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  • क्रिसमस की खुशियों से सराबोर गिरिडीह, बाजारों में रौनक, गिरजाघर रोशनी से जगमगाए

    परवेज़ आलम.

    गिरिडीह : क्रिसमस की दस्तक के साथ ही गिरिडीह के ईसाई धर्मावलंबियों में उत्साह और उमंग चरम पर है। पर्व में अभी तीन दिन शेष हैं, लेकिन शहर के बाजारों में अभी से क्रिसमस की रौनक देखते ही बन रही है। गिरजाघरों में रोशनी और सजावट इस बात की गवाही दे रही हैं कि क्रिसमस सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि खुशियों का उत्सव है।

    बाजारों में कदम रखते ही सांता क्लॉज की टोपी, रंग-बिरंगी लाइटें, सजावटी सितारे और क्रिसमस ट्री लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। दुकानों में क्रिसमस से जुड़ी हर सामग्री उपलब्ध है और लोग इस पर्व को खास बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।

    क्रिसमस कार्ड भी लोगों की पहली पसंद बने हुए हैं। पारंपरिक संदेशों से लेकर आधुनिक डिज़ाइन वाले कार्ड बाजार में खूब बिक रहे हैं। लोग अपने दोस्तों, रिश्तेदारों और प्रियजनों को शुभकामनाएं भेजने के लिए उत्साहपूर्वक कार्ड खरीद रहे हैं। वहीं बच्चों के लिए तो बाजार किसी जन्नत से कम नहीं है—खिलौने, मास्क, आकर्षक ड्रेस, सांता सूट और खास गिफ्ट पैक बच्चों को अपनी ओर खींच रहे हैं। माता-पिता भी बच्चों की खुशी के लिए जमकर खरीदारी कर रहे हैं।

    व्यापारियों के अनुसार, इस बार क्रिसमस को लेकर बाजार में खासा उत्साह है। दुकानदारों का कहना है कि बीते कुछ दिनों में बिक्री में तेजी आई है और जैसे-जैसे क्रिसमस नजदीक आ रहा है , रौनक और बढ़ने की उम्मीद है।

    उधर, गिरिडीह के गिरजाघरों को भी बेहद खूबसूरती से सजाया गया है। रंगीन लाइटों और आकर्षक सजावट से सजे चर्च दूर से ही लोगों को आकर्षित कर रहे हैं। प्रार्थना सभाओं और विशेष कार्यक्रमों की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। हर ओर क्रिसमस का उल्लास और उत्साह साफ झलक रहा है। लोग एक-दूसरे को शुभकामनाएं दे रहे हैं और त्योहार की खुशियों को मिल-बांट रहे हैं।

  • क्या झारखंड में बारिश डाल देगी दुर्गा पूजा के उत्सव पर खलल ?

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    रांची : नवरात्र के अवसर पर झारखंड का हर शहर आस्था और भक्ति से सराबोर है। राजधानी रांची से लेकर कोल्हान, संताल और पलामू तक दुर्गा पूजा की रौनक नजर आ रही है। जगह-जगह भव्य पंडाल सज चुके हैं और मां दुर्गा की प्रतिमाएं भक्तों के दर्शन के लिए स्थापित की जा चुकी हैं। अधिकांश पंडालों के पट शुक्रवार को ही खोल दिए गए थे, जबकि शेष पंडाल शनिवार से भक्तों के लिए सुलभ हो गए हैं।

    लेकिन इस उत्साह के बीच एक सवाल हर किसी के मन में उठ रहा है—क्या बारिश पूजा की खुशी पर पानी फेर देगी?

    रुक-रुक कर हो रही बारिश ने बढ़ाई चिंता.

    पिछले दो दिनों से झारखंड के कई हिस्सों में रुक-रुक कर बारिश हो रही है। इस कारण पंडालों की भव्य सजावट और रोशनी पर असर पड़ रहा है। कई जगह श्रद्धालुओं को पूजा स्थलों तक पहुंचने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। गिरिडीह ,धनबाद, बोकारो और रांची में शुक्रवार को झमाझम बारिश के कारण पंडालों में भीड़ अपेक्षाकृत कम रही।

    मौसम विभाग की चेतावनी और उम्मीद.

