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  • झारखंड बजट सत्र पर चर्चा के लिए 21 फरवरी को स्पीकर की अध्यक्षता में सर्वदलीय बैठक

    झारखंड विधानसभा सचिवालय ने शुरू की बजट सत्र की तैयारियां।

    झारखंड विधानसभा सचिवालय ने आगामी बजट सत्र की तैयारियों को तेज कर दिया है। सत्र के सुचारू संचालन और जनहित से जुड़े अधिकतम मुद्दों पर चर्चा सुनिश्चित करने के लिए 21 फरवरी को विधानसभा अध्यक्ष रबींद्र नाथ महतो की अध्यक्षता में सर्वदलीय बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सहित विभिन्न दलों के नेता शामिल होंगे। बैठक में सत्र संचालन सहित अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

    वहीं, भाजपा ने अब तक अपने विधायक दल के नेता का चयन नहीं किया है, जिस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। इसी दिन राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ सुरक्षा और अन्य प्रमुख विषयों को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक भी प्रस्तावित है। विधानसभा सचिवालय ने विभिन्न विभागों से समय पर विधेयकों और प्रश्नों के उत्तर उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है, ताकि सदन की कार्यवाही के दौरान किसी तरह की तकनीकी बाधा उत्पन्न न हो।

    संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने बताया कि स्पीकर के साथ अबुआ बजट और अन्य महत्वपूर्ण विषयों को लेकर चर्चा हुई है। बजट तैयारियों का कार्य अंतिम चरण में है, जिसके लिए कई दौर की बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं। इसमें विशेषज्ञों के साथ-साथ आम जनता से भी सुझाव लिए गए हैं। आगामी बजट राज्य के सर्वांगीण विकास पर केंद्रित होगा, जिसमें सभी वर्गों का ध्यान रखा जाएगा। झारखंड का यह बजट सत्र राज्य की प्रगति और समृद्धि के नए आयाम स्थापित करेगा।

  • छठी विधानसभा के पहले सत्र में नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी खाली रहेगी, जानिए इसका कारण।

    झारखंड की छठी विधानसभा के पहले सत्र में कोई नेता प्रतिपक्ष नहीं रहेगा। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने बताया कि पार्टी में अभी तक विधायक दल का नेता तय नहीं किया गया है। पार्टी जल्द ही विधायक दल का नेता तय करेगी। बता दें कि बीजेपी विधानसभा में सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी है और उसके विधायक दल का नेता ही सदन में नेता प्रतिपक्ष बनेगा।

    जल्द होगा विधायक दल के नेता का चयन: बाबूलाल मरांडी
    बाबूलाल मरांडी ने कहा कि पार्टी के विधायकों के साथ बैठक के बाद विधायक दल के नेता का नाम तय किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बीजेपी अपनी पूरी ताकत के साथ सदन में विपक्ष की भूमिका निभाएगी। बीजेपी के पास कुल 21 विधायक हैं, जो सदन में उसे सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी बनाते हैं।

    9 से 12 दिसंबर तक चलेगा सत्र
    हेमंत सोरेन की सरकार बनने के बाद विधानसभा सत्र सोमवार, 9 दिसंबर से शुरू हुआ। सत्र की समाप्ति 12 दिसंबर को होगी। पहले दिन विधायकों को शपथ दिलाई गई, जिसकी अध्यक्षता प्रोटेम स्पीकर स्टीफन मरांडी ने की। मंगलवार को भी शपथ ग्रहण का सिलसिला जारी रहेगा और इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव किया जाएगा।

  • झारखंड विधानसभा: छठी विधानसभा का पहला सत्र कल , कई नए चेहरे देंगे दस्तक

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट…….
    झारखंड विधानसभा का पहला सत्र 9 दिसंबर से शुरू होने जा रहा है, जो 12 दिसंबर तक चलेगा। यह सत्र न केवल नई ऊर्जा बल्कि नए बदलावों का संकेत भी देगा। सत्र के पहले दो दिन नवनिर्वाचित विधायकों का शपथ ग्रहण होगा, जिसे प्रोटेम स्पीकर स्टीफन मरांडी संपन्न कराएंगे।

    नए विधायकों की शपथ और अध्यक्ष का चुनाव।
    9 दिसंबर को सत्र के पहले दिन से विधायकों का शपथ ग्रहण शुरू होगा, जो 10 दिसंबर तक चलेगा। इसी दिन शपथ ग्रहण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद झारखंड विधानसभा के नए अध्यक्ष का चुनाव होगा। यह प्रक्रिया सत्र की गंभीरता और विधायी गतिविधियों की दिशा तय करेगी।

    राज्यपाल का अभिभाषण और अनुपूरक बजट।
    11 दिसंबर को झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार का अभिभाषण होगा। इसके तुरंत बाद, वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर चालू वित्तीय वर्ष के लिए द्वितीय अनुपूरक बजट पेश करेंगे। यह दिन सरकार की योजनाओं और प्राथमिकताओं का खाका पेश करने का होगा।

    पहली बार पहुंचे 20 नए विधायक। 
    इस बार की विधानसभा में एक नया इतिहास लिखा जाएगा। सदन में 20 ऐसे विधायक होंगे, जो पहली बार विधानसभा पहुंचे हैं। इनमें से कई युवा और अनुभवहीन चेहरों के साथ सत्र का माहौल उत्साह और बदलाव से भरा होगा। यह पहली बार है जब सत्ता पक्ष के सदस्यों की संख्या सदन की कुल संख्या का दो-तिहाई होगी।

    छोटे दलों की मौजूदगी। 
    इस विधानसभा में चार दलों का एकल प्रतिनिधित्व भी देखने को मिलेगा। जदयू, लोजपा (आर), आजसू पार्टी, और जेएलकेम के एक-एक विधायक ने इस बार सदन में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है।

    सत्र के अंतिम कार्यदिवस 12 दिसंबर को राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा होगी। इसके साथ ही अनुपूरक बजट पर वाद-विवाद की प्रक्रिया भी पूरी होगी।

    झारखंड विधानसभा का यह सत्र नई उम्मीदों और दिशा-निर्देशों का संकेत देगा। 20 नए विधायकों की भागीदारी और सत्ता पक्ष की मजबूत उपस्थिति इसे और भी खास बनाती है।

  • झारखंड विधानसभा: कुर्सी नंबर 82 और एक खत्म होती परंपरा की कहानी !

    परवेज़ आलम की कलम से……
    झारखंड विधानसभा की कुर्सी नंबर 82 अब इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गई है। एंग्लो-इंडियन समुदाय के लिए आरक्षित यह सीट, जो वर्षों तक अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व की गवाह रही, अब खाली रहेगी। यह कुर्सी झारखंड के गठन के बाद से ग्लेन जोसेफ गालस्टेन जैसे प्रतिनिधियों का आसन बनी रही, लेकिन संविधान के 104वें संशोधन के बाद यह परंपरा खत्म हो गई।

    एक युग का अंत: ग्लेन गालस्टेन की विरासत
    ग्लेन जोसेफ गालस्टेन भारतीय संसदीय प्रणाली के अंतिम एंग्लो-इंडियन विधायक साबित हुए। 2020 में केंद्र सरकार द्वारा इस व्यवस्था को खत्म करने से पहले, उन्होंने 24 जनवरी 2020 को झारखंड विधानसभा में शपथ ली। यह फैसला हड़बड़ी में हुआ, क्योंकि 25 जनवरी से संविधान संशोधन लागू होने वाला था।

    गालस्टेन मानते हैं कि उनके समुदाय को लेकर देश में गलत धारणाएं फैलाई गईं। वे कहते हैं, “लोगों ने हमें भाजपा विरोधी बताया, जबकि एंग्लो-इंडियन लोग सभी दलों में सक्रिय हैं। कुछ लोगों ने हमारी आवाज दबाने के लिए यह व्यवस्था खत्म कराई।”

    एक ऐतिहासिक व्यवस्था की विदाई
    1952 से 2020 तक, एंग्लो-इंडियन समुदाय के लिए लोकसभा और विधानसभाओं में सीटें आरक्षित रहीं। झारखंड में यह सीट राज्य के गठन के बाद से बनी रही, लेकिन 2020 के संशोधन ने इसे खत्म कर दिया।

    गालस्टेन के मुताबिक, भारत सरकार ने जनगणना के आधार पर एंग्लो-इंडियन समुदाय की संख्या शून्य दिखाई, जबकि वे दावा करते हैं कि इस समुदाय की संख्या देशभर में तीन लाख के करीब है।

    क्या यह अंत है या नए अध्याय की शुरुआत?
    गालस्टेन का मानना है कि केंद्र सरकार चाहे तो इस समुदाय के लिए फिर से संसद और विधानसभाओं के दरवाजे खोल सकती है। वे कहते हैं, “हमें विश्वास में लेकर सही आंकड़े प्रस्तुत किए जाएं, तो स्थिति बदल सकती है।”

    गालस्टेन ने झारखंड में 15 वर्षों तक सेवा दी और अब एक नया सपना देख रहे हैं – जरूरतमंद बच्चों के लिए स्कूल खोलने का। वे 2026 में परिसीमन की संभावना को लेकर भी आशान्वित हैं।

    कुर्सी नंबर 82: अब इतिहास का हिस्सा
    झारखंड विधानसभा में यह कुर्सी अब खाली रहेगी, लेकिन यह केवल एक सीट नहीं, बल्कि अल्पसंख्यक समुदाय की उस आवाज का प्रतीक थी, जिसने दशकों तक भारतीय लोकतंत्र में अपनी पहचान बनाए रखी।

     

  • झारखंड में विधान सभा सत्र का ऐलान : नये अध्यक्ष का चुनाव

    RANCHI: झारखंड में हेमंत सोरेन सरकार की पहली परीक्षा तय हो गई है। 9 दिसंबर से शुरू हो रहे चार दिवसीय विधानसभा सत्र ने सियासी हलचल को गरमा दिया है।

    पहला दिन: नव निर्वाचित विधायकों का शपथ ग्रहण।
    दूसरा दिन:चुना जाएगा।
    तीसरा दिन: राज्यपाल का अभिभाषण, और फिर सरकार पेश करेगी वित्तीय वर्ष 2024-25 का दूसरा अनुपूरक बजट।
    आखिरी दिन: राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा और बजट पर बहस।

    अब सवाल यह है कि चार दिन में हेमंत सरकार कितना कुछ साध पाएगी?

    बजट से बड़ी उम्मीदें .
    इस सत्र में सरकार न सिर्फ अनुपूरक बजट पेश करेगी, बल्कि मंईयां सम्मान योजना समेत कई जन-कल्याणकारी योजनाओं के लिए अनुदान की मांग भी रखेगी। लेकिन क्या सिर्फ योजनाओं का ऐलान, ज़मीन पर क्रियान्वयन के भरोसे में तब्दील हो पाएगा?

    कैबिनेट विस्तार की अटकलें जारी
    इधर, हेमंत सोरेन सरकार के विस्तार को लेकर भी चर्चा तेज़ है। मुख्यमंत्री दिल्ली में कांग्रेस के आला नेताओं से मुलाकात कर चुके हैं, और कैबिनेट बंटवारे पर घटक दलों से बातचीत जारी है।

    राज्यपाल की सहमति और विपक्ष का सवाल
    राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने 9 से 12 दिसंबर तक सत्र की अधिसूचना जारी कर दी है। लेकिन विपक्ष इस छोटे सत्र को लेकर सवाल उठा सकता है। चार दिन का सत्र—क्या यह जनता की समस्याओं को उठाने और समाधान खोजने के लिए पर्याप्त होगा?

    तो, सत्र शुरू होने वाला है। अब देखना यह है कि यह सत्र जनता के मुद्दों को लेकर कितनी गंभीरता दिखाता है या फिर यह भी महज़ औपचारिकता बनकर रह जाएगा।