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  • 16 साल पुराने अफीम खेती मामले में 27 आरोपी बरी, विशेष अदालत ने कहा- आरोप साबित नहीं हुए

    गिरिडीह: झारखंड के गिरिडीह में 16 वर्ष पुराने अफीम की अवैध खेती और कारोबार से जुड़े मामले में विशेष न्यायाधीश प्रथम कंवलजीत चोपड़ा की अदालत ने शुक्रवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए 27 आरोपियों को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल नहीं हो सका, इसलिए आरोपियों को संदेह का लाभ दिया जाता है।

    2010 में दर्ज हुआ था मामला

    बचाव पक्ष के अधिवक्ता महीप मंयक ने बताया कि 14 फरवरी 2010 को लोकाय नयनपुर थाना में तत्कालीन अवर निरीक्षक आर.के. शाह के बयान पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी। मामले में लुकाई नयनपुर गांव के 29 लोगों को आरोपी बनाया गया था।

    पुलिस का आरोप था कि आरोपी अपनी जमीन पर अवैध रूप से अफीम की खेती करते थे और उसका कारोबार भी करते थे। छापेमारी के दौरान पुलिस ने करीब 8 किलोग्राम अफीम बरामद करने का दावा किया था। जांच पूरी होने के बाद विशेष न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया गया।

    बचाव पक्ष ने उठाए कई तकनीकी सवाल

    सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से चार गवाहों के बयान दर्ज कराए गए। वहीं, बचाव पक्ष के अधिवक्ता महीप मंयक ने अदालत में दलील दी कि पुलिस द्वारा जब्त किए गए मादक पदार्थ को कानून के अनुरूप प्रमाणित नहीं किया जा सका। उन्होंने कहा कि जांच और साक्ष्य में कई ऐसी खामियां हैं, जिनसे अभियोजन के पूरे मामले पर गंभीर संदेह उत्पन्न होता है।

    उन्होंने यह भी कहा कि भोले-भाले ग्रामीण पिछले 16 वर्षों से अदालत के चक्कर लगा रहे थे, जबकि अभियोजन पक्ष समयबद्ध और प्रभावी तरीके से मामले को साबित करने में असफल रहा। मुकदमे के दौरान एक आरोपी की मृत्यु भी हो गई।

    अभियोजन पक्ष ने क्या कहा?

    अपर लोक अभियोजक अशोक दास ने अदालत में कहा कि मादक पदार्थों से जुड़े अपराध समाज के लिए गंभीर खतरा हैं और ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई आवश्यक है। उन्होंने अदालत से आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

    अदालत ने क्यों किया बरी?

    दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद विशेष न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों से कई संदेह उत्पन्न होते हैं। आपराधिक मामलों में संदेह का लाभ आरोपी को दिया जाता है। इसी आधार पर अदालत ने 27 आरोपियों को दोषमुक्त करते हुए बरी कर दिया।

    16 साल बाद मिली राहत

    मामले के कई आरोपी अब 80 वर्ष से अधिक आयु के हो चुके हैं। लंबे समय तक मुकदमा झेलने के बाद अदालत का फैसला आने पर आरोपियों और उनके परिजनों में राहत और खुशी का माहौल देखा गया।

    बचाव पक्ष के अधिवक्ता महीप मंयक ने फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह “न्याय की जीत” है और अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष फैसला सुनाया।

  • झारखंड के माइका उद्योग को नई उड़ान देने की तैयारी, दिल्ली में होगी बड़ी बैठक

    परवेज़ आलम.

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    नई दिल्ली/गिरिडीह: झारखंड के बहुचर्चित माइका उद्योग को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। कोडरमा सांसद एवं केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने इस मुद्दे को गंभीरता से उठाते हुए केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी से नई दिल्ली में मुलाकात की। इस उच्चस्तरीय बैठक में संबंधित मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों की भी मौजूदगी रही, जिससे इस पहल की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

    बैठक के दौरान कोडरमा और गिरिडीह के माइका बेल्ट की मौजूदा स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई। खासतौर पर माइका खनन से जुड़े श्रमिकों की समस्याएं, उद्योग में पारदर्शिता की कमी, रोजगार के सीमित अवसर और माइका एसोसिएशन व वर्कर संगठनों की लंबित मांगों पर फोकस किया गया।