    मौसम विभाग का कहना है कि बंगाल की खाड़ी में सक्रिय निम्न दबाव का असर झारखंड पर भी देखने को मिल रहा है। इसके चलते राज्य के दक्षिणी और मध्य जिलों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना बनी हुई है। रांची, जमशेदपुर, धनबाद और गुमला समेत कई जिलों में गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं।

    हालांकि राहत की बात यह है कि 28 सितंबर से मौसम धीरे-धीरे साफ होने लगेगा और नवरात्र के शेष दिनों में श्रद्धालु बिना किसी रुकावट के मां दुर्गा की आराधना कर सकेंगे।

    श्रद्धालुओं में उत्साह बरकरार.

    मौसम की मार के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ है। सुबह-शाम भक्ति गीतों और ढाक की धुनों से पंडालों का वातावरण गूंज रहा है। जगह-जगह अष्टमी और नवमी के भोग की तैयारी जोर-शोर से हो रही है।

  • नवरात्र पर मंत्री सुदीव्य सोनू का पंडाल भ्रमण, व्यवस्था पर विशेष जोर

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    गिरिडीह : नवरात्र के शुभ अवसर पर शनिवार को गिरिडीह विधायक एवं झारखंड सरकार के मंत्री सुदीव्य कुमार सोनू ने शहर और आसपास के क्षेत्रों में स्थापित विभिन्न दुर्गा पूजा पंडालों का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने मां दुर्गा की प्रतिमा के समक्ष माथा टेकते हुए राज्य और जिले के लोगों की खुशहाली व समृद्धि की कामना की।

    मंत्री सोनू ने न केवल शहरी क्षेत्र, बल्कि गिरिडीह मुफ्फसिल इलाके के कई बड़े पंडालों का भी दौरा किया। भ्रमण के दौरान उन्होंने पंडालों में सफाई व्यवस्था, विद्युत आपूर्ति, भीड़ नियंत्रण, अग्निशमन प्रबंधन और सुरक्षा इंतजामों का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि पूजा के समय किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और श्रद्धालुओं को सुरक्षित व शांतिपूर्ण वातावरण में पूजा करने का अवसर मिलना चाहिए।

    निरीक्षण के दौरान जिले के पुलिस-प्रशासनिक अधिकारी, नगर निगम प्रतिनिधि और बिजली विभाग के पदाधिकारी मंत्री के साथ मौजूद थे। मंत्री सोनू ने कहा, दुर्गा पूजा झारखंड सहित पूरे देश की आस्था और संस्कृति का पर्व है। प्रशासन की जिम्मेदारी है कि श्रद्धालु बिना किसी व्यवधान के पूजा-अर्चना कर सकें। इसके लिए सभी विभाग पूरी तरह सतर्क और तैयार रहें।”

    इस मौके पर मंत्री ने कई पंडाल समितियों के सदस्यों से भी मुलाकात की और उनकी समस्याओं व सुझावों को सुना। पंडाल समितियों ने प्रशासन से सहयोग और व्यवस्था पर संतोष जताया।

  • साल का आख़िरी पूर्ण चंद्रग्रहण: देशभर से दिखा अद्भुत नज़ारा

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    वर्ष 2025 का अंतिम पूर्ण चंद्रग्रहण रविवार रात से शुरू हो चुका है और यह देशभर में लोगों के लिए आकाशीय अद्भुत नज़ारा लेकर आया। भारतीय समयानुसार, चंद्रग्रहण रात 9 बजकर 57 मिनट पर आरंभ हुआ और यह सोमवार तड़के 1 बजकर 26 मिनट तक जारी रहेगा।

    हिंदू पंचांग के अनुसार यह ग्रहण भाद्रपद माह की पूर्णिमा तिथि पर हो रहा है, जिस कारण धार्मिक दृष्टिकोण से भी इसका महत्व बढ़ गया है। देशभर के कई मंदिरों में ग्रहण के दौरान विशेष पूजा-अर्चना और मंत्रोच्चार का आयोजन किया गया।

