Category: Giridih

  • सिद्धू कान्हु क्रिकेट प्रतियोगिता का रोमांचक समापन, KGN टीम ने लहराया परचम

    गिरिडीह के मोहनपुर यज्ञ मैदान में सिद्धू कान्हु क्रिकेट प्रतियोगिता का शानदार समापन हुआ, जिसमें कुल 13 टीमों ने अपनी प्रतिभा दिखाई। फ़ाइनल में KGN टीम ने ज़ोरदार प्रदर्शन करते हुए श्री राम हार्डवेयर टीम को हराकर खिताब अपने नाम किया।

    प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मान और पुरस्कार से नवाज़ा गया। विजेता टीम को ₹25,000 का चेक, जबकि उपविजेता टीम को ₹15,000 का चेक प्रदान किया गया। इस मौके पर कोडरमा सांसद प्रतिनिधि दिनेश यादव, मोहनपुर मुखिया मालती देवी और गिरिडीह सांसद चंद्र प्रकाश चौधरी के पुत्र पीयूष चौधरी ने खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाया।

    दिनेश यादव ने कहा, “खेल युवाओं में ऊर्जा और उत्साह भरने का काम करता है। इस तरह की प्रतियोगिताएं उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं।”

    प्रतियोगिता को सफल बनाने वाले सभी आयोजकों को बधाई दी गई, जिनकी मेहनत से यह शानदार आयोजन संभव हो पाया।

  • गिरिडीह : अधिवक्ताओं का बड़ा ऐलान, 25 फरवरी को न्यायिक से रहेंगे अलग

    रिपोर्ट – परवेज़ आलम

    गिरिडीह ज़िला अधिवक्ता संघ ने सरकार के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल दिया है! फैसला लिया गया है कि 25 फरवरी, मंगलवार को गिरिडीह व्यवहार न्यायालय के सभी वकील न्यायिक कार्यों से अलग रहेंगे। वजह? एडवोकेट (संशोधन) विधेयक, 2025 का मसौदा, जिसे लेकर अधिवक्ताओं में ज़बरदस्त नाराज़गी है!

    संघ के उपाध्यक्ष अजय कुमार सिन्हा  मंटू ने खुलकर विरोध जताते हुए कहा, “यह विधेयक अधिवक्ताओं के अधिकारों और विशेषाधिकारों को सीमित करने की कोशिश करता है, जो पूरी तरह से अस्वीकार्य है!”

    अब ज़रा इधर भी देखिए—देशभर में वकीलों के विरोध का असर साफ दिखने लगा है! केंद्र सरकार बैकफुट पर आ गई है! केंद्रीय विधि और न्याय मंत्रालय ने एक बड़ा ऐलान किया है! मंत्रालय ने कहा है कि विधेयक को फिर से संशोधित किया जाएगा और हितधारकों से दोबारा सलाह-मशविरा होगा।


    मंत्रालय के मुख्य लेखा नियंत्रक ध्रुव कुमार सिंह के दस्तख़त वाले पत्र में साफ लिखा गया है कि, “सरकार की प्राथमिकता पारदर्शिता है! 13 फरवरी को विधेयक को सार्वजनिक परामर्श के लिए डाला गया था, लेकिन अब जब इतने सुझाव और विरोध आ रहे हैं, तो हमें इसे फिर से संशोधित करना होगा!”

    तो कुल मिलाकर, वकीलों की एकता रंग ला रही है! अब देखना ये है कि सरकार नया मसौदा लेकर कब आती है और क्या उसमें वकीलों की मांगों को शामिल किया जाता है या नहीं!

