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  • “मोंगिया का प्लांट नहीं लगने देंगे, तो नहीं लगने देंगे!” — गूंज उठा चतरो गांव

    परवेज़ आलम.

    गिरिडीह : शनिवार को चतरो गांव का उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय मंझलाडीह एक बार फिर जनआवाज़ से गूंज उठा। मौका था मेसर्स मोंगिया पावर प्राइवेट लिमिटेड की प्रस्तावित विस्तारीकरण परियोजना को लेकर आयोजित पर्यावरणीय लोक सुनवाई का। लेकिन यह सुनवाई कुछ ही मिनटों में “लोक” से “विरोध सभा” बन गई।

    “स्पंज फैक्ट्री नहीं लगेगा, नहीं लगेगा…”,
    “प्रदूषण मुक्त गिरिडीह हमारा अधिकार है!”,
    “पर्यावरण के दुश्मनों होश में आओ!”
    — ये नारे पूरे गांव में गूंजते रहे।

    सुनवाई की अध्यक्षता सदर एसडीओ श्रीकांत यशवंत विस्पुते कर रहे थे। उनके साथ झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद रांची के सहायक वैज्ञानिक अधिकारी रामरतन काशी, क्षेत्रीय पदाधिकारी धनबाद के विवेक कुजूर, गादी श्रीरामपुर पंचायत की मुखिया कंचन देवी और मोंगिया पावर लिमिटेड के चेयरमैन गुणवंत सिंह मोंगिया समेत कई अधिकारी मौजूद थे।

    लेकिन जैसे ही एसडीओ ने सुनवाई की औपचारिक शुरुआत की — ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। हाथों में तख्तियां, आंखों में आक्रोश, और स्लोगनों की गूंज ने माहौल को गर्मा दिया। कुछ देर के प्रयास के बाद एसडीओ ने किसी तरह लोगों को शांत कराया, और फिर ग्रामीणों ने बारी-बारी से अपनी बात रखी।

    “हम बीमार हो रहे हैं, फसलें मर रही हैं, पानी खत्म हो रहा है” — ग्रामीणों की पीड़ा

    गांव के विकास राय, विजय राय, सावित्री देवी, धनेश्वर सिंह, शत्रुघ्न राय, अरुण साव, रामेश्वर शर्मा समेत दर्जनों ग्रामीणों ने कहा —

    “कारखाने से निकलने वाला धुआं और राख हमारी ज़िंदगी में जहर घोल रहा है। बच्चे बीमार पैदा हो रहे हैं, खेतों की फसलें सूख रही हैं, और अब तो पीने का पानी भी जहरीला हो गया है।”

    उन्होंने आरोप लगाया कि फैक्ट्री की डीप बोरिंग से भूजल स्तर बहुत नीचे चला गया है। नदियों का पानी प्रदूषित है, जिससे इंसान ही नहीं, मवेशी तक बीमार पड़ रहे हैं।

    कंपनी की दलील पर फिर भड़के लोग.

    झारखंड प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के अधिकारियों ने बताया कि कंपनी स्पंज आयरन उत्पादन क्षमता को 33 हज़ार टन से बढ़ाकर 2.64 लाख टन प्रति वर्ष करना चाहती है। साथ ही 1.98 लाख टन बिलेट उत्पादन, री-हीटिंग फर्नेस, रोलिंग मिल और 25 मेगावाट कैप्टिव पावर प्लांट लगाने की योजना है।

    जैसे ही कंपनी के चेयरमैन गुणवंत सिंह मोंगिया ने परियोजना के फायदे गिनाने शुरू किए — भीड़ एक बार फिर उग्र हो गई।
    लोगों ने एक स्वर में कहा —

    “कुछ नहीं सुनेंगे! प्लांट नहीं लगने देंगे तो नहीं लगने देंगे!”

    विरोध इतना तीव्र था कि अंततः सुनवाई बीच में ही समाप्त करनी पड़ी।

    ग्रामीणों का साफ संदेश — ‘प्रदूषण से विकास नहीं चाहिए’

    इस लोक सुनवाई में गादी श्रीरामपुर, मोहनपुर, मंझलाडीह, चतरो, गंगापुर, अंबाडीह, भोरंडीहा और झलकडीहा समेत आसपास के गांवों से 500 से अधिक ग्रामीण शामिल हुए — जिनमें महिलाओं की संख्या भी काफी रही। सभी की मांग एक ही थी —

    “पहले स्वास्थ्य और स्वच्छ हवा, बाद में उद्योग-धंधा।”

     

  • सीएम हेमंत ने सिरमटोली फ्लाईओवर का किया उद्घाटन , रांची को जाम से मिलेगी राहत

     – रैंप विवाद के कारण यह फ्लाईओवर रहा  सुर्खियों मे.   

    परवेज़ आलम.

