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  • सभी औद्योगिक इकाइयों को इलेक्ट्रोस्टैटिक प्रेसिपिटेटर (ESP) मशीन लगाना आवश्यक –डीसी

    गिरिडीह जिले में अवैध बालू खनन, डंपिंग और स्टोन माइंस के संचालन पर गहन जांच और कारखानों से निकलने लने वाले धुएं व दूषित जल के निष्पादन में प्रदूषण नियंत्रण के मानकों का पालन सुनिश्चित करने का निर्देश गिरिडीह डीसी नमन प्रियेश लकड़ा ने दिया है । उन्होंने सभी औद्योगिक इकाइयों में इलेक्ट्रोस्टैटिक प्रेसिपिटेटर (ESP) मशीन लगाने के निर्देश भी दिए। गिरिडीह के समाहरणालय सभागार में मंगलवार को जिला स्तरीय पर्यावरण समिति की बैठक अध्यक्षता उपायुक्त-सह-अध्यक्ष, जिला पर्यावरण समिति नमन प्रियेश लकड़ा ने की। बैठक में पूर्व में दिए गए निर्देशों के अनुपालन की समीक्षा हुई और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा की गई।
    उसरी नदी के संरक्षण पर विशेष जोर।
    बैठक का एक मुख्य एजेंडा था उसरी नदी का संरक्षण। उपायुक्त ने इस नदी की सफाई और संरक्षण के लिए सीएसआर फंड के उपयोग की समीक्षा की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि इस फंड का प्रभावी और पारदर्शी तरीके से क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही, नदी में गंदे नालों का पानी फिल्टर करने के बाद ही प्रवाहित करने की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए।
    पर्यावरण संरक्षण और हरित उपायों पर फोकस।
    बैठक में औद्योगिक परिसरों में पौधारोपण और प्रदूषण नियंत्रण के मानकों का पालन करने पर जोर दिया गया। अस्पतालों, होटलों और रेस्तरां को भी प्रदूषण नियंत्रण से संबंधित अनुमति प्राप्त करने के निर्देश दिए गए। इसके साथ ही, एयर क्वॉलिटी इंडेक्स डिस्प्ले स्क्रीन लगाने का प्रस्ताव रखा गया, ताकि नागरिकों को वायु गुणवत्ता की स्थिति की जानकारी मिल सके।
    प्रमुख अधिकारी थे मौजूद।
    बैठक में पूर्वी वन प्रमंडल पदाधिकारी, उप विकास आयुक्त, सदर अनुमंडल पदाधिकारी समेत कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। पर्यावरण संरक्षण से जुड़े इस महत्त्वपूर्ण संवाद में सभी संबंधित विभागों के समन्वय पर जोर दिया गया।

  • नो डिटेंशन पॉलिसी खत्म अब 5वीं और 8वीं में फेल होने पर नहीं होगा प्रमोशन, केंद्र सरकार का बड़ा फैसला

    नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने सोमवार को शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव करते हुए ‘नो डिटेंशन पॉलिसी’ को समाप्त करने का ऐलान कर दिया है। अब 5वीं और 8वीं कक्षा में फ़ेल होने वाले छात्रों को बिना मेहनत के अगली कक्षा में भेजने का रास्ता बंद हो गया है। सरकार के इस कदम का उद्देश्य छात्रों के शिक्षण स्तर को सुधारना और उनकी बुनियादी शिक्षा को मजबूत करना है।

    क्या है नई नीति?

    पहले, 5वीं और 8वीं में फेल होने पर छात्रों को अगली कक्षा में प्रमोट कर दिया जाता था। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। नई व्यवस्था के तहत, वार्षिक परीक्षा में फ़ेल होने वाले छात्रों को दो महीने के भीतर पुनः परीक्षा देने का मौका दिया जाएगा। अगर वे इसमें भी फ़ेल रहते हैं, तो उन्हें अगली कक्षा में प्रमोशन नहीं मिलेगा।

    हालांकि, यह स्पष्ट कर दिया गया है कि कोई भी स्कूल 8वीं कक्षा तक किसी छात्र को स्कूल से बाहर नहीं कर सकता।