     

  • गिरिडीह जिला चैंबर ऑफ कॉमर्स की बैठक संपन्न, कई अहम फैसले लिए गए

    गिरिडीह: गिरिडीह जिला चैंबर ऑफ कॉमर्स की कार्यकारिणी सदस्यों की बैठक 21 फरवरी 2025, शुक्रवार को बरगंडा स्थित चैंबर कार्यालय में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता कर रहे निर्मल झुनझुनवाला ने जानकारी दी कि आगामी 6 मार्च 2025 को श्री श्याम सेवा समिति में चेंबर के सभी सदस्यों की आम सभा आयोजित की जाएगी। इस सभा में संगठन के भविष्य और विस्तार को लेकर विचार-विमर्श किया जाएगा।

    उन्होंने यह भी बताया कि उसी दिन एचडीएफसी बैंक, गिरिडीह शाखा द्वारा व्यापारियों और उद्यमियों के लिए नई बैंकिंग योजनाओं की जानकारी दी जाएगी। इस पहल का उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों को सरकारी और बैंकिंग योजनाओं का लाभ पहुंचाना है, जिससे उनके व्यवसाय को बढ़ावा मिल सके।

    फेडरेशन ऑफ झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष प्रदीप अग्रवाल ने बैठक में बताया कि 6 मार्च को साइबर क्राइम पर एक विशेष व्याख्यान भी आयोजित किया जाएगा। इस दौरान दिल्ली से आए साइबर विशेषज्ञ विभिन्न साइबर अपराधों के आधुनिक तरीकों और उनसे बचाव के उपायों पर प्रकाश डालेंगे। इस विषय की गंभीरता को देखते हुए, गिरिडीह जिला पुलिस उपाधीक्षक (साइबर थाना) और इंस्पेक्टर (साइबर थाना) को भी इस बैठक में आमंत्रित किया जाएगा। इसके अलावा, कुछ प्रमुख बैंकों के प्रबंधकों की उपस्थिति भी सुनिश्चित की जाएगी।

    बैठक के समापन के बाद सभी सदस्यों ने सामूहिक रूप से दोपहर भोजन का आनंद लिया। इस अवसर पर अशोक जैन, अमरजीत सिंह, गुणवंत सिंह, प्रमोद कुमार, निर्मल कुमार, प्रदीप डोकानिया, राजेंद्र बगड़िया, सुनील मोदी, राजेश अग्रवाल, विकास खेतान, सरवन केडिया सहित कई सदस्य उपस्थित रहे।

  • HC ने पारसनाथ मामले में राज्य सरकार को दिया अतिरिक्त समय, अगली सुनवाई 18 मार्च को

    पारसनाथ पहाड़ संरक्षण को लेकर झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई, राज्य सरकार को मिला समय

    झारखंड हाईकोर्ट में बुधवार को पारसनाथ पहाड़ को जैन धर्मावलंबियों की धार्मिक भावनाओं के अनुरूप संरक्षित करने से जुड़ी जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। इस दौरान राज्य सरकार ने अदालत से जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। अब इस मामले की अगली सुनवाई 18 मार्च को होगी।

    जैन संस्था ज्योत ने दायर की याचिका

    इस जनहित याचिका को जैन संस्था ज्योत की ओर से दायर किया गया है, जिसकी सुनवाई मुख्य न्यायाधीश एमएस रामचंद्र राव और जस्टिस दीपक रोशन की खंडपीठ ने की। याचिका में गिरिडीह स्थित पारसनाथ पहाड़ को लेकर गंभीर चिंता जताई गई है।

    याचिकाकर्ता का कहना है कि यह स्थल जैन समुदाय के लिए अत्यंत पवित्र है, लेकिन बीते कुछ वर्षों से यहां शराब और मांस की बिक्री हो रही है, साथ ही अतिक्रमण और पिकनिक जैसी गतिविधियां भी बढ़ी हैं। इससे धार्मिक आस्थाओं को ठेस पहुंच रही है।

    पर्यटन स्थल के रूप में विकास पर आपत्ति

    याचिका में यह भी कहा गया है कि राज्य सरकार पारसनाथ पहाड़ को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित कर रही है, जिससे जैन धर्मावलंबियों की धार्मिक भावनाओं का उल्लंघन हो रहा है।

