Category: RANCHI

  • डीजीपी ने ली ऑनलाइन बैठक-दीपावली-छठ पर सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर हुई अहम चर्चा

    चैंबर ऑफ कॉमर्स के अनुरोध पर हुई बैठक.

    परवेज़ आलम.द न्यूज़ पोस्ट4यू.

    रांची/गिरिडीह : फेडरेशन ऑफ झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज, रांची के आग्रह पर सोमवार को झारखंड के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) ने राज्य के सभी जिलों के वरीय पुलिस अधीक्षकों, पुलिस अधीक्षकों एवं चैंबर ऑफ कॉमर्स के पदाधिकारियों के साथ एक ऑनलाइन बैठक आयोजित की। बैठक का मुख्य उद्देश्य आगामी दीपावली और छठ पूजा के दौरान राज्यभर में कानून व्यवस्था और ट्रैफिक प्रबंधन को और अधिक सुदृढ़ बनाना था।

    बैठक में गिरिडीह जिला चैंबर ऑफ कॉमर्स के प्रतिनिधियों ने भी सक्रिय भागीदारी की। प्रतिनिधियों ने पिछले डेढ़-दो वर्षों में जिले में पुलिस प्रशासन द्वारा किए गए बेहतर कार्यों के लिए डीजीपी का आभार ब्यक्त किया । । साथ ही एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया गया कि  गिरिडीह में करीब सात वर्ष पूर्व ट्रैफिक थाना स्थापित होने के बावजूद आज तक प्रशिक्षित ट्रैफिक पुलिस बल की नियमित नियुक्ति नहीं की गई है, जिसके चलते ट्रैफिक व्यवस्था अभी भी असंगठित और कमजोर बनी हुई है।

    चैंबर प्रतिनिधियों ने डीजीपी को यह भी जानकारी दी कि गिरिडीह के अधिकांश व्यापारिक प्रतिष्ठानों और सदस्यों के आवासों के बाहर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जो अपराध नियंत्रण में सहायक सिद्ध हो रहे हैं। साथ ही उन्होंने वर्ष 2016 में चैंबर के सहयोग से शहर में लगाए गए 24 सीसीटीवी कैमरों की वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त की। बताया गया कि इन कैमरों में से कितने कार्यरत हैं और कितने बंद हैं, इसकी सटीक जानकारी उपलब्ध नहीं है। इस पर चैंबर ने पुलिस अधीक्षक गिरिडीह से अनुरोध किया कि सूची उपलब्ध कराई जाए ताकि निष्क्रिय कैमरों की मरम्मत कर उन्हें पुनः सक्रिय किया जा सके।

    बैठक के दौरान डीजीपी ने चैंबर के प्रयासों की सराहना की और सुझाव दिया कि यदि चैंबर की ओर से शहर के प्रमुख चौक-चौराहों एवं प्रवेश द्वारों पर इंटरनेट युक्त सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं, तो यह पुलिस प्रशासन के लिए अत्यंत सहायक सिद्ध होगा। उन्होंने यह भी अपील की कि अधिक से अधिक वाहन मालिक अपने वाहनों में Dash Cam (डैश कैमरा) लगाने का प्रयास करें, जिससे किसी भी आपराधिक घटना की जांच में त्वरित सहायता मिल सके।

    इस ऑनलाइन बैठक में गिरिडीह जिला चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष निर्मल झुनझुनवाला, उपाध्यक्ष अमरजीत सिंह  और महासचिव प्रमोद कुमार उपस्थित रहे।
    बैठक को राज्यस्तरीय पुलिस-व्यापारिक समन्वय का एक सकारात्मक और उपयोगी कदम माना जा रहा है, जिससे आगामी त्योहारी सीजन में सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को और बेहतर बनाने की दिशा में ठोस परिणाम देखने को मिल सकते हैं।

     

  • भाकपा (माओवादी) को गिरिडीह में बड़ा झटका

     

    एरिया कमेटी सदस्य शिवलाल हेम्ब्रम और पत्नी सरिता हांसदा ने किया आत्मसमर्पण

    परवेज़ आलम.

    The News Post4u.