    दोनों केंद्रीय मंत्रियों ने इस बात पर सहमति जताई कि माइका उद्योग को नई दिशा देने के लिए सभी हितधारकों—उद्योग प्रतिनिधियों, श्रमिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों—को एक मंच पर लाना जरूरी है। इसी कड़ी में जल्द ही नई दिल्ली में एक व्यापक बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया गया है, जहां ठोस और दीर्घकालिक समाधान पर विचार किया जाएगा।

    केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि माइका खनन को पारदर्शी, सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा। साथ ही श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा, रोजगार के अवसरों में वृद्धि और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर विशेष जोर रहेगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल झारखंड के माइका बेल्ट—खासकर गिरिडीह और कोडरमा—के लिए गेमचेंजर साबित हो सकती है। इससे न केवल उद्योग को नई रफ्तार मिलेगी, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते भी खुलेंगे।

    इस पहल का स्वागत करते हुए भाजपा महानगर कोषाध्यक्ष मुकेश जालान ने कहा कि “यह कदम माइका उद्योग के पुनरुत्थान की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है। वर्षों से चली आ रही समस्याओं के समाधान की उम्मीद जगी है। केंद्र सरकार के प्रयासों से न केवल उद्योग मजबूत होगा, बल्कि हजारों श्रमिक परिवारों का भविष्य भी सुरक्षित होगा।”

    उन्होंने विश्वास जताया कि प्रस्तावित दिल्ली बैठक से ठोस परिणाम सामने आएंगे और गिरिडीह–कोडरमा क्षेत्र के समग्र विकास को नई गति मिलेगी।

  • ………..और मुकाबला डिप्टी मेयर की कुर्सी का, नया राजनीतिक “मैच” शुरू

    परवेज़ आलम.

    द न्यूज़ पोस्ट4यू

    झारखंड की सियासत में मेयर चुनाव के बाद अब एक नया राजनीतिक “मैच” शुरू हो चुका है—और यह मुकाबला है डिप्टी मेयर की कुर्सी का। नौ नगर निगमों में पार्षदों की गिनती, बैठकों का दौर, सम्मान समारोह और डिनर डिप्लोमेसी… सब कुछ तेज हो गया है। आइए समझते हैं कि इस वक्त झारखंड के नगर निगमों में किसकी दावेदारी सबसे मजबूत मानी जा रही है और कहां किस तरह की राजनीतिक हलचल है।

    मेयर के बाद अब डिप्टी मेयर की जंग

    मेयर चुनाव खत्म होते ही अब राजनीतिक दलों की नजर डिप्टी मेयर के पद पर टिक गई है। भाजपा, कांग्रेस और झामुमो—तीनों दल अपने-अपने समर्थित पार्षदों को एकजुट करने में जुट गए हैं। नगर निगमों में इस पद के लिए लॉबिंग और लामबंदी तेज हो गई है। पार्षदों के सम्मान समारोह हो रहे हैं, बैठकों का दौर चल रहा है और कई जगहों पर “डिनर डिप्लोमेसी” भी देखने को मिल रही है। राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि कहीं हॉर्स ट्रेडिंग न हो जाए। ऐसे में दल अपने पार्षदों पर नजर बनाए हुए हैं ताकि आखिरी वक्त में क्रॉस वोटिंग की स्थिति न बने।

    रांची में डिनर डिप्लोमेसी और शक्ति प्रदर्शन.

    राजधानी रांची में डिप्टी मेयर की रेस काफी दिलचस्प हो गई है।

    • भाजपा ने पार्षदों का सम्मान समारोह आयोजित कर अपने पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश की।
    • इस बैठक में 53 में से 42 पार्षदों की मौजूदगी बताई जा रही है।

    वहीं दूसरी ओर कांग्रेस भी पीछे नहीं है।

    • कांग्रेस नेताओं ने एक बड़े होटल में पार्षदों के साथ डिनर मीटिंग की।
    • इस बैठक में 37 पार्षदों के शामिल होने का दावा किया गया है।

    कांग्रेस नेताओं का कहना है कि पार्षदों ने डिप्टी मेयर के नाम तय करने का अधिकार पार्टी को दे दिया है।

    गिरिडीह में झामुमो की मजबूत स्थिति

    गिरिडीह नगर निगम में समीकरण कुछ अलग दिख रहे हैं। यहां मेयर पद पर झामुमो समर्थित उम्मीदवार की जीत के बाद यह लगभग तय माना जा रहा है कि डिप्टी मेयर भी झामुमो समर्थित पार्षद ही बनेंगे। बताया जा रहा है कि भाजपा के पास यहां 10 से भी कम पार्षदों का समर्थन है, जबकि झामुमो समर्थित पार्षदों की संख्या ज्यादा बताई जा रही है। लालों राइन व सुमित कुमार दोनों jmm से हैं के बीच ही रश काशी चल रही है ।