    याचिकाकर्ताओं ने केंद्र सरकार की 5 जनवरी 2023 की अधिसूचना का हवाला देते हुए कहा कि पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने स्पष्ट किया था कि पारसनाथ पहाड़ी पर किए जाने वाले सभी कार्य जैन धर्म की धार्मिक भावनाओं के अनुरूप होने चाहिए।

    अब अदालत इस मामले की अगली सुनवाई 18 मार्च को करेगी, जिससे तय होगा कि पारसनाथ पहाड़ को किस तरह संरक्षित किया जाएगा।

  • गिरिडीह में भयंकर सड़क हादसा: स्कॉर्पियो और बाइक की टक्कर में छह लोगों की मौत

    डुमरी-गिरिडीह मार्ग पर एक भीषण सड़क हादसा हुआ, जिसमें बाइक और स्कॉर्पियो की जबरदस्त टक्कर हो गई। इस दर्दनाक दुर्घटना में छह लोगों की मौत हो गई। मृतकों में चार लोग स्कॉर्पियो में सवार थे, जबकि दो लोग बाइक पर थे। यह घटना मधुबन थाना क्षेत्र के लट्टकट्टो इलाके में घटी।

    घटनाक्रम के मुताबिक, मंगलवार की आधी रात के करीब स्कॉर्पियो और बाइक विपरीत दिशाओं से आ रही थीं। इस दौरान स्कॉर्पियो चालक लाइट की चकाचौंध से संतुलन खो बैठा, जिससे पहले उसने बाइक सवार को टक्कर मारी और फिर अनियंत्रित होकर एक पेड़ से जा भिड़ी।

    घटना की सूचना मिलते ही डुमरी एसडीपीओ सुमित कुमार ने मधुबन थाना पुलिस को मौके पर भेजा। पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद वाहनों से शवों को बाहर निकाला। एसडीपीओ सुमित कुमार ने हादसे की पुष्टि करते हुए बताया कि मृतकों में चार स्कॉर्पियो सवार और दो बाइक सवार थे। इनमें से एक शव की अब तक पहचान नहीं हो पाई है।

    मृतकों की पहचान

    पुलिस के अनुसार, स्कॉर्पियो में सवार मृतकों की पहचान मुंगेर मुफ्फसिल थाना क्षेत्र के दरियापुर निवासी 40 वर्षीय सोमेश चंद्रा (पिता रवि शंकर प्रसाद सिंह), 21 वर्षीय गोपाल कुमार (पिता नरेश प्रसाद सिंह) और गुलाब कुमार (इसरी बाजार) के रूप में हुई है, जबकि एक अन्य की पहचान नहीं हो सकी है।

    वहीं, बाइक सवार मृतकों में मधुबन थाना क्षेत्र के छछंदो निवासी 26 वर्षीय बबलू कुमार टुडू (पिता चेतलाल टुडू) और धावाटांड निवासी 55 वर्षीय हुसैनी मियां (पिता स्व. लाटो मियां) शामिल हैं।

    पुलिस मामले की जांच में जुटी है और मृतकों के परिजनों को सूचित कर दिया गया है।

  • गिरिडीह: शिवम स्टील ग्रुप के कई ठिकानों पर सेंट्रल GST की छापेमारी, जानें पूरा मामला

    सिस्कॉन टीएमटी पर जीएसटी टीम का छापा, टैक्स अनियमितताओं की जांच जारी

    शिवम स्टील ग्रुप की सरिया निर्माण इकाई सिस्कॉन टीएमटी के कई ठिकानों पर सेंट्रल जीएसटी की टीम ने बुधवार को एक साथ छापेमारी की। यह कार्रवाई डीजीजीएसटीआइ (डायरेक्टरेट जनरल ऑफ गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स इन्वेस्टिगेशन) की छह टीमों ने दोपहर 12 बजे एक साथ शुरू की।

    छापेमारी का नेतृत्व कोलकाता ईस्ट यूनिट के ज्वाइंट डायरेक्टर नितेश कुमार कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, जांच देर रात तक जारी रही और संभावना है कि गुरुवार को भी यह कार्रवाई चलेगी।

