Category: RANCHI

  • नक्सलियों के गढ़ से विस्फोटक जखीरा बरामद: 18,000 डेटोनेटर किए गए जब्त, जंगल में ही किया गया नष्ट

    Edited By – परवेज़ आलम
    For The News Post4U

    रांची: झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले में नक्सलियों के खिलाफ चलाए जा रहे सघन अभियान के तहत सुरक्षा बलों को मंगलवार को एक बड़ी सफलता हाथ लगी। जिले के टोंटो थाना क्षेत्र अंतर्गत हुसिपी गांव और आसपास के सघन जंगलों में माओवादियों के गुप्त ठिकानों पर छापेमारी के दौरान सुरक्षाबलों ने लगभग 18,000 डेटोनेटर बरामद किए हैं। यह खेप इतनी बड़ी थी कि इसे जंगल में ही बम निरोधक दस्ते द्वारा सुरक्षित ढंग से नष्ट कर दिया गया।

    सटीक गुप्त सूचना पर हुआ जॉइंट ऑपरेशन.

    पुलिस अधीक्षक राकेश रंजन के मुताबिक  इस ऑपरेशन को खुफिया सूचना के आधार पर अंजाम दिया गया। छापेमारी में झारखंड पुलिस, सीआरपीएफ की 60वीं बटालियन, और झारखंड जगुआर की संयुक्त टीम शामिल रही। अभियान के दौरान यह खुलासा हुआ कि नक्सलियों ने डेटोनेटरों को जंगल में अलग-अलग स्थानों पर छिपा रखा था। इन्हें बाद में सुरक्षा बलों को निशाना बनाने या सुरंगनुमा रास्तों में विस्फोट करने के मकसद से रखा गया था।

    ओडिशा से लूटे गए थे विस्फोटक, अब झारखंड में मिले.

    इस बरामदगी का संबंध बीते 27 मई को ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले में हुए विस्फोटक लूटकांड से जोड़ा जा रहा है। उस दिन माओवादियों ने रेलाहातू यांको स्थित एक पत्थर खदान के पास से विस्फोटकों से भरी 200 पैकेट वाली एक वैन को लूट लिया था। बाद में वे इस वैन को झारखंड की सीमा में स्थित सारंडा के जंगलों तक ले गए और वहां विस्फोटकों को उतारकर छिपा दिया गया।

    सारंडा का जंगल: नक्सलियों का पुराना गढ़.

    सारंडा जंगल, जो झारखंड और ओडिशा की सीमा पर स्थित है, लंबे समय से नक्सलियों का रणनीतिक ठिकाना रहा है। हालांकि बीते दो वर्षों में सुरक्षा बलों द्वारा लगातार की जा रही घेराबंदी और तलाशी अभियानों के चलते नक्सलियों की सक्रियता काफी सीमित हो गई है। इसके बावजूद वे सुरक्षाबलों को नुकसान पहुंचाने के लिए अब भी जंगलों में आईईडी जैसे विस्फोटक उपकरण बिछाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।

    विस्फोटकों से अब तक कई जाने गईं.

    पिछले दो सालों में जंगलों में बिछाए गए आईईडी विस्फोटों की चपेट में आकर कम से कम चार जवान शहीद हो चुके हैं, वहीं दस से अधिक ग्रामीणों की भी जानें गई हैं। यह ताजा बरामदगी न केवल नक्सली मंसूबों पर करारा प्रहार है, बल्कि आगामी अभियानों के लिए भी एक बड़ी राहत मानी जा रही है।

    The News Post4U की रिपोर्ट के अनुसार, सुरक्षा बल अब भी इलाके में व्यापक तलाशी अभियान चला रहे हैं ताकि और भी छिपे विस्फोटक और माओवादी ठिकानों को नष्ट किया जा सके।

     

  • सर गंगा राम अस्पताल में भर्ती शिबू सोरेन की तबीयत में आया सुधार

    परवेज़ आलम. For The News Post4u

    दिल्ली/रांची:  झारखंड की राजनीति के पितामह और झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के संस्थापक दिशोम गुरु शिबू सोरेन   की तबीयत में सुधार की खबर ने पूरे राज्य में राहत की सांस ली है। दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में पिछले एक सप्ताह से भर्ती 81 वर्षीय वरिष्ठ नेता ने रविवार को अपनी आंखें खोलीं। यह क्षण न केवल उनके परिवार के लिए भावनात्मक रहा, बल्कि पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों के लिए भी बेहद सुखद रहा।

    प्रार्थनाओं का असर: मंदिरों से अस्पताल तक दुआओं का सिलसिला. 

