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  • झारखंड की बेटी सलीमा टेटे को ‘अर्जुन पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया।

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने हॉकी खिलाड़ी सलीमा टेटे को हॉकी में उनकी असाधारण उपलब्धियों के लिए प्रतिष्ठित ‘अर्जुन पुरस्कार 2024’ से सम्मानित किया। इस पुरस्कार से कुल 32 खिलाड़ियों को नवाजा गया, जिनमें झारखंड के सिमडेगा की बेटी सलीमा टेटे का नाम भी शामिल है। सभी खिलाड़ियों को यह सम्मान 17 जनवरी 2025 को सुबह 11 बजे राष्ट्रपति भवन, दिल्ली में आयोजित एक विशेष समारोह में प्रदान किया गया।

    सलीमा टेटे, जो सिमडेगा जिले के बड़की छापर गांव की रहने वाली हैं, वर्तमान में भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तान भी हैं। अर्जुन पुरस्कार के लिए उनके चयन के बाद झारखंड के खेल प्रेमियों में खुशी की लहर दौड़ गई है। हालांकि, सलीमा का सफर इतना आसान नहीं था। उन्होंने अपने जीवन में कई कठिनाइयों का सामना किया है और कठिन परिस्थितियों से लड़कर यह मुकाम हासिल किया है।

    सलीमा टेटे झारखंड की पहली महिला हॉकी खिलाड़ी हैं, जिन्हें अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। इससे पहले झारखंड के ओलंपियन दिवंगत माइकल किंडो को यह पुरस्कार मिला था। पिछले 10 वर्षों में झारखंड के तीन हॉकी खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है—सिलबानुस डुंगडुंग और माइकल किंडो को मेजर ध्यानचंद अवार्ड से सम्मानित किया गया, और अब सलीमा टेटे को अर्जुन पुरस्कार प्राप्त हुआ है।

    कल्पना सोरेन ने भी दिया बधाई।

  • सभी जिलों में जन शिकायत समाधान कार्यक्रम 22 जनवरी को-DGP

    झारखंड में जन शिकायत समाधान कार्यक्रम एक बार फिर से सुर्खियों में है। आगामी 22 जनवरी को राज्य के सभी 24 जिलों में इस कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। डीजीपी अनुराग गुप्ता ने इस संबंधमें सभी जिलों के एसएसपी और एसपी को निर्देश जारी किए हैं। खास बात यह है कि कार्यक्रम उन्हीं स्थानों पर आयोजित किया जाएगा, जहां पहले इसे सफलतापूर्वक संपन्न किया गया था।

    यह कार्यक्रम इससे पहले 18 दिसंबर 2024 और 10 सितंबर 2024 को आयोजित हो चुका है। कार्यक्रम का उद्देश्य नागरिकों की पुलिस से संबंधित शिकायतों को न केवल पंजीकृत करना है, बल्कि त्वरित और प्रभावी समाधान प्रदान करना भी है।

    कार्यक्रम के मुख्य उद्देश्य:

    1. शिकायतों का पंजीकरण और समाधान: पुलिस से जुड़ी समस्याओं को दर्ज कर समाधान प्रक्रिया से नागरिकों को अवगत कराना।
    2. कार्रवाई की जानकारी: शिकायतों पर पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई की स्थिति से शिकायतकर्ताओं को अपडेट देना।
    3. समयबद्ध कार्रवाई: यदि किसी शिकायत का समाधान तय समयसीमा में नहीं होता, तो उसे वरिष्ठ अधिकारियों को
  • जमीन की रसीद अब मोबाइल से, बार कोड तकनीक करेगा काम

    झारखंड सरकार ने  एक बड़ी पहल की है, जिससे जमीन मालिकों को राहत मिलेगी। अब जमीन खरीदने के बाद उसकी रसीद कटवाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं पड़ेगी। राजस्व मंत्री दीपक बिरुआ ने इस नई व्यवस्था की घोषणा करते हुए बताया कि अब बार कोड तकनीक के माध्यम से घर बैठे रसीद कटाने की सुविधा उपलब्ध होगी।

