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  • झारखंड पुलिस का रिपोर्ट कार्ड: माओवादी, साइबर और संगठित अपराध पर निर्णायक कार्रवाई, छह महीनों में दिखा असर

    रांची | राज्य ब्यूरो | 18 जुलाई 2025

    झारखंड पुलिस ने राज्य में माओवाद, साइबर ठगी, संगठित अपराध और मादक पदार्थ तस्करी जैसे अपराधों के खिलाफ बीते छह महीनों (जनवरी से जून 2025) में प्रभावी कार्रवाई कर अहम उपलब्धियां दर्ज की हैं। शुक्रवार को पुलिस मुख्यालय में आईजी अभियान डॉ. माइकल राज एस. ने इस छः माह की उपलब्धियों का रिपोर्ट कार्ड मीडिया के सामने प्रस्तुत किया।

    माओवादियों पर शिकंजा, बड़ी कार्रवाइयां.

    आईजी ने बताया कि राज्य में अब केवल 100 माओवादी-उग्रवादी ही सक्रिय बचे हैं, जिनमें 75 की मौजूदगी सारंडा (चाईबासा) क्षेत्र में है। बाकी 25 माओवादी अन्य जिलों में फैले हैं।

    इन छह महीनों में:

    • 197 माओवादियों को गिरफ्तार किया गया।
    • 10 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया।
    • 17 माओवादी मुठभेड़ों में मारे गए, जिनमें एक करोड़ के इनामी प्रयाग मांझी, अरविंद यादव, साहेब राम मांझी, विनय गंझू और जेजेएमपी प्रमुख पप्पू लोहरा जैसे शीर्ष नेता शामिल हैं।
    • 113 हथियार बरामद हुए, जिनमें 31 हथियार पुलिस से लूटे गए थे।

    राज्य के कई माओवादी प्रभावित क्षेत्रों—जैसे पारसनाथ, बूढ़ा पहाड़, बुंडू-तमाड़ और चतरा-गया जोन को उग्रवाद मुक्त घोषित कर दिया गया है। उग्रवाद प्रभावित जिलों की संख्या घटकर 9 रह गई है, जिनमें मुख्य रूप से चाईबासा और लातेहार शामिल हैं।

    साइबर अपराध पर सख्त कार्रवाई.

    जनवरी से जून 2025 तक साइबर अपराध पर पुलिस ने खास ध्यान दिया:

    • 620 केस दर्ज किए गए, जिनमें 767 साइबर अपराधी गिरफ्तार हुए।
    • 54.35 लाख रुपये नकद, 1664 सिम कार्ड, 1283 मोबाइल, 135 एटीएम कार्ड, और कई वाहन जब्त किए गए।
    • साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर 11,910 शिकायतें दर्ज हुईं।
    • पुलिस ने 15.90 करोड़ रुपये फ्रीज किए और कोर्ट के माध्यम से 83.84 लाख रुपये पीड़ितों को वापस दिलवाए।

    मादक पदार्थों के विरुद्ध अभियान.

    मई 2025 तक पुलिस ने 389 केस दर्ज कर 393 आरोपियों को जेल भेजा। जब्त किए गए मादक पदार्थों का बाजार मूल्य करीब 20.44 करोड़ रुपये आंका गया:

    • 553 किलो गांजा,
    • 66 किलो अफीम,
    • 2.49 किलो ब्राउन शुगर,
    • 9950 किलो डोडा,
    • 7925 टैबलेट्स शामिल हैं।

    संगठित अपराध और आतंकवाद के खिलाफ सख्ती.

    झारखंड पुलिस की एंटी टेररिज्म स्क्वाड (ATS) और अन्य इकाइयों ने चार प्रमुख संगठित आपराधिक गिरोहों पर कार्रवाई करते हुए:

    • 12 अपराधियों को गिरफ्तार किया।
    • जिनमें पांडेय गिरोह, अमन साहू गिरोह, सुजीत सिन्हा गिरोह, और अमन श्रीवास्तव गिरोह के सदस्य शामिल थे।
    • चार हथियार और 21 कारतूस जब्त किए गए।

    धनबाद से प्रतिबंधित आतंकी संगठन हिज्ब उत तहरीर के पांच सक्रिय सदस्य भी गिरफ्तार किए गए।

    पुलिस कल्याण और प्रोन्नति में प्रगति.

    • झारखंड पुलिस सहायता एवं कल्याण कोष से 622 परिवारों को ₹1.67 करोड़ की मदद दी गई।
    • 108 आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति मिली।
    • 64 पुलिस इंस्पेक्टर को डीएसपी, और 9 एएसआई को सब-इंस्पेक्टर रैंक में प्रोन्नति दी गई।

    ▶ खेल में भी पुलिस का परचम.