    गिरिडीह: झारखंड में नक्सल मोर्चे पर पुलिस को मिली एक बड़ी सफलता! भाकपा (माओवादी) संगठन के एरिया कमेटी सदस्य शिवलाल हेम्ब्रम उर्फ शिवा और उनकी पत्नी दस्ता सदस्य सरिता हांसदा उर्फ उर्मिला ने बुधवार को गिरिडीह पुलिस के समक्ष स्वेच्छा से आत्मसमर्पण कर दिया।

    दोनों ने झारखंड सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति “नई दिशा – एक नई पहल” से प्रभावित होकर हथियार डालने का फैसला किया।
    आत्मसमर्पण का यह क्षण गिरिडीह के पुलिस अधीक्षक डॉ. बिमल कुमार, उपायुक्त  रामनिवास यादव, अपर पुलिस अधीक्षक (अभियान) सुरजीत सिंह, पुलिस उपमहानिरीक्षक, सीआरपीएफ 154 बटालियन कमांडेंट अमित सिंह, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी डुमरी और अन्य पुलिस अधिकारियों की उपस्थिति में दर्ज हुआ।

    कौन हैं शिवलाल और सरिता.

    शिवलाल हेम्ब्रम निवासी टेसाफुली, थाना मधुबन — संगठन में एरिया कमेटी सदस्य के रूप में सक्रिय थे।
    वहीं उनकी पत्नी सरिता हांसदा (उम्र 19 वर्ष), निवासी चतरो, थाना खुखरा — दस्ते की सक्रिय सदस्य थीं।

    पुलिस के अनुसार, शिवलाल वर्ष 2017 में नक्सली संगठन से जुड़ा था। शुरुआत में उसने संतरी और रसोइए का काम किया, लेकिन जल्द ही वह माओवादी कमांडर करम दा उर्फ विवेक का अंगरक्षक बन गया।
    वर्ष 2022 में उसे एरिया कमेटी सदस्य के पद पर पदोन्नत किया गया।
    संगठन में रहते हुए शिवलाल ने हथियार और विस्फोटक छिपाने, ग्रामीणों से लेवी वसूली और पुलिस बलों पर हमलों जैसी कई नक्सली कार्रवाइयों में हिस्सा लिया। आत्मसमर्पण के बाद दोनों को राज्य सरकार की पुनर्वास नीति के तहत लाभ दिया जाएगा।

    सरिता हांसदा को 2020 में ‘जया दी’ द्वारा संगठन में शामिल किया गया था।
    दोनों ने वर्ष 2024 में विवाह किया, लेकिन बीते महीनों में संगठन के शीर्ष कमांडरों द्वारा लगातार शोषण और ग्रामीणों पर अत्याचार से दोनों का मोहभंग हो गया। सरिता हांसदा के विरुद्ध भी कई नक्सली मामलों में प्राथमिकी दर्ज है।

    मुख्यधारा की ओर वापसी.

    गिरिडीह पुलिस ने बताया कि संगठन के प्रति मोहभंग और लगातार पुलिस दबाव के चलते दोनों ने आत्मसमर्पण का निर्णय लिया।
    पुलिस लगातार उनके परिजनों के संपर्क में थी और उन्हें समझा-बुझाकर मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित कर रही थी।

    अब आत्मसमर्पण के बाद दोनों को राज्य सरकार की पुनर्वास नीति के तहत सभी लाभ दिए जाएंगे।
    पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, शिवलाल के खिलाफ कुल 11 आपराधिक मामले दर्ज हैं — जिनमें हत्या, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, यूएपीए और आर्म्स एक्ट की धाराएं शामिल हैं।
    सरिता के विरुद्ध भी कई नक्सली मामलों में प्राथमिकी दर्ज है।

    पुलस अधीक्षक का बयान.

    पुलिस अधीक्षक डॉ. बिमल कुमार ने कहा —

    “शिवलाल और सरिता का आत्मसमर्पण माओवादी संगठन के लिए बड़ा झटका है। इससे न सिर्फ संगठन कमजोर होगा, बल्कि अन्य उग्रवादियों को भी मुख्यधारा में लौटने की प्रेरणा मिलेगी।”

    उन्होंने इस आत्मसमर्पण को गिरिडीह पुलिस के लिए नक्सल उन्मूलन की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि बताया।

    अब नई दिशा में नया जीवन.

    दोनों नक्सली दंपती ने यह साफ कहा —

    “अब हथियार नहीं, हम समाज और परिवार के साथ नई जिंदगी शुरू करेंगे।”

    झारखंड सरकार की पहल “नई दिशा – एक नई पहल” एक बार फिर कारगर साबित हुई है —
    जहाँ कभी गोलियों की आवाज़ गूंजती थी, अब वहाँ मुख्यधारा में लौटने की उम्मीदें पनप रही हैं।

     

