Blog

  • राहुल गांधी के खिलाफ गैर-जमानती वारंट

    2018 के मानहानि का है मामला

    परवेज़ आलम.

    रांची/चाईबासा:  लोकसभा मे विपक्ष के नेता  और काँग्रेस पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी एक बार फिर कानूनी संकट में घिरते नजर आ रहे हैं। झारखंड के चाईबासा कोर्ट ने उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया है। यह कार्रवाई 2018 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को लेकर दिए गए विवादास्पद बयान पर दर्ज मानहानि मामले में की गई है।

    चाईबासा के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (CJM) की अदालत ने राहुल गांधी को 26 जून 2025 को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया है। इसके खिलाफ राहुल गांधी ने झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर वारंट को रद्द करने की मांग की है।

    क्या है पूरा मामला?

    यह मामला 28 मार्च 2018 का है, जब कांग्रेस अधिवेशन के दौरान राहुल गांधी ने अपने भाषण में भाजपा और उस समय के अध्यक्ष अमित शाह के खिलाफ कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इसके बाद भाजपा नेता प्रताप कुमार ने जुलाई 2018 में राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का मुकदमा चाईबासा CJM कोर्ट में दायर किया था।

    कोर्ट में अनुपस्थिति बनी विवाद का कारण.

    मामले की सुनवाई के दौरान चाईबासा कोर्ट ने राहुल गांधी को कई बार समन जारी कर पेश होने का निर्देश दिया। लेकिन वे शारीरिक रूप से कोर्ट में उपस्थित नहीं हुए। कोर्ट ने पहले समन, फिर बेलबिल वारंट भेजा, लेकिन अनुपस्थिति जारी रहने पर आखिरकार 24 मई 2025 को गैर-जमानती वारंट जारी कर दिया गया।

    हाईकोर्ट में पहले से लंबित है एक याचिका.

    राहुल गांधी के वकीलों ने इस मामले में पहले ही झारखंड हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर रखी है, जिसमें शारीरिक उपस्थिति से छूट की मांग की गई है। यह याचिका फिलहाल लंबित है। इसी बीच चाईबासा कोर्ट द्वारा गैर-जमानती वारंट जारी कर दिए जाने के बाद, अब उन्होंने एक और याचिका दायर कर इस वारंट को कानूनी रूप से निरस्त करने की अपील की है।

    ग्रीष्मकालीन अवकाश बना बाधा.

    राहुल गांधी की याचिका झारखंड हाईकोर्ट में दाखिल हो चुकी है, लेकिन फिलहाल अदालत ग्रीष्मकालीन अवकाश पर है। ऐसे में इस पर तत्काल सुनवाई संभव नहीं है। यदि कोई विशेष पीठ गठित न की गई, तो यह मामला अवकाश के बाद ही सूचीबद्ध किया जा सकता है।

    राजनीतिक पृष्ठभूमि और संभावित असर.

    यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब कांग्रेस राज्य में विपक्ष को सक्रिय करने की रणनीति पर काम कर रही है। राहुल गांधी पर जारी यह वारंट न सिर्फ उनके खिलाफ कानूनी दबाव बढ़ाता है, बल्कि कांग्रेस की राज्य इकाई के लिए भी एक नई चुनौती खड़ी करता है। हालांकि कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह मामला राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा है।

    राहुल गांधी की ओर से हाईकोर्ट में राहत की उम्मीद की जा रही है, लेकिन कोर्ट की कार्यवाही अवकाश के कारण स्थगित है। आने वाले हफ्तों में यह देखना दिलचस्प होगा कि अदालत इस मामले में क्या रुख अपनाती है, और क्या राहुल गांधी को 26 जून को चाईबासा कोर्ट में पेश होना पड़ेगा या उन्हें राहत मिलती है।

  • रांची एयरपोर्ट पर बड़ा हादसा टला: पायलट की सूझबूझ से 175 यात्रियों की जान बची

    By The News Post4u.

    रांची: सोमवार को रांची के बिरसा मुंडा हवाई अड्डे पर एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया, जब पटना से आ रहा इंडिगो का एक विमान लैंडिंग से ठीक पहले पक्षी से टकरा गया। विमान में सवार सभी 175 यात्री पूरी तरह सुरक्षित हैं, और पायलट की सूझबूझ से विमान की आपात लैंडिंग कराई गई।

    एयरपोर्ट अधिकारियों के अनुसार, यह घटना दोपहर करीब 1:14 बजे घटी, जब एयरबस A320 विमान रांची एयरस्पेस में प्रवेश कर रहा था। उस समय विमान जमीन से लगभग 3000 से 4000 फीट की ऊंचाई पर, रनवे से करीब 10-12 नॉटिकल मील दूर था। अचानक एक गिद्ध से टक्कर हो गई, जिससे विमान की बाहरी संरचना को नुकसान पहुंचा।

    40 मिनट तक हवा में बनाए रखा नियंत्रण.
    पक्षी से टकराने के तुरंत बाद पायलट ने विमान को नियंत्रित रखा और आपातकालीन प्रोटोकॉल के तहत विमान को करीब 40 मिनट तक हवा में मंडराते हुए सुरक्षित स्थिति में लाया। इस दौरान एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) से सतत संपर्क बना रहा। आखिरकार पायलट ने अत्यंत सावधानीपूर्वक विमान की आपात लैंडिंग कराई।