    नीति का उद्देश्य। 

    शिक्षा मंत्रालय का मानना है कि यह कदम छात्रों की शैक्षणिक क्षमता को सुधारने और उनकी सीखने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए उठाया गया है। मंत्रालय के सचिव संजय कुमार ने कहा, “हमारा उद्देश्य छात्रों के शिक्षण स्तर को मजबूत करना और उनकी समझ को विकसित करना है। यह नीति छात्रों को मेहनत करने और शिक्षा की नींव को मजबूत करने का मौका देगी।”

    फेल छात्रों को मिलेगा दूसरा मौका। 

    नई नीति के तहत, असफल छात्रों को अपनी कमजोरी सुधारने का अवसर दिया जाएगा। रिजल्ट के बाद दो महीने के भीतर दोबारा परीक्षा आयोजित की जाएगी। अगर छात्र दूसरी बार भी सफल नहीं होते हैं, तो उन्हें उसी कक्षा में रहना होगा।

    शिक्षा प्रणाली में सुधार की ओर एक कदम। 

    सरकार के इस निर्णय का उद्देश्य शिक्षा प्रणाली में गुणवत्ता लाना है। यह नीति न केवल छात्रों के प्रदर्शन को सुधारने में मदद करेगी, बल्कि उन्हें कड़ी मेहनत के लिए प्रेरित भी करेगी।

    इस बदलाव से यह साफ है कि सरकार अब शिक्षा के क्षेत्र में के पुराने नियम को समाप्त कर, छात्रों की वास्तविक क्षमता को पहचानने और उनकी प्रगति सुनिश्चित करने के लिए गंभीर है।

    क्या यह कदम छात्रों और अभिभावकों के लिए सही साबित होगा? यह तो समय ही बताएगा, लेकिन फिलहाल शिक्षा प्रणाली को मजबूत करने की यह पहल एक महत्वपूर्ण बदलाव की ओर इशारा करती है।

  • खाली पदों को जल्द से जल्द भरा जाएगा -उद्योग मंत्री संजय यादव

    1. रांची: झारखंड के उद्योग मंत्री संजय प्रसाद यादव ने सोमवार को प्रोजेक्ट भवन में उद्योग विभाग की गहन समीक्षा करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि विकास कार्यों को गति देने के लिए विभाग में खाली पदों को जल्द से जल्द भरा जाए। उन्होंने अधिकारियों से समन्वय बनाकर कार्य करने की अपील की और कहा कि झारखंड को विकसित राज्य की श्रेणी में बनाए रखने के लिए उद्योगों को बढ़ावा देना अनिवार्य है।

    रिक्त पदों पर बहाली को प्राथमिकता. 

    समीक्षा बैठक के दौरान मंत्री ने विभाग में खाली पड़े पदों का मुद्दा उठाया। उन्होंने निर्देश दिए कि रिक्त पदों की सूची तुरंत उपलब्ध कराई जाए, ताकि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से विचार-विमर्श कर इस दिशा में आवश्यक कदम उठाए जा सकें। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री का सपना है कि झारखंड एक औद्योगिक हब बने, और हम इसे साकार करेंगे।”

    निवेशकों को हर प्रकार की सुविधाएं . 

    मंत्री यादव ने कहा कि सरकार निवेशकों को हर प्रकार की सुविधाएं प्रदान करेगी। उन्होंने उद्योगों के विकास में बिचौलियों से सतर्क रहने पर भी जोर दिया। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को बताया कि उद्योगों के विस्तार और निवेश को आकर्षित करने के लिए व्यापक तैयारियां की जा रही हैं।

    समीक्षा बैठक में शामिल अधिकारी. 

    इस समीक्षा बैठक में उद्योग विभाग के सचिव जितेंद्र सिंह, अपर सचिव, उद्योग निदेशक सुशांत गौरव, और हस्तकरघा, रेशम एवं हस्तशिल्प निदेशालय की निदेशक आकांक्षा रंजन सहित कई महत्वपूर्ण अधिकारी मौजूद थे। इस दौरान जियाडा, ज़िडको, झारक्राफ्ट, झारखंड माटीकला बोर्ड, और मुख्यमंत्री लघु, कुटीर एवं उद्यम विकास बोर्ड समेत अन्य संस्थानों के कार्यों की भी समीक्षा की गई।

    मुख्यमंत्री की परिकल्पना को साकार करने का आह्वान. 