    रांची: झारखंड की राजधानी रांची में गुरुवार को एक ऐतिहासिक क्षण तब दर्ज हुआ जब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 2.34 किलोमीटर लंबे सिरमटोली फ्लाईओवर का विधिवत उद्घाटन किया। चार लेन वाले इस आधुनिक फ्लाईओवर के चालू होते ही शहरवासियों को जाम की भीषण समस्या से काफी हद तक राहत मिलने की उम्मीद है।

    मुख्यमंत्री ने इस फ्लाईओवर को आदिवासी नेता बाबा कार्तिक उरांव के नाम समर्पित करते हुए घोषणा की कि अब इसे “कार्तिक उरांव पथ” के नाम से जाना जाएगा। उद्घाटन समारोह मेकॉन गोलचक्कर के निकट वन भवन परिसर में आयोजित किया गया, जहां मुख्यमंत्री ने पर्यावरण दिवस के अवसर पर वृक्षारोपण कर लोगों को पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया.

    क्या है इस फ्लाईओवर की खासियत ?

    • लंबाई: 2.34 किलोमीटर, डिज़ाइन: 132 मीटर लंबा एक्सट्रा-डोज्ड केबल-स्टे ब्रिज और 42 मीटर ऊंचे चार पायलन
    • तकनीकी विशेषताएं:
      • प्रीकास्ट पाइल कैप, प्रीकास्ट गर्डर का प्रयोग
      • माइक्रो पाइलिंग व बोरोपाइलिंग जैसी आधुनिक तकनीक
      • रेलवे की सख्त मंजूरी और हाई कोर्ट केस के बीच सुरक्षित निर्माण
      • शून्य दुर्घटना रिकॉर्ड
    • यातायात समाधान:
      • राजेंद्र चौक और सुजाता चौक को जोड़ने से 40% ट्रैफिक डायवर्जन
      • पहले जहाँ सफर में आधे घंटे लगते थे, अब महज 5 मिनट में पूरा होगा सफर

    पर्यावरण और भावनात्मक संतुलन पर जोर.

    फ्लाईओवर उद्घाटन के साथ ही मुख्यमंत्री ने पर्यावरण दिवस पर जनजागृति का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि “पर्यावरण संकट गंभीर होता जा रहा है, शहरों में स्थिति बेहद चिंताजनक है।” इस अवसर पर उन्होंने एक पेड़ जरूर बचाने की अपील भी की और कहा कि सरकार चाहे जितना कानून बनाए, असली परिवर्तन नागरिकों की जागरूकता से ही आएगा।

     रैंप विवाद और आदिवासी संगठनों का विरोध.

    इस परियोजना के रैंप का एक सिरा सरना धर्मस्थल के समीप होने के कारण बीते कई महीनों से विवाद में रहा। 4 जून को इसी को लेकर झारखंड बंद का आह्वान हुआ था। आदिवासी संगठनों का कहना था कि इससे धार्मिक स्थल की पवित्रता भंग होगी। सरकार ने उनकी भावनाओं का सम्मान करते हुए रैंप की ऊंचाई 124 फीट से घटाकर 84 फीट कर दी, और बैरिकेडिंग के लिए विशेष व्यवस्था की।

    इस संदर्भ में मुख्यमंत्री ने मंच से दो टूक कहा, “किसी की भावना को ठेस पहुंचाना या किसी की पहचान की बलि देना हमारे एजेंडे में नहीं है। सरकार विकास और सामाजिक संवेदनशीलता के बीच संतुलन बनाए रखने को प्रतिबद्ध है।”

    राजनीतिक और प्रशासनिक उपस्थिति.

    फ्लाईओवर उद्घाटन कार्यक्रम में राज्य के कई मंत्री, विधायक और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे, जिनमें नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ,कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की, मंत्री संजय प्रसाद यादव,सहित अन्य प्रतिनिधि व अधिकारी शामिल थे।

    355.76 करोड़ की लागत से बनी शानदार उपलब्धि.

    करीब 355.76 करोड़ रुपए की लागत से तैयार हुआ यह फ्लाईओवर न सिर्फ रांची को यातायात की परेशानी से निजात दिलाएगा, बल्कि झारखंड में इंजीनियरिंग और निर्माण की दिशा में भी एक मील का पत्थर साबित होगा।

    यह फ्लाईओवर मुख्यमंत्री द्वारा 29 अगस्त 2022 को शिलान्यास किया गया था और तीन साल से कम समय में बनकर तैयार हो गया। इससे पहले अक्टूबर 2024 में 2.24 किलोमीटर लंबे कांटाटोली फ्लाईओवर का भी उद्घाटन किया गया था।

    सिरमटोली फ्लाईओवर केवल एक इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना नहीं, बल्कि झारखंड की नई रफ्तार का प्रतीक बन चुका है। यह राज्य सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति, आधुनिक तकनीक और सामाजिक संवेदनशीलता के संतुलन का एक सुंदर उदाहरण है।

    अब यह देखना दिलचस्प होगा कि यह सफलता राज्य के अन्य हिस्सों में भी इसी प्रकार दोहराई जा सकेगी या नहीं।

     