    • झारखंड पुलिस को राष्ट्रीय स्तर पर एक गोल्ड, चार सिल्वर और कई ब्रॉन्ज मेडल प्राप्त हुए।
    • कोच्चि में ऑल इंडिया पुलिस बैडमिंटन व टेबल टेनिस प्रतियोगिता में 5 कांस्य पदक।
    • 38वें नेशनल गेम्स (उत्तराखंड) में 2 स्वर्ण, 1 रजत और 1 कांस्य पदक पुलिस खिलाड़ियों ने झटके।

    आईजी डॉ. माइकल ने कहा कि यह रिपोर्ट झारखंड पुलिस की प्रतिबद्धता, सक्षमता और सुधार की दिशा में जारी प्रयासों का प्रमाण है। पुलिस विभाग का फोकस आगे भी अपराधियों पर नकेल कसने और जनता को सुरक्षित माहौल देने पर रहेगा।

     

  • 10 मई को रांची में होगी ईस्टर्न ज़ोनल काउंसिल की अहम बैठक

    गृह मंत्री अमित शाह और कई मुख्यमंत्री होंगे शामिल, सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद
    परवेज़ आलम.
    रांची। झारखंड की राजधानी रांची एक बार फिर एक अहम राष्ट्रीय बैठक की मेज़बानी करने जा रही है। 10 मई को यहां ईस्टर्न ज़ोनल काउंसिल (पूर्वी क्षेत्र परिषद) की 27वीं बैठक आयोजित की जाएगी, जिसकी अध्यक्षता स्वयं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह करेंगे। इस बैठक में बिहार, ओडिशा, झारखंड और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री समेत चारों राज्यों के मुख्य सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भाग लेंगे।
    अहम नीतिगत मसलों पर होगा विचार-विमर्श.
    इस बैठक में चारों राज्यों के बीच सीमा विवाद, आंतरिक सुरक्षा, अंतरराज्यीय परिवहन, सामाजिक कल्याण योजनाएं, और आर्थिक समन्वय जैसे विषयों पर गहन चर्चा होगी। इसके साथ ही बैठक में क्षेत्रीय समस्याओं के समाधान, विकास परियोजनाओं की प्रगति और प्रशासनिक तालमेल पर भी विचार किया जाएगा।
    गौरतलब है कि ईस्टर्न ज़ोनल काउंसिल का गठन राज्यों के बीच बेहतर संवाद, समन्वय और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए किया गया है। यह मंच विकास कार्यों को गति देने और नीतिगत अड़चनों को सुलझाने का एक प्रभावशाली माध्यम बन चुका है।
    रांची पुलिस अलर्ट मोड में, डीआईजी की अगुवाई में सुरक्षा तैयारियां.
    बैठक को देखते हुए रांची पुलिस प्रशासन पूरी तरह अलर्ट पर है। गुरुवार को रांची के डीआईजी सह एसएसपी चंदन कुमार सिन्हा ने शहर के सभी महत्वपूर्ण पुलिस पदाधिकारियों — सिटी एसपी, ग्रामीण एसपी, ट्रैफिक एसपी, सभी डीएसपी और थानेदारों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की।
    इस बैठक में वीआईपी सुरक्षा, रूट प्लानिंग, ट्रैफिक कंट्रोल, और मीटिंग वेन्यू व होटल्स की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विस्तृत निर्देश दिए गए।
    डीआईजी सिन्हा ने कहा,
    “सभी संबंधित विभागों को निर्देश दे दिए गए हैं कि सुरक्षा व्यवस्था में कोई चूक न हो। हर स्तर पर निगरानी रखी जाएगी और सुरक्षा के लिए बहुस्तरीय योजना बनाई गई है।”
    रूट मैप और ट्रैफिक व्यवस्था पर विशेष फोकस.
    गृह मंत्री और अन्य वीआईपी के आगमन के दौरान यातायात को सुगम और सुरक्षित बनाए रखने के लिए विशेष रूट प्लान तैयार किया गया है। पुलिस टीम यह सुनिश्चित करेगी कि सुरक्षा के साथ-साथ आम जनता को भी अनावश्यक परेशानी न हो।
    रांची में इस समय सुरक्षा अभ्यास (Security Drill) भी शुरू हो चुका है, जिसमें बम स्क्वॉड, डॉग स्क्वॉड और स्पेशल ब्रांच की सक्रिय भूमिका रहेगी।
    झारखंड के लिए बड़ी जिम्मेदारी और अवसर.
    केंद्र और राज्यों के शीर्ष नेतृत्व के इस महत्त्वपूर्ण जमावड़े से न केवल नीति-निर्माण में झारखंड की भूमिका सुदृढ़ होगी, बल्कि राज्य को राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से एक सशक्त मंच भी मिलेगा। स्थानीय प्रशासन के लिए यह आयोजन एक चुनौतीपूर्ण परीक्षा भी है, जिसमें सुरक्षा, प्रबंधन और समन्वय की क्षमता को परखा जाएगा।

    10 मई को रांची राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में रहेगा। यह बैठक जहां क्षेत्रीय विकास को नई दिशा दे सकती है, वहीं इसके सफल आयोजन से झारखंड की प्रशासनिक और राजनीतिक साख को भी बल मिलेगा।

  • झारखंड में आतंकी नेटवर्क का खुलासा – रांची से लेकर धनबाद तक फैला था जाल !