    मंत्री ने बैठक में कहा कि का उद्देश्य झारखंड को एक औद्योगिक हब के रूप में विकसित करना है। राज्य में अधिक से अधिक उद्योग स्थापित हों और झारखंड विकास की नई ऊंचाइयों को छुए, यही सरकार का लक्ष्य है।

    संजय प्रसाद यादव के इन निर्देशों से यह स्पष्ट है कि झारखंड सरकार विकास कार्यों में तेजी लाने और राज्य को उद्योगों के लिए आकर्षक बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

     

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  • हेमंत सरकार का बड़ा फैसला: झारखंड आंदोलनकारियों को अब मिलेगी समान पेंशन

    RANCHI: झारखंड सरकार ने झारखंड आंदोलनकारियों को सम्मान देने के लिए एक अहम कदम उठाया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर राज्य सरकार ने पेंशन योजना में बदलाव का प्रस्ताव तैयार किया है। इसके तहत अब आंदोलनकारियों को तीन अलग-अलग कैटेगरी में पेंशन देने के बजाय समान राशि प्रदान की जाएगी।

    प्रस्ताव के अनुसार, आंदोलन के दौरान जेल जाने वाले सभी आंदोलनकारियों को 10 हजार रुपये प्रति माह की पेंशन दी जाएगी। इससे पहले पेंशन की राशि तीन श्रेणियों में बंटी हुई थी:

    सरकार के इस नए फैसले से सभी जेल जाने वाले आंदोलनकारियों को समान पेंशन का लाभ मिलेगा।

    इसके अलावा, झारखंड आंदोलन में भाग लेने वाले लेकिन जेल न जाने वाले आंदोलनकारियों को अब केवल प्रशस्ति पत्र तक ही सीमित नहीं रखा जाएगा। सरकार ने उन्हें सम्मान स्वरूप 1000 से 1500 रुपये तक की राशि देने का भी प्रस्ताव किया है।

    विभागीय मंत्री के पास इस प्रस्ताव को मंजूरी के लिए भेजा गया है। सरकार के इस कदम को आंदोलनकारियों के सम्मान और उनके योगदान को उचित मान्यता देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    मुख्य बिंदु:

    समान पेंशन: सभी जेल गए आंदोलनकारियों को 10 हजार रुपये प्रतिमाह।
    पहले की व्यवस्था: तीन श्रेणियों में पेंशन (3500, 5000, 7000 रुपये)।
    नई योजना: जेल न जाने वाले आंदोलनकारियों को 1000-1500 रुपये की सम्मान राशि के साथ प्रशस्ति पत्र।
    प्रस्ताव: फाइल को विभागीय मंत्री के पास भेजा गया है।

  • रांची की सूरत बदलेगी: ई-बसें दौड़ेंगी,बनेगा फोरलेन; मंत्री ने दिए कड़े निर्देश

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट ………..

    RANCHI: रांची शहर का प्रदूषण घटेगा, सड़कें सुधरेंगी और जाम से राहत मिलेगी। झारखंड के नगर विकास एवं आवास मंत्री सुदिव्य कुमार ने राजधानी रांची को संवारने और प्रदूषण मुक्त करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि ई-बसों का संचालन हर हाल में शुरू किया जाए ताकि लोग निजी वाहनों की जगह इन बसों का उपयोग करें। इससे न केवल प्रदूषण घटेगा बल्कि सड़कों पर जाम की स्थिति में भी सुधार आएगा। मंत्री ने कहा, “पहले राजधानी को संवारें, फिर राज्य के अन्य शहरों पर ध्यान दिया जाएगा।”