  • AHPI कॉन्क्लेव: आयुष्मान के भुगतान विवाद पर स्वास्थ्य मंत्री ने लिया कड़ा रुख

    By The News Post4u

    राजधानी रांची स्थित रेडिसन ब्लू होटल में मंगलवार को एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स इंडिया (AHPI) की ओर से एक महत्वपूर्ण कॉन्क्लेव आयोजित किया गया, जिसमें झारखंड भर के निजी अस्पतालों के प्रतिनिधि, प्रशासक, और वरिष्ठ चिकित्सकों ने भाग लिया। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PMJAY) के तहत लंबित सरकारी भुगतान और उससे उत्पन्न हो रही समस्याओं पर चर्चा करना था।

    कॉन्क्लेव में बतौर मुख्य अतिथि झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी उपस्थित रहे। उन्होंने पूरे धैर्य के साथ अस्पताल संचालकों की समस्याएं सुनीं और विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि एक दिन के भीतर लंबित सभी बकाया भुगतान की प्रक्रिया पूरी की जाए।

    स्वास्थ्य मंत्री ने मंच से साफ शब्दों में कहा,

    “आयुष्मान कार्ड को एटीएम समझने की गलती न की जाए। कुछ अस्पताल कार्ड से पूरी राशि निकाल लेते हैं और मरीज को इलाज के बिना रिम्स रेफर कर देते हैं, यह बेहद निंदनीय है।“

    उन्होंने चेतावनी दी कि गरीबों के हक पर डाका डालने वाली मानसिकता को सरकार बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेगी। डॉ. अंसारी ने कहा कि इस योजना का उद्देश्य है कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को बिना किसी भेदभाव के गुणवत्तापूर्ण इलाज मिले, और इस मिशन में लापरवाही करने वालों पर कार्रवाई तय है।

    स्वास्थ्य मंत्री ने इस मौके पर यह भी दोहराया कि

    “झारखंड में हेमंत सोरेन सरकार गरीबों की सरकार है। हम उनकी उम्मीदों को टूटने नहीं देंगे।“

    उन्होंने आगे कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार को प्राथमिकता दे रही है और आने वाले समय में झारखंड को स्वास्थ्य सुविधाओं के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करना लक्ष्य है।

    इस सम्मेलन ने न केवल योजनाओं की वर्तमान स्थिति पर रोशनी डाली, बल्कि सरकार और निजी क्षेत्र के बीच समन्वय को बेहतर बनाने की दिशा में एक सकारात्मक पहल भी मानी जा रही है। सभी उपस्थित चिकित्सकों और प्रतिनिधियों ने सरकार के इस रुख का स्वागत किया और आशा जताई कि जल्द ही भुगतान से जुड़ी समस्याओं का समाधान होगा।

  • मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना नया अपडेट:  जल्द मिलेंगे बकाया भुगतान

    परवेज़ आलम.

    रांची : झारखंड सरकार की मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना के तहत जनवरी से अब तक भुगतान से वंचित 20,100 से अधिक लाभुकों के लिए राहत की खबर है। महीनों से अटके उनके बकाया भुगतान का रास्ता अब साफ हो गया है, और संभावना है कि अगले एक-दो दिनों में यह राशि उनके बैंक खातों में भेज दी जाएगी।

    77 हजार लाभुकों की सूची थी होल्ड में.

    गौरतलब है कि मार्च माह में राज्य सरकार ने योजना के अंतर्गत दो लाख से अधिक लाभुकों को 7500-7500 रुपये की राशि एकमुश्त दी थी, जो तीन महीनों (जनवरी से मार्च) का भुगतान था। लेकिन तकनीकी कारणों से करीब 77 हजार लाभुकों का भुगतान अस्थायी रूप से रोक दिया गया था।

    राज्य की सामाजिक सुरक्षा निदेशालय की ओर से लगातार सत्यापन प्रक्रिया चलती रही। अब उस सूची से 20,100 लाभुकों को वैध पाया गया, यानी उनका सत्यापन सफल रहा और उन्हें भुगतान देने की मंजूरी मिल गई है।

    तकनीकी गड़बड़ियों से अटका था भुगतान.

    विभागीय सूत्रों के अनुसार, जिन लाभुकों का भुगतान रोका गया था, उनमें अधिकतर मामलों में आधार संख्या बैंक खाते से लिंक नहीं थी। कई जगह एक ही बैंक खाता कई लाभुकों के नाम से जुड़ा मिला, जो DBT (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) नियमों के विरुद्ध है। कुछ के आधार या खाता संख्या में त्रुटियां थीं। अब इन त्रुटियों को सुधार लिया गया है।

    अब मिल सकता है एकमुश्त चार महीने का भुगतान.

    जिन लाभुकों को दिसंबर में योजना की पहली किस्त (₹2500) मिली थी लेकिन जनवरी से अब तक कोई राशि नहीं मिली, उन्हें इस बार ₹10,000 तक मिलने की संभावना है। यह राशि चार महीनों (जनवरी से अप्रैल) की एकमुश्त भुगतान के रूप में मिल सकती है।

    अप्रैल और मई की राशि भी बकाया, आदेश का इंतजार.

