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  • मंत्री सोनू ने किया मृतक दामोदर के परिवार को आर्थिक मदद

    गिरिडीह : मुफस्सिल थाना क्षेत्र के चिलगा गांव में बीते दिनों हुई चाकूबाजी की घटना में मारे गए दामोदर यादव के परिवार को नगर विकास और पर्यटन मंत्री सुदिब्य कुमार सोनू ने तीन लाख रुपये की आर्थिक मदद दी गई। मंत्री सोनू ने पीड़ित परिवार से मिलकर पहुंचे और उन्हें हर संभव मदद का भरोसा दिया । इसके अलावा मंत्री के निर्देश पर झारखंड मुक्ति मोर्चा ने ₹50,000 और सीसीएल (सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड) की ओर से ₹2.5 लाख की भी मदद पीड़ित परिवार को दी गयी । मंत्री ने अम्बेडकर आवास योजना के तहत घर, बेटी की शिक्षा का खर्च और बेटे को नौकरी दिलाने का आश्वासन भी दिया।

    बता दें कि अपराधियों द्वारा चाकूबाजी की घटना में घायल दामोदर यादव का इलाज के दौरान बीते दिनों निधन हो गया था। यह घटना पूरे क्षेत्र में शोक और आक्रोश का कारण बनी थी और विरोधी दल इसपर राजनीति भी शुरू कर दिया था पर मंत्री और स्थानीय विधायक सोनू की इस पहल ने विरोधियों की मंशा को फुस्स कर दिया ।
    मंत्री जी के दौरे के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण और स्थानीय लोग मौजूद थे । परिवार ने सरकारी मदद और मंत्री के आश्वासनों पर आभार व्यक्त किया। वहीं, ग्रामीणों ने भी मंत्री को धन्यवाद देते हुए अपराधियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
    यह पहल पीड़ित परिवार को राहत देने के साथ ही सरकार की संवेदनशीलता को भी दर्शाती है।

     

  • ग्रामीण विकास योजनाओं की समीक्षा : मंत्री का सख्त निर्देश

     

    गिरिडीह : गिरिडीह में ग्रामीण विकास विभाग और पंचायती राज विभाग की विभिन्न योजनाओं की समीक्षा बैठक मंत्री श्रीमती दीपिका पांडे सिंह की अध्यक्षता में आयोजित की गई। इस बैठक में उप विकास आयुक्त, सदर अनुमंडल पदाधिकारी, कार्यपालक अभियंता समेत जिले के सभी प्रमुख अधिकारी और कर्मी उपस्थित थे।

    बैठक में मंत्री ने विभागीय योजनाओं की अद्यतन स्थिति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि निर्धारित लक्ष्यों को समय पर और पारदर्शिता के साथ पूरा किया जाए। उन्होंने मनरेगा, अबुआ आवास योजना, और झारखंड मुख्यमंत्री मईयां सम्मान योजना की प्रगति की विशेष रूप से समीक्षा की।

    मुख्य निर्देश और चर्चा के बिंदु:

    1. मनरेगा और आवास योजना: मंत्री ने इन योजनाओं के तय लक्ष्य को शीघ्र पूरा करने के आदेश दिए।
    2. लाभुकों को समय पर लाभ: उन्होंने जोर दिया कि योजनाओं का लाभ प्राथमिकता के साथ लाभुकों तक पहुंचे।
    3. झारखंड मुख्यमंत्री मईयां सम्मान योजना: 28 तारीख को आयोजित कार्यक्रम में लाभुकों की संख्या सुनिश्चित करने के लिए प्रखंड अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए।

    बैठक के दौरान सभी बिंदुओं पर विचार-विमर्श किया गया और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अधिकारियों को जवाबदेह बनाने की बात कही गई। श्रीमती दीपिका पांडे सिंह ने पारदर्शी और प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने पर बल देते हुए कहा, “ग्रामीण विकास योजनाएं ग्रामीणों के जीवन में बदलाव लाने का माध्यम हैं, और इन्हें समय पर पूरा करना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए।”

    ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग की योजनाओं की सफलता सुनिश्चित करने के लिए यह बैठक एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा रही है।

     

  • बेटियां को समझाया गया कानून की बारीकियाँ

    गिरिडीह: नालसा नई दिल्ली और झालसा रांची के निर्देशानुसार चल रहे 90 दिवसीय जागरूकता एवं आउटरीच अभियान के तहत मंगलवार को सदर प्रखंड के SSSGDNF गर्ल्स हाई स्कूल, पचम्बा में विशेष कानूनी जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में लीगल लिटरेसी क्लब की छात्राओं को कानून से जुड़ी अहम जानकारियां दी गईं।

