Category: RANCHI

  • हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस तारलोक सिंह चौहान होंगे झारखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश

    –देशभर के कई हाईकोर्टों में हुआ बड़ा प्रशासनिक फेरबदल.

    For The News Post4u.

    रांची: भारत के न्यायिक ढांचे में एक अहम बदलाव करते हुए राष्ट्रपति ने देश के कई उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों के तबादले और नई नियुक्तियों को मंजूरी दे दी है। इस क्रम में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस तारलोक सिंह चौहान को झारखंड हाईकोर्ट का नया मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया है।

    अब तक झारखंड हाईकोर्ट की कमान संभाल रहे मुख्य न्यायाधीश एम.एस. रामचंद्र राव को स्थानांतरित कर त्रिपुरा हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया है।

    इस बदलाव के साथ-साथ पटना हाईकोर्ट में भी महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव किए गए हैं।

    • जस्टिस विपुल मनुभाई पंचोली, जो अब तक पटना हाईकोर्ट में न्यायाधीश के रूप में कार्यरत थे, उन्हें अब मुख्य न्यायाधीश के पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
    • वहीं, अब तक पटना हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रहे जस्टिस आशुतोष कुमार को गुवाहाटी हाईकोर्ट का नया मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया है।

    सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश के बाद हुई नियुक्तियां.
    इन सभी नियुक्तियों को भारत के सर्वोच्च न्यायालय की कॉलेजियम द्वारा सिफारिश किए जाने के बाद भारत के राष्ट्रपति द्वारा अनुमोदित किया गया है। यह फेरबदल देश में न्यायिक प्रक्रिया की सुचारूता, न्यायपालिका में संतुलन बनाए रखने और अनुभवों के विविध आदान-प्रदान को ध्यान में रखते हुए किया गया है।

    न्यायिक सेवाओं के अनुभवी चेहरे.

    • जस्टिस तारलोक सिंह चौहान, जिन्होंने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में अपने न्यायिक निर्णयों से विशेष पहचान बनाई है, अब झारखंड में अपनी भूमिका निभाएंगे।
    • जस्टिस एम.एस. रामचंद्र राव को एक सुलझे हुए और अनुशासित न्यायिक अधिकारी के तौर पर जाना जाता है, और अब वे त्रिपुरा हाईकोर्ट का नेतृत्व करेंगे।
    • जस्टिस विपुल पंचोली और जस्टिस आशुतोष कुमार दोनों ने पटना हाईकोर्ट में उल्लेखनीय सेवाएं दी हैं, और अब वे नए राज्यों में न्याय व्यवस्था को दिशा देने का कार्य करेंगे।

    यह न्यायिक पुनर्संरचना न केवल विभिन्न राज्यों के न्यायिक तंत्र को नई ऊर्जा देने का कार्य करेगी, बल्कि नीतिगत स्थिरता और दक्ष न्यायिक कार्यप्रणाली को भी बढ़ावा देगी।

  • JMM का आधिकारिक ‘X’ हैंडल हुआ हैक, सीएम ने पुलिस और X कॉर्प को किया अलर्ट

     — अपडेटेड साइबर अलर्ट.

    परवेज़ आलम.

    The News Post4U के लिए रिपोर्ट.

    रांची/नई दिल्ली:  झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रविवार को एक चौंकाने वाला खुलासा करते हुए कहा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) का आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल @JmmJharkhand हैक कर लिया गया है। उन्होंने इस साइबर हमले के लिए “असामाजिक तत्वों” को जिम्मेदार ठहराया है और इस मामले को गंभीरता से लेते हुए झारखंड पुलिस और सोशल मीडिया कंपनी X (पूर्व में ट्विटर) से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

    दिल्ली में रहकर दी जानकारी.

    गौरतलब है कि इस वक्त मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपने पिता और पार्टी के संस्थापक शिबू सोरेन के इलाज के सिलसिले में दिल्ली में हैं। इसी दौरान उन्होंने अपने व्यक्तिगत ‘X’ अकाउंट से एक पोस्ट साझा कर यह गंभीर सूचना सार्वजनिक की।

    उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा —

    “झामुमो का आधिकारिक X हैंडल @JmmJharkhand असामाजिक तत्वों द्वारा हैक कर लिया गया है। झारखंड पुलिस इस पर संज्ञान ले और शीघ्र जांच कर आवश्यक कार्रवाई करे। @XCorpIndia कृपया आप भी इस पर ध्यान दें।”

    मुख्यमंत्री की इस प्रतिक्रिया के बाद झारखंड पुलिस को मामले में तकनीकी जांच शुरू करने का निर्देश भी दे दिया गया है।

    क्या पोस्ट किया है हैकरों ने?

    हैक होने के कुछ ही समय बाद JMM के आधिकारिक X हैंडल से जो पहली पोस्ट साझा की गई, उसमें एक गिलहरी जैसी फोटो के साथ एक क्रिप्टोकरेंसी भुगतान पता (crypto wallet address) और संदेश लिखा था — “LIVE ON BONK”।
    इससे अंदेशा लगाया जा रहा है कि यह एक क्रिप्टो स्कैम ग्रुप का काम हो सकता है, जिसका मकसद अकाउंट हैक कर पब्लिसिटी और आर्थिक लाभ उठाना होता है।

    एलन मस्क के X पर बड़ा साइबर हमला.

    यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि झारखंड मुक्ति मोर्चा का यह हैंडल सोशल मीडिया पर खासा सक्रिय रहता है और इसके 2 लाख से अधिक फॉलोअर्स हैं।
    ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) अब टेस्ला और स्पेसX के मालिक एलन मस्क के अधीन है। हेमंत सोरेन ने खुद X कॉर्पोरेशन को टैग करते हुए तकनीकी हस्तक्षेप की मांग की है ताकि हैकर्स को रोका जा सके और पार्टी की डिजिटल सुरक्षा सुनिश्चित हो।

    झारखंड की राजनीति के लिए चेतावनी.

    विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह का साइबर हमला केवल एक डिजिटल उल्लंघन नहीं है, बल्कि यह राजनीतिक दलों की साइबर सुरक्षा में भारी खामी को उजागर करता है।
    झामुमो के आधिकारिक हैंडल को हैक किया जाना न सिर्फ पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा सकता है, बल्कि इससे राजनीतिक सूचनाओं के दुरुपयोग की भी आशंका बढ़ जाती है।

    झारखंड पुलिस की साइबर शाखा ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई शुरू कर दी है। वहीं X कॉर्प की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
    हेमंत सोरेन और उनकी पार्टी उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द ही हैंडल को सुरक्षित कर लिया जाएगा और दोषियों को चिन्हित कर कड़ी सजा दी जाएगी।

     

     

  • सहारा इंडिया ज़मीन घोटाला: झारखंड CID की जांच में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर

    -दर्जनों शहरों में फंड ट्रांसफर और ज़मीनों की हेराफेरी का खुलासा.

    Edited By: परवेज़ आलम

    For The News Post4u.

    रांची: झारखंड CID ने सहारा समूह से जुड़े एक बड़े घोटाले का खुलासा किया है, जिसमें करोड़ों रुपये की जमीनें फर्जी कंपनियों और व्यक्तियों के माध्यम से बेच दी गईं। यह घोटाला सिर्फ झारखंड तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार कोलकाता, गुवाहाटी, पटना, लखनऊ और दिल्ली जैसे बड़े शहरों से भी जुड़ते दिख रहे हैं।

    जांच एजेंसी ने सहारा इंडिया के अधिकारी शैलेंद्र शुक्ला से पूछताछ की, जिसमें उन्होंने कबूल किया कि रांची और बोकारो जोन से नियमित रूप से बड़ी मात्रा में धनराशि कंपनी के मुख्यालय के निर्देश पर विभिन्न शहरों में ट्रांसफर की जाती थी। फंड ट्रांसफर के आदेश कंपनी के मंडल प्रमुख नीरज कुमार पाल और मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारी एस.बी. सिंह द्वारा दिए जाते थे।

    जमीन की हेराफेरी का तरीका और खुलासे:

    CID की रिपोर्ट के अनुसार, सहारा समूह ने फर्जी कंपनियों और व्यक्तियों के नाम पर जमीनों की बिक्री की। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ये जमीनें SEBI द्वारा तय मूल्यों से कई गुना कम कीमत पर बेची गईं, और इससे अर्जित राशि ना तो निवेशकों को वापस लौटाई गई और ना ही SEBI में जमा की गई। इसके बजाय यह पैसा निजी खर्चों में उपयोग किया गया।

    उदाहरण स्वरूप कुछ बड़े सौदे:

    • बेगूसराय में 28.39 एकड़ जमीन, जिसकी कीमत 2013 में 41.17 करोड़ रुपये आंकी गई थी, महज 2.15 करोड़ रुपये में बेच दी गई।
    • 3.77 एकड़ दूसरी जमीन को भी 3.36 करोड़ रुपये में बेचा गया, जबकि उस वक्त बाजार दर इससे कई गुना अधिक थी।
    • पटना में 65.28 एकड़ जमीन, जिसकी कीमत SEBI ने 44.80 करोड़ रुपये तय की थी, रणकौशल प्रताप सिंह नामक व्यक्ति को केवल 2.52 करोड़ रुपये में बेच दी गई। यहां तक कि सरकारी गाइडलाइन के अनुसार भी इस जमीन की कीमत 5.05 करोड़ रुपये थी।
    • बोकारो में 68.14 एकड़ जमीन, जिसकी अनुमानित कीमत 2013 में 61.33 करोड़ रुपये थी, आज भी सहारा इंडिया के नाम पर ही दर्ज है। इससे यह संकेत मिलता है कि कई सौदों के दस्तावेजों में भी अनियमितता हो सकती है।

    धनबाद में अस्पताल निर्माण पर सवाल:

    धनबाद के गोविंदपुर स्थित रेगुनी मौजा में सहारा की ज़मीन पर अस्पताल का निर्माण किया जा रहा है। CID इस प्रकरण की भी जांच कर रही है कि यह ज़मीन कैसे उपयोग में लाई गई, जबकि यह ज़मीन अब भी कंपनी के नाम पर दर्ज है।

    CID की कार्रवाई और सिफारिश:

    इस घोटाले को लेकर CID ने FIR दर्ज करने की सिफारिश की है। इसके साथ ही संबंधित विभागों से सभी आवश्यक दस्तावेज और सौदों की जानकारी तलब की गई है। पोस्टिंग अधिकारी, अंचल अधिकारी और थाना प्रभारियों से विशेष सहयोग की अपील की गई है ताकि जांच तेजी से पूरी हो सके।