    नए सिस्टम से मिलेगी बड़ी राहत।

    राजस्व मंत्री ने वर्चुअल समीक्षा बैठक में विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिया कि जनता को अपनी जमीन की रसीद कटवाने के लिए सरकारी कार्यालयों में भटकने की मजबूरी से छुटकारा दिलाया जाए। उन्होंने कहा, “यह बेहद शर्मनाक है कि लोगों को उनकी ही जमीन के कागजात के लिए परेशान होना पड़ता है। नई व्यवस्था के जरिए अब मोबाइल पर ही रसीद आसानी से कट सकेगी।”

    म्यूटेशन को राइट टू सर्विस में लाने की तैयारी।

    मंत्री ने म्यूटेशन को राइट टू सर्विस एक्ट के दायरे में लाने की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि जमीन से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और सरलता लाने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है। इससे न केवल लोगों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि सरकार के राजस्व में भी इजाफा होगा।

    2,000 करोड़ बकाया राशि पर भी निर्देश।

    बैठक में चाईबासा आयुक्त ने जिले की कंपनियों पर दो हज़ार करोड़ रुपये बकाया होने का मुद्दा उठाया। इस पर मंत्री ने तुरंत कार्रवाई का आदेश दिया। उन्होंने कहा कि राज्य के राजस्व को बढ़ाने के लिए ऐसे मामलों का निपटारा प्राथमिकता से किया जाए।

    अतिक्रमण पर सख्ती और राजस्व प्रक्रिया में सुधार।

    मंत्री दीपक बिरुआ ने सरकारी जमीनों को अतिक्रमण से मुक्त कराने के निर्देश भी दिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि अतिक्रमणकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए और लंबित म्यूटेशन मामलों का जल्द निपटारा हो।

    सरल होगी राजस्व वसूली प्रक्रिया।

    राजस्व संग्रहण की प्रक्रिया को और सरल बनाने पर जोर देते हुए मंत्री ने खासमहल जमीन के रिन्युअल और सैरात की वसूली के लिए भी नई व्यवस्था लागू करने के सुझाव दिए। उन्होंने नीलामी संबंधित विवादों का जल्द समाधान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। इस बैठक में विभागीय सचिव चंद्रेशेखर, विशेष सचिव शशिप्रकाश झा समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

    जनता को क्या फायदा होगा?

    1. जमीन की रसीद अब मोबाइल पर ही उपलब्ध होगी।
    2. सरकारी दफ्तरों में चक्कर लगाने की जरूरत नहीं।
    3. म्यूटेशन और अन्य कार्यों में पारदर्शिता बढ़ेगी।
    4. राजस्व वसूली की प्रक्रिया होगी आसान।
    5. अतिक्रमण के मामलों में सख्ती से निपटारा।

    सरकार का यह कदम जनता को बड़ी राहत देने और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रह है । \

    • परवेज़ आलम की खास रिपोर्ट …….

     

  • झारखंड के 4 जिलों में बनेगा जंगल सफारी: 800 करोड़ की योजना पर काम शुरू

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट …………..

    रांची: झारखंड सरकार वन्यजीव प्रेमियों को एक खास तोहफा देने जा रही है। राज्य के चार प्रमुख अभयारण्यों में जंगल सफारी विकसित करने की योजना बनाई गई है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को हरी झंडी दे दी है। पलामू टाइगर रिजर्व, दलमा, हजारीबाग और पारसनाथ वन्यजीव अभयारण्यों में यह सफारी शुरू की जाएगी। लगभग 800 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट को वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट में शामिल किया जाएगा।

    क्या खास होगा जंगल सफारी में?