    हजारीबाग और मेदिनीनगर में ये नाम आगे।

    राज्य के अन्य नगर निगमों में भी डिप्टी मेयर को लेकर तस्वीर धीरे-धीरे साफ हो रही है।

    • मेदिनीनगर: कांग्रेस समर्थित मनोज सिंह मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं।
    • हजारीबाग: यहां मिताली रश्मि का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है

    धनबाद, देवघर और आदित्यपुर में कांटे की टक्कर।

    कुछ नगर निगमों में मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है।

    • धनबाद: यहां अरुण चौहान और सुमन सिंह के बीच सीधी टक्कर बताई जा रही है। अरुण चौहान को झामुमो का समर्थन मिलने की चर्चा है।
    • देवघर: पहली बार की पार्षद टीप चटर्जी डिप्टी मेयर पद के लिए मजबूत दावेदार मानी जा रही हैं।
    • चास: यहां पांच से छह पार्षदों के बीच मुकाबला बताया जा रहा है।
    • आदित्यपुर और मानगो: इन दोनों नगर निगमों में भाजपा और कांग्रेस समर्थित पार्षदों के बीच सीधी टक्कर के संकेत मिल रहे हैं।

    कब होगा शपथ ग्रहण और डिप्टी मेयर का चुनाव.

    अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि डिप्टी मेयर का चुनाव कब होगा। अलग-अलग नगर निगमों में शपथ ग्रहण और चयन की तारीखें तय कर दी गई हैं।

    • देवघर नगर निगम – 13 मार्च
    • हजारीबाग नगर निगम – 13 मार्च
    • मेदिनीनगर नगर निगम – 14 मार्च
    • गिरिडीह नगर निगम – 16 मार्च
    • आदित्यपुर नगर निगम – 16 मार्च
    • मानगो नगर निगम – 17 मार्च
    • चास नगर निगम – 17 मार्च
    • धनबाद नगर निगम – 18 मार्च
    • रांची नगर निगम – 19 मार्च

    अंतिम तस्वीर अभी बाकी.

    कुल मिलाकर झारखंड के नौ नगर निगमों में डिप्टी मेयर की कुर्सी को लेकर राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर है। पार्षदों की संख्या, दलों की रणनीति और आखिरी वक्त की राजनीतिक चालें—इन सबके बीच यह देखना दिलचस्प होगा कि आखिर किसके सिर सजता है डिप्टी मेयर का ताज। आने वाले कुछ दिन झारखंड की नगर राजनीति के लिए बेहद अहम साबित होने वाले हैं।

  • निकाय  चुनाव “गैर-दलीय” है… लेकिन सियासत पूरी तरह दलीय हो चुकी है।

    परवेज़ आलम.

    द न्यूज़ पोस्ट4यू .
    राज्य के 48 शहरी स्थानीय निकायों के चुनाव इस बार सीधे मुकाबले से निकलकर त्रिकोणीय जंग में बदल गए हैं। 23 फरवरी को मतदान होगा और चार दिन बाद तस्वीर साफ हो जाएगी। पांच साल बाद हो रहे इन चुनावों की खास बात यह है कि ये कागज़ पर गैर-दलीय हैं, लेकिन ज़मीन पर राजनीतिक दल पूरी ताकत के साथ मैदान में हैं।

    सत्तारूढ़ इंडिया ब्लॉक के दो बड़े चेहरे—झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) और कांग्रेस—अब आमने-सामने दिखाई दे रहे हैं। संयुक्त उम्मीदवार पर सहमति नहीं बन पाई, और नतीजा यह कि दोनों दलों ने नौ नगर निगमों में महापौर पद के लिए अपने-अपने समर्थित उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया। इसके साथ ही 20 नगर परिषदों और 19 नगर पंचायतों में अध्यक्ष पद के लिए भी खुला समर्थन दिया गया है।