    बाल विवाह निषेध अधिनियम पर चर्चा। 
    कार्यक्रम का मुख्य विषय था बाल विवाह निषेध अधिनियम। पैनल अधिवक्ता बिपिन कुमार यादव ने बच्चियों को इस कानून के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि बाल विवाह न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि यह बच्चियों के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास को भी प्रभावित करता है।

    जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की भूमिका पर प्रकाश। 
    पीएलवी (पैरा लीगल वॉलंटियर) कामेश्वर कुमार ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यों और कार्यालय की भूमिका के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कैसे यह संस्था समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों को न्याय दिलाने में मदद करती है।

    बाल विवाह के दुष्परिणामों पर विशेष फोकस। 
    पीएलवी गुफरान आलम ने बाल विवाह के गंभीर दुष्परिणामों को रेखांकित किया। उन्होंने छात्राओं को समझाया कि बाल विवाह से उनके स्वास्थ्य, शिक्षा और आत्मनिर्भरता पर कैसे नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

    कार्यक्रम को सफल बनाने में सभी का योगदान। 
    कार्यक्रम में पीएलवी मुकेश कुमार का सहयोग विशेष रूप से सराहनीय रहा। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार पांडेय के निर्देशन में यह अभियान चलाया जा रहा है।

    छात्राओं ने दिखाई जागरूकता की उत्सुकता। 
    इस अवसर पर छात्राओं ने कानून से जुड़ी अपनी शंकाओं को पैनल के समक्ष रखा। विशेषज्ञों ने सरल और प्रभावी ढंग से उनके सवालों का जवाब दिया।

    समाज में बदलाव की ओर एक कदम।
    कानूनी जागरूकता कार्यक्रम का यह आयोजन न केवल छात्राओं को सशक्त बना रहा है, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। पचम्बा की बेटियां अब कानून की रोशनी से अपने अधिकारों को पहचानने और उनका उपयोग करने को तैयार हैं।

  • सभी औद्योगिक इकाइयों को इलेक्ट्रोस्टैटिक प्रेसिपिटेटर (ESP) मशीन लगाना आवश्यक –डीसी

    गिरिडीह जिले में अवैध बालू खनन, डंपिंग और स्टोन माइंस के संचालन पर गहन जांच और कारखानों से निकलने लने वाले धुएं व दूषित जल के निष्पादन में प्रदूषण नियंत्रण के मानकों का पालन सुनिश्चित करने का निर्देश गिरिडीह डीसी नमन प्रियेश लकड़ा ने दिया है । उन्होंने सभी औद्योगिक इकाइयों में इलेक्ट्रोस्टैटिक प्रेसिपिटेटर (ESP) मशीन लगाने के निर्देश भी दिए। गिरिडीह के समाहरणालय सभागार में मंगलवार को जिला स्तरीय पर्यावरण समिति की बैठक अध्यक्षता उपायुक्त-सह-अध्यक्ष, जिला पर्यावरण समिति नमन प्रियेश लकड़ा ने की। बैठक में पूर्व में दिए गए निर्देशों के अनुपालन की समीक्षा हुई और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा की गई।
    उसरी नदी के संरक्षण पर विशेष जोर।
    बैठक का एक मुख्य एजेंडा था उसरी नदी का संरक्षण। उपायुक्त ने इस नदी की सफाई और संरक्षण के लिए सीएसआर फंड के उपयोग की समीक्षा की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि इस फंड का प्रभावी और पारदर्शी तरीके से क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही, नदी में गंदे नालों का पानी फिल्टर करने के बाद ही प्रवाहित करने की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए।
    पर्यावरण संरक्षण और हरित उपायों पर फोकस।
    बैठक में औद्योगिक परिसरों में पौधारोपण और प्रदूषण नियंत्रण के मानकों का पालन करने पर जोर दिया गया। अस्पतालों, होटलों और रेस्तरां को भी प्रदूषण नियंत्रण से संबंधित अनुमति प्राप्त करने के निर्देश दिए गए। इसके साथ ही, एयर क्वॉलिटी इंडेक्स डिस्प्ले स्क्रीन लगाने का प्रस्ताव रखा गया, ताकि नागरिकों को वायु गुणवत्ता की स्थिति की जानकारी मिल सके।
    प्रमुख अधिकारी थे मौजूद।
    बैठक में पूर्वी वन प्रमंडल पदाधिकारी, उप विकास आयुक्त, सदर अनुमंडल पदाधिकारी समेत कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। पर्यावरण संरक्षण से जुड़े इस महत्त्वपूर्ण संवाद में सभी संबंधित विभागों के समन्वय पर जोर दिया गया।

