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  • दिल्ली रवाना हुए सीएम हेमंत सोरेन, गंगा राम अस्पताल में भर्ती पिता शिबू सोरेन से मिलेंगे

    By The News Poat4

    झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन मंगलवार को अचानक दिल्ली के लिए रवाना हुए। उनके दिल्ली दौरे की वजह उनके पिता और झारखंड आंदोलन के प्रणेता, राज्यसभा सांसद शिबू सोरेन की तबीयत है। फिलहाल शिबू सोरेन दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में भर्ती हैं। बताया जा रहा है कि उन्हें रूटीन चेकअप के लिए अस्पताल में भर्ती किया गया है, लेकिन परिजन और पार्टी की ओर से अभी तक स्वास्थ्य को लेकर कोई विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई है।

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपने पिता का हाल जानने के लिए दिल्ली पहुंचे हैं। इससे पहले दो दिन पहले ही उनकी पत्नी और गांडेय से विधायक कल्पना सोरेन भी दिल्ली पहुंची थीं। लगातार दिल्ली से हो रही हलचलों के बीच यह साफ है कि सोरेन परिवार शिबू सोरेन के स्वास्थ्य को लेकर सजग है, लेकिन अभी तक किसी भी स्तर पर यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि उनकी तबीयत कितनी गंभीर है।

    सूत्रों की मानें तो शिबू सोरेन को कुछ दिन पहले ही स्वास्थ्य जांच के लिए दिल्ली लाया गया था। उम्रजनित बीमारियों और नियमित स्वास्थ्य परीक्षण के चलते उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया है। हालांकि, अब तक मुख्यमंत्री कार्यालय या पार्टी की ओर से कोई अधिकारिक मेडिकल बुलेटिन जारी नहीं किया गया है।

  • झारखंड भाजपा में नेतृत्व की हलचल: रघुवर दास और बाबूलाल मरांडी की मुलाकात से सियासी सरगर्मी तेज

    अमित शाह का झारखंड दौरा: क्या तय होगी नई रणनीति?

    परवेज़ आलम.  for The News Post4U.  

    झारखंड की सियासत में एक बार फिर हलचल है। रविवार को दुमका में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी की मुलाकात पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास से हुई। पहली नज़र में यह मुलाकात सामान्य प्रतीत हो सकती है, क्योंकि दोनों नेता दुमका परिसदन में ठहरे हुए थे। लेकिन पार्टी के भीतरखाने में इसे एक राजनीतिक ‘प्रयोग’ माना जा रहा है — एक ऐसी पहल, जो आने वाले महीनों में भाजपा की रणनीति और नेतृत्व को नई दिशा दे सकती है।

    शाह से मुलाकात और रघुवर की सक्रियता: कोई संयोग नहीं ?

    बताया जा रहा है कि एक सप्ताह पहले जब बाबूलाल मरांडी दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मिले थे, उसी दिन रघुवर दास ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर झारखंड में आदिवासी परंपराओं को सम्मान देने के लिए पेसा कानून लागू करने की मांग कर डाली। रघुवर की इस पहल को राजनीतिक गलियारों में ‘सक्रिय वापसी’ के रूप में देखा जा रहा है।

    कांग्रेस ने भी पेसा के मुद्दे पर चर्चा शुरू कर दी है, जिससे साफ है कि इस मुद्दे पर राजनीतिक ध्रुवीकरण तेज हो सकता है। सूत्रों के अनुसार, अमित शाह ने बाबूलाल मरांडी को निर्देश दिया है कि वे रघुवर दास की सक्रियता को संगठन से जोड़ें।

    नेतृत्व संकट और संगठन की जरूरत.

    2024 के लोकसभा चुनाव में हार और प्रमुख नेताओं की पराजय के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं के सामने नेतृत्व का संकट है। बाबूलाल मरांडी, अर्जुन मुंडा और चंपाई सोरेन जैसे नेता सौम्य और शांत राजनीति के लिए जाने जाते हैं। लेकिन वर्तमान हालात में पार्टी को एक ऐसा चेहरा चाहिए जो आक्रामक तेवर के साथ पार्टी की बात जनता तक पहुंचा सके — और यही भूमिका रघुवर दास निभा सकते हैं।

    अमित शाह का झारखंड दौरा: क्या तय होगी नई रणनीति?

    केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह 10 जुलाई को रांची आने वाले हैं। वे पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में हिस्सा लेंगे और झारखंड भाजपा के नेताओं से मिलकर पार्टी की झारखंड मे  रणनीति पर चर्चा करेंगे। इस दौरान पार्टी की आदिवासी, ओबीसी और सामान्य वर्गों के बीच आउटरीच कार्यक्रम का ब्लूप्रिंट भी पेश किया जाएगा।

    इसी समय के आसपास झारखंड भाजपा को नया प्रदेश अध्यक्ष भी मिलने की संभावना है। ऐसे में रघुवर दास की बढ़ती सक्रियता और बाबूलाल मरांडी की रणनीतिक भूमिका को लेकर शाह का नजरिया महत्वपूर्ण होगा।

    अध्यक्ष पद की रेस: कौन किससे आगे?

    भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए कई नाम चर्चा में हैं। इनमें सबसे प्रमुख नाम हैं:

    • रघुवर दास – पूर्व मुख्यमंत्री, वे ओडिशा के राज्यपाल पद से इस्तीफा देकर सक्रिये राजनीति मे लौटे हैं और लगातार झारखंड के जिलों का दौरा कर रहे हैं। पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें और जनता से संवाद कर रहे हैं। शिकायतों पर अफसरों को फोन करना और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो उनकी सक्रियता को दिखा रहे हैं।
    • अर्जुन मुंडा – पूर्व केंद्रीय मंत्री और अनुभवी आदिवासी नेता। लेकिन खूंटी से चुनाव हारने के बाद वे फिलहाल जमशेदपुर स्थित अपने आवास में सीमित राजनीतिक गतिविधियों तक सीमित हैं।
    • चंपाई सोरेन – पूर्व मुख्यमंत्री, जो अब भाजपा में हैं और लगातार कोल्हान व संताल परगना में दौरे कर रहे हैं। संगठन में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में लगे हैं।
    • ओबीसी और सामान्य वर्ग के नेता – इस सूची में राज्यसभा सांसद आदित्य साहू, पूर्व मंत्री अमर बाउरी और पूर्व सांसद रविंद्र राय के नाम प्रमुख हैं।

     भाजपा की रणनीति किस मोड़ पर ?

    रघुवर दास और बाबूलाल मरांडी की दुमका में मुलाकात कोई सामान्य शिष्टाचार नहीं       थी, बल्कि भाजपा के आने वाले फैसलों की बुनियाद मानी जा रही है। अमित शाह के दौरे से पहले पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर चर्चा तेज हो गई है और यह देखना दिलचस्प   होगा कि भाजपा झारखंड में नेतृत्व के लिए किसे चुनती है — अनुभव, सामाजिक समीकरण या सक्रियता को प्राथमिकता दी जाएगी?

     

  • डिजिटल ठगों का नया अड्डा बना झारखंड: बिना हथकड़ी, बिना वर्दी हो रहा ‘डिजिटल अरेस्ट’

    परवेज़ आलम  for The News Post4U.

    झारखंड, जो कभी कोयले की खदानों और जंगलों के लिए पहचाना जाता था, अब एक नई पहचान के साथ सामने आ रहा है—भारत का नया साइबर क्राइम हब। यहां अब न तो खदानें चर्चा में हैं और न ही जंगल, बल्कि अब बात हो रही है उस डर की जो एक कॉल से शुरू होता है और एक करोड़ की ठगी तक पहुंच जाता है।

    जब फोन बन जाए गिरफ्तारी का वारंट.

    सोचिए, एक दिन अचानक आपके फोन पर कॉल आता है—
    “हम दिल्ली क्राइम ब्रांच से बोल रहे हैं, आपके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज हुआ है। ईडी और सीबीआई आपको ट्रैक कर रही हैं। गिरफ़्तारी कभी भी हो सकती है।”

    और फिर वीडियो कॉल पर एक फर्जी गिरफ्तारी वारंट दिखाया जाता है जिसमें आपका नाम लिखा होता है। आप डर जाते हैं, घबरा जाते हैं। और यहीं से शुरू होता है डिजिटल अरेस्ट—आपसे कहा जाता है कि अगर आप निर्दोष हैं तो “सहयोग” करिए और अपने बैंक अकाउंट से पैसे ट्रांसफर करिए ताकि वेरिफिकेशन हो सके। डर के मारे लोग अपनी मेहनत की कमाई खुद ठगों को ट्रांसफर कर देते हैं।

    झारखंड पुलिस के साइबर सेल ने ऐसे ही एक मामले में 14 मई 2025को केस दर्ज किया। जांच के दौरान पता चला कि गिरोह ने व्हाट्सएप कॉल के जरिए लोगों को ईडी का अधिकारी बनकर धमकाया और ₹1.39 करोड़ की ठगी कर ली।

    साइबर गिरोह का जाल—हिमाचल से तमिलनाडु तक.

    जांच में खुलासा हुआ कि इस गिरोह ने महिला समाज कल्याण समिति के नाम से फर्जी खाता YES बैंक में खुलवाया था, जिसमें चार दिनों में ₹3.10 करोड़ से अधिक ट्रांसफर हुआ। ये रकम देशभर के ठगे गए पीड़ितों की थी।

    अब तक 27 अलग-अलग राज्यों से शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं—हरियाणा, केरल, दिल्ली, असम, जम्मू-कश्मीर, कर्नाटक, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, तेलंगाना, और खुद झारखंड।
    यह नेटवर्क इतना संगठित है कि देश के हर कोने में इसका असर दिखने लगा है।

    कई राज्यों में हुई गिरफ्तारियां.

    इस केस में झारखंड पुलिस ने तीन ठगों को गिरफ्तार किया है:

    • सुभाष शर्मा — हिमाचल प्रदेश से पकड़ा गया मुख्य आरोपी
    • बी. इशाक अहमद — तेलंगाना से
    • लालडूसंगा — मिजोरम से

    इनके पास से मोबाइल, सिम कार्ड, एटीएम और आधार कार्ड बरामद किए गए। लेकिन ठगी के इस खेल में यह केवल कुछ मोहरे हैं।

    झारखंड: साइबर क्राइम का नया ‘डिजिटल गुरुकुल’

    देवघर, दुमका, जामताड़ा, गिरिडीह और बोकारो अब सिर्फ जिले नहीं, साइबर ठगी के ब्रांड बन गए हैं। इन इलाकों के कुछ युवाओं ने बिना किसी औपचारिक शिक्षा के ‘डिजिटल बैंकिंग’ में ऐसी महारत हासिल की है, जो बड़े-बड़े इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्र भी नहीं कर पाते।

    इन गांवों में न सड़कें हैं, न रोजगार, लेकिन लैपटॉप, इंटरनेट और मोबाइल फोन ने यहां के लड़कों को ‘फ्रॉडवेयर इंजीनियर’ बना दिया है। ये ठग इतनी सफाई से कॉल करते हैं—“सर, मैं बैंक से बोल रही हूं, आपका केवाईसी अपडेट करना है”—कि सुनने वाला झांसे में आ ही जाता है।

    सरकारी सिस्टम की चुनौती.