    गैर-दलीय चुनाव, पर दलीय रणनीति

    8 फरवरी को नाम वापसी की आखिरी तारीख बीतते ही तस्वीर साफ हो गई—गठबंधन की एकजुटता यहां नहीं दिखेगी। हालांकि, कांग्रेस और जेएमएम दोनों इसे “मतभेद” मानने से इनकार कर रहे हैं।
    कांग्रेस प्रवक्ता का कहना है—“यह विधानसभा या लोकसभा चुनाव नहीं है। यहां मुद्दे मोहल्लों के हैं, नालियों और सड़कों के हैं, हर वार्ड की अपनी प्राथमिकताएं हैं।”
    जेएमएम प्रवक्ताभी यही तर्क देते हैं—“जब चुनाव पार्टी चिन्ह पर नहीं हो रहा, तो स्थानीय चेहरा और उसकी स्वीकार्यता ज्यादा मायने रखती है।”

    लेकिन सवाल यह है कि अगर चुनाव पूरी तरह स्थानीय है, तो फिर इतने बड़े पैमाने पर दलों की सक्रियता क्यों?

    बीजेपी की शहरी पकड़

    राज्य के प्रमुख शहरी केंद्र—रांची, जमशेदपुर, धनबाद, बोकारो, देवघर, हजारीबाग, गिरिडीह और मेदिनीनगर—परंपरागत रूप से भाजपा के प्रभाव वाले क्षेत्र रहे हैं। एनडीए खेमे में भाजपा को अपने सहयोगियों एजेएसयू, जद(यू) और लोजपा (रामविलास) से खास चुनौती नहीं दिख रही।

    यानी मुकाबला असल में तीन कोनों वाला है—भाजपा, जेएमएम और कांग्रेस।

    जेएमएम की शहरी परीक्षा

    अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि यह दरअसल जेएमएम का “अर्बन एक्सपेरिमेंट” है। 81 सदस्यीय विधानसभा में जेएमएम की 34 सीटों में से करीब 90 प्रतिशत ग्रामीण इलाकों से आती हैं। ग्रामीण इलाकों में मजबूत पकड़ के बावजूद बड़े शहरों में पार्टी अब तक सीमित रही है।

    छह साल से सत्ता में रहने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में जेएमएम अब शहरों में भी अपनी जमीन तलाश रही है। यही वजह है कि पार्टी ने कई मजबूत स्थानीय चेहरों—यहां तक कि दूसरे दलों के बागी नेताओं—को भी समर्थन दिया है।

    गठबंधन पर असर?

    क्या यह नगर निकाय चुनाव भविष्य में इंडिया ब्लॉक की एकता को प्रभावित करेगा?
    फिलहाल दोनों दल इसे महज़ स्थानीय रणनीति बता रहे हैं। लेकिन राजनीतिक जानकार मानते हैं कि अगर नतीजे चौंकाने वाले रहे, तो इसका असर 2029 की बड़ी लड़ाइयों तक महसूस किया जा सकता है।

    फिलहाल तस्वीर साफ है—
    चुनाव भले ही “गैर-दलीय” हो,
    लेकिन सियासत पूरी तरह “दलीय” है।

    23 फरवरी को मतदाता तय करेंगे कि शहरों की कमान किसके हाथ जाएगी—परिणाम सिर्फ मेयर और अध्यक्ष नहीं चुनेंगे, बल्कि यह भी बताएंगे कि झारखंड की शहरी राजनीति किस करवट बैठ रही है।

     

  • हजारीबाग में दर्दनाक हादसा: जमीन में दबे बम के विस्फोट से तीन की मौत, इलाके में दहशत

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    हजारीबाग:  झारखंड के हजारीबाग शहर में बुधवार शाम एक भयावह हादसे ने पूरे इलाके को दहला दिया। बड़ा बाजार थाना क्षेत्र के हबीबीनगर मोहल्ले में झाड़ी साफ करने के दौरान जमीन के अंदर छिपे बम में अचानक जोरदार विस्फोट हो गया। इस दर्दनाक घटना में पति-पत्नी समेत तीन लोगों की जान चली गई। मृतकों में दो महिलाएं और एक पुरुष शामिल हैं।

    घटना बुधवार शाम लगभग साढ़े चार बजे की बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार, मोहम्मद सद्दाम हुसैन अपनी जमीन पर झाड़ियां और घास साफ कर रहे थे। इसी दौरान उनकी पत्नी नन्ही परवीन और एक अन्य महिला रशीदा परवीन भी वहां मौजूद थीं। जैसे ही कुदाल जमीन में गड़ी, नीचे दबे बम में अचानक विस्फोट हो गया। धमाका इतना जबरदस्त था कि आसपास के लोग सहम गए और मौके पर अफरा-तफरी मच गई।