    बीते कई दिनों से झारखंड के कोने-कोने में उनके स्वास्थ्य लाभ की कामनाओं के साथ पूजा-अर्चना का दौर जारी था। जेएमएम और कांग्रेस के कार्यकर्ता मंदिरों, गुरुद्वारों और मस्जिदों में जाकर शांति और शक्ति की कामना कर रहे थे। रांची में रथयात्रा के अवसर पर कार्यकर्ताओं ने शिबू सोरेन की तस्वीर के साथ  प्रार्थना सभा आयोजित कर उनके दीर्घायु और शीघ्र स्वास्थ्य लाभ के लिए विशेष पूजा की। मंत्री  सुदिव्य कुमार सोनू ने फ़ेस बुक बॉल पर लिखा आदरणीय बाबा दिशोम गुरु शिबू सोरेन जी अस्वस्थ हैं और वर्तमान में दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में उनका उपचार चल रहा है। झामुमो के कार्यकर्ताओं और राज्य के वंचित वर्गों के लिए, वे एक महत्वपूर्ण आशा की किरण हैं।  इस चुनौतीपूर्ण समय में, मरांग बुरु दिशोम मांझी थान में मरांग बुरु संस्थान, आदिवासी समाज और उनके समर्पित कार्यकर्ताओं द्वारा उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ के लिए बोंगा बुरु (पूजा पाठ) का आयोजन किया गया है। हमारी ईश्वर से प्रार्थना है कि बाबा जल्द स्वस्थ होकर हमारे बीच वापस आएं। मंत्री ने पुजा करते कार्यकर्ताओं की तस्वीर भी साझा की है ।

    दिल्ली में परिवार जुटा, गुरुजी की सेवा में दिन-रात लगे हैं हेमंत सोरेन. 

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, उनकी पत्नी और दुमका से विधायक कल्पना सोरेन, तथा परिवार के अन्य सदस्य बीते सप्ताह भर से दिल्ली में मौजूद हैं और अस्पताल में लगातार उनके साथ समय बिता रहे हैं।
    राजनीतिक सीमाओं से परे जाकर कांग्रेस, भाजपा, आरजेडी, वाम दलों के नेताओं ने सर गंगाराम अस्पताल पहुंचकर गुरुजी की तबीयत की जानकारी ली और उनका हालचाल जाना।

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने की मुलाकात, कहा – ‘गुरुजी जल्द स्वस्थ हों‘

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू भी सर गंगा राम अस्पताल पहुंचीं और उन्होंने शिबू सोरेन के स्वास्थ्य की जानकारी ली। राष्ट्रपति ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात कर स्थिति का जायजा लिया और दिशोम गुरु के शीघ्र स्वस्थ होने की ईश्वर से कामना की।

    हल्के पैरालिटिक अटैक के बाद हुए थे भर्ती, मेडिकल निगरानी में जारी है इलाज. 

    जानकारी के अनुसार, शिबू सोरेन को कुछ दिन पहले हल्का पैरालाइसिस अटैक आया था, जिसके बाद उन्हें फौरन दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में भर्ती कराया गया। वह पहले से ही किडनी से जुड़ी बीमारी और कई अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे। अस्पताल के न्यूरोलॉजी और नेफ्रोलॉजी विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक टीम लगातार उनकी देखभाल कर रही है।
    शिबू सोरेन न सिर्फ झारखंड आंदोलन का चेहरा रहे हैं, बल्कि जनजातीय अस्मिता और अधिकारों की लड़ाई के प्रतीक भी हैं। उनके स्वास्थ्य में सुधार की खबर उनके लाखों समर्थकों और राज्य की जनता के लिए एक नई उम्मीद की किरण बनकर आई है।

     

  • शिबू सोरेन का दिल्ली में चल रहा है इलाज, झारखंडभर में नेता-कार्यकर्ताओं ने की सलामती की दुआ

    Key Points.

    • सर गंगाराम अस्पताल में चल रहा है शिबू सोरेन का इलाज
    • राष्ट्रपति और मुख्यमंत्री समेत कई नेता हालचाल लेने पहुंचे
    • हल्का पैरालिसिस अटैक की पुष्टि
    • झारखंड में पार्टी कार्यकर्ताओं ने शुरू की प्रार्थनाएं
    • रघुवर दास और इरफान अंसारी ने जताई चिंता

    परवेज़ आलम. पॉलिटिकल करेसपांडेन्ट. The News Post4u

    झारखंड के वरिष्ठ नेता, झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के संस्थापक और दिशोम गुरु शिबू सोरेन की तबीयत खराब  है, दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में उनका चल रहा है इलाज । अस्पताल में उनका इलाज नेफ्रोलॉजी विभाग के वरिष्ठ डॉक्टर एके भल्ला की टीम कर रही है। बताया जा रहा है कि उन्हें किडनी संबंधी समस्या है और इलाज के दौरान उन्हें हल्का पैरालिसिस अटैक भी आया है।

    मुख्यमंत्री और परिवार का दिल्ली में डेरा.

    शिबू सोरेन की गंभीर स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, उनकी पत्नी कल्पना सोरेन और विधायक बसंत सोरेन लगातार दिल्ली में मौजूद हैं और डॉक्टरों की देखरेख में इलाज की प्रक्रिया पर निगरानी बनाए हुए हैं। मुख्यमंत्री लगातार अपने पिता की सेहत की जानकारी ले रहे हैं।

    राष्ट्रपति और स्वास्थ्य मंत्री ने जाना हालचाल.

