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  • नवरात्र पर मंत्री सुदीव्य सोनू का पंडाल भ्रमण, व्यवस्था पर विशेष जोर

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    गिरिडीह : नवरात्र के शुभ अवसर पर शनिवार को गिरिडीह विधायक एवं झारखंड सरकार के मंत्री सुदीव्य कुमार सोनू ने शहर और आसपास के क्षेत्रों में स्थापित विभिन्न दुर्गा पूजा पंडालों का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने मां दुर्गा की प्रतिमा के समक्ष माथा टेकते हुए राज्य और जिले के लोगों की खुशहाली व समृद्धि की कामना की।

    मंत्री सोनू ने न केवल शहरी क्षेत्र, बल्कि गिरिडीह मुफ्फसिल इलाके के कई बड़े पंडालों का भी दौरा किया। भ्रमण के दौरान उन्होंने पंडालों में सफाई व्यवस्था, विद्युत आपूर्ति, भीड़ नियंत्रण, अग्निशमन प्रबंधन और सुरक्षा इंतजामों का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि पूजा के समय किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और श्रद्धालुओं को सुरक्षित व शांतिपूर्ण वातावरण में पूजा करने का अवसर मिलना चाहिए।

    निरीक्षण के दौरान जिले के पुलिस-प्रशासनिक अधिकारी, नगर निगम प्रतिनिधि और बिजली विभाग के पदाधिकारी मंत्री के साथ मौजूद थे। मंत्री सोनू ने कहा, “दुर्गा पूजा झारखंड सहित पूरे देश की आस्था और संस्कृति का पर्व है। प्रशासन की जिम्मेदारी है कि श्रद्धालु बिना किसी व्यवधान के पूजा-अर्चना कर सकें। इसके लिए सभी विभाग पूरी तरह सतर्क और तैयार रहें।”

    इस मौके पर मंत्री ने कई पंडाल समितियों के सदस्यों से भी मुलाकात की और उनकी समस्याओं व सुझावों को सुना। पंडाल समितियों ने प्रशासन से सहयोग और व्यवस्था पर संतोष जताया।

  • 10 नक्सलियों का आत्मसमर्पण, डीजीपी बोले –2025 में झारखंड उग्रवाद मुक्त होगा

    परवेज़ आलम व

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    चाईबासा, झारखंड:  उग्रवाद के खिलाफ लड़ाई में झारखंड पुलिस को एक और बड़ी सफलता हाथ लगी है। पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में 10 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया। सरेंडर करने वालों में 3 नाबालिग भी शामिल हैं। डीजीपी अनुराग गुप्ता की मौजूदगी में हुए इस आत्मसमर्पण को राज्य की सुरक्षा एजेंसियों के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है।

    डीजीपी अनुराग गुप्ता ने इस मौके पर कहा कि झारखंड अब निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। पिछले 20 वर्षों से चले आ रहे उग्रवाद विरोधी संघर्ष में अब तक पुलिस और अर्धसैनिक बलों के 500 से अधिक जवानों व अधिकारियों ने शहादत दी है। उनकी कुर्बानी और लगातार चल रहे अभियानों की बदौलत ही आज नक्सलवाद लगभग समाप्ति की कगार पर है।

    गुप्ता ने दावा किया कि दिसंबर 2025 तक राज्य पूरी तरह से उग्रवाद मुक्त हो जाएगा। उन्होंने बताया कि वर्तमान में झारखंड में केवल 40–45 सक्रिय उग्रवादी ही बचे हैं, जिनकी गतिविधियों को पुलिस और पैरामिलिट्री बलों ने सीमित दायरे में बांध दिया है। यही कारण है कि नक्सली या तो मारे जा रहे हैं या आत्मसमर्पण करने को मजबूर हो रहे हैं।

    डीजीपी ने चेतावनी दी कि अब नक्सलियों के पास केवल दो ही विकल्प बचे हैं—

    1. आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटकर समाज का हिस्सा बनें।
    2. या फिर पुलिस कार्रवाई में मारे जाएं।

    उन्होंने राज्य की सरेंडर पॉलिसी को देश की सबसे सफल नीति बताते हुए कहा कि यह भटके युवाओं को नई शुरुआत का मौका देती है। उन्होंने नक्सलियों से हिंसा छोड़कर शांति और विकास की राह अपनाने की अपील की।

    नशाखोरी और संगठित अपराध पर भी होगी सख्ती.

