Category: RANCHI

  • तेज प्रताप यादव RJD और परिवार से 6 साल के लिए निष्कासित

    लालू प्रसाद यादव का बड़ा फैसला, बिहार की राजनीति में मचा हलचल

    परवेज़ आलम.

    बिहार की राजनीति एक बार फिर तेज हो गई है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने अपने बड़े बेटे तेज प्रताप यादव को न केवल पार्टी से छह वर्षों के लिए निष्कासित कर दिया, बल्कि उन्हें परिवार से भी अलग कर देने का ऐलान कर दिया है। इस फैसले ने न सिर्फ यादव परिवार में दरार की अटकलों को हवा दी है, बल्कि आरजेडी के भीतर आंतरिक कलह और सियासी समीकरणों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

    लालू यादव ने इस विषय पर ट्वीट करते  हुए लिखा “”निजी जीवन में नैतिक मूल्यों की अवहेलना करना हमारे सामाजिक न्याय के लिए सामूहिक संघर्ष को कमज़ोर करता है। ज्येष्ठ पुत्र की गतिविधि, लोक आचरण तथा गैर जिम्मेदाराना व्यवहार हमारे पारिवारिक मूल्यों और संस्कारों के अनुरूप नहीं है। अतएव उपरोक्त परिस्थितियों के चलते उसे पार्टी और परिवार से दूर करता हूं। अब से पार्टी और परिवार में उसकी किसी भी प्रकार की कोई भूमिका नहीं रहेगी। उसे पार्टी से 6 साल के लिए निष्कासित किया जाता है। अपने निजी जीवन का भला-बुरा और गुण-दोष देखने में वह स्वयं सक्षम है। उससे जो भी लोग संबंध रखेंगे वो स्वविवेक से निर्णय लें। लोकजीवन में लोकलाज का सदैव हिमायती रहा हूं। परिवार के आज्ञाकारी सदस्यों ने सावर्जनिक जीवन में इसी विचार को अंगीकार कर अनुसरण किया है।

    तेज प्रताप के निष्कासन की वजह मानी जा रही है हाल ही में वायरल हुआ वह वीडियो जिसमें वह अनुष्का यादव के साथ नजर आ रहे हैं। खबरों के मुताबिक तेज प्रताप ने इस रिश्ते को सार्वजनिक रूप से स्वीकार भी किया है। उन्होंने यह भी बताया कि वह पिछले 12 वर्षों से अनुष्का से प्रेम करते थे और अब उन्होंने उनसे विवाह कर लिया है

    तेज प्रताप की छवि: रंगीन, धार्मिक और विवादास्पद.

    तेज प्रताप यादव हमेशा से ही बिहार की राजनीति में अपनी अनोखी शैली, धार्मिक रूप और सोशल मीडिया पर सक्रियता के लिए चर्चा में रहे हैं। कभी भगवान शिव, तो कभी श्रीकृष्ण के रूप में दिखाई देना, होली पर पारंपरिक वेशभूषा पहनकर आयोजन करना—तेज प्रताप ने हमेशा खुद को अलग दिखाने की कोशिश की।

    राजनीतिक करियर की बात करें तो उन्होंने 2015 में महुआ सीट से जीत दर्ज की और नीतीश कुमार की सरकार में स्वास्थ्य मंत्री बने। फिर 2020 में हसनपुर से विधायक चुने गए और दूसरी बार नीतीश सरकार में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री का पद संभाला। हालांकि, उनकी कार्यशैली और विवादास्पद बयान अक्सर पार्टी की मुश्किलें बढ़ाते रहे।

    निजी जीवन में भी विवादों से घिरे रहे तेज प्रताप.

    तेज प्रताप का निजी जीवन भी सुर्खियों से अछूता नहीं रहा है। 2018 में उन्होंने बिहार के पूर्व मंत्री चंद्रिका राय की बेटी ऐश्वर्या राय से शादी की थी। यह रिश्ता ज्यादा लंबा नहीं चला और तलाक की प्रक्रिया अब भी अदालत में लंबित है। अब अनुष्का यादव के साथ उनकी नई शुरुआत ने राजनीतिक और पारिवारिक हलकों में भूचाल ला दिया है।

    पप्पू यादव ने तेज प्रताप का किया समर्थन, लालू के फैसले पर उठाए सवाल.

    तेज प्रताप यादव के निष्कासन के बाद जन अधिकार पार्टी (JAP) के नेता और पूर्णिया सांसद पप्पू यादव खुलकर उनके समर्थन में सामने आए हैं। उन्होंने तेज प्रताप को “ईमानदार प्रेमी” बताते हुए लालू प्रसाद यादव से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की है।

    “तेज प्रताप ने कोई अपराध नहीं किया है। उन्होंने समाज के सामने सच स्वीकार किया। ऐसे में उन्हें सजा देना कहां तक उचित है?” – पप्पू यादव

    उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि देश की राजनीति में ऐसे कई नेता हैं जिन पर गंभीर आपराधिक आरोप हैं, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं होती, जबकि तेज प्रताप को सिर्फ इसलिए निष्कासित किया गया क्योंकि उन्होंने प्रेम को स्वीकार किया

    राजनीतिक असर: RJD को फायदा या विरोधियों को मिलेगा मुद्दा?