    CID की टीम अब इस घोटाले से जुड़े हर छोटे-बड़े सौदे की जांच कर रही है। कई फर्जी कंपनियों के नाम और उनसे जुड़े व्यक्तियों की पहचान की जा रही है। जल्द ही इस मामले से जुड़े और बड़े नामों का पर्दाफाश होने की उम्मीद है।

    कहानी सिर्फ जमीन की नहीं है… कहानी है एक सुनियोजित लूट की।

    जांच में खुलासा हुआ है कि सहारा समूह ने झारखंड सहित कई राज्यों में जमीनों की बिक्री फर्जी नामों, फर्जी कंपनियों के ज़रिए की। और ये कोई मामूली गलती नहीं थी – ये एक ठोस योजना थी, जिसमें निवेशकों की कमाई को कौड़ियों के दाम बेचकर, उसकी रकम से अपनी जेबें भरी गईं।

    न निवेशकों को पैसा, न SEBI को हिसाब… तो गया कहाँ पैसा?

    CID की रिपोर्ट में साफ कहा गया है – इन जमीनों की बिक्री से जो पैसा आया, न वो सेबी में जमा हुआ, न निवेशकों को वापस मिला। वो पैसा गया कहाँ? निजी खर्चों में – मतलब किसी के बंगले बने, किसी के चुनाव खर्च निकले, किसी की गाड़ी चली।

    यह जांच सिर्फ कागज़ों में रह जाएगी या सचमुच कोई बड़ी कार्रवाई होगी?
    क्या जिन लोगों ने भरोसे के नाम पर हजारों लोगों की कमाई लूटी, वो जेल में होंगे या फिर अगला चुनाव लड़ेंगे?

     

  • झारखंड में भारी बारिश की चेतावनी, 13 से 15 जुलाई तक येलो अलर्ट जारी

    – मौसम विभाग ने दी सतर्क रहने की सलाह

    Edited By: परवेज़ आलम

    For The News Post4u.

    रांची:  झारखंड में 13 से 15 जुलाई के बीच भारी बारिश की संभावना को देखते हुए भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने राज्य के कई हिस्सों के लिए ‘येलो अलर्ट’ जारी किया है। मौसम विभाग ने लोगों को अगले कुछ दिनों तक विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है।

    छह जिलों में येलो अलर्ट.

    IMD के अनुसार, 13 जुलाई को गुमला, खूंटी, सिमडेगा, सरायकेला-खरसावां, पूर्वी सिंहभूम और पश्चिमी सिंहभूम में भारी बारिश की आशंका है। इन जिलों के निवासियों को निचले इलाकों में जलभराव और वज्रपात से सतर्क रहने की हिदायत दी गई है।

    झारखंड के मध्य और पूर्वी जिलों पर असर.

    14 जुलाई को गिरिडीह, बोकारो, धनबाद, देवघर, दुमका, जामताड़ा, सरायकेला-खरसावां, पूर्वी सिंहभूम और पश्चिमी सिंहभूम में येलो अलर्ट लागू रहेगा। इन क्षेत्रों में लगातार बारिश और आंधी-तूफान की आशंका जताई गई है।

    उत्तर-पूर्वी जिलों में भारी बारिश की संभावना

    मौसम विभाग का पूर्वानुमान है कि 15 जुलाई को देवघर, जामताड़ा, दुमका, पाकुड़, गोड्डा और साहेबगंज में भारी बारिश हो सकती है। स्थानीय प्रशासन को अलर्ट रहने और राहत इंतजाम दुरुस्त रखने को कहा गया है।

    औसत से 69% अधिक वर्षा

    रांची मौसम विज्ञान केंद्र के उपनिदेशक अभिषेक आनंद के मुताबिक, “1 जून से 12 जुलाई के बीच राज्य में 499.6 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि सामान्य औसत 296.4 मिमी होती है। यह सामान्य से लगभग 69 प्रतिशत अधिक है।”

    इन जिलों में रिकॉर्डतोड़ बारिश

    • पूर्वी सिंहभूम: सामान्य से 157% अधिक वर्षा
    • रांची: सामान्य से 150% अधिक बारिश
    • सरायकेला-खरसावां: 130% ज्यादा वर्षा

    इन पांच जिलों में बारिश में कमी.

    हालांकि झारखंड के देवघर, गढ़वा, गोड्डा, साहेबगंज और पाकुड़ जिलों में अब तक 21% से 29% तक कम वर्षा दर्ज की गई है, जिससे वहां खेती और जलस्तर को लेकर चिंता जताई जा रही है।

    IMD की लोगों को सलाह.

    • बारिश और वज्रपात के दौरान खुले स्थानों से दूर रहें।
    • बिजली के खंभों और पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचें।
    • यात्रा करने से पहले मौसम अपडेट चेक करें।

    मौसम विभाग की मानें तो झारखंड में अगले तीन दिन मूसलधार बारिश और तेज हवाओं के साथ चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। ऐसे में सतर्कता ही सुरक्षा का सबसे मजबूत उपाय है।

  • पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की बैठक मे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति मे हेमंत सोरेन ने गिनाई राज्य की पीड़ा

    Edited By: परवेज़ आलम.