    सामाजिक सुरक्षा विभाग ने बताया कि अप्रैल माह की सम्मान राशि के भुगतान की भी पूरी तैयारी कर ली गई है, लेकिन राज्य मुख्यालय से औपचारिक आदेश अभी तक प्राप्त नहीं हुआ है। इसी वजह से लाभुकों के खाते में अब तक अप्रैल-मई की राशि नहीं भेजी जा सकी है।

    हालांकि विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस योजना में धन की कोई कमी नहीं है। सरकार की ओर से इस मद में 550 करोड़ रुपये जिला प्रशासन को आवंटित किए जा चुके हैं।

    यदि दो दिनों के भीतर भुगतान प्रक्रिया शुरू नहीं होती, तो जून की राशि भी बकाया में जुड़ जाएगी। ऐसे में सरकार को एक साथ तीन महीनों का भुगतान फिर से करना पड़ सकता है, जिससे वित्तीय और प्रशासनिक दबाव और बढ़ सकता है।
    मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना राज्य की महिलाओं के लिए शुरू की गई एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसके तहत पात्र लाभुकों को प्रति माह ₹2500 की राशि दी जाती है, ताकि वे आर्थिक रूप से सशक्त बन सकें।

     

  • झारखंड में कोरोना की वापसी: लाल विजय शाहदेव संक्रमित, स्वास्थ्य मंत्री की जनता से अपील.

    By The News Post4u

    रांची :  झारखंड में एक बार फिर कोरोना वायरस ने दस्तक दे दी है। राज्य में कोविड के नए मामलों के बीच झारखंड फिल्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड के सदस्य और चर्चित फिल्ममेकर लाल विजय शाहदेव के कोरोना संक्रमित पाए जाने की खबर सामने आई है। झारखंड से लेकर मुंबई तक फिल्म इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बनाने वाले शाहदेव ने खुद इस जानकारी को साझा करते हुए सतर्कता की अपील की है।

    फ्लाइट में बिगड़ी तबीयत, रांची पहुंचने पर मिले पॉजिटिव.

    लाल विजय शाहदेव ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर एक पोस्ट करते हुए बताया कि वह हाल ही में मुंबई से रांची लौट रहे थे। इसी दौरान 22 मई को फ्लाइट में ही उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और वे बेहोश हो गए। बाद में जांच कराए जाने पर उनकी कोविड रिपोर्ट पॉजिटिव आई। उन्होंने लिखा, “भारत में अब तक कुल 257 लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। अब मैं भी उनमें शामिल हूं। मैं फिलहाल रांची के एक अस्पताल में भर्ती हूं और पहले से बेहतर महसूस कर रहा हूं।”

    फिल्मी काम रुका, अपील जारी.

    शाहदेव ने यह भी बताया कि उन्हें झारखंड फिल्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के सदस्य होने के नाते कुछ फिल्मों का प्रिव्यू करना था, लेकिन बीमारी के चलते वह यह कार्य नहीं कर सके। उन्होंने अपील की है कि जो भी लोग हाल के दिनों में उनके संपर्क में आए हैं और सिरदर्द, बदन दर्द, बुखार, खांसी या सर्दी जैसे लक्षण महसूस कर रहे हैं, वे तुरंत अपनी कोरोना जांच कराएं।

    स्वास्थ्य विभाग अलर्ट पर, मंत्री ने कहा – “घबराने की जरूरत नहीं”

    इधर देशभर में कोरोना के मामलों में फिर से बढ़ोतरी देखी जा रही है, खासकर दो नए वेरिएंट NB.1.8.1 और LF.7 के सामने आने के बाद। इस बीच बेंगलुरु में एक वरिष्ठ नागरिक की कोविड से मौत की खबर ने चिंता और बढ़ा दी है।

    झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने स्थिति पर संज्ञान लेते हुए राज्यभर के स्वास्थ्य तंत्र को अलर्ट मोड में डाल दिया है। उन्होंने कहा, “यह सामान्य स्थिति है। घबराने की कोई जरूरत नहीं है। हम पूरी तरह सतर्क हैं और सभी तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं।”

    मंत्री अंसारी ने बताया कि राज्य के सभी जिलों में विशेष जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे ताकि लोगों को कोविड से जुड़ी जरूरी जानकारियां दी जा सकें और अफवाहों से बचाया जा सके। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भीड़भाड़ वाले स्थानों पर मास्क पहनना अब भी एक जरूरी एहतियात है, जो अन्य संक्रमणों से भी बचाता है.