    तेज प्रताप के निष्कासन से RJD को अनुशासन का संदेश देने का मौका मिला है, लेकिन साथ ही यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इससे पार्टी को चुनावी नुकसान होगा। बिहार विधानसभा चुनाव से पहले यह मुद्दा विरोधी दलों के लिए एक बड़ा हथियार बन सकता है। वहीं, तेज प्रताप यादव के समर्थकों में इस फैसले को लेकर नाराज़गी देखी जा रही है।

    अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या तेज प्रताप कोई नया राजनीतिक विकल्प तलाशेंगे, क्या वे बगावती रुख अपनाएंगे, या फिर यह पारिवारिक कलह समय के साथ शांत हो जाएगा ।

  • देश की सेनाओं के शौर्य पर गर्व: ओम बिरला ने ऑपरेशन सिंदूर को बताया आतंकवाद के विरुद्ध भारत की नई नीति का प्रतीक

    रांची : झारखंड दौरे पर आए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने रविवार को कहा कि देश को अपनी सेनाओं के शौर्य और पराक्रम पर गर्व है। उन्होंने कहा कि भारत की सेनाएं न केवल अपनी सीमाओं की रक्षा कर रही हैं, बल्कि आतंकवाद के विरुद्ध वैश्विक लड़ाई में भी नई नीति और स्पष्ट रणनीति के साथ अग्रसर हैं।

    वे जमशेदपुर स्थित लोयोला स्कूल के फैजी ऑडिटोरियम में आयोजित सिंहभूम चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के प्लेटिनम जुबली समारोह में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने अपने भाषण में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का उल्लेख करते हुए कहा कि यह अभियान इस बात का स्पष्ट संकेत है कि भारत अब केवल रक्षात्मक नीति नहीं, बल्कि निर्णायक कार्रवाई की दिशा में कदम बढ़ा चुका है।

    “यदि कोई देश भारत में आतंकवाद फैलाने की कोशिश करेगा, तो उसका परिणाम ऑपरेशन सिंदूर से भी अधिक कठोर होगा,” ओम बिरला ने स्पष्ट चेतावनी दी।

    झारखंड पहुंचते ही बिरसा मुंडा को किया नमन.

    रविवार को दोपहर 12:41 बजे लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला रांची से हवाई मार्ग द्वारा जमशेदपुर के सोनारी एयरपोर्ट पहुंचे। यहां से वे सीधे लोयोला स्कूल पहुंचे, जहां पारंपरिक जनजातीय रीति-रिवाजों के अनुसार उनका भव्य स्वागत किया गया।

    इससे पहले, रांची में उनके आगमन पर झारखंड विधानसभा अध्यक्ष रविंद्र नाथ महतो और रक्षा राज्य मंत्री एवं रांची के सांसद संजय सेठ ने एयरपोर्ट पर उनका आत्मीय स्वागत किया। इसके बाद वे बिरसा चौक पहुँचे, जहाँ उन्होंने धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

    “भगवान बिरसा मुंडा ने न केवल आदिवासियों के अधिकारों, बल्कि उनकी संस्कृति, जंगल और ज़मीन के लिए भी संघर्ष किया। उनकी प्रेरणा आज भी देश के लिए पथप्रदर्शक है,” ओम बिरला ने कहा।

    आदिवासी समाज से जुड़ाव और सम्मान की भावना.

    ओम बिरला के दौरे को झारखंड में विशेष महत्व दिया जा रहा है, खासकर आदिवासी समुदाय के बीच। बिरसा मुंडा की धरती पर आकर उन्होंने अपने संबोधन में इस क्षेत्र की ऐतिहासिक चेतना और संस्कृति को सम्मान देने की बात कही। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की आत्मनिर्भरता और गौरवशाली परंपराएं देश की ताकत हैं।

    कड़ी सुरक्षा व्यवस्था, राजभवन में रात्रि विश्राम.

    लोकसभा अध्यक्ष की यात्रा को लेकर प्रशासन ने रांची और जमशेदपुर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। उनके कार्यक्रमों की श्रृंखला में शामिल होकर वे रविवार रात्रि को राजभवन में विश्राम करेंगे।

    ओम बिरला के दौरे का उद्देश्य न केवल राजनीतिक और प्रशासनिक संवाद है, बल्कि सामाजिक-सांस्कृतिक पहलों को भी बल देना है। वे रांची में कई अन्य कार्यक्रमों में भी हिस्सा लेंगे, जहाँ वे व्यापार, उद्योग, शिक्षा और समाज के विविध वर्गों से संवाद करेंगे।

  • मइयां सम्मान योजना : किस्तों के इंतजार में लाखों महिलाएं, सवालों के घेरे में प्रशासनिक प्रक्रिया

    परवेज़ आलम.

    झारखंड सरकार की महत्वाकांक्षी योजना मुख्यमंत्री मइयां सम्मान योजना एक बार फिर सुर्खियों में है। अप्रैल और मई माह की किस्त का इंतजार कर रहीं लाभार्थी महिलाएं अब यह जानने को बेताब हैं कि आखिर उनके खातों में सम्मान राशि ट्रांसफर क्यों नहीं हो रही। जबकि महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग ने 13 मई को ही राज्यभर के जिलों को 9,609 करोड़ रुपये आवंटित कर दिए हैं।

    तो फिर पैसा लाभुकों के खाते में क्यों नहीं  ?

    सरकारी गाइडलाइन के अनुसार, हर माह की 15 तारीख तक लाभुकों के बैंक खातों में सम्मान राशि भेज दी जानी चाहिए। ऐसे में स्वाभाविक सवाल उठ रहा है कि जब राशि का आवंटन समय पर हो चुका है, तो ट्रांसफर में देरी क्यों हो रही है ? जानकारी के अनुसार, अधिकांश जिलों ने 15 मई से पहले ही तकनीकी और प्रशासनिक तैयारी पूरी कर ली थी।

    हालांकि विभाग की ओर से निर्देश जारी किया गया है कि राशि केवल उन्हीं महिलाओं को दी जाए, जो इसके लिए पूरी तरह पात्र हैं। इसीलिए आधार सीडिंग और खातों का सत्यापन (cross verification) तेजी से किया जा रहा है। जिला कोषांगों का कहना है कि उन्हें राज्य मुख्यालय से ‘ग्रीन सिग्नल’ मिलने की देर है, उसके बाद राशि तुरंत ट्रांसफर कर दी जाएगी।

    एक साथ दो किस्त या सिर्फ एक ? बनी हुई है अनिश्चितता.

    13 मई को राशि आवंटन के समय यह उम्मीद जताई गई थी कि अप्रैल और मई – दोनों महीनों की संयुक्त किस्त (5,000 रु.) लाभुकों को दी जाएगी। मगर अब सूत्रों के मुताबिक, केवल अप्रैल माह की किस्त दिए जाने की संभावना जताई जा रही है। विभागीय स्तर पर कोई स्पष्ट आदेश नहीं जारी किया गया है, जिससे स्थिति को लेकर भ्रम और भी गहरा गया है।

    सबसे ज्यादा लाभुक कहां   ?