    सिर्फ विमान को हुआ नुकसान, यात्री पूरी तरह सुरक्षित.
    विमानन अधिकारियों ने राहत की सांस लेते हुए बताया कि किसी भी यात्री को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। हालांकि, विमान के एक हिस्से में डेंट पाया गया है, जिसकी जांच एयरलाइंस के इंजीनियर कर रहे हैं। एयरपोर्ट निदेशक आर.आर. मौर्य ने बताया, “यह गनीमत रही कि केवल विमान को हल्का नुकसान हुआ, सभी यात्री पूरी तरह सुरक्षित हैं।”

    विमान की तकनीकी जांच जारी.
    फिलहाल विमान को तकनीकी जांच के लिए रनवे से हटा लिया गया है। विमानन विशेषज्ञ यह मूल्यांकन कर रहे हैं कि क्षति कितनी गंभीर है और विमान को दोबारा उड़ान के लिए कब तक तैयार किया जा सकता है।

    बर्ड हिट की घटनाओं पर बढ़ती चिंता.
    यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि हवाई अड्डों के आसपास पक्षियों की बढ़ती मौजूदगी विमानों की सुरक्षा के लिए कितनी गंभीर चुनौती बनती जा रही है। विशेष रूप से बड़े पक्षी, जैसे गिद्ध, विमान के इंजन या संरचना को गंभीर क्षति पहुँचा सकते हैं। इससे पहले भी कई बार बर्ड हिट की घटनाएं देश के विभिन्न एयरपोर्ट्स पर सामने आ चुकी हैं।
    इस घटना में कोई जानमाल का नुकसान नहीं हुआ, लेकिन यह घटना यह याद दिलाती है कि हवाई सुरक्षा में पायलटों की सतर्कता और तकनीकी कुशलता कितनी अहम होती है। साथ ही यह भी ज़रूरी है कि एयरपोर्ट्स के आसपास के क्षेत्रों में वन्यजीव नियंत्रण और निगरानी को और प्रभावी बनाया जाए।

  • हेमंत सरकार मुझे निशाना बनाने की  साजिश रच रही है – बाबूलाल मरांडी

    By The News Post4u.

    गिरिडीह : भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार पर सनसनीखेज आरोप लगते हुये कहा है कि  राज्य की वर्तमान हेमंत सरकार, अपराधियों के माध्यम से उन्हें, उनके परिजनों और करीबी सहयोगियों को निशाना बनाने की साजिश रच रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इसके लिए कुछ भ्रष्ट अधिकारियों को “सुपारी” तक दी जा रही है।

    सोमवार को गिरिडीह में मीडिया से बात करते हुये  मरांडी ने कहा, “मुझे विश्वसनीय सूत्रों से जानकारी मिली है कि राज्य सरकार के शीर्ष स्तर से जुड़े कुछ अत्यधिक भ्रष्ट और आपराधिक प्रवृत्ति वाले अधिकारी मेरे खिलाफ षड्यंत्र कर रहे हैं। वे न केवल मेरे ऊपर हमले की योजना बना रहे हैं, बल्कि मेरे परिजनों, निकट सहयोगियों को भी झूठे मामलों में फंसाने, चरित्र हनन करने और फर्जी स्टिंग ऑपरेशन के जरिए बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं।”

    उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ये सभी प्रयास उन्हें डराने और उनकी आवाज को दबाने के लिए हैं, क्योंकि उन्होंने लगातार राज्य में हो रहे भ्रष्टाचार और घोटालों का पर्दाफाश किया है।

    कई घोटालों को उजागर करने का दावा.
    मरांडी ने कहा कि उन्होंने झारखंड में चल रहे शराब घोटाले, बालू और पत्थर के अवैध खनन, जमीन और कोयले की तस्करी जैसे संगठित अपराधों को सार्वजनिक रूप से उजागर किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इन खुलासों से बौखला गई है और अब उन्हें चुप कराने की कोशिश में जुट गई है।

    पुरानी साजिशों का भी किया उल्लेख.
    मरांडी ने याद दिलाया कि पूर्व में भी उन पर शिकारीपाड़ा क्षेत्र में उग्रवादी हमला करवाने की साजिश रची गई थी, जिसकी जानकारी मिलने के बाद केंद्र सरकार ने उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी सीआरपीएफ को सौंपी थी। उन्होंने यह भी कहा कि उनके पुत्र के निधन के बाद भी वे अन्याय और भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करते रहे हैं।

    “डराएंगे नहीं, झुकाएंगे नहीं”
    बाबूलाल मरांडी ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “हम उन लाखों लोगों की आवाज हैं जो भ्रष्टाचार, दमन और भय की राजनीति से पीड़ित हैं। हम डरने वाले नहीं हैं, और न ही झुकेंगे। सरकार चाहे जितना भी षड्यंत्र कर ले, सच को दबाया नहीं जा सकता।”

    बाबू लाल मरंडी के इस गमम्भीर आरोप ने झारखंड की सियासत में नई हलचल पैदा कर दी है। अब देखना होगा कि राज्य सरकार और प्रशासन इस गंभीर आरोप का क्या जवाब देते हैं।

  • गिरिडीह: नए उपायुक्त का चैंबर ऑफ कॉमर्स ने किया स्वागत

    उद्योग व ट्रैफिक समस्याओं पर हुई चर्चा.

    By The News Post4u.