    ई-बसों की योजना का नया अध्याय. 
    बैठक के दौरान अधिकारियों ने बताया कि 2013 में लो फ्लोर एसी बसों की योजना बनी थी, लेकिन टेंडर रद्द होने के कारण मामला अटक गया। हालांकि, दो साल पहले 244 नई सिटी बसों की खरीद को कैबिनेट ने मंजूरी दी थी। इनमें से 200 डीजल बसें और 24 एसी इलेक्ट्रिक बसें शामिल थीं। अब मंत्री ने ई-बसों के संचालन को प्राथमिकता देने की बात कही है।

    फोरलेन सड़क का प्रस्ताव: धुर्वा से रिंग रोड तक सफर आसान. 
    बैठक में प्रधान सचिव सुनील कुमार ने बताया कि ग्रेटर रांची डेवलपमेंट एरिया से सटे नया सराय रेलवे क्रॉसिंग के समानांतर फोरलेन सड़क का निर्माण किया जाएगा। यह फोरलेन नई विधानसभा भवन के पास से निकलेगा, जिससे धुर्वा इलाके से रिंग रोड तक पहुंचना बेहद आसान हो जाएगा।

    स्ट्रीट लाइट की मॉनिटरिंग: बनेगा डिजिटल डैशबोर्ड. 
    शहर की स्ट्रीट लाइट व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए मंत्री सुदिव्य कुमार ने डैशबोर्ड तैयार करने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि राजधानी की हर स्ट्रीट लाइट की स्थिति का ब्यौरा बनाया जाए— कौन-सी जल रही है और कौन-सी नहीं। साथ ही, मॉनिटरिंग के लिए GPS सिस्टम और रिमोट कंट्रोल की व्यवस्था लागू करने की बात कही।

    बैठक में उठे महत्वपूर्ण मुद्दे. 
    बैठक में मौजूद अधिकारियों, जिनमें प्रधान सचिव सुनील कुमार, सूडा निदेशक अमित कुमार, डीएमए निदेशक सत्येंद्र कुमार और जुडको के पीडीटी गोपालजी शामिल थे, ने रांची के विकास को लेकर कई योजनाओं पर चर्चा की।

    नए रांची का वादा. 
    मंत्री सुदिव्य कुमार के इस कड़े रुख के बाद उम्मीद की जा रही है कि ई-बसें जल्द सड़कों पर दौड़ेंगी, फोरलेन सड़कें शहर के यातायात को सुगम बनाएंगी और स्ट्रीट लाइट की निगरानी से शहर और चमकदार और सुरक्षित बनेगा। रांची के विकास की ये नई कवायद राजधानी को एक आधुनिक और प्रदूषण मुक्त शहर बनाने की दिशा में बड़ा कदम साबित होगी।

  • JSSC-CJL 2023: हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, परिणामों पर रोक, डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन जारी रहेगा

    RANCHI: झारखंड हाईकोर्ट ने जेएसएससी सीजीएल 2023 परीक्षा के परिणामों पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। हालांकि, डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन प्रक्रिया पहले की तरह जारी रहेगी।

    चीफ जस्टिस एमएस रामाचंद्र राव और जस्टिस दीपक रोशन की बेंच ने मंगलवार, 17 दिसंबर को याचिका पर सुनवाई की। याचिकाकर्ता प्रकाश कुमार और अन्य ने परीक्षा में पेपर लीक और धांधली का आरोप लगाया था। उनकी मुख्य मांग थी कि परीक्षा को रद्द कर सीबीआई जांच कराई जाए। अदालत ने सभी पक्षों को सुनने के बाद फिलहाल परिणामों पर रोक लगाते हुए अगली सुनवाई 22 जनवरी को तय की है।

    क्या है मामला?
    21 और 22 सितंबर को झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा आयोजित सीजीएल परीक्षा में धांधली के आरोप लगे। अभ्यर्थियों का कहना है कि परीक्षा में पेपर लीक हुआ है, जिसके चलते निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं।

    डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन पर हाईकोर्ट का रुख. 
    हालांकि अदालत ने परीक्षा के परिणामों पर रोक लगाई है, लेकिन डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन प्रक्रिया पर रोक नहीं लगाई गई। यह प्रक्रिया सोमवार, 16 दिसंबर से शुरू हो चुकी है।