    परवेज़ आलम.  

    धनबाद/रांची।  झारखंड आतंकवाद निरोधक दस्ता [एटीएस] ने राज्य में आतंक के खिलाफ बड़ी कामयाबी हासिल की है। वासेपुर से गिरफ्तार की गई महिला संदिग्ध शबनम परवीन न केवल अलकायदा, आईएसआईएस और हिज्ब-उत-तहरीर जैसे अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठनों से जुड़ी रही, बल्कि इन संगठनों के झारखंड मॉड्यूल को सक्रिय रूप से संचालित करने में भी अहम भूमिका निभा रही थी।

    जांच में यह साफ हुआ है कि शबनम युवाओं को कट्टरपंथी विचारधारा के जरिए बहला-फुसलाकर आतंकी संगठनों में भर्ती करने का काम कर रही थी। खासकर 18 से 25 वर्ष की आयु के मुस्लिम युवाओं को वह धर्म के नाम पर गुमराह करती थी।

    चार आधार कार्ड, चार अलग उम्रें – असली पहचान पर सस्पेंस.

    एटीएस की छापेमारी के दौरान शबनम के पास से चार अलग-अलग आधार कार्ड बरामद हुए हैं, जिनमें उसकी उम्र अलग-अलग — 20, 25, 28 और 32 वर्ष दर्ज है। इससे स्पष्ट है कि वह पहचान छिपाने और फर्जी दस्तावेज तैयार करने के नेटवर्क से भी जुड़ी हुई थी।

    शबनम धनबाद के गोविंदपुर की रहने वाली बताई जा रही है, लेकिन उसके मूल घर के बारे में पुलिस को कोई पुख्ता जानकारी नहीं मिली है। उसने आयान जावेद नामक युवक से प्रेम विवाह किया था, जो खुद भी एक संदिग्ध आतंकी है। लेकिन शादी के बाद वह जावेद के साथ अमन सोसायटी के घर में न रहकर शमशेर नगर में किराए के मकान में रह रही थी। यहीं से वह साइबर कैफे के माध्यम से युवाओं को प्रभावित करने का कार्य करती थी।

    झारखंड में आतंकी नेटवर्क का खुलासा – रांची से लेकर धनबाद तक फैला था जाल

    शबनम अकेली नहीं थी। गौरतलब है कि एटीएस की ओर से 26 अप्रैल को धनबाद में छापेमारी कर प्रतिबंध आतंकी संगठन के आतंकी शबनम के साथ गुलफाम हसन, अयान जावेद, और मोहम्मद शहजाद आलम  को गिरफ्तार किया था। इसके बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था।

    इनके पास से दो पिस्तौल, 12 जिंदा कारतूस, आतंकी संगठनों से जुड़े कई दस्तावेज, किताबें, और मोबाइल-लैपटॉप बरामद किए गए हैं।

    हथियारों का लेन देन ये लोग करते ही थे, लेकिन मूल काम युवाओं को आतंकी संगठनों से जोड़ना था। इसी माड्यूल पर रांची से गिरफ्तार हुआ डॉ. इश्तियाक भी काम करता रहा है।

    झारखंड एटीएस की टीम बुधवार को धनबाद के वासेपुर से गिरफ्तार आतंकी संगठन हिज्ब उत तहरीर से जुड़े महिला समेत चार संदिग्धों को तीन दिन की रिमांड पर ली थी । एटीएस की टीम ने न्यायालय में चारों संदिग्धों को रिमांड पर लेने के लिए आवेदन दिया था। आवेदन पर सुनवाई के बाद न्यायालय ने तीन दिन तक रिमांड दी है। अब इनसे एटीएस की टीम तीन दिन तक लगातार पूछताछ करेगी और उनके इरादों के साथ ही उनके संबंधों को की भी जांच की जाएगी। इसके अलावा एटीएस की टीम चारों संदिग्धों के विदेशी संबंधों की भी जांच करेगी।

    रिमांड मिलने के बाद टीम बुधवार को चारों संदिग्धों को बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा से एटीएस की टीम अपने साथ ले गई। इसके तुरंत बाद एटीएस ने चारों संदिग्धों से एटीएस ने पूछताछ शुरू कर दी है। मिली जानकारी के अनुसार, शुक्रवार शाम तक एटीएस उनसे पूछताछ करेगी।

    अम्मार यासर की गिरफ्तारी – इंडियन मुजाहिदीन से लेकर हिज्ब-उत-तहरीर तक का कनेक्शन.