    For The News Post4u.

    रांची की वह दोपहर इतिहास के दस्तावेज़ों में दर्ज होगी। जब पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की 27 वीं बैठक के मंच पर झारखंड की जमीन से उठी आवाज़ ने राष्ट्रीय सियासत के गलियारों में एक नई दस्तक दी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने न केवल अपने प्रदेश की पीड़ा को शब्दों में पिरोया, बल्कि दिल्ली को यह भी बताया कि देश के संसाधनों पर सिर्फ़ दिल्ली और मुंबई का हक नहीं है। जंगलों, पहाड़ों और आदिवासियों की भी साझेदारी है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में आयोजित पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की बैठक मे झारखंड राज्य की समस्याओं, विकास की जरूरतों और लंबित मामलों को विस्तार से रखा गया । मुख्यमंत्री ने झारखंड की ओर से 31 अहम मुद्दों को उठाते हुए राज्य के विकास के लिए केंद्र सरकार से सहयोग की अपेक्षा जताई। बैठक में बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और झारखंड के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया।

    कोयले की राख में दबे करोड़ों के सवाल.

    सबसे बड़ा प्रश्न था कोयला कंपनियों के ऊपर झारखंड सरकार का 1.40 लाख करोड़ रुपये का बकाया। न कोई ब्याज, न कोई माफी – सिर्फ़ मांग। हेमंत सोरेन ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के सामने सवाल रखा कि जब कोयले की खुदाई झारखंड की धरती से होती है, तो मुनाफा दिल्ली और कोलकाता के बहीखातों में क्यों दर्ज होता है?

    212 अस्पताल और आयुष्मान भारत की ठहरी साँसे.

    झारखंड के 212 निजी अस्पताल आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत इलाज तो कर रहे हैं, लेकिन भुगतान अटका हुआ है। वजह ? ईडी की जांच। हेमंत सोरेन ने दो टूक कहा – “भ्रष्टाचार की जांच होनी चाहिए, लेकिन मरीजों की जान बचाने वालों को सज़ा क्यों ?” इस पर अमित शाह ने जांच तेज़ करने और भुगतान सुनिश्चित करने का भरोसा दिलाया।

    मसानजोर डैम: पानी वहीं, प्यासा झारखंड.

    मयूराक्षी नदी पर बना मसानजोर डैम। पूरा सबमर्ज एरिया झारखंड में, लेकिन सिंचाई का लाभ बंगाल को। यह 1949 के समझौते की असंतुलित विरासत है। झारखंड को जहां मात्र 53 एमसीएम पानी मिलता है, जरूरत है 457 एमसीएम की। सोरेन ने मांग की – डैम का नियंत्रण साझा हो और जलस्तर 378 फीट से नीचे न जाने दिया जाए।

    “सहकारी संघवाद” का असली मतलब.

    मुख्यमंत्री ने मंच से एक स्पष्ट संदेश दिया – “यह परिषद केवल चर्चा का मंच नहीं, समाधान का प्रयोगशाला होनी चाहिए।” उन्होंने कहा कि झारखंड, बिहार, बंगाल और ओडिशा का साझा अतीत, साझा समस्याएं हैं, और इसलिए समाधान भी मिलकर ही होंगे।

    प्रमुख मांगें – हर क्षेत्र, हर वर्ग की आवाज़.

    हेमंत सोरेन की 360 डिग्री अपील में हर तबके की झलक थी:

    • खनिज संसाधनों का न्यायपूर्ण उपयोग: DMFT नीति में संशोधन, कोल कंपनियों द्वारा बकाया भुगतान और बंद खदानों का माइन क्लोजर।
    • महिलाओं के लिए “मुख्यमंत्री मईयां सम्मान योजना” के तहत 2500 रुपये मासिक सहायता।
    • शिक्षा में सामाजिक न्याय: वंचित वर्ग के छात्रों के लिए छात्रवृत्ति, जनजातीय विश्वविद्यालय, उच्च शिक्षा में नवाचार और पेटेंट सुविधा।
    • स्वास्थ्य व्यवस्था: RIMS-2 और छह नए मेडिकल कॉलेजों हेतु केंद्र की आर्थिक सहायता।
    • यातायात और संपर्क: रांची मेट्रो परियोजना, साहेबगंज एयर कार्गो हब, पूर्वोत्तर को जोड़ने वाले पुलों व एक्सप्रेसवे का प्रस्ताव।
    • मनरेगा में मजदूरी दर बढ़ाकर 405 रुपये करने की मांग।
    • कुपोषण और आंगनबाड़ी की समस्याओं पर केंद्र का ध्यान।
    • COMFED और होटल अशोक जैसे बिहार-झारखंड के साझा आस्तियों का विभाजन।

    एक मुख्यमंत्री की भूमिका से आगे.