    इन जंगल सफारी में पर्यटक खुली कार या बस में बैठकर वन्यजीवों को बेहद करीब से देख सकेंगे। ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देते हुए स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और पर्यावरण को संरक्षित करने का खास ध्यान रखा जाएगा।

    • खुली सफारी: पर्यटकों को जंगल में खुले में भ्रमण का मौका मिलेगा।
    • ईको-फ्रेंडली टूरिज्म: बांस की झोपड़ियों (बंबू हाट), कैफेटेरिया और कैंटीन जैसी सुविधाएं दी जाएंगी।
    • प्राकृतिक अनुभव: जंगल में घूमने के साथ-साथ वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास में देखने का अवसर मिलेगा।

    हर अभयारण्य की अपनी खासियत

    1. पलामू टाइगर रिजर्व: झारखंड का इकलौता टाइगर रिजर्व, जहां बाघ पर्यटकों का मुख्य आकर्षण हैं।
    2. दलमा अभयारण्य: हाथियों के लिए प्रसिद्ध।
    3. हजारीबाग अभयारण्य: सांभर, चीतल, नीलगाय, भालू और लकड़बग्घा जैसे जानवरों का घर।
    4. पारसनाथ अभयारण्य: तेंदुआ, जंगली बिल्ली और साही जैसे दुर्लभ जीव-जंतुओं का बसेरा।

    कैसे हुई योजना की शुरुआत?

    30 दिसंबर को मुख्यमंत्री ने ईको-टूरिज्म के विकास पर जोर देते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया था। इसके बाद पर्यटन मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू  ने बिहार के राजगीर जंगल सफारी का दौरा कर जरूरी अनुभव साझा किए। अब झारखंड में इस प्रोजेक्ट को तेज़ी से लागू किया जा रहा है।

    क्या कहती है सरकार?

    मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना से न केवल राज्य का पर्यटन बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय लोगों को भी आर्थिक लाभ मिलेगा। पर्यटन और वन विभाग इस प्रोजेक्ट का संयुक्त संचालन करेंगे। हर अभयारण्य पर लगभग 200 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

    पर्यटकों के लिए एक सुनहरा अवसर

    जंगल सफारी झारखंड के प्राकृतिक सौंदर्य और वन्यजीवों का लुत्फ उठाने का बेहतरीन मौका देगा। चाहे बाघ की दहाड़ हो, हाथियों का झुंड हो या तेंदुए की फुर्ती—यह सफारी हर पर्यटक के लिए खास अनुभव होगी।

    झारखंड के पर्यटन में यह पहल एक नए युग की शुरुआत है, जहां पर्यावरण और आर्थिक विकास का संतुलन देखने को मिलेगा।

  • रांची से लापता नाबालिग बहनें कर्नाटक में मिलीं, पुलिस जल्द करेगी खुलासा

    रांची: झारखंड की राजधानी से रहस्यमय तरीके से लापता हुईं दो नाबालिग बहनों को पुलिस ने कर्नाटक से बरामद कर लिया है। 11 जनवरी की शाम से गायब इन बहनों को बेंगलुरु से वापस रांची लाया जा रहा है। इस मामले में पुलिस ने अभी तक अपहरण की पुष्टि नहीं की है, लेकिन उनके रांची पहुंचने के बाद सच सामने आने की उम्मीद है।

    गायब होने की कहानी:

    रांची के हिंदपीढ़ी इलाके की रहने वाली ये दोनों बहनें 11 जनवरी को आधार कार्ड ठीक करवाने के लिए निकली थीं। परिजनों के मुताबिक, दोनों मंगल टॉवर से घर लौटने के लिए ऑटो में बैठी थीं। लेकिन रास्ते में उन्हें शक हुआ कि ऑटो चालक किसी और दिशा में जा रहा है। घबराई लड़कियों ने अपने पिता को फोन किया, लेकिन ऑटो चालक ने उनका फोन छीन लिया। इसके बाद परिजनों का उनसे कोई संपर्क नहीं हो पाया।

    स्पेशल टीम का कमाल।

    परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लिया। रांची प्रक्षेत्र के आईजी ने तत्काल एक विशेष टीम का गठन किया और टेक्निकल सेल की मदद से लड़कियों की लोकेशन ट्रेस की। पुलिस को जानकारी मिली कि लड़कियां कर्नाटक में हैं। स्थानीय पुलिस की मदद से दोनों बहनों को बरामद कर लिया गया। दोनों नाबालिग बहनों के गायब होने के बाद मामला राजनीतिक तूल पकड़ चुका था। विपक्षी दलों ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए थे। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी भी परिजनों से मिलने पहुंचे थे। पुलिस ने भरोसा दिया था कि लड़कियों को जल्द ही ढूंढ लिया जाएगा, और अब यह भरोसा सच में बदल चुका है।

