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  • झारखंड हाईकोर्ट का कड़ा रुख: पुलिस के दो अफसरों को जेल की सजा

    RANCHI:झारखंड हाईकोर्ट ने पुलिसिया कार्यशैली पर सख्त रुख अपनाते हुए जगन्नाथपुर थाना के तत्कालीन प्रभारी हरिदेव प्रसाद और सब-इंस्पेक्टर राजीव रंजन को एक महीने की जेल की सजा सुनाई है। दोनों अधिकारियों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।

    यह मामला रांची के रहने वाले इरशाद से जुड़ा है। इरशाद ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि चोरी के एक मामले में उसे बिना कानूनी प्रक्रिया के गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। इसके साथ ही पुलिस हिरासत में दुर्व्यवहार और प्रताड़ना का भी आरोप लगाया गया था।

    चीफ जस्टिस की बेंच ने मामले की सुनवाई के बाद पाया कि पुलिस अधिकारियों ने कानून का उल्लंघन किया है और अपनी जिम्मेदारियों का सही निर्वहन नहीं किया। अदालत ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए सजा सुनाई।

    यह फैसला न केवल पुलिस प्रशासन के लिए एक चेतावनी है, बल्कि नागरिक अधिकारों के हनन पर न्यायपालिका के सख्त तेवर को भी दिखाता है।

    इस खबर को पर अपने दोस्तो और जानने वालों को भी श्येर करें ।

  • जामताड़ा से देवघर-दुमका-गिरिडीह तक फैला साइबर क्राइम का जाल

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट ……..

    गिरिडीह :एक समय साइबर अपराध के लिए कुख्यात जामताड़ा का नाम अब देवघर -दुमकाऔर गिरिडीह  के साथ लिया जा रहा है। देशभर में ठगी करने वाले इन जिलों के साइबर ठगों ने हर किसी को परेशान कर रखा है। गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाली इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (आईफोरसी) ने झारखंड पुलिस को 300 फोन नंबरों की लिस्ट भेजी है। इन नंबरों का इस्तेमाल साइबर फ्रॉड के लिए किया जा रहा है।

    आईफोरसी की कार्रवाई: क्या होगा इन नंबरों का?
    आईफोरसी का काम देश में साइबर अपराध को रोकना और पुलिस को तकनीकी मदद देना है। झारखंड पुलिस ने इन नंबरों को संबंधित जिलों की पुलिस को भेजने की तैयारी कर ली है, ताकि जांच शुरू की जा सके और ठगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके।

    झारखंड मॉडल पर केंद्र का ऐप।
    आईफोरसी ने झारखंड पुलिस के प्रतिबिंब ऐप की तर्ज पर एक ऐप तैयार किया है। इस ऐप की मदद से साइबर अपराधियों का पता लगाने में आसानी होगी। जांच में पता चला कि जामताड़ा, देवघर और दुमका के ठग 300 नंबरों के जरिए देशभर में फ्रॉड कर रहे थे। आईफोरसी ने इन्हीं नंबरों की लिस्ट झारखंड पुलिस को कार्रवाई के लिए सौंपी है।

    जामताड़ा: साइबर अपराध की ‘कैपिटल’
    जामताड़ा साइबर ठगी का पर्याय बन चुका है। यहां के अपराधियों के कारनामों पर एक वेब सीरीज भी बन चुकी है। नेटफ्लिक्स पर रिलीज़ इस सीरीज ने दिखाया कि कैसे संगठित तरीके से जामताड़ा के ठग पूरे देश में लोगों से धोखाधड़ी करते हैं। इसी वजह से जामताड़ा को साइबर क्राइम का कैपिटल ऑफ इंडिया कहा जाता है।

    अब देवघर -दुमका और गिरिडीह  भी चर्चा में। 
    जहां पहले जामताड़ा का नाम ही कुख्यात था, अब देवघर-दुमकाऔर गिरिडीह  भी इस लिस्ट में जुड़ गए हैं। इन जिलों के ठग नई तकनीकों का इस्तेमाल कर लोगों को ठग रहे हैं।

    पुलिस का दावा: जल्द होगी कार्रवाई
    झारखंड पुलिस का कहना है कि इन नंबरों का बारीकी से विश्लेषण किया जा रहा है। जिला पुलिस जल्द ही अपराधियों की पहचान करेगी और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेगी।