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुरुवार को सर गंगाराम अस्पताल जाकर शिबू सोरेन का हालचाल जाना था वहीं, झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी भी कांग्रेस के सह प्रभारी बेला प्रसाद के साथ दिल्ली पहुंचे। वे दोनों संथाल परगना के दौरे पर थे, लेकिन कांग्रेस के प्रभारी के. राजू के निर्देश पर वे दौरा छोड़कर तुरंत दिल्ली रवाना हो गए।

    डॉ. इरफान अंसारी ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर बताया कि यह उनका नैतिक दायित्व है कि वे इस कठिन समय में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनके परिवार के साथ रहें। उन्होंने यह भी कहा कि गुरुजी को स्वस्थ करके वापस लाना उनका संकल्प है।

    रघुवर दास ने भी जताई चिंता.

    पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने भी शिबू सोरेन की तबीयत को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से फोन पर बात की और गुरुजी की तबीयत की जानकारी ली। बाद में रघुवर दास ने सोशल मीडिया पर लिखा कि उन्हें हल्का पैरालिसिस अटैक आया है, और वे भगवान जगन्नाथ से उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना करते हैं।

    पूरे झारखंड में दुआओं का दौर.

    झारखंड में जेएमएम के नेता और कार्यकर्ता शिबू सोरेन की सलामती के लिए विशेष प्रार्थनाएं कर रहे हैं। शुक्रवार को रांची के ऐतिहासिक जगन्नाथ मंदिर में रथयात्रा के अवसर पर जेएमएम प्रवक्ता मनोज पांडेय की अगुवाई में पार्टी कार्यकर्ताओं ने गुरुजी की तस्वीर के साथ पूजा-अर्चना की और उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की। झारखंड के हर कोने से लोग गुरुजी के स्वस्थ होने की प्रार्थना कर रहे हैं। प्रदेश की राजनीति में उनके योगदान को देखते हुए आम जनता से लेकर बड़े नेता तक, सब उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना में लगे हैं।

     

  • गंगाराम अस्पताल में भर्ती शिबू सोरेन का हालचाल लेने पहुंची राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू

    परवेज़ आलम.By The News Post4u.

    झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संस्थापक शिबू सोरेन की तबीयत अचानक बिगड़ने के बाद उन्हें दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में भर्ती कराया गया है। 81 वर्षीय सोरेन लंबे समय से किडनी संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं और इस बार उनकी हालत कुछ ज्यादा गंभीर हो गई है। फिलहाल उन्हें अस्पताल के नेफ्रोलॉजी विभाग के चेयरमैन डॉ. ए.के. भल्ला की निगरानी में रखा गया है। डॉक्टरों के मुताबिक उनकी स्थिति स्थिर है, लेकिन पूरी तरह से खतरे से बाहर नहीं कही जा सकती

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने की मुलाकात, जताई चिंता.

    जैसे ही शिबू सोरेन के अस्वस्थ होने की खबर सामने आई, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू खुद सर गंगाराम अस्पताल पहुंचीं। उन्होंने ‘दिशोम गुरु’ के नाम से प्रसिद्ध शिबू सोरेन से मुलाकात की और उनकी सेहत के बारे में जानकारी ली। राष्ट्रपति ने उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की और उन्हें देश की एक अमूल्य धरोहर बताया। इस दौरान झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी कल्पना सोरेन भी अस्पताल में मौजूद रहे।

    राज्यपाल संतोष गंगवार ने भी जाना हाल.

    इससे पहले झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार भी दिल्ली पहुंचे और अस्पताल जाकर शिबू सोरेन से मुलाकात की। उन्होंने डॉक्टरों से इलाज की स्थिति पर बातचीत की और सोशल मीडिया पर ट्वीट कर लिखा कि दिशोम गुरु की हालत को लेकर वे चिंतित हैं और उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना करते हैं।

    झारखंड की राजनीति के स्तंभ हैं शिबू सोरेन.

    शिबू सोरेन झारखंड की राजनीति का एक बड़ा नाम हैं। आदिवासी अधिकारों की लड़ाई से लेकर झारखंड को बिहार से अलग राज्य के रूप में स्थापित करने तक, उन्होंने हमेशा संघर्ष का रास्ता अपनाया। वे तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और एक बार केंद्रीय कोयला मंत्री भी बने थे। आदिवासी समाज में उन्हें सम्मान से ‘दिशोम गुरु’ यानी ‘देश का गुरु’ कहा जाता है।

    परिवार और जनता की दुआएं.

    अस्पताल में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी कल्पना सोरेन लगातार शिबू सोरेन की देखरेख कर रहे हैं। हेमंत सोरेन ने झारखंड की जनता से अपील की है कि वे उनके पिता के लिए दुआ करें। सोशल मीडिया से लेकर गांव-शहरों तक, लोग दिशोम गुरु की सलामती की प्रार्थना कर रहे हैं।

    उम्मीद की जा रही है कि झारखंड के इस पुरोधा नेता की तबीयत जल्द सुधरे और वे एक बार फिर स्वस्थ होकर अपने राज्यवासियों के बीच लौटें।

  • शिबू सोरेन की तबीयत में सुधार, गंगाराम अस्पताल में चल रहा है इलाज – सीएम और राज्यपाल ने अस्पताल पहुँचकर लिया हाल