    हेमंत सोरेन ने अपनी बात न किसी तंज में रखी, न किसी घमंड में। नारेबाज़ी नहीं, तथ्य, तर्क और अनुभव के साथ झारखंड की मांगों को मंच पर उतारा। उन्होंने यह जता दिया कि एक राज्य का मुख्यमंत्री सिर्फ़ मुख्यमंत्री नहीं होता – वह उस भूभाग की आत्मा, चेतना और आवाज़ होता है।  झारखंड ने सिर्फ़ अपना पक्ष नहीं रखा, बल्कि केंद्र और पड़ोसी राज्यों के सामने एक आइना रखा है। सवाल यह नहीं कि झारखंड क्या मांग रहा है, सवाल यह है कि देश की नीति में झारखंड की कितनी हिस्सेदारी है। और जब तक इस हिस्सेदारी का हिसाब नहीं चुकता, तब तक सहकारी संघवाद अधूरा रहेगा।

  • गिरिडीह : कांग्रेस के नए कार्यालय “राजीव भवन” का भव्य उद्घाटन

    *भारी बारिश भी नहीं रोक सकी नेताओं का जोश.

    Edited by: परवेज़ आलम

    For The News Post4u.

    गिरिडीह, झारखंड: जिला कांग्रेस कमिटी के लिए सोमवार का दिन ऐतिहासिक रहा, जब भारी बारिश के बावजूद गिरिडीह में नए जिला कार्यालय “राजीव भवन” का भव्य उद्घाटन किया गया। कार्यक्रम में झारखंड कांग्रेस के दिग्गज नेता एकजुट नजर आए और पूरे आयोजन में जनसंपर्क, संगठन मजबूती और भाजपा पर तीखे प्रहार की झलक दिखी।

    गिरिडीह के केंद्र में स्थित इस नए कार्यालय भवन का उद्घाटन कांग्रेस के झारखंड प्रभारी के. राजू, प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश, स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी, पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोध कांत सहाय, झारखंड विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव, कांके विधायक सुरेश बैठा, बोकारो विधायक श्वेता सिंह, पूर्व विधायक जयप्रकाश भाई पटेल सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने संयुक्त रूप से किया।

    के. राजू ने कहा: यह सिर्फ कार्यालय नहीं, जनता की आवाज़ है

    प्रदेश प्रभारी के. राजू ने उद्घाटन के दौरान कहा, “राजीव भवन केवल एक राजनीतिक दफ्तर नहीं है, यह जनता की समस्याओं के समाधान का केंद्र बनेगा।” उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी के नेता राहुल गांधी संगठन को जमीनी स्तर तक मजबूत करने के मिशन पर हैं, और इस कार्यालय के माध्यम से गिरिडीह में लोगों का पार्टी पर विश्वास और गहरा होगा।

    गुरु पूर्णिमा पर शुभारंभ को बताया ‘सांकेतिक पुनर्जागरण’

    प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने इस अवसर को गुरु पूर्णिमा के साथ जोड़ते हुए कहा, “आज का दिन कांग्रेस के लिए शुभ संकेत है। गिरिडीह में कांग्रेस की पुरानी विरासत रही है, अब हमें इसे फिर से मजबूत करना है।” उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में कांग्रेस हर पंचायत और गांव तक फिर से अपनी पहचान बनाएगी।

    डॉ. इरफान अंसारी का भाजपा पर हमला.

    स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने अपने भाषण में भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “हम कांग्रेसजन चंदा जमा कर कार्यालय बनाते हैं, जबकि भाजपा सत्ता में रहकर आदिवासियों को जमीन से बेदखल करती है।” उन्होंने नए कार्यालय को जनता से जुड़ा बताते हुए इसे पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को समर्पित करने पर गर्व जताया।

    नेताओं का जमावड़ा, कार्यकर्ताओं में जोश.

    इस कार्यक्रम में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. प्रदीप कुमार बालमुचू, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर, वरिष्ठ नेता उपेंद्र सिंह, अशोक चौधरी, रियाजुल अंसारी, धनंजय सिंह, सतीश केडिया, अनिल सिंहा, संतोष राय समेत कई नेता मौजूद रहे। बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और आम जनता इस मौके पर उपस्थित रही, जिससे कांग्रेस के प्रति जनसमर्थन का साफ संदेश मिला।

    राजनीतिक संदेश साफ – कांग्रेस वापस मैदान में.

    गिरिडीह के इस आयोजन ने साफ संकेत दिया कि कांग्रेस राज्य में एक बार फिर से सक्रिय भूमिका में लौट रही है। “राजीव भवन” केवल एक इमारत नहीं, बल्कि संगठनात्मक पुनर्निर्माण का प्रतीक बनकर सामने आया है।

  • जन्मदिन पर दिखे ‘कैप्टन कूल’: फैंस को दिया माही ने खास तोहफा, फार्म हाउस से निकलकर लहराया हाथ

    Edited by – परवेज़ आलम.
    For – The News Post4u.

    भारतीय क्रिकेट के सबसे चहेते सितारे और देश को तीन आईसीसी ट्रॉफियां दिलाने वाले महेंद्र सिंह धोनी  ने 7 जुलाई को अपने जन्मदिन के मौके पर एक ऐसा पल रच दिया जिसे रांची कभी नहीं भूलेगा। सोमवार की सुबह, जब रांची हल्की बारिश और बादलों की चादर में लिपटी थी, धोनी अपने सिमलिया स्थित फार्म हाउस से बाहर निकले और अपने चाहने वालों को अपनी झलक देकर जन्मदिन को यादगार बना दिया।

    धोनी इस मौके पर अपनी नई चमचमाती कार में सवार थे। जैसे ही उन्होंने फार्म हाउस का गेट पार किया, वहां पहले से मौजूद सैकड़ों प्रशंसकों में उत्साह की लहर दौड़ गई। “धोनी-धोनी!”  के नारों से इलाका गूंज उठा। माही ने भी अपने खास शांत और सादगीपूर्ण अंदाज़ में कार की स्पीड धीमी की और हाथ हिलाकर सबका अभिवादन किया।

    भीड़ में बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक, हर कोई अपनी आंखों से ‘कैप्टन कूल’ की एक झलक पाने को आतुर था। कुछ लोगों के हाथों में तख्तियां थीं जिन पर लिखा था – “हैप्पी बर्थडे माही, झारखंड की शान, भारत की जान”। वहीं कुछ युवा अपने मोबाइल कैमरों से उस ऐतिहासिक क्षण को कैद करने में लगे थे।

    सुबह से जुटने लगी थी भीड़, बारिश भी नहीं रोक सकी जोश.

    धोनी के फैंस सुबह से ही उनके फार्म हाउस के बाहर जमा होने लगे थे। किसी ने केक साथ लाया था, तो कोई धोनी के पोस्टर लेकर खड़ा था। फैन क्लब्स ने वहीं सड़क किनारे छोटा-सा मंच बना रखा था जहां संगीत, उत्सव और जोश का माहौल था। बारिश रुक-रुक कर हो रही थी लेकिन लोगों के उत्साह में कोई कमी नहीं थी।

    सोशल मीडिया से लेकर गली-मोहल्लों तक मना जश्न.

    रांची ही नहीं, पूरे देश में माही का जन्मदिन किसी त्योहार से कम नहीं रहा। ट्विटर, इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म्स पर #HappyBirthdayDhoni ट्रेंड करता रहा। फैंस ने जगह-जगह केक काटकर जश्न मनाया और अपने-अपने अंदाज में धोनी के प्रति अपना प्यार जताया।

    एक नजर धोनी की उपलब्धियों पर.
    महेंद्र सिंह धोनी न सिर्फ भारतीय क्रिकेट के सबसे शांत कप्तानों में से हैं, बल्कि उनकी कप्तानी में भारत ने जो इतिहास रचा, वो कभी नहीं मिटाया जा सकता।

    • 2007 में टी20 वर्ल्ड कप.
    • 2011 में वनडे वर्ल्ड कप.
    • 2013 में चैंपियंस ट्रॉफी.

    इसके अलावा उन्होंने भारतीय टेस्ट टीम को भी नंबर-1 रैंकिंग तक पहुंचाया। आईपीएल में भी धोनी की टीम चेन्नई सुपर किंग्स ने उनके नेतृत्व में 5 बार खिताब जीता है, और आज CSK को सबसे सफल फ्रेंचाइज़ी में गिना जाता है.

    जन्मदिन पर धोनी ने कुछ कहा तो नहीं, लेकिन उनका एक इशारा – भीड़ को देखकर मुस्कुराना, हाथ हिलाना और कार की स्पीड धीमी करना – यही संदेश दे गया कि वह आज भी अपने फैंस को सबसे पहले रखते हैं। उनके लिए यह छोटा-सा लम्हा शायद एक दिन का किस्सा हो, लेकिन उनके फैंस के लिए यह यादगार बन गया।

  • पूर्व विधायक अम्बा प्रसाद के ठिकानों पर ईडी का शिकंजा कसता, कांग्रेस ने कहा- बदले की कार्रवाई

    Edited by: परवेज़ आलम
    For: The News Post4U

    रांची/हजारीबाग/बड़कागांव:
    झारखंड की राजनीति एक बार फिर ईडी की दस्तक से गरमा गई है। शुक्रवार की सुबह प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कांग्रेस की पूर्व विधायक अम्बा प्रसाद और उनके करीबियों के रांची, हजारीबाग और बड़कागांव  सहित आठ ठिकानों पर एक साथ छापेमारी शुरू की। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध खनन से जुड़े एक पुराने मामले के सिलसिले में की जा रही है, जो कोल ट्रांसपोर्टिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और पावर सेक्टर से जुड़ी एक विवादित कंपनी से संबंधित है।

    कई ठिकानों पर एक साथ दबिश.

    ईडी की टीमों ने शुक्रवार सुबह रांची के किशोरगंज, बड़कागांव और हजारीबाग  में एक साथ कार्रवाई की। रांची में अम्बा प्रसाद के निजी सहायक संजीव कुमार के आवास पर जांच चल रही है। संजीव उस वक्त घर पर मौजूद नहीं थे, लेकिन ईडी की टीम ने जांच जारी रखी। दो वाहनों में पहुंचे अधिकारियों की टीम ने चार लोगों के साथ घर के भीतर तलाशी ली, जबकि छह सशस्त्र सुरक्षाकर्मी बाहर तैनात थे।

    बड़कागांव में पूर्व विधायक के भाई अंकित उर्फ सुमित, चार्टर्ड अकाउंटेंट बादल, और कथित रूप से उनसे जुड़े बालू कारोबारियों के ठिकानों पर भी ईडी की कार्रवाई हुई। हजारीबाग में चार स्थानों पर एक साथ छापेमारी की गई। बड़कागांव में अम्बा प्रसाद के करीबी पंचम कुमार, मनोज दांगी और अन्य सहयोगियों के आवास भी निशाने पर रहे।

    पिछली कार्रवाई से जुड़े दस्तावेज बने आधार.

    सूत्रों के मुताबिक, मार्च 2024 में की गई छापेमारी के दौरान ईडी को कई अहम सुराग मिले थे। उस दौरान अम्बा प्रसाद, उनके पिता पूर्व मंत्री योगेंद्र साव, भाई अंकित राज  समेत कई सहयोगियों के ठिकानों पर कार्रवाई हुई थी। उस छापेमारी में 35 लाख रुपये नकद, डिजिटल डिवाइसेज़, फर्जी बैंक टिकट, हाथ से लिखी रसीदें, और कई संदिग्ध दस्तावेज मिले थे। माना जा रहा है कि इस बार की कार्रवाई उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है।

    जांच के दायरे में 10 कंपनियां.

    ईडी सूत्रों के अनुसार, अम्बा प्रसाद और उनके परिवार से जुड़े कम से कम 10 कंपनियां  जांच के दायरे में हैं। ये कंपनियां खनन, भूमि खरीद-फरोख्त और निर्माण कार्यों से जुड़ी हैं। इन कंपनियों के माध्यम से कथित रूप से मनी लॉन्ड्रिंग की गई थी। ईडी की टीमें इन सभी संस्थाओं के वित्तीय दस्तावेजों और लेन-देन का बारीकी से विश्लेषण कर रही हैं।

    कांग्रेस ने बताया राजनीति से प्रेरित कार्रवाई.

    ईडी की इस ताजा छापेमारी को लेकर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी प्रवक्ता किशोरनाथ शहदेव  ने इसे चुनावी साजिश करार देते हुए कहा कि अम्बा प्रसाद को इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि वे बिहार चुनावों  में पार्टी की तरफ से प्रभारी (ऑब्जर्वर) बनाई गई हैं। उन्होंने कहा, “भाजपा की सरकार सीबीआई और ईडी को विपक्ष के खिलाफ हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है। यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक है।”

    उन्होंने यह भी कहा कि ईडी द्वारा अब तक की गई सभी छापेमारियों में कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला है, फिर भी बार-बार कार्रवाई कर जनता का ध्यान असल मुद्दों से भटकाया जा रहा है।

    राजनीतिक परिवार, पुराना प्रभाव.

    अम्बा प्रसाद झारखंड की बड़कागांव सीट से 2019 में कांग्रेस के टिकट पर विधायक  चुनी गई थीं। उनके पिता योगेंद्र साव  और मां निर्मला देवी  भी इस सीट से विधायक रह चुके हैं। इस परिवार की इलाके में मजबूत राजनीतिक पकड़ रही है, और अब उनके खिलाफ ईडी की बढ़ती कार्रवाई से राज्य की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है।

    अम्बा प्रसाद और उनके परिवार पर प्रवर्तन निदेशालय की नजरें टिकी हैं। हालांकि आधिकारिक रूप से ईडी ने अभी तक कोई प्रेस बयान नहीं दिया है, लेकिन लगातार हो रही छापेमारियों से संकेत साफ है कि जांच लंबी और गहन हो सकती है। कांग्रेस इसे बदले की राजनीति बता रहा है .

  • मुहर्रम को लेकर पुलिस सख्त: डीजे पर पाबंदी, सोशल मीडिया पर खास नजर

    Edited By: परवेज़ आलम
    For: The News Post4U

    झारखंड में मोहर्रम पर्व को लेकर सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चाक-चौबंद कर दी गई है। राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) अनुराग गुप्ता ने सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों (SP) और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों (SSP) को कड़े निर्देश जारी किए हैं। उनका साफ कहना है कि शांति भंग करने की किसी भी कोशिश को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह सड़क पर हो या सोशल मीडिया पर।

    डीजे बजाने पर सख्त पाबंदी.

    DGP ने स्पष्ट कर दिया है कि मोहर्रम के जुलूस में डीजे बजाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि यह पर्व मातम का होता है, न कि जश्न का। ऐसे में डीजे बजाना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा, जैसा कि पहले रामनवमी के अवसर पर भी किया गया था। अगर किसी ने डीजे का इस्तेमाल किया, तो सीधी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम.

    पुलिस प्रमुख ने सभी जिलों में संभावित संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त बल की तैनाती, सीसीटीवी कैमरे, ड्रोन निगरानी, और वीडियोग्राफी के निर्देश दिए हैं। जुलूस के रूट्स की जांच की जा रही है और यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि किसी भी मार्ग पर पत्थर या ईंट जैसी चीजें न हों, ताकि किसी तरह के उपद्रव की संभावना को खत्म किया जा सके।

    पुराने उपद्रवियों पर कड़ी नजर.

    DGP ने आदेश दिया है कि पहले से चिन्हित उपद्रवियों पर नजर रखी जाए और उन पर निरोधात्मक कार्रवाई की जाए। साथ ही उन्होंने सभी थानों और जिलों को शांति समिति की बैठक आयोजित करने को भी कहा है।

    सोशल मीडिया पर सख्त निगरानी.

    DGP अनुराग गुप्ता ने सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ तुरंत एक्शन लेने का निर्देश दिया है। पुलिस को निर्देश दिए गए हैं कि अगर कोई असामाजिक तत्व अफवाह फैलाने की कोशिश करता है, तो तुरंत उसकी पहचान कर कार्रवाई की जाए।

    पुलिस बलों के लिए व्यवस्था भी जरूरी.

    सिर्फ सुरक्षा नहीं, पुलिसकर्मियों की सुविधा का भी ख्याल रखा जा रहा है। DGP ने पुलिस बलों के लिए भोजन, आवास और पीने के पानी की व्यवस्था सुनिश्चित करने का आदेश भी दिया है। साथ ही एंटी-रायट ड्रिल, बॉडी प्रोटेक्टर, और दंगा नियंत्रण उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया है।

    हर जिले के एसपी होंगे ज़िम्मेदार.

    DGP ने डायल 112 इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम को एक्टिव मोड में रखने को कहा है। उन्होंने कहा कि अगर किसी जिले में कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ती है, तो सीधी जिम्मेदारी संबंधित SP की होगी। हर जिले के एसपी को क्षेत्र भ्रमण करने और स्थानीय स्तर पर कंट्रोल रूम स्थापित करने का निर्देश दिया गया है। DGP ने यह भरोसा जताया है कि पूरे झारखंड में मोहर्रम का त्योहार शांति और सौहार्द के माहौल में संपन्न होगा। लेकिन किसी भी तरह की लापरवाही या उकसावे को लेकर अब प्रशासन कतई माफ करने के मूड में नहीं है। जो नियम तोड़ेगा, उस पर कानून अपना काम करेगा।

  • साइबर ठगों ने झारखंड बीजेपी विधायक को ही लगा दिया चूना

    Edited by: परवेज़ आलम. For The News Post4U

    रांची:  झारखंड में साइबर ठगी का एक और हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जिसमें साइबर अपराधियों ने राज्य के पांकी विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी विधायक कुशवाहा शशिभूषण मेहता को निशाना बनाते हुए 1.27 लाख रुपये की ठगी कर ली। यह घटना राज्यभर में चर्चा का विषय बन गई है, क्योंकि इस बार ठगों के जाल में कोई आम नागरिक नहीं, बल्कि एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि फंसा है।

    कैसे दिया गया ठगी को अंजाम.

    ठगों ने खुद को जीएसटी कस्टम विभाग का अधिकारी बताकर विधायक से संपर्क किया और दावा किया कि उन्होंने पश्चिम बंगाल के मालदा में कई लग्जरी गाड़ियां जब्त की हैं, जिनकी नीलामी होने वाली है। विधायक को एक फॉर्च्यूनर कार की तस्वीर व्हाट्सएप पर भेजी गई और उसकी कीमत 12.70 लाख रुपये बताई गई। ठगों ने गाड़ी की बुकिंग के लिए 10% अग्रिम भुगतान, यानी 1.27 लाख रुपये की मांग की।

    विधायक ने अपने निजी सहायक के माध्यम से यह राशि ठगों को ट्रांसफर कर दी। ठगों ने उन्हें एक फर्जी रसीद भी भेज दी ताकि भरोसा बना रहे। लेकिन भुगतान के बाद जब विधायक ने संपर्क करने की कोशिश की, तो सभी मोबाइल नंबर बंद मिले।

    साइबर थाने में दर्ज हुई शिकायत.

    विधायक कुशवाहा शशिभूषण मेहता ने इस पूरे मामले की जानकारी रांची साइबर थाने को दी और तीन अज्ञात साइबर अपराधियों के खिलाफ मामला दर्ज कराया। विधायक ने यह भी बताया कि भुगतान उन्होंने अपने निजी सहायक के खाते से कराया था।

    इसी बीच एक और साइबर ठग चढ़ा पुलिस के हत्थे.

    वहीं, दूसरी ओर रांची साइबर पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। उत्तर प्रदेश के लखनऊ निवासी साइबर ठग विजय प्रकाश को गिरफ्तार किया गया है। विजय पर यूट्यूब पर इन्वेस्टमेंट से जुड़े फर्जी विज्ञापनों के माध्यम से देशभर के लोगों से ठगी करने का आरोप है। विज्ञापन पर क्लिक करते ही लोग एक व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ जाते थे, जहां उन्हें मुनाफे का झांसा देकर लाखों रुपये की ठगी की जाती थी।

    झारखंड समेत देश के 10 से ज्यादा राज्यों में उसके खिलाफ कुल 38 मामले दर्ज हैं। पुलिस उससे पूछताछ कर रही है ताकि अन्य ठगी के मामलों का भी खुलासा हो सके।

    साइबर सुरक्षा पर सवाल.

    बीजेपी विधायक के साथ हुई इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि साइबर अपराधी कितने संगठित और शातिर हो चुके हैं। अब आम जनता के साथ-साथ जनप्रतिनिधि और अधिकारी भी इनके निशाने पर हैं। राज्य सरकार और पुलिस के लिए यह एक गंभीर चेतावनी है कि साइबर फ्रॉड से निपटने के लिए और ज्यादा सतर्कता, तकनीकी संसाधन और जनजागरूकता की जरूरत है

    सावधानी ही सुरक्षा है – अनजान कॉल, लिंक और स्कीम से सतर्क रहें। ठगों की चालाकी आपके विवेक से ही मात खा सकती है।