    साइबर अपराध के बढ़ते मामलों ने झारखंड पुलिस और प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। लेकिन आईफोरसी और स्थानीय पुलिस की संयुक्त कार्रवाई से उम्मीद है कि ठगों के इस संगठित नेटवर्क को तोड़ा जा सकेगा।

  • दिनदहाड़े मर्डर: रांची में व्यापारी को बदमाशों ने मारीं 10 गोलियां, मौके पर मौत

    रांची: झारखंड की राजधानी में अपराध का एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। नामकुम थाना क्षेत्र के रिंग रोड पर बदमाशों ने एक जमीन कारोबारी की गोली मारकर हत्या कर दी। मृतक की पहचान मधुसूदन राय के रूप में हुई है, जो राजा उलिहातू इलाके के रहने वाले थे।

    कैसे हुई घटना?
    मधुसूदन राय स्कूटी पर सवार होकर कहीं जा रहे थे। जैसे ही वह रिंग रोड के सुनसान इलाके में पहुंचे, घात लगाए बदमाशों ने उन पर अंधाधुंध गोलियां बरसा दीं। बताया जा रहा है कि कारोबारी को 10 से ज्यादा गोलियां मारी गईं, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

    पुलिस की जांच तेज
    घटना की जानकारी मिलते ही नामकुम थाना प्रभारी, डीएसपी अमर कुमार पांडे, और ग्रामीण एसपी सुमित अग्रवाल मौके पर पहुंचे। एसपी ने बताया कि हत्या की पूरी योजना रेकी करके बनाई गई थी। पुलिस ने इलाके के सीसीटीवी कैमरे खंगालने शुरू कर दिए हैं और डॉग स्क्वायड टीम भी जांच में जुट गई है।

    क्या कहती है शुरुआती जांच?
    डीएसपी अमर पांडे ने बताया कि मृतक मधुसूदन राय जमीन से जुड़े कामों में सक्रिय थे। शुरुआती जांच में दुश्मनी का शक भी जताया जा रहा है, लेकिन अभी कुछ ठोस जानकारी सामने नहीं आई है।

    क्या था घटनास्थल का हाल?
    जहां हत्या हुई, वह इलाका बेहद सुनसान है। रिंग रोड होने के कारण वहां से गुजरने वाले वाहन भी कम ही थे। पुलिस को शक है कि बदमाशों ने कई दिनों तक रेकी की होगी।


    दिनदहाड़े हुए इस हत्याकांड ने राजधानी की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोग दहशत में हैं और पुलिस से सुरक्षा की मांग कर रहे हैं।

    पुलिस का दावा है कि जल्द ही अपराधियों को पकड़ लिया जाएगा। फिलहाल मधुसूदन राय का शव पोस्टमॉर्टम के लिए रिम्स भेज दिया गया है। घटना के बाद से इलाके में तनाव का माहौल है।

  • झारखंड में लाल खतरा: CM से विधायक तक सुरक्षा का कड़ा पहरा

    RANCHI:   झारखंड में विधानसभा सत्र के दौरान माहौल तनातनी का है। नक्सली खतरे के अलर्ट ने पुलिस और प्रशासन को चौकन्ना कर दिया है। CM हेमंत सोरेन से लेकर विधायकों तक, हर किसी की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। स्पेशल ब्रांच (SB) की रिपोर्ट ने कई इलाकों को संवेदनशील घोषित किया है।

    “लाल इलाकों की पहचान, सुरक्षा का ब्लूप्रिंट तैयार”
    SB की रिपोर्ट में रांची से लेकर गिरिडीह और गुमला तक, कई इलाकों को खतरनाक बताया गया है। इन रास्तों पर नेताओं के आवागमन के दौरान सुरक्षा कड़ी रहेगी। तैमारा घाटी, चुटूपालू और टाटीझरिया जैसे इलाके लिस्ट में टॉप पर हैं। यहां पुलिस गश्त बढ़ाई जाएगी और लांग रेंज पेट्रोलिंग शुरू होगी।

    “सड़कों पर निगरानी, जंगलों पर नजर”
    सुरक्षा की योजना सिर्फ शहरों तक सीमित नहीं है। रांची-लातेहार, खूंटी-चाईबासा, और गुमला-सिमडेगा जैसे जंगलों वाले रास्तों पर पुलिस की मुस्तैदी और बढ़ा दी गई है। बेतला, अमझारिया और महुआडांड़ घाटियों में पुलिस चौकसी बढ़ गई है। “हर घात को नाकाम करना हमारा लक्ष्य है,” पुलिस अधिकारियों का कहना है।