  • 10 नक्सलियों का आत्मसमर्पण, डीजीपी बोले –2025 में झारखंड उग्रवाद मुक्त होगा

    परवेज़ आलम व

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    चाईबासा, झारखंड:  उग्रवाद के खिलाफ लड़ाई में झारखंड पुलिस को एक और बड़ी सफलता हाथ लगी है। पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में 10 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया। सरेंडर करने वालों में 3 नाबालिग भी शामिल हैं। डीजीपी अनुराग गुप्ता की मौजूदगी में हुए इस आत्मसमर्पण को राज्य की सुरक्षा एजेंसियों के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है।

    डीजीपी अनुराग गुप्ता ने इस मौके पर कहा कि झारखंड अब निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। पिछले 20 वर्षों से चले आ रहे उग्रवाद विरोधी संघर्ष में अब तक पुलिस और अर्धसैनिक बलों के 500 से अधिक जवानों व अधिकारियों ने शहादत दी है। उनकी कुर्बानी और लगातार चल रहे अभियानों की बदौलत ही आज नक्सलवाद लगभग समाप्ति की कगार पर है।

    गुप्ता ने दावा किया कि दिसंबर 2025 तक राज्य पूरी तरह से उग्रवाद मुक्त हो जाएगा। उन्होंने बताया कि वर्तमान में झारखंड में केवल 40–45 सक्रिय उग्रवादी ही बचे हैं, जिनकी गतिविधियों को पुलिस और पैरामिलिट्री बलों ने सीमित दायरे में बांध दिया है। यही कारण है कि नक्सली या तो मारे जा रहे हैं या आत्मसमर्पण करने को मजबूर हो रहे हैं।

    डीजीपी ने चेतावनी दी कि अब नक्सलियों के पास केवल दो ही विकल्प बचे हैं—

    1. आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटकर समाज का हिस्सा बनें।
    2. या फिर पुलिस कार्रवाई में मारे जाएं।

    उन्होंने राज्य की सरेंडर पॉलिसी को देश की सबसे सफल नीति बताते हुए कहा कि यह भटके युवाओं को नई शुरुआत का मौका देती है। उन्होंने नक्सलियों से हिंसा छोड़कर शांति और विकास की राह अपनाने की अपील की।

    नशाखोरी और संगठित अपराध पर भी होगी सख्ती.

    इस दौरान डीजीपी ने मीडिया को बताया कि  पुलिस की कार्रवाई केवल नक्सलवाद तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य में बढ़ती नशाखोरी और संगठित आपराधिक गिरोहों पर भी कड़ी कार्रवाई होगी। आने वाले महीनों में विशेष अभियान चलाकर ऐसे सभी अपराध नेटवर्क को तोड़ा जाएगा, ताकि झारखंड शांति, सुरक्षा और विकास की दिशा में और तेजी से आगे बढ़ सके।

    पिछले 10 महीनों का रिपोर्ट कार्ड.

    रिपोर्ट के अनुसार, 29 नवंबर 2024 से 23 सितंबर 2025 के बीच सुरक्षा बलों ने राज्य में 33 नक्सलियों को ढेर किया, 20 ने सरेंडर किया और 18 को गिरफ्तार किया गया।

    • भाकपा (माओवादी): 21 मारे गए, 7 गिरफ्तार, 4 ने सरेंडर किया।
    • जेजेएमपी (JJMP): 8 मारे गए, 16 ने सरेंडर किया, 3 गिरफ्तार।
    • टीएसपीसी (TSPC): 2 मारे गए, 6 गिरफ्तार।

    इन कार्रवाइयों से स्पष्ट है कि टीएसपीसी और जेजेएमपी जैसे संगठन लगभग समाप्त हो चुके हैं। भाकपा (माओवादी) अब केवल सारंडा और कुछ इलाकों (हजारीबाग, चतरा) तक सीमित रह गया है।

    पुलिस की रणनीति और भविष्य.

    डीजीपी गुप्ता ने कहा कि उग्रवाद को खत्म करने के साथ-साथ समाज में जड़ें जमा रहे हर तरह के संगठित अपराध और नशे के कारोबार पर भी लगातार प्रहार किया जाएगा। आने वाले महीनों में चलाए जाने वाले अभियानों का लक्ष्य झारखंड को पूरी तरह शांति और विकास की राह पर लाना है।

  • एसटी दर्जा की मांग पर कुर्मी समाज 20 सितंबर से सड़कों और रेल पटरियों पर उतरेगा

     झारखंड, बंगाल और ओडिशा में “रेल टेका, दहर चेका” आंदोलन.