    छात्रों का विरोध और प्रशासन की सख्ती. 
    परीक्षा में गड़बड़ी के आरोपों को लेकर अभ्यर्थियों ने परीक्षा रद्द कराने की मांग पर जोर दिया। विरोध के मद्देनजर प्रशासन ने जेएसएससी कार्यालय के आसपास धारा 144 लागू कर दी और इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया। बावजूद इसके, छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया, जिस पर पुलिस ने लाठीचार्ज कर उन्हें खदेड़ दिया।

    हाईकोर्ट का यह आदेश परीक्षा में गड़बड़ी के आरोपों की गंभीरता को दिखाता है। अब सबकी निगाहें 22 जनवरी की अगली सुनवाई पर टिकी हैं। तब तक परिणाम जारी नहीं होंगे, लेकिन डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन चलता रहेगा।

  • झारखंड की कोयला रॉयल्टी का सच… सवालों का जवाब या विवाद का नया अध्याय ?

    परवेज़ आलम की विश्लेषणात्मक रिपोर्ट…..

    झारखंड विधानसभा चुनाव से लेकर अब तक, कोयला रॉयल्टी का 1.36 लाख करोड़ रुपये का मुद्दा गर्म है। हेमंत सोरेन कहते हैं, “झारखंड को उसका हक चाहिए,” तो प्रधानमंत्री को पत्र लिखते हैं। लेकिन जवाब क्या आता है? केंद्र कहता है- “कोई बकाया नहीं।”

    लोकसभा में सवाल उठा… पप्पू यादव ने पूछा- “झारखंड का हक कब मिलेगा?” जवाब आया- झारखंड को पिछले 3 साल में 7790 करोड़ रुपये मिल चुके हैं। कोयला राजस्व में “झारखंड का कोई हिस्सा बाकी नहीं”- यह बयान देता है केंद्रीय वित्त मंत्रालय।

    लेकिन सवाल वहीं का वहीं। झारखंड सरकार कहती है कि “1.48 लाख करोड़ का बकाया है।” इसमें 32,000 करोड़ रुपये एमएमडीआर के तहत, 29,000 करोड़ रॉयल्टी के नाम पर, और 1.01 लाख करोड़ भूमि अधिग्रहण के एवज में।

    “किसका सच, किसका झूठ?” यह सवाल अब झारखंड की जनता के मन में गूंज रहा है। हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया पर कहा-
    “झारखंड के बीजेपी सांसद क्यों चुप हैं? आवाज उठाइए। झारखंड का यह पैसा राज्य के विकास के लिए जरूरी है।”

    लेकिन दूसरी तरफ, केंद्र का जवाब साफ है। बकाया नहीं, भेदभाव नहीं। सवाल उठता है कि “तो फिर झारखंड सरकार ये आंकड़े कहां से ला रही है?”

    हेमंत सोरेन की सरकार कहती है, “कानूनी रास्ता अपनाया जाएगा।” केंद्र कहता है, “जो मिला, वही हक है।”

    अब सवाल यह है कि “झारखंड की जनता किस पर भरोसा करे?”
    क्या यह सिर्फ एक आंकड़ों का खेल है, या फिर राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा? झारखंड की धरती, खनिज, और कोयले के बीच… “विकास की गूंज सुनाई देगी, या सवाल ही सवाल बाकी रहेंगे?”

  • स्वास्थ्य को व्यवसाय समझने वालों की जगह जेल मे होगी- डॉ. इरफान

    धनबाद: झारखंड के नव-नियुक्त स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने राज्य की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था को सुधारने के लिए सख्त कदम उठाने का ऐलान किया है। रविवार को धनबाद के गोविंदपुर के फकीरडीह में मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि निजी अस्पतालों की मनमानी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    बिल भुगतान के नाम पर शव रोकने पर रोक.
    डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि अगर किसी मरीज की अस्पताल में मौत होती है, तो अस्पताल प्रबंधन शव को परिजनों को तुरंत सौंपेगा। बिल भुगतान के नाम पर शव रोकने वालों के खिलाफ जिला प्रशासन को कानूनी कार्रवाई का निर्देश दिया जाएगा। उन्होंने कहा, “स्वास्थ्य को व्यवसाय समझने वालों की जगह अब जेल होगी।”