    गिरिडीह: जिला चैंबर ऑफ कॉमर्स का एक प्रतिनिधि मंडल सोमवार को गिरिडीह के नवपदस्थापित उपायुक्त राम निवास यादव से उनके कार्यालय कक्ष में मिला। इस अवसर पर चैंबर के सदस्यों ने उन्हें गुलदस्ता भेंट कर और शॉल ओढ़ाकर स्वागत और अभिनंदन किया।

    प्रतिनिधि मंडल में शामिल वरिष्ठ सदस्य अशोक जैन, अमरजीत सिंह और निर्मल झूञ्झुंवाला  ने शिष्टाचार मुलाकात के दौरान उपायुक्त से औद्योगिक और व्यापारिक जगत से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की। मुलाकात के दौरान गिरिडीह के औद्योगिक क्षेत्र में मौजूद ढांचागत चुनौतियाँ, माईका उद्योग से जुड़ी समस्याएँ, तथा शहर की मुख्य सड़कों पर बढ़ते अतिक्रमण और यातायात जाम जैसे अहम मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया।

    चैंबर के प्रतिनिधियों ने उपायुक्त को बताया कि कैसे इन समस्याओं का समाधान जिले के व्यापार और आम जनजीवन के लिए अत्यंत आवश्यक है। प्रतिनिधिमंडल में अशोक जैन,  अमरजीत सिंह, गुणवंत सिंह के अलावा  निर्मल विश्वकर्मा, प्रदीप अग्रवाल, प्रमोद कुमार, विकास खेतान, संजय भदौरिया, मुकेश जालान, सुनील मोदी, अभिषेक  बगेरिया  और श्री निर्मल सलामपुरिया समेत कई सदस्य उपस्थित रहे।

    उपायुक्त ने सभी मुद्दों को गंभीरता से सुना और त्वरित समाधान का आश्वासन दिया। उन्होंने प्रतिनिधियों से कहा कि जिला प्रशासन व्यापारिक संगठनों से निरंतर संवाद बनाए रखना चाहता है ताकि समस्याओं की जानकारी समय रहते मिले और गिरिडीह के समग्र विकास में कोई बाधा न आए। उन्होंने यह भी कहा कि जब भी चैंबर बैठक करना चाहे, प्रशासन उन्हें हर संभव सहयोग देगा। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जब भी जिला प्रशासन को चैंबर की आवश्यकता होगी, उन्हें आमंत्रित किया जाएगा।

    इस मुलाकात ने प्रशासन और व्यापारिक समुदाय के बीच सहयोग की एक सकारात्मक दिशा में कदम बढ़ाया है, जिससे आने वाले समय में गिरिडीह जिला औद्योगिक और सामाजिक विकास के नए आयाम छू सकेगा।

  • गिरिडीह :एजुकेशन मेले का आयोजन, छात्रों के करियर पर रहा फोकस

    By The News Post4u

    गिरिडीह: शहर के नगर भवन में शैक्षणिक दिशा और करियर निर्माण को समर्पित दो दिवसीय एजुकेशन मेला 2025 का आयोजन शनिवार से प्रारंभ हुआ। इस मेले का आयोजन HMT Hunt संस्था द्वारा किया गया, जिसका उद्घाटन दीप प्रज्वलन के साथ किया गया।

    इस अवसर पर कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि झामुमो के जिला अध्यक्ष संजय सिंह , कोडरमा सांसद प्रतिनिधि दिनेश यादव, डीएसपी कौसर अली, कांग्रेस नेता डॉ. समीर राज चौधरी, भाजपा नेता विनय सिंह, मुन्ना कुशवाहा, शाहनवाज अंसारी, कृष्ण मुरारी शर्मा समेत कई अन्य गणमान्य लोगों ने शिरकत की।

    विभिन्न राज्यों की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटीज और कॉलेजों की भागीदारी.

    एजुकेशन मेले की प्रमुख आयोजक सुमन गुप्ता ने जानकारी दी कि इस मेले में झारखंड सहित देश के विभिन्न राज्यों के प्रमुख विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के प्रतिनिधि शामिल हुए हैं। इन प्रतिनिधियों द्वारा छात्र-छात्राओं को करियर काउंसलिंग, सीधे प्रवेश (Direct Admission) की सुविधा और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जा रही है।

    छात्रों के लिए उपयोगी पहल.

    JMM नेता संजय सिंह ने इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि गिरिडीह में ऐसे आयोजनों की लगातार जरूरत है ताकि यहां के विद्यार्थियों को बड़े स्तर पर जानकारी और अवसर मिल सके। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सरकार की शैक्षणिक योजनाओं और सुविधाओं का लाभ भी ऐसे माध्यमों से बच्चों तक सीधे पहुंच सकता है।

    सांसद प्रतिनिधि दिनेश यादव ने एजुकेशन मेले में भाग लेने वाले सभी कॉलेज प्रतिनिधियों का आभार व्यक्त करते हुए विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

    कांग्रेस नेता डॉ. समीर राज चौधरी ने इसे छात्रों के हित में एक महत्वपूर्ण प्रयास बताया। उन्होंने बताया कि मेले में शामिल कॉलेज ई-कल्याण, स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना, और सरकारी छात्रवृत्ति योजनाओं के तहत भी प्रवेश और सहायता उपलब्ध करा रहे हैं।

    छात्रों की रही भागीदारी.