    नई दिल्ली/रांची: By The News Post4u
    झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संस्थापक और वरिष्ठ नेता शिबू सोरेन की तबीयत एक बार फिर बिगड़ गई है। वर्तमान में वे दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में भर्ती हैं, जहां उनका इलाज चल रहा है। बुधवार सुबह उनकी तबीयत अचानक कुछ ज्यादा खराब हो गई थी, जिससे पार्टी में चिंता का माहौल बन गया। हालांकि, अब उनकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है।

    झामुमो महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने बुधवार को जानकारी देते हुए बताया कि गुरुजी (शिबू सोरेन) की तबीयत में अब सुधार हो रहा है, लेकिन पूरी तरह स्वस्थ होने में समय लगेगा। उन्होंने कहा कि वह खुद भी आज दिल्ली रवाना हो रहे हैं, ताकि गुरुजी से मिलकर उनका हालचाल जान सकें।

    बताया गया कि शिबू सोरेन नियमित स्वास्थ्य जांच के लिए दिल्ली पहुंचे थे, लेकिन अस्पताल में उनकी हालत बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें भर्ती कर लिया गया।

    इधर, झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार भी बुधवार को सर गंगाराम अस्पताल पहुंचे और शिबू सोरेन के स्वास्थ्य की जानकारी ली। उन्होंने डॉक्टरों से बात की और उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की।

    गौरतलब है कि इससे पहले मंगलवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी दिल्ली पहुंचे थे और अस्पताल जाकर गुरुजी का हाल जाना। मुख्यमंत्री की पत्नी और शिबू सोरेन की बहू कल्पा सोरेन पहले से ही दिल्ली में मौजूद हैं और लगातार उनके साथ हैं।

    पार्टी सूत्रों के अनुसार, फिलहाल डॉक्टरों की एक विशेष टीम शिबू सोरेन के स्वास्थ्य की निगरानी कर रही है। समर्थकों और झामुमो कार्यकर्ताओं में भी गुरुजी की तबीयत को लेकर चिंता है, लेकिन अस्पताल प्रशासन ने फिलहाल किसी गंभीर खतरे से इनकार किया है।

  • राज्य में बदहाल व्यवस्था पर बीजेपी का हेमंत सरकार पर हमला, गिरिडीह सहित राज्य भर मे प्रदर्शन

    By The News Post4u.

    झारखंड की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। भारतीय जनता पार्टी ने राज्य की हेमंत सोरेन सरकार पर हल्ला बोल दिया है। गिरिडीह सहित राज्य भर के प्रखण्ड मुख्यालयों मे पार्टी ने मंगलवार को प्रदर्शन किया । पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व प्रतिपक्ष के नेता बाबूलाल  मरंडी,कार्यकारी अध्यक्ष रवीन्द्र राय, विधायक मंजु देवी, सांसद प्रतिनिधि दिनेश यादव, ज़िला अध्यक्ष महादेव दुबे,वरिष्ठ नेता सुरेश साव, राजेश जैसवाल, बिनय सिंह व चुन्नुकांत सहित कई दर्जनो नेता और कार्यकर्ता विरोध प्रदर्शन मे शामिल हुये।

    पार्टी का आरोप है कि पूरे राज्य में शासन व्यवस्था चरमराई हुई है। जनता अपराध, भ्रष्टाचार और कुव्यवस्था के बोझ से कराह रही है, लेकिन सरकार अपने पुराने रवैये से बाहर आने को तैयार नहीं है।

    बीजेपी का कहना है कि प्रदेश में हत्या, बलात्कार, लूटपाट, महिलाओं के खिलाफ अपराध आम हो गए हैं। अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और आम आदमी खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है। पार्टी ने दावा किया कि पहले कार्यकाल में खनिज संपदाओं की लूट को जिस तरह सरकारी संरक्षण मिला, वही लूट अब और संगठित हो गई है। पंचायत से लेकर सचिवालय तक भ्रष्टाचार का तंत्र मजबूत हुआ है।

    स्वास्थ्य और शिक्षा पर गंभीर सवाल.

    भाजपा ने स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था की दुर्दशा को लेकर भी सरकार को कठघरे में खड़ा किया। पार्टी का आरोप है कि सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर और दवाइयों का घोर अभाव है, ऑक्सीजन और एम्बुलेंस की किल्लत से गरीब दम तोड़ रहे हैं। वहीं, स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है और आधारभूत संरचना जर्जर हो चुकी है।

    आयुष्मान भारत योजना भी लगभग ठप पड़ी है, बकाया भुगतान न मिलने के कारण कई अस्पतालों ने मरीजों को भर्ती करना बंद कर दिया है। ग्रामीण क्षेत्र के छोटे अस्पतालों की स्थिति और भी दयनीय हो चुकी है।

    पेंशन, किसानों और योजनाओं में अव्यवस्था.

    बीजेपी ने आरोप लगाया कि वृद्धा पेंशन, विधवा पेंशन और दिव्यांग पेंशन जैसी योजनाएं महीनों से बंद हैं, जिससे लाभार्थी दर-दर भटक रहे हैं। मातृत्व सम्मान राशि की राशि भी हजारों महिलाओं को नहीं मिली, और किसानों को धान की बिक्री के बाद भी भुगतान नहीं हुआ। खाद और बीज की खरीद में कालाबाजारी चरम पर है।

    भाजपा नेताओं ने यह भी कहा कि आंगनबाड़ी केंद्रों में खानापूर्ति चल रही है, पोषण सामग्री की सप्लाई बाधित है, प्रधानमंत्री आवास योजना और अन्य योजनाएं पूरी तरह ठप हैं।

    भ्रष्टाचार और बिचौलियों का बोलबाला.