    नई गाइडलाइंस का इंतजार, डॉक्टर की अपील – “सतर्क रहें, सुरक्षित रहें”

    स्वास्थ्य मंत्री ने भावुक अपील करते हुए कहा, “एक डॉक्टर के रूप में मेरी आपसे यही गुज़ारिश है – लापरवाही न करें। कोविड को हल्के में न लें। हमारी जिम्मेदारी है कि हम खुद भी सुरक्षित रहें और दूसरों को भी सुरक्षित रखें।”

    उन्होंने यह भी कहा कि झारखंड सरकार केंद्र सरकार द्वारा जारी होने वाली नई गाइडलाइंस का इंतजार कर रही है। जैसे ही दिशा-निर्देश प्राप्त होंगे, राज्य सरकार तुरंत आवश्यक कदम उठाएगी।

    बेंगलुरु में जिस वरिष्ठ नागरिक की कोविड से मृत्यु हुई, उनकी उम्र लगभग 85 वर्ष थी और उन्हें पहले से कई स्वास्थ्य समस्याएं थीं। मंत्री अंसारी ने इस मामले को लेकर लोगों से कहा कि घबराएं नहीं, बल्कि सतर्कता बनाए रखें

    सरकार तैयार, जनता से अपील – “हम साथ हैं, हम तैयार हैं”

    राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि अफवाहों से बचें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें। मंत्री ने आश्वासन दिया, “हम साथ हैं, हम तैयार हैं। कोविड को पहले की तरह इस बार भी हराएंगे।”

  • मइयां सम्मान योजना : किस्तों के इंतजार में लाखों महिलाएं, सवालों के घेरे में प्रशासनिक प्रक्रिया

    परवेज़ आलम.

    झारखंड सरकार की महत्वाकांक्षी योजना मुख्यमंत्री मइयां सम्मान योजना एक बार फिर सुर्खियों में है। अप्रैल और मई माह की किस्त का इंतजार कर रहीं लाभार्थी महिलाएं अब यह जानने को बेताब हैं कि आखिर उनके खातों में सम्मान राशि ट्रांसफर क्यों नहीं हो रही। जबकि महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग ने 13 मई को ही राज्यभर के जिलों को 9,609 करोड़ रुपये आवंटित कर दिए हैं।

    तो फिर पैसा लाभुकों के खाते में क्यों नहीं  ?

    सरकारी गाइडलाइन के अनुसार, हर माह की 15 तारीख तक लाभुकों के बैंक खातों में सम्मान राशि भेज दी जानी चाहिए। ऐसे में स्वाभाविक सवाल उठ रहा है कि जब राशि का आवंटन समय पर हो चुका है, तो ट्रांसफर में देरी क्यों हो रही है ? जानकारी के अनुसार, अधिकांश जिलों ने 15 मई से पहले ही तकनीकी और प्रशासनिक तैयारी पूरी कर ली थी।

    हालांकि विभाग की ओर से निर्देश जारी किया गया है कि राशि केवल उन्हीं महिलाओं को दी जाए, जो इसके लिए पूरी तरह पात्र हैं। इसीलिए आधार सीडिंग और खातों का सत्यापन (cross verification) तेजी से किया जा रहा है। जिला कोषांगों का कहना है कि उन्हें राज्य मुख्यालय से ‘ग्रीन सिग्नल’ मिलने की देर है, उसके बाद राशि तुरंत ट्रांसफर कर दी जाएगी।

    एक साथ दो किस्त या सिर्फ एक ? बनी हुई है अनिश्चितता.

    13 मई को राशि आवंटन के समय यह उम्मीद जताई गई थी कि अप्रैल और मई – दोनों महीनों की संयुक्त किस्त (5,000 रु.) लाभुकों को दी जाएगी। मगर अब सूत्रों के मुताबिक, केवल अप्रैल माह की किस्त दिए जाने की संभावना जताई जा रही है। विभागीय स्तर पर कोई स्पष्ट आदेश नहीं जारी किया गया है, जिससे स्थिति को लेकर भ्रम और भी गहरा गया है।

    सबसे ज्यादा लाभुक कहां   ?

    योजना के आंकड़ों पर नजर डालें तो सबसे अधिक लाभुक गिरिडीह जिले से हैं, इसके बाद रांची, धनबाद, बोकारो और पलामू क्रमशः दूसरे, तीसरे, चौथे और पांचवें स्थान पर हैं। हालांकि विभाग की ओर से यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि इस बार कितने लाभार्थियों को सम्मान राशि दी जाएगी।

    एक अनुमान के अनुसार, करीब 43 लाख महिलाएं इस बार सम्मान राशि पाने वाली हैं। यह संख्या पहले जारी 56.61 लाख लाभुकों की सूची से काफी कम है। जनवरी में जब पहली बार राशि ट्रांसफर की गई थी, तो बड़ी संख्या में अपात्र लाभुकों की पहचान हुई थी। इसके बाद ही लाभुकों के आधार से लिंक खातों की अनिवार्यता तय की गई।

    पहले भी हो चुकी है छंटनी और संशोधन.

    मार्च महीने में एक साथ जनवरी, फरवरी और मार्च की किस्त 37.55 लाख महिलाओं को भेजी गई थी। उसके बाद, जब खातों की जांच-पड़ताल पूरी हुई, तो अप्रैल में 5.52 लाख अतिरिक्त लाभुकों को राशि दी गई थी। इसका मतलब है कि विभाग द्वारा अपात्र लाभुकों की छंटनी और नए पात्र लाभार्थियों को शामिल करने की प्रक्रिया अभी भी जारी है।

    आगे क्या?