    इस दौरान डीजीपी ने मीडिया को बताया कि  पुलिस की कार्रवाई केवल नक्सलवाद तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य में बढ़ती नशाखोरी और संगठित आपराधिक गिरोहों पर भी कड़ी कार्रवाई होगी। आने वाले महीनों में विशेष अभियान चलाकर ऐसे सभी अपराध नेटवर्क को तोड़ा जाएगा, ताकि झारखंड शांति, सुरक्षा और विकास की दिशा में और तेजी से आगे बढ़ सके।

    पिछले 10 महीनों का रिपोर्ट कार्ड.

    रिपोर्ट के अनुसार, 29 नवंबर 2024 से 23 सितंबर 2025 के बीच सुरक्षा बलों ने राज्य में 33 नक्सलियों को ढेर किया, 20 ने सरेंडर किया और 18 को गिरफ्तार किया गया।

    • भाकपा (माओवादी): 21 मारे गए, 7 गिरफ्तार, 4 ने सरेंडर किया।
    • जेजेएमपी (JJMP): 8 मारे गए, 16 ने सरेंडर किया, 3 गिरफ्तार।
    • टीएसपीसी (TSPC): 2 मारे गए, 6 गिरफ्तार।

    इन कार्रवाइयों से स्पष्ट है कि टीएसपीसी और जेजेएमपी जैसे संगठन लगभग समाप्त हो चुके हैं। भाकपा (माओवादी) अब केवल सारंडा और कुछ इलाकों (हजारीबाग, चतरा) तक सीमित रह गया है।

    पुलिस की रणनीति और भविष्य.

    डीजीपी गुप्ता ने कहा कि उग्रवाद को खत्म करने के साथ-साथ समाज में जड़ें जमा रहे हर तरह के संगठित अपराध और नशे के कारोबार पर भी लगातार प्रहार किया जाएगा। आने वाले महीनों में चलाए जाने वाले अभियानों का लक्ष्य झारखंड को पूरी तरह शांति और विकास की राह पर लाना है।

  • दुर्गा पूजा को लेकर प्रशासन अलर्ट, 30 बाइक रैपिड रिस्पांस टीम की तैनाती

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    गिरिडीह : दुर्गा पूजा और आगामी त्योहारों के दौरान जिले का माहौल शांतिपूर्ण और सुरक्षित बना रहे, इसके लिए जिला प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। बुधवार को जिला मुख्यालय से 30 बाइक रैपिड रिस्पांस टीम को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। इस मौके पर उपायुक्त रामनिवास यादव और पुलिस अधीक्षक डॉ. विमल कुमार मौजूद रहे।

    प्रशासन के मुताबिक, ये बाइक रैपिड रिस्पांस टीम जिले के चारों प्रमंडलों में तैनात की जाएंगी। इन टीमों की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि ये सीधे कंट्रोल रूम (CCR) से जुड़ी रहेंगी। बाइक पर सवार सुरक्षा बल पूरी तरह से हथियारों और उपकरणों से लैस होंगे। किसी भी क्षेत्र में अगर तनाव या विवाद की स्थिति उत्पन्न होती है तो तुरंत मौके पर पहुँचकर हालात पर काबू पाएंगे और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त बल को बुलाया जाएगा।

    दुर्गा पूजा के दौरान शहर में बढ़ने वाली भीड़ और यातायात के दबाव को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने अलग से 4 अतिरिक्त बाइक ट्रैफिक नियंत्रण दल को भी लगाया है। ये दल खासतौर पर भीड़भाड़ वाले इलाकों और पूजा पंडालों के आसपास यातायात को नियंत्रित करने का काम करेंगे।

    उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक ने संयुक्त रूप से कहा कि जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है। उन्होंने आमजन से अपील की कि वे बेफिक्र होकर दुर्गा पूजा का आनंद लें। किसी भी तरह की आपराधिक गतिविधि या हुड़दंग बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सुरक्षा बल लगातार गश्त पर रहेंगे ताकि त्योहारों का उल्लास बिना किसी व्यवधान के पूरा किया जा सके।

  • एसटी दर्जा की मांग पर कुर्मी समाज 20 सितंबर से सड़कों और रेल पटरियों पर उतरेगा

     झारखंड, बंगाल और ओडिशा में “रेल टेका, दहर चेका” आंदोलन.