    उद्नाबाद स्थित  छड़ उत्पादन कंपनी शिवम स्टील समूह के तीन फैक्ट्रियों और शहर के दो बड़े घरों पर GST विभाग की ओर से बड़ी छापेमारी की गई है। यह कार्रवाई मंगलवार शाम करीब चार बजे शुरू हुई,

    पहले चर्चा थी कि आयकर विभाग की टीम ने रेड की है, लेकिन बाद में स्पष्ट हुआ कि यह GST विभाग की कार्रवाई है। सत्यम, शिवम, सुंदरम नामक तीनों फैक्ट्रियों और बाभनटोली स्थित दो आलीशान घरों में जांच जारी है।

    सूत्रों के मुताबिक, इस छापेमारी में पटना और झारखंड दोनों स्थानों के अधिकारी शामिल हैं। कई अधिकारियों की वर्दी पर GST बैज लगा हुआ देखा गया, जिससे पुष्टि हुई कि यह कार्रवाई GST से संबंधित है।

    शिवम स्टील समूह के मुख्य कार्यालय को किया सील

    GST अधिकारियों ने शिवम स्टील समूह की मुख्य फैक्ट्री के ऑफिस को सील कर दिया है। साथ ही, फैक्ट्री में मौजूद सभी कर्मचारियों और सुरक्षा गार्डों के मोबाइल फोन जब्त कर लिए गए हैं।

    इस कार्रवाई के दौरान CRPF के अर्धसैनिक बलों की भी तैनाती की गई है, और टीम में 50 से अधिक अधिकारी शामिल बताए जा रहे हैं। वहीं, घरों में मौजूद महिला अधिकारियों द्वारा GST चोरी से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही है।

    फिलहाल कोई भी अधिकारी इस मामले पर टिप्पणी करने से बच रहा है, वहीं शिवम स्टील समूह के मालिक विनोद अग्रवाल, प्रमोद अग्रवाल और शंभु अग्रवाल के मोबाइल भी स्विच ऑफ हैं।

    टैक्स डाटा में गड़बड़ी का शक

    सूत्रों के अनुसार, लौह उत्पाद के निर्यात से जुड़े टैक्स रिटर्न में अनियमितताएं पाई गई हैं। इसी के मद्देनजर शिवम आयरन एंड स्टील कंपनी लिमिटेड (गिरिडीह) समेत आसनसोल और पश्चिम बंगाल स्थित अन्य फैक्ट्रियों में भी टीमों ने जांच की।

    स्टॉक का सत्यापन और डिजिटल डेटा की जांच

    जीएसटी इन्वेस्टिगेशन टीम स्टॉक का सत्यापन कर रही है। इसके तहत लौह उत्पादों और कच्चे माल की गहन जांच की जा रही है। इस कार्रवाई में दो दर्जन से अधिक अधिकारी शामिल हैं।

    इसके अलावा, अधिकारियों ने कंप्यूटर और लैपटॉप जब्त कर डाटा खंगालना शुरू कर दिया है। डीजीजीएसटीआइ के सुपरिटेंडेंट देवाशीष होगी विश्वास ने पुष्टि की कि छापेमारी जारी है, लेकिन फिलहाल कोई आधिकारिक बयान देना संभव नहीं है।

  • नवडीहा प्रखंड की मांग फिर हुई बुलंद, मुख्यमंत्री को सौंपा गया ज्ञापन

     गिरिडीह में धरना – प्रदर्शन

    गिरिडीह: “अब और इंतज़ार नहीं होगा! नवडीहा को प्रखंड बनाना ही होगा!” – इसी गूंज के साथ मंगलवार को गिरिडीह झंडा मैदान में नवडीहा प्रखंड निर्माण संघर्ष समिति के बैनर तले सैकड़ों ग्रामीणों ने जोरदार धरना -प्रदर्शन किया। समिति ने एक बार फिर अपनी मांगों को लेकर सरकार के सामने आवाज बुलंद की है। समिति के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर गिरिडीह जिले के जमुआ प्रखंड के पूर्वी भाग को अलग कर नवडीहा को प्रखंड का दर्जा देने की मांग की है।

    क्या है मामला?