    भाजपा का कहना है कि राज्य में अब बिना बिचौलिए के कोई भी सरकारी कार्य संभव नहीं है। चाहे जाति प्रमाण पत्र बनवाना हो, राशन कार्ड या भूमि से संबंधित कार्य – हर जगह रिश्वत और दलाली का बोलबाला है। ग्रामीण सड़कों की हालत इतनी खराब हो गई है कि आवागमन कठिन हो गया है।

    स्थानीय नीति, भाषा और चुनावों पर भ्रम की स्थिति.

    हेमंत सरकार पर आरोप है कि वह स्थानीय नीति, नियोजन नीति और भाषा विवाद में राज्य को उलझा कर मूल समस्याओं से ध्यान भटका रही है। नगर निकाय चुनाव अब तक नहीं कराए गए हैं, जिससे शहरी क्षेत्रों में जनता का प्रतिनिधित्व शून्य हो गया है और प्रशासनिक अधिकारी मनमानी पर उतारू हैं।

    भाजपा की मांग.

    भारतीय जनता पार्टी ने राज्य सरकार के समक्ष 14 प्रमुख मांगें रखीं, जिनका उद्देश्य कानून-व्यवस्था में सुधार, भ्रष्टाचार पर नियंत्रण और जनकल्याणकारी योजनाओं को प्रभावी बनाना है। प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:

    • कानून-व्यवस्था को मजबूत किया जाए और अपराध नियंत्रण को प्राथमिकता मिले।
    • थाना प्रभारियों को उनके क्षेत्र में अपराधों के लिए जवाबदेह बनाया जाए।
    • किसानों को धान बिक्री का भुगतान शीघ्र मिले और खाद-बीज की कालाबाजारी रोकी जाए।
    • प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया पारदर्शी और समयबद्ध हो।
    • पेसा अधिनियम लागू किया जाए और आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषण सामग्री की गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए।
    • पेंशन योजनाएं पुनः शुरू की जाएं (वृद्धा, विधवा, दिव्यांग)।
    • शिक्षकों व चिकित्सकों के रिक्त पद भरे जाएं और +2 विद्यालयों में भाषावार शिक्षक नियुक्त हों।
    • सरकारी अस्पतालों में आवश्यक सुविधाएं (दवा, ऑक्सीजन, एम्बुलेंस, टीका) सुनिश्चित हों।
    • ग्रामीण अस्पतालों को आयुष्मान योजना से जोड़ा जाए।
    • जर्जर सड़कों व भवनों की मरम्मत कराई जाए।
    • बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों को चिन्हित कर बाहर निकाला जाए।

    भाजपा का ऐलान – “जनता के लिए सड़क से सदन तक लड़ाई जारी रहेगी”

    भाजपा ने ऐलान किया है कि एक जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका निभाते हुए वह राज्य में जनता की समस्याओं को लेकर सड़क से सदन तक सरकार को घेरती रहेगी। “हेमंत सरकार को चेतावनी दी जाती है कि वह अपनी कार्यसंस्कृति में सुधार लाए, जनता से किए गए वादों को निभाए और राज्य को भय और भ्रष्टाचार से मुक्त करे।”

    इस तरह, भाजपा ने हेमंत सरकार के खिलाफ आक्रोश जताते हुए राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन किया।

     

  • बिहार में लगेगा न्यूक्लियर पावर प्लांट, ऊर्जा मंत्रियों के पांचवें क्षेत्रीय सम्मेलन  मे शामिल हुये मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू

    परवेज़ आलम. By The News Post4u.

    देश के ऊर्जा क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम की घोषणा मंगलवार को पटना में हुई, जब केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने बिहार में न्यूक्लियर पावर प्लांट (परमाणु बिजली घर) स्थापित करने के प्रस्ताव पर अपनी सहमति दे दी। यह घोषणा पूर्वी भारत के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के ऊर्जा मंत्रियों के पांचवें क्षेत्रीय सम्मेलन के दौरान हुई। इस  सम्मेलन में बिहार, झारखण्ड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल एवं अंडमान-निकोबार के ऊर्जा मंत्री उपस्थित रहे। बिहार से इसका प्रतिनिधित्व ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने किया जबकि झारखंड से  नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू इसमे शामिल हुये ।

    मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने सम्मेलन के बाद फोन पर The News Post4u को बताया कि  बैठक में राज्यों में संचालित विद्युत परियोजनाओं के त्वरित क्रियान्वयन, वितरण नेटवर्क को मजबूत करने तथा सेवा प्रदायगी में दक्षता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। साथ ही, निर्बाध और समान रूप से बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर भी गहन चर्चा हुई।
    देश के ऊर्जा क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन लाने के लिए यह सामूहिक प्रयास अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध होगा।

    बिहार को मिलेगा ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा बूस्ट.