    योजना के आंकड़ों पर नजर डालें तो सबसे अधिक लाभुक गिरिडीह जिले से हैं, इसके बाद रांची, धनबाद, बोकारो और पलामू क्रमशः दूसरे, तीसरे, चौथे और पांचवें स्थान पर हैं। हालांकि विभाग की ओर से यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि इस बार कितने लाभार्थियों को सम्मान राशि दी जाएगी।

    एक अनुमान के अनुसार, करीब 43 लाख महिलाएं इस बार सम्मान राशि पाने वाली हैं। यह संख्या पहले जारी 56.61 लाख लाभुकों की सूची से काफी कम है। जनवरी में जब पहली बार राशि ट्रांसफर की गई थी, तो बड़ी संख्या में अपात्र लाभुकों की पहचान हुई थी। इसके बाद ही लाभुकों के आधार से लिंक खातों की अनिवार्यता तय की गई।

    पहले भी हो चुकी है छंटनी और संशोधन.

    मार्च महीने में एक साथ जनवरी, फरवरी और मार्च की किस्त 37.55 लाख महिलाओं को भेजी गई थी। उसके बाद, जब खातों की जांच-पड़ताल पूरी हुई, तो अप्रैल में 5.52 लाख अतिरिक्त लाभुकों को राशि दी गई थी। इसका मतलब है कि विभाग द्वारा अपात्र लाभुकों की छंटनी और नए पात्र लाभार्थियों को शामिल करने की प्रक्रिया अभी भी जारी है।

    आगे क्या?

    फिलहाल, जिला कोषांगों से लेकर लाभार्थियों तक — सबकी निगाहें राज्य मुख्यालय से मिलने वाले अंतिम निर्देश पर टिकी हैं। लेकिन अब तक यह तय नहीं हो पाया है कि यह ‘ग्रीन सिग्नल’ आखिर कब मिलेगा।

    इस योजना को लेकर सरकार की गंभीरता और पारदर्शिता की मंशा तो स्पष्ट है, लेकिन सूचना के अभाव और स्पष्ट संवाद की कमी ने योजना के क्रियान्वयन को लेकर असमंजस की स्थिति उत्पन्न कर दी है।
    मुख्यमंत्री मइयां सम्मान योजना सामाजिक सुरक्षा की दृष्टि से एक सराहनीय पहल है, लेकिन यदि इसके वितरण में पारदर्शिता और त्वरित प्रक्रिया सुनिश्चित नहीं की गई, तो यह योजना अपनी राजनीतिक और सामाजिक साख को कमजोर कर सकती है। लाभुकों का धैर्य जवाब न दे, इसके लिए ज़रूरी है कि सरकार समय रहते स्थिति स्पष्ट करे और भरोसे का माहौल बनाए रखे।

     

  • झारखंड: आखिर कब रुकेगा भ्रष्टाचार का सिलसिला ? भ्रष्टाचार के इस काले पन्ने पर आईएएस ऑफिसरों की फेरहिस्त बढती जा रही है  

    उत्पाद विभाग के अधिकारियों की चल-अचल संपत्ति का आकलन करने में जुटी है एसीबी की टीम.

    परवेज़ आलम.

    झारखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत एक और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी, विनय कुमार चौबे, अब आरोपों के घेरे में हैं। राज्य गठन के बाद से अब तक भ्रष्टाचार के मामलों में गिरफ्तार आईएएस अधिकारियों की सूची में चौबे का नाम छठे नंबर पर दर्ज हो गया है। खास बात यह है कि इन छह में से चार अधिकारी रांची के उपायुक्त रह चुके हैं, जिससे राजधानी में प्रशासनिक स्तर पर लंबे समय से भ्रष्टाचार के पैठ की पुष्टि होती है।

    भ्रष्टाचार की जद में रांची के पूर्व डीसी

    विनय कुमार चौबे, जो झारखंड राज्य बेवरेजेस कॉरपोरेशन लिमिटेड (JSBCL) के प्रबंध निदेशक और उत्पाद विभाग के प्रधान सचिव रह चुके हैं, को 20 मई को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने गिरफ्तार किया। उनके साथ संयुक्त आयुक्त उत्पाद गजेंद्र सिंह को भी जेल भेजा गया है। दोनों पर आरोप है कि उन्होंने प्लेसमेंट एजेंसियों के चयन में निर्धारित प्रक्रिया का उल्लंघन करते हुए फर्जीवाड़ा किया, जिससे राज्य को तकरीबन 38 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

    जालसाजी की रकम एक अरब तक पहुंचने की आशंका

    ACB की प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि यह घोटाला महज 38 करोड़ रुपये तक सीमित नहीं है। यह आंकड़ा एक अरब रुपये तक पहुंच सकता है। इन अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने नियमों की अनदेखी करते हुए कुछ प्लेसमेंट एजेंसियों को लाभ पहुंचाया। यही नहीं, बाद में जिन एजेंसियों को अनुबंध दिया गया, उनमें भी कथित रूप से गड़बड़ी हुई। संबंधित एजेंसियों की बैंक गारंटी तक जब्त की गई, लेकिन कार्रवाई अधूरी रही।

    कौन-कौन आईएएस घोटाले में गए जेल

    इससे पहले रांची के उपायुक्त रह चुके आईएएस सजल चक्रवर्ती को चारा घोटाले में जेल भेजा गया था। फिर सीबीआई ने दवा घोटाले में डॉ. प्रदीप कुमार को, और ईडी ने जमीन घोटाले में छवि रंजन को हिरासत में लिया। इसके अतिरिक्त पूजा सिंघल और सियाराम प्रसाद सिन्हा भी भ्रष्टाचार मामलों में जेल जा चुके हैं और वर्तमान में जमानत पर हैं।