    वहीं, खगोल विज्ञान प्रेमियों और आम लोगों के लिए यह रात यादगार बन गई। जैसे ही ग्रहण शुरू हुआ, लोग घरों की छतों, खुले मैदानों और पार्कों में दूरबीन व मोबाइल कैमरों के जरिए इस खगोलीय घटना को देखने जुट गए।

    एक न्यूज़ एजेंसी द्वारा साझा की गई तस्वीरों और वीडियो में चेन्नई (तमिलनाडु), गुवाहाटी (असम), कोलकाता (पश्चिम बंगाल) और जयपुर (राजस्थान) सहित कई बड़े शहरों से चंद्रग्रहण के दृश्य सामने आए हैं। आसमान में चांद के धीरे-धीरे ढकने और फिर पुनः उजागर होने का यह अद्भुत नजारा लोगों को मंत्रमुग्ध कर रहा है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, इस ग्रहण का वैज्ञानिक दृष्टि से भी काफी महत्व है। यह धरती, चंद्रमा और सूर्य की सटीक स्थिति को दर्शाता है, जब धरती सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है। इससे चांद की चमक फीकी पड़ जाती है और वह तांबे जैसी लालिमा लिए दिखाई देने लगता है, जिसे “ब्लड मून” भी कहा जाता है।

    बता दें कि है कि यह साल का अंतिम पूर्ण चंद्रग्रहण है, अगला मौका लोगों को अब अगले वर्ष ही मिलेगा।

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  • मधुबन शिखरजी में क्षमा धर्म आराधना के साथ दशलक्षण महापर्व का शुभारंभ

    परवेज़ आलम.द न्यूज़ पोस्ट4यू.

    गिरिडीह : जैन धर्मावलंबियों के लिए आस्था का सबसे बड़ा केंद्र और विश्वविख्यात तीर्थक्षेत्र मधुबन शिखरजी इन दिनों भक्ति, तप और साधना की ध्वनियों से गूंज रहा है। दस दिवसीय दशलक्षण महापर्व का आरंभ यहां श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ हुआ। इस महापर्व का पहला दिन उत्तम क्षमा धर्म को समर्पित रहा। सुबह से ही हजारों की संख्या में श्रद्धालु मंदिरों में पहुँचकर भगवान महावीर और पार्श्वनाथ का अभिषेक, पूजा-अर्चना एवं आरती कर धर्ममय वातावरण में लीन रहे।

    क्षमा धर्म की आराधना.

    संतों और आचार्यों ने सामूहिक प्रवचन देकर श्रद्धालुओं को क्षमा धर्म के महत्व से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि क्षमा केवल एक गुण नहीं बल्कि संपूर्ण जीवन की दिशा है। क्षमा से व्यक्ति क्रोध, अहंकार और वैरभाव से मुक्त होकर शांति और सहिष्णुता के मार्ग पर चलता है। प्रवचन के दौरान यह संदेश दिया गया कि क्षमा का अभ्यास करने से वैचारिक प्रदूषण से मुक्ति मिलती है और आत्मा की शुद्धि होती है।

    धार्मिक अनुशासन और तपस्या.

    दशलक्षण महापर्व के दौरान श्रद्धालु एकाशना, उपवास, अंबिल, अठ्ठाई और बेयसना जैसे विविध तप करते हैं। बड़ी संख्या में महिलाएं और युवा इस पर्व में तप, ध्यान और स्वाध्याय की साधना में लीन दिखे। जैन समाज इसे आत्मशुद्धि और आत्मअनुशासन की पवित्र यात्रा मानता है। श्रद्धालु मानते हैं कि यह पर्व न केवल जीवन को अहिंसा और संयम की ओर ले जाता है, बल्कि भविष्य के लोक में भी सुख और शांति का आधार बनता है।

    हर दिन विशेष गुण की साधना.