    झारखंड एटीएस ने अम्मार यासर नामक एक संदिग्ध को भी गिरफ्तार किया है, जो पहले इंडियन मुजाहिदीन से जुड़ा रहा है। वर्ष 2014 में जोधपुर से गिरफ्तार हुआ था । यासर, हाल ही में 2024 में जेल से रिहा होने के बाद फिर से आतंकी गतिविधियों में सक्रिय हो गया था और हिज्ब-उत-तहरीर के झारखंड मॉड्यूल का हिस्सा बन गया। अयान जावेद से पूछताछ में अम्मार यासर का नाम सामने आया, जिसके आधार पर उसे गिरफ्तार किया गया। झारखंड के डीजीपी अनुराग गुप्ता ने इसकी गिरफ्तारी की पुष्टि की है

    क्या है हिज्ब-उत-तहरीर‘?

    1953 में यरुशलम में गठित यह आतंकी संगठन एक इस्लामिक खिलाफत स्थापित करने के उद्देश्य से काम करता है। भारत में यह संगठन 2010 में प्रतिबंधित कर दिया गया था। इसका मकसद लोकतांत्रिक सरकारों को गिराकर कट्टरपंथी इस्लामिक शासन लागू करना है।

    एटीएस की सतर्कता से टला खतरा, जांच अब विदेशी लिंक पर. 

    झारखंड एटीएस की सघन कार्रवाई से एक बड़े आतंकी नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। एटीएस अब इन सभी संदिग्धों के विदेशी कनेक्शन की पड़ताल में जुटी है। शुरुआती पूछताछ में कुछ अहम जानकारियां सामने आई हैं, लेकिन यह जांच अभी जारी है।
    झारखंड जैसे शांत राज्य में आतंक की ये घुसपैठ बेहद चिंताजनक है। युवाओं को धर्म के नाम पर भटकाना, फर्जी दस्तावेज बनाना और विदेशी संगठनों से जुड़ना — ये सारी गतिविधियां अब जांच एजेंसियों के रडार पर हैं। सवाल ये है कि क्या ये सिर्फ एक मॉड्यूल था? या फिर एक बड़ा नेटवर्क धीरे-धीरे सामने आने वाला है?

  • जमशेदपुर: सैनिक की पिटाई पर DGP का कडा ऐक्शन, पूरा थाना सस्पेंड

    सैनिक और उनके भाई की पिटाई और जेल भेजने के मामले में एक्शन ,

    जमशेदपुर के जुगसलाई थाना क्षेत्र में 14 मार्च को बागबेड़ा डीबी रोड निवासी सैनिक सूरज राय और उनके चचेरे भाई विजय राय के साथ हुए दुर्व्यवहार के मामले ने तूल पकड़ लिया था। इस घटना को लेकर पूर्व सैनिकों और सामाजिक संगठनों के विरोध के बाद अब पुलिस प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई करते हुये थाना आठ पुलिसकर्मी एक साथ निलंबित कर दिया है ।

    एसएसपी ने की कार्रवाई

    इस गंभीर मामले में जांच के बाद जमशेदपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) किशोर कौशल ने शुक्रवार को जुगसलाई थाना प्रभारी इंस्पेक्टर सचिन कुमार दास सहित कुल आठ पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है। निलंबित अधिकारियों में पांच दारोगा – दीपक कुमार महतो, तापेश्वर बैठा, शैलेंद्र कुमार नायक, कुमार सुमित, मंटू कुमार – और दो कांस्टेबल – शैलेश कुमार सिंह और शंकर कुमार – शामिल हैं।

    सभी निलंबित पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से गोलमुरी पुलिस लाइन में योगदान देने का निर्देश दिया गया है।

    आईजी ने की थी जांच, रिपोर्ट डीजीपी को सौंपी गई

    घटना के बाद मामला राज्य पुलिस मुख्यालय तक पहुंचा था। डीजीपी के निर्देश पर रांची प्रक्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) अखिलेश कुमार झा ने जमशेदपुर पहुंचकर पूरे मामले की जांच की। जांच के बाद उन्होंने अपनी विस्तृत रिपोर्ट डीजीपी को सौंप दी, जिसके आधार पर उक्त निलंबन की कार्रवाई की गई।