    चारा घोटाले से जुड़े मामलों में अब तक पांच आईएएस – सजल चक्रवर्ती, महेश प्रसाद, के. अरुणगम, फूल चंद्र सिंह और बेक जुलियस – को दोषी ठहराया जा चुका है।

    एसीबी की सक्रियता, सीबीआई-ईडी को भी मिलेगा लाभ

    ACB की यह कार्रवाई अब केंद्रीय जांच एजेंसियों – CBI और ED – के लिए भी महत्वपूर्ण सबूत उपलब्ध करा सकती है। ED जल्दी ही इस प्राथमिकी को टेकओवर कर नया ECIR दर्ज कर सकती है। वहीं CBI पहले से ही भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत इस पूरे मामले की जांच कर रही है।

    नेताओं की मांग: अब हो सीबीआई जांच

    भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने इस मामले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि उन्होंने अप्रैल 2022 में ही इस घोटाले की आशंका जाहिर कर राज्य सरकार को पत्र लिखा था। मरांडी का आरोप है कि यह घोटाला छत्तीसगढ़ के शराब घोटाले की तर्ज पर, योजनाबद्ध तरीके से किया गया है। उन्होंने एसीबी की कार्रवाई को अपर्याप्त बताते हुए सीबीआई जांच की मांग की है।

    मरांडी ने सवाल उठाया, “क्या केवल एसीबी की जांच से घोटाले की पूरी सच्चाई सामने आ सकेगी? ऐसा प्रतीत होता है कि बड़ी मछलियों को बचाने के लिए कुछ लोगों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है।”

    आरोपियों की संपत्ति की जांच शुरू

    ACB अब गिरफ्तार अधिकारियों की चल-अचल संपत्तियों और बैंक खातों की जांच में जुट गई है। पिछले दस वर्षों के दौरान उनकी आय-व्यय की समीक्षा की जा रही है। उनके पैन कार्ड, बैंक स्टेटमेंट और घोषित संपत्तियों की भी पड़ताल की जा रही है।

    स्वास्थ्य जांच में सामने आई हाई बीपी की समस्या

    गिरफ्तारी के बाद ACB कार्यालय में विनय कुमार चौबे और गजेंद्र सिंह की स्वास्थ्य जांच की गई। दोनों की स्थिति सामान्य पाई गई, हालांकि चौबे का ब्लड प्रेशर थोड़ा बढ़ा हुआ मिला। डॉक्टरों ने उन्हें नमक कम करने की सलाह दी है।

    आखिर कब रुकेगा भ्रष्टाचार का सिलसिला?

    झारखंड में लगातार सामने आ रहे घोटाले राज्य प्रशासन की पारदर्शिता और जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा करते हैं। रांची जैसे प्रमुख जिले से बार-बार अधिकारियों की गिरफ्तारी इस बात की ओर संकेत करती है कि भ्रष्टाचार यहां संस्थागत रूप ले चुका है। ऐसे में सवाल यह है कि क्या केवल गिरफ्तारी से हालात सुधरेंगे या अब वक्त आ गया है कि राज्य सरकार और जांच एजेंसियां मिलकर बड़े सुधार की ओर कदम बढ़ाएं?

     

  • झारखंड में बड़ा शराब घोटाला: IAS विनय चौबे और संयुक्त आयुक्त गजेंद्र सिंह गिरफ्तार

    By The NewsPost4u

    रांची :  झारखंड में हुए बहुचर्चित शराब घोटाले की जांच के तहत मंगलवार को राज्य के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी और तत्कालीन उत्पाद सचिव विनय कुमार चौबे को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने गिरफ्तार कर लिया। उनके साथ संयुक्त उत्पाद आयुक्त गजेंद्र सिंह को भी हिरासत में लिया गया है। यह कार्रवाई एक लंबे समय से जारी जांच और पूछताछ के बाद की गई, जिसमें दोनों अधिकारियों पर छत्तीसगढ़ के शराब सिंडिकेट के साथ मिलकर झारखंड में नई शराब नीति के नाम पर घोटाले को अंजाम देने का आरोप है।शाम लगभग 5 बजे दोनों को रांची की विशेष एसीबी अदालत में पेश किया गया, जहां कोर्ट ने उन्हें तीन जून तक न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। दोनों को होटवार स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार ले जाया गया है।

    छत्तीसगढ़ से जुड़े तार, वहीं से खुला मामला.

    यह घोटाला सबसे पहले छत्तीसगढ़ में सामने आया था, जहां स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड के अधिकारियों और व्यापारियों पर शराब नीति में गड़बड़ी करने और सरकारी धन की हेराफेरी करने के आरोप लगे थे। छत्तीसगढ़ की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) और फिर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जांच शुरू की। जांच में खुलासा हुआ कि छत्तीसगढ़ में सक्रिय सिंडिकेट ने झारखंड में भी इसी तर्ज पर एक समान शराब नीति लागू करवाई और घोटाले को अंजाम दिया।

    झारखंड में भी लागू हुई विवादास्पद उत्पाद नीति.

    ईडी को जांच में पता चला कि झारखंड में जिस उत्पाद नीति के जरिए यह गड़बड़ियां की गईं, उसे विनय चौबे के कार्यकाल में मंजूरी दी गई थी। इसके बाद ईडी ने उन्हें पूछताछ के लिए समन जारी किया था। 2024 में ईडी ने विनय चौबे और गजेंद्र सिंह के ठिकानों पर छापेमारी भी की थी।

    38 करोड़ का नुकसान, साजिश कर चयनित की गई एजेंसियां.

    एसीबी की जांच में सामने आया है कि दोनों अधिकारियों ने सरकारी प्रक्रिया की अनदेखी कर कुछ प्लेसमेंट एजेंसियों को फायदा पहुंचाने के लिए साजिश रची, जिससे राज्य सरकार को करीब 38 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ।

    पूछताछ के बाद गिरफ्तारी, कोर्ट ने भेजा जेल.