    गिरिडीह जिले के जमुआ प्रखंड के पूर्वी भाग को अलग कर नवडीहा को प्रखंड बनाने की मांग लंबे समय से की जा रही है। लोगों का कहना है कि नवडीहा प्रखंड बनने की सारी शर्तें पूरी करता है, फिर भी सरकार चुप क्यों है?

    क्या है मांग और क्यों जरूरी है नवडीहा प्रखंड?

    1. जनसंख्या और प्रशासनिक जरूरतें: 2011 की जनगणना के अनुसार जमुआ प्रखंड की कुल आबादी 2,11,843 है, जिसमें 42 पंचायतें शामिल हैं। प्रशासनिक सुविधा के लिए छोटे प्रखंडों का गठन आवश्यक माना जाता है।
    2. दूरी की समस्या: नवडीहा क्षेत्र के लोगों को प्रखंड मुख्यालय जाने के लिए 18-20 किमी तक का सफर तय करना पड़ता है। इससे सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे ग्रामीणों तक नहीं पहुंच पाता।
    3. बुनियादी सुविधाओं की कमी: प्रस्तावित नवडीहा प्रखंड से जुड़ने वाले कई गांवों में पक्की सड़कें तक नहीं हैं, जिससे लोगों को आवाजाही में दिक्कत होती है।
    4. विकास की संभावना: नवडीहा में सहायक थाना, उच्च विद्यालय, बैंक, स्वास्थ्य केंद्र जैसी बुनियादी सुविधाएं पहले से उपलब्ध हैं, जिससे इसे प्रखंड बनाए जाने की पूरी योग्यता है।

    📌 पहले भी बने हैं छोटे प्रखंड:

    • गढ़वा जिले का रंका प्रखंड केवल 3 पंचायतों का है!
    • चतरा जिले का कुंदा प्रखंड 5 पंचायतों को मिलाकर बना!
    • फिर नवडीहा के 7 पंचायतों और 77 गांवों को प्रखंड बनाने में इतनी देरी क्यों?

    दो दशकों से चल रहा आंदोलन.

    यह मांग कोई नई नहीं है। 8 जनवरी 2001 से ही नवडीहा प्रखंड निर्माण को लेकर संघर्ष जारी है। विभिन्न राजनीतिक दल भी इस मांग का समर्थन कर चुके हैं। 2002, 2005 और 2010 में विधानसभा में भी यह मुद्दा उठ चुका है, लेकिन अभी तक सरकार की ओर से ठोस कदम नहीं उठाया गया।

    क्या बोले नेता?

    धरने का नेतृत्व कर रहे समिति के सचिव ओमप्रकाश महतो ने कहा,
    “हम 2001 से लड़ रहे हैं! अब आर-पार की लड़ाई होगी। इस बार सरकार को झुकना ही होगा!”

    समिति की नेत्री देवंती भारती ने प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा,
    “जब लावालौंग को 8 पंचायतों में, गिद्धौर को 6 पंचायतों में और पथलगढ़ा को 5 पंचायतों में प्रखंड बना दिया गया, तो फिर नवडीहा के साथ भेदभाव क्यों?”

    पुरन किशोर तुरी ने साफ कहा,
    “अगर हमारी मांग नहीं मानी गई, तो हम उग्र आंदोलन करेंगे।”

    क्या हुआ धरने में?