    पूर्व सैनिकों का आंदोलन, रक्षा मंत्रालय तक पहुंचा मामला

    घटना के बाद पूर्व सैनिकों में आक्रोश फैल गया था। उन्होंने इस कृत्य को सैनिक के सम्मान का अपमान बताते हुए जमकर विरोध प्रदर्शन किया। जुगसलाई थाना और उपायुक्त कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन किया गया। पूर्व सैनिकों का आरोप था कि सैनिक की गिरफ्तारी के बाद सेना की स्थानीय यूनिट या जम्मू यूनिट को नियमानुसार कोई सूचना नहीं दी गई, जो रक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन है। मामला रक्षा मंत्रालय और आर्मी मुख्यालय तक भी पहुंचा। इसके बाद आर्मी के अधिकारी रांची से जमशेदपुर पहुंचे और मामले की जानकारी ली।

    घटना की असलियत आई सामने: निजी चालक के विवाद से शुरू हुआ मामला

    आईजी द्वारा की गई जांच में यह स्पष्ट हुआ कि सूरज राय और विजय राय के साथ-साथ नीरज रजक नामक एक युवक की भी बिना किसी ठोस कारण के पिटाई की गई थी। दरअसल, घटना की शुरुआत थाना के निजी चालक अभिषेक उर्फ छोटू बिल्ला के बस्ती के एक युवक से हुए विवाद से हुई थी। यह युवक विजय राय का दोस्त था।

    इस विवाद की सूचना मिलने पर चालक ने अपने नजदीकी संबंधों का लाभ उठाते हुए जुगसलाई थाना प्रभारी को पूरे घटनाक्रम को बढ़ा-चढ़ाकर बताया और सूरज राय व विजय राय को थाने बुलवाया गया। थाने में चालक और सूरज राय के बीच बहस हुई, जिसके बाद सूरज, विजय और नीरज के साथ मारपीट की गई और आनन-फानन में सूरज व विजय को जेल भेज दिया गया।

    एक और विवाद: होली के दिन की घटना भी जुड़ी

    जांच में यह बात भी सामने आई कि घटना से पहले कपाली ओपी के पुलिसकर्मी सोनू कुमार होली के दिन अपनी पत्नी के साथ बागबेड़ा एमई स्कूल रोड होते हुए नया बस्ती पुल से गुजर रहे थे, जहां कुछ युवक शराब पी रहे थे। सोनू कुमार की गाड़ी को रास्ते में रोक दिया गया, जिसकी सूचना उन्होंने जुगसलाई थाना प्रभारी को दी। हालांकि, पुलिस के पहुंचने से पहले ही वह वहां से निकल गए। इसके बाद निजी चालक ने मौके पर पहुंचकर नीरज रजक के साथ मारपीट की।

    न्याय की ओर बढ़ता कदम

    इस पूरे मामले में पुलिस द्वारा की गई मनमानी और नियमों की अवहेलना सामने आने के बाद जबरदस्त जनदबाव बना। विरोध के बाद सूरज राय और विजय राय को अदालत से जमानत मिल गई। अब पुलिस प्रशासन द्वारा दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ की गई कार्रवाई से स्पष्ट संदेश गया है कि कानून के रखवालों को भी नियमों का पालन करना होगा।

  • सहारा इंडिया: निवेशकों के 40 हजार करोड़ हड़पने का आरोप

    विदेश जाने पर रोक की मांग

    रांची: सहारा इंडिया के खिलाफ निवेशकों की परिपक्वता राशि न लौटाने का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। झारखंड पुलिस प्रमुख को लिखे गए पत्र में विश्व भारती जनसेना संस्थान ने मांग की है कि सहारा इंडिया के निदेशकों के पासपोर्ट ब्लॉक किए जाएं और उन्हें विदेश जाने से रोका जाए।

    निवेशकों के पैसे हड़पने का आरोप।
    बता दें कि झारखंड के अलग-अलग थानों में सहारा इंडिया के खिलाफ कई प्राथमिकियां दर्ज हैं, जिनमें निवेशकों के 40 करोड़ रुपये के भुगतान का मामला शामिल है। इसके अलावा, 40 हजार करोड़ रुपये की परिपक्वता राशि हड़पने की शिकायतें भी दर्ज कराई गई हैं। जनसेना संस्थान ने पत्र लिखकर कहा है कि सहारा इंडिया के खिलाफ जांच तेजी से आगे बढ़ रही है, जिससे उनके अधिकारियों में हड़कंप मचा हुआ है।

    विदेश भाग सकते हैं आरोपी अधिकारी।
    पत्र  में आशंका जताई गई है कि जिस तरह से जांच की गति तेज हो रही है, सहारा इंडिया के अधिकारी देश छोड़ सकते हैं। सुब्रत राय के निधन के बाद भी उनके दोनों पुत्र अब तक भारत नहीं लौटे हैं। इसी तरह, मामले में नामजद अन्य अधिकारी भी विदेश भाग सकते हैं। इसलिए, जब तक जांच पूरी न हो जाए, इन्हें देश छोड़ने से रोका जाए।