    विस्फोट के बाद दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि गंभीर रूप से घायल एक व्यक्ति को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां उसने दम तोड़ दिया। इस हादसे में जान गंवाने वालों की पहचान मोहम्मद सद्दाम (40 वर्ष), पिता मोहम्मद यूनुस, उनकी पत्नी नन्ही परवीन (32 वर्ष) तथा रशीदा परवीन (45 वर्ष), पति मोहम्मद मुश्ताक के रूप में हुई है।

    मकर संक्रांति जैसे पर्व के दिन हुए इस हादसे से पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है। घटना के बाद बड़ी संख्या में लोग घटनास्थल के आसपास जमा हो गए, जिसके बाद प्रशासन ने तत्काल अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर क्षेत्र को सील कर दिया। लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों से बचने की अपील की गई है।

    गौरतलब है कि हबीबीनगर इलाका पहले भी विस्फोट की घटनाओं को लेकर सुर्खियों में रह चुका है। अप्रैल 2016 में इसी क्षेत्र में बम बनाने के दौरान हुए विस्फोट में छह लोगों की मौत हो गई थी। एक बार फिर जमीन में दबे विस्फोटक के मिलने से सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

    घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम तत्काल मौके पर पहुंची। घायलों को आनन-फानन में सदर अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने तीनों को मृत घोषित कर दिया। विस्फोट के कारणों को लेकर स्थिति अब तक स्पष्ट नहीं हो सकी है। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि धमाका किसी पहले से रखे गए विस्फोटक के कारण हुआ या किसी अन्य वजह से। एहतियात के तौर पर पूरे इलाके को सील कर दिया गया है।

    फॉरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) की टीम को भी घटनास्थल पर बुलाया गया है, जो साक्ष्य जुटाकर जांच में जुटी हुई है। प्रशासन ने क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर मामले की गहन जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही विस्फोट की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल, घटना से स्थानीय लोगों में भय का माहौल है।

    झारखंड पुलिस के प्रवक्ता और आईजी ऑपरेशन माइकल राज ने धमाके में 3 लोगों की मौत की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि धमाके की वजह और प्रकृति का पता लगाया जा रहा है। पुलिस और फोरेंसिक टीमें मौके पर हैं।

  • रांची में टेक्नोलॉजी और इनोवेशन का महाकुंभ, 17–18 जनवरी को गूंजेगा RanchiHacks’26

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    रांची : राजधानी रांची अब सिर्फ राजनीति और संस्कृति की पहचान तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि टेक्नोलॉजी और इनोवेशन का नया हब बनने जा रही है। 17 और 18 जनवरी को रांची में होने जा रहा है RanchiHacks’26, जो तकनीकी प्रतिभाओं के लिए किसी महाकुंभ से कम नहीं है।

    यह 24 घंटे का ऑफलाइन हैकाथॉन राजधानी में नवाचार की नई लकीर खींचेगा। आयोजन का ग्रैंड फिनाले G. D. Birla Auditorium, Ranchi में होगा, जहाँ देशभर के युवा टेक्नोलॉजिस्ट अपनी प्रतिभा का दमखम दिखाएंगे।

    Google Developer Groups Ranchi द्वारा आयोजित इस हैकाथॉन को देश के हर कोने से जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला है।
    500 से अधिक टीमों ने रजिस्ट्रेशन कराया,
    350 से ज्यादा इनोवेटिव प्रोजेक्ट सबमिट किए गए,
    और कड़ी चयन प्रक्रिया के बाद टॉप 31 टीमों ने फाइनल राउंड में अपनी जगह बनाई है।

    RanchiHacks’26 की खास बात यह है कि इसे AI Impact Summit 2026 का आधिकारिक प्री-समिट इवेंट घोषित किया गया है। यह समिट भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के तत्वावधान में आयोजित हो रहा है, जिससे इस आयोजन की राष्ट्रीय अहमियत और भी बढ़ जाती है।

    हैकाथॉन के दौरान प्रतिभागी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्योरिटी, ब्लॉकचेन, IoT, रोबोटिक्स, Web3 और सस्टेनेबल डेवलपमेंट जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में समाधान पेश करेंगे।

    प्रतिभागियों को Google, Infosys, HP, American Express और Wipro जैसी दिग्गज कंपनियों से जुड़े अनुभवी मेंटर्स का मार्गदर्शन मिलेगा, वहीं देश-विदेश के विशेषज्ञों की जूरी फाइनल प्रोजेक्ट्स का मूल्यांकन करेगी।