  • भीख मांगने की आड़ में चोरी का खेल, सीसीटीवी ने खोली पोल

    गिरिडीह: दो मासूम बच्चों को साथ लेकर घर-घर भीख मांगने के बहाने दिनदहाड़े चोरी करने वाली महिला को आखिरकार नगर थाना की पुलिस ने धर दबोचा। पावर हाउस मोड़, बरगंडा रोड पर सोमवार को सीसीटीवी फुटेज की मदद से इस संदिग्ध महिला को गिरफ्तार किया गया।

    क्या है मामला?
    इन दिनों गिरिडीह नगर थाना क्षेत्र में एक महिला द्वारा भीख मांगने की आड़ में चोरी की घटनाओं ने हड़कंप मचा दिया था।

    महिला पर आरोप है कि उसने मकतपुर रोड स्थित एसबीआई गली और आजाद नगर के घरों में चोरी की वारदातों को अंजाम दिया।
    इन घटनाओं में नकद और जेवरात गायब होने की शिकायतें दर्ज की गई थीं।
    बीएनएस डीएवी स्कूल की शिक्षिका ने बताया कि उनके घर में भी चोरी हुई, जब उनका बेटा छत पर था। सीसीटीवी फुटेज में महिला अपने बच्चों के साथ घर से निकलती हुई दिखी।
    पुलिस की कार्रवाई. 

    नगर थाना पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण करने के बाद महिला को गिरफ्तार किया।पुलिस का दावा है कि फुटेज में दिखने वाली यही महिला थी, जो शातिर अंदाज़ में चोरी की वारदातों को अंजाम देती थी।
    पुलिस का आरोप और पीड़ितों का बयान. 
    डीएवी स्कूल की शिक्षिका और अन्य पीड़ितों ने सीसीटीवी फुटेज में महिला की पहचान की है।
    शिक्षिका ने कहा, “चोरी के समय घर पर कोई नहीं था। फुटेज में महिला को बच्चों के साथ निकलते देखा गया।”
    पिछले घटनाक्रम.
    महिला पर डीएवी प्रिंसिपल मनीष सिन्हा और संतोष तुरी के घर चोरी करने का भी आरोप है।इन घटनाओं में नगद और जेवरात चोरी हुए थे।
    पुलिस का मानना है कि महिला लंबे समय से इस तरह की घटनाओं को अंजाम दे रही थी। नगर थाना की टीम अब इस महिला से गहन पूछताछ कर रही है।चोरी के नेटवर्क और अन्य वारदातों में उसकी संलिप्तता की जांच की जा रही है।
    पुलिस यह भी पता लगा रही है कि महिला के साथ कोई अन्य व्यक्ति इस अपराध में शामिल है या नहीं।
    आखिरी सवाल. 
    क्या महिला निर्दोष है, या फिर शातिर चोर? यह सवाल अभी बाकी है। लेकिन एक बात तय है कि पुलिस की कार्रवाई ने गिरिडीह शहर में चोरी की घटनाओं पर लगाम लगाने की कवायद तेज़ कर दी है ।