    सम्मेलन के दौरान बिहार सरकार की ओर से राज्य में परमाणु ऊर्जा आधारित पावर प्लांट की मांग रखी गई थी। इस पर केंद्रीय मंत्री खट्टर ने सकारात्मक रुख दिखाते हुए कहा कि केंद्र सरकार हर आवश्यक तकनीकी और वित्तीय सहायता देने को तैयार है।

    साथ ही बिहार में अगले 6 महीनों के भीतर अतिरिक्त 500 मेगावाट बिजली की आपूर्ति करने का भी प्रस्ताव स्वीकार कर लिया गया है, जिससे राज्य की औद्योगिक और ग्रामीण जरूरतों को मजबूत आधार मिलेगा।

     केंद्रीय मंत्री ने क्या कहा?

    बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने बताया कि:

    • ऊर्जा क्षेत्र में थर्मल, सोलर, विंड और स्टोरेज प्रोजेक्ट्स पर तेजी से काम हो रहा है।
    • 2035 तक का राष्ट्रीय ऊर्जा विजन तैयार किया गया है, जिसमें हर राज्य में एक परमाणु ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने की योजना है।
    • बिहार में अब तक 80 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, जिसे उन्होंने “रिकॉर्ड” बताया।

    उन्होंने स्पष्ट किया कि “बिहार को कभी पिछड़ा समझा जाता था, लेकिन अब वह बिजली क्षेत्र में कई राज्यों से आगे निकल गया है।”

    बिजली स्टोरेज की भी मांग॰

    सम्मेलन के दौरान बिहार सरकार ने राज्य में 1000 मेगावाट की बिजली स्टोरेज क्षमता विकसित करने की मांग भी रखी। इस पर भी केंद्र सरकार ने भरोसा दिलाया कि जरूरत के मुताबिक हरसंभव मदद दी जाएगी।

    भारत अब बिजली निर्यातक देश.

    मंत्री खट्टर ने कहा कि कभी “पावर डिफिसिट” (बिजली की कमी वाला) देश माने जाने वाला भारत, आज भूटान, म्यांमार, बांग्लादेश और नेपाल को बिजली निर्यात कर रहा है। देश के भीतर जरूरत के हिसाब से बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।

    इस सम्मेलन से स्पष्ट है कि बिहार अब पारंपरिक बिजली आपूर्ति से आगे बढ़कर विकसित ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर और वैकल्पिक स्रोतों की ओर बढ़ रहा है। न्यूक्लियर पावर प्लांट की स्थापना राज्य के लिए आर्थिक और औद्योगिक विकास का एक नया अध्याय खोल सकती है।

     

  • दिल्ली रवाना हुए सीएम हेमंत सोरेन, गंगा राम अस्पताल में भर्ती पिता शिबू सोरेन से मिलेंगे

    By The News Poat4

    झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन मंगलवार को अचानक दिल्ली के लिए रवाना हुए। उनके दिल्ली दौरे की वजह उनके पिता और झारखंड आंदोलन के प्रणेता, राज्यसभा सांसद शिबू सोरेन की तबीयत है। फिलहाल शिबू सोरेन दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में भर्ती हैं। बताया जा रहा है कि उन्हें रूटीन चेकअप के लिए अस्पताल में भर्ती किया गया है, लेकिन परिजन और पार्टी की ओर से अभी तक स्वास्थ्य को लेकर कोई विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई है।

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपने पिता का हाल जानने के लिए दिल्ली पहुंचे हैं। इससे पहले दो दिन पहले ही उनकी पत्नी और गांडेय से विधायक कल्पना सोरेन भी दिल्ली पहुंची थीं। लगातार दिल्ली से हो रही हलचलों के बीच यह साफ है कि सोरेन परिवार शिबू सोरेन के स्वास्थ्य को लेकर सजग है, लेकिन अभी तक किसी भी स्तर पर यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि उनकी तबीयत कितनी गंभीर है।

    सूत्रों की मानें तो शिबू सोरेन को कुछ दिन पहले ही स्वास्थ्य जांच के लिए दिल्ली लाया गया था। उम्रजनित बीमारियों और नियमित स्वास्थ्य परीक्षण के चलते उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया है। हालांकि, अब तक मुख्यमंत्री कार्यालय या पार्टी की ओर से कोई अधिकारिक मेडिकल बुलेटिन जारी नहीं किया गया है।

  • झारखंड भाजपा में नेतृत्व की हलचल: रघुवर दास और बाबूलाल मरांडी की मुलाकात से सियासी सरगर्मी तेज

    अमित शाह का झारखंड दौरा: क्या तय होगी नई रणनीति?

    परवेज़ आलम.  for The News Post4U.  

    झारखंड की सियासत में एक बार फिर हलचल है। रविवार को दुमका में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी की मुलाकात पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास से हुई। पहली नज़र में यह मुलाकात सामान्य प्रतीत हो सकती है, क्योंकि दोनों नेता दुमका परिसदन में ठहरे हुए थे। लेकिन पार्टी के भीतरखाने में इसे एक राजनीतिक ‘प्रयोग’ माना जा रहा है — एक ऐसी पहल, जो आने वाले महीनों में भाजपा की रणनीति और नेतृत्व को नई दिशा दे सकती है।

    शाह से मुलाकात और रघुवर की सक्रियता: कोई संयोग नहीं ?

