Category: Giridih

  • हर जान कीमती है, इसे बचाने की मुहिम पर कौन जुटा है,यहाँ जानिए

    गिरिडीह : ज़िले में सड़क सुरक्षा पर जोर देने के लिए प्रशासन ने कमर कस ली है। राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा जागरूकता रथ  आज उपायुक्तकी अगुवाई में समाहरणालय भवन से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। अब ये रथ ज़िले के हर कोने में जाकर लोगों को सड़क सुरक्षा का पाठ पढ़ाएगा।

    क्या है खास इस रथ में?
    यह कोई आम रथ नहीं, यह सड़क पर चलते ‘सुरक्षा की पाठशाला’ है। इसमें ट्रैफिक नियम, हेलमेट पहनने की अनिवार्यता, सीट बेल्ट का महत्व, और नशा करके गाड़ी न चलाने जैसे संदेश हर घर और हर दिल तक पहुंचाए जाएंगे। और तो और, गुड सेमेरिटन (अच्छे समरीटन्स) की योजना का भी बड़े स्तर पर प्रचार किया जाएगा। अगर आपने सड़क हादसे में किसी की मदद की, तो प्रशासन आपको ‘नायक’ मानेगा और पूछताछ से राहत भी देगा।

    उपायुक्त ने क्या कहा?
    मीडिया से बातचीत में उपायुक्त ने साफ कहा, “हमारा लक्ष्य सिर्फ नियम बनाना नहीं, बल्कि लोगों को उनकी ज़िम्मेदारी का एहसास दिलाना है। सड़क पर हादसों को रोकने के लिए लोगों को भी अपनी सोच बदलनी होगी।”

    पुलिस अधीक्षक समेत तमाम अधिकारी मौजूद
    इस मुहिम को सफल बनाने के लिए पूरा प्रशासन एकजुट दिखा। पुलिस अधीक्षक, उप विकास आयुक्त, और अन्य बड़े अधिकारी मौके पर मौजूद थे।

    जागरूकता से हादसे कम हो सकते हैं!
    तो गिरिडीह वालों, यह समय है अपनी सुरक्षा को लेकर जागरूक होने का। हेलमेट और सीट बेल्ट सिर्फ कानून की बात नहीं, आपकी ज़िंदगी का सवाल है। और ये रथ, उम्मीद करता है कि गिरिडीह में सुरक्षा का नया अध्याय लिखेगा।

  • “सर्दी का झारखंडी कहर: गिरिडीह समेत पूरा प्रदेश ठिठुर रहा, जानिए आगे क्या होगा”

    झारखंड में इस बार ठंड ने रजाई और अलाव की डिमांड बढ़ा दी है। गिरिडीह समेत प्रदेश के ज्यादातर जिलों में ठिठुरन बढ़ गई है। पिछले 24 घंटे में तापमान दो से तीन डिग्री तक गिर गया। गुमला तो ठंड के मामले में सबको पछाड़ते हुए 6.1 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया है। और गिरिडीह ? यहां भी 8 डिग्री का कांटा थर-थर कांप रहा है।

    सर्द हवा, घना कुहासा और ठिठुरते झारखंडी। 

    मौसम विभाग का कहना है कि उत्तर और पश्चिम से आने वाली सर्द हवाओं ने माहौल और ठंडा कर दिया है। सुबह-सुबह कोल्हान में घना कुहासा छाया रहा, और दृश्यता सिर्फ 1000 मीटर की रह गई। जमशेदपुर का हाल भी कुछ खास नहीं। यहां का न्यूनतम तापमान 10.4 डिग्री सेल्सियस रहा। चाईबासा का तापमान दिन में 25.4 डिग्री रहा, जो झारखंड में सबसे ज्यादा है। लेकिन फिर भी ये सामान्य से नीचे है।