    इस पर्व को दशलक्षण इसलिए कहा जाता है क्योंकि दस दिनों में दस विशेष गुणों की साधना की जाती है। इनमें क्षमा, मार्दव (अहंकार का त्याग), आर्जव (सरलता), शौच (शुद्धि), सत्य, संयम, तप, त्याग, अकिंचन और ब्रह्मचर्य शामिल हैं। पहले दिन क्षमा धर्म की आराधना को सबसे श्रेष्ठ माना गया है क्योंकि यह सभी गुणों की आधारशिला है।

    विशेष व्यवस्थाएँ और श्रद्धालुओं का संकल्प.

    मधुबन शिखरजी में पर्व को लेकर स्थानीय प्रशासन और जैन समाज ने विशेष व्यवस्थाएँ की हैं। धर्मशालाओं और मंदिरों में भक्ति-भावना का अद्भुत माहौल बना हुआ है। देशभर से आए हजारों श्रद्धालुओं ने इस अवसर पर संकल्प लिया कि वे जीवन में क्षमा, संयम और सद्भावना को आत्मसात करेंगे तथा समाज में शांति और एकता का संदेश फैलाएँगे।

     

  • इनरव्हील क्लब ऑफ गिरिडीह सनशाइन ने मनाया जन्माष्टमी उत्सव

    नन्हें कान्हाओं ने मोह लिया सबका मन

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क

    गिरिडीह : भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव जन्माष्टमी के पावन अवसर पर इनरव्हील क्लब ऑफ गिरिडीह सनशाइन ने एक भव्य एवं भक्तिमय कार्यक्रम का आयोजन किया। यह विशेष आयोजन क्लब की अध्यक्षा श्रीमती कविता राजगाड़िया के आवास पर हुआ, जहाँ क्लब की सभी सदस्याएँ और उनके परिवारजन बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

    कार्यक्रम की शुरुआत मंगलाचरण और भक्ति गीतों के साथ हुई। पूरे वातावरण में भगवान श्रीकृष्ण और माता यशोदा के स्वरूप गूंज उठे, जिससे माहौल श्रद्धा और आनंद से भर गया।

    इस अवसर पर दो रोचक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया – मटकी सजावट प्रतियोगिता और रूप सज्जा प्रतियोगिता

    • मटकी सजावट प्रतियोगिता में क्लब की प्रतिभावान सदस्याओं ने रंग-बिरंगे रंगों, फूलों और पारंपरिक आभूषणों से मटकियों को सजाकर अपनी कला का प्रदर्शन किया। इसमें प्रथम स्थान पर संगीता सिंह, द्वितीय स्थान पर शशि जैन और तृतीय स्थान पर संगीता सिन्हा एवं रिया अग्रवाल रहीं।
    • रूप सज्जा प्रतियोगिता में क्लब की सदस्याओं के घरों के नन्हें बच्चों ने श्रीकृष्ण का रूप धारण कर सभी का मन मोह लिया। छोटे-छोटे कान्हाओं के रूप में ऑली, वीरांश राज, आर्यन, मन्नी, साहिती और कियारा मंच पर आए तो तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा वातावरण गूंज उठा।

    प्रतियोगिता के विजेताओं और प्रतिभागियों को सम्मानित करते हुए पीडीसी पूनम सहाय ने पुरस्कार एवं उपहार भेंट किए।

    इस आयोजन की विशेषता यह रही कि क्लब की सभी सदस्याएँ माता यशोदा के रूप में सजी थीं, जिससे कार्यक्रम और भी आकर्षक एवं सांस्कृतिक रंग में रंग गया।

    अंत में, सभी सदस्याओं ने मिलकर भक्ति-भाव से भजन गाए और प्रसाद स्वरूप क्लब की सदस्याओं द्वारा बनाए गए पारंपरिक स्वादिष्ट व्यंजनों का आनंद लिया।

    जन्माष्टमी उत्सव के इस आयोजन ने न केवल सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं को जीवंत किया, बल्कि समाज में आपसी सहयोग और आनंद के भाव को भी मजबूत किया।

  • सावन की पहली सोमवारी: भोलेनाथ की भक्ति में डूबा गिरिडीह

    शिवालयों में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब

    बिनोद कुमार

    Edited by: परवेज़ आलम

    For The News Post4u.