    कार्यक्रम के पहले दिन ही बड़ी संख्या में छात्र व छात्राएं शामिल  हुए। मेले का उद्देश्य इंटरमीडिएट के बाद छात्रों को सही दिशा दिखाना है। कई बार विद्यार्थी यह तय नहीं कर पाते कि आगे कौन-सा कोर्स या विषय चुनें — इस भ्रम को दूर करने के लिए विशेषज्ञ काउंसलर और कॉलेज प्रतिनिधि उनकी मदद कर रहे हैं। यह एजुकेशन मेला गिरिडीह के छात्रों के लिए न केवल जानकारी का एक महत्वपूर्ण स्रोत बन सकता है बल्कि उन्हें प्रत्यक्ष प्रवेश और छात्रवृत्ति जैसी सुविधाएं भी एक ही स्थान पर उपलब्ध हो इसका प्रयास किया गया है ।

  • मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना नया अपडेट:  जल्द मिलेंगे बकाया भुगतान

    परवेज़ आलम.

    रांची : झारखंड सरकार की मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना के तहत जनवरी से अब तक भुगतान से वंचित 20,100 से अधिक लाभुकों के लिए राहत की खबर है। महीनों से अटके उनके बकाया भुगतान का रास्ता अब साफ हो गया है, और संभावना है कि अगले एक-दो दिनों में यह राशि उनके बैंक खातों में भेज दी जाएगी।

    77 हजार लाभुकों की सूची थी होल्ड में.

    गौरतलब है कि मार्च माह में राज्य सरकार ने योजना के अंतर्गत दो लाख से अधिक लाभुकों को 7500-7500 रुपये की राशि एकमुश्त दी थी, जो तीन महीनों (जनवरी से मार्च) का भुगतान था। लेकिन तकनीकी कारणों से करीब 77 हजार लाभुकों का भुगतान अस्थायी रूप से रोक दिया गया था।

    राज्य की सामाजिक सुरक्षा निदेशालय की ओर से लगातार सत्यापन प्रक्रिया चलती रही। अब उस सूची से 20,100 लाभुकों को वैध पाया गया, यानी उनका सत्यापन सफल रहा और उन्हें भुगतान देने की मंजूरी मिल गई है।

    तकनीकी गड़बड़ियों से अटका था भुगतान.

    विभागीय सूत्रों के अनुसार, जिन लाभुकों का भुगतान रोका गया था, उनमें अधिकतर मामलों में आधार संख्या बैंक खाते से लिंक नहीं थी। कई जगह एक ही बैंक खाता कई लाभुकों के नाम से जुड़ा मिला, जो DBT (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) नियमों के विरुद्ध है। कुछ के आधार या खाता संख्या में त्रुटियां थीं। अब इन त्रुटियों को सुधार लिया गया है।

    अब मिल सकता है एकमुश्त चार महीने का भुगतान.

    जिन लाभुकों को दिसंबर में योजना की पहली किस्त (₹2500) मिली थी लेकिन जनवरी से अब तक कोई राशि नहीं मिली, उन्हें इस बार ₹10,000 तक मिलने की संभावना है। यह राशि चार महीनों (जनवरी से अप्रैल) की एकमुश्त भुगतान के रूप में मिल सकती है।

    अप्रैल और मई की राशि भी बकाया, आदेश का इंतजार.

    सामाजिक सुरक्षा विभाग ने बताया कि अप्रैल माह की सम्मान राशि के भुगतान की भी पूरी तैयारी कर ली गई है, लेकिन राज्य मुख्यालय से औपचारिक आदेश अभी तक प्राप्त नहीं हुआ है। इसी वजह से लाभुकों के खाते में अब तक अप्रैल-मई की राशि नहीं भेजी जा सकी है।

    हालांकि विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस योजना में धन की कोई कमी नहीं है। सरकार की ओर से इस मद में 550 करोड़ रुपये जिला प्रशासन को आवंटित किए जा चुके हैं।

    यदि दो दिनों के भीतर भुगतान प्रक्रिया शुरू नहीं होती, तो जून की राशि भी बकाया में जुड़ जाएगी। ऐसे में सरकार को एक साथ तीन महीनों का भुगतान फिर से करना पड़ सकता है, जिससे वित्तीय और प्रशासनिक दबाव और बढ़ सकता है।
    मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना राज्य की महिलाओं के लिए शुरू की गई एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसके तहत पात्र लाभुकों को प्रति माह ₹2500 की राशि दी जाती है, ताकि वे आर्थिक रूप से सशक्त बन सकें।

     

  • झारखंड: एनआईए ने तीन नक्सलियों के खिलाफ दाखिल की चार्जशीट

    वसूली और जबरन भर्ती की साजिश में थे शामिल.