    आयुष्मान योजना में लापरवाही पर सख्त कार्रवाई।
    स्वास्थ्य मंत्री ने आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज में लापरवाही बरतने वाले अस्पतालों पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि ऐसे अस्पताल जो फर्जी तरीके से आयुष्मान की मान्यता लेकर गरीबों को लूट रहे हैं, उनकी उच्चस्तरीय जांच कराई जाएगी। “अगर कोई अस्पताल मापदंड पूरे नहीं करता, तो उसे सील कर दिया जाएगा और मालिक को जेल होगी,” उन्होंने कहा।

    स्वास्थ्य सेवाओं को दिल्ली मॉडल पर विकसित करने का वादा।
    डॉ. अंसारी ने दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य मॉडल की तारीफ करते हुए कहा कि झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था को भी उसी तर्ज पर सुधारा जाएगा। उन्होंने कहा, “दिल्ली में सरकार ने स्वास्थ्य सुविधाओं को प्राथमिकता दी है, जिससे वहां का मॉडल देश के लिए उदाहरण बन गया है। मुख्यमंत्री से बात कर झारखंड में भी इसी तरह की सेवाएं लाने की कोशिश होगी।”

    फर्जी डिग्री वालों और बेरोजगारों के लिए योजना।
    स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी कहा कि फर्जी डिग्री के आधार पर काम कर रहे लोगों पर कड़ी कार्रवाई होगी। उनकी डिग्री की जांच कराई जाएगी और दोषियों को जेल भेजा जाएगा। इसके साथ ही, स्थानीय बेरोजगार युवाओं को स्वास्थ्य विभाग में रोजगार के मौके दिए जाएंगे।

    सरकारी अस्पतालों में सुधार पर जोर
    डॉ. अंसारी ने वादा किया कि सरकारी अस्पतालों में आने वाले हर मरीज को हर तरह की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। उन्होंने कहा कि मरीजों को इलाज के दौरान किसी प्रकार की परेशानी न हो, यह सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकता है।डॉ. इरफान अंसारी के इस बयान ने यह साफ कर दिया है कि झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार के लिए अब सख्त कदम उठाए जाएंगे। जनता को बेहतर सुविधाएं और न्याय दिलाने के लिए उन्होंने प्रतिबद्धता जाहिर की है।

  • मंईयां सम्मान योजना: आवेदन के बाद भी पैसे क्यों नहीं आ रहे?

    रांची: झारखंड सरकार की महत्वाकांक्षी ‘मंईयां सम्मान योजना’ का सपना, जो महिलाओं को आर्थिक सशक्तिकरण का भरोसा देता है, कई लाभार्थियों के लिए अभी भी अधूरा है। वजह? तकनीकी गड़बड़ियां, बैंकिंग प्रक्रियाओं की खामियां, और आवेदन में छोटी-छोटी गलतियां।
    सरकार ने योजना की राशि 1,000 से बढ़ाकर 2,500 रुपये तो कर दी, लेकिन सवाल यह है कि जिनके खाते में पैसे नहीं पहुंच रहे, उनके लिए यह बढ़ोतरी भी क्या मायने रखती है

    क्या हो सकते हैं पैसे न मिलने के कारण?
    इस योजना के तहत आर्थिक मदद पाने के लिए आवेदन तो लाखों महिलाओं ने किया, लेकिन पैसे नहीं मिलने की शिकायतें बढ़ती जा रही हैं। महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग की मानें तो इसके कई कारण हो सकते हैं:
    1. गलत खाता नंबर: अगर आवेदन में बैंक खाता नंबर गलत डाला गया है, तो पैसे अटक जाएंगे।
    2. आईएफएससी कोड की गलती: कई लाभार्थियों ने अपने बैंक के आईएफएससी कोड में गड़बड़ी की है, जिससे ट्रांजेक्शन फेल हो जाता है।
    3. बैंक खाता और आधार की लिंकिंग: डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) तभी काम करेगा, जब बैंक खाता आधार से लिंक