    पुलिस फिलहाल यह जांच कर रही है कि मामला अपहरण का था या फिर कुछ और। दोनों बहनों की रांची वापसी के बाद घटनाक्रम की सच्चाई सामने आने की उम्मीद है।

    झारखंड में लड़कियों  की सुरक्षा को लेकर यह घटना कई सवाल खड़े करती है। क्या यह सिर्फ एक इत्तेफाक था, या इसके पीछे कोई बड़ा गिरोह है? जवाबों का इंतजार सभी को है। परवेज़ आलम की रिपोर्ट ……

  • पत्रकार पर हमले के विरोध में प्रेस क्लब का सांकेतिक धरना

    गिरिडीह: पत्रकारिता के पेशे को सुरक्षित रखने और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए प्रेस क्लब ने सोमवार को गिरिडीह में सांकेतिक धरना दिया। यह धरना पत्रकार अमरनाथ सिन्हा और अन्य दो पत्रकारों पर हुए हमले के विरोध में आयोजित किया गया।

    प्रेस क्लब की एकजुटता
    इस धरने का नेतृत्व प्रेस क्लब के अध्यक्ष पत्रकार राकेश सिन्हा ने किया, जबकि संचालन महासचिव अरविंद कुमार के हाथों में रहा। इस विरोध प्रदर्शन में गिरिडीह के प्रमुख पत्रकार लक्ष्मी अग्रवाल, अमरनाथ सिन्हा,श्रीकांत सिंह,मृणाल सिंहा, सूरज सिन्हा, अविनाश प्रसाद, आलोक रंजन, अंजनी सिन्हा,  समेत कई अन्य पत्रकार उपस्थित रहे।

    क्या है मामला?
    बताया गया कि हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद नगर निगम के टोल टैक्स पॉइंट से अवैध वसूली को लेकर थी। इस अवैध वसूली की कवरेज के दौरान अमरनाथ सिन्हा और अन्य पत्रकारों पर हमला किया गया। इस मामले में चार लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, लेकिन टोल टैक्स संवेदक के खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

    मंत्री का आश्वासन और धरने का समापन
    धरने की सूचना पाकर नगर विकास मंत्री सुदीब्य कुमार सोनू मौके पर पहुंचे और संवेदक पर कार्रवाई का आश्वासन दिया। मंत्री के सकारात्मक रुख और भरोसे के बाद प्रेस क्लब ने धरना समाप्त किया।

    पत्रकारिता पर हमला लोकतंत्र पर हमला
    प्रेस क्लब के सदस्यों ने स्पष्ट किया कि यह विरोध केवल पत्रकारों पर हमले का नहीं, बल्कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की सुरक्षा के लिए है। पत्रकारों ने मांग की कि इस घटना से जुड़े सभी आरोपियों पर सख्त कार्रवाई हो और भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

    यह धरना गिरिडीह के पत्रकारों की एकजुटता और उनकी आवाज को दबाने के खिलाफ उनके साहस का प्रतीक है। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि पत्रकारिता न केवल सच की तलाश है, बल्कि इसके लिए खड़ा होना भी उतना ही जरूरी है।

     

  • अबुआ आवास का जियो टैग अब पंचायत सचिव करेंगे, मंत्री शिल्पी नेहा ने दिया निर्देश।

    Ranchi:
    चान्हो में अबुआ आवास के जियो टैगिंग का कार्य अब पंचायत स्वयंसेवकों के बजाय पंचायत सचिव द्वारा किया जाएगा। इस संबंध में मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने निर्देश जारी किए हैं। साथ ही, मंत्री ने जनसेवक (VLW) को कृषि से जुड़े कार्यों की जिम्मेदारी संभालने का भी आदेश दिया है।