    बताया जा रहा है कि एक सप्ताह पहले जब बाबूलाल मरांडी दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मिले थे, उसी दिन रघुवर दास ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर झारखंड में आदिवासी परंपराओं को सम्मान देने के लिए पेसा कानून लागू करने की मांग कर डाली। रघुवर की इस पहल को राजनीतिक गलियारों में ‘सक्रिय वापसी’ के रूप में देखा जा रहा है।

    कांग्रेस ने भी पेसा के मुद्दे पर चर्चा शुरू कर दी है, जिससे साफ है कि इस मुद्दे पर राजनीतिक ध्रुवीकरण तेज हो सकता है। सूत्रों के अनुसार, अमित शाह ने बाबूलाल मरांडी को निर्देश दिया है कि वे रघुवर दास की सक्रियता को संगठन से जोड़ें।

    नेतृत्व संकट और संगठन की जरूरत.

    2024 के लोकसभा चुनाव में हार और प्रमुख नेताओं की पराजय के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं के सामने नेतृत्व का संकट है। बाबूलाल मरांडी, अर्जुन मुंडा और चंपाई सोरेन जैसे नेता सौम्य और शांत राजनीति के लिए जाने जाते हैं। लेकिन वर्तमान हालात में पार्टी को एक ऐसा चेहरा चाहिए जो आक्रामक तेवर के साथ पार्टी की बात जनता तक पहुंचा सके — और यही भूमिका रघुवर दास निभा सकते हैं।

    अमित शाह का झारखंड दौरा: क्या तय होगी नई रणनीति?

    केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह 10 जुलाई को रांची आने वाले हैं। वे पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में हिस्सा लेंगे और झारखंड भाजपा के नेताओं से मिलकर पार्टी की झारखंड मे  रणनीति पर चर्चा करेंगे। इस दौरान पार्टी की आदिवासी, ओबीसी और सामान्य वर्गों के बीच आउटरीच कार्यक्रम का ब्लूप्रिंट भी पेश किया जाएगा।

    इसी समय के आसपास झारखंड भाजपा को नया प्रदेश अध्यक्ष भी मिलने की संभावना है। ऐसे में रघुवर दास की बढ़ती सक्रियता और बाबूलाल मरांडी की रणनीतिक भूमिका को लेकर शाह का नजरिया महत्वपूर्ण होगा।

    अध्यक्ष पद की रेस: कौन किससे आगे?

    भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए कई नाम चर्चा में हैं। इनमें सबसे प्रमुख नाम हैं:

    • रघुवर दास – पूर्व मुख्यमंत्री, वे ओडिशा के राज्यपाल पद से इस्तीफा देकर सक्रिये राजनीति मे लौटे हैं और लगातार झारखंड के जिलों का दौरा कर रहे हैं। पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें और जनता से संवाद कर रहे हैं। शिकायतों पर अफसरों को फोन करना और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो उनकी सक्रियता को दिखा रहे हैं।
    • अर्जुन मुंडा – पूर्व केंद्रीय मंत्री और अनुभवी आदिवासी नेता। लेकिन खूंटी से चुनाव हारने के बाद वे फिलहाल जमशेदपुर स्थित अपने आवास में सीमित राजनीतिक गतिविधियों तक सीमित हैं।
    • चंपाई सोरेन – पूर्व मुख्यमंत्री, जो अब भाजपा में हैं और लगातार कोल्हान व संताल परगना में दौरे कर रहे हैं। संगठन में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में लगे हैं।
    • ओबीसी और सामान्य वर्ग के नेता – इस सूची में राज्यसभा सांसद आदित्य साहू, पूर्व मंत्री अमर बाउरी और पूर्व सांसद रविंद्र राय के नाम प्रमुख हैं।

     भाजपा की रणनीति किस मोड़ पर ?

    रघुवर दास और बाबूलाल मरांडी की दुमका में मुलाकात कोई सामान्य शिष्टाचार नहीं       थी, बल्कि भाजपा के आने वाले फैसलों की बुनियाद मानी जा रही है। अमित शाह के दौरे से पहले पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर चर्चा तेज हो गई है और यह देखना दिलचस्प   होगा कि भाजपा झारखंड में नेतृत्व के लिए किसे चुनती है — अनुभव, सामाजिक समीकरण या सक्रियता को प्राथमिकता दी जाएगी?

     

  • डिजिटल ठगों का नया अड्डा बना झारखंड: बिना हथकड़ी, बिना वर्दी हो रहा ‘डिजिटल अरेस्ट’

    परवेज़ आलम  for The News Post4U.

    झारखंड, जो कभी कोयले की खदानों और जंगलों के लिए पहचाना जाता था, अब एक नई पहचान के साथ सामने आ रहा है—भारत का नया साइबर क्राइम हब। यहां अब न तो खदानें चर्चा में हैं और न ही जंगल, बल्कि अब बात हो रही है उस डर की जो एक कॉल से शुरू होता है और एक करोड़ की ठगी तक पहुंच जाता है।

    जब फोन बन जाए गिरफ्तारी का वारंट.