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    पारसनाथ/रांची/कोलकाता/भुवनेश्वर : अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) में सूचीबद्ध कुर्मी आदिवासी समुदाय ने अपने “लंबित अधिकारों” को लेकर एक बार फिर बड़ा आंदोलन छेड़ने का ऐलान किया है। शनिवार, 20 सितंबर से झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा के कई हिस्सों में ट्रेनों और सड़कों को रोककर अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू होगा। आंदोलन का नारा है – “रेल टेका, दहर चेका” यानी रेल रोकों, सड़क जाम करो।

    क्या हैं कुर्मी समाज की मांगें?

    कुर्मी समाज की सबसे बड़ी मांग है कि उन्हें अनुसूचित जनजाति (ST) की सूची में शामिल किया जाए। इसके अलावा, उनकी कुर्माली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में मान्यता दी जाए और सरना धर्म कोड लागू किया जाए।
    समुदाय का कहना है कि आज़ादी के बाद उन्हें आदिवासी श्रेणी से हटाकर OBC में डालना एक राजनीतिक षड्यंत्र था।

    आंदोलन का इतिहास.

    कुर्मी समाज का यह संघर्ष नया नहीं है।

    • 20 सितंबर 2022 को आंदोलन की शुरुआत हुई थी, जो नौ दिनों तक चला।
    • 2023 में भी यही आंदोलन 20 सितंबर से शुरू हुआ और लगभग आठ दिन चला।
    • 2024 में लोकसभा और विधानसभा चुनाव के चलते आंदोलन स्थगित रहा।
    • इस साल आंदोलन दिल्ली के जंतर-मंतर तक पहुंच गया और अब पूर्वी भारत के तीन राज्यों में फैलने जा रहा है।

    किन जगहों पर होगा अवरोध?

    टोटेमिक कुर्मी विकास मोर्चा (TKVM) के अध्यक्ष शीतल ओहदार ने बताया कि झारखंड में सोनुवा, गम्हरिया, गालूडीह, मुरी, बरकाकाना, गड्डी और पारसनाथ-चंद्रपुरा जैसे रेलवे स्टेशनों पर रेल अवरोध होगा।
    पश्चिम बंगाल के चार और ओडिशा के एक स्थान पर भी प्रदर्शन की योजना बनाई गई है।

    आदिवासी कुर्मी समाज मंच के सदस्य सूरज महतो ने कहा कि आंदोलन में हर घर से लोग शामिल होंगे। प्रदर्शन स्थलों पर ही खाना बनाया जाएगा और अस्थायी शिविर लगाए जाएंगे।

    विरोध और समर्थन.

    जब आंदोलन को लेकर कुछ आदिवासी नेताओं के विरोध पर सवाल किया गया, तो कुर्मी समाज ने साफ कहा कि विरोध करने वाले अधिकतर लोग मिशनरी समूहों से जुड़े हैं और ईसाई धर्म अपना चुके हैं।
    उनका दावा है कि कोल्हान क्षेत्र के संताल और हो समुदाय ने उनकी मांगों का विरोध नहीं किया है।

    आंदोलन की रूपरेखा.

    आदिवासी कुर्मी समाज मंच की केंद्रीय समिति के अध्यक्ष शशांक शेखर महतो ने बताया कि शनिवार सुबह 5 बजे से सरायकेला-खरसावां जिले के सिनी रेलवे स्टेशन से रेल अवरोध की शुरुआत होगी।
    उनके अनुसार –

    1. कुर्मी समाज को एसटी का दर्जा दिया जाए।
    2. कुर्माली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में जगह मिले।
    3. सरना धर्म कोड लागू किया जाए।

    रेलवे और प्रशासन की तैयारियां

    रांची और धनबाद  रेल मंडल पूरी तरह अलर्ट पर है। RPF के एक अधिकारी ने बताया कि सभी संवेदनशील स्थानों पर RPF और राज्य पुलिस का संयुक्त बल तैनात रहेगा।
    भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है।
    उन्होंने कहा “ट्रेन रोकने की कोशिश करने वालों पर एफआईआर और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अभी तक किसी ट्रेन रूट में बदलाव नहीं किया गया है,” उन्होंने कहा।

    राजनीतिक दलों की दुविधा.

    यह मुद्दा झारखंड और पूर्वी भारत की राजनीति में बेहद संवेदनशील बन गया है। राजनीतिक दल न तो कुर्मी समाज की मांगों का खुलकर समर्थन कर पा रहे हैं और न ही इसका खुला विरोध।

  • 24 जिलों और 7 अनुमंडलों में बार भवन के निर्माण की योजना-सीएम  

    झारखंड में न्यायिक संरचना को मजबूती के लिए बार भवन निर्माण की नींव रखी गई.