    कुल मिलाकर RanchiHacks’26 न सिर्फ झारखंड बल्कि पूरे पूर्वी भारत के लिए टेक्नोलॉजी और इनोवेशन के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक पड़ाव साबित होने जा रहा है — जहाँ से भविष्य की टेक्नोलॉजी की नई कहानी लिखी जाएगी।

  • झारखंड की अबुआ सरकार से घबराई हुई है भाजपा- राजद

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    गिरिडीह :  राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रदेश प्रवक्ता कैलाश यादव  ने भारतीय जनता पार्टी पर जमकर निशाना साधते हुए झारखंड की राजनीति और विकास से जुड़े कई अहम मुद्दों को उठाया। वे सोमवार को  गिरिडीह मे मीडिया कर्मियों से मुखातिब थे ।

    प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि झारखंड अलग राज्य बनने के बाद बाबूलाल मरांडी के मुख्यमंत्री बनने से लेकर कई वर्षों तक भाजपा ने राज्य में सरकार चलाई, लेकिन इस दौरान राज्य की खनिज संपदा, जल, जंगल और जमीन को बेचने का काम भाजपा सरकारों ने किया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने झारखंड के संसाधनों को कॉरपोरेट हितों के हवाले कर दिया।

    कैलाश यादव ने कहा कि आज झारखंड देश का वह राज्य है, जहां सबसे अधिक नियुक्ति पत्र युवाओं को सौंपे गए हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार लगातार युवाओं को रोजगार देने का काम कर रही है, लेकिन भाजपा इस सकारात्मक कार्य से परेशान है और इसी कारण अनर्गल बयानबाजी कर रही है।

    झारखंड में चल रही राजनीतिक उथल-पुथल पर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने स्पष्ट कहा कि

    “झारखंड में झारखंड मुक्ति मोर्चा, कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल की सरकार पूरी मजबूती के साथ चल रही है। भाजपा साजिश के तहत इस सरकार को बदनाम करने की कोशिश कर रही है।”

    उन्होंने आगे कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में अबुआ सरकार झारखंड के सर्वांगीण विकास के लिए पूरी तरह कटिबद्ध है। वर्षों से लंबित पेसा कानून को लागू कर सरकार ने एक नया इतिहास रचा है, जिससे आदिवासी और ग्रामीण समाज को अधिकार मिले हैं।

    कैलाश यादव ने कहा कि आने वाले नगर निकाय चुनावों में राष्ट्रीय जनता दल पूरी मजबूती और रणनीति के साथ मैदान में उतरेगी और जनता के मुद्दों को लेकर संघर्ष जारी रखेगी।

  • व्यापारियों का आक्रोश फूटा, मुख्यमंत्री का किया पुतला दहन

    परवेज़ आलम.

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    गिरिडीह: मुसाबनी की सभा में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा व्यापारियों के खिलाफ दिए गए अपमानजनक बयान के विरोध में मंगलवार को गिरिडीह के टावर चौक पर व्यापारिक समुदाय ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। नाराज व्यापारियों ने मुख्यमंत्री का पुतला फूंककर अपनी तीखी प्रतिक्रिया दर्ज कराई और मांग की – मुख्यमंत्री अपने बयान पर तुरंत सार्वजनिक माफी मांगें।

    इस विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में व्यापारी शामिल हुए। व्यापारिक प्रतिनिधियों में शुभम केशरी, श्रेयांश सिन्हा, रामपुनीत सिंह, संदीप डंगाइच, मुकेश जालान, दिनेश यादव, नवीन सिन्हा, हरमिंदर सिंह बग्गा और शाहिल शर्मा प्रमुख रूप से मौजूद थे। सभी ने एक स्वर में कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा दिया गया बयान — “व्यापारी पहले पैर पकड़ते हैं और बाद में गला पकड़ते हैं” — न केवल असंवेदनशील और आपत्तिजनक है, बल्कि पूरे व्यापारी वर्ग के आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाने वाला है।

    वक्ताओं ने कहा कि झारखंड के व्यापारी सदैव राज्य की आर्थिक रीढ़ रहे हैं। चाहे कोरोना जैसी आपदा रही हो या मंदी के कठिन दौर, व्यापारियों ने सरकार और समाज दोनों के साथ मिलकर राहत कार्यों में अहम भूमिका निभाई है। ऐसे में मुख्यमंत्री द्वारा दिया गया यह बयान न केवल अनुचित है, बल्कि सत्ता के अहंकार को दर्शाता है।