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    पारसनाथ/रांची/कोलकाता/भुवनेश्वर : अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) में सूचीबद्ध कुर्मी आदिवासी समुदाय ने अपने “लंबित अधिकारों” को लेकर एक बार फिर बड़ा आंदोलन छेड़ने का ऐलान किया है। शनिवार, 20 सितंबर से झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा के कई हिस्सों में ट्रेनों और सड़कों को रोककर अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू होगा। आंदोलन का नारा है – “रेल टेका, दहर चेका” यानी रेल रोकों, सड़क जाम करो।

    क्या हैं कुर्मी समाज की मांगें?

    कुर्मी समाज की सबसे बड़ी मांग है कि उन्हें अनुसूचित जनजाति (ST) की सूची में शामिल किया जाए। इसके अलावा, उनकी कुर्माली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में मान्यता दी जाए और सरना धर्म कोड लागू किया जाए।
    समुदाय का कहना है कि आज़ादी के बाद उन्हें आदिवासी श्रेणी से हटाकर OBC में डालना एक राजनीतिक षड्यंत्र था।

    आंदोलन का इतिहास.

    कुर्मी समाज का यह संघर्ष नया नहीं है।

    • 20 सितंबर 2022 को आंदोलन की शुरुआत हुई थी, जो नौ दिनों तक चला।
    • 2023 में भी यही आंदोलन 20 सितंबर से शुरू हुआ और लगभग आठ दिन चला।
    • 2024 में लोकसभा और विधानसभा चुनाव के चलते आंदोलन स्थगित रहा।
    • इस साल आंदोलन दिल्ली के जंतर-मंतर तक पहुंच गया और अब पूर्वी भारत के तीन राज्यों में फैलने जा रहा है।

    किन जगहों पर होगा अवरोध?

    टोटेमिक कुर्मी विकास मोर्चा (TKVM) के अध्यक्ष शीतल ओहदार ने बताया कि झारखंड में सोनुवा, गम्हरिया, गालूडीह, मुरी, बरकाकाना, गड्डी और पारसनाथ-चंद्रपुरा जैसे रेलवे स्टेशनों पर रेल अवरोध होगा।
    पश्चिम बंगाल के चार और ओडिशा के एक स्थान पर भी प्रदर्शन की योजना बनाई गई है।

    आदिवासी कुर्मी समाज मंच के सदस्य सूरज महतो ने कहा कि आंदोलन में हर घर से लोग शामिल होंगे। प्रदर्शन स्थलों पर ही खाना बनाया जाएगा और अस्थायी शिविर लगाए जाएंगे।

    विरोध और समर्थन.

    जब आंदोलन को लेकर कुछ आदिवासी नेताओं के विरोध पर सवाल किया गया, तो कुर्मी समाज ने साफ कहा कि विरोध करने वाले अधिकतर लोग मिशनरी समूहों से जुड़े हैं और ईसाई धर्म अपना चुके हैं।
    उनका दावा है कि कोल्हान क्षेत्र के संताल और हो समुदाय ने उनकी मांगों का विरोध नहीं किया है।

    आंदोलन की रूपरेखा.