    मंगलवार सुबह एसीबी की टीम ने विनय चौबे के रांची स्थित आवास पर पहुंचकर उन्हें पूछताछ के लिए हिरासत में लिया। कई घंटे चली पूछताछ के बाद उन्हें और गजेंद्र सिंह को गिरफ्तार किया गया। शाम लगभग 5 बजे दोनों को रांची की विशेष एसीबी अदालत में पेश किया गया, जहां कोर्ट ने उन्हें तीन जून तक न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। दोनों को होटवार स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार ले जाया गया है।

    चौबे फिलहाल पंचायती राज विभाग में, पहले थे JSBCL के MD.

    गौरतलब है कि विनय चौबे झारखंड राज्य बेवरेजेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (JSBCL) के प्रबंध निदेशक भी रह चुके हैं। वर्तमान में वे पंचायती राज विभाग के प्रधान सचिव हैं। गजेंद्र सिंह उस दौरान आबकारी विभाग के संयुक्त आयुक्त थे।

    कैबिनेट सचिवालय से ली गई अनुमति, FIR दर्ज कर जांच तेज.

    राज्य सरकार के मंत्रिमंडल सचिवालय एवं निगरानी विभाग से अनुमति लेने के बाद एसीबी ने 20 मई 2025 को रांची थाना कांड संख्या 09/2025 के तहत प्राथमिकी दर्ज की। इसके तहत जांच और तेज कर दी गई है। आने वाले दिनों में एसीबी दोनों अधिकारियों को रिमांड पर लेकर विस्तृत पूछताछ की तैयारी कर रही है।

  • झारखंड में मौसम का मिजाज बदला-बदला सा: 24 मई तक बारिश और तेज़ हवाओं की चेतावनी, आकाशीय बिजली से 5 की मौत

    By The NewsPost4u

    झारखंड में मौसम का मिजाज लगातार बदलता जा रहा है। दिन में चटक धूप के बाद अचानक बदलता मौसम तापमान में पांच से छह डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट ला रहा है। राज्य के कई इलाकों में दोपहर बाद हल्की से मध्यम बारिश हो रही है, जिससे आम जनजीवन पर असर पड़ा है।

    मौसम विभाग ने चेतावनी जारी करते हुए बताया है कि 24 मई तक झारखंड के कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना बनी हुई है। इसके साथ ही 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज़ हवाएं चलने और आकाशीय बिजली गिरने की आशंका को लेकर येलो अलर्ट जारी किया गया है।

    राजधानी रांची और अन्य इलाकों में राहत, लेकिन पलामू तप रहा है.

    पिछले दो दिनों में रांची और उसके आसपास के इलाकों में दोपहर बाद हुई बारिश ने मौसम में ठंडक घोल दी है। तापमान में पांच से छह डिग्री की गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि, पलामू अब भी भीषण गर्मी की चपेट में है। वहां का तापमान 42 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। दूसरी ओर, पूर्वी और पश्चिमी सिंहभूम में गर्मी में कुछ राहत मिली है, जहां पारा 34 से 35 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा।

    23 और 24 मई को फिर बारिश की संभावना.

    मौसम विभाग ने जानकारी दी है कि 23 और 24 मई को राज्य के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। इन दो दिनों के लिए भी येलो अलर्ट जारी किया गया है। हालांकि सोमवार को रांची में मौसम अपेक्षाकृत साफ रहा। कभी-कभी बादल छाए और हल्की हवाएं भी चलीं।

    प्रमुख शहरों का तापमान:

    • रांची – 35.8°C
    • जमशेदपुर – 34.5°C
    • डाल्टनगंज – 42.2°C
    • बोकारो – 34.5°C
    • चाईबासा – 35.4°C

    बीते कुछ दिनों में रांची में खराब मौसम के चलते विमान सेवाएं और ट्रेनों का संचालन भी प्रभावित हुआ है। वहीं, कई इलाकों में घंटों तक बिजली गुल रही।

    आकाशीय बिजली का कहर: 5 की मौत, 6 घायल.

    सोमवार को गढ़वा और हजारीबाग जिलों में आकाशीय बिजली गिरने से पांच लोगों की मौत हो गई जबकि छह अन्य लोग घायल हो गए। पुलिस के अनुसार, गढ़वा में तीन और हजारीबाग में दो लोगों की जान गई है।

    सुरक्षा बल पर भी मौसम का कहर.

    पिछले हफ्ते चाईबासा में नक्सल विरोधी अभियान के दौरान सीआरपीएफ के 46 वर्षीय जवान की आकाशीय बिजली गिरने से मौत हो गई थी और तीन अन्य घायल हुए थे।

    मौसम विभाग की सतर्कता जारी.

    मौसम विभाग ने पहले ही 20 मई तक ऑरेंज अलर्ट जारी किया था। 23-24 मई को बारिश बढ़ने के कारण तूफान की आशंका कम हो सकती है, लेकिन किसी भी मौसमीय आपातस्थिति से इनकार नहीं किया जा सकता। इसलिए विभाग समय-समय पर येलो और ऑरेंज अलर्ट जारी कर रहा है ताकि लोग सतर्क रहें।

    झारखंड में मौसम की अनिश्चितता लोगों के लिए चुनौती बनती जा रही है। ऐसे में ज़रूरी है कि लोग मौसम विभाग की चेतावनियों पर ध्यान दें और सावधानी बरतें, खासकर खुले इलाकों में निकलने से बचें।

  • भारत-पाकिस्तान तनाव के बीच अमित शाह का  झारखंड दौरा टला, पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की बैठक रद्द

    BY THE NEWS POST4U

    RANCHI: भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के मद्देनज़र केंद्र सरकार ने कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। इन्हीं फैसलों की श्रृंखला में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का झारखंड दौरा और रांची में होने वाली पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की बैठक रद्द कर दी गई है। अमित शाह को 9 मई को रांची पहुंचना था और 10 मई को बैठक में भाग लेना था।