    15 दिन का अल्टीमेटम, फिर होगी गिरफ्तारी।
    डीजीपी की अध्यक्षता में 24 जनवरी को हुई बैठक में सहारा इंडिया के अधिकारियों को झारखंड के निवेशकों को उनकी परिपक्वता राशि लौटाने के लिए 15 दिनों का समय दिया गया था। समय सीमा समाप्त होने के बाद सभी निदेशकों की गिरफ्तारी की चेतावनी दी गई है।

    इन अधिकारियों पर केस दर्ज।
    प्राथमिकी में सहारा इंडिया के नौ निदेशकों के नाम शामिल हैं:

    1. स्वप्न राय (वाइस चेयरमैन)
    2. जयब्रत राय (डिप्टी चेयरमैन)
    3. सुशांतो राय (एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर)
    4. सिमांतो राय (एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर)
    5. ओमप्रकाश श्रीवास्तव (डिप्टी मैनेजिंग वर्कर)
    6. देवेंद्र कुमार श्रीवास्तव (सहारा इंडिया को-ऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड के चेयरमैन)
    7. नीरज कुमार पाल (रांची परिक्षेत्र प्रमुख सह निदेशक)
    8. सुंदर झा (पूर्व जोनल मैनेजर)
    9. संजीव कुमार (जोनल मैनेजर, रांची)

    क्राइम ब्रांच के नोटिस पर नहीं पहुंचे अधिकारी।
    क्राइम ब्रांच रांची ने इस मामले में 31 जनवरी को दो अधिकारियों को तलब किया था। इसमें सहारा इंडिया के निदेशक सह रांची टेरिटरी प्रमुख नीरज कुमार पाल और डिप्टी मैनेजर शैलेंद्र शुक्ला को बुलाया गया था। सूत्रों के अनुसार, शैलेंद्र शुक्ला रांची पहुंचे, लेकिन नीरज पाल ने पत्र लिखकर मां की तबीयत खराब होने का हवाला देते हुए अतिरिक्त समय की मांग की।

    निवेशकों के साथ हुआ सबसे बड़ा धोखा।
    यह मामला सहारा इंडिया के सबसे बड़े वित्तीय घोटालों में से एक माना जा रहा है। वर्ष 2009 में यह घोटाला तब सामने आया जब कंपनी ने निवेशकों को झूठे वादे और भ्रामक दावे करके भारी भरकम रकम जुटाई। निवेशकों को ऊंचे रिटर्न का सपना दिखाया गया, लेकिन हकीकत में उनकी गाढ़ी कमाई हड़प ली गई।

    अब देखना यह होगा कि झारखंड पुलिस की सख्ती के बाद सहारा इंडिया के अधिकारी कानून की गिरफ्त में आते हैं या फिर कोई नया दांव खेलते हैं।

  • झारखंड : नक्सलवाद का सफाया सुनिश्चित-डीजीपी अनुराग गुप्ता

    झारखंड पुलिस ने नक्सलवाद पर कड़ा प्रहार करते हुए 248 नक्सलियों को गिरफ्तार किया। साथ ही, दबिश के चलते 24 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया। मुठभेड़ों में 9 नक्सलियों को मार गिराया गया। डीजीपी अनुराग गुप्ता ने गणतंत्र दिवस के मौके पर कहा, इस वर्ष नक्सलवाद का सफाया सुनिश्चित है।”

    श्री गुप्ता ने कहा कि झारखंड में वर्ष 2024 नक्सलवाद और अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई के लिए याद किया जाएगा। पुलिस ने इस साल बड़े पैमाने पर अभियान चलाते हुए न केवल नक्सलियों को कड़ा संदेश दिया, बल्कि संगठित अपराध, मादक पदार्थ तस्करी, और साइबर अपराध के मामलों में भी उल्लेखनीय सफलता हासिल की।

    डीजीपी ने संविधान के प्रति समर्पण की बात करते हुए कहा, हमें झारखंड को नक्सल और अपराध मुक्त बनाते हुए इसे समृद्ध और शांतिपूर्ण राज्य में बदलने की दिशा में काम करना है।”

    संगठित अपराध और आतंकवाद पर शिकंजा.

    राज्य पुलिस ने संगठित अपराध के खिलाफ भी मजबूत कार्रवाई की, जिसमें 154 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया। आतंकवाद के खिलाफ विशेष अभियान में एटीएस ने अलकायदा के 4 आतंकवादियों को पकड़ा। ये गिरफ्तारियां झारखंड पुलिस की सतर्कता और प्रतिबद्धता का प्रमाण हैं।

    मादक पदार्थ तस्करों और साइबर अपराधियों पर बड़ी कार्रवाई.