    सरकार 1930 हेल्पलाइन नंबर का प्रचार कर रही है। आईफोरसी (Indian Cyber Force Coordination App) जैसे ऐप बनाए गए हैं, जो साइबर अपराधियों को ट्रैक करने में मदद करते हैं। पर फिर भी, झारखंड के इन ‘डिजिटल अपराधियों‘ के खिलाफ जंग आसान नहीं है। हर गिरफ्तारी के साथ नए नाम उभरते हैं, नए तरीके आते हैं, और लोगों की मेहनत की कमाई फिर उड़ जाती है।

    फिर भी सवाल वही है…

    • क्या ये साइबर ठगी कभी रुकेगी?
    • क्या सरकार सिर्फ “डिजिटल इंडिया” का सपना दिखाएगी या इसके काले पक्ष से भी लड़ेगी?
    • क्या युवाओं की तकनीकी दक्षता को सही दिशा नहीं दी जा सकती?

    एक विचार कीजिए—अगर इन्हीं युवाओं को सही दिशा और रोजगार दिया जाए, तो झारखंड न केवल खनिजों का प्रदेश होगा, बल्कि भारत का डिजिटल टैलेंट हब भी बन सकता है।

    और जब अगली बार कोई कहे…

    “मैं बैंक से बोल रहा हूं…”
    तो मुस्कराकर कहिए—
    “तो मैं भी झारखंड से बोल रहा हूं!”

     

  • मानहानि की जंग में सियासी तकरार: लालू यादव के साले साधु यादव ने भेजा ₹5 करोड़ का कानूनी नोटिस

    ‘Broken Promises’ किताब बनी विवाद की जड़

    परवेज़ आलम for The News Post4u.

    राजनीति और लेखनी के टकराव में अब कानूनी लड़ाई की आहट सुनाई देने लगी है। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के साले और चर्चित राजनीतिक शख्सियत अनिरुद्ध प्रसाद उर्फ साधु यादव ने झारखंड भाजपा के चुनाव प्रबंधन प्रमुख मृत्युंजय शर्मा को ₹5 करोड़ का मानहानि नोटिस भेजा है। यह नोटिस शर्मा द्वारा लिखी गई किताब ‘Broken Promises: Caste, Crime and Politics in Bihar’ और हाल ही में एक पॉडकास्ट में दिए गए बयान के संबंध में भेजा गया है।

    क्या है विवाद?

    20 जून 2024 को एक पॉडकास्ट में मृत्युंजय शर्मा ने साधु यादव से जुड़ी कुछ घटनाओं का जिक्र किया था, जिन्हें साधु यादव ने “गंभीर, आधारहीन और उनकी छवि को धूमिल करने वाला” बताया है। नोटिस में तीन प्रमुख आरोपों को गलत, बेबुनियाद और अपमानजनक बताते हुए माफी की मांग की गई है।

    ये हैं वे तीन विवादित आरोप:

    1. गौतम-शिल्पी हत्याकांड में साधु यादव की कथित संलिप्तता, जबकि उनका कहना है कि इस मामले में CBI और न्यायालय दोनों ने उन्हें क्लीन चिट दी है।
    2. छात्र नेता चंद्रशेखर की हत्या के विरोध में JNU छात्रों द्वारा दिल्ली स्थित बिहार भवन पर किए गए प्रदर्शन के दौरान, गोली चलवाने का आदेश देने का आरोप। साधु यादव ने इसे भी  पूरी तरह मनगढ़ंत बताया है।
    3. रोहिणी आचार्य की शादी के समय एक शो-रूम से कार, गहने और फर्नीचर जबरन उठवाने का दावा, जिसे भी वे झूठा और अपमानजनक करार देते हैं।

    साधु यादव की मांगें.

    मानहानि नोटिस के तहत साधु यादव ने मृत्युंजय शर्मा से बिना शर्त माफी मांगने की बात कही है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि ऐसा नहीं किया गया तो वे कानूनी कार्रवाई के लिए बाध्य होंगे।

     

    मृत्युंजय शर्मा का पलटवार.

    इधर, मृत्युंजय शर्मा ने किसी भी प्रकार की माफी मांगने से साफ इनकार करते हुए कहा,

    “जो किताब मैंने लिखी है, वह तथ्यात्मक शोध और ऐतिहासिक दस्तावेजों पर आधारित है। साधु यादव जैसे व्यक्ति किस ‘प्रतिष्ठा‘ की बात कर रहे हैं, यह पूरा बिहार जानता है।” मृत्युंजय शर्मा का कहना है कि लालू यादव के साले साधु यादव ने जिन तीन मामलों का जिक्र कर मानहानि का नोटिस भेजा है, उससे हर बिहारी वाकिफ है. इनके पास कौन सी प्रतिष्ठा है जिसको ठेस पहुंची है. यही तो वह संस्कृति है- गुंडागर्दी, डर और परिवारवाद की, जिसने लालू यादव के राज में बिहार को बर्बाद किया था और अब सच बोलने वालों को डराने के लिए कानूनी नोटिस भेजा जा रहा है.

    शर्मा का यह भी आरोप है कि साधु यादव ने उन्हें फोन कर दबाव डालने की कोशिश की थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि “यदि मुझे या मेरे परिवार को कोई नुकसान पहुंचता है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी साधु यादव की होगी।”

    किताब, चुनाव और राजनीति.