    केंद्र सरकार की बैठक पर लगा विराम

    सूत्रों के मुताबिक, 10 मई को रांची में पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की बैठक आयोजित होनी थी, जिसमें बिहार, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्रियों को शामिल होना था। बैठक में क्षेत्रीय विकास, आंतरिक सुरक्षा, सीमावर्ती क्षेत्रों की चुनौतियाँ और केंद्र-राज्य समन्वय जैसे मुद्दों पर चर्चा प्रस्तावित थी। हालाँकि बैठक रद्द करने का कोई आधिकारिक कारण सरकार की ओर से सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि भारत-पाकिस्तान के बीच उत्पन्न हुए संभावित सैन्य तनाव की पृष्ठभूमि में यह निर्णय लिया गया है।

    सीमावर्ती राज्यों के CM और LG के साथ हुई अहम बैठक

    गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में उन राज्यों के मुख्यमंत्रियों और उपराज्यपालों के साथ उच्च स्तरीय बैठक की, जिनकी सीमाएँ पाकिस्तान और नेपाल से लगती हैं। इस बैठक में सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की गई और संवेदनशील इलाकों में सतर्कता बढ़ाने के निर्देश दिए गए। केंद्र सरकार का उद्देश्य देश की सीमाओं को पूर्णतः सुरक्षित बनाए रखना है।

    झारखंड सरकार का केंद्र को समर्थन.

    झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार के प्रति समर्थन जताते हुए कहा, “यह समय देश की एकता और अखंडता के लिए एकजुट रहने का है। केंद्र और सेना जो भी निर्णय लेंगी, झारखंड सरकार उसका समर्थन करेगी।” उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा सर्वोपरि है और वर्तमान हालात में राजनीतिक बयानबाज़ी से परहेज़ करते हुए देशहित को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

    मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उनकी सरकार ने बैठक की सभी तैयारियाँ पूरी कर ली थीं और गृह मंत्री को राजकीय अतिथि घोषित किया गया था, लेकिन राष्ट्रीय हितों के मद्देनज़र जो भी फैसला लिया गया है, वह स्वागत योग्य है।

     

     

  • सीमा पर तनाव के बीच में मॉक ड्रिल: युद्धकालीन हालात से निपटने की रणनीतिक तैयारी

    परवेज़ आलम.

    रांची : भारत-पाकिस्तान सीमा पर बढ़ते तनाव और हाल ही में हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद देशभर में नागरिक सुरक्षा को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है। इसी क्रम में गृह मंत्रालय के निर्देश पर बुधवार को देशभर के प्रमुख शहरों में मॉक ड्रिल (सुरक्षा अभ्यास) का आयोजन किया गया। झारखंड की राजधानी रांची,बोकारो, जमशेदपुर, गोड्डा और साहिबगंज जिलों में में भी यह ड्रिल पूरे जोर-शोर से की गई, जिसका उद्देश्य आम नागरिकों, प्रशासनिक अमले और राहत एजेंसियों को आपातकालीन परिस्थितियों के लिए तैयार करना था।

    मॉक ड्रिल का संचालन: युद्ध जैसी स्थिति की तैयारी.

    रांची के मेकॉन क्षेत्र में मुख्य मॉक ड्रिल आयोजित की गई, जहां सायरन बजते ही सुरक्षा बलों और प्रशासन की टीमें सक्रिय हो गईं। डोरंडा समेत आसपास के क्षेत्रों में आवाजाही रोक दी गई, सड़कें बंद कर दी गईं और दुकानों को अस्थायी रूप से बंद करा दिया गया। ड्रिल के दौरान शहर के विभिन्न हिस्सों में एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड, पुलिस बल और एनडीआरएफ की टीमों ने संयुक्त रूप से अपनी तैयारियों का प्रदर्शन किया।

    लाउडस्पीकर से दिशा-निर्देश, नागरिकों को जागरूक किया गया.

    प्रशासन ने पूरे अभ्यास के दौरान लाउडस्पीकर के माध्यम से मॉक ड्रिल में शामिल लोगों को दिशा-निर्देश देते हुए यह स्पष्ट किया कि यह अभ्यास नागरिक सुरक्षा के लिए किया जा रहा है। रांची के डीसी मंजूनाथ भजंत्री ने पहले ही नागरिकों से अपील की थी कि सायरन बजने पर घबराएं नहीं, यह सिर्फ एक अभ्यास है।

    सुरक्षा एजेंसियों की सक्रियता और समन्वय.

    ड्रिल में एनडीआरएफ ने मेकॉन भवन में आग लगने की स्थिति का अभ्यास किया, जहां फायर ब्रिगेड की मदद से आग बुझाने का प्रदर्शन हुआ और कर्मचारियों को सुरक्षित बसों से निकाला गया। एंबुलेंस के जरिए घायलों को अस्पताल तक पहुंचाने का मॉक अभ्यास किया गया। इस दौरान विभिन्न एजेंसियों के बीच तालमेल और त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली की परीक्षा ली गई।

    बच्चों और आम नागरिकों को भी दिया गया प्रशिक्षण.

    सुरक्षा ड्रिल में स्कूलों के बच्चों को भी शामिल किया गया। उन्हें बताया गया कि सायरन बजते ही किस तरह अपनी सुरक्षा करनी है – जैसे बेंच-टेबल के नीचे छिपना, खिड़कियों से दूरी बनाना और घबराए बिना सतर्क रहना। कुछ स्कूलों में बच्चों ने लाइव डेमोंस्ट्रेशन के ज़रिए बचाव तकनीकों का प्रदर्शन किया।

    एनसीसी और एनएसएस की भूमिका.

    राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) और राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के स्वयंसेवकों ने भी इस अभ्यास में सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने आम नागरिकों को राहत स्थल तक पहुंचाने और आपातकालीन स्थिति में आवश्यक सहयोग देने के तरीकों का प्रदर्शन किया।

    राज्य के 5 जिलों में चला व्यापक अभ्यास.

    रांची के अलावा झारखंड के बोकारो, जमशेदपुर, गोड्डा और साहिबगंज जिलों में भी इस तरह की मॉक ड्रिल आयोजित की गई। कुल छह स्थलों पर एक साथ यह अभ्यास हुआ, जहां सायरन की आवाज के साथ यातायात रोका गया और लोगों को घरों की लाइटें बंद करने, खिड़की-दरवाजे बंद रखने और किसी भी संभावित हमले की स्थिति में सतर्क रहने के निर्देश दिए गए।

    ड्रिल का उद्देश्य: दहशत नहीं, तैयारी जरूरी.

    इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य आम जनता को युद्ध या आतंकी हमलों जैसी परिस्थितियों में भयभीत होने से बचाना और उन्हें सटीक तरीके से प्रतिक्रिया करने के लिए प्रशिक्षित करना है। अधिकारियों का कहना है कि सायरन की आवाज से लोगों को ऐसे हालात में शांत और संगठित रहने की आदत डालनी चाहिए।

    भविष्य में और क्षेत्रों में भी होगा आयोजन.

    प्रशासन ने संकेत दिया है कि इस प्रकार की मॉक ड्रिल आगे भी समय-समय पर राज्य के विभिन्न हिस्सों में कराई जाएगी, ताकि किसी भी संभावित संकट की स्थिति में अफरा-तफरी से बचा जा सके और जान-माल की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।


     

  • खुफिया इनपुट के बावजूद नहीं हुई सुरक्षा तैयारी, पहलगाम हमले पर खरगे ने केंद्र सरकार को घेरा

    परवेज़ आलम.

    रांची: झारखंड की राजधानी रांची में आयोजित ‘संविधान बचाओ रैली’ के मंच से कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले का हवाला देते हुए खरगे ने दावा किया कि हमले से तीन दिन पहले प्रधानमंत्री को खुफिया रिपोर्ट भेजी गई थी। इसके आधार पर पीएम मोदी ने तो अपनी यात्रा रद्द कर दी, लेकिन आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर कोई कदम नहीं उठाया गया, जिसके कारण 26 निर्दोष लोगों की जान चली गई। खरगे ने कहा, “हमले से तीन दिन पहले प्रधानमंत्री को इंटेलिजेंस इनपुट मिला था, जिसके बाद उन्होंने अपना कश्मीर दौरा रद्द कर दिया। लेकिन सवाल यह है कि अगर उन्हें खतरे की जानकारी थी, तो आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर क्या किया गया?”

    जब जानकारी थी, तो सुरक्षा क्यों नहीं ?

    खरगे ने सवाल किया कि यदि प्रधानमंत्री को खतरे की गंभीर जानकारी थी, तो उसी रिपोर्ट को सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय पुलिस के साथ क्यों नहीं साझा किया गया? उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री खुद खतरों से बच गए, लेकिन आम लोगों को क्यों मरने के लिए छोड़ दिया गया?” उन्होंने केंद्र को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि जब सरकार खुद इंटेलिजेंस फेल्योर को स्वीकार कर रही है, तो उसे इन मौतों की जवाबदेही भी लेनी चाहिए।

    आतंकवाद के खिलाफ समर्थन, लेकिन चूक पर सवाल जरूरी.

    कांग्रेस अध्यक्ष ने यह स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ सरकार के हर कड़े कदम का समर्थन करती है। लेकिन उन्होंने यह भी जोड़ा कि “समर्थन का मतलब यह नहीं कि सरकार अपनी लापरवाही पर पर्दा डाले।”

    मीडिया रिपोर्ट का हवाला, पीएम का दौरा रद्द.

    खरगे ने एक अखबार की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि 19 अप्रैल को प्रधानमंत्री को पहलगाम में खतरे की जानकारी मिली थी, जिसके बाद उन्होंने कश्मीर का दौरा रद्द कर दिया। “जब पीएम खुद नहीं गए, तो यह जानकारी आम लोगों को सुरक्षित रखने के लिए क्यों नहीं इस्तेमाल हुई?” उन्होंने पूछा।

    रोजगार और अर्थव्यवस्था पर भी उठाए सवाल.

    रैली में खरगे ने आर्थिक मोर्चे पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि देश में 30 लाख सरकारी पद खाली हैं, लेकिन मोदी सरकार इन्हें भरने में रुचि नहीं ले रही। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीति बन गई है – “PSU बंद करो और गरीबों की नौकरी छीनो।”

    उन्होंने यह भी कहा कि कई सरकारी उपक्रमों में कर्मचारियों को महीनों से वेतन नहीं मिला, जबकि सरकार दावा करती है कि देश की अर्थव्यवस्था मजबूत है। उन्होंने कहा, “अगर जमीन पर हालात नहीं सुधरते, तो आंकड़े महज भ्रम पैदा करने का जरिया बन जाते हैं।”

    जातीय जनगणना और सामाजिक न्याय की मांग.

    खरगे ने केंद्र सरकार से जल्द जातीय जनगणना शुरू करने की मांग की। उन्होंने कहा कि ओबीसी आरक्षण का दायरा बढ़ाया जाए और 50% की सीमा खत्म की जाए। उन्होंने कहा, “वोट हमारा और राज तुम्हारा – यह अब नहीं चलेगा। अब वोट भी हमारा होगा और सरकार भी हमारी होगी।” उन्होंने मोदी सरकार पर पिछड़े वर्गों और गरीबों की आवाज को दबाने का आरोप लगाया।

    सरना धर्मकोड और HEC की बदहाली का मुद्दा.

    रैली में खरगे ने झारखंड के अहम मुद्दों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि आगामी जनगणना में सरना धर्मकोड को मान्यता दिलाने के लिए संघर्ष जारी रखना होगा। साथ ही HEC (हैवी इंजीनियरिंग कॉर्पोरेशन) की खराब स्थिति के लिए भी उन्होंने केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा, “जहां दो-दो साल से वेतन नहीं मिला, वहां कर्मचारी कैसे काम करेंगे? मोदी सरकार की नीति एससी, एसटी और ओबीसी को हाशिए पर ढकेलने की है।”

    संगठन और संविधान की रक्षा का आह्वान.