    फिलहाल, जिला कोषांगों से लेकर लाभार्थियों तक — सबकी निगाहें राज्य मुख्यालय से मिलने वाले अंतिम निर्देश पर टिकी हैं। लेकिन अब तक यह तय नहीं हो पाया है कि यह ‘ग्रीन सिग्नल’ आखिर कब मिलेगा।

    इस योजना को लेकर सरकार की गंभीरता और पारदर्शिता की मंशा तो स्पष्ट है, लेकिन सूचना के अभाव और स्पष्ट संवाद की कमी ने योजना के क्रियान्वयन को लेकर असमंजस की स्थिति उत्पन्न कर दी है।
    मुख्यमंत्री मइयां सम्मान योजना सामाजिक सुरक्षा की दृष्टि से एक सराहनीय पहल है, लेकिन यदि इसके वितरण में पारदर्शिता और त्वरित प्रक्रिया सुनिश्चित नहीं की गई, तो यह योजना अपनी राजनीतिक और सामाजिक साख को कमजोर कर सकती है। लाभुकों का धैर्य जवाब न दे, इसके लिए ज़रूरी है कि सरकार समय रहते स्थिति स्पष्ट करे और भरोसे का माहौल बनाए रखे।

     

  • झारखंड: आखिर कब रुकेगा भ्रष्टाचार का सिलसिला ? भ्रष्टाचार के इस काले पन्ने पर आईएएस ऑफिसरों की फेरहिस्त बढती जा रही है  

    उत्पाद विभाग के अधिकारियों की चल-अचल संपत्ति का आकलन करने में जुटी है एसीबी की टीम.

    परवेज़ आलम.

    झारखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत एक और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी, विनय कुमार चौबे, अब आरोपों के घेरे में हैं। राज्य गठन के बाद से अब तक भ्रष्टाचार के मामलों में गिरफ्तार आईएएस अधिकारियों की सूची में चौबे का नाम छठे नंबर पर दर्ज हो गया है। खास बात यह है कि इन छह में से चार अधिकारी रांची के उपायुक्त रह चुके हैं, जिससे राजधानी में प्रशासनिक स्तर पर लंबे समय से भ्रष्टाचार के पैठ की पुष्टि होती है।

    भ्रष्टाचार की जद में रांची के पूर्व डीसी

    विनय कुमार चौबे, जो झारखंड राज्य बेवरेजेस कॉरपोरेशन लिमिटेड (JSBCL) के प्रबंध निदेशक और उत्पाद विभाग के प्रधान सचिव रह चुके हैं, को 20 मई को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने गिरफ्तार किया। उनके साथ संयुक्त आयुक्त उत्पाद गजेंद्र सिंह को भी जेल भेजा गया है। दोनों पर आरोप है कि उन्होंने प्लेसमेंट एजेंसियों के चयन में निर्धारित प्रक्रिया का उल्लंघन करते हुए फर्जीवाड़ा किया, जिससे राज्य को तकरीबन 38 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

    जालसाजी की रकम एक अरब तक पहुंचने की आशंका

    ACB की प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि यह घोटाला महज 38 करोड़ रुपये तक सीमित नहीं है। यह आंकड़ा एक अरब रुपये तक पहुंच सकता है। इन अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने नियमों की अनदेखी करते हुए कुछ प्लेसमेंट एजेंसियों को लाभ पहुंचाया। यही नहीं, बाद में जिन एजेंसियों को अनुबंध दिया गया, उनमें भी कथित रूप से गड़बड़ी हुई। संबंधित एजेंसियों की बैंक गारंटी तक जब्त की गई, लेकिन कार्रवाई अधूरी रही।

    कौन-कौन आईएएस घोटाले में गए जेल

    इससे पहले रांची के उपायुक्त रह चुके आईएएस सजल चक्रवर्ती को चारा घोटाले में जेल भेजा गया था। फिर सीबीआई ने दवा घोटाले में डॉ. प्रदीप कुमार को, और ईडी ने जमीन घोटाले में छवि रंजन को हिरासत में लिया। इसके अतिरिक्त पूजा सिंघल और सियाराम प्रसाद सिन्हा भी भ्रष्टाचार मामलों में जेल जा चुके हैं और वर्तमान में जमानत पर हैं।

    चारा घोटाले से जुड़े मामलों में अब तक पांच आईएएस – सजल चक्रवर्ती, महेश प्रसाद, के. अरुणगम, फूल चंद्र सिंह और बेक जुलियस – को दोषी ठहराया जा चुका है।

    एसीबी की सक्रियता, सीबीआई-ईडी को भी मिलेगा लाभ

    ACB की यह कार्रवाई अब केंद्रीय जांच एजेंसियों – CBI और ED – के लिए भी महत्वपूर्ण सबूत उपलब्ध करा सकती है। ED जल्दी ही इस प्राथमिकी को टेकओवर कर नया ECIR दर्ज कर सकती है। वहीं CBI पहले से ही भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत इस पूरे मामले की जांच कर रही है।

