रिकोणीय जंग.

    सवाल आपके लिए…

    क्या वोट विकास पर पड़ेगा? या जातीय समीकरण पर? क्या मुस्लिम वोट निर्णायक होंगे?
    क्या हिंदू वोट गोलबंद होंगे ? क्या बागी उम्मीदवार खेल बिगाड़ देंगे? और सबसे बड़ा सवाल—
    क्या यह चुनाव 2029 की बड़ी राजनीतिक लड़ाइयों का ट्रेलर है?

    आख़िर में .

    सभी प्रत्याशी एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं। जनसंपर्क, बैठकें, रणनीति, समीकरण… सब अपने चरम पर हैं । लेकिन अंत में फैसला आपके हाथ में है । 23 फरवरी को आप तय करेंगे—
    गिरिडीह की कमान किसे सौंपी जाए। चुनाव भले “गैर-दलीय” हो… लेकिन सियासत पूरी तरह “दलीय” हो चुकी है।

  • जाति-धर्म की राजनीति से शहर का विकास नहीं – सुदिव्य कुमार सोनू

    मंत्री का  भाजपा पर तीखा हमला, प्रमिला मेहरा के समर्थन में जुटी भीड़.

    परवेज़ आलम.

    द न्यूज़ पोस्ट4यू.

    गिरिडीह: नगर निगम चुनाव की सरगर्मी के बीच माथाडीह फुटबॉल मैदान गुरुवार को राजनीतिक बयानबाज़ी और शक्ति प्रदर्शन का केंद्र बन गया। मंच पर थे झारखंड सरकार के नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू, और निशाने पर थी भारतीय जनता पार्टी।

    मिलन समारोह में उमड़ी भीड़ को संबोधित करते हुए मंत्री सोनू ने बिना नाम लिए भाजपा पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा, बांटने और बंटवारे की राजनीति करने वाली पार्टी के लोग आज हम पर समाज को बांटने का आरोप लगा रहे हैं। जबकि सच्चाई यह है कि शुरुआत से ही उन्होंने जाति और धर्म के नाम पर समाज में विभाजन की रेखाएं खींची हैं।”

    उन्होंने आरोप लगाया कि पहले धर्म के नाम पर समाज को बांटा गया, और अब जाति के आधार पर विभाजन की राजनीति हो रही है। नगर निगम चुनाव का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि गरीब दलित के बजाय अमीर दलित को समर्थन देना इस बात का प्रमाण है कि राजनीति में सामाजिक न्याय नहीं, बल्कि वर्गीय समीकरण देखे जा रहे हैं।
    “अगर समाज को नहीं बांटना था, तो टिकट देने में अमीर-गरीब का पैमाना कैसे आ गया ?” – यह सवाल पूछते हुए मंत्री ने कहा कि धर्म और जाति के नाम पर देश को पहले भी नुकसान हुआ है और यह राजनीति अब अपने अंतिम चरण में है।

    उन्होंने उपस्थित जनसमूह से अपील की कि वे मेयर प्रत्याशी प्रमिला मेहरा को समर्थन दें और गिरिडीह के विकास के लिए एकजुट होकर मतदान करें।

    गिरिडीह की बेटी और बहू” – संजय सिंह.

    झामुमो जिलाध्यक्ष संजय सिंह ने कहा कि पार्टी ने मेयर पद के लिए प्रमिला मेहरा को समर्थन दिया है क्योंकि वे गिरिडीह की बेटी और बहू हैं, और सामाजिक-राजनीतिक जीवन में उनका लंबा अनुभव रहा है।

    उन्होंने मतदाताओं को आगाह करते हुए कहा कि चुनाव मैदान में कुछ ऐसे लोग भी हैं जिन पर फर्जी प्रमाण पत्र का आरोप है। “ऐसे उम्मीदवारों से सावधान रहिए और सोच-समझकर अपना मत दीजिए,”

    आपका एक वोट बदल सकता है शहर की तस्वीर” – प्रमिला मेहरा॰

    मेयर प्रत्याशी प्रमिला मेहरा ने अपने संबोधन में भावुक अपील की। उन्होंने कहा,
    आप सभी अपने मत का प्रयोग अवश्य करें। चुनाव के दिन सोच-समझकर फैसला लें। अगर आप गिरिडीह की तस्वीर बदलना चाहते हैं, तो मुझे अपना आशीर्वाद और समर्थन दें।”

    उन्होंने भरोसा दिलाया कि यदि जनता का समर्थन मिला, तो शहर के बुनियादी मुद्दों—पेयजल, सफाई, सड़क और प्रकाश व्यवस्था—पर प्राथमिकता से काम किया जाएगा।

    भाजपा छोड़ झामुमो में वापसी.

    सभा के दौरान एक और राजनीतिक संदेश गया, जब नागेश्वर दास ने भाजपा छोड़कर अपने समर्थकों के साथ पुनः झामुमो का दामन थाम लिया। पार्टी नेताओं ने फूल-मालाओं से उनका स्वागत किया। नागेश्वर दास ने मंच से प्रमिला मेहरा को  समर्थन की घोषणा की।

    सभा को झामुमो जिला उपाध्यक्ष अजीत कुमार पप्पू, शाहनवाज अंसारी, सुनील यादव, जिला प्रवक्ता कृष्ण मुरारी शर्मा, जिला सह सचिव दिलीप रजक सहित कई नेताओं ने भी संबोधित किया।

    कार्यक्रम में महानगर अध्यक्ष राकी सिंह, विकास सिन्हा, रामजी यादव, सुनील पासवान, मंगल सिंह, प्रवीण राय, महबूब आलम तुफान, मो. इम्तियाज, अजीत कुमार सिन्हा, राकेश कुमार सिंह, मोनू सिंह, मेहताब मिर्जा, विशाल मंडल, सुनील दास, रामचंद्र दास, कमल दास, सुखदेव दास, चंचला देवी, हरि मरांडी, अमजद अंसारी समेत बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और समर्थक मौजूद रहे।

    राजनीतिक तापमान चढ़ा.

    माथाडीह का यह मिलन समारोह साफ संकेत दे गया कि नगर निगम चुनाव अब केवल स्थानीय मुद्दों तक सीमित नहीं है। जाति, धर्म और सामाजिक समीकरणों की बहस के बीच चुनावी लड़ाई और तीखी होती जा रही है।

    अब देखना यह है कि जनता विकास के वादों को प्राथमिकता देती है या राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप की इस आंधी में कोई नया समीकरण उभरता है।