    व्यापारिक समुदाय ने एकजुट होकर चेतावनी दी कि यदि मुख्यमंत्री शीघ्र ही अपने बयान पर व्यापारी समाज से सार्वजनिक माफी नहीं मांगते, तो राज्यभर में व्यापारी संगठन व्यापक आंदोलन छेड़ देंगे।

    प्रदर्शन के दौरान उपस्थित व्यापारियों ने कहा कि झारखंड के विकास में व्यापारिक वर्ग का योगदान किसी से कम नहीं है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि जनता और व्यापारियों के सम्मान की रक्षा की जाए, न कि अपमानजनक शब्दों से उनके मनोबल को ठेस पहुंचाई जाए।

    टावर चौक पर हुए इस विरोध प्रदर्शन के दौरान “व्यापारी एकता ज़िंदाबाद”, “मुख्यमंत्री माफी मांगो” और “व्यापारियों का सम्मान करो” जैसे नारे गूंजते रहे। प्रदर्शन का माहौल शांतिपूर्ण रहा, लेकिन व्यापारियों के तेवर बेहद सख्त दिखे।

  • गिरिडीह को मिलेगी जाम से मुक्ति, बरगंडा चर्च मोड़ से कॉलेज तक बनेगी टू-लेन सड़क

    -शहर को मिलेगी नई रफ्तार.

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    गिरिडीह शहरवासियों के लिए एक खुशखबरी है — लंबे समय से जाम और संकरी सड़कों की परेशानी झेल रहे लोगों को अब बड़ी राहत मिलने वाली है। बरगंडा चर्च से कॉलेज मोड़ तक की सड़क को अब आधुनिक रूप में विकसित किया जाएगा। लगभग 3.5 किलोमीटर लंबी इस सड़क को टू लेन विद पेव्ड शोल्डर के रूप में तैयार किया जाएगा।

    वर्तमान में यह सड़क सिर्फ 7 मीटर चौड़ी है, लेकिन अब इसे 10 मीटर तक विस्तारित किया जाएगा। इतना ही नहीं, दोनों ओर 2-2 मीटर के पथ-वे (footpaths) भी बनाए जाएंगे, जिससे पैदल यात्रियों को भी सुविधा मिलेगी।

    यह महत्वाकांक्षी परियोजना नगर विकास मंत्री और गिरिडीह विधायक सुदिव्य कुमार सोनू की सक्रिय पहल का नतीजा है। उनके प्रयासों से आरसीडी विभाग ने इस परियोजना को मंज़ूरी दी है। विभाग का कहना है कि सड़क चौड़ी होने से शहर के भीतर ट्रैफिक जाम की समस्या में भारी आएगी, वाहनों की आवाजाही सुचारू होगी और लोगों को रोज़ाना के आवागमन में बड़ा सुधार महसूस होगा।

    इसी के साथ नगर निगम ने व्हीटी बाजार रोड को फोरलेन बनाने की तैयारी भी शुरू कर दी है। यदि यह योजना भी अमल में आती है, तो गिरिडीह शहर की सड़कों पर सफ़र करना अब किसी सज़ा नहीं बल्कि एक राहत भरा अनुभव होगा।

    शहर के लोगों का कहना है — “अगर ये काम तय समय में हो जाए, तो गिरिडीह की तस्वीर ही बदल जाएगी।”
    सच कहा जाए, तो यह परियोजना गिरिडीह के विकास की रफ्तार को नई दिशा देने वाली साबित हो सकती है।

  • बिहार चुनाव में JMM को बड़ा झटका, नहीं हुआ एक भी नामांकन

    — मंत्री बोले “राजद-कांग्रेस की धूर्त राजनीति का शिकार हुई पार्टी”

    परवेज़ आलम.

    गिरिडीह:  बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी इस बार बिहार की किसी भी विधानसभा सीट पर चुनाव नहीं लड़ पाएगी, क्योंकि नामांकन की अंतिम तिथि (सोमवार) बीत जाने तक जेएमएम का कोई उम्मीदवार पर्चा दाखिल नहीं कर सका।

    इस अप्रत्याशित स्थिति के बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा ने औपचारिक रूप से महागठबंधन से अलग होने की घोषणा कर दी है।
    यह घोषणा झारखंड सरकार के मंत्री और जेएमएम के वरिष्ठ नेता सुदिव्य कुमार सोनू ने गिरिडीह में पत्रकारों से बातचीत के दौरान की।

    राजद और कांग्रेस ने दिखाई राजनीतिक धूर्तता.