    अवैध मादक पदार्थों की तस्करी में शामिल 1362 लोगों को सलाखों के पीछे भेजा गया। साथ ही, 1.82 करोड़ रुपये की अवैध मादक पदार्थ जब्त किए गए।
    साइबर अपराध के मामलों में, 1869 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने 67.20 करोड़ रुपये की राशि फ्रिज की और 3 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि पीड़ितों को वापस लौटाई।

    जन शिकायत समाधान: पुलिस-जनता की साझेदारी

    राज्य में जनता की समस्याओं को त्वरित हल करने के लिए विशेष जन शिकायत समाधान कार्यक्रम चलाया जा रहा है। मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार यह पहल पुलिस और जनता के बीच विश्वास बढ़ाने और बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए की गई है।

     

  • 10 लाख के इनामी नक्सली को सरेंडर कराने की पहल, जानिए कौन है यह इनामी नक्सली!

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट ………..

    10 लाख के इनामी नक्सली साहेब राम मांझी को सरेंडर कराने की कवायद मे गिरिडीह पुलिस जी जान से जुटी है । पुलिस और प्रशासन ने नक्सलियों को  मुख्यधारा में लौटने की पहल को तेज कर दिया है। शुक्रवार को एएसपी अभियान सुरजीत कुमार और डुमरी एसडीपीओ सुमित कुमार ने इनामी नक्सली साहेब राम मांझी के घर पहुंचे ।  अधिकारियों ने झारखंड सरकार की सरेंडर नीति से नक्सली साहेब राम मांझी के परिवार को अवगत कराया ।

    अधिकारियों ने परिजनों को समझाया कि आत्मसमर्पण न केवल साहेब राम के लिए बल्कि पूरे परिवार के लिए फायदेमंद होगा। उन्होंने बताया कि सरकार सरेंडर करने वाले नक्सलियों को पुनर्वास और अन्य योजनाओं के तहत सहायता प्रदान कर रही है।

    15 साल से घर से दूर है नक्सली.

    परिजनों के मुताबिक, साहेब राम करीब 15-16 साल पहले घर छोड़कर चला गया था। उसके तीन बच्चे हैं, और परिवार अब चाहता है कि वह मुख्यधारा में लौट आए। परिवार ने भरोसा दिलाया कि वे साहेब राम को आत्मसमर्पण के लिए प्रेरित करेंगे।

    10 लाख का इनाम.

    साहेब राम मांझी नक्सली संगठन भाकपा माओवादी के जोनल कमेटी का सक्रिय सदस्य है। गिरिडीह सहित कई जिलों में उसके खिलाफ कई गंभीर मामले दर्ज हैं, और उस पर 10 लाख रुपये का इनाम घोषित है। पुलिस पिछले कुछ वर्षों से उसे सरेंडर करवाने की कोशिश कर रही है।

    नक्सल प्रभावित इलाकों में शांति और विकास स्थापित करने के लिए पुलिस लगातार प्रयासरत है। नक्सलियों को मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रोत्साहित करना, सिर्फ कानून व्यवस्था का मामला नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी भी है यह कहना है पुलिस का ।

    यह पहल न केवल साहेब राम बल्कि अन्य नक्सलियों के लिए भी एक संदेश है कि हथियार छोड़कर शांति और विकास के रास्ते पर चलना संभव है।

  • सभी जिलों में जन शिकायत समाधान कार्यक्रम 22 जनवरी को-DGP

    झारखंड में जन शिकायत समाधान कार्यक्रम एक बार फिर से सुर्खियों में है। आगामी 22 जनवरी को राज्य के सभी 24 जिलों में इस कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। डीजीपी अनुराग गुप्ता ने इस संबंधमें सभी जिलों के एसएसपी और एसपी को निर्देश जारी किए हैं। खास बात यह है कि कार्यक्रम उन्हीं स्थानों पर आयोजित किया जाएगा, जहां पहले इसे सफलतापूर्वक संपन्न किया गया था।

    यह कार्यक्रम इससे पहले 18 दिसंबर 2024 और 10 सितंबर 2024 को आयोजित हो चुका है। कार्यक्रम का उद्देश्य नागरिकों की पुलिस से संबंधित शिकायतों को न केवल पंजीकृत करना है, बल्कि त्वरित और प्रभावी समाधान प्रदान करना भी है।

    कार्यक्रम के मुख्य उद्देश्य:

    1. शिकायतों का पंजीकरण और समाधान: पुलिस से जुड़ी समस्याओं को दर्ज कर समाधान प्रक्रिया से नागरिकों को अवगत कराना।
    2. कार्रवाई की जानकारी: शिकायतों पर पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई की स्थिति से शिकायतकर्ताओं को अपडेट देना।
    3. समयबद्ध कार्रवाई: यदि किसी शिकायत का समाधान तय समयसीमा में नहीं होता, तो उसे वरिष्ठ अधिकारियों को
  • एक ही भवन के अंदर चार अलग-अलग थाने स्थापित होंगे !