    सोचिए, एक दिन अचानक आपके फोन पर कॉल आता है—
    “हम दिल्ली क्राइम ब्रांच से बोल रहे हैं, आपके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज हुआ है। ईडी और सीबीआई आपको ट्रैक कर रही हैं। गिरफ़्तारी कभी भी हो सकती है।”

    और फिर वीडियो कॉल पर एक फर्जी गिरफ्तारी वारंट दिखाया जाता है जिसमें आपका नाम लिखा होता है। आप डर जाते हैं, घबरा जाते हैं। और यहीं से शुरू होता है डिजिटल अरेस्ट—आपसे कहा जाता है कि अगर आप निर्दोष हैं तो “सहयोग” करिए और अपने बैंक अकाउंट से पैसे ट्रांसफर करिए ताकि वेरिफिकेशन हो सके। डर के मारे लोग अपनी मेहनत की कमाई खुद ठगों को ट्रांसफर कर देते हैं।

    झारखंड पुलिस के साइबर सेल ने ऐसे ही एक मामले में 14 मई 2025को केस दर्ज किया। जांच के दौरान पता चला कि गिरोह ने व्हाट्सएप कॉल के जरिए लोगों को ईडी का अधिकारी बनकर धमकाया और ₹1.39 करोड़ की ठगी कर ली।

    साइबर गिरोह का जाल—हिमाचल से तमिलनाडु तक.

    जांच में खुलासा हुआ कि इस गिरोह ने महिला समाज कल्याण समिति के नाम से फर्जी खाता YES बैंक में खुलवाया था, जिसमें चार दिनों में ₹3.10 करोड़ से अधिक ट्रांसफर हुआ। ये रकम देशभर के ठगे गए पीड़ितों की थी।

    अब तक 27 अलग-अलग राज्यों से शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं—हरियाणा, केरल, दिल्ली, असम, जम्मू-कश्मीर, कर्नाटक, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, तेलंगाना, और खुद झारखंड।
    यह नेटवर्क इतना संगठित है कि देश के हर कोने में इसका असर दिखने लगा है।

    कई राज्यों में हुई गिरफ्तारियां.

    इस केस में झारखंड पुलिस ने तीन ठगों को गिरफ्तार किया है:

    • सुभाष शर्मा — हिमाचल प्रदेश से पकड़ा गया मुख्य आरोपी
    • बी. इशाक अहमद — तेलंगाना से
    • लालडूसंगा — मिजोरम से

    इनके पास से मोबाइल, सिम कार्ड, एटीएम और आधार कार्ड बरामद किए गए। लेकिन ठगी के इस खेल में यह केवल कुछ मोहरे हैं।

    झारखंड: साइबर क्राइम का नया ‘डिजिटल गुरुकुल’

    देवघर, दुमका, जामताड़ा, गिरिडीह और बोकारो अब सिर्फ जिले नहीं, साइबर ठगी के ब्रांड बन गए हैं। इन इलाकों के कुछ युवाओं ने बिना किसी औपचारिक शिक्षा के ‘डिजिटल बैंकिंग’ में ऐसी महारत हासिल की है, जो बड़े-बड़े इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्र भी नहीं कर पाते।

    इन गांवों में न सड़कें हैं, न रोजगार, लेकिन लैपटॉप, इंटरनेट और मोबाइल फोन ने यहां के लड़कों को ‘फ्रॉडवेयर इंजीनियर’ बना दिया है। ये ठग इतनी सफाई से कॉल करते हैं—“सर, मैं बैंक से बोल रही हूं, आपका केवाईसी अपडेट करना है”—कि सुनने वाला झांसे में आ ही जाता है।

    सरकारी सिस्टम की चुनौती.

    सरकार 1930 हेल्पलाइन नंबर का प्रचार कर रही है। आईफोरसी (Indian Cyber Force Coordination App) जैसे ऐप बनाए गए हैं, जो साइबर अपराधियों को ट्रैक करने में मदद करते हैं। पर फिर भी, झारखंड के इन ‘डिजिटल अपराधियों‘ के खिलाफ जंग आसान नहीं है। हर गिरफ्तारी के साथ नए नाम उभरते हैं, नए तरीके आते हैं, और लोगों की मेहनत की कमाई फिर उड़ जाती है।

    फिर भी सवाल वही है…

    • क्या ये साइबर ठगी कभी रुकेगी?
    • क्या सरकार सिर्फ “डिजिटल इंडिया” का सपना दिखाएगी या इसके काले पक्ष से भी लड़ेगी?
    • क्या युवाओं की तकनीकी दक्षता को सही दिशा नहीं दी जा सकती?

    एक विचार कीजिए—अगर इन्हीं युवाओं को सही दिशा और रोजगार दिया जाए, तो झारखंड न केवल खनिजों का प्रदेश होगा, बल्कि भारत का डिजिटल टैलेंट हब भी बन सकता है।

    और जब अगली बार कोई कहे…

    “मैं बैंक से बोल रहा हूं…”
    तो मुस्कराकर कहिए—
    “तो मैं भी झारखंड से बोल रहा हूं!”