    खरगे ने कार्यकर्ताओं से पार्टी को मजबूत करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि “अगर कांग्रेस कमजोर हुई, तो न कोई मंत्री रहेगा, न मुख्यमंत्री। संविधान को बचाना है तो एकजुट संघर्ष जरूरी है।”

    शहीद नेताओं को श्रद्धांजलि और जनता का धन्यवाद

    अपने संबोधन के अंत में खरगे ने महात्मा गांधी, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि “देश पहले है, जाति, धर्म और पार्टी बाद में।” उन्होंने झारखंड की जनता को ‘इंडिया‘ गठबंधन को समर्थन देने के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि राज्य में जनहितैषी सरकार बेहतर ढंग से काम कर रही है।

    मंच पर दिखी कांग्रेस की ताकत

    संविधान बचाओ रैली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के अलावे कांग्रेस संगठन महासचिव के.सी.वेणुगोपाल, छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम भूपेश बघेल, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश, विधायक दल के नेता प्रदीप यादव, कार्यक्रम संयोजक और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप बलमुचू, पूर्व मंत्री सुबोधकांत सहाय, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर के अलावे कांग्रेस कोटे के हेमंत सरकार के मंत्री राधाकृष्ण किशोर, दीपिका पांडे सिंह, डॉ इरफान अंसारी, शिल्पी नेहा तिर्की आदि मौजूद थे

    इस दौरान कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ के बीच कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का जमकर स्वागत किया गया. रैली में भारी संख्या में कार्यकर्ताओं की उपस्थिति ने पार्टी के उत्साह को और मजबूती दी।

  • रांची में ‘संविधान बचाओ रैली’ को संबोधित करेंगे मल्लिकार्जुन खरगे, भाजपा ने साधा तीखा निशाना

    By the news post4u

    रांची: कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे 6 मई को एक दिवसीय दौरे पर विशेष विमान से रांची पहुंचेंगे। इस दौरे के दौरान वे रांची के ऐतिहासिक पुराने विधानसभा मैदान में आयोजित ‘संविधान बचाओ’ रैली को संबोधित करेंगे। यह रैली देश के मौलिक अधिकारों और सामाजिक न्याय की अवधारणा को बचाने के उद्देश्य से आयोजित की जा रही है।

    कांग्रेस के झारखंड प्रदेश मुख्य प्रवक्ता लाल किशोर नाथ शाहदेव ने बताया कि खरगे पहली बार झारखंड प्रदेश कांग्रेस की पोलिटिकल अफेयर कमेटी और विस्तारित कार्यसमिति की बैठक में भाग लेंगे। साथ ही रैली के बाद होटल बीएनआर चाणक्य में पार्टी के जिला अध्यक्षों की बैठक को भी संबोधित करेंगे, जहां संगठनात्मक मुद्दों पर रणनीतिक चर्चा होगी।

    रैली की व्यापक तैयारी.

    ‘संविधान बचाओ’ रैली को सफल बनाने के लिए कांग्रेस के विधायक, सांसद, मंत्री और जिला स्तर के पदाधिकारी घर-घर जनसंपर्क अभियान चला रहे हैं। भीषण गर्मी और बारिश की आशंका को ध्यान में रखते हुए आयोजन स्थल पर विशेष जर्मन हैंगर और दो अतिरिक्त पंडाल लगाए जा रहे हैं ताकि राज्य भर से आने वाले कार्यकर्ताओं और आम लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

    शाहदेव ने बताया कि इस रैली में जातिगत जनगणना की दिशा में मिली प्रारंभिक सफलता की जानकारी साझा की जाएगी और अनुच्छेद 15(5) के शीघ्र क्रियान्वयन की मांग को प्रमुखता दी जाएगी। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने हाल ही में एक पत्र भेजा है जिसमें राज्य स्तर पर नियंत्रण कक्ष और नोडल पदाधिकारी की नियुक्ति कर गतिविधियों की निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही 30 मई तक चलने वाले घर-घर अभियान और चौपालों के आयोजन की योजना भी बनाई गई है।

    भाजपा का तीखा हमला: “बिल्ली हज को चली”

    कांग्रेस की इस पहल पर झारखंड भाजपा ने कड़ा हमला बोला है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने कांग्रेस की ‘संविधान बचाओ’ रैली को “70 चूहे खाकर बिल्ली हज को चली” जैसी कहावत से जोड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने अपने लंबे शासनकाल में संविधान की सबसे ज्यादा अवहेलना की है, और अब वही पार्टी खुद को संविधान का रक्षक बताने का नाटक कर रही है।

    मरांडी ने कहा कि कांग्रेस ने सत्ता में रहते हुए निजी हितों के लिए संविधान में 80 बार संशोधन किए। 1951 में ही नेहरू ने पहला संशोधन किया, और आपातकाल के दौरान तो संविधान को कुचल ही दिया गया था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस नेताओं के लिए संविधान अब “जेबी किताब” बन चुका है।

    भाजपा नेता ने मल्लिकार्जुन खरगे से मांग की कि रांची की रैली से पहले उन्हें मंच पर सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि क्या कांग्रेस उस मंत्री के बयान से सहमत है, जो कहता है कि “मेरे लिए शरीयत ऊपर है और संविधान नीचे।”

    मरांडी ने यह भी कहा कि अगर कांग्रेस को वास्तव में संविधान पर विश्वास है तो नेशनल हेराल्ड मामले में राहुल गांधी से पूछताछ पर उसके नेता सड़कों पर क्यों उतर आते हैं। उन्होंने कांग्रेस पर संविधान के अनुच्छेद 356 का दुरुपयोग कर राज्य सरकारों को गिराने का भी आरोप लगाया।
    6 मई को होने जा रही ‘संविधान बचाओ’ रैली सिर्फ एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि देश में सामाजिक न्याय और संविधान की व्याख्या को लेकर छिड़ी बहस का केंद्र बन चुकी है। जहां कांग्रेस इसे लोकतंत्र और अधिकारों की लड़ाई बता रही है, वहीं भाजपा इसे ढोंग और पाखंड करार दे रही है। देखना होगा कि इस रैली के जरिए कांग्रेस क्या संदेश देने में सफल होती है, और भाजपा इसका किस तरह से जवाब देती है।