    “नेताओं पर मंडराता खतरा”
    SB का कहना है कि उग्रवादियों ने पहले भी विधानसभा सत्र के दौरान घटनाओं को अंजाम दिया है। इस बार संभावित हमलों के मद्देनजर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। “सड़क से सदन तक, हर नेता सुरक्षित रहेगा,” प्रशासन ने दावा किया।

    “यहां है सबसे ज्यादा खतरा”
    तैमारा घाटी, चुटूपालू, टाटीझरिया से लेकर चंदवा और बड़कागांव तक, खतरे की लिस्ट लंबी है। इन इलाकों में पुलिस की 24×7 निगरानी रहेगी। गढ़वा, बोकारो और चाईबासा के जंगल भी सूची में शामिल हैं।

    “सरकार का वादा: कोई चूक नहीं”
    इस बार सरकार और प्रशासन नक्सली चुनौतियों को लेकर खासा सतर्क हैं। “हमारे नेता सुरक्षित हैं और रहेंगे,” मुख्यमंत्री कार्यालय का बयान आया है।

    सुरक्षा के इस पुख्ता इंतजाम के साथ झारखंड सरकार ने साफ कर दिया है कि नक्सली खतरों को जवाब देने के लिए वो हर कदम उठाने को तैयार है। अब देखना है कि सुरक्षा की यह दीवार कितनी मजबूत साबित होती है।

  • झारखंड पुलिस में सुधार की बयार, FIR दर्ज करने के निर्देश जारी

    रांची: झारखंड के पुलिस महानिदेशक अनुराग गुप्ता ने राज्यभर में पुलिस प्रशासन को नई दिशा देने के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने सभी जिलों के वरीय पुलिस अधीक्षक और पुलिस अधीक्षकों को साफ कहा है कि उनके अधीनस्थ थानों में FIR दर्ज करने में किसी भी तरह की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। साथ ही, आम जनता के साथ पुलिस का व्यवहार बेहतर बनाने पर खास जोर दिया गया है।

    पुलिस महानिदेशक ने विशेष रूप से साइबर अपराध, अनुसूचित जाति/जनजाति (SC/ST) से जुड़े मामलों, मानव तस्करी और महिलाओं के खिलाफ अपराधों को लेकर गंभीरता दिखाई है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि इन मामलों में पीड़ित की शिकायत पर तुरंत FIR दर्ज की जाए और कार्रवाई में कोई देरी न हो।

    इसके साथ ही, जनता की शिकायतों पर लापरवाही बरतने वाले थाना प्रभारियों पर भी नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। अगर किसी थाने में शिकायतकर्ता की समस्या पर ध्यान नहीं दिया जाता, तो लोग सीधे वरीय अधिकारियों, जैसे पुलिस महानिरीक्षक, पुलिस उप-महानिरीक्षक, और पुलिस अधीक्षक से संपर्क कर सकते हैं।

    पुलिस अधीक्षकों और क्षेत्रीय पुलिस उप-महानिरीक्षकों को अपने दौरे के दौरान थानों में पुलिसकर्मियों को जनता के साथ संवेदनशील और मर्यादित व्यवहार करने के लिए प्रेरित करने को कहा गया है। इसके अलावा, अपराध अनुसंधान विभाग और विशेष शाखा के पुलिस महानिरीक्षक को निर्देशित किया गया है कि वह पुलिसकर्मियों के व्यवहार पर पैनी नजर रखें। अगर किसी पुलिस अधिकारी द्वारा जनता के साथ दुर्व्यवहार का मामला सामने आता है, तो इसकी रिपोर्ट पुलिस महानिदेशक को दी जाएगी, ताकि सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सके।

     

  • सीएम का निर्देश: झारखंड में लॉ एंड ऑर्डर दुरुस्त करें

    रांची से खबर…….

    झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मंगलवार को राज्य में कानून व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए ठोस कदम उठाने की बात कही। उन्होंने कहा कि झारखंड में बेहतर लॉ एंड ऑर्डर सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि सुनियोजित अपराधों पर रोक लगाने के लिए चिन्हित अपराधियों पर सख्त कार्रवाई की जाए और एक प्रभावी एक्शन प्लान तैयार किया जाए।

    अवैध खनन पर सख्ती के निर्देश
    मुख्यमंत्री ने पुलिस अधिकारियों को अवैध खनन पर सख्त कदम उठाने का आदेश दिया। उन्होंने कहा, “अवैध माइनिंग राज्य की छवि को धूमिल कर रही है। नदियों से बालू और मिट्टी के अवैध उठाव पर रोक लगाना बेहद जरूरी है। इससे नदियों का अस्तित्व खतरे में पड़ रहा है।” मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि अवैध खनन पर लगाम लगाने के लिए एक विशेष कार्य योजना तैयार करें।

    साइबर अपराध पर सख्त नजर
    मुख्यमंत्री ने साइबर अपराध को राज्य के लिए एक गंभीर चुनौती बताते हुए पुलिस को निर्देश दिया कि साइबर क्राइम से निपटने के लिए एक मजबूत तंत्र तैयार करें। बैठक में झारखंड साइबर क्राइम को-ऑर्डिनेशन सेंटर स्थापित करने पर चर्चा हुई। सीएम ने कहा कि जल्द से जल्द टेक्निकल सेल का गठन करें और तकनीकी विशेषज्ञों की नियुक्ति करें। उन्होंने बताया कि आधुनिक तकनीक का उपयोग कर साइबर अपराध को नियंत्रित किया जा सकता है।

    ‘प्रतिबिंब ऐप’ से मिली कामयाबी
    बैठक में पुलिस अधिकारियों ने बताया कि ‘प्रतिबिंब ऐप’ के जरिए 330 साइबर अपराधियों पर एफआईआर दर्ज की गई है। अब तक 1281 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि 3493 सिम कार्ड और 2524 मोबाइल जब्त किए गए हैं।

    नशे और अफीम की खेती पर कड़े कदम
    मुख्यमंत्री ने नशे के खिलाफ कड़े कदम उठाने और अफीम की खेती पर रोक लगाने के लिए भी निर्देश दिए।

    इस उच्चस्तरीय बैठक में मुख्य सचिव अलका तिवारी, मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव अविनाश कुमार, प्रधान सचिव (गृह विभाग) वंदना दादेल, डीजीपी अनुराग गुप्ता सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

    मुख्यमंत्री के इस निर्देश से साफ है कि झारखंड सरकार राज्य में अपराध और अवैध गतिविधियों पर सख्ती से रोक लगाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

  • झारखंड : बालिका गृह में यौन शोषण का शर्मनाक मामला, संचालक और कर्मी गिरफ्तार

    RANCHI: झारखंड के पलामू जिले के सुदना इलाके में स्थित एक बालिका गृह में यौन शोषण का गंभीर मामला सामने आया है। दो बच्चियों ने बालिका गृह के संचालक और एक महिला कर्मी पर यौन शोषण का आरोप लगाया है। इस मामले का खुलासा तब हुआ, जब शुक्रवार को कुछ मानवाधिकार कार्यकर्ता बालिका गृह का दौरा करने पहुंचे।

    आपबीती सुनाते हुए रो पड़ीं बच्चियां
    28 बच्चियों वाले इस बालिका गृह में रह रहीं दो लड़कियों ने मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के सामने अपनी आपबीती सुनाई। उन्होंने बताया कि संचालक ने उनके साथ घिनौनी हरकत की और महिला कर्मी ने इस गुनाह में उसका साथ दिया। एक बच्ची ने कहा कि यह घटना दीपावली और छठ के दौरान हुई, जब उन्हें संचालक के घर ले जाया गया। दूसरी बच्ची ने भी ऐसे ही शोषण के प्रयास का खुलासा किया।

    पुलिस ने की त्वरित कार्रवाई
    इस मामले में पलामू की एसपी रीष्मा रमेशन ने जानकारी देते हुए कहा कि बच्चियों के बयान और मेडिकल जांच के आधार पर आरोपियों के खिलाफ पॉक्सो एक्ट समेत गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। फिलहाल, दोनों आरोपियों—बालिका गृह के संचालक और महिला कर्मी—को गिरफ्तार कर लिया गया है।

    सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट की गईं बच्चियां
    घटना के बाद प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए सभी 28 बच्चियों को बालिका गृह से निकालकर सखी वन स्टॉप सेंटर में स्थानांतरित कर दिया है। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि बच्चियों को एक सुरक्षित माहौल में रखा जाए।