    अगले तीन दिन का हाल। 

    रांची मौसम विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक अभिषेक आनंद ने साफ कहा है, “ठंड अभी कम होने वाली नहीं। अगले तीन दिन और ठिठुरने के लिए तैयार रहिए।”  गिरिडीह का न्यूनतम पारा 8-9 डिग्री के आसपास रहेगा। मतलब, रजाई छोड़ने की गलती मत करना।

    झारखंड की कनकनी और आपकी तैयारी।

    चाहे आप गुमला में हो या गिरिडीह  में, ठंड ने सबको अपनी चपेट में ले लिया है। सुबह-सुबह स्कूल जाना हो या ऑफिस, गुनगुनी चाय और स्वेटर साथ रखना ज़रूरी है।

    अब देखते हैं, तीन दिन बाद ये ठंड थोड़ी नरम पड़ती है या नहीं। तब तक, अलाव जलाइए, गर्म कपड़े पहनिए और ठंड का आनंद लीजिए। क्योंकि झारखंड की सर्दी यूं ही नहीं आती, पूरे स्वैग के साथ आती है!

  • नया साल, नई शुरुआत: गुरुद्वारे में सिख समाज का भजन-कीर्तन और लंगर आयोजन!

    गिरिडीह:  सिख समाज ने नए साल 2025 का स्वागत भक्ति और समर्पण के साथ किया। पंजाबी मुहल्ला स्थित गुरुद्वारे में रात 11 बजे से लेकर 12:30 बजे तक शब्द कीर्तन, भजन और गुरु सिमरन का आयोजन हुआ। इस अवसर पर सिख समुदाय के लोग एकजुट होकर प्रभु और गुरु को याद करते हुए सबके सुख और समृद्धि की कामना करते नजर आए।

    कार्यक्रम की खास बात यह रही कि साल के अंतिम क्षणों में, जहां एक तरफ दुनिया पार्टियों और शोर-शराबे में व्यस्त थी, वहीं सिख समाज भक्ति और साधना में डूबा हुआ था। जैसे ही घड़ी की सुई ने रात 12 बजकर एक नया दिन दिखाया, पूरे गुरुद्वारे में “वाहेगुरु” के जयकारे गूंज उठे।

    इस कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोगों के लिए लंगर का भी आयोजन किया गया, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। इस आयोजन में सिख समाज के प्रतिष्ठित सदस्यों ने भी भाग लिया, जिनमें डॉ. गुणवंत सिंह मोंगिया, सरदार नरेंद्र सिंह शमी, डॉ. अमरजीत सिंह सलूजा, चरणजीत सिंह सलूजा, भूपेंद्र सिंह दुआ, तेजेंदर सिंह  डिम्पल  और अन्य गणमान्य शामिल रहे।

    गौरतलब है कि हर साल गिरिडीह का सिख समाज इस तरह के जागरण का आयोजन करता रहा है। यह परंपरा न सिर्फ धार्मिक श्रद्धा को बढ़ावा देती है, बल्कि समाज में शांति और एकता का संदेश भी फैलाती है।

    इस बार का कार्यक्रम भी एक प्रेरणादायक संदेश के साथ खत्म हुआ— “गुरु का नाम लो और नई शुरुआत करो!”

  • गिरिडीह में नए साल का जश्न और पुलिस का परफेक्ट प्लान!

    गिरिडीह में नए साल का जश्न: पिकनिक, पहाड़, और पुलिस का परफेक्ट प्लान!