    नेताओं की मांग: अब हो सीबीआई जांच

    भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने इस मामले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि उन्होंने अप्रैल 2022 में ही इस घोटाले की आशंका जाहिर कर राज्य सरकार को पत्र लिखा था। मरांडी का आरोप है कि यह घोटाला छत्तीसगढ़ के शराब घोटाले की तर्ज पर, योजनाबद्ध तरीके से किया गया है। उन्होंने एसीबी की कार्रवाई को अपर्याप्त बताते हुए सीबीआई जांच की मांग की है।

    मरांडी ने सवाल उठाया, “क्या केवल एसीबी की जांच से घोटाले की पूरी सच्चाई सामने आ सकेगी? ऐसा प्रतीत होता है कि बड़ी मछलियों को बचाने के लिए कुछ लोगों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है।”

    आरोपियों की संपत्ति की जांच शुरू

    ACB अब गिरफ्तार अधिकारियों की चल-अचल संपत्तियों और बैंक खातों की जांच में जुट गई है। पिछले दस वर्षों के दौरान उनकी आय-व्यय की समीक्षा की जा रही है। उनके पैन कार्ड, बैंक स्टेटमेंट और घोषित संपत्तियों की भी पड़ताल की जा रही है।

    स्वास्थ्य जांच में सामने आई हाई बीपी की समस्या

    गिरफ्तारी के बाद ACB कार्यालय में विनय कुमार चौबे और गजेंद्र सिंह की स्वास्थ्य जांच की गई। दोनों की स्थिति सामान्य पाई गई, हालांकि चौबे का ब्लड प्रेशर थोड़ा बढ़ा हुआ मिला। डॉक्टरों ने उन्हें नमक कम करने की सलाह दी है।

    आखिर कब रुकेगा भ्रष्टाचार का सिलसिला?

    झारखंड में लगातार सामने आ रहे घोटाले राज्य प्रशासन की पारदर्शिता और जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा करते हैं। रांची जैसे प्रमुख जिले से बार-बार अधिकारियों की गिरफ्तारी इस बात की ओर संकेत करती है कि भ्रष्टाचार यहां संस्थागत रूप ले चुका है। ऐसे में सवाल यह है कि क्या केवल गिरफ्तारी से हालात सुधरेंगे या अब वक्त आ गया है कि राज्य सरकार और जांच एजेंसियां मिलकर बड़े सुधार की ओर कदम बढ़ाएं?

     

  • गिरिडीह : 339 चौकीदारों को मिला नियुक्ति पत्र, युवाओं में खुशी की लहर

    By the news post4u

    गिरिडीह: गिरिडीह नगर भवन में आज आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में जिले के रिक्त चौकीदार पदों पर चयनित 339 अभ्यर्थियों को विधिवत रूप से नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए। इस मौके पर युवाओं के चेहरों पर खुशी की चमक साफ नजर आई। राज्य सरकार की इस पहल को युवाओं ने ‘सपनों की पहली सीढ़ी’ बताया और पूरे उत्साह के साथ सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया।

    दीप प्रज्वलन से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ.

    कार्यक्रम की शुरुआत संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन कर की गई। कार्यक्रम मे मुख्य अतिथि सुदिव्य कुमार सोनू  मंत्री – नगर एवं आवास विभाग, उच्च तकनीकी एवं शिक्षा विभाग, पर्यटन तथा खेलकूद विभाग, झारखंड सरकार के साथ बगोदर के विधायक नागेंद्र महतो , जमुआ विधायक मंजु कुमारी एवं डुमरी के विधायक जय राम महतो की गरिमामय उपस्थिति थी  । इस अवसर पर उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक,उप विकास आयुक्त, सदर अनुमंडल पदाधिकारी, जिला शिक्षा पदाधिकारी, जनसंपर्क पदाधिकारी सहित कई प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे ।

    विस्तृत चयन प्रक्रिया से होकर गुजरे अभ्यर्थी.

    कार्यक्रम में जानकारी दी गई कि गिरिडीह जिले में चौकीदार के कुल 389 पद स्वीकृत हैं। इन पदों के लिए कुल 12,854 आवेदन प्राप्त हुए थे। लिखित परीक्षा में 8126 अभ्यर्थी शामिल हुए, जिनमें से 1664 को सफल घोषित किया गया। इसके बाद हुई शारीरिक दक्षता परीक्षा में 385 अभ्यर्थी सफल हुए। सभी स्तरों पर मूल्यांकन और जिला स्तरीय चयन समिति की अनुशंसा के बाद 339 योग्य अभ्यर्थियों को नियुक्त किया गया।

    इन 339 चयनित अभ्यर्थियों में 42 महिलाएं और 297 पुरुष शामिल हैं। वर्गानुसार इनकी संख्या इस प्रकार रही –

    • अनारक्षित कोटि – 210
    • अनुसूचित जनजाति – 59
    • आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग – 29
    • अत्यंत पिछड़ा वर्ग – 25
    • पिछड़ा वर्ग – 16

    युवाओं के चेहरों पर खुशी, सरकार को जताया आभार.