    मुजफ्फरपुर कांड की यादें ताजा
    यह मामला बिहार के कुख्यात मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड की याद दिलाता है, जिसने पूरे देश को हिला कर रख दिया था। मानवाधिकार कार्यकर्ता संध्या सिन्हा ने इस घटना को बाल सुरक्षा व्यवस्था की विफलता करार दिया। उन्होंने कहा, “यह घटना बताती है कि बालिका गृहों की निगरानी और जांच की प्रक्रिया में अब भी गंभीर खामियां हैं।”

    प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती
    इस घटना ने न केवल प्रशासन की सतर्कता पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि बाल सुरक्षा व्यवस्था की कमजोरी को भी उजागर कर दिया है। यह जरूरी है कि ऐसे संवेदनशील संस्थानों की नियमित जांच की जाए और दोषियों को कड़ी सजा मिले, ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

    क्या बाल सुरक्षा अब भी प्राथमिकता नहीं?
    पलामू का यह मामला एक बार फिर हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि आखिर बच्चों की सुरक्षा के नाम पर चलने वाले इन संस्थानों की जवाबदेही कब तय होगी। दोषियों पर कार्रवाई तो हो रही है, लेकिन यह तब क्यों नहीं रोका गया, जब ये बच्चियां पहली बार पीड़ित हुईं?

     

  • गिरिडीह का थाना: अमित शाह के हाथों सम्मानित

    खास रिपोर्ट. परवेज़ आलम……..

    झारखंड के उस थाने की, जिसने पूरे देश में झारखंड का नाम रोशन कर दिया है।
    अमित शाह ने दिया सम्मान!
    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने झारखंड के गिरिडीह जिले के निमियाघाट थाने को देश के तीन सर्वश्रेष्ठ थानों में शामिल होने का गौरव दिलाते हुए सम्मानित किया।
    इस सम्मान को तत्कालीन थाना प्रभारी राणा जंगबहादुर सिंह ने 29 नवंबर को भुवनेश्वर मे ग्रहण किया। यह पुरस्कार हर साल गृह मंत्रालय द्वारा देश के सबसे बेहतरीन थानों को दिया जाता है।
    निमियाघाट को क्यों मिला यह अवार्ड?
    आप सोच रहे होंगे कि निमियाघाट थाना आखिर क्यों चुना गया?
    👉 आम जनता के साथ पुलिस का व्यवहार।
    👉 थाने की साफ-सफाई और सुविधाएं।
    👉 दिव्यांगों के लिए रैंप और पुलिसकर्मियों की फिटनेस के इंतजाम।
    👉 सीसीटीवी और फायर सेफ्टी जैसी आधुनिक व्यवस्थाएं।
    इन सभी मानकों पर खरा उतरते हुए निमियाघाट थाना इस बार देश के शीर्ष तीन थानों में अपनी जगह बना सका।
    झारखंड का नाम राष्ट्रीय मंच पर!
    इस सम्मान ने यह साबित कर दिया कि छोटे शहरों और गांवों की पुलिसिंग भी राष्ट्रीय स्तर पर मिसाल बन सकती है। निमियाघाट थाना अब पूरे देश में चर्चा का केंद्र बन चुका है।
    राणा जंगबहादुर सिंह: इस सफलता के असली हीरो!
    थाने की इस ऐतिहासिक उपलब्धि के पीछे तत्कालीन थाना प्रभारी राणा जंगबहादुर सिंह का नाम है। उनके नेतृत्व में यह थाना हर मानक पर खरा उतरा और अब अमित शाह के हाथों ट्रॉफी लेने के बाद यह उपलब्धि झारखंड के लिए गर्व का विषय बन गई है।
    क्या यह झारखंड पुलिस के लिए नई शुरुआत है?
    यह सवाल अब झारखंड की पुलिसिंग व्यवस्था के लिए प्रेरणा है। क्या निमियाघाट की इस सफलता को राज्य के बाकी थाने भी अपना सकेंगे?
    झारखंड पुलिस ने क्या नया मानक स्थापित किया है?
    ऐसे समय में, जब पुलिसिंग को अक्सर आलोचनाओं का सामना करना पड़ता है, निमियाघाट थाना यह दिखाता है कि सही दिशा, नेतृत्व और जनता के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ पुलिस सिस्टम कितनी बेहतरीन बन सकती है।