  • भू-अर्जन में तेजी के लिए उपायुक्त ने दिया सख्त निर्देश

    गिरिडीह:  जिला मुख्यालय स्थित अपने कार्यालय में सोमवार कोनमन प्रियेश लकड़ा ने पथ निर्माण विभाग, झारखंड सड़क परिवहन एवं राज्यमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार, और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा क्रियान्वित परियोजनाओं की समीक्षा बैठक की।
    बैठक का मुख्य उद्देश्य। 
    बैठक में उपायुक्त ने विकास परियोजनाओं में लंबित मामलों के निपटारे और परियोजनाओं में तेजी लाने के लिए अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए। विशेष तौर पर एनएच-114 से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई, जिसमें लंबित मामलों और मुआवजा वितरण प्रक्रिया को प्राथमिकता दी गई।
    एनएच-114: लंबित मामलों का जल्द निपटारा। 
    बैठक में एनएच-114 से संबंधित प्रकरणों की समीक्षा के दौरान उपायुक्त ने जानकारी दी कि FRA (वन अधिकार अधिनियम) का निर्णय लिया जा चुका है।
    • छह मौजा के लिए अवार्ड तैयार कर रैयतों के बीच वितरित किया जा रहा है।
    • लाभुकों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं।
    • रैयतों द्वारा भू-अर्जन कार्यालय में राजस्व दस्तावेज जमा करने के बाद मुआवजा भुगतान प्रक्रिया आरंभ कर दी जाएगी।
    भू-अर्जन में तेजी के लिए निर्देश। 
    उपायुक्त ने सभी अंचल अधिकारियों को भू-अर्जन कार्यालय के साथ समन्वय बनाकर कैंप आयोजित करने और लंबित एलपीसी (भूमि प्रबंधन प्रमाणपत्र) और वंशावली प्रमाणपत्र को शीघ्र निर्गत करने का निर्देश दिया।
    अधिकारियों को समन्वय पर जोर। 
    उपायुक्त ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी संबंधित विभागों और अधिकारियों को आपसी समन्वय स्थापित करते हुए कार्यों को तेज करना होगा। उन्होंने कहा, “विकास कार्यों में देरी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”
    बैठक में कौन-कौन थे मौजूद?
    इस महत्वपूर्ण बैठक में पथ निर्माण विभाग, राजस्व विभाग, और भू-अर्जन कार्यालय के अधिकारियों ने हिस्सा लिया। सभी ने परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति की जानकारी दी और समयबद्धता सुनिश्चित करने का वादा किया।
    प्रगति की ओर कदम।
    जिले में चल रही सड़क निर्माण परियोजनाओं को लेकर उपायुक्त के सख्त निर्देश और तेजी लाने की पहल यह दर्शाती है कि जिला प्रशासन विकास कार्यों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। अब यह देखना अहम होगा कि परियोजनाओं की ये रफ्तार धरातल पर कैसे दिखती है।

  • नो डिटेंशन पॉलिसी खत्म अब 5वीं और 8वीं में फेल होने पर नहीं होगा प्रमोशन, केंद्र सरकार का बड़ा फैसला

    नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने सोमवार को शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव करते हुए ‘नो डिटेंशन पॉलिसी’ को समाप्त करने का ऐलान कर दिया है। अब 5वीं और 8वीं कक्षा में फ़ेल होने वाले छात्रों को बिना मेहनत के अगली कक्षा में भेजने का रास्ता बंद हो गया है। सरकार के इस कदम का उद्देश्य छात्रों के शिक्षण स्तर को सुधारना और उनकी बुनियादी शिक्षा को मजबूत करना है।

    क्या है नई नीति?

    पहले, 5वीं और 8वीं में फेल होने पर छात्रों को अगली कक्षा में प्रमोट कर दिया जाता था। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। नई व्यवस्था के तहत, वार्षिक परीक्षा में फ़ेल होने वाले छात्रों को दो महीने के भीतर पुनः परीक्षा देने का मौका दिया जाएगा। अगर वे इसमें भी फ़ेल रहते हैं, तो उन्हें अगली कक्षा में प्रमोशन नहीं मिलेगा।

    हालांकि, यह स्पष्ट कर दिया गया है कि कोई भी स्कूल 8वीं कक्षा तक किसी छात्र को स्कूल से बाहर नहीं कर सकता।

    नीति का उद्देश्य। 

    शिक्षा मंत्रालय का मानना है कि यह कदम छात्रों की शैक्षणिक क्षमता को सुधारने और उनकी सीखने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए उठाया गया है। मंत्रालय के सचिव संजय कुमार ने कहा, “हमारा उद्देश्य छात्रों के शिक्षण स्तर को मजबूत करना और उनकी समझ को विकसित करना है। यह नीति छात्रों को मेहनत करने और शिक्षा की नींव को मजबूत करने का मौका देगी।”

    फेल छात्रों को मिलेगा दूसरा मौका। 

    नई नीति के तहत, असफल छात्रों को अपनी कमजोरी सुधारने का अवसर दिया जाएगा। रिजल्ट के बाद दो महीने के भीतर दोबारा परीक्षा आयोजित की जाएगी। अगर छात्र दूसरी बार भी सफल नहीं होते हैं, तो उन्हें उसी कक्षा में रहना होगा।

    शिक्षा प्रणाली में सुधार की ओर एक कदम। 

    सरकार के इस निर्णय का उद्देश्य शिक्षा प्रणाली में गुणवत्ता लाना है। यह नीति न केवल छात्रों के प्रदर्शन को सुधारने में मदद करेगी, बल्कि उन्हें कड़ी मेहनत के लिए प्रेरित भी करेगी।