    रांची: झारखंड में अब बड़े शहरों में एक ही भवन के अंदर चार अलग-अलग थाने स्थापित किए जाएंगे।इसके लिए बहुमंजिला इमारत का निर्माण किया जाएगा, जिसमें प्रत्येक मंजिल पर एक विशेष थाना होगा। पहली मंजिल पर साइबर थाना, दूसरी पर महिला थाना, तीसरी पर एससी-एसटी थाना और चौथी मंजिल पर एचटीयू थाना संचालित होंगे। यह नई योजना झारखंड के डीजीपी अनुराग गुप्ता द्वारा तैयार की गई है, और इसके क्रियान्वयन की जिम्मेदारी उन्होंने आइजी प्रोविजन पंकज कंबोज को सौंपी है।

    योजना को अमल में लाने की तैयारी

    झारखंड पुलिस मुख्यालय इस योजना को पूरा करने के लिए शुक्रवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विभिन्न जिलों के एसपी के साथ बैठक करेगा। बैठक में एसपी को जमीन की उपलब्धता के आधार पर प्रस्ताव तैयार कर पुलिस मुख्यालय को भेजने को कहा जाएगा।

    महिला पुलिसकर्मियों के लिए विशेष प्रावधान

    इस बहुमंजिला भवन में महिला पुलिसकर्मियों के लिए अलग से बैरक की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अलावा, महिला पुलिस और अन्य कर्मियों के लिए विशेष सुविधाएं भी प्रदान की जाएंगी।

    केंद्रीकृत थानों से लाभ

    एक ही स्थान पर सभी थाने होने से जनता को अधिक सहूलियत मिलेगी। हालांकि, अलग-अलग थानों के निर्माण से भूमि की अधिक आवश्यकता और निर्माण लागत बढ़ सकती है, लेकिन केंद्रीकृत भवन से प्रशासनिक कार्यों में आसानी और लोगों के लिए बेहतर सेवा सुनिश्चित होगी।

  • गिरिडीह में जन शिकायत समाधान कार्यक्रम: गुड गवर्नेंस की दिशा में बड़ा कदम

    गिरिडीह। बुधवार को गिरिडीह पुलिस ने नगर भवन में जन शिकायत समाधान कार्यक्रम का आयोजन किया। यह पहल झारखंड पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर राज्य के सभी जिलों में आयोजित हो रही है। कार्यक्रम का उद्घाटन उत्तरी छोटानागपुर हजारीबाग क्षेत्र के पुलिस उप महानिरीक्षक सुनील भास्कर, एसपी डॉ. विमल, एसडीपीओ जितवाहन उरांव और डीएसपी  नीरज कुमार ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया।

    समस्याओं के समाधान का प्रयास. 
    डीआईजी सुनील भास्कर ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, “गुड गवर्नेंस की दिशा में यह कार्यक्रम एक महत्वपूर्ण कदम है। हमारा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर नागरिक की शिकायत का त्वरित और ऑन-द-स्पॉट समाधान हो।” उन्होंने बताया कि गिरिडीह के सभी अनुमंडल क्षेत्रों में इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया है।

    एसपी डॉ. विमल कुमार ने बताया कि पिछले वर्ष की तुलना में इस बार शिकायतों की संख्या में कमी आई है। अब तक 108 मामलों का समाधान किया गया है, जिनमें से अधिकतर घरेलू और जमीन विवाद से जुड़े हैं। एसपी ने यह भी बताया कि साइबर अपराध जिले में तेजी से बढ़ रहा है, जिसे रोकने के लिए पुलिस गंभीर प्रयास कर रही है। उन्होंने लोगों से साइबर अपराधों को लेकर अधिक सतर्क और जागरूक होने की अपील की।

    विशेष निर्देश और समाधान.
    कार्यक्रम के दौरान नगर और मुफ्फसिल थाना क्षेत्र से जुड़े कई मामलों का समाधान किया गया। डीआईजी ने पारिवारिक विवादों को महिला थाना में निपटाने के निर्देश दिए। जमीन विवाद के मामलों में अंचल अधिकारी के साथ बैठक कर समाधान की बात कही। एक वृद्ध महिला ने पेंशन से संबंधित शिकायत दर्ज कराई, जिसे प्रखंड कार्यालय भेजने के निर्देश दिए गए।

    पुलिस और प्रशासन की समन्वय
    कार्यक्रम में डीएसपी कौसर अली, सदर और बेंगाबाद अंचल अधिकारी, नगर थाना प्रभारी शैलेश प्रसाद, मुफ्फसिल थाना प्रभारी श्याम किशोर महतोसहित अन्य पुलिस अधिकारी मौजूद थे।

    यह कार्यक्रम पुलिस और प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय का उदाहरण पेश करता है और नागरिकों को राहत पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।