    गिरिडीह : सावन के पावन महीने की पहली सोमवारी को गिरिडीह जिले में शिवभक्ति की एक अद्भुत छवि देखने को मिली। शहर की फिजा “बम-बम भोले” और “हर-हर महादेव” के जयघोष से गूंज उठी। जिले के विभिन्न शिवालयों में सुबह होते ही श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। मंदिरों की ओर जाने वाले मार्गों पर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखी गईं, जो भगवान भोलेनाथ पर जलाभिषेक और पूजा-अर्चना के लिए घंटों से इंतज़ार कर रहे थे।

    शिवभक्ति में लीन दिखे श्रद्धालु.
    सुबह से ही श्रद्धालु अपने परिवार व मित्रों के साथ शिव मंदिरों का रुख करने लगे। पूरे जिले में शिवालयों की घंटियां बज रही थीं और भक्तों की भीड़ भक्तिभाव के साथ शिवलिंग पर बेलपत्र, दूध, गंगाजल और फूल चढ़ा रही थी। विशेष रूप से सदर प्रखंड के उदनाबाद स्थित प्रसिद्ध दुःखहरणनाथ मंदिर में अपार भीड़ उमड़ी। यहां की मान्यता है कि सावन में जो भी सच्चे मन से भोलेनाथ का पूजन करता है, उसकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

    पुजारी ने बताया सावन सोमवारी का महत्व.
    दुःखहरणनाथ मंदिर के पुजारी सर्वेश पांडेय ने बताया कि सावन मास शिव उपासना के लिए अत्यंत शुभ और प्रभावकारी माना जाता है। खासकर सोमवारी के दिन बेलपत्र, गंगाजल और दूध से भगवान शिव का अभिषेक करने से समस्त दोष समाप्त हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि इस पावन दिन पर यदि श्रद्धालु महामृत्युंजय मंत्र या गायत्री मंत्र का जाप करते हुए अभिषेक करें, तो जीवन के समस्त कष्टों का नाश होता है और मानसिक शांति प्राप्त होती है।

    सुरक्षा व्यवस्था रही चाक-चौबंद.
    सोमवारी को लेकर जिला प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था भी सख्त रखी गई थी। मंदिरों के बाहर पुलिस बल तैनात किए गए थे ताकि भीड़ में कोई अव्यवस्था न हो। नगर निगम की ओर से साफ-सफाई और जल की व्यवस्था भी की गई थी।

    भक्ति, आस्था और अनुशासन का अद्भुत संगम.
    सावन की पहली सोमवारी ने गिरिडीह में भक्ति, आस्था और अनुशासन का ऐसा अद्भुत संगम दिखाया, जो वर्षों तक लोगों की स्मृतियों में रहेगा। श्रद्धालुओं के चेहरों पर शिवभक्ति की चमक और मन में विश्वास का उजाला साफ नजर आ रहा था।

    यह दिन शिवभक्तों के लिए केवल पूजा-पाठ का नहीं, बल्कि आत्मिक शांति और प्रभु से जुड़ाव का भी पर्व बन गया।

  • देवघर में राजकीय श्रावणी मेले का भव्य उद्घाटन

    EDITED BY: परवेज़ आलम

    FOR THE NEWS POST4U

    देवघर: गुरू पूर्णिमा के पावन अवसर पर देवघर जिले के दुम्मा स्थित झारखंड के प्रवेश द्वार पर पारंपरिक श्रद्धा और आधुनिक तकनीक के समावेश के साथ राजकीय श्रावणी मेले का शुभारंभ किया गया। उद्घाटन समारोह में पर्यटन मंत्री सुदिव्य कुमार, ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय, और श्रम नियोजन मंत्री संजय प्रसाद यादव बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। तीनों मंत्रियों ने संयुक्त रूप से पूजा-अर्चना कर फीता काटा और “हर-हर महादेव” के जयघोष के बीच मेले की शुरुआत की।

    श्रद्धालुओं की सुविधा में तकनीक का सहारा.