    11 मार्च 2024 को प्रकाशित हुई यह पुस्तक उस समय सामने आई थी जब देश में लोकसभा चुनावों का माहौल गर्म था। अब जबकि बिहार विधानसभा चुनाव नजदीक हैं, साधु यादव द्वारा भेजा गया यह नोटिस राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर रहा है।

    मृत्युंजय शर्मा का दावा है कि वे सच के पक्ष में खड़े हैं और उनके लेखन का उद्देश्य बिहार की जातीय राजनीति, अपराध और सत्ता के समीकरणों को उजागर करना है। उन्होंने कहा,

    “डराने, धमकाने और मानहानि के नोटिस भेजने से सच्चाई नहीं रुकती।”

    कौन हैं मृत्युंजय शर्मा ?

    • झारखंड भाजपा के इलेक्शन मैनेजमेंट प्रमुख हैं।
    • बीआईटी मेसरा और एक्सएलआरआई, जमशेदपुर से पढ़ाई की है।
    • पूर्व में एशियन पेंट्स में काम कर चुके हैं और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के साथ भाजपा संगठन में कार्यरत रहे हैं।
    • ‘Broken Promises’ किताब के ज़रिए उन्होंने बिहार की राजनीति की कथित काली परतों को सामने लाने की कोशिश की है।

    यह मामला केवल एक मानहानि नोटिस का नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रतिष्ठा, इतिहास के पुनर्पाठ और सियासी समीकरणों के टकराव का प्रतीक बन चुका है। अब देखना यह है कि यह विवाद अदालत की चौखट तक पहुंचता है या सियासत की गलियों में और गहराता है।

     

  • गिरिडीह :रिश्वतखोरी का पर्दाफाश, निदेशक अभिषेक कमल 20 हजार की रिश्वत लेते गिरफ्तार

    By The News Post4u

    गिरिडीह: जिले के कल्याणडीह स्थित ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरएसईटीआई) में भ्रष्टाचार का एक गंभीर मामला सामने आया है। संस्थान के निदेशक और बैंक ऑफ इंडिया के सीनियर मैनेजर अभिषेक कमल को सीबीआई की धनबाद टीम ने 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई शुक्रवार को की गई, जिसकी पुष्टि सीबीआई एसपी पी.के. झा ने की है।

    जानकारी के मुताबिक, संस्थान परिसर में कैंटीन संचालित हो रही थी। उसी कैंटीन संचालक से अभिषेक कमल द्वारा नियमित संचालन के एवज में रिश्वत की मांग की जा रही थी। परेशान होकर संचालक ने धनबाद स्थित सीबीआई कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर सीबीआई की टीम ने मामले की गोपनीय जांच की, जिसमें घूसखोरी की पुष्टि हुई।

    जांच पूरी होने के बाद सीबीआई ने शुक्रवार को कल्याणडीह स्थित आरएसईटीआई कार्यालय पर छापा मारा। इस दौरान कैंटीन संचालक द्वारा जैसे ही तयशुदा 20 हजार रुपये की राशि निदेशक को सौंपी गई, टीम ने मौके पर ही अभिषेक कमल को पकड़ लिया। उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ की गई, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

    सीबीआई अधिकारियों के अनुसार, अभिषेक कमल हजारीबाग जिले के निवासी हैं। चूंकि हजारीबाग रांची के करीब है, इसलिए आगे की छानबीन रांची सीबीआई की टीम कर रही है। अभिषेक के निवास स्थान पर भी तलाशी अभियान चलाया जा रहा है।

    गौरतलब है कि आरएसईटीआई केंद्र सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय और राज्य सरकार द्वारा संयुक्त रूप से संचालित किया जाता है। इस संस्थान का उद्देश्य ग्रामीण युवाओं को स्वरोजगार और कौशल विकास का प्रशिक्षण देना है, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें। इस संस्थान का प्रबंधन संबंधित क्षेत्रीय बैंक ऑफ इंडिया के जिम्मे होता है।

    इस घूसकांड ने सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि आगे की जांच में और कौन-कौन इस मामले में शामिल पाए जाते हैं।

     

  • झारखंड निकाय चुनाव की सुगबुगाहट तेज़, कांग्रेस और राजद चुनाव मे उतरने को बेताब  

    झामुमो को है सरकार की रणनीति का इंतजार.

    By The News post4u | परवेज़ आलम.

    झारखंड में नगर निकाय चुनाव की तारीखों का ऐलान भले ही नहीं हुआ हो, पर सियासी दलों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) जैसे इंडिया गठबंधन के प्रमुख घटक दलों ने जहां चुनाव को लेकर रणनीति बनानी शुरू कर दी है, वहीं झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) फिलहाल सरकार की ओर से आधिकारिक रुख का इंतजार कर रहा है।

    48 नगर निकाय, चुनाव की तैयारी में जुटे दल.

    राज्य में 48 शहरी निकाय हैं, जिनमें नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत शामिल हैं। आने वाले महीनों में इन क्षेत्रों में नई नगर सरकारों के गठन की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है। ऐसे में राजनीतिक दल अपनी संगठनात्मक मजबूती और जनाधार को बढ़ाने की दिशा में जुट गए हैं।

    राजद: हर जिले में एक्टिव मोड में.

    राष्ट्रीय जनता दल के प्रदेश अध्यक्ष संजय सिंह यादव ने सभी जिलों के पार्टी पदाधिकारियों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि वे स्थानीय स्तर पर निकाय चुनाव की तैयारी युद्ध स्तर पर शुरू करें। उनका मानना है कि यदि पार्टी चुनाव नहीं लड़ती है, तो उसका जनाधार कम हो जाता है और समर्थक इधर-उधर बिखर जाते हैं।

    संजय यादव ने साफ कर दिया है कि राजद निकाय चुनाव को संगठन विस्तार का एक मौका मानती है और इस बार वह पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरेगी।

    कांग्रेस: सभी 49 शहरी निकायों में उतरेगी मैदान में.