    धरने के बाद एक 5 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल गिरिडीह समाहरणालय पहुंचा और मुख्यमंत्री के नाम उपायुक्त को मांग पत्र सौंपा। आंदोलन में सोहन राम, जगदीश बैठा, सरफुद्दीन अंसारी, महेंद्र सिंह, विजय कुमार, कुसुम देवी, लालमुनी तुरी समेत सैकड़ों लोग मौजूद थे।

    अब देखना होगा कि सरकार इस मांग को कब तक सुनेगी या फिर नवडीहा के लोगों को अपने अधिकार के लिए और लंबी लड़ाई लड़नी पड़ेगी।

    – संवाददाता, द न्यूज पोस्ट4यू

  • पारसनाथ पर्वत को लेकर विवाद गहराया

    गिरिडीह में पारसनाथ पर्वत को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। संथाल समाज ने अपने पारंपरिक देव स्थल, मरांग बुरु, पर कथित अतिक्रमण के खिलाफ आवाज बुलंद की है। उनका कहना है कि यह स्थान उनकी आस्था का केंद्र है, जहां वे सदियों से पूजा-अर्चना करते आ रहे हैं। लेकिन अब जैन समुदाय द्वारा इसे अपने धार्मिक स्थल के रूप में स्थापित करने की कोशिश की जा रही है, जिससे विवाद की स्थिति बन गई है।

    संथाल समाज का विरोध, राष्ट्रपति को सौंपेंगे ज्ञापन

    इस मुद्दे को लेकर संथाल समाज ने हाल ही में मरांग बुरु संस्थान गिरिडीह के बैनर तले बैठक की। इसमें विभिन्न जिलों से आए समाज के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि 7 मार्च को गिरिडीह के उपायुक्त के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा जाएगा, और 12 मार्च को जोरदार विरोध मार्च निकाला जाएगा।

    संथाल समुदाय का आरोप है कि जैन समाज मरांग बुरु देव स्थल पर कब्जा करने की कोशिश कर रहा है। यह स्थान संथाल समाज के लिए बेहद पवित्र है, जहां वे वर्षों से पूजा करते आ रहे हैं। वैशाख पूर्णिमा के अवसर पर यहां तीन दिवसीय धार्मिक आयोजन किया जाता है, जिसमें बलि भी दी जाती है। लेकिन जैन समुदाय इस बलि प्रथा का विरोध कर रहा है, जिससे संथाल समाज के लोगों में आक्रोश है।

    धार्मिक मान्यताओं को लेकर टकराव

    संथाल समाज के नेता रामलाल मुर्मू ने स्पष्ट कहा कि पारसनाथ पर्वत उनके लिए मरांग बुरु, यानी पहाड़ देवता का स्वरूप है। यह उनकी आस्था का केंद्र है और उनकी परंपराओं का हिस्सा भी। बलि प्रथा उनके धार्मिक रीति-रिवाजों में शामिल है और इसे रोकने की किसी भी कोशिश का वे पुरजोर विरोध करेंगे।

    इस विरोध प्रदर्शन की अगुवाई के लिए एक संयोजक मंडल भी बनाया गया है, जिसमें रामलाल मुर्मू, महेश मुर्मू, सुधीर बास्के, दुर्गा चरण मुर्मू, सुरेंद्र टुडू, एतो बास्के, सोनाराम मांझी, रमेश हेंब्रम, रमेश टुडू, अनिल टुडू और शंकर सोरेन जैसे प्रमुख नेता शामिल हैं।

    सरकार से हस्तक्षेप की मांग

    संथाल समाज के नेताओं का कहना है कि अब वे अपने देव स्थल की रक्षा के लिए पूरी तरह से एकजुट हो चुके हैं। उन्होंने सरकार से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है, ताकि उनके धार्मिक अधिकारों की रक्षा की जा सके।

    उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अपनी परंपराओं और संस्कृति को बचाने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। पारसनाथ पर्वत पर अपनी धार्मिक मान्यताओं की रक्षा के लिए उनका संघर्ष जारी रहेगा। अब देखना यह होगा कि सरकार इस विवाद को शांत करने के लिए क्या कदम उठाती है।

  • वृद्धा आश्रम में नेत्र और हड्डी चिकित्सा शिविर: रोटरी क्लब ऑफ गिरिडीह ग्रेटर का सराहनीय प्रयास