    उद्घाटन के दौरान मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा कि सरकार और जिला प्रशासन ने इस बार श्रावणी मेले को पहले से बेहतर और सुरक्षित बनाने की हरसंभव कोशिश की है। श्रद्धालुओं के सुगम दर्शन और यात्रा अनुभव को यादगार बनाने के लिए एआई (AI) आधारित सिस्टम लागू किया गया है। इसमें:

    • AI चैटबॉट: यात्रियों की सहायता और मार्गदर्शन के लिए।
    • QR कोड सिस्टम: जरूरी जानकारी स्कैन कर तुरंत उपलब्ध कराने के लिए।
    • RFID ट्रैकिंग सिस्टम: छोटे बच्चों की सुरक्षा के लिए उन्हें ट्रेस और ट्रैक करने की सुविधा।

    इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास की योजना.

    पर्यटन मंत्री ने बताया कि कांवरिया पथ को और सुगम बनाने के लिए सरकार की ओर से विस्तृत योजना बनाई गई है।

    • खिजुरिया से मानसरोवर तट स्थित क्यू कॉम्प्लेक्स तक फूट ओवरब्रिज (FOB) का निर्माण प्रस्तावित है। यह सर्कुलर रोड पार करने में कांवरियों को हो रही असुविधा को दूर करेगा।
    • दुम्मा से खिजुरिया तक के मार्ग को पहले ही सुविधाजनक बना दिया गया है, और अब इसके आगे मंदिर तक की सड़क को भी समर्पित कांवर पथ के रूप में विकसित किया जाएगा।
      इससे न सिर्फ श्रद्धालुओं को आसानी होगी, बल्कि देवघर शहर की यातायात व्यवस्था भी पहले से ज्यादा सुव्यवस्थित हो जाएगी।

    मंत्रियों ने जताया विश्वास और आभार.

    ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय ने कहा कि बाबा बैद्यनाथ की कृपा से मेले के दौरान वर्षा भी हो रही है, जिससे श्रद्धालुओं के साथ-साथ किसानों को भी लाभ होगा। उन्होंने कहा, “हम सभी मिलकर मेले को सफल बनाएंगे।”
    वहीं, श्रम नियोजन मंत्री संजय प्रसाद यादव ने कहा कि नगर विकास विभाग और जिला प्रशासन ने समर्पित भाव से मेले की व्यवस्था को बेहतर बनाने का प्रयास किया है।

    प्रशासन की ओर से पुख्ता इंतजाम.

    देवघर के उपायुक्त नमन प्रियेश लकड़ा ने जानकारी दी कि इस बार सुरक्षित और सुगम जलार्पण की दिशा में हर संभव उपाय किए गए हैं। प्रशासन ने AI चैटबॉट, रियल टाइम सहायता, पानी और चिकित्सा की सुविधा, तथा यातायात नियंत्रण के लिए विशेष टीमें तैनात की हैं।

    उद्घाटन में उमड़ा जनसैलाब.

    पूजन और उद्घाटन समारोह के दौरान दुम्मा प्रवेश द्वार “हर-हर महादेव” के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालु, स्थानीय नागरिक और अधिकारियों की उपस्थिति में माहौल भक्तिमय हो गया। इस आयोजन ने यह स्पष्ट कर दिया कि झारखंड सरकार पारंपरिक भावनाओं के साथ-साथ आधुनिक तकनीक के सहारे एक समर्पित और सशक्त व्यवस्था देने के लिए तत्पर है।

     

  • मोहर्रम और ताजिया की परंपरा: शहादत का प्रतीक, गम और श्रद्धा की मिसाल

    परवेज़ आलम
    For The News Post4U

    इस्लाम धर्म में मोहर्रम  का महीना एक खास स्थान रखता है। यह इस्लामिक कैलेंडर  का पहला महीना होता है, लेकिन इस महीने की शुरुआत किसी जश्न से नहीं, बल्कि गम और मातम  से होती है। इसकी सबसे बड़ी वजह है पैगंबर मोहम्मद साहब के नवासे इमाम हुसैन  की कर्बला की जंग   में हुई शहादत, जिसे मुस्लिम समुदाय आज भी गहरे दुख के साथ याद करता है।

    मोहर्रम और अशूरा का महत्व.