     द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और झारखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति तरलोक सिंह चौहान ने मंगलवार को खूंटी जिले में आयोजित एक भव्य समारोह में बार काउंसिल भवन निर्माण योजना का शिलान्यास किया। इस अवसर पर खूंटी कचहरी परिसर में आयोजित कार्यक्रम में तीन बड़े जिलों – खूंटी, चाईबासा और चांडिल – में प्रस्तावित बार भवनों की नींव रखी गई। चाईबासा और चांडिल के भवनों का शिलान्यास मुख्यमंत्री और मुख्य न्यायाधीश ने वर्चुअल माध्यम से किया।

    राज्यव्यापी बार भवन योजना.

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि यह पहल झारखंड की न्यायिक प्रणाली को नई दिशा देगी। उन्होंने बताया कि राज्य के सभी 24 जिलों और 7 अनुमंडलों में बार भवन के निर्माण की योजना बनाई गई है। इस महत्वाकांक्षी योजना पर लगभग 132 करोड़ 84 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि अगले तीन वर्षों के भीतर सभी जिलों में बार भवन खड़े हो जाएंगे और चरणबद्ध तरीके से शिलान्यास एवं उद्घाटन पूरे किए जाएंगे।

    “न्यायालय एक मंदिर है” – हेमंत सोरेन.

    मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में न्यायालयों की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह केवल एक संस्था नहीं, बल्कि एक मंदिर है, जहां आम जनता बिना किसी भेदभाव के न्याय प्राप्त करती है। उन्होंने कहा कि “बेंच और बार न्यायिक व्यवस्था के अभिन्न अंग हैं। इनके सहयोग से ही आम नागरिकों को त्वरित और सुलभ न्याय मिलता है तथा उनके मौलिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित होती है।”

    अधिवक्ताओं के लिए विशेष योजनाएं.

    सीएम हेमंत सोरेन ने अधिवक्ताओं के हित में राज्य सरकार की योजनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि झारखंड देश का पहला राज्य है जिसने अधिवक्ताओं को पेंशन योजना का लाभ देना शुरू किया है। इसके अलावा अधिवक्ताओं के लिए स्वास्थ्य बीमा और स्टाइपेंड जैसी सुविधाएं भी लागू की गई हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की सोच है कि जिला न्यायालय परिसरों की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाए, ताकि अधिवक्ताओं और आम लोगों दोनों को सहज वातावरण मिल सके।

    समारोह में जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी.

    इस अवसर पर सांसद कालीचरण मुंडा, विधायक राम सूर्या मुंडा, विधायक सुदीप गुड़िया, महाधिवक्ता राजीव रंजन समेत न्यायिक एवं प्रशासनिक पदाधिकारी बड़ी संख्या में मौजूद रहे। कार्यक्रम को लेकर अधिवक्ताओं में उत्साह देखने को मिला और इसे न्यायिक प्रणाली को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया गया।

     

  • सीएम हेमंत सोरेन ने नव-नियुक्त अभ्यर्थियों को सौंपा नियुक्ति पत्र

    झारखंड पर्यटन कालोगो, वेबसाइट और नई एप्लीकेशन का शुभारंभ.

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    रांची : झारखंड मंत्रालय में गुरुवार को एक अहम अवसर देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने नगर विकास एवं आवास विभाग के अंतर्गत विभिन्न पदों पर चयनित 19 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए। इस अवसर पर नगर विकास एवं पर्यटन मंत्री सुदिव्य कुमार भी मौजूद रहे।

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने झारखंड पर्यटन एवं झारखंड पर्यटन विकास निगम का नया लोगो, आधिकारिक वेबसाइट और सांस्कृतिक दल प्रबंधन प्रणाली एप्लीकेशन लॉन्च किया। इस पहल को राज्य के सांस्कृतिक एवं पर्यटन विकास की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार का प्रमुख लक्ष्य झारखंड का समग्र विकास सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा,

    “हमारी प्रतिबद्धता सिर्फ शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि गांवों के अंतिम व्यक्ति तक विकास की किरण पहुँचाना है। राज्य में रोज़ नए कार्य हो रहे हैं और विभिन्न क्षेत्रों में प्रगति की राह मजबूत हो रही है। प्रकृति ने झारखंड को धरती के नीचे खनिज संपदा और ऊपर अद्भुत प्राकृतिक सौंदर्य से नवाज़ा है। हमारा प्रयास है कि इन संसाधनों को सहेजते हुए झारखंड को देश और दुनिया के पर्यटन मानचित्र पर और सशक्त पहचान दिलाई जाए।”