  • झारखंड: सरकार छात्रों को UPSC की तैयारी के लिए दिल्ली भेजेगी

    Ranchi:
    राज्य सरकार एसटी, एससी और ओबीसी वर्ग के प्रतिभाशाली छात्रों के लिए दिल्ली में यूपीएससी की तैयारी कराने की योजना बना रही है। इस योजना के तहत छात्रों के रहने और पढ़ाई का पूरा खर्च सरकार वहन करेगी। इसके लिए दिल्ली के प्रतिष्ठित कोचिंग संस्थानों का सहयोग लिया जाएगा। कल्याण मंत्री चमरा लिंडा ने अधिकारियों को कोचिंग संस्थानों से बातचीत कर योजना को अंतिम रूप देने का निर्देश दिया है।

    इस योजना के तहत छात्रों का चयन एक टेस्ट और उनकी शैक्षणिक योग्यता के आधार पर किया जाएगा। 10वीं से लेकर विश्वविद्यालय स्तर तक के उनके अंकों को भी ध्यान में रखा जाएगा। विभागीय अधिकारी योजना पर काम शुरू कर चुके हैं और उम्मीद है कि मार्च तक चयन प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।

    छत्तीसगढ़ मॉडल का अध्ययन

    राज्य सरकार छत्तीसगढ़ के मॉडल का अध्ययन कर रही है, जहां एसटी, एससी और ओबीसी वर्ग के मेधावी छात्रों को दिल्ली में नि:शुल्क यूपीएससी की तैयारी की सुविधा दी जाती है। वहां 200 सीटें निर्धारित हैं। इसके साथ ही, अन्य राज्यों की योजनाओं का भी अध्ययन किया जा रहा है ताकि इस योजना को और प्रभावी बनाया जा सके।

    मेडिकल और इंजीनियरिंग की तैयारी की योजना

    सरकार एसटी, एससी और ओबीसी वर्ग के प्रतिभाशाली छात्रों को मेडिकल और इंजीनियरिंग की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए भी सुविधा प्रदान करेगी। इसके लिए रांची में आवासीय कोचिंग शुरू करने की योजना है। इस कोचिंग के लिए पुरानी रांची स्थित कल्याण विभाग के भवन को चुना गया है, जिसे आधुनिक संसाधनों से युक्त किया जा रहा है। इन कोचिंग संस्थानों के माध्यम से छात्रों को बेहतर प्रशिक्षण दिया जाएगा।

  • रामगढ़ में दर्दनाक सड़क दुर्घटना, स्कूल वैन और ट्रक की टक्कर में 4 बच्चों की जान गई।

    Ramgarh:

    रामगढ़ जिले के गोला क्षेत्र में स्थित झिंझरीटांड़ दामोदर रेस्टोरेंट के पास बुधवार सुबह एक दिल दहलाने वाली घटना घटी। इस हादसे में एक आलू से लदा ट्रक, नियंत्रण खोने के बाद, ऑटो पर पलट गया। इस घटना में चार स्कूली बच्चों और ऑटो चालक की मौके पर ही मौत हो गई। इसके अलावा, आधा दर्जन बच्चे घायल हो गए, जिनमें से तीन की हालत बेहद गंभीर बताई जा रही है।

    सूत्रों के अनुसार, बुधवार सुबह एक निजी स्कूल के छात्र ऑटो में सवार होकर स्कूल जा रहे थे। जब ऑटो झिंझरीटांड़ दामोदर रेस्टोरेंट के पास पहुंचा, तो आलू लदा ट्रक अनियंत्रित हो गया और ऑटो के ऊपर पलट गया। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

    स्थानीय ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए कई बच्चों को ऑटो से बाहर निकालकर उनकी जान बचाई। लेकिन, हादसे में चार बच्चों और ऑटो चालक की दर्दनाक मौत हो गई।