    इस बदलाव से यह साफ है कि सरकार अब शिक्षा के क्षेत्र में के पुराने नियम को समाप्त कर, छात्रों की वास्तविक क्षमता को पहचानने और उनकी प्रगति सुनिश्चित करने के लिए गंभीर है।

    क्या यह कदम छात्रों और अभिभावकों के लिए सही साबित होगा? यह तो समय ही बताएगा, लेकिन फिलहाल शिक्षा प्रणाली को मजबूत करने की यह पहल एक महत्वपूर्ण बदलाव की ओर इशारा करती है।

  • झारखंड: जंगली हाथियों का आतंक, डर के साए में जी रहे हैं ग्रामीण

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट …………..

    झारखंड के गिरिडीह जिले में जंगली हाथियों का कहर जारी है। बीती रात चार हाथियों के झुंड ने शिकरा हेम्ब्रम के घर को तोड़ डाला और उन्हें रौंदकर मौत के घाट उतार दिया। यह हादसा सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि पूरे इलाके के लिए एक भयावह सचाई है।
    इस घटना की सूचना मिलते ही पूर्व मंत्री बेबी देवी ने मौके पर पहुंचकर पीड़ित परिवार से मुलाकात की। उन्होंने हर संभव मदद का भरोसा दिया और तुरंत 40,000 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की। साथ ही उन्होंने कहा कि शेष 3,60,000 रुपये की राशि जल्द से जल्द दी जाएगी।
    बेबी देवी ने ट्वीट करते हुए कहा। 
    “आज प्रातः शिकरा हेम्ब्रम जी को हाथियों ने कुचलकर मार दिया। मैं घटनास्थल पर गई और उनके परिजनों को हर संभव मदद का आश्वासन दिया। वन विभाग को निर्देश दिया गया है कि पीड़ित परिवार को सहयोग प्रदान किया जाए। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दें।”
    इससे पहले सनिवार को भी सुगवाटांड़ में हाथियों ने तीन घरों को बुरी तरह से क्षतिग्रस्त कर दिया। गीता देवी, विलसी देवी और कौशल्या देवी के घर अब मलबे के ढेर में बदल चुके हैं।
    हाथियों ने घरों में रखा धान और अनाज चट कर दिया, और खेतों में लगी आलू की फसल को रौंद डाला। यह घटना न केवल इन परिवारों के लिए आर्थिक झटका है, बल्कि पूरे गांव के लिए डर का कारण भी बन गई है।
    कहां से आए ये हाथी?
    घटना से पहले हाथियों का झुंड जलेबिया घाटी के पास देखा गया था। वन विभाग स्थिति पर नजर बनाए हुए था, लेकिन रात के अंधेरे में ये झुंड सुगवाटांड़ पहुंच गया।
    सरकार और वन विभाग का कदम। 
    गिरिडीह विधायक सुदिव्य कुमार सोनू ने घटनास्थल का दौरा किया और पीड़ित परिवारों को 10,000 रुपये का चेक और एक-एक पेटी चावल दिया।
    वन विभाग ने जानकारी दी कि हाथियों को भगाने के लिए बांकुड़ा से विशेषज्ञों की टीम बुलाई जा रही है।
    लेकिन सवाल यही है: क्या सिर्फ राहत राशि और चावल देकर इस समस्या का समाधान हो सकता है?
    ग्रामीणों की गुहार: हमें चाहिए सुरक्षा, सिर्फ वादे नहीं। 
    जंगल और पहाड़ों के पास बसे गांवों के लोग अब अपने ही घरों में असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। हर बार हाथियों का झुंड आता है, तबाही मचाता है, और प्रशासन केवल मुआवजा देकर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर लेता है।
    क्या वन विभाग और सरकार के पास इन घटनाओं से निपटने की कोई ठोस योजना है?
    कब तक लोग हाथियों के डर के साए में अपनी जिंदगी जीने को मजबूर रहेंगे?
    आप क्या सोचते हैं?
    क्या झारखंड सरकार और वन विभाग इस समस्या को गंभीरता से ले रहा है?
    अपनी राय कमेंट में साझा करें।