    उन्होंने नवनियुक्त अभ्यर्थियों को भविष्य के लिए शुभकामनाएं भी दीं और कहा कि युवाओं की ऊर्जा ही राज्य के विकास की असली ताकत है।

    नगर विकास एवं पर्यटन मंत्री सुदिव्य कुमार ने भी इस अवसर पर अभ्यर्थियों और विभागीय कर्मियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि झारखंड अब डिजिटल युग में कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा,

    “कलाकारों का डाटा संग्रह, पर्यटन विभाग का नया लोगो, वेबसाइट और एप्लीकेशन—ये सभी पहल न केवल राज्यवासियों के लिए लाभकारी होंगे बल्कि झारखंड की पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मजबूत करेंगे। अब डॉक्यूमेंटेशन और डिजिटल माध्यमों से देश-दुनिया के लोग झारखंड की सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन स्थलों के बारे में आसानी से जान पाएंगे।”

    यह कार्यक्रम राज्य सरकार की दोहरी प्राथमिकताओं—युवाओं के लिए रोजगार सृजन और पर्यटन एवं संस्कृति को बढ़ावा देने—का जीवंत उदाहरण रहा। नियुक्ति पत्र वितरण से जहां नई पीढ़ी को अवसर मिले हैं, वहीं पर्यटन एवं संस्कृति से जुड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म राज्य की संभावनाओं को नई ऊँचाइयों तक ले जाने में सहायक साबित होंगे। इस मौके पर मुख्य सचिव अल्का तिवारी और सांसद महुआ माझी भी मंच पर उपस्थित थी ।

     

  • सूर्या हांसदा की मौत के विरोध में भाजपा का राज्यव्यापी प्रदर्शन

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    रांची/गिरिडीह :  झारखंड में राजनीतिक माहौल गुरुवार को गरमा गया जब भाजपा ने सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता सूर्या हांसदा की कथित साजिशन हत्या की सीबीआई जांच और नगड़ी में रैयतों की खेतीहर जमीन को रिम्स-2 के नाम पर अधिग्रहित किए जाने के विरोध में राज्यभर में आक्रोश प्रदर्शन किया।

    प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी, कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. रविंद्र कुमार राय, केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी, पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश, सांसद आदित्य साहू समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने विभिन्न जिलों और प्रखंडों में अलग-अलग प्रदर्शन का नेतृत्व किया।

    मरांडी ने सरकार पर लगाया गंभीर आरोप.

    रांची महानगर भाजपा द्वारा आयोजित विरोध सभा को संबोधित करते हुए बाबूलाल मरांडी ने कहा,
    “अबुआ सरकार में आदिवासियों की हत्या और रैयतों की खेतिहर जमीन की लूट चरम पर है। सूर्या हांसदा जैसे ईमानदार और जनसेवी कार्यकर्ता को माफियाओं की मिलीभगत से मार गिराया गया।”

    मरांडी ने बताया कि सूर्या हांसदा लोकतांत्रिक तरीके से अब तक चार बार चुनाव लड़ चुके थे और कई मुकदमों से बरी हो रहे थे। वे गरीब और जरूरतमंद बच्चों को पढ़ाते, उनके रहने और खाने का इंतज़ाम करते थे। खनिज माफियाओं की लूट का विरोध करना ही उनकी सबसे बड़ी “गलती” थी।
    उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार की शह पर फर्जी एनकाउंटर कर सूर्या की हत्या की गई। इसलिए भाजपा की मांग है कि इस पूरे मामले की सीबीआई जांच कराई जाए।

    मरांडी ने नगड़ी की जमीन के मुद्दे पर कहा कि बिहार सरकार के समय स्पष्ट आश्वासन दिया गया था कि रैयतों की खेतीहर भूमि अधिग्रहित नहीं की जाएगी। “लेकिन मौजूदा हेमंत सरकार किसानों से जबरन जमीन छीन रही है। भाजपा रैयतों के साथ खड़ी है और इस अन्याय के खिलाफ सरकार को चेतावनी देती है,” उन्होंने कहा।

    गिरिडीह में नवीन जायसवाल ने प्रदर्शन का नेतृत्व किया। प्रदेश उपाध्यक्ष विकास प्रीतम जिला अध्यक्ष महादेव दुबे, प्रदेश भाजपा नेता सुरेश साव , सांसद प्रतिनिधि दिनेश यादव , चुननु कान्त, विनय सिंह,सुभाष सिन्हा  समेत बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ताओं की मौजूदगी रही और नारेबाजी से माहौल पूरी तरह सरकार विरोधी बना रहा।

    रघुवर दास ने सरकार को दी चेतावनी.