    By The News Post4u

    रांची :झारखंड में नक्सली गतिविधियों पर कड़ा प्रहार करते हुए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने वसूली, धमकी और नक्सली संगठन में जबरन भर्ती कराने जैसे गंभीर आरोपों में तीन माओवादियों के खिलाफ पूरक आरोपपत्र (Supplementary Chargesheet) दाखिल किया है। यह चार्जशीट रांची स्थित एनआईए की विशेष अदालत में पेश की गई।

    चार्जशीट के अनुसार, आरोपितों में कृष्णा हांसदा उर्फ सौरव दा उर्फ अविनाश दा, अभिजीत कोरा उर्फ मतला कोरा उर्फ सुनील कोरा, और रामदयाल महतो उर्फ नीलेश दा उर्फ बच्चन दा शामिल हैं। ये सभी वर्ष 2023 में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) की ओर से रची गई आतंकवादी साजिश में शामिल थे।

    आरोपितों की भूमिका:

    • कृष्णा हांसदा — भाकपा (माओवादी) की क्षेत्रीय समिति का सदस्य था।
    • अभिजीत कोरा — संगठन के सशस्त्र कैडर में शामिल था और बिहार का निवासी है।
    • रामदयाल महतो — विशेष क्षेत्रीय समिति का सदस्य था और झारखंड का निवासी है।

    एनआईए की जांच में सामने आया कि तीनों अभियुक्त गिरिडीह जिले के पारसनाथ इलाके में संगठन की ओर से चल रही अवैध वसूली, धमकी और युवाओं को जबरन माओवादी संगठन में भर्ती करने की साजिश में सक्रिय रूप से शामिल थे। यह इलाका लंबे समय से नक्सली गतिविधियों का गढ़ रहा है।

    गिरफ्तारी और जब्ती:

    जनवरी 2023 में गिरिडीह जिले के डुमरी थाना क्षेत्र के अंतर्गत लुसियो जंगल से कृष्णा हांसदा की गिरफ्तारी हुई थी। पुलिस ने उसके पास से जबरन वसूली से संबंधित नकदी, 7.65 मिमी की एक पिस्तौल और कई संदिग्ध दस्तावेज बरामद किए थे। प्रारंभिक कार्रवाई के तहत स्थानीय पुलिस ने हांसदा, कोरा, महतो और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी।

    एनआईए की जांच:

    इस मामले को जून 2023 में एनआईए ने अपने हाथ में लेते हुए पुनः पंजीकृत किया और विस्तृत जांच शुरू की। अब तक की जांच में तीनों अभियुक्तों की भूमिकाओं को पुख्ता मानते हुए यह पूरक आरोपपत्र दाखिल किया गया है।

    एनआईए के अनुसार, यह केस सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं बल्कि एक संगठित और सुनियोजित साजिश का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य राज्य में भय और अस्थिरता फैलाना था।

  • राज्य मे जल्द निकाय चुनाव नहीं हुये तो झारखंड को 1500 करोड़ का हो सकता है नुकसान?

    वित्त आयोग की चेतावनी, चुनाव न कराने पर अटक सकती है केंद्र से झारखंड को मिलने वाली सहायता राशि !

    विशेष राज्य का दर्जा या विशेष पैकेज वित्त आयोग के दायरे में नहीं ।

    परवेज़ आलम.

    रांची:  झारखंड सरकार के लिए एक बड़ा अलर्ट आया है। 16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष डॉ. अरविंद पनगढ़िया ने स्पष्ट शब्दों में कह दिया है कि यदि राज्य सरकार दिसंबर 2025 तक नगर निकाय और पंचायत चुनाव नहीं कराती है, तो केंद्र से मिलने वाली बकाया वित्तीय सहायता की राशि लैप्स हो सकती है। यह रकम कोई मामूली राशि नहीं, बल्कि लगभग 1500 करोड़ रुपये है।

    रांची के होटल रेडिसन ब्लू में मीडिया कर्मियों से मुखातिब होते हुये  डॉ. पनगढ़िया ने कहा कि चुनावों की गैर-हाजिरी में केंद्र से राशि जारी नहीं हो सकती, क्योंकि इसका वितरण संविधान और आयोग की गाइडलाइन से बंधा है। यदि तय समय-सीमा के भीतर स्थानीय निकाय चुनाव करवा दिए जाते हैं, तो झारखंड को पिछला बकाया भी मिल सकता है।

    विशेष राज्य का दर्जा नहीं देगा आयोग के अधिकार क्षेत्र से बाहर.  

    डॉ. पनगढ़िया ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि विशेष राज्य का दर्जा या विशेष पैकेज देना वित्त आयोग के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। उन्होंने यह बात ऐसे समय पर कही, जब झारखंड सरकार की ओर से यह मांग की जा रही है कि राज्य को उसकी अनूठी परिस्थितियों और समस्याओं को देखते हुए अतिरिक्त सहायता दी जाए।

    उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा अनुदान की जो राशि मांगी जाती है, वह केंद्रीय बजट के जरिए सशर्त मिलती है, और इसके भुगतान में होने वाली देरी पर वित्त आयोग का कोई सीधा हस्तक्षेप नहीं होता।

    राज्य की कमजोर आर्थिक स्थिति पर चिंता, पर सराहना भी.

    डॉ. पनगढ़िया ने झारखंड के वित्तीय प्रबंधन की सराहना तो की, लेकिन साथ ही यह भी बताया कि राज्य अभी भी कई सामाजिक-आर्थिक मानकों पर पिछड़ा हुआ है। उन्होंने बताया कि झारखंड की प्रति व्यक्ति आय देश में तीसरे सबसे निचले पायदान पर है, जहां उत्तर प्रदेश पहले और बिहार दूसरे स्थान पर हैं।

    जीएसटी लागू होने से राजस्व में हुए नुकसान को झारखंड ने आयोग के समक्ष एक नई मांग के रूप में रखा है। राज्य सरकार ने इस नुकसान की भरपाई के लिए वित्तीय फॉर्मूले में बदलाव की अपील की है, जिसे आयोग ने केवल ‘प्रस्ताव‘ के रूप में नोट किया है। कोई भी निर्णय आयोग के निर्धारित फॉर्मूले के आधार पर ही लिया जाएगा।

    झारखंड ने रखी 3.03 लाख करोड़ की मांग, राज्य का पक्ष मजबूत.