    पत्रकारों से बातचीत में मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने तीखे शब्दों में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और कांग्रेस दोनों पर गंभीर आरोप लगाए।
    उन्होंने कहा —

    “राजद और कांग्रेस ने जो किया है, वह राजनीतिक धूर्तता की पराकाष्ठा है। हमें जानबूझकर गठबंधन की प्रक्रिया से बाहर रखा गया। इसका परिणाम जल्द ही सबके सामने होगा।”

    मंत्री ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि अब जेएमएम बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन का हिस्सा नहीं है, और पार्टी किसी भी सीट पर चुनाव नहीं लड़ेगी।

    सीट शेयरिंग पर अटका मामला, 13 दिनों तक होता रहा इंतज़ार.

    मंत्री सोनू ने बताया कि 7 अक्टूबर को पटना में सीट बंटवारे को लेकर महागठबंधन की बैठक हुई थी।
    वे अपने सहयोगी विनोद पांडेय के साथ इस बैठक में शामिल हुए थे।
    जेएमएम को उम्मीद थी कि पार्टी को कुछ सीटें मिलेंगी, ताकि बिहार में भी उसका राजनीतिक विस्तार हो सके।

    लेकिन मंत्री के अनुसार,

    “7 अक्टूबर से 20 अक्टूबर तक राजद ने चालबाजी का खेल खेला, और कांग्रेस ने उस पर मौन सहमति दी।
    जब तक नामांकन की तिथि समाप्त हुई, हमें जानबूझकर दरकिनार कर दिया गया।”

    उन्होंने इसे “साजिशन बहिष्कार” बताया और कहा कि राजद-कांग्रेस की मिलीभगत ने जेएमएम की चुनावी योजनाओं पर पानी फेर दिया।

    अगर पहले साफ़ बोलते, तो हम अकेले मैदान में उतर जाते.

    मंत्री सोनू ने अपनी नाराज़गी जताते हुए कहा कि अगर राजद और कांग्रेस को जेएमएम को सीट नहीं देनी थी, तो यह बात पहले ही स्पष्ट करनी चाहिए थी।

    “हम झारखंड से बिहार तक एकजुटता और क्षेत्रीय सहयोग का संदेश देना चाहते थे, लेकिन हमें राजनीतिक सहयोगी नहीं, बल्कि प्रतिद्वंद्वी समझा गया,”
    मंत्री सोनू ने कहा।

    उन्होंने आगे कहा —

    “7 से 20 अक्टूबर तक हमें सिर्फ छल का सामना करना पड़ा। यह सब सोची-समझी चाल थी, जिसमें कांग्रेस ने राजद का पूरा साथ दिया। अब इसका खामियाजा दोनों दलों को भुगतना पड़ेगा। क्यूकि JMM देश की अकेली  पार्टी है जिसका आदिवासी समाज मे ब्यापक जननधर है और बिहार की कई सीटों पर महागठबंधन को  JMM की उपेक्षा भारी पड़ेगी ।

    महागठबंधन की एकता पर बड़ा सवाल.

    जेएमएम के महागठबंधन से अलग होने के ऐलान से बिहार महागठबंधन की एकता पर एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।
    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह टूट न केवल महागठबंधन की साख को कमजोर करेगी, बल्कि झारखंड-बिहार के क्षेत्रीय तालमेल और गठबंधन राजनीति की विश्वसनीयता पर भी असर डालेगी।

    बिहार की सियासत में जहां एक ओर गठबंधन की मजबूती की बातें हो रही थीं, वहीं अब जेएमएम का यह कदम आने वाले दिनों में नए समीकरण और नए गठजोड़ों की शुरुआत कर सकता है।

    फिलहाल का निष्कर्ष.

    झारखंड मुक्ति मोर्चा ने साफ़ कर दिया है कि वह अब बिहार मे महागठबंधन का हिस्सा नहीं रहेगा और झारखंड मे महागठबंधन के रहने पर भी समीक्षा होगी ।
    मंत्री सोनू के बयान से यह भी स्पष्ट है कि यह अलगाव किसी सीट या सौदेबाज़ी  का नहीं, बल्कि विश्वास और सम्मान की राजनीति  का मामला है।

    बिहार के चुनावी मैदान में अब यह देखना दिलचस्प होगा कि
    क्या राजद-कांग्रेस इस झटके से उबर पाते हैं,
    या फिर झारखंड से उठी यह नाराज़गी
    बिहार की सियासत की नई कहानी लिख देगी।