  • गजराज के कहर से खौफजदा ग्रामीण, मंत्री ने दिया मदद

    गिरिडीह जिले के पीरटांड़ प्रखंड में जंगली हाथियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। हर बार की तरह इस बार भी गजराज ने अपने रास्ते में आने वाले हर चीज को बर्बाद कर दिया। शनिवार देर रात जंगली हाथियों का झुंड पीरटांड़ के पालगंज पंचायत के सुगवाटांड़ टोला में घुस आया।
    हाथियों ने गीता देवी, विलसी देवी और कौशल्या देवी के घरों को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया।
    हाथियों ने घर में रखा धान, अनाज और खेतों में लगी आलू की फसल को रौंद डाला।
    हाथियों के झुंड की यह हरकत गांव के लोगों के लिए डर और परेशानी का कारण बन ई।
    कहां से आए ये हाथी?
    घटना से पहले, हाथियों का झुंड जलेबिया घाटी के पास देखा गया था। वन विभाग नजर बनाए हुए था, लेकिन देर रात ये झुंड जंगल के रास्ते सुगवाटांड़ पहुंच गया।
    मंत्री का दौरा:
    घटना की सूचना मिलते ही झारखंड सरकार के मंत्री व गिरिडीह विधायक सुदिव्य कुमार सोनू घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने पीड़ित परिवार से मुलाकात  हाथियों द्वारा क्षतिग्रस्त किये गए तीन घरों के परिवार को दस दस हजार का चेक और एक एक पेटी चावल दिया। उन्होंने पीड़ित परिवार को हरसंभव मदद का आश्वासन दिया। वन विभाग ने कहा है कि हाथियों को भगाने के लिए बांकुड़ा से विशेषज्ञ टीम बुलाई जा रही है। यह पहली घटना नहीं है। बदगांव पंचायत के बसगदवा टोला में हाथियों ने दो घरों को क्षतिग्रस्त किया था।
    32 हाथियों का झुंड लेड़वा, मंझलाडीह और पथलघटिया में कई किसानों के खलिहान पहुंचकर धान चट कर गया। पीड़ित किसानों और स्थानीय मुखिया ने वन विभाग से क्षतिपूर्ति मुआवजे की मांग की है।
    सुरक्षा की गुहार:
    जंगल और पहाड़ों के नजदीक बसे गांवों के लोग हाथियों के डर से अपने घरों में भी सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं।
    क्न विभाग को ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए पुख्ता इंतजाम करने चाहिए? जो अभी तक हो नहीं पाया है ।

     

  • जंगल में अपराध की साजिश रचते 6 अपराधी गिरफ्तार, देसी कट्टे बरामद

    गिरिडीह:  गिरिडीह जिले के बिरनी थाना क्षेत्र में पुलिस ने अपराध की योजना बना रहे छह अपराधियों को गिरफ्तार किया है। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने उनके पास से दो देसी कट्टे भी बरामद किए।

    गुप्त सूचना पर पुलिस की कार्रवाई. 

    गिरिडीह एसपी  डॉ. विमल कुमार ने रविवार को मीडिया को बताया कि घुज्जी जंगल में अपराधियों की गतिविधियों की गुप्त सूचना मिली थी। इस सूचना के आधार पर एसडीपीओ  धनंजय राम की अगुवाई में एक विशेष टीम का गठन किया गया। टीम ने तेजी से कार्रवाई करते हुए अपराधियों को मौके पर धर दबोचा।

    गिरफ्तार अपराधियों की पहचान। 

    गिरफ्तार अपराधियों में शामिल हैं:

    • मो. समीर अंसारी, रेहान अंसारी, और रिजवान अंसारी (धनवार )
    • फणीभूषण साव और शिबू साव (बिरनी )
    • सिराजुद्दीन अंसारी (लालबाजार,धनवार)

    बड़ी घटना को अंजाम देने की तैयारी। 

    पुलिस पूछताछ में अपराधियों ने स्वीकार किया कि वे इलाके में किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की योजना बना रहे थे।

    आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज। 

    पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ आर्म्स एक्ट और अन्य धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है। फिलहाल, उनसे पूछताछ जारी है ताकि अपराध की पूरी साजिश का खुलासा हो सके।

    एसपी की सराहना। 

    पुलिस अधीक्षक डॉ. विमल कुमार ने टीम की तत्परता और कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा, “गिरिडीह पुलिस अपराध पर नियंत्रण के लिए प्रतिबद्ध है। यह सफलता टीमवर्क और हमारी सतर्कता का परिणाम है।”

    इस कार्रवाई से इलाके में पुलिस की सख्ती और अपराधियों में खौफ का संदेश गया है।