    राज्य सरकार ने वित्त आयोग के सामने 2026 से 2031 तक के लिए 3,03,527.44 करोड़ रुपये की मांग रखी है। यह मांग राज्य के 23 विभागों के सुझावों के आधार पर तैयार की गई है। इसके अलावा, केंद्रीय करों में हिस्सेदारी को 41% से बढ़ाकर 55% करने की भी अपील की गई है।

    राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि जीएसटी क्षतिपूर्ति बंद होने से झारखंड को गंभीर नुकसान हो रहा है। उन्होंने बताया कि 2025-30 के बीच राजस्व में लगभग 61,677 करोड़ रुपये की हानि का अनुमान है।

    वित्त मंत्री ने पूर्ववर्ती 15वें वित्त आयोग का उदाहरण देते हुए कहा कि तब झारखंड ने 1.5 लाख करोड़ रुपये की मांग की थी, लेकिन सिर्फ 12,398 करोड़ रुपये ही मिले थे, जिससे विकास कार्यों पर प्रतिकूल असर पड़ा।

    प्राकृतिक संसाधनों वाला राज्य, लेकिन सड़कें नहीं.

    राज्य सरकार ने वन क्षेत्रों के आधार पर होने वाले राजस्व वितरण फार्मूले में संशोधन की मांग की है। उन्होंने कहा कि खुले वनों को भी सघन वनों की तरह गणना में लाया जाए। साथ ही झारखंड में 14.19 लाख हेक्टेयर भूमि पर सिंचाई क्षमता विकसित करने के लिए भी अतिरिक्त सहायता मांगी गई है।

    राज्य के सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थिति भी चिंताजनक बताई गई। राष्ट्रीय औसत जहां 500 किमी प्रति 1000 वर्ग किमी है, वहीं झारखंड में यह मात्र 186 किमी है। खनिज संपदा से भरपूर राज्य होने के बावजूद खनिज ढुलाई के लिए पर्याप्त सड़क नेटवर्क नहीं है।

    बकाया राशि नहीं मिलने से योजनाएं प्रभावित.

    राज्य सरकार ने केंद्र से कुछ प्रमुख मदों में बकाया राशि की ओर भी ध्यान दिलाया:

    • कोयला कंपनियों से: ₹1.36 लाख करोड़
    • जल जीवन मिशन में: ₹5,235 करोड़
    • मनरेगा में: ₹1,300 करोड़

    राज्य सरकार का कहना है कि इन बकाया राशि के अभाव में कई विकास योजनाएं ठप पड़ी हैं।

    ‘भेदभाव नहीं हो‘, स्थानीय निकायों के लिए राशि जारी हो: नगर विकास मंत्री.

    नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने आयोग से आग्रह किया कि स्थानीय निकायों की राशि को रोका न जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि 20-25% राशि रोककर शेष राशि जारी की जा सकती है, ताकि स्थानीय विकास कार्य बाधित न हों।

    उन्होंने झारखंड की वास्तविक चुनौतियों — जैसे कि प्रदूषण, उग्रवाद, बेरोजगारी और विस्थापन — की ओर भी आयोग का ध्यान खींचा।

    31 अक्टूबर तक सौंप दी जाएगी अंतिम रिपोर्ट.

    वित्त आयोग की अंतिम रिपोर्ट 31 अक्टूबर 2025 तक राष्ट्रपति को सौंपी जाएगी। इस बीच आयोग ने झारखंड के पब्लिक सेक्टर उपक्रमों (PSUs) की वर्षों से लंबित ऑडिट रिपोर्टों पर भी चिंता जताई है। डॉ. पनगढ़िया ने इसे वित्तीय पारदर्शिता के लिए गंभीर खतरा बताया और राज्य सरकार को इस पर तत्काल कार्रवाई करने की सलाह दी।

    इस दौरे के दौरान वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर, नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू, उत्पाद मंत्री योगेंद्र प्रसाद और पूर्व वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों ने विस्तृत ज्ञापन के जरिए आयोग के समक्ष झारखंड की जरूरतें और अपेक्षाएं रखीं।

    वित्त आयोग से अनुदान की मांग.

    बैठक के बाद मीडियाकर्मियों से बात करते हुए नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से तीन लाख तीन हजार करोड़ की मांग से संबंधित प्रतिवेदन सौंपी गई है. उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य से लेकर शिक्षा एवं आधारभूत संरचना जो राज्य सरकार की प्राथमिकता में है उसको लेकर वित्त आयोग से अनुदान की मांग की गई है.

    सुदिव्य कुमार ने कहा कि मुझे उम्मीद है कि भारत सरकार की यह संवैधानिक संस्था केंद्र सरकार के समक्ष सकारात्मक सोच के साथ हमारी मांग को पहुंचाने में मदद करेगा. उत्पादक राज्य होने के कारण झारखंड को होने वाले घाटे को भी वित्त आयोग के समक्ष प्रमुखता से रखा गया है और जो मांगे रखी गई है उसे आप विशेष पैकेज माने या अनुदान की राशि राज्य सरकार ने बड़े ही तर्कपूर्ण ढंग के साथ इसे रखा है. वित्त आयोग ने भी हमें भरोसा दिया है कि उनकी मांगों पर सकारात्मक रूप से विचार होगा.