    आदिवासी कुर्मी समाज मंच की केंद्रीय समिति के अध्यक्ष शशांक शेखर महतो ने बताया कि शनिवार सुबह 5 बजे से सरायकेला-खरसावां जिले के सिनी रेलवे स्टेशन से रेल अवरोध की शुरुआत होगी।
    उनके अनुसार –

    1. कुर्मी समाज को एसटी का दर्जा दिया जाए।
    2. कुर्माली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में जगह मिले।
    3. सरना धर्म कोड लागू किया जाए।

    रेलवे और प्रशासन की तैयारियां

    रांची और धनबाद  रेल मंडल पूरी तरह अलर्ट पर है। RPF के एक अधिकारी ने बताया कि सभी संवेदनशील स्थानों पर RPF और राज्य पुलिस का संयुक्त बल तैनात रहेगा।
    भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है।
    उन्होंने कहा “ट्रेन रोकने की कोशिश करने वालों पर एफआईआर और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अभी तक किसी ट्रेन रूट में बदलाव नहीं किया गया है,” उन्होंने कहा।

    राजनीतिक दलों की दुविधा.

    यह मुद्दा झारखंड और पूर्वी भारत की राजनीति में बेहद संवेदनशील बन गया है। राजनीतिक दल न तो कुर्मी समाज की मांगों का खुलकर समर्थन कर पा रहे हैं और न ही इसका खुला विरोध।

  • पूर्वी भारत का सबसे बड़ा स्किल और इनोवेशन हब बनेगा झारखंड का देवघर

    डिक्सन ने खोला देश का पहला बाहरी इनोवेशन सेंटर.

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    देवघर : झारखंड के देवघर को जल्द ही कौशल विकास और रोजगार सृजन के क्षेत्र में एक नया मुकाम मिलने जा रहा है। मंगलवार को सांसद डॉ. निशिकांत दुबे ने देवघर स्थित सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क ऑफ इंडिया (STPI) परिसर में देश की अग्रणी इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग कंपनी डिक्सन टेक्नोलॉजीज के इनोवेशन सेंटर का उद्घाटन किया। यह पूर्वी भारत का सबसे बड़ा स्किलिंग और इनोवेशन सेंटर होगा।

    अगले साल तक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट भी.

    इस मौके पर सांसद डॉ. दुबे ने कहा कि यह सेंटर न केवल स्किल डेवलपमेंट का हब बनेगा, बल्कि यहां अगले साल मार्च तक वाशिंग मशीन और रेफ्रिजरेटर निर्माण यूनिट भी शुरू की जाएगी। उनका कहना था कि यह सेंटर बेंगलुरु और पुणे से भी बड़ा आकार लेगा और यहां उद्योगों का एक सशक्त इकोसिस्टम तैयार होगा।

    राष्ट्रीय स्तर के सर्टिफिकेट और रिसर्च सुविधा.

    इस सेंटर में प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले युवाओं को भारत सरकार की संस्था NIELIT (नायलेट) से सर्टिफिकेट मिलेगा। इसके अलावा, यहां C-DAC और कोल इंडिया मिलकर 6G और 7G रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर काम करेंगे। साथ ही, सुपर कंप्यूटर निर्माण की दिशा में भी C-DAC योगदान देगा, जिसका उपयोग मेडिकल और एग्रीकल्चर रिसर्च में होगा। इसके अलावा BSNL का सेंटर भी यहां खोला जाएगा।

    डिक्सन का देश में पहला बाहरी इनोवेशन सेंटर.

    डिक्सन टेक्नोलॉजीज के चेयरमैन सुनील बचानी ने कहा कि कंपनी के अभी देशभर में 27 मैन्युफैक्चरिंग प्लांट हैं। अब तक सभी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस उन्हीं प्लांट्स के भीतर संचालित होते थे। लेकिन देवघर का यह इनोवेशन सेंटर पहला ऐसा केंद्र है, जो किसी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट के बाहर खोला गया है। उन्होंने बताया कि यहां युवाओं को वर्ल्ड क्लास ट्रेनिंग मिलेगी और धीरे-धीरे इसे एक बड़े मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में बदला जाएगा।

    रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर.

    सुनील बचानी ने यह भी कहा कि यह सेंटर न केवल स्किलिंग के अवसर देगा बल्कि छोटे स्तर पर मोबाइल रिपेयरिंग से लेकर बड़े स्तर की टेक्नोलॉजी आधारित यूनिट खोलने में भी मददगार होगा। इससे स्थानीय युवाओं को व्यापक पैमाने पर रोजगार मिलेगा।

    सांसद दुबे और मेक इन इंडिया का योगदान.