    कैसे करें समाधान?
    अगर आप भी उन लाभार्थियों में से हैं, जिनके खाते में पैसे नहीं आ रहे, तो पहले यह जांच करें कि आपका डीबीटी चालू है या नहीं।
    डीबीटी स्टेटस कैसे चेक करें?
    1. NPCI की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।
    2. होम पेज पर कंज्यूमर ऑप्शन पर क्लिक करें।
    3. नए पेज पर भारत आधार सीडिंग इनेबलर (BASE) विकल्प पर क्लिक करें।
    4. यहां आपको मैप्ड स्टेटस पर क्लिक करके आधार नंबर भरना होगा।
    5. डीबीटी स्टेटस चेक करें।
    ध्यान रहे: अगर स्टेटस में ‘इनेबल’ की जगह कुछ और लिखा है, तो आपको बैंक जाकर इसे ठीक करवाना

     

  • कैसे बदलेगी झारखंड की तस्वीर, हेमंत सोरेन ने बताया ?

    रांची :झारखंड में मंत्रिमंडल विस्तार के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपनी नई टीम के साथ शुक्रवार को पहली बैठक की। ये बैठक केवल रस्म अदायगी नहीं थी, बल्कि एक ऐसा कदम था जो यह बताने की कोशिश कर रहा था कि राज्य की राजनीति अब केवल बैठकों और घोषणाओं तक सीमित नहीं रहेगी।

    15 से 16 बिंदुओं की रूपरेखा तैयार की गई है, जिसमें मंत्री अपने विभागों का हाल-चाल लेंगे, योजनाओं की समीक्षा करेंगे, और समस्याओं का जल्द समाधान निकालने का रोडमैप बनाएंगे। मुख्यमंत्री ने मीडिया के सामने स्पष्ट शब्दों में कहा, “यह केवल मीटिंग नहीं, एक्शन का ऐलान है।”

    हर जिले का दौरा, हर समस्या का समाधान
    हेमंत सोरेन ने अपने मंत्रियों को सख्त निर्देश दिए हैं: दो महीने के भीतर सभी जिलों का दौरा करें। जनता के बीच जाएं, उनकी समस्याएं समझें, और फीडबैक मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचाएं। इसके साथ ही विभागीय योजनाओं और कर्मियों के प्रमोशन पर भी नजर रखने को कहा गया है।

    मुख्यमंत्री का कहना है, “झारखंड को बेहतर दिशा में ले जाने के लिए ज़मीन से जुड़े फैसले लेने होंगे।”

    कैबिनेट की बैठक से निकली बड़ी बातें
    समीक्षा और सुधार: सभी मंत्री योजनाओं की गहन समीक्षा करेंगे।
    अछूते क्षेत्र: जनजातीय और पहाड़ी इलाकों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने पर जोर।
    लंबित योजनाओं का निष्पादन: अटकी योजनाओं को पूरा करने के लिए ठोस कदम।
    राजस्व वृद्धि: राजस्व बढ़ाने के लिए नए प्रस्ताव।
    भवन निर्माण की समीक्षा: उपयोग सुनिश्चित करने और फिजूलखर्ची रोकने के निर्देश।
    कर्मचारियों की पदोन्नति: प्रमोशन और पदस्थापना में पारदर्शिता लाने की कवायद।
    जनता से सीधा संवाद: हर मंत्री को अपने विधानसभा क्षेत्र के साथ अन्य जिलों में जनता से संवाद करना होगा।
    क्या ये बदलाव जमीन पर दिखेंगे?
    प्रशासनिक सुधार की यह कवायद कितनी असरदार होगी, यह देखना बाकी है। पर हेमंत सोरेन का ये अंदाज कुछ अलग है।

    क्या वाकई ये बैठक झारखंड की राजनीति को नई दिशा दे पाएगी? क्या ये घोषणाएं सिर्फ सरकारी कागजों पर रह जाएंगी, या सच में झारखंड की तस्वीर और तकदीर बदलेगी?