    गौरतलब है कि राज्य सरकार ने शीतलहर को देखते हुए सभी स्कूलों को बंद रखने का आदेश दिया था। इसके बावजूद, गोला स्थित गुड विल पब्लिक स्कूल के संचालक ने आदेश का उल्लंघन करते हुए स्कूल खुला रखा, जिसके चलते यह भयावह घटना हुई और चार मासूम बच्चों की जान चली गई। घटना के बाद बच्चों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

    वहीं, घटना से गुस्साए लोगों ने सड़क जाम कर ट्रक चालक और स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। इसके साथ ही, मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने की भी मांग की जा रही है। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभालने और लोगों को शांत करने में जुटे हुए हैं।

  • झारखंड : पुलिस का बड़ा दावा माओवाद और अपराध पर 2024 में कसी नकेल!

    परवेज़ आलम की खास रिपोर्ट …………

    झारखंड पुलिस ने 2024 की समाप्ति के साथ अपनी उपलब्धियों का लेखा-जोखा पेश किया है। दावा है कि राज्य में नक्सलवाद, अपराध, साइबर क्राइम, और मादक पदार्थों के खिलाफ चलाए गए अभियानों में बड़े पैमाने पर सफलता मिली है।

    आईजी (ऑपरेशन) एवी होमकर की मानें तो पुलिस ने माओवादी गतिविधियों पर शिकंजा कसते हुए 244 माओवादियों को गिरफ्तार किया है। इनमें एसएसी सदस्य जया दी उर्फ चिंता, 10 लाख के इनामी जोनल कमांडर शंभू गंझू और सीताराम रजवार जैसे कुख्यात नाम शामिल हैं। इसके अलावा 24 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, 9 मुठभेड़ों में मारे गए, और 123 हथियार बरामद किए गए। उन्होंने बताया कि सीपीआई (माओवादी) से अलग हुए समूह तृतीय प्रस्तुति समिति (टीपीसी) के कई उग्रवादियों को भी गिरफ्तार किया गया है। इनपर कुल 36 लाख रुपये का इनाम था। पुलिस ने 246 किलो विस्फोटक, 13.39 लाख की लेवी के रुपए , और 239 आईईडी भी बरामद करने का दावा किया हैं।

    नक्सलवाद रोकने पर ठोस नीति नहीं ।  

    झारखंड की पहाड़ियों में अब भी नक्सलियों की गतिविधियां खत्म नहीं हुईं। सवाल है कि ये गिरफ्तारियां राज्य के युवाओं को माओवादी संगठन से जुड़ने से कैसे रोकेंगी इस पर  कोई थोड़ प्लानिंग अभी तक नहीं दिखती ।

    साइबर क्राइम और मादक पदार्थों पर नकेल का दावा

    2024 में पुलिस ने साइबर अपराध से जुड़े 1295 मामलों में 971 गिरफ्तारियां कीं और 8.18 करोड़ रुपये जब्त किए। “प्रतिबिंब एप” के जरिए 274 मामलों का समाधान और 77 लाख की वसूली ने तकनीकी अभियानों को एक नया आयाम दिया।
    मादक पदार्थों के खिलाफ 1407 किलो अफीम और 4251 किलो गांजा जब्त किया गया। 3975 एकड़ में फैली अफीम की खेती नष्ट की गई।

    अपराध पर लगाम या सिर्फ आंकड़ों का खेल?

    154 अपराधियों की गिरफ्तारी, 97 संगठित अपराध के मामलों का निपटारा और अलकायदा के 4 आतंकियों की गिरफ्तारी—सुनने में जरूर बड़ा लगता है। लेकिन झारखंड की सड़कों पर बढ़ते अपराध और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर पुलिस की चुप्पी सवाल खड़े करती है।

    नया साल, नई चुनौती!

    झारखंड पुलिस ने 2025 के लिए जनता को शुभकामनाएं दी हैं और अपराध व उग्रवाद से मुक्ति का संकल्प दोहराया है। लेकिन क्या यह संकल्प सिर्फ प्रेस बयान तक सीमित रहेगा, या झारखंड सचमुच शांति और सुरक्षा के नए अध्याय की ओर बढ़ेगा? यह सवाल अभी भी बाकी है।