    गिरिडीह में चिकित्सा सेवा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल देखने को मिली, जहां हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. सरवन कुमार और नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रभात कुमार की अगुवाई में स्नेह दीप वृद्धा आश्रम में एक विशेष चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया।

    इस दौरान जिन बुजुर्गों को चश्मे की जरूरत थी, उन्हें निःशुल्क चश्मे और दवाइयां उपलब्ध कराई गईं। वहीं, हाथ, पैर और कमर दर्द से परेशान लोगों को कैल्शियम, मल्टीविटामिन और दर्द निवारक तेल दिया गया। यह संपूर्ण पहल रोटरी क्लब ऑफ गिरिडीह ग्रेटर के सहयोग से संभव हो पाई।

    कार्यक्रम को सफल बनाने में रोटरी क्लब ऑफ गिरिडीह ग्रेटर के अध्यक्ष सीए ब्रह्मदेव प्रसाद, सचिव राजेंद्र कुमार तर्वे, सहसचिव सीए आकाश रोशन, सीए प्रवीण कुमार बरनवाल, सीए राकेश कुमार, आईपीपी सीए दीपक संथालिया, पूर्व अध्यक्ष सुजय राज गुप्ता, अनूप सरोगी, प्रोजेक्ट चेयरमैन अनिल मिश्रा समेत कई गणमान्य लोगों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    विशेष रूप से, डीएनबी ऑर्थोपेडिक सर्जन और आर्थ्रोप्लास्टी विशेषज्ञ डॉ. सरवन कुमार और जाने-माने नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रभात कुमार का विशेष योगदान रहा।

    गौरतलब है कि रोटरी क्लब ऑफ गिरिडीह ग्रेटर सामाजिक कार्यों में हमेशा बढ़-चढ़कर भाग लेता रहा है, और आगे भी ऐसे कार्यों में अपना योगदान देता रहेगा। इसी कड़ी में आज यह चिकित्सा शिविर आयोजित किया गया, जिससे बुजुर्गों को निःशुल्क चिकित्सा सहायता मिल सकी।

    The News Post4U के लिए,रिपोर्ट – चंदन पांडे

  • Giridih: पुलिस अधीक्षक कार्यालय में मासिक अपराध सेमिनार आयोजित

    गिरिडीह:

    12 फरवरी 2025 को पुलिस अधीक्षक कार्यालय स्थित सभागार में मासिक अपराध सेमिनार  का आयोजन किया गया। इस बैठक में पुलिस अधीक्षक गिरिडीह ने लंबित मामलों की समीक्षा की और उनके त्वरित निष्पादन के निर्देश दिए।

    इसके साथ ही, अपराध नियंत्रण और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए नियमित एंटी-क्राइम चेकिंग के निर्देश दिए गए। महिला अपराधों की जांच को प्रभावी बनाने के लिए अनुसंधानकर्ताओं को बीएनएसएस के प्रावधानों के तहत प्रशिक्षण देने की बात कही गई।

    लंबित वारंट और कुर्की मामलों के शीघ्र निष्पादन पर जोर दिया गया। साथ ही, E-Sakshya ऐप में सात साल या उससे अधिक सजा वाले मामलों की घटनास्थल और गवाह के बयान को 24 घंटे के भीतर अपलोड करने का निर्देश दिया गया।

    सीएमपीएस के अंतर्गत गवाहों को निर्धारित तिथि पर न्यायालय में उपस्थित होकर गवाही देने के निर्देश दिए गए। इसके अलावा, IGOT Karmayogi ऐप के उपयोग की जानकारी साझा की गई।

    डायन प्रथा जैसी सामाजिक कुरीतियों को रोकने के लिए गांवों में जागरूकता अभियान चलाने और नाटकीय प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रचार-प्रसार करने का निर्देश दिया गया।

    अंत में, आगामी शब-ए-बारात पर्व के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए।