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  • झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र शुरू, पहले दिन शोक प्रस्ताव

    सदन के बाहर SIR पर चलती रही सियासत.

    रांची ब्यूरो रिपोर्ट The News Post4u.

    रांची : झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र शुक्रवार से प्रारंभ हो गया। सत्र की शुरुआत विधानसभा अध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो के संबोधन से हुई, जिसमें उन्होंने लोकतंत्र के मूल मूल्यों को रेखांकित करते हुए कहा कि सदन में अल्पमत का भी उतना ही सम्मान होना चाहिए जितना बहुमत का। उन्होंने रचनात्मक बहस, लोकतांत्रिक संवाद और जन आकांक्षाओं की पूर्ति पर जोर दिया।

    सत्र 7 अगस्त तक चलेगा और इस दौरान वित्तीय वर्ष 2025-26 का पहला अनुपूरक बजट सदन में पेश किया जाएगा।

    पहले दिन दिवंगत आत्माओं को दी गई श्रद्धांजलि.

    सत्र की शुरुआत शोक प्रस्तावों के साथ हुई। पूर्व सांसद चंद्रशेखर सिंह, तिलकधारी सिंह और वैज्ञानिक डॉ. के. कस्तूरीरंगन सहित हाल में दिवंगत कई प्रतिष्ठित व्यक्तियों को सदन ने याद किया। इसके अलावा अहमदाबाद विमान हादसे और जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में मारे गए लोगों को भी श्रद्धांजलि दी गई। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने उनके योगदानों को याद किया। सदन में दो मिनट का मौन रखकर शोक प्रकट किया गया, जिसके बाद कार्यवाही सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी गई।

    स्पीकर ने दी संवैधानिक मूल्यों की याद.

    अध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो ने कहा, “हमें संविधान सभा की उस भावना को हमेशा याद रखना चाहिए, जिसमें यह कहा गया था कि हमने इस संविधान के माध्यम से देश की जनता को अपनी तकदीर खुद लिखने की ताकत दी है।” उन्होंने दिशोम गुरु शिबू सोरेन के जल्द स्वस्थ होने की कामना की और उनके राज्य के लिए योगदान को स्मरण किया।

    सत्र के दौरान स्पीकर ने पांच सभापतियों — स्टीफन मरांडी, सीपी सिंह, निरल पूर्ति, रामचंद्र सिंह और नीरा यादव — के नामों की घोषणा की। कार्यमंत्रणा समिति में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी समेत कई सदस्य शामिल हैं। दीपक बिरूआ और मथुरा महतो जैसे कई लोगों को विशेष आमंत्रित सदस्य भी नामित किया गया है।

    सदन के बाहर गरमाई सियासत SIR और अटल क्लीनिक पर घमासान.

    विधानसभा सत्र की शुरुआत के साथ ही सदन के बाहर राजनीतिक माहौल गरमा गया। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए ‘अटल मोहल्ला क्लीनिक’ का नाम बदलकर ‘मदर टेरेसा क्लीनिक’ किए जाने को “राजनीतिक गुंडागर्दी” बताया। उन्होंने कहा कि यह तुष्टिकरण की पराकाष्ठा है और अटल बिहारी वाजपेयी जैसे नेता का अपमान है, जो झारखंड के निर्माता माने जाते हैं।

    राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने भी भाजपा के बांग्लादेशी घुसपैठ के आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि पिछली बार भी ऐसे दावे झूठे साबित हुए थे और राज्य में एक भी बांग्लादेशी घुसपैठिया नहीं मिला। उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह SIR के माध्यम से आम जनता का मतदान अधिकार छीनना चाहती है।

    अगले हफ्ते सदन में बढ़ेगी राजनीतिक गरमी.

    सत्र का पहला दिन भले ही शोक प्रस्तावों और श्रद्धांजलियों के साथ शांतिपूर्ण रहा हो, लेकिन सदन के बाहर जिस तरह से SIR और नाम परिवर्तन जैसे मुद्दों पर टकराव दिखा, उससे साफ है कि आने वाले दिनों में सदन की कार्यवाही तीखी बहस और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से भरपूर रहने वाली है।

     

     

  • झारखंड विधानसभा में उठा JNV के छात्र रामकुमार यादव की संदिग्ध मौत का मामला,

    विधायक मनोज कुमार यादव ने दोषियों पर कार्रवाई और मुआवजे की मांग की 

    झारखंड विधानसभा के शून्यकाल के दौरान बरही विधायक मनोज कुमार यादव ने जवाहर नवोदय विद्यालय (JNV) गांडेय के छात्र रामकुमार यादव की संदिग्ध मौत का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने सरकार से मांग की कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को सख्त से सख्त सजा दी जाए और मृतक छात्र के परिजनों को उचित मुआवजा प्रदान किया जाए।

    क्या है पूरा मामला?

    गौरतलब है कि 6 फरवरी को गिरिडीह जिले के जवाहर नवोदय विद्यालय, गांडेय में 11वीं कक्षा के छात्र रामकुमार यादव का शव संदिग्ध परिस्थितियों में बरामद हुआ था। इस घटना से क्षेत्र में भारी आक्रोश फैल गया था। परिजनों और स्थानीय लोगों ने स्कूल प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए जोरदार विरोध प्रदर्शन किया था। हालांकि, अब तक इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे लोगों में असंतोष बढ़ता जा रहा है।

    विधानसभा में उठा मामला

    बरही के विधायक मनोज कुमार यादव ने इस मामले को विधानसभा में उठाते हुए सरकार से मांग की कि जल्द से जल्द इस घटना की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को कठोर सजा दी जाए। उन्होंने यह भी कहा कि पीड़ित परिवार को न्याय मिलना चाहिए और उन्हें उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए ताकि वे इस मुश्किल घड़ी में आर्थिक रूप से मजबूत हो सकें।

    सांसद प्रतिनिधि और सामाजिक संगठनों का समर्थन

    जिला सांसद प्रतिनिधि दिनेश प्रसाद यादव, राष्ट्रीय यादव सेना के जिला अध्यक्ष धर्मेंद्र यादव और यादव महासभा के अध्यक्ष धनेश्वर यादव समेत कई सामाजिक संगठनों ने इस मांग का समर्थन किया। अधिवक्ता कामेश्वर यादव, सरजू यादव, राजेश यादव, राजेंद्र यादव और शिवशंकर यादव समेत गिरिडीह के अन्य न्यायप्रिय लोगों ने विधायक मनोज कुमार यादव की इस पहल की सराहना की और सरकार से जल्द कार्रवाई की अपील की।

    सरकार का आश्वासन

    सरकार की ओर से यह आश्वासन दिया गया कि इस मामले की गहराई से जांच की जाएगी और दोषियों को सख्त कानूनी सजा दी जाएगी। साथ ही, पीड़ित परिवार को उचित आर्थिक सहायता देने पर भी विचार किया जाएगा।

    इस घटना से पूरे क्षेत्र में आक्रोश फैला हुआ है, और लोग जल्द से जल्द न्याय की मांग कर रहे हैं। अब देखना होगा कि सरकार कब तक इस मामले में ठोस कदम उठाती है और रामकुमार यादव के परिवार को इंसाफ मिलता है या नहीं।

  • गिरिडीह हिंसा : विधानसभा में भाजपा का हंगामा,मंत्री सुदिव्य कुमार ने सरकार की तरफ से संभाला मोर्चा

    परवेज़ आलम
    झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के 12वें दिन गिरिडीह में होली के दौरान हुई हिंसा का मामला गरमा गया। इस मुद्दे पर विपक्षी दल भाजपा ने जमकर हंगामा किया और सरकार पर निष्पक्ष कार्रवाई न करने का आरोप लगाया। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने इस घटना पर तत्काल चर्चा की मांग करते हुए पुलिस पर एकतरफा कार्रवाई करने का आरोप लगाया। भाजपा विधायकों की मांग और हंगामे के कारण विधानसभा अध्यक्ष को कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित करनी पड़ी। दुबारा सदन शुरू हुआ तो मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने सरकार का पक्ष मजबूती से रखते हुये कहा कि प्रशासन ने इस पूरे मामले में संयम से काम लिया और स्थिति को बिगड़ने से रोका। उन्होंने कहा कि भाजपा केवल राजनीतिक लाभ उठाने के लिए इस मामले को एकतरफा तरीके से पेश कर रही है।

    नेता प्रतिपक्ष ने पुलिस की भूमिका पर सवाल
    बाबूलाल मरांडी ने विधानसभा में गिरिडीह हिंसा का मामला उठाया और कहा कि धनवार थाना क्षेत्र के घोड़थंभा में होली खेलने वाली युवाओं की टोली को पुलिस ने जबरन रोका। इसके बाद एक समुदाय के लोगों ने पेट्रोल बम, बोतलों और पत्थरों से हमला कर दिया। इस हिंसा में कई दुकानों और गाड़ियों में आग लगा दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस इस दौरान मूकदर्शक बनी रही और बाद में कार्रवाई करते हुए दोनों पक्षों से 40-40 लोगों को नामजद कर 11-11 लोगों को गिरफ्तार कर लिया। मरांडी ने इस कार्रवाई को पक्षपातपूर्ण करार देते हुए कानून-व्यवस्था पर विशेष चर्चा की मांग की।

    सत्तापक्ष का जवाब और विपक्ष का विरोध
    संसदीय कार्य मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने विपक्ष की मांग को खारिज करते हुए कहा कि गिरिडीह हिंसा पर चर्चा गृह विभाग की अनुदान मांगों के दौरान की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस मामले में राजनीति करना उचित नहीं है और सभी को संवेदनशीलता के साथ इस विषय पर चर्चा करनी चाहिए।
    कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने कहा कि जहां एक ओर इस हिंसा की निंदा होनी चाहिए, वहीं उन क्षेत्रों की सराहना भी की जानी चाहिए जहां हिंदू-मुस्लिम समुदायों ने मिलकर सौहार्दपूर्ण तरीके से होली मनाई। उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसे लोगों को विधानसभा से बधाई संदेश भेजा जाए, ताकि समाज में भाईचारे का संदेश जाए।

    भाजपा का हंगामा, कार्यवाही बाधित
    भाजपा विधायकों ने तुरंत चर्चा की मांग को लेकर सदन में हंगामा जारी रखा और वेल में आकर प्रदर्शन करने लगे। इस दौरान सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की गई। हंगामे के कारण प्रश्नकाल की कार्यवाही बाधित हो गई और विधानसभा अध्यक्ष रबींद्रनाथ महतो को सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
    मंत्री इरफान अंसारी का भाजपा पर हमला
    गिरिडीह हिंसा पर जारी सियासी घमासान विधानसभा परिसर के बाहर भी जारी रहा। मंत्री इरफान अंसारी ने भाजपा नेताओं पर आरोप लगाया कि वे इस घटना का राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास गिरिडीह जाकर माहौल भड़काने का काम कर रहे हैं, जो उचित नहीं है।
    मंत्री अंसारी ने चेतावनी दी कि भाजपा नेताओं को झारखंड का माहौल बिगाड़ने नहीं दिया जाएगा और राज्य सरकार कानून-व्यवस्था को बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने भाजपा नेताओं के दबाव में आकर मुकदमा दर्ज किया है और वे इस मामले को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के सामने उठाएंगे। उन्होंने कहा कि इस मामले में जो भी लोग दोषी हैं उन पर कार्रवाई होगी, भाईचारगी किसी भी सूरत में बिगड़ने नहीं दी जाएगी. गिरिडीह में माहौल बदल रहा है लगातार पुलिस प्रशासन के द्वारा नजर रखी जा रही है. दोनों पक्षों के लोग शांति चाहते हैं इसीलिए किसी को भी माहौल बिगड़ता की इजाजत नहीं दी जाएगी.

    सरकार और प्रशासन का पक्ष
    मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि प्रशासन ने इस पूरे मामले में संयम से काम लिया और स्थिति को बिगड़ने से रोका। उन्होंने कहा कि भाजपा केवल राजनीतिक लाभ उठाने के लिए इस मामले को एकतरफा तरीके से पेश कर रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि होली जुलूस में ऐसे कौन लोग शामिल थे जो पुलिस से हाथापाई कर रहे थे? उन्होंने प्रशासन की भूमिका को संतुलित बताते हुए कहा कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

    राजनीतिक उथल-पुथल जारी
    गिरिडीह हिंसा का मामला अब झारखंड की राजनीति में गर्माया हुआ है। एक तरफ भाजपा इस घटना को लेकर राज्य सरकार पर हमलावर है, तो दूसरी ओर सरकार विपक्ष पर माहौल बिगाड़ने का आरोप लगा रही है। गिरिडीह में स्थिति सामान्य करने के लिए प्रशासन लगातार नजर बनाए हुए है, लेकिन इस घटना से उपजा राजनीतिक विवाद फिलहाल थमने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं।

  • झारखंड की राजनीति में बड़ा उलटफेर: बाबूलाल मरांडी बने नेता प्रतिपक्ष

    -परवेज़ आलम

    ………आखिरकार  इंतजार खत्म हुआ। चार महीने की राजनीतिक उथल-पुथल, अटकलों का बाजार, गुप्त बैठकों और सियासी कयासों के बाद भारतीय जनता पार्टी ने झारखंड में बड़ा फैसला ले लिया है। पार्टी ने अनुभवी नेता और राज्य के पहले मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी को विधायक दल का नेता चुन लिया है। यानी अब वह झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभाएंगे।

    चार महीने की देरी: भाजपा की रणनीति या आंतरिक असमंजस?

    झारखंड विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद से ही भाजपा में नेता प्रतिपक्ष के चयन को लेकर उथल-पुथल मची हुई थी। इस पद के लिए कई दिग्गज नेताओं के नाम सामने आए, जिनमें नवीन जायसवाल, नीरा यादव, और सीपी सिंह  का नाम प्रमुख था। लेकिन आखिरकार बाजी बाबूलाल मरांडी के हाथ लगी। भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने भी इस निर्णय पर मुहर लगा दी। पर्यवेक्षक भूपेंद्र यादव ने विधायकों से चर्चा की । पर्यवेक्षक भूपेन्द्र यादव ने कहा कि विधायकों ने सर्वसम्मति से बाबूलाल मरांडी को नेता चुना है। नवीन जायसवाल,नीरा यादव, राज सिन्हा ने इसके लिए प्रस्ताव रखा। इसे सभी विधायकों ने सर्वसम्मति से स्वीकार किया।और सर्वसम्मति से मरांडी को नेता चुने जाने की घोषणा की।

    लेकिन सवाल यह उठता है कि यह फैसला आने में चार महीने क्यों लगे? क्या भाजपा के भीतर मतभेद थे, या फिर यह किसी रणनीति का हिस्सा था? पार्टी सूत्रों का कहना है कि भाजपा नेतृत्व शुरू से ही मरांडी को लेकर स्पष्ट था, लेकिन सत्ता संतुलन साधने के लिए समय लिया गया और जब आखिरी फैसला हुआ, तो अनुभव और कद को ध्यान में रखते हुए बाबूलाल मरांडी के नाम पर मुहर लगी।

     

     

    बता दें कि छठी विधानसभा के गठन के बाद से भाजपा विधायक दल के पास नेता नहीं था। भाजपा विधायक दल के नेता ही नेता प्रतिपक्ष होंगे। इस तरह से बाबूलाल मरांडी झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष होंगे। वे अभी भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं।

    मरांडी की प्रतिक्रिया: पीएम मोदी के सपने को साकार करने की प्रतिबद्धता

    नेता प्रतिपक्ष चुने जाने के बाद बाबूलाल मरांडी ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकसित भारत का जो संकल्प लिया है, उसे पूरा करने में हम भी अपना योगदान देंगे। झारखंड के लोगों की सेवा और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए हम पूरी ताकत से काम करेंगे।”

    भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पद से जल्द देंगे इस्तीफा

    बाबूलाल मरांडी इस समय झारखंड भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं। अब जब वे नेता प्रतिपक्ष बन गए हैं, तो जल्द ही प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा देकर संगठन में नए अध्यक्ष की नियुक्ति का रास्ता साफ करेंगे। भाजपा नेतृत्व अब इस पर फैसला करेगा कि झारखंड में संगठन की जिम्मेदारी किसे सौंपी जाए।

    बाबू लाल मरंडी की झारखंड की  राजनीति मे वापसी 

    बाबूलाल मरांडी की राजनीति कभी भाजपा तो कभी अलग राह पकड़ती रही। लेकिन यह भी सच है कि वह एक मजबूत जननेता के रूप में उभरे हैं। 2006 में उन्होंने भाजपा से अलग होकर झारखंड विकास मोर्चा बनाया, लेकिन 2020 में दोबारा भाजपा में वापसी कर ली।

    उनका सियासी कद केवल झारखंड तक सीमित नहीं रहा। वाजपेयी सरकार में उन्होंने पर्यावरण एवं वन मंत्रालय में राज्य मंत्री की भूमिका भी निभाई।

    बाबूलाल मरांडी: झारखंड की राजनीति का बड़ा नाम

    बाबूलाल मरांडी झारखंड के पहले मुख्यमंत्री रह चुके हैं और झारखंड विधानसभा में विपक्ष के नेता भी रहे हैं। उन्होंने हमेशा से प्रदेश की राजनीति में एक अहम भूमिका निभाई है। आइए, उनके राजनीतिक सफर पर एक नजर डालते हैं:

    • जन्म और शिक्षा: 11 जनवरी 1958 को गिरिडीह जिले के कोदईबांक गांव में जन्मे बाबूलाल मरांडी ने रांची विश्वविद्यालय से भूगोल में स्नातकोत्तर किया है।
    • संघ से जुड़ाव: पढ़ाई के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ गए और बाद में झारखंड क्षेत्र के विश्व हिंदू परिषद (VHP) का संगठन सचिव बने।
    • मुख्यमंत्री के रूप में कार्यकाल: 15 नवंबर 2000 को झारखंड राज्य के गठन के बाद वे राज्य के पहले मुख्यमंत्री बने और 17 मार्च 2003 तक इस पद पर रहे।
    • झारखंड विकास मोर्चा की स्थापना: 2006 में भाजपा से अलग होकर उन्होंने झारखंड विकास मोर्चा (प्रजातांत्रिक) की स्थापना की। हालांकि, 2020 में उन्होंने अपनी पार्टी का भाजपा में विलय कर दिया।
    • लोकसभा में भूमिका: वे 12वीं, 13वीं, 14वीं और 15वीं लोकसभा में सांसद रह चुके हैं। 1998 से 2000 के बीच एनडीए सरकार में केंद्रीय राज्य मंत्री (पर्यावरण एवं वन मंत्रालय) भी रहे।
    • विधानसभा में वापसी: 2019 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने धनवार सीट से जीत दर्ज की और फिर से झारखंड विधानसभा में सक्रिय हो गए।

    नेता प्रतिपक्ष के रूप में उनकी जिम्मेदारी

    अब जब बाबूलाल मरांडी झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बन गए हैं, तो उनकी जिम्मेदारी और बढ़ गई है। आइए, जानते हैं कि विपक्ष के नेता के रूप में उनकी प्रमुख भूमिकाएं क्या होंगी:

    1. विपक्ष का नेतृत्व: सभी विपक्षी दलों को एकजुट करना और उनकी आवाज को विधानसभा में मजबूती से उठाना।
    2. सरकार की नीतियों पर नजर: सरकार के फैसलों की समीक्षा करना और जनता के हितों के खिलाफ नीतियों का विरोध करना।
    3. विधानसभा में प्रभावी बहस: सदन में सरकार को जवाबदेह ठहराना और बहस के दौरान ठोस तर्क प्रस्तुत करना।
    4. जनता की समस्याओं पर ध्यान: जनता की समस्याओं को विधानसभा में उठाना और सरकार से समाधान की मांग करना।
    5. सरकार की जवाबदेही तय करना: किसी भी गलत फैसले या नीतिगत चूक पर सरकार से सवाल पूछना और उसे जवाबदेह ठहराना।

    भाजपा की आगे की रणनीति?

    अब जब भाजपा ने झारखंड में नेता प्रतिपक्ष का चयन कर लिया है, तो पार्टी की अगली रणनीति सरकार के खिलाफ मजबूत विपक्ष खड़ा करने की होगी। झारखंड में भाजपा अब आगामी चुनावों के लिए जमीन तैयार करेगी और हेमंत सोरेन सरकार को घेरने की योजना बनाएगी।

    बाबूलाल मरांडी का झारखंड की राजनीति में कद काफी बड़ा है। उन्होंने मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री, सांसद, विधायक और प्रदेश अध्यक्ष जैसे अहम पदों पर काम किया है। अब नेता प्रतिपक्ष के रूप में वे झारखंड में भाजपा के लिए एक मजबूत चेहरा होंगे। भाजपा की रणनीति, झारखंड की राजनीति और विधानसभा में उनकी भूमिका पर सभी की नजरें टिकी होंगी। देखना दिलचस्प होगा कि वे विपक्ष की भूमिका को कितनी मजबूती से निभाते हैं और सरकार को कितनी कड़ी चुनौती देते हैं।

     

  • बिना नेता प्रतिपक्ष के पारित होगा झारखंड विधान सभा का बजट !

    भाजपा में नेता प्रतिपक्ष और प्रदेश अध्यक्ष की खोज जारी, पर कब खत्म होगा इंतजार?

    – परवेज़ आलम

    झारखंड में विधानसभा चुनाव को बीते तीन महीने हो चुके हैं, लेकिन क्या मजाल कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अब तक नेता प्रतिपक्ष और प्रदेश अध्यक्ष के नाम पर कोई फैसला ले पाई हो! बजट सत्र की गूंज विधानसभा में गूंजने लगी है, लेकिन मुख्य विपक्षी दल के नेता का नाम अब तक सस्पेंस बना हुआ है। सवाल यह उठता है कि जब सत्ता पक्ष अपनी जिम्मेदारियों में जुटा हुआ है, तो विपक्ष का यह ढुलमुल रवैया किस ओर इशारा करता है?

    बिना नेता प्रतिपक्ष के बजट ! यह कैसी राजनीति?

    3 मार्च को राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर विधानसभा में बजट पेश करने वाले हैं। लेकिन यह बजट इतिहास में इस बात के लिए भी दर्ज होगा कि जब इसे विधानसभा में पेश किया जाएगा, तो वहां विपक्ष का कोई मुखिया मौजूद नहीं होगा! यह एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया की गंभीर चूक मानी जा रही है। यह महज संयोग नहीं, बल्कि भाजपा के आंतरिक असंतुलन का संकेत भी देता है।

    विधानसभा अध्यक्ष की नाराजगी, लेकिन भाजपा बेफिक्र!

    झारखंड विधानसभा अध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो ने इस मुद्दे पर अपनी नाराजगी जता दी है। उनका साफ कहना है कि विपक्ष में नेता का होना अनिवार्य है, ताकि सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चल सके। लेकिन क्या भाजपा इस बात को गंभीरता से ले रही है? या फिर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के लिए झारखंड की राजनीतिक तस्वीर फिलहाल किसी प्राथमिकता में नहीं है?

    दिल्ली में अटकी फाइल, इंतजार में रांची!

    नेता प्रतिपक्ष का चयन आखिर क्यों नहीं हो पा रहा? सूत्रों की मानें तो भाजपा की केंद्रीय कमेटी अब तक इस पर कोई ठोस निर्णय नहीं ले पाई है। पार्टी के कई बड़े नेता झारखंड आ चुके हैं, लेकिन हर बार सिर्फ कयास और अटकलों का दौर चलता है, नतीजा कुछ नहीं निकलता।

    कौन होगा अगला नेता प्रतिपक्ष? संभावित नामों की सूची लंबी!

    अगर झारखंड की राजनीति के गलियारों में सुगबुगाहट सुनी जाए, तो भाजपा के भीतर कई नामों की चर्चा है।

    1. बाबू लाल मराण्डी :पूर्व मुख्य मंत्री व भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष,विधायी कार्यों का लंबा अनुभव
    2. सीपी सिंह: रांची विधायक, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और कद्दावर नेता।
    3. नीरा यादव: कोडरमा विधायक, महिला चेहरा।
    4. नवीन जायसवाल: हटिया विधायक, ओबीसी समाज से आते हैं और भाजपा की सामाजिक संतुलन नीति के तहत इनका नाम भी चर्चा में है।

    लेकिन असल सवाल यह है कि चर्चा कब खत्म होगी और भाजपा अपने नेता के नाम पर अंतिम मुहर कब लगाएगी?

    प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी भी खाली, कब मिलेगा नया अध्यक्ष?

    झारखंड भाजपा सिर्फ नेता प्रतिपक्ष की ही नहीं, बल्कि प्रदेश अध्यक्ष की भी तलाश में है। रघुवर दास के ओड़ीसा के राज्यपाल से इस्तीफे के बाद से ही यह कयास लगाया जा रहा था कि इन्हें प्रदेश अध्यक्ष पद कि जिम्मेवारी मिल सकती है पर आलाकमान कोई निर्णय लेने कि स्थिति मे फिलवक्त नहीं दिखती । पार्टी संगठन के स्तर पर सांगठनिक चुनाव अभी जारी है और जिला स्तर पर इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद ही प्रदेश अध्यक्ष का नाम सामने आएगा। लेकिन तब तक कार्यकर्ताओं को सिर्फ इंतजार ही करना होगा।

    क्या भाजपा की रणनीति झारखंड में कमजोर पड़ रही है?

    झारखंड में भाजपा को एक मजबूत विपक्ष की भूमिका निभाने की जरूरत है, लेकिन पार्टी का यह ढुलमुल रवैया न केवल कार्यकर्ताओं के बीच असमंजस पैदा कर रहा है, बल्कि इसका राजनीतिक नुकसान भी पार्टी को उठाना पड़ सकता है। अगर भाजपा जल्द ही नेता प्रतिपक्ष और प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा नहीं करती, तो यह उसकी साख पर सवाल खड़े करने वाला साबित हो सकता है।

    आखिर कब खत्म होगा यह इंतजार?

    झारखंड में भाजपा का राजनीतिक अस्थिरता का यह दौर कब खत्म होगा? भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व कब नींद से जागेगा? और क्या झारखंड में विपक्ष की भूमिका निभाने के लिए भाजपा सच में गंभीर है? ये तमाम सवाल भाजपा के लिए जितने महत्वपूर्ण हैं, उतने ही झारखंड की जनता के लिए भी। क्योंकि लोकतंत्र की मजबूती के लिए सत्ता के साथ एक मजबूत विपक्ष भी जरूरी होता है।

  • झारखंड विधानसभा में 5508 करोड़ रुपये का तीसरा अनुपूरक बजट पेश, महिला, बाल विकास और शिक्षा पर विशेष ध्यान

    झारखंड विधानसभा में तीसरा अनुपूरक बजट पेश, ऊर्जा विभाग को सबसे अधिक आवंटन

    झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के तीसरे दिन सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष का तीसरा अनुपूरक बजट पेश किया। गुरुवार को वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के बाद सदन में 5508 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट प्रस्तुत किया। इस बजट में विभिन्न विभागों के लिए धनराशि का आवंटन किया गया, जिसमें सबसे अधिक राशि ऊर्जा विभाग को दी गई।

    इस तृतीय अनुपूरक बजट में ऊर्जा विभाग के लिए 971.80 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। वहीं, कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता (कृषि) विभाग को 176.48 लाख रुपये, पशुपालन प्रभाग को 241.34 लाख रुपये, मंत्रिमंडल सचिवालय एवं निगरानी विभाग को 612.62 लाख रुपये और उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग को 180.75 लाख रुपये आवंटित किए गए हैं।

    इसके अलावा, वित्त विभाग को 10471.61 लाख रुपये, पेंशन मद के लिए 50,000 लाख रुपये, वाणिज्य कर विभाग को 50 लाख रुपये और खाद्य, जन वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग को 74 लाख रुपये दिए गए हैं। वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के लिए 16137.95 लाख रुपये तथा स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के लिए 14289.39 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है।

    शिक्षा के क्षेत्र में भी बड़े आवंटन किए गए हैं। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सेकेंडरी शिक्षा विभाग को 18850.43 लाख रुपये और प्राथमिक एवं बजट शिक्षा प्रभार को 39293.50 लाख रुपये मिले हैं। उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के लिए 150 लाख रुपये और उद्योग विभाग को 274.54 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है।

    महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग को 26668.69 लाख रुपये तथा ग्रामीण कार्य विभाग को 87329 लाख रुपये आवंटित किए गए हैं। इस अनुपूरक बजट के जरिए विभिन्न योजनाओं को मजबूती देने और विकास कार्यों को गति देने का प्रयास किया गया है।

  • मंत्री चमरा लिंडा का बड़ा बयान: सदन में कहा, 15 मार्च तक मंईयां सम्मान योजना की राशि होगी जारी

    मंईयां सम्मान योजना की बकाया राशि 15 मार्च तक खातों में भेजी जाएगी: मंत्री चमरा लिंडा

    बजट सत्र के तीसरे दिन मंत्री चमरा लिंडा ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि मंईयां सम्मान योजना की बकाया राशि 15 मार्च तक महिलाओं के खातों में जमा कर दी जाएगी।

    सदन में सीपी सिंह के सवाल का जवाब देते हुए मंत्री ने बताया कि इस योजना की राशि महिलाओं के खाते में भेजने की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है। उन्होंने आश्वासन दिया कि 15 मार्च तक बाकी बची सभी किस्तों का भुगतान कर दिया जाएगा।

    मंत्री ने आगे कहा कि मार्च माह की राशि महिलाओं के खातों में ट्रांसफर होना शुरू हो गया है, जबकि जनवरी और फरवरी माह की बकाया किस्तें भी 15 मार्च तक खातों में जमा कर दी जाएंगी।

  • राज्यपाल ने अभिभाषण में गिनाईं हेमंत सरकार की उपलब्धियां, कहा – बजट सत्र की सफलता के लिए सभी दल करें सहयोग

    झारखंड विधानसभा बजट सत्र का शुभारंभ: राज्यपाल संतोष गंगवार का अभिभाषण

    झारखंड विधानसभा का बजट सत्र राज्यपाल संतोष गंगवार के अभिभाषण के साथ प्रारंभ हुआ। अपने संबोधन में उन्होंने सरकार की उपलब्धियों, योजनाओं और भविष्य की प्राथमिकताओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने विकास, सुशासन और जनकल्याण को सरकार की प्राथमिकताओं के रूप में रेखांकित किया और सभी वर्गों के कल्याण हेतु सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया।

    विकास और आधारभूत संरचना

    राज्यपाल ने बुनियादी ढांचे के विकास को सरकार की प्रमुख प्राथमिकता बताया। सड़क, पुल और रेलवे कनेक्टिविटी को सुधारने के लिए विभिन्न परियोजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क निर्माण एवं मरम्मत हेतु बड़ी धनराशि आवंटित की गई है, जबकि शहरी यातायात को सुगम बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं लागू की जा रही हैं। जल आपूर्ति और स्वच्छता को आधुनिक बनाने के प्रयास भी जारी हैं।

    कृषि एवं ग्रामीण विकास

    राज्य सरकार किसानों की आय को दोगुना करने के उद्देश्य से विभिन्न योजनाओं को लागू कर रही है। कृषि ऋण माफी योजना, सॉइल हेल्थ कार्ड, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार और जैविक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए ठोस प्रयास किए गए हैं। छोटे एवं मध्यम किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि की गई है और उनकी फसलें बेहतर मूल्य पर बिकें, इसके लिए नई मंडियों की स्थापना की जा रही है। डेयरी उद्योग को बढ़ावा देने के लिए भी योजनाएं शुरू की गई हैं।

    शिक्षा एवं युवाओं के लिए योजनाएं

    शिक्षा क्षेत्र में सुधार के लिए सरकार ने स्मार्ट क्लासरूम, छात्रवृत्ति योजनाओं और उच्च शिक्षा संस्थानों में सुधार हेतु पर्याप्त बजट आवंटित किया है। ग्रामीण क्षेत्रों में उच्च शिक्षा के विस्तार के लिए नए कॉलेज खोले जा रहे हैं। इसके अलावा, तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास के माध्यम से युवाओं को रोजगारपरक प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।

    स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार

    सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए निःशुल्क स्वास्थ्य जांच, अस्पतालों में बेड की संख्या बढ़ाने और दूरस्थ क्षेत्रों तक चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाने के लिए कई योजनाएं चलाई हैं। टेलीमेडिसिन सेवाओं के विस्तार पर भी जोर दिया गया है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए विशेष योजनाओं को लागू किया गया है।

    रोजगार एवं औद्योगिक विकास

    राज्य सरकार स्थानीय उद्योगों और स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित करने के लिए कई नई योजनाएं लेकर आई है। औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने और युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए नीतिगत फैसले लिए गए हैं। टेक्सटाइल, खनन और कृषि आधारित उद्योगों को प्राथमिकता दी जा रही है। महिला उद्यमियों के सशक्तिकरण के लिए भी विशेष योजनाएं चलाई जा रही हैं।

    महिला एवं बाल विकास

    महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा एवं सशक्तिकरण के लिए राज्य सरकार कई योजनाएं चला रही है। मुख्यमंत्री कन्यादान योजना, पोषण अभियान और महिला स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक सहयोग देने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। महिला सशक्तिकरण के लिए विशेष कौशल विकास कार्यक्रम भी शुरू किए गए हैं। बाल श्रम और मानव तस्करी जैसी सामाजिक बुराइयों से निपटने के लिए कठोर कानून लागू किए गए हैं।

    पर्यावरण एवं सतत विकास

    पर्यावरण संरक्षण के तहत ग्रीन एनर्जी, वृक्षारोपण और जल संरक्षण योजनाओं को प्राथमिकता दी गई है। जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए सरकार सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा दे रही है। प्रदूषण नियंत्रण और कचरा प्रबंधन को भी प्रभावी रूप से लागू किया जा रहा है।

    कानून व्यवस्था एवं सुशासन

    राज्यपाल ने कानून व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पुलिस बल के आधुनिकीकरण और साइबर क्राइम से निपटने के लिए उठाए गए कदमों का जिक्र किया। महिलाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देने के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। आपराधिक गतिविधियों पर नजर रखने के लिए आधुनिक निगरानी प्रणाली लागू की गई है। भ्रष्टाचार और लालफीताशाही को समाप्त करने के लिए ई-गवर्नेंस को बढ़ावा दिया जा रहा है।

    सांस्कृतिक एवं पर्यटन विकास

    झारखंड सरकार राज्य की सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए योजनाएं चला रही है। ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों के विकास के साथ-साथ इको-टूरिज्म और साहसिक पर्यटन को प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर मिल सकें।,,

    राज्यपाल संतोष गंगवार ने अपने अभिभाषण में झारखंड सरकार की विभिन्न योजनाओं और नीतियों का सार प्रस्तुत किया। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, महिला सशक्तिकरण और कानून व्यवस्था के क्षेत्र में हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया और आशा जताई कि आगामी बजट इन लक्ष्यों को और मजबूती प्रदान करेगा। सरकार का उद्देश्य झारखंड को एक विकसित, समृद्ध और आत्मनिर्भर राज्य बनाना है। इस अभिभाषण के साथ बजट सत्र की शुरुआत हो गई है, जिसमें विभिन्न विभागों की योजनाओं एवं बजट प्रस्तावों पर चर्चा होगी।

  • बजट सत्र: दिवंगत हस्तियों को श्रद्धांजलि देने के बाद सदन कल तक के लिए स्थगित

     

    झारखंड विधानसभा में दिवंगत हस्तियों को श्रद्धांजलि, शोक प्रस्ताव पारित

    झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान हाल ही में दिवंगत हुई कई प्रतिष्ठित हस्तियों और आम नागरिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शोक प्रस्ताव पारित किया गया। इस दौरान सदन ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव को स्वीकार किया और दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की।

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने शोक प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि राज्य और देश ने कई महत्वपूर्ण व्यक्तियों को खो दिया है, जिनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा। उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार उनके दुख में सहभागी है। विधानसभा अध्यक्ष रबींद्रनाथ महतो ने भी अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए इस क्षति को अपूरणीय बताया और कहा कि हम सभी उनकी यादों को संजोकर आगे बढ़ेंगे।

    इस अवसर पर विभिन्न दलों के नेताओं ने भी दिवंगत आत्माओं को श्रद्धांजलि दी और उनके योगदान को याद किया।

    इन हस्तियों को किया गया याद

    विधानसभा में श्रद्धांजलि अर्पित की गई प्रमुख हस्तियों में देश के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, दिग्गज उद्योगपति रतन नवल टाटा, वामपंथी नेता सीताराम येचुरी, वरिष्ठ राजनेता ओम प्रकाश चौटाला, एस.एम. कृष्णा, कुंवर नटवर सिंह, सधनु भगत, बच्चा सिंह, छत्रुराम महतो, बैरागी उरांव, गुलाब सिंह मुंडा, मनोरमा सिंह, डॉ. कृष्णानंद झा, विश्वनाथ सिंह, गणेश पासवान, प्रीतिश नंदी, जनरल पदमनाभन, शारदा सिन्हा, उस्ताद जाकिर हुसैन और श्याम बेनेगल आदि शामिल हैं।

    पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का 26 दिसंबर 2024 को निधन हो गया। वर्ष 2004 से 2014 तक देश की बागडोर संभालने वाले सिंह ने भारतीय अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने में अहम भूमिका निभाई थी। उन्हें पद्म विभूषण, एशिया मनी अवॉर्ड और यूरो मनी अवॉर्ड जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया था।

    देश के दिग्गज उद्योगपति और टाटा संस के मानद चेयरमैन रतन नवल टाटा का 9 अक्टूबर 2024 को निधन हुआ। वे भारतीय उद्योग जगत की अग्रणी शख्सियतों में से एक थे और उन्हें पद्म भूषण, पद्म विभूषण सहित कई सम्मान प्राप्त हुए थे। उनका निधन औद्योगिक क्षेत्र के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है।

    वामपंथी आंदोलन के प्रमुख नेता सीताराम येचुरी का 12 सितंबर 2024 को निधन हो गया। वे 2005 से 2017 तक राज्यसभा सदस्य रहे और भारतीय राजनीति में उनका योगदान अविस्मरणीय रहेगा।

    शोक प्रस्ताव पारित करने के बाद सदन की कार्यवाही 25 फरवरी को सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

  • झारखंड : बजट सत्र 24 फरवरी से, सरकार की परीक्षा !

    रिपोर्ट- परवेज़ आलम

    झारखंड विधानसभा का बहुप्रतीक्षित बजट सत्र 24 फरवरी से शुरू हो रहा है। इस सत्र में सरकार के कामकाज का लेखा-जोखा सामने आएगा और विपक्ष पूरी तैयारी के साथ सरकार को घेरने के लिए मैदान में उतरेगा, भाजपा मुख्य विपक्षी दल है पर पार्टी  अपने विधायक दल के नेता का नाम घोषित नहीं कर पाई है । ऐसे मे सत्ता पक्ष भाजपापर तंज़ कसने से नहीं चूकेगी ।

    राज्यपाल के अभिभाषण से होगी शुरुआत

    24 फरवरी को राज्यपाल के अभिभाषण के साथ ही बजट सत्र का बिगुल बज जाएगा। 25 फरवरी को पहली पारी में प्रश्नकाल और दूसरी पारी में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा होगी। वहीं, 26 फरवरी को महाशिवरात्रि की छुट्टी रहेगी।

    बजट से पहले अनुपूरक बजट पर नजर

    27 फरवरी को सरकार 2024-25 का तृतीय अनुपूरक बजट पेश करेगी। इसके बाद दूसरी पारी में राज्यपाल के अभिभाषण पर वाद-विवाद और सरकार की प्रतिक्रिया के साथ मतदान होगा। 28 फरवरी को अनुपूरक बजट पर चर्चा कर विनियोग विधेयक पारित होगा।

    3 मार्च को होगा ‘बड़े बजट’ का ऐलान

    1 और 2 मार्च को अवकाश रहेगा, लेकिन 3 मार्च को वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर वित्तीय वर्ष 2025-26 का बजट पेश करेंगे। 4 मार्च से बजट पर बहस शुरू होगी, जिसमें पक्ष और विपक्ष खुलकर अपनी बात रखेंगे। 5 से 7 मार्च तक विभिन्न विभागों की अनुदान मांगों पर चर्चा होगी।

    होली के बाद विधेयकों की बरसात

    8 और 9 मार्च को फिर से अवकाश रहेगा, और 10 व 11 मार्च को अनुदान मांगों पर बहस होगी। 12 से 16 मार्च तक होली और अन्य त्योहारों के चलते विधानसभा में सन्नाटा रहेगा। फिर 17 से 21 मार्च तक विभिन्न विभागों की अनुदान मांगों पर चर्चा जारी रहेगी।

    22 और 23 मार्च को शनिवार-रविवार के चलते बैठक नहीं होगी। 24 मार्च को अनुदान मांगों पर बहस होगी, जबकि 25 और 26 मार्च को कई अहम विधेयक पेश किए जाएंगे। 27 मार्च को सत्र का समापन होगा, जहां कुछ और विधेयकों और गैर-सरकारी संकल्पों पर चर्चा होगी।

    बजट सत्र में क्या होगा खास?

    इस बार का बजट सत्र कई मायनों में दिलचस्प होने वाला है। महंगाई, बेरोजगारी और विकास कार्यों की सुस्त रफ्तार पर विपक्ष सरकार को घेर सकता है, तो सरकार भी अपने कामकाज का बखान करने का कोई मौका नहीं छोड़ेगी। देखना होगा कि ये सत्र जनता की उम्मीदों पर कितना खरा उतरता है!