    गिरिडीह – झारखंड का वो हिस्सा जो नए साल पर सिर्फ जिले का नहीं, बल्कि बिहार, बंगाल, राजस्थान और गुजरात तक के सैलानियों के दिलों की धड़कन बन जाता है। जंगल, पहाड़ और झरनों के बीच यहां जो सुकून मिलता है, वो शायद ही कहीं और मिले।

    उसरी फॉल का जादू:
    जरा सोचिए, ऊंची-ऊंची चट्टानों के बीच से कल-कल करती पानी की धाराएं, जैसे किसी पुराने गीत की धुन पर नाच रही हों। यही है उसरी फॉल, गिरिडीह का सबसे खूबसूरत जलप्रपात। दूर से सुनाई देने वाली झरने की आवाज मानो सैलानियों को खींचकर बुला लेती है। यही वजह है कि भोजपुरी फिल्म ‘गंगाधाम’ समेत दर्जनों फिल्मों की शूटिंग यहीं हो चुकी है।

    खंडोली का दमदार डैम:
    अगर आपकी रुचि झरनों से हटकर डैम और विदेशी पक्षियों में है, तो खंडोली डैम आपका इंतजार कर रहा है। नौका विहार हो या शांत जल में पक्षियों का प्रवास देखना, खंडोली की हरियाली और पानी आपका दिल जीत लेगा।

    नया साल, नई भीड़, और पुलिस की पैनी नजर:

    अब सवाल ये है कि इतनी भीड़ संभलती कैसे है? नए साल के पहले दिन यहां पैर रखने की जगह नहीं बचती।

    • पुलिस प्रशासन ने 35 पुलिस बल और 35 स्थानीय कार्यकर्ताओं को तैनात किया है।
    • शराब पीकर हंगामा न हो, इसके लिए ब्रेथ एनालाइजर से जांच हो रही है।
    • वाहन तेज चलाने वालों पर पैनी नजर और गोताखोरों की टीम हर वक्त तैयार।
    • मेडिकल इमरजेंसी की भी पूरी व्यवस्था।

    मंत्री जी का जायजा:

    झारखंड के पर्यटन मंत्री और स्थानीय विधायक सुदिव्य कुमार सोनू खुद खंडोली और उसरी फॉल पहुंचे। साथ में गिरिडीह के एसपी डॉ. बिमल कुमार भी मौजूद थे। मंत्री जी ने मीडिया को बताया कि इस बार सुरक्षा और सुविधाओं में कोई कसर नहीं छोड़ी गई है।

    मंत्री और एसपी दोनों ने नववर्ष की शुभकामनाएं देते हुए लोगों से शांतिपूर्ण और सुरक्षित जश्न मनाने की अपील की।

    तो गिरिडीह बुला रहा है!

    नए साल की शुरुआत में अगर आपको प्रकृति के बीच, झरनों के पास, या पक्षियों की चहचहाहट में सुकून चाहिए, तो गिरिडीह आपका इंतजार कर रहा है।
    बस याद रहे – जश्न में भी सुरक्षा का ख्याल रखना जरूरी है!