  • धनबाद में अवैध हथियार फैक्ट्री का भंडाफोड़, ATS की कार्रवाई में पांच गिरफ्तार

    By The News Post4u.
    धनबाद/कोलकाता : झारखंड के धनबाद जिले के महुदा थाना क्षेत्र अंतर्गत सिंगड़ा बस्ती में बुधवार देर रात अवैध हथियारों के बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। पश्चिम बंगाल की एंटी टेररिज्म स्क्वॉड (ATS) और झारखंड एटीएस की संयुक्त टीम ने एक मकान में संचालित हो रही अवैध मिनी गन फैक्ट्री पर छापेमारी कर बड़ी मात्रा में हथियार और हथियार निर्माण के उपकरण जब्त किए हैं। इस कार्रवाई में फैक्ट्री का संचालन कर रहे मास्टरमाइंड मुर्शिद अंसारी समेत कुल पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार लोगों में चार आरोपी बिहार के मुंगेर जिले से हैं, जो अवैध हथियार निर्माण के लिए पहले से बदनाम है।
    ATS को अर्श मोहम्मद से मिली अहम जानकारी.
    सूत्रों के मुताबिक, यह छापेमारी पश्चिम बंगाल में पहले से चल रही एक जांच के आधार पर की गई। कुछ दिन पहले पश्चिम बंगाल एटीएस ने अर्श मोहम्मद नामक एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया था, जो अवैध हथियारों के कच्चे माल की सप्लाई से जुड़ा हुआ था। अर्श से पूछताछ में यह खुलासा हुआ कि धनबाद के महुदा क्षेत्र में एक अवैध गन फैक्ट्री चलाई जा रही है, जिसके बाद बंगाल एटीएस ने झारखंड एटीएस से समन्वय कर संयुक्त कार्रवाई की।
    हथियार निर्माण करते रंगे हाथ पकड़े गए कारीगर.
    बुधवार रात की छापेमारी के समय, फैक्ट्री में मौजूद चारों कारीगर हथियार निर्माण में व्यस्त थे। कार्रवाई इतनी त्वरित और योजनाबद्ध थी कि आरोपियों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। दिलचस्प बात यह रही कि जब एटीएस टीम ने इनसे पूछताछ के दौरान हथियार बनाने की प्रक्रिया समझनी चाही, तो कारीगरों ने मौके पर ही कुछ मिनटों में चार पिस्तौल तैयार कर टीम को दिखा दिए। यह देखकर एटीएस के अधिकारी भी हैरान रह गए।
    तीन हजार से अधिक हथियार जब्त होने की आशंका.
    एटीएस और पुलिस सूत्रों के अनुसार, मौके से भारी मात्रा में निर्मित और अर्द्धनिर्मित हथियार बरामद हुए हैं। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार इनकी संख्या लगभग तीन हजार हो सकती है, हालांकि पुलिस ने इस संख्या की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। इसके अलावा मौके से बैरल, लेथ मशीन, ड्रिल मशीन, ग्राइंडर, ग्रुप कटर, हेक्सा ब्लेड, गेज जैसे औजार तथा लोहा, तांबा, पीतल आदि धातुएं भी बरामद की गई हैं।
    महिला हिरासत में, अंतरराज्यीय तस्करी की जांच शुरू.
    इस मामले में मुर्शिद अंसारी की पत्नी हिना परवीन को भी हिरासत में लिया गया है। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि इस गन फैक्ट्री में बने हथियार किन-किन राज्यों में सप्लाई किए गए। प्राथमिक जांच में सामने आया है कि पश्चिम बंगाल में हाल ही में हुई एक आपराधिक घटना में महुदा में बने हथियारों का इस्तेमाल हुआ था, जिससे इस नेटवर्क का सुराग मिला।
    फैक्ट्री चलाने वाला गिरोह तकनीकी रूप से दक्ष.
    गिरफ्तार कारीगर बिहार के मुंगेर जिले से हैं, जो देश में अवैध हथियार निर्माण का कुख्यात केंद्र माना जाता है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, ये सभी व्यक्ति तकनीकी रूप से अत्यंत दक्ष हैं और सुनियोजित तरीके से अवैध हथियार तैयार करते थे। यह गिरोह लंबे समय से अंतरराज्यीय स्तर पर हथियारों की आपूर्ति कर रहा था।
    मौके पर भारी पुलिस बल तैनात.
    छापेमारी के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। बाघमारा के डीएसपी पुरुषोत्तम कुमार सिंह, स्थानीय थाना पुलिस के अधिकारी, एटीएस के इंस्पेक्टर मंगल हेम्ब्रम, समीर भगत समेत सैकड़ों जवान मौजूद थे।
    पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी एटीएस.
    फिलहाल गिरफ्तार आरोपियों से गहन पूछताछ जारी है। पुलिस इस पूरे नेटवर्क के मास्टरमाइंड, हथियारों के खरीदारों और सप्लाई चैन की विस्तृत जानकारी जुटाने में लगी है। एटीएस सूत्रों का मानना है कि यह महज एक केंद्र नहीं, बल्कि एक बड़े अंतरराज्यीय हथियार तस्करी नेटवर्क का हिस्सा है।

  • हेमंत मंत्रिमंडल में राजद कोटे के मंत्री संजय यादव की कुर्सी खतरे मे है ?