    कांग्रेस पार्टी ने भी चुनाव को लेकर बेहद गंभीरता दिखाई है। पार्टी ने रांची नगर निगम क्षेत्र को मॉडल मानते हुए पूरे राज्य के लिए चुनावी रणनीति बनाई है। कांग्रेस का कहना है कि चाहे चुनाव दलीय आधार पर हो या गैर-दलीय, वह अपने कार्यकर्ताओं के माध्यम से जनता के बीच जाएगी और अधिक से अधिक सीटें जीतने का प्रयास करेगी।

    हाल ही मे रांची के कार्निवल हॉल में “चुनौती: संगठन, संपर्क और संघर्ष” नाम से एक व्यापक संगठनात्मक सम्मेलन आयोजित किया गया था, जिसमें प्रदेश प्रभारी के. राजू, प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश, कार्यकारी अध्यक्ष बंधु तिर्की, पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय, पूर्व मेयर रमा खलखो और अन्य वरिष्ठ नेता शामिल हुए थे ।

    कांग्रेस की महत्वपूर्ण घोषणाएं.

    • हर वार्ड के लिए कांग्रेस अपना अलग मेनिफेस्टो  जारी करेगी।
    • प्रत्येक मोहल्ले में 21 समर्पित कार्यकर्ताओं की कमेटी बनाई जाएगी।
    • कार्यकर्ताओं को भाजपा के “संवैधानिक हनन” के खिलाफ लोगों को जागरूक करने को कहा गया।

    प्रदेश प्रभारी के. राजू ने स्पष्ट किया है  कि कांग्रेस इन चुनावों के जरिए यह संदेश देना चाहती है कि शहरी भारत में भी उसकी नीतियों को समर्थन मिल रहा है। वहीं राजेश कच्छप ने कहा कि अगर पार्टी के भीतर “स्लीपर सेल” जैसे गुप्त तत्व न हों, तो कांग्रेस मेयर और डिप्टी मेयर के पद पर आसानी से कब्जा जमा सकती है।

    झामुमो को अभी सरकार की रणनीति का इंतजार.

    वहीं झामुमो की ओर से फिलहाल चुनावी घोषणाओं और तैयारियों पर संयम बरता जा रहा है। पार्टी के केंद्रीय प्रवक्ता मनोज पांडेय ने कहा कि नगर निकाय चुनावों के स्वरूप को लेकर सरकार के स्पष्ट रुख का इंतजार किया जा रहा है।

    यदि चुनाव दलीय  आधार पर होते हैं तो पार्टी की रणनीति अलग होगी, और अगर गैर-दलीय  ढांचे में होते हैं तो पूरी रणनीति बदल दी जाएगी।

    पांडेय ने कांग्रेस और राजद की तैयारियों को लेकर कहा, “चुनाव के लिए शोर मचाना अब पुरानी राजनीति हो गई है। जो लोग मानते थे कि झामुमो का शहरी इलाकों में कोई आधार नहीं है, वे अब हकीकत देख रहे हैं।” उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की नीतियों और विकास कार्यों ने झारखंड के शहरी मतदाताओं के बीच पार्टी की छवि को मजबूत किया है।

    उन्होंने पिछली रांची मेयर चुनाव का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि वर्षा गाड़ी की जीत को “राजनीतिक साजिश” से रोका गया था।

    राजनीतिक विश्लेषण.

    निकाय चुनाव भले ही गैर-दलीय  कहे जा रहे हों, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि सभी प्रमुख दल इसमें अपने जनाधार को मापने और 2029  विधानसभा व  लोकसभा चुनावों की बुनियाद मजबूत करने के नजरिए से देख रहे हैं।

    • राजद इसे ग्रामीण क्षेत्रों से शहरी इलाकों में अपने आधार को विस्तार देने का मौका मान रही है।
    • कांग्रेस इस चुनाव को संगठन के पुनर्निर्माण और सत्ता वापसी की तैयारी का प्लेटफॉर्म बना रही है।
    • झामुमो अपनी शहरी उपस्थिति को न केवल बनाए रखना, बल्कि भाजपा से टक्कर लेने के लिए नई रणनीति के साथ उतरने का संकेत दे रही है।

     

    झारखंड में नगर निकाय चुनाव भले ही अभी औपचारिक रूप से घोषित न हुए हों, लेकिन राजनीतिक दलों की तैयारियों से यह स्पष्ट है कि यह चुनाव सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया भर नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक सेमीफाइनल साबित हो सकता है।

     

  • झारखंड कैबिनेट के बड़े फैसले: हिन्दू न्यास बोर्ड को सालाना 3 करोड़ की मदद

    HIV-एड्स फोरम का गठन, रांची में दो बड़े सड़क प्रोजेक्ट को मंजूरी.

    By The News Post4u.

    रांची: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में शुक्रवार को आयोजित झारखंड कैबिनेट की बैठक में राज्य के विकास और कल्याण से जुड़े कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक में कुल 26 प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की गई, जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क निर्माण और पुलिस पदक जैसे अनेक अहम विषय शामिल थे।

    हिन्दू न्यास बोर्ड को सालाना अनुदान.

    राज्य सरकार ने झारखंड हिन्दू धार्मिक न्यास बोर्ड को सालाना 3 करोड़ रुपये का अनुदान देने का निर्णय लिया है। यह अनुदान धार्मिक गतिविधियों के प्रबंधन और सामाजिक कल्याण से जुड़े कार्यों के संचालन के लिए दिया जाएगा।

    HIV-एड्स रोकथाम के लिए ‘लेजिस्लेटिव फोरम‘ का गठन.

    राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (NACO) के निर्देशों पर राज्य सरकार ने झारखंड लेजिस्लेटिव फोरम ऑन एचआईवी-एड्स के गठन को मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य HIV-एड्स के प्रति जनजागरूकता फैलाना, भेदभाव समाप्त करना और जिला स्तरीय तंत्र को मज़बूती देना है। इस फोरम के अध्यक्ष संबंधित विभाग के मंत्री होंगे और स्पीकर द्वारा नामित पांच विधायक इसके सदस्य होंगे। इसके अलावा विकास आयुक्त, विभागीय सचिव, परियोजना निदेशक जैसे अधिकारी भी इसमें शामिल होंगे।

    उच्च शिक्षा को बढ़ावा: दो नए कॉलेजों की मंजूरी.

    शिक्षा क्षेत्र में भी सरकार ने दो बड़े निर्णय लिए हैं। खूंटी जिले में महिला कॉलेज की स्थापना के लिए 57 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई, जबकि सरायकेला-खरसावां के ईचागढ़ क्षेत्र में डिग्री कॉलेज की स्थापना के लिए 38.76 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए।

    फार्मेसी कॉलेजों के लिए नई नियुक्तियां.

    दुमका और पलामू में स्थित राजकीय फार्मेसी संस्थानों में 28-28 नए पदों के सृजन को कैबिनेट ने हरी झंडी दी है, जिससे इन संस्थानों की शैक्षणिक गुणवत्ता और संचालन में सुधार होगा।

    पुलिस पदक की संख्या बढ़ी.

    झारखंड राज्यपाल पदक के तहत अब तक 11 पुलिस अधिकारियों-जवानों को सम्मानित किया जाता था, जिसे बढ़ाकर 21 कर दिया गया है। इसी प्रकार सराहनीय सेवा के लिए दी जाने वाली संख्या 31 से बढ़ाकर 60 कर दी गई है। यह निर्णय राज्य के पुलिस बल को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से लिया गया है।

    JSSC को 31 करोड़ की स्वीकृति.

    झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) को वर्ष 2025-26 में विभिन्न प्रतियोगिता परीक्षाओं के सफल आयोजन हेतु झारखंड अकस्मिता निधि से 31 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। साथ ही यह भी तय किया गया कि यदि किसी स्नातक स्तरीय परीक्षा में 50 हजार से अधिक आवेदन आते हैं, तो प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा दोनों कराई जाएंगी, अन्यथा केवल एक स्तर की परीक्षा ली जाएगी।

    रांची में दो बड़े सड़क प्रोजेक्ट को मिली मंजूरी.

    1. अरगोड़ा-रिंग रोड फोरलेन सड़क
      पथ निर्माण विभाग के एक प्रस्ताव के तहत रांची के अरगोड़ा से पुंदाग होते हुए रिंग रोड तक 6.17 किलोमीटर लंबी फोर लेन सड़क बनाई जाएगी। इसके लिए 141 करोड़ रुपये की प्रशासनिक मंजूरी दी गई है। इसमें मुआवजा, पुनर्वास और पौधारोपण जैसी गतिविधियाँ भी शामिल हैं।
    2. साइकिल ट्रैक और सर्विस रोड निर्माण
      एक अन्य प्रमुख परियोजना के तहत विवेकानंद स्कूल मोड़ से रिंग रोड तक साइकिल ट्रैक, सर्विस रोड और फुटपाथ का निर्माण किया जाएगा। इस पूरी परियोजना के लिए झारखंड राज्य राजमार्ग प्राधिकरण को 301.12 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिली है। यह परियोजना पुराने विधानसभा भवन, हाईकोर्ट और विधानसभा सचिवालय को जोड़ते हुए नईसराय लिंक रोड तक फैली होगी।

    अन्य महत्वपूर्ण निर्णय.

    • राजकीय प्राथमिक शिक्षक प्रोन्नति नियमावली 2025 को स्वीकृति मिली, जिससे शिक्षकों की पदोन्नति प्रक्रिया अब ज्यादा पारदर्शी और व्यवस्थित होगी।
    • सिमडेगा-कुरडेग से छत्तीसगढ़ सीमा तक 63.2 किलोमीटर सड़क के सुधार कार्य के लिए 38 करोड़ रुपये की प्रशासनिक मंजूरी दी गई।

    इन निर्णयों से स्पष्ट है कि राज्य सरकार बुनियादी ढांचे को मज़बूत करने, सामाजिक कल्याण, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार लाने के लिए ठोस कदम उठा रही है। रांची की सड़क परियोजनाएं राजधानी की यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाएंगी, वहीं HIV-एड्स जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सरकार की संजीदगी भी दिखाई देती है।

  • बोकारो: अवैध हथियार फैक्ट्री का भंडाफोड़

     बंगाल-बिहार के नेटवर्क से जुड़ी थी सप्लाई चेन, दो गिरफ्तार, मुख्य आरोपी फरार

    Key points:

    🔗 बोकारो में पकड़ी गई गन फैक्ट्री, बांग्लादेश तक होती थी हथियारों की सप्लाई.
    🔗 धनबाद में भी पकड़े गए थे अवैध हथियार, बंगाल और बिहार कनेक्शन उजागर.

     By The News Post4U | परवेज़ आलम | 20 जून 2025

    झारखंड के बोकारो जिले में सुरक्षा एजेंसियों को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। कोलकाता एसटीएफ और रांची एटीएस की संयुक्त कार्रवाई में बेरमो अनुमंडल क्षेत्र के जरीडीह बाजार स्थित एक पुराने व्यवसायिक परिसर में चल रही अवैध गन फैक्ट्री का पर्दाफाश किया गया है। इस छापेमारी में हथियार निर्माण से जुड़ा बड़ा नेटवर्क सामने आया है, जिसकी डोरें बिहार से लेकर बांग्लादेश तक फैली हुई थीं।

    मैरेज हॉल की आड़ में चल रहा था हथियारों का कारखाना.