  • गिरिडीह : हाई लेवल प्लानिंग से जेवर दुकान मे लाखों की चोरी

    गिरिडीह : हीरोडीह थाना क्षेत्र के कोदम्बरी इलाके में सोमवार रात चोरी की बड़ी वारदात सामने आई है। चोरों ने आरएस ज्वेलर्स और वंदना ज्वेलर्स का शटर तोड़कर लाखों का माल और नकदी उड़ा ली। 6 लाख के गहने और 85 हज़ार रुपये नकद लेकर चोरों ने आरएस ज्वेलर्स को तो साफ कर दिया, लेकिन जब वंदना ज्वेलर्स पहुंचे, तो उनका खेल और बड़ा हो गया—20-30 लाख के गहने और सामान पर हाथ साफ कर दिया।
    कैसे हुई चोरी?
    सोमवार शाम दुकानें बंद कर दुकानदार घर चले गए। मंगलवार सुबह जब दुकान पर पहुंचे, तो उनके होश उड़ गए। शटर कटे हुए थे और दुकानें खाली।
    आरएस ज्वेलर्स के मालिक सीताराम स्वर्णकार ने बताया, “सिर्फ सामान ही नहीं, चोर गिरवी रखे गहने और मरम्मत के लिए आए सामान तक उठा ले गए।”
    वहीं वंदना ज्वेलर्स के मालिक सुधीर स्वर्णकार ने कहा, “शटर इतनी ऊंचाई तक उठा दी गई थी कि कोई आराम से अंदर जा सके। दुकान का सारा कीमती सामान ले गए, CCTV तोड़ा और DVR भी चुरा लिया।”
    चोरी का तरीका—’प्लानिंग लेवल हाई!’
    चोर न सिर्फ दुकान का शटर काटने में माहिर थे, बल्कि अंदर घुसते ही सबसे पहले CCTV और DVR को ठिकाने लगा दिया। इन्वर्टर तक को नहीं छोड़ा। दुकान में गहने और नकदी सब ले उड़े।
    पुलिस ने क्या कहा?
    घटना की जानकारी मिलते ही हीरोडीह थाने की टीम हरकत में आ गई। एसडीपीओ राजेंद्र प्रसाद और पुलिस टीम ने जांच शुरू कर दी। एसपी डॉ. बिमल कुमार ने बताया, “चोरी की वारदात कितनी बड़ी है, इसकी जांच चल रही है। अपराधियों को पकड़ने के लिए एक विशेष टीम बनाई गई है। छापेमारी जारी है, और जल्द ही अपराधियों को दबोचा जाएगा।”
    चोरों के हौसले बुलंद क्यों?
    घटना थाने के पास ही हुई, फिर भी चोरों ने बेखौफ होकर वारदात को अंजाम दिया। यह पुलिस के लिए सवाल खड़े करता है।
    क्या कहती है गिरिडीह की जनता?
    दुकानदारों और इलाके के लोगों में डर का माहौल है। उनका कहना है कि अगर पुलिस जल्द चोरों को नहीं पकड़ पाई, तो यह हिम्मत और बढ़ेगी। गिरिडीह की इस बड़ी चोरी ने फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं—क्या हमारी पुलिस वाकई सतर्क है? और अगर नहीं, तो अगला शिकार कौन होगा?

  • साइबर अपराध: ठगी की कहानी जानकार आप हो जाएंगे हैरान !

    गिरिडीह:गिरिडीह पुलिस ने ठगी के खेल में माहिर चार शातिर साइबर अपराधियों को पकड़ने में बड़ी सफलता हासिल की है। मोहनपुर के जंगल में ये ठग अपने फर्जीपन के जाल में लोगों को फंसाकर उनकी मेहनत की कमाई चट कर रहे थे। लेकिन, गिरिडीह पुलिस की फुर्ती और सूझबूझ ने इनके मंसूबों पर पानी फेर दिया। गिरफ्तार ठगों में अहिल्यापुर के पंडरिया गांव का अफजल अंसारी, मो. समीम, गांडेय के घाटकुल गांव का मो. मनीर अंसारी और रयूफ अंसारी शामिल हैं। इनके पास से पुलिस ने 14 मोबाइल फोन और 20 सिम कार्ड बरामद किए हैं। साइबर डीएसपी आबिद खान ने मंगलवार को मीडिया को  इसकी जानकारी दी।

    कैसे हुआ खुलासा?
    एसपी डॉ. विमल कुमार को गुप्त सूचना मिली थी कि मोहनपुर जंगल में कुछ लोग छिपकर साइबर ठगी का खेल खेल रहे हैं। एसपी के निर्देश पर पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर छापेमारी की और इन चारों को रंगे हाथ दबोच लिया। ये अपराधी कोरियर कंपनियों की वेबसाइट पर फर्जी नंबर डालने और एयरटेल पेमेंट बैंक के फर्जी अधिकारी बनने का नाटक कर लोगों को ठगते थे।

    अफजल: साइबर ठगी का ‘महागुरु’। 
    गिरफ्तार अफजल अंसारी इस गोरखधंधे में पिछले 10 साल से सक्रिय है। कोरियर सर्विस की आड़ में उसने गूगल पर दर्जनभर फर्जी नंबर डाल रखे थे। ये नंबर जब किसी ग्राहक को कोरियर रिटर्न करने की जरूरत होती, तो उसके गिरोह के पास पहुंच जाते।

    ठगी का तरीका:

    • ग्राहक को फोन पर फर्जी डिलीवरी रिटर्न की प्रक्रिया बताई जाती।
    • उनकी गोपनीय जानकारी जैसे OTP, बैंक डिटेल्स ले ली जाती।
    • और कुछ ही सेकंड में उनके खाते से रकम गायब!

    सावधान रहें:
    डीएसपी आबिद खान ने बताया, “अगर आप कोरियर या ऑनलाइन ऑर्डर रिटर्न कर रहे हैं, तो केवल कंपनी की ऑफिशियल वेबसाइट या ऐप का ही इस्तेमाल करें। गूगल पर दिख रहे अनजान नंबरों से सतर्क रहें।”

    गिरिडीह पुलिस का बड़ा कदम।
    इस कार्रवाई ने गिरिडीह जिले में साइबर अपराध के खिलाफ पुलिस की गंभीरता को साफ कर दिया है। लेकिन सवाल यह है—क्या यह गिरफ्तारी इस संगठित अपराध के नेटवर्क को तोड़ने के लिए काफी है? तो दोस्तों आपका सतर्क रहना ही इन ठगों के खेल को खत्म कर सकता है!

  • बेटियों के लिए प्रशासन का सख्त रुख, PC & PNDT ACT पर उपायुक्त की सख्ती

    गिरिडीह जिले में PC & PNDT ACT से संबंधित एक महत्वपूर्ण बैठक उपायुक्त नमन प्रियेश लकड़ा की अध्यक्षता में सोमवार को हुई। इस बैठक में मुख्य रूप से अल्ट्रासाउंड क्लीनिक/सेंटर की स्थिति, पिछले निर्णयों का अनुपालन, नए अल्ट्रासाउंड केंद्रों के आवेदन, और लाइसेंस रिन्यूअल पर चर्चा की गई।
    उपायुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जिले में बिना लाइसेंस के संचालित हो रहे क्लीनिकों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए उन्होंने छापेमारी दल का गठन कर गहन जांच अभियान चलाने का आदेश दिया। साथ ही यह सुनिश्चित करने को कहा कि अवैध क्लीनिक बंद हों और लिंग परीक्षण पर पूरी तरह रोक लगे।
    बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान को मजबूती.
    उपायुक्त ने कहा कि गिरिडीह जिला प्रशासन “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” मुहिम के तहत लिंग अनुपात सुधारने के लिए लगातार प्रयासरत है। उन्होंने बताया कि PC & PNDT ACT, 1994 का उद्देश्य गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व लिंग चयन और लिंग आधारित गर्भपात पर पूरी तरह से रोक लगाना है। इसके तहत सभी अनुमंडल पदाधिकारियों को अपने क्षेत्र में अधिनियम के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
    सार्वजनिक जागरूकता पर जोर.
    उपायुक्त ने प्रखंड और जिला स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने की भी योजना पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि ऐसे जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से समाज में बेटियों के महत्व को रेखांकित किया जाएगा।
    विशेषज्ञों की उपस्थिति में हुआ विचार-विमर्श.
    बैठक में सिविल सर्जन, सदर अस्पताल के उपाधीक्षक, आईएमए शाखा के अध्यक्ष, और नामित नोडल पदाधिकारी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। इसके अलावा, समाजसेवी, चिकित्सक, और अधिवक्ता भी उपस्थित थे। सभी ने इस दिशा में ठोस और प्रभावी कदम उठाने के सुझाव दिए।
    लिंग अनुपात सुधारने के लिए ठोस कदम.
    इस बैठक में यह सुनिश्चित किया गया कि सभी नए अल्ट्रासाउंड केंद्रों के आवेदन उचित जांच के बाद ही स्वीकृत किए जाएंगे। साथ ही, प्रशासन ने यह भी तय किया कि अवैध गतिविधियों पर नजर रखते हुए जिला स्तर पर सख्त कदम उठाए जाएंगे।
    गिरिडीह प्रशासन का यह प्रयास लिंग अनुपात सुधारने और बेटियों को समान अवसर देने की दिशा में एक सशक्त कदम माना जा रहा है।