    महागठबंधन की अंदरूनी राजनीति से संतुष्ट नहीं है JMM.

    बिहार चुनाव: टकराव की दिशा में बढ़ रही है सियासत।

    परवेज़ आलम.

    हेमंत मंत्रिमंडल में राजद कोटे के मंत्री संजय यादव की कुर्सी खतरे मे है ? क्या कैबिनेट से उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा ? क्या जेएमएम बिहार चुनाव से पहले महागठबंधन से अलग हो जाएगा ? दरअसल झारखंड की सियासत में इन दिनों यह सवाल लगातार उछाले जा  रहें हैं । खासकर बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले ? यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि JMM की ओर से संकेत मिल रहे हैं कि महागठबंधन की अंदरूनी राजनीति से वह संतुष्ट नहीं है, और स्थिति नहीं संभली तो राजद कोटे से मंत्री संजय यादव की झारखंड कैबिनेट से छुट्टी हो जाएगी ।

    दरअसल, हाल ही में JMM ने एक आधिकारिक बयान जारी कर यह साफ कर दिया है कि वह बिहार में राजद के रवैये से बेहद नाराज है। पार्टी ने दो टूक शब्दों में कहा है कि अगर उन्हें बिहार विधानसभा चुनाव में “सम्मानजनक भागीदारी” नहीं दी गई, तो वह 12 से 15 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारकर अकेले चुनाव लड़ेगी।

    JMM महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि महागठबंधन की किसी बैठक में पार्टी को शामिल नहीं किया गया है, यहां तक कि गठित की गई 21 सदस्यीय समन्वय समिति में भी JMM को कोई स्थान नहीं मिला। इससे पार्टी खुद को “उपेक्षित और तिरस्कृत” महसूस कर रही है।

    पार्टी ने 2019 के झारखंड विधानसभा चुनावों की याद दिलाई, जब सीमित सीटों पर चुनाव लड़ने के बावजूद JMM ने राजद को मंत्री पद दिया था। लेकिन अब बिहार में JMM की अनदेखी की जा रही है, जो पार्टी को मंजूर नहीं है।

    बॉर्डर बेल्ट पर JMM की नजर

    JMM ने साफ तौर पर संकेत दिया है कि वह बिहार-झारखंड सीमावर्ती इलाकों — जैसे चकाई, झाझा, तारापुर, कटोरिया, बांका, मनिहारी, रूपौली, बनमनखी, जमालपुर और धमदाहा — में चुनाव लड़ना चाहती है। इन क्षेत्रों में झारखंडी संस्कृति, भाषा और आदिवासी पहचान की मजबूत मौजूदगी है, जिसका राजनीतिक लाभ JMM उठाना चाहती है।

    पार्टी के सूत्रों के मुताबिक, JMM का असली मकसद 4-5 सीटों की सम्मानजनक साझेदारी है, लेकिन ज्यादा सीटों की मांग कर वो राजनीतिक दबाव बना रही है। अगर बातचीत नहीं बनी, तो पार्टी सीमावर्ती सीटों पर राजद को सीधी चुनौती दे सकती है, और इसके झारखंड सरकार में भी असर दिख सकता है — खासकर संजय यादव की कैबिनेट में मौजूदगी पर।

    JMM का राष्ट्रीय विस्तार का एजेंडा

    झामुमो सिर्फ बिहार तक ही सीमित नहीं रहना चाहता। हाल ही में संपन्न पार्टी के केंद्रीय अधिवेशन में यह स्पष्ट कर दिया गया कि JMM अब राष्ट्रीय पहचान बनाना चाहता है। इसके तहत पार्टी बिहार के अलावा पश्चिम बंगाल, ओडिशा, असम और छत्तीसगढ़ में भी अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है।

    गौरतलब है कि अतीत में JMM का ओडिशा में छह विधायक, बिहार में एक विधायक और एक सांसद भी रह चुका है। ऐसे में पार्टी को भरोसा है कि सीमावर्ती इलाकों में उसकी पैठ उसे क्षेत्रीय से राष्ट्रीय स्तर तक ले जा सकती है।

    राजद और JMM की पुरानी साझेदारी

    JMM ने यह भी याद दिलाया कि 2024 में तेजस्वी यादव और राजद सांसद मनोज झा ने रांची आकर कई दिनों

     तक रणनीतिक बैठकों में हिस्सा लिया था। तब महागठबंधन के तहत राजद को छह सीटें मिली थीं और मंत्री पद भी। JMM को उम्मीद है कि बिहार में भी उसे उसी स्तर की हिस्सेदारी दी जाएगी।

    क्या बदलेगा बिहार का राजनीतिक समीकरण?

    JMM की सक्रियता और खुले तेवरों ने बिहार की राजनीति में एक नई हलचल पैदा कर दी है। खासकर सीमावर्ती क्षेत्रों में, जहां JMM की प्रभावशाली पकड़ है, वहां उसका अकेले उतरना राजद के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। अब देखना यह है कि आने वाले दिनों में सीटों के तालमेल को लेकर JMM और राजद के बीच कोई सहमति बनती है या फिर टकराव की दिशा में सियासत आगे बढ़ती है।