    यह अवैध फैक्ट्री जरीडीह पश्चिमी पंचायत अंतर्गत कलाली रोड पर स्थित ‘कावेरी मैरेज पैलेस’ और उसके ठीक सामने स्थित एक गोदाम में संचालित की जा रही थी। छापेमारी के दौरान वहां से बड़ी संख्या में अर्धनिर्मित हथियार, उनके पुर्जे, हथियार निर्माण में उपयोग की जाने वाली लेथ मशीन, कच्चा माल और करीब 50 कार्टून अवैध शराब जब्त की गई है। इस पूरी कार्रवाई में यह भी सामने आया है कि उक्त स्थल पर लंबे समय से हथियार निर्माण का काम चल रहा था और इसे कबाड़ व्यवसाय की आड़ में छुपाया गया था।

    बिहार से लाए गए थे कुशल कारीगर.

    फैक्ट्री में काम कर रहे दो हथियार बनाने वाले कारीगरों को गिरफ्तार किया गया है, जिनकी पहचान बिहार के मुंगेर और खगड़िया जिलों के रहने वाले के रूप में हुई है। दोनों ही इस अवैध धंधे में प्रशिक्षित और तकनीकी दक्षता रखते हैं। वहीं इस पूरे ऑपरेशन का मास्टरमाइंड और मैरेज हॉल का संचालक सूरज साव मौके से फरार हो गया है। उसकी गिरफ्तारी के लिए देर रात तक छापेमारी जारी रही।

    इंटरस्टेट और इंटरनेशनल नेटवर्क की पुष्टि.

    सूत्रों के अनुसार यह गन फैक्ट्री सिर्फ स्थानीय स्तर पर ही नहीं बल्कि अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हथियारों की आपूर्ति में शामिल थी। बंगाल में हाल ही में जब्त किए गए अवैध हथियारों के बाद एसटीएफ ने इस नेटवर्क को ट्रैक करते हुए बोकारो के इस ठिकाने तक पहुंच बनाई। बताया जा रहा है कि इस नेटवर्क के जरिए तैयार हथियारों की सप्लाई बांग्लादेश जैसे देशों तक भी की जा रही थी।

    लंबे समय से चल रही थी खुफिया निगरानी.

    कोलकाता एसटीएफ और रांची एटीएस की टीमें बीते दो-तीन दिनों से गुप्त रूप से इस क्षेत्र में जमी हुई थीं और संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी रख रही थीं। जैसे ही ठोस जानकारी प्राप्त हुई, दोनों टीमों ने स्थानीय पुलिस—बेरमो थाना और गांधीनगर थाना के सहयोग से एक सुनियोजित तरीके से छापा मारा। चारों ओर से इलाके को घेर कर मैरेज हॉल और गोदाम में एक साथ दबिश दी गई।

    पहले भी महुदा में हुई थी बरामदगी.

    गौरतलब है कि इससे पहले भी 15 दिन पूर्व इसी एसटीएफ टीम ने धनबाद के महुदा थाना क्षेत्र में भारी मात्रा में अवैध हथियार बरामद किए थे। उस कार्रवाई से मिले सुरागों को जोड़ते हुए अब यह बोकारो ऑपरेशन अंजाम दिया गया, जिससे इस बड़े नेटवर्क की परतें खुलने लगी हैं।

    सुरक्षा एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की तह तक पहुंचने में जुट गई हैं। गिरफ्तार कारीगरों से पूछताछ की जा रही है और फरार मुख्य आरोपी सूरज साव की गिरफ्तारी के लिए कई जगहों पर दबिश दी जा रही है। इस मामले में और भी खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

     

     

  • गिरिडीह : पंचायत सेवक की आत्महत्या से मचा हड़कंप

    बीडीओ सहित चार पर एफआईआर, परिजनों को सरकारी नौकरी का आश्वासन.

    Key point.

    • मृतक पंचायत सेवक सुखलाल महतो ने 13 जून को कीटनाशक खाया, 15 जून को रिम्स रांची में मौत.
    • आत्महत्या से पहले पत्र में बीडीओ और अन्य अधिकारियों पर लगाए गंभीर आरोप.
    • शव के साथ 12 घंटे से अधिक चला धरना, विधायक भी हुए शामिल.
    • प्रशासन ने एफआईआर, सरकारी नौकरी और विभागीय कार्रवाई का दिया भरोसा.
    • जिलास्तरीय जांच समिति का गठन.

     By The News Post4u

    गिरिडीह (झारखंड): गिरिडीह जिले के डुमरी प्रखंड में कार्यरत पंचायत सेवक सुखलाल महतो की आत्महत्या के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है। आरोप है कि उन्होंने बीडीओ, मुखिया के पति और दो अन्य अधिकारियों की प्रताड़ना से तंग आकर कार्यालय परिसर में ही जहरीला पदार्थ खा लिया था। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई, जिसके बाद यह मामला तूल पकड़ गया।

    आत्महत्या से पहले पत्र में लगाए थे गंभीर आरोप.

    13 जून को डुमरी प्रखंड कार्यालय परिसर में सुखलाल महतो ने कीटनाशक खाकर आत्महत्या की कोशिश की थी। उन्हें गंभीर हालत में रांची के रिम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 15 जून को उनका निधन हो गया। आत्महत्या से पहले सुखलाल ने एक पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने डुमरी बीडीओ अन्वेषा ओना, बलथरिया पंचायत की मुखिया के पति परमेश्वर नायक, रोजगार सेवक अनिल कुमार और प्रधानमंत्री आवास योजना से जुड़े बीसी पर मानसिक प्रताड़ना और भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था।

    शव के साथ 12 घंटे से अधिक धरना, विधायक भी बैठे समर्थन में.