  • 2024 :कल्पना सोरेन की सक्रिय राजनीति में हुई धमाकेदार एंट्री हमेशा याद रखा जाएगा

    परवेज़ आलम की विश्लेषणात्मक  रिपोर्ट …………..

    झारखंड की राजनीति में वर्ष 2024 ने एक नया अध्याय लिखा। बदलाव की ऐसी बयार चली जिसने सत्ता समीकरणों को पूरी तरह से बदल दिया। लोकसभा चुनाव में बीजेपी को झटका लगा, लेकिन असली कहानी विधानसभा चुनाव के दौरान लिखी गई। इंडिया गठबंधन की ओर से कल्पना सोरेन ने मोर्चा संभाला और इतिहास रच दिया।

    हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी और कल्पना का उदय. 

    झारखंड की राजनीति में एक ऐसा मोड़ आया जब 31 जनवरी 2024 को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को ईडी ने गिरफ्तार कर लिया। उस रात की कहानी कल्पना सोरेन बार-बार बताती हैं—”सोचा था, बस पूछताछ होगी, लेकिन सुबह की पहली किरण के साथ पूरा परिदृश्य बदल चुका था।”

    हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी के बाद जेएमएम के सामने सवाल खड़ा था—कौन नेतृत्व करेगा? गठबंधन के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने कल्पना सोरेन से कहा, “भाभी, भैया नहीं हैं, अब आपको ही जिम्मेदारी उठानी होगी।”

    राजनीति में कदम रखने की दास्तान। 


    कल्पना सोरेन, जो अब तक सामाजिक कार्यों और परिवार तक सीमित थीं, अचानक राजनीति के केंद्र में आ गईं। 4 मार्च 2024 को गिरिडीह में जेएमएम के स्थापना दिवस पर उन्होंने राजनीति में प्रवेश का ऐलान किया। पहली ही रैली में उनकी आंखों से आंसू छलके, लेकिन हाथ में झंडा थामे उन्होंने पार्टी को भरोसा दिलाया—“हम लड़ेगें और जीतेंगे।”

    लोकसभा चुनाव: कल्पना का असर। 

    हेमंत सोरेन की गैरमौजूदगी में कल्पना सोरेन ने इंडिया गठबंधन की कमान संभाली। धुर्वा के प्रभात तारा मैदान में उनकी रैली ने यह साफ कर दिया कि झारखंड की जनता उनके साथ है। नतीजों में इंडिया गठबंधन ने 14 में से 4 सीटें जीतीं। ये प्रदर्शन 2019 के मुकाबले दोगुना था और इसका श्रेय कल्पना की मेहनत को गया।

    गांडेय उपचुनाव: पहली जीत और बढ़ता प्रभाव। 

    लोकसभा चुनाव के साथ हुए गांडेय विधानसभा उपचुनाव में कल्पना सोरेन ने बाजी मारी। 4 जून 2024 को आए नतीजों में उन्होंने बीजेपी के दिलीप वर्मा को 27,149 वोटों से हराया। ये जीत न सिर्फ एक चुनावी आंकड़ा थी, बल्कि झारखंड में उनकी बढ़ती सियासी ताकत का सबूत भी थी।

    विधानसभा चुनाव: मैदान पर कल्पना और हेमंत की जोड़ी। 

    झारखंड विधानसभा चुनाव में हेमंत सोरेन की रिहाई के बावजूद कल्पना सोरेन गठबंधन की स्टार प्रचारक बनीं रहीं। उन्होंने 100 से अधिक सभाएं कीं और हर सभा में जनता से सीधा संवाद किया। उनकी नेतृत्व क्षमता और भावुकता ने जनता को अपने साथ जोड़ लिया।