    कांके में प्रदर्शन का नेतृत्व करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने सूर्या हांसदा की मौत को “फर्जी एनकाउंटर” करार दिया। उन्होंने कहा,
    “जब पूरा झारखंड शिबू सोरेन जी के निधन से शोकाकुल था, उसी समय सरकार ने एक ईमानदार आदिवासी युवक की हत्या कर दी। पुलिस का दावा है कि 40-50 लोगों के दस्ते ने हमला किया था, लेकिन गोली केवल सूर्या हांसदा को ही लगी। यही इस एनकाउंटर के फर्जी होने का सबसे बड़ा सबूत है।”

    दास ने अपने कार्यकाल की तुलना करते हुए कहा कि उनके समय में कई मेडिकल कॉलेज और अस्पताल बनाए गए, लेकिन खेतीहर भूमि को कभी नहीं छीना गया।
    “हेमंत सरकार ने रैयतों की जमीन रिम्स-2 के नाम पर बेच डाली है। आज का आंदोलन प्रतीकात्मक है। अगर सरकार ने सबक नहीं लिया तो जनता को गोलबंद कर व्यापक जनांदोलन खड़ा किया जाएगा। भ्रष्टाचार और बेरोजगारी से त्रस्त झारखंड के युवा चुप नहीं बैठेंगे और इस सरकार को उखाड़ फेंकेंगे।”

  • फेडरेशन ऑफ़ झारखंड चैंबर ऑफ़ कॉमर्स चुनाव: टीम तुलसी पटेल ने गिरिडीह में मतदाताओं से की सीधी अपील

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    गिरिडीह : फेडरेशन ऑफ़ झारखंड चैंबर ऑफ़ कॉमर्स, रांची, के आगामी चुनाव को लेकर चुनावी सरगर्मी तेज़ हो गई है। 21 सितंबर को होने वाले इस चुनाव से पूर्व रविवार को टीम तुलसी पटेल के 22 में से 20 सदस्य गिरिडीह पहुँचे। उनके दौरे का मुख्य उद्देश्य यहाँ के करीब 100 मतदाताओं से सीधा संवाद स्थापित करना और समर्थन जुटाना था।

    कार्यक्रम की शुरुआत गिरिडीह चैंबर ऑफ़ कॉमर्स के अध्यक्ष निर्मल झुनझुनवाला द्वारा सभी अतिथियों के स्वागत से हुई। इसके बाद टीम तुलसी पटेल के प्रत्याशियों ने बारी-बारी से अपना परिचय दिया और गिरिडीह के व्यवसायिक समुदाय के सामने अपने विज़न को साझा किया।

    इस अवसर पर फेडरेशन के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष प्रदीप अग्रवाल, चैंबर के पूर्व अध्यक्ष गुणवंत सिंह मोंगिया, उद्योगपति अरविंद राजगढ़िया और राजेंद्र भारतीय समेत कई वरिष्ठ सदस्यों ने गिरिडीह की स्थानीय समस्याओं को सामने रखा। व्यापारियों ने विशेष रूप से कर नीति, परिवहन, स्थानीय उद्योगों की दिक्कतें और सरकारी प्रक्रियाओं की जटिलताओं पर प्रत्याशियों का ध्यान आकृष्ट किया।

    प्रत्याशियों ने इन मुद्दों को गंभीरता से सुना। फेडरेशन के वर्तमान अध्यक्ष परेश गट्टानी और टीम लीडर तुलसी पटेल ने समस्याओं के समाधान पर अपने विचार रखे और भरोसा दिलाया कि उनकी टीम व्यापारी समुदाय की आवाज़ को मजबूती से उठाएगी। उन्होंने कहा कि फेडरेशन का उद्देश्य केवल बड़े उद्योगों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि छोटे और मध्यम व्यापारियों की समस्याओं को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

    गिरिडीह में आयोजित इस संवाद कार्यक्रम में लगभग 70 मतदाता शामिल हुए और उन्होंने टीम तुलसी पटेल के प्रत्याशियों से कई सवाल भी पूछे। बातचीत का माहौल आत्मीय और सकारात्मक रहा।

    कार्यक्रम के समापन पर गिरिडीह चैंबर के सचिव प्रमोद कुमार ने सभी प्रत्याशियों, स्थानीय सदस्यों और मीडिया प्रतिनिधियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि ऐसे संवाद कार्यक्रम न केवल चुनावी दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि व्यवसायिक जगत को आपस में जोड़ने और समस्याओं के समाधान के लिए सामूहिक सोच विकसित करने का भी अवसर प्रदान करते हैं।

     

  • विकास की हकीकत: गर्भवती महिला फिर खाट पर ढोई गई अस्पताल

    परवेज़ आलम.

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    गिरिडीह जिले के देवरी प्रखंड से एक बार फिर झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलने वाली तस्वीर सामने आई है। सड़क और एंबुलेंस सुविधा के अभाव में ग्रामीणों को गर्भवती महिला को खाट पर डालकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, तिसरी तक पहुंचाना पड़ा।

    यह घटना सप्ताह भर में दूसरी बार हुई है। इससे पहले सलगी सोरेन को खाट पर टांगकर अस्पताल पहुंचाया गया था और अब तालको मरांडी को भी उसी स्थिति का सामना करना पड़ा। दोनों ही मामलों में ग्रामीणों ने खाट को स्ट्रेचर और अपने कंधों को एंबुलेंस का पहिया बनाकर महिला को कई किलोमीटर तक ढोया।

    सवालों के घेरे में स्वास्थ्य व्यवस्था.
    ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में न तो सड़कें ठीक हैं और न ही एंबुलेंस समय पर मिलती है। मजबूरी में खाट पर मरीजों को ले जाना पड़ता है। लोग कटाक्ष करते हुए कह रहे हैं कि अब “खटिया ही एंबुलेंस” बन चुकी है।

    सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने बढ़ाई किरकिरी.
    इधर, सोशल मीडिया पर एंबुलेंस से “रील्स” बनाने का एक वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो पर लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब मरीजों के लिए एंबुलेंस उपलब्ध नहीं है, तो रील्स बनाने के लिए एंबुलेंस कैसे उपलब्ध हो जाती है?

    राजनीतिक प्रतिक्रिया.
    नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने भी इस वायरल वीडियो को साझा कर राज्य सरकार को कठघरे में खड़ा किया है। उन्होंने कहा कि यह दृश्य बताता है कि स्वास्थ्य सेवाएँ कितनी लचर हो चुकी हैं। जब मरीजों के लिए एंबुलेंस नहीं है और उन्हें खाट पर लादकर अस्पताल ले जाया जा रहा है, तब “विकास” का असली चेहरा साफ दिखाई देता है।

  • दिशोम गुरु शिबू सोरेन का सरकारी आवास बनेगा स्मृति संग्रहालय

    गुरु जी की स्मृतियों को संजोने की ऐतिहासिक पहल.

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    रांची : झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और दिशोम गुरु शिबू सोरेन की विरासत को संरक्षित और नई पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मोरहाबादी स्थित गुरुजी का सरकारी आवास अब “गुरुजी स्मृति संग्रहालय” के रूप में विकसित किया जाएगा। यह फैसला मंगलवार को हुई राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में लिया गया।

    बैठक में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी और नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के समक्ष यह प्रस्ताव रखा। डॉ. अंसारी ने कहा, “गुरुजी का आवास सिर्फ ईंट-पत्थर की इमारत नहीं है, बल्कि यह झारखंड आंदोलन और राज्य की आत्मा का केंद्र है। यहां की हर वस्तु, हर दस्तावेज, हर स्मृति हमें उनके संघर्ष और बलिदान की याद दिलाती है। इसलिए इसे संग्रहालय के रूप में विकसित करना आवश्यक है, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनकी विचारधारा और जीवन दर्शन से प्रेरणा ले सकें।”

    मंत्री सुदिव्य कुमार ने भी इसे झारखंड की अस्मिता को सहेजने वाला कदम बताया। उन्होंने कहा कि गुरुजी का योगदान अमिट है और उनकी स्मृतियां हमेशा अमर रहेंगी। यह संग्रहालय झारखंड की लड़ाई, उसकी सांस्कृतिक धरोहर और सामाजिक संघर्ष की गाथा को जीवित रखेगा।

    सिर्फ इतना ही नहीं, दोनों मंत्रियों ने गुरुजी की जन्मभूमि जामताड़ा के चिरुडीह गांव में भी एक भव्य पार्क और विशाल प्रतिमा स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है। चिरुडीह वही पवित्र भूमि है, जहां से शिबू सोरेन ने अपनी राजनीतिक और सामाजिक लड़ाई की शुरुआत की थी।

    राज्य सरकार का यह निर्णय न सिर्फ शिबू सोरेन के प्रति सम्मान का प्रतीक है, बल्कि झारखंड की संघर्ष यात्रा को पीढ़ी दर पीढ़ी जीवित रखने का भी संकल्प है।