    रविवार देर रात जब मृतक का शव डुमरी लाया गया, तो उनके परिजन और ग्रामीण प्रखंड कार्यालय के समक्ष धरने पर बैठ गए। सोमवार दोपहर 12:30 बजे तक यह धरना जारी रहा। माहौल उस समय और तनावपूर्ण हो गया, जब डुमरी के विधायक जयराम कुमार महतो भी धरने में शामिल हो गए और मृतक के परिजनों को न्याय दिलाने की मांग उठाई।

    वार्ता के बाद प्रशासन का फैसला: एफआईआर और नौकरी का आश्वासन.

    स्थिति को देखते हुए गिरिडीह के एसडीएम संतोष गुप्ता ने विधायक और मृतक के परिजनों से बातचीत की। वार्ता के बाद यह सहमति बनी कि जिन चार लोगों पर मृतक ने आरोप लगाए थे, उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाएगी। साथ ही, मृतक के एक आश्रित को सरकारी नौकरी देने, विभागीय कार्रवाई शुरू करने और पावना समेत अन्य सरकारी लाभ दिए जाने का निर्णय लिया गया।

    विधायक का आरोप: सिस्टम ने की आत्महत्या के लिए मजबूर.

    विधायक जयराम महतो ने कहा कि “अगर किसी कर्मचारी को आत्महत्या करनी पड़ी है तो इसके लिए सिस्टम जिम्मेदार है।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि रांची में पुलिस मृतक के बयान में नाम शामिल नहीं करना चाहती थी, जिस पर उन्होंने दबाव बनाकर यह सुनिश्चित किया कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो।

    जांच के लिए बनी कमेटी.

    14 जून को ही गिरिडीह के उपायुक्त रामनिवास यादव के निर्देश पर एक जांच कमेटी का गठन कर दिया गया था। इसमें अपर समाहर्ता विजय सिंह बिरुआ, एसडीएम संतोष गुप्ता, डीएसपी नीरज कुमार सिंह और डॉ. रवि महर्षि शामिल हैं। इसके अलावा, पुलिस अपनी स्तर से भी मामले की जांच कर रही है।

    यह घटना झारखंड के सरकारी तंत्र की संवेदनहीनता और भ्रष्टाचार के विरुद्ध एक बड़ा संकेत है। अब देखना होगा कि प्रशासन अपने वादों को कितनी जल्दी और ईमानदारी से अमल में लाता है।

     

  • विश्व रक्तदान दिवस पर गिरिडीह में  स्वैच्छिक रक्तदान को लेकर ली गई शपथ

    By Chandan. For The News Post4u

    गिरिडीह: विश्व रक्तदान दिवस के अवसर पर शनिवार को गिरिडीह के सदर अस्पताल स्थित सभाकक्ष में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिला स्वास्थ्य समिति के तत्वावधान में हुए इस कार्यक्रम का उद्देश्य स्वैच्छिक रक्तदान को प्रोत्साहित करना और इसके महत्व को लेकर आमजन में जागरूकता फैलाना था।

    कार्यक्रम के मुख्य अतिथि गिरिडीह के उपायुक्त रामनिवास यादव रहे, जिनका स्वागत सिविल सर्जन डॉ. एस.पी. मिश्रा ने पुष्पगुच्छ प्रदान कर किया। ब्लड बैंक के सचिव सह रेडक्रॉस चेयरमैन अरविंद कुमार ने उन्हें मोमेंटो और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम की शुरुआत सिविल सर्जन द्वारा स्वागत भाषण से हुई, जिसमें उन्होंने जिले में थैलेसीमिया, सिकल सेल एनीमिया और हीमोफीलिया जैसे रक्त विकारों से पीड़ित मरीजों की संख्या और उन्हें मासिक रक्त की आवश्यकता की जानकारी साझा की।

    इस अवसर पर उपायुक्त श्री यादव ने उपस्थित लोगों को स्वैच्छिक रक्तदान की शपथ दिलाई और रक्तदान के क्षेत्र में कार्य कर रही ब्लड बैंक की टीम की सराहना की। उन्होंने कहा कि जिले में रक्त की सुलभ उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए स्वैच्छिक रक्तदाताओं को प्रेरित करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने जिले के सभी नागरिकों से नियमित रूप से रक्तदान करने की अपील की।

    कार्यक्रम में रक्तदान के क्षेत्र में विशेष योगदान देने वाले 15 व्यक्तियों को मोमेंटो व प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। इनमें डॉ. एस.के. डोकानिया, डॉ. विकास लाल, डॉ. राजेश कुमार सिंह, डॉ. साकेत, शालिनी खोवाला, मदनलाल विश्वकर्मा, डॉ. निकिता गुप्ता, रिया अग्रवाल, स्वाति बगेड़िया, विकास सिन्हा, अतेंद्र नारायण राम, बुलंद अख्तर, दानिश, सुरेंद्र यादव शामिल रहे।

    इसके अतिरिक्त अनुमंडल व प्रखंड स्तर पर रक्तदान शिविरों के बेहतर आयोजन व निगरानी हेतु उपायुक्त रामनिवास यादव और सिविल सर्जन डॉ. एस.पी. मिश्रा को भी विशेष सम्मान प्रदान किया गया।

    कार्यक्रम के संचालन की जिम्मेदारी ब्लड बैंक के सचिव अरविंद कुमार ने निभाई, जबकि धन्यवाद ज्ञापन ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. शोहेल अख्तर ने किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में संत कुमार सहित सदर अस्पताल के अन्य स्वास्थ्यकर्मियों ने सक्रिय भूमिका निभाई। मौके पर डीएस डॉ. राजीव, डॉ. रेखा झा, डॉ. रवि महर्षि सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।