    डिक्सन चेयरमैन ने साफ कहा कि इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट की शुरुआत सांसद डॉ. निशिकांत दुबे की पहल से संभव हो पाई है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मेक इन इंडिया अभियान की सराहना करते हुए बताया कि पिछले 12 वर्षों में भारत मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में जबरदस्त प्रगति कर चुका है और अब तक ढाई लाख करोड़ रुपये का निर्यात किया जा चुका है।

    देवघर का यह इनोवेशन सेंटर न केवल झारखंड बल्कि पूरे पूर्वी भारत को नई पहचान देगा और युवाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए उन्हें विश्वस्तरीय कौशल और रोजगार उपलब्ध कराएगा।

     

  • मोहनपुर औद्योगिक क्षेत्र में विश्वकर्मा पूजा: श्रद्धा, भक्ति और उत्सव का संगम

    मोहनपुर औद्योगिक क्षेत्र में विश्वकर्मा पूजा: श्रद्धा, भक्ति और उत्सव का संगमटफकॉन टीएमटी व लाल स्टील भंडारे का आयोजन किया गया

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    गिरिडीह:  जिले के मोहनपुर स्थित औद्योगिक क्षेत्र बुधवार को श्रद्धा और भक्ति से सराबोर रहा। टफकॉन टीएमटी और लाल स्टील के परिसरों में श्रम और सृजनशीलता के देवता भगवान शिल्प देव विश्वकर्मा की भव्य पूजा-अर्चना की गई। दोनों कंपनियों ने इस अवसर पर प्रतिमा स्थापना कर पूरे परिसर को उत्सवी रंग में रंग दिया।

    टफकॉन टीएमटी के प्रबंध निदेशक  मोहन साव ने इस मौके पर कर्मचारियों, श्रमिकों और आगंतुक अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि भगवान विश्वकर्मा श्रम, कौशल और नवाचार के प्रतीक हैं। उनकी कृपा से ही उद्योग और विकास को दिशा मिलती है। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन न केवल धार्मिक आस्था को मजबूती देते हैं बल्कि श्रमिकों और उद्योग जगत के बीच समर्पण और एकता का संदेश भी फैलाते हैं।

    वहीं लाल स्टील के प्रबंध निदेशक  जय प्रकाश लाल ने विश्वकर्मा पूजा को श्रम के प्रति सम्मान और औद्योगिक प्रगति का प्रतीक बताया। उन्होंने परिसर में भंडारे का आयोजन किया, जिसमें स्थानीय लोगों से लेकर कर्मचारियों तक ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया। साधारण से लेकर विशिष्ट सभी ने एक साथ प्रसाद ग्रहण कर सामूहिकता और सामाजिक सौहार्द का उदाहरण पेश किया।

    पूजनोत्सव और भंडारे में टफकॉन टीएमटी के निदेशक सूरज कुमार सहित कंपनी के अन्य अधिकारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि और ग्रामीण भी शामिल हुए। सूरज कुमार ने कहा कि यह परंपरा श्रमिकों और प्रबंधन के बीच सहयोग और पारस्परिक विश्वास को और गहरा करती है।

    दिनभर पूरे मोहनपुर औद्योगिक क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल रहा। पूजा के बाद परिसर में भजन-कीर्तन और भक्तिमय संगीत गूंजता रहा, जिससे वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण हो गया। रंग-बिरंगी सजावट और दीपमालाओं से कंपनियों के कैंपस जगमगाते रहे और श्रमिकों के बीच हर्षोल्लास का दृश्य देखते ही बन रहा था।

    विश्वकर्मा पूजा के इस आयोजन ने न केवल श्रद्धा और भक्ति का वातावरण रचा, बल्कि यह भी संदेश दिया कि श्रम ही उद्योग और समाज की सच्ची ताकत है।

  • अपाचे का 20वां वार्षिक उत्सव, नया मॉडल अपाचे 160 4V TFT लॉन्च

    सी.एल.ऑटोमोबाइल्स गिरिडीह में हुआ कार्यक्रम.

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    गिरिडीह के हुयूटी बाजार स्थित सी.एल. ऑटोमोबाइल्स टीवीएस शोरूम में मंगलवार को अपाचे बाइक का 20वां वार्षिक उत्सव बड़े ही धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर टीवीएस मोटर कॉरपोरेशन ने ग्राहकों के लिए अपाचे 160 4V का नया TFT मॉडल लॉन्च किया।

    कंपनी की ओर से बताया गया कि इस अपग्रेडेड मॉडल को आधुनिक तकनीक से लैस किया गया है। इसमें 5 इंच का डिजिटल TFT स्पीडोमीटर क्लस्टर दिया गया है, जो ब्लूटूथ और स्मार्ट कनेक्ट फीचर से सुसज्जित है। यह मॉडल खासतौर पर उन युवाओं को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है, जो बाइक चलाते समय तकनीक और परफॉर्मेंस दोनों का आनंद लेना चाहते हैं।

    लॉन्चिंग समारोह में शोरूम के प्रोपराइटर शंभू जैन और श्रेयांश जैन, मैनेजर मनमोहन प्रसाद तथा टीवीएस क्रेडिट के रीजनल मैनेजर समेत सी.एल. टीवीएस टीम के कई सदस्य मौजूद रहे।

    इस अवसर पर कंपनी के प्रोपराइटर शंभू जैन और श्रेयांश जैन ने जानकारी दी कि आगामी दुर्गा पूजा और धनतेरस को देखते हुए नए मॉडल की अग्रिम बुकिंग की सुविधा शुरू कर दी गई है। साथ ही उन्होंने कहा कि भारत सरकार की ओर से जीएसटी में जो छूट ग्राहकों को दी जा रही है, उसका सीधा लाभ कंपनी के उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जा रहा है।

    लॉन्चिंग कार्यक्रम में उपस्थित बाइक प्रेमियों ने नए अपाचे मॉडल की खूबियों की सराहना की और कई लोगों ने मौके पर ही बुकिंग में रुचि दिखाई। इस तरह गिरिडीह में अपाचे के नए मॉडल ने त्योहारों से पहले बाइक बाजार में उत्साह का माहौल बना दिया है।

  • 24 जिलों और 7 अनुमंडलों में बार भवन के निर्माण की योजना-सीएम  

    झारखंड में न्यायिक संरचना को मजबूती के लिए बार भवन निर्माण की नींव रखी गई.

     द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और झारखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति तरलोक सिंह चौहान ने मंगलवार को खूंटी जिले में आयोजित एक भव्य समारोह में बार काउंसिल भवन निर्माण योजना का शिलान्यास किया। इस अवसर पर खूंटी कचहरी परिसर में आयोजित कार्यक्रम में तीन बड़े जिलों – खूंटी, चाईबासा और चांडिल – में प्रस्तावित बार भवनों की नींव रखी गई। चाईबासा और चांडिल के भवनों का शिलान्यास मुख्यमंत्री और मुख्य न्यायाधीश ने वर्चुअल माध्यम से किया।

    राज्यव्यापी बार भवन योजना.

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि यह पहल झारखंड की न्यायिक प्रणाली को नई दिशा देगी। उन्होंने बताया कि राज्य के सभी 24 जिलों और 7 अनुमंडलों में बार भवन के निर्माण की योजना बनाई गई है। इस महत्वाकांक्षी योजना पर लगभग 132 करोड़ 84 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि अगले तीन वर्षों के भीतर सभी जिलों में बार भवन खड़े हो जाएंगे और चरणबद्ध तरीके से शिलान्यास एवं उद्घाटन पूरे किए जाएंगे।

    “न्यायालय एक मंदिर है” – हेमंत सोरेन.

    मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में न्यायालयों की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह केवल एक संस्था नहीं, बल्कि एक मंदिर है, जहां आम जनता बिना किसी भेदभाव के न्याय प्राप्त करती है। उन्होंने कहा कि “बेंच और बार न्यायिक व्यवस्था के अभिन्न अंग हैं। इनके सहयोग से ही आम नागरिकों को त्वरित और सुलभ न्याय मिलता है तथा उनके मौलिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित होती है।”

    अधिवक्ताओं के लिए विशेष योजनाएं.

    सीएम हेमंत सोरेन ने अधिवक्ताओं के हित में राज्य सरकार की योजनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि झारखंड देश का पहला राज्य है जिसने अधिवक्ताओं को पेंशन योजना का लाभ देना शुरू किया है। इसके अलावा अधिवक्ताओं के लिए स्वास्थ्य बीमा और स्टाइपेंड जैसी सुविधाएं भी लागू की गई हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की सोच है कि जिला न्यायालय परिसरों की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाए, ताकि अधिवक्ताओं और आम लोगों दोनों को सहज वातावरण मिल सके।

    समारोह में जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी.

    इस अवसर पर सांसद कालीचरण मुंडा, विधायक राम सूर्या मुंडा, विधायक सुदीप गुड़िया, महाधिवक्ता राजीव रंजन समेत न्यायिक एवं प्रशासनिक पदाधिकारी बड़ी संख्या में मौजूद रहे। कार्यक्रम को लेकर अधिवक्ताओं में उत्साह देखने को मिला और इसे न्यायिक प्रणाली को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया गया।

     

  • गिरिडीह में महिलाओं ने गरबा और डांडिया नृत्य प्रस्तुत किया

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    गिरिडीह : विवाह भवन में आध्यात्मिकता, संस्कृति और उत्सव का संगम देखने को मिला।
    शहरवासियों ने सोमवार को एक भव्य समारोह में भाग लिया, जहां वातावरण भक्ति और भारतीय परंपराओं की छटा से सराबोर रहा।

    कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता की वंदना के साथ हुआ। इसके बाद रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में सजी महिलाओं ने गरबा और डांडिया नृत्य प्रस्तुत किया। इन प्रस्तुतियों ने सभागार को जीवंत बना दिया और उपस्थित दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों का उत्साह बढ़ाया।

    कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण तब देखने को मिला, जब 251 महिलाओं ने एक साथ गूंजते स्वर में हनुमान चालीसा का पाठ किया। पूरा विवाह भवन भक्तिमय माहौल में डूब गया। हर श्लोक के साथ वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा, आस्था और सामूहिक उत्साह की गूंज सुनाई दी।

    इसी दौरान सक्षम श्री और हितिका केडिया का जन्मोत्सव भी मनाया गया। वैदिक मंत्रोच्चार, आरती और पारंपरिक विधियों के साथ सम्पन्न इस अवसर ने पूरे समारोह को और भी खास बना दिया।

    समारोह में बतौर मुख्य अतिथि ओम वैष्णवी नर्सिंग होम के डॉ. श्रवण कुमार उपस्थित रहे।
    इसके अलावा सीआरपीएफ अधिकारी पंकज कुमार, भाजपा नेत्री उषा कुमारी, डॉ. मनीषा जालान, जूली केडिया, तनुजा सहाय और निर्मला कौर सहित कई गणमान्य लोग मौजूद थे।
    सभी ने इस आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम न केवल समाज को जोड़ते हैं बल्कि महिलाओं की भागीदारी और भूमिका को भी सशक्त बनाते हैं।

    इस समारोह की प्रमुख संयोजिका पूनम बरनवाल रहीं, जिन्हें मिन्नी बरनवाल, संध्या बरनवाल, सबिता, सोनी बरनवाल और अल्का बरनवाल का सक्रिय सहयोग मिला। आयोजकों ने बताया कि ऐसे सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजन भारतीय परंपराओं को जीवित रखने के साथ-साथ सामाजिक एकता और पारस्परिक सद्भाव को भी मजबूत करते हैं।

  • गिरिडीह में मनाया जाएगा गांधी-शताब्दी समारोह

    महात्मा गांधी के गिरिडीह प्रवास के 100 वर्ष पूरे होने पर होगा विशेष आयोजन, पदयात्रा से लेकर संगोष्ठियों तक कई कार्यक्रम

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    गिरिडीह : महात्मा गांधी के ऐतिहासिक गिरिडीह प्रवास को सौ वर्ष पूरे होने जा रहे हैं। इसी उपलक्ष्य में अक्टूबर 2025 में ‘गांधी-शताब्दी समारोह’ का आयोजन किया जाएगा। सोमवार को परिसदन भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में समारोह की तैयारियों की जानकारी साझा की गई।

    समारोह के संयोजक कृष्णकांत और सह-संयोजक कृष्ण मुरारी शर्मा ने बताया कि महात्मा गांधी 6 अक्टूबर 1925 को देवघर से वर्तमान गिरिडीह जिला के खरगडीहा पहुंचे थे और इसके बाद दो दिनों तक गिरिडीह में प्रवास किया था। 7 अक्टूबर को वे गिरिडीह से मधुपुर के लिए प्रस्थान कर गए थे। इन दो दिनों के दौरान गांधीजी ने खादी, आत्मनिर्भरता और स्वतंत्रता आंदोलन में जनता की भागीदारी पर जोर देते हुए गिरिडीहवासियों को प्रेरित किया था। उनके इस प्रवास ने यहां के स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा दी थी।

    ऐतिहासिक यात्रा की स्मृतियों को जीवित करने का प्रयास.

    आयोजन समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि 6–7 अक्टूबर 1925 की इस ऐतिहासिक यात्रा को स्मरणीय बनाने के लिए गिरिडीह और खरगडीहा में कई सांस्कृतिक व सामाजिक कार्यक्रम होंगे। उद्देश्य है कि गांधीजी की शिक्षाओं और स्मृतियों को पुनः जीवित करते हुए युवा पीढ़ी और बच्चों को हमारी समृद्ध विरासत व स्वतंत्रता संग्राम की मूल भावना से जोड़ा जाए।

    समारोह के प्रमुख आकर्षण.

    समारोह के अंतर्गत कई आयोजन प्रस्तावित हैं –

    • गांधी दर्शन और विचारधारा पर संगोष्ठी
    • खेलकूद प्रतियोगिताएं
    • सांस्कृतिक कार्यक्रम
    • दो दिवसीय पदयात्रा – खरगडीहा से पचम्बा तक

    समिति की संरचना और सहयोग.

    समारोह की सफलता सुनिश्चित करने के लिए 31 सदस्यीय केंद्रीय समिति का गठन किया गया है। समिति में शिक्षाविद, पत्रकार, समाजसेवी और बुद्धिजीवी शामिल हैं।
    प्रेस कॉन्फ्रेंस में संयोजक-द्वय के साथ पत्रकार राकेश सिन्हा, लक्ष्मी अग्रवाल, आलोक रंजन, रितेश सराक, प्रभाकर, सुनील मंथन शर्मा, विलियम जैकब, समाजसेवी धरणीधर प्रसाद, शंकर पाण्डेय, राजेश सिन्हा, रामजी यादव, मनुवर हसन बंटी, सैयद सबिह अशरफ, दिलीप मंडल, चंदर वर्मा और दिवस कुमार उपस्थित थे।

    केंद्रीय समिति में सतीश कुंदन, बैद्यनाथ, बैजनाथ प्रसाद बैजू, रामदेव विश्वबंधु, उमेश तिवारी, सुरेश शक्ति, अरुण शर्मा, आलम अंसारी, रोहित दास, जयकुमार मिश्र, बद्री दास, नवीन सिन्हा, प्रो. बलभद्र, प्रो. प्रफुल्ल सिंह सहित अन्य सदस्य भी जुड़े हुए हैं।

    समिति ने अपील की है कि इस ऐतिहासिक अवसर को सफल बनाने में गिरिडीह के सभी नागरिक, बुद्धिजीवी और सामाजिक संगठन सक्रिय सहयोग दें ताकि गांधीजी के आगमन के शताब्दी वर्ष को गरिमामयी और स्मरणीय बनाया जा सके।