    झारखंड की “नई शक्ति”

    कल्पना सोरेन के सियासी सफर की शुरुआत भले ही अप्रत्याशित परिस्थितियों में हुई हो, लेकिन उन्होंने साबित कर दिया कि झारखंड में बदलाव की बागडोर अब उनके हाथ में है।

    2006 से 2024 तक: कल्पना का सफर।

    ओडिशा के मयूरभंज की रहने वाली कल्पना, झारखंड के सबसे बड़े राजनीतिक परिवार की बहू बनकर आईं थीं। एक आम महिला से एक सशक्त नेता तक का उनका सफर, झारखंड की जनता के लिए प्रेरणा है।

    तो सवाल यह है कि क्या झारखंड में यह नई नारी शक्ति राज्य को एक नई दिशा दे पाएगी? जवाब वक्त देगा, लेकिन एक बात तय है—कल्पना सोरेन की कहानी झारखंड की राजनीति का वह मोड़ है, जो शायद हमेशा याद रखा जाएगा।

  • झारखंड: 1000 से ज्यादा NGOs पर लटक रही मान्यता रद्द होने की तलवार!

    GIRIDIH:झारखंड में निबंधन नियमावली का पालन न करने पर 1000 से अधिक संस्थाओं का पंजीकरण सस्पेंड कर दिया है। इन संस्थाओं को नोटिस जारी कर पूछा गया है—“क्यों न आपकी मान्यता समाप्त कर दी जाए?”

    यह कदम इसलिए उठाया गया है क्योंकि सरकार को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कई संस्थाएं कागजों पर चल रही हैं, वार्षिक रिपोर्ट जमा नहीं कर रहीं, पते बदलने जैसी जानकारियां सरकार से छिपा रही हैं। झारखंड के राजस्व, निबंधन और भूमि सुधार विभाग ने इन आरोपों के आधार पर कड़ा कदम उठाया है।

    नोटिस का जवाब नहीं दिया तो खत्म होगी मान्यता. 
    सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए इन संस्थाओं की गतिविधियों पर रोक लगा दी है। सस्पेंड रजिस्ट्रेशन के दौरान ये संस्थाएं कोई भी चल-अचल संपत्ति ट्रांसफर नहीं कर सकेंगी। उन्हें 31 दिसंबर 2024 तक अंतिम मौका दिया गया है कि वे अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करें। ऐसा न करने पर एकतरफा कार्रवाई करते हुए उनकी मान्यता रद्द कर दी जाएगी।

    नियम तोड़ने के आरोप, दस्तावेजों में गड़बड़ी. 
    सरकार की समीक्षा में यह सामने आया कि कई संस्थाएं नियमों का पालन नहीं कर रही थीं। इनमें से कई संस्थाएं ऐसी हैं, जिन्होंने रजिस्ट्रेशन के बाद से कभी भी वार्षिक रिपोर्ट नहीं सौंपी। कुछ ने नियमों का उल्लंघन करते हुए अनुदान प्राप्त किया। सोसायटी रजिस्ट्रेशन एक्ट 1860 के तहत निबंधित इन संस्थाओं में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं मिली हैं।

    सवाल उठते हैं, जवाब नहीं मिलते. 
    क्या ये संस्थाएं वाकई समाज सेवा के लिए थीं या सिर्फ कागजी दांवपेंच के सहारे सरकारी संसाधनों का दोहन कर रही थीं? और अगर सरकार को इतने वर्षों तक इनकी गतिविधियों की जानकारी नहीं थी, तो क्या यह सरकारी तंत्र की विफलता नहीं है?

    संस्थाओं का अस्तित्व और विश्वास का सवाल. 
    अब सवाल सिर्फ 1000 संस्थाओं की मान्यता का नहीं है। सवाल झारखंड में NGO के अस्तित्व और उनके प्रति जनता के विश्वास का है। क्या ये संस्थाएं अपनी पारदर्शिता साबित कर पाएंगी? या यह अध्याय झारखंड में स्वयंसेवी संस्थाओं की नई परिभाषा गढ़ने का आगाज होगा? सरकार की इस कार्रवाई ने झारखंड के NGO क्षेत्र में भूचाल ला दिया है। 31 दिसंबर 2024 की समयसीमा न सिर्फ इन संस्थाओं के भविष्य का फैसला करेगी, बल्कि यह भी तय करेगी कि झारखंड में सामाजिक कार्यों की साख कितनी मजबूत है।

  • विधायक जयराम महतो और उनके समर्थकों पर मुकदमा

    झारखंड के डुमरी  के विधायक जयराम महतो और उनके समर्थकों पर सीसीएल के क्वार्टर पर कब्जा करने, सरकारी काम में बाधा डालने और क्वार्टर में रखें सामान की चोरी करने के आरोप लगे हुए हैं. बोकारो जिले के चंद्रपुरा थाने में सीसीएल के ढोरी क्षेत्र, फुसरो (बोकारो) में सुरक्षा पदाधिकारी सुरेश कुमार सिंह ने विधायक जयराम महतो और उनके समर्थकों पर केस दर्ज करवाया है. पुलिस ने बताया कि डी /02 सेंट्रल कॉलोनी, ढोरी, मकोली के एक क्वार्टर पर जेएलकेएम पार्टी के विधायक जयराम महतो के समर्थकों ने कब्जा कर लिया था. इतना ही नहीं विधायक के समर्थकों ने कथित तौर पर वहां रह रहे प्रशिक्षु पदाधिकारियों को  जबरन भागया और उनका सामान हटा दिया. इधर जैसे ही मामले की सूचना सुरक्षा पदाधिकारी को मिली तो वह मौके पर पहुंचे. जेएलकेएम पार्टी के 20 से 25 अज्ञात कार्यकर्ता हंगामा कर रहे थे और बार-बार कह रहे थे कि डुमरी के विधायक जयराम महतो के निर्देश पर वे लोग यहां क्वार्टर पर कब्जा करने आए हैं.

    सीसीएल के क्वार्टर के अंदर जबरन प्रवेश कर चुके जेएलकेएम पार्टी के कार्यकर्ताओं को सुरक्षाकर्मी निकल रहे थे. मामला बिगड़ता देख वहां चंद्रपुरा थाना प्रभारी अमन कुमार पुलिस बल के साथ पहुंचे और उपद्रव मचा रहे युवकों को शांत कराने की कोशिश की. हालांकि उपद्रवी लड़के कुछ भी सुनने को तैयार नहीं थे. इसके बाद प्रखंड कार्यालय बेरमो से प्रशासनिक अमला पहुंचा और उपद्रवियों को बाहर निकालने का निर्देश दिया.

    देर रात डुमरी के जयराम महतो भी मौके पर पहुंचे और प्रशासन को सहयोग करने के बजाय उपद्रवी लड़कों का सहयोग करते हुए पुलिस पदाधिकारियों भिड़ने लगे. सीसीएल ढोरी क्षेत्र के सुरक्षा पदाधिकारी सुरेश कुमार सिंह ने हंगामे के बाद विधायक जयराम महतो और उनके करीब 30-40 समर्थकों के खिलाफ क्वार्टर में जबरन घुसने, वहां रह रहे प्रशिक्षुओं का सामान गायब करने, सरकारी काम में बाधा डालने, उपस्थित मजिस्ट्रेट, पुलिस कर्मी, सीसीएल कर्मी और सीआईएसएफ कर्मी के साथ गाली-गलौज करने सहित कई आरोप लगाते हुए चंद्रपुरा थाना में शिकायत दी है.