    मोहर्रम की दसवीं तारीख  को अशूरा कहा जाता है, जो इस महीने का सबसे अहम दिन होता है। इस साल अशूरा 6 जुलाई 2025 को मनाया जा रहा है। इसी दिन 680 ईस्वी में इराक के कर्बला में इमाम हुसैन और उनके परिवार के सदस्यों ने यज़ीद की सेना से मुकाबला करते हुए शहादत  दी थी। यह लड़ाई सिर्फ सत्ता की नहीं, बल्कि सत्य, न्याय और धर्म की रक्षा के लिए थी। इसलिए मोहर्रम को त्याग और बलिदान का प्रतीक  माना जाता है।

    इस महीने में मुस्लिम समाज में कोई भी शुभ कार्य जैसे शादी-ब्याह  या अन्य उत्सव नहीं किए जाते। इसकी जगह मातम, रोजा और दुआ का आयोजन होता है।

    क्या है ताजिया और क्यों निकलता है इसका जुलूस ?

    मोहर्रम के महीने में देशभर में ताजिया का जुलूस  निकाला जाता है, जो अक्सर प्रतीकात्मक रूप से “कर्बला” में जाकर समाप्त होता है। ताजिया  दरअसल एक कलात्मक ढांचा  होता है, जिसे इमाम हुसैन की कब्र (रौज़ा-ए-मुबारक)  का प्रतीक माना जाता है। यह ढांचा बांस, लकड़ी, कागज, स्टील, रंगीन शीशे और कई बार चांदी-सोने की सजावट  से तैयार किया जाता है। इसे घरों, मोहल्लों और इमामबाड़ों में बनाया जाता है, और 10 मोहर्रम को मातमी धुनों और नारे या हुसैनके साथ जुलूस के रूप में निकाला जाता है।

    ताजिया की शुरुआत भारत में कैसे और कब हुई ?

    बहुत कम लोगों को यह पता है कि ताजिया निकालने की परंपरा की शुरुआत भारत  से ही हुई थी। इतिहासकारों के अनुसार, 14वीं सदी  में बादशाह तैमूरलंग  के समय (801 हिजरी, लगभग 1399 ई.) में भारत में पहला ताजिया तैयार किया गया था। तैमूर शिया संप्रदाय से ताल्लुक रखता था और हर साल इमाम हुसैन की कब्र की जियारत (यात्रा) के लिए कर्बला, इराक जाया करता था। लेकिन एक समय वह हृदय रोग से पीड़ित हो गया और लंबी यात्रा करने में असमर्थ हो गया।

    अपने शोक और श्रद्धा को व्यक्त करने के लिए, दरबारियों ने उनके सामने बांस और रंग-बिरंगे कागज  से इमाम हुसैन की मजार की प्रतिकृति  बनाकर पेश की। इस कलाकृति को देख बादशाह बेहद भावुक हो गया और यह परंपरा बन गई। तब से हर साल ताजिया बनाए जाने लगे और यह परंपरा भारत से होते हुए दुनिया भर के शिया मुसलमानों में फैल गई।

    आज ताजिया सिर्फ एक प्रतीक नहीं, बल्कि भावना है.

    वक्त के साथ ताजिया सिर्फ एक कलात्मक प्रतीक नहीं रहा, बल्कि यह भक्ति, समर्पण और इंसाफ की लड़ाई  की मिसाल बन गया है। रांची ,लखनऊ , भोपाल या कोलकाता—हर शहर में ताजिए का अपना अनूठा स्वरूप होता है, लेकिन भावनाएं एक जैसी होती हैं: इमाम हुसैन की कुर्बानी को याद करना और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना।

    मोहर्रम और ताजिए की परंपरा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सत्य, बलिदान और निष्ठा की एक जीवंत कहानी है जो हर साल दुनिया को यह याद दिलाती है कि हक़ के लिए लड़ना और ज़ुल्म के आगे झुकना नहीं, यही इमाम हुसैन की सीख है।

  •  झारखंड में वक्फ संशोधन कानून नहीं होगा लागू -मंत्री हफीजुल हसन का बड़ा बयान

    BJP पर साधा निशाना

    परवेज़ आलम. 

    झारखंड के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री हफीजुल हसन ने साफ़ तौर पर ऐलान किया है कि झारखंड में वक्फ संशोधित कानून लागू नहीं किया जाएगा। बुधवार को रांची स्थित हज हाउस में आयोजित हज प्रशिक्षण शिविर के दौरान मंत्री ने कहा कि यह कानून मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाने की एक कोशिश है, जिसे भारतीय जनता पार्टी ने राजनीतिक लाभ के उद्देश्य से संसद से पारित कराया है।

    हफीजुल हसन ने इस मौके पर कहा, यह कानून मुसलमानों को परेशान करने के इरादे से लाया गया है। लेकिन झारखंड में इसे हम लागू नहीं होने देंगे।”

    हज यात्रा की तैयारियों की समीक्षा. 

    हज यात्रा पर रवाना होने वाले झारखंड के आज़मीन-ए-हज के लिए बुधवार को एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन हुआ, जिसमें रांची, खूंटी और सिमडेगा जिलों से आए कुल 248 हज यात्रियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में झारखंड सरकार के स्वास्थ्य मंत्री और राज्य हज कमेटी के चेयरमैन डॉ. इरफान अंसारी भी उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि सरकार हज यात्रियों को हर जरूरी सुविधा उपलब्ध कराएगी।

    झारखंड से लेकर मक्का-मदीना तक, सरकार हर मोड़ पर ज़ायरीनों के साथ खड़ी रहेगी,” – डॉ. इरफान अंसारी ने कहा। उन्होंने हज यात्रियों से देश में अमन, चैन और भाईचारे की दुआ करने की अपील भी की।

    संसद से पारित हुआ वक्फ संशोधन कानून, देशभर में हो रहा विरोध. 

    हाल ही में संसद में वक्फ संशोधन विधेयक पारित किया गया, जिस पर राष्ट्रपति की मंज़ूरी भी मिल चुकी है। यानी यह विधेयक अब कानून बन चुका है। इस कानून के खिलाफ देशभर के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन जारी हैं। विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि यह कानून वक्फ संपत्तियों की स्वायत्तता पर हमला है और इससे अल्पसंख्यकों के अधिकारों में कटौती होगी।

    इस साल हज यात्रा पर 1301 जायरीन जाएंगे, रांची से नहीं मिलेगी सीधी उड़ान. 

    राज्य हज कमेटी के कार्यपालक पदाधिकारी आफताब अहमद ने जानकारी दी कि इस साल झारखंड से कुल 1301 हज यात्री मक्का-मदीना के लिए रवाना होंगे। हालांकि, इस बार भी रांची से कोई सीधी उड़ान सेवा उपलब्ध नहीं होगी। हज यात्रियों को पहले कोलकाता जाना होगा, और वहां से वे जेद्दा के लिए उड़ान भरेंगे।

    हज यात्रा पर खर्च और सुविधाएं.

    इस साल एक हज यात्री को लगभग ₹3.58 लाख खर्च करना होगा। इसके अतिरिक्त, कुर्बानी के लिए अलग से राशि देनी होगी। हज यात्रियों की सहायता के लिए 9 स्टेट हज इंस्पेक्टर नियुक्त किए गए हैं, जिनमें एक महिला इंस्पेक्टर भी शामिल हैं।

    हज प्रशिक्षण शिविर में यात्रियों को हज से जुड़ी प्रक्रियाएं, नियमावली, स्वास्थ्य संबंधी उपायों और यात्रा से जुड़े तमाम जरूरी दिशा-निर्देशों की जानकारी दी गई। शिविर का उद्देश्य हज यात्रा को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और सरल बनाना है।

    झारखंड सरकार ने वक्फ संशोधन कानून को राज्य में लागू न करने का ऐलान करके अल्पसंख्यक समुदाय को स्पष्ट संदेश दिया है कि वह उनके हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। वहीं, हज यात्रा की तैयारियों से यह भी स्पष्ट होता है कि सरकार धार्मिक यात्राओं में सहभागी जनता के लिए गंभीर प्रयास कर रही है, चाहे वह सुविधाओं की बात हो या मार्गदर्शन की।