    नियुक्ति पत्र मिलने के बाद युवाओं में जबरदस्त उत्साह देखा गया। कई चयनित अभ्यर्थियों ने कहा कि यह नौकरी उनके जीवन को दिशा देगी और परिवार को आर्थिक संबल प्रदान करेगी। एक अभ्यर्थी ने कहा, “हमने मेहनत की, भरोसा रखा और सरकार ने हमारे सपने पूरे किए। आज एक नई शुरुआत हो रही है।”

    मंत्री ने दी शुभकामनाएं, सेवा भाव से कार्य करने की अपील.

    नवनियुक्त चौकीदारों को नियुक्ति पत्र सौंपते हुए झारखंड सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू  ने कहा कि यह सिर्फ एक नौकरी नहीं, बल्कि समाज और शासन के प्रति जिम्मेदारी का अवसर है। उन्होंने युवाओं से कहा, “ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और सेवा भाव से कार्य करें। आपकी भूमिका गांव-गांव में प्रशासन की आंख और कान की तरह होगी। सरकार जमीनी स्तर पर प्रशासन को सशक्त करने के लिए काम कर रही है।”

    उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार प्रयासरत है। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में विभिन्न विभागों में और भी नियुक्तियां की जाएंगी, जिससे युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। मंत्री ने ग्रामीण क्षेत्रों के विकास पर जोर देते हुए कहा कि सरकार का उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना है।

    महिलाओं, युवाओं और गरीबों के लिए सरकार की प्रतिबद्धता.

    मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि सरकार महिलाओं, युवाओं और गरीब वर्गों को सशक्त बनाने के लिए कई योजनाएं चला रही है। उन्होंने सभी अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों को नियमित स्कूल भेजें, क्योंकि शिक्षा ही समाज में वास्तविक परिवर्तन का आधार है।

    सभी वर्गों के लिए समर्पित सरकार – मंत्री

    उन्होंने कहा, “राज्य सरकार सभी वर्गों के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। ग्राम पंचायत से लेकर प्रखंड स्तर तक बुनियादी सुविधाओं को मजबूत किया जा रहा है। युवाओं से अपील है कि वे राज्य और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझें और ईमानदारी से कार्य करें।”
    गिरिडीह में आयोजित यह नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम न सिर्फ प्रशासनिक प्रक्रिया की सफलता का प्रतीक था, बल्कि यह युवाओं के आत्मविश्वास और राज्य सरकार की प्रतिबद्धता का भी सशक्त उदाहरण बना। यह कार्यक्रम यह दर्शाता है कि रोजगार सृजन के क्षेत्र में सरकार का   ठोस प्रयास जमीनी स्तर पर असर दिखा रह है ।

  • 10 मई को रांची में होगी ईस्टर्न ज़ोनल काउंसिल की अहम बैठक

    गृह मंत्री अमित शाह और कई मुख्यमंत्री होंगे शामिल, सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद
    परवेज़ आलम.
    रांची। झारखंड की राजधानी रांची एक बार फिर एक अहम राष्ट्रीय बैठक की मेज़बानी करने जा रही है। 10 मई को यहां ईस्टर्न ज़ोनल काउंसिल (पूर्वी क्षेत्र परिषद) की 27वीं बैठक आयोजित की जाएगी, जिसकी अध्यक्षता स्वयं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह करेंगे। इस बैठक में बिहार, ओडिशा, झारखंड और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री समेत चारों राज्यों के मुख्य सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भाग लेंगे।
    अहम नीतिगत मसलों पर होगा विचार-विमर्श.
    इस बैठक में चारों राज्यों के बीच सीमा विवाद, आंतरिक सुरक्षा, अंतरराज्यीय परिवहन, सामाजिक कल्याण योजनाएं, और आर्थिक समन्वय जैसे विषयों पर गहन चर्चा होगी। इसके साथ ही बैठक में क्षेत्रीय समस्याओं के समाधान, विकास परियोजनाओं की प्रगति और प्रशासनिक तालमेल पर भी विचार किया जाएगा।
    गौरतलब है कि ईस्टर्न ज़ोनल काउंसिल का गठन राज्यों के बीच बेहतर संवाद, समन्वय और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए किया गया है। यह मंच विकास कार्यों को गति देने और नीतिगत अड़चनों को सुलझाने का एक प्रभावशाली माध्यम बन चुका है।
    रांची पुलिस अलर्ट मोड में, डीआईजी की अगुवाई में सुरक्षा तैयारियां.
    बैठक को देखते हुए रांची पुलिस प्रशासन पूरी तरह अलर्ट पर है। गुरुवार को रांची के डीआईजी सह एसएसपी चंदन कुमार सिन्हा ने शहर के सभी महत्वपूर्ण पुलिस पदाधिकारियों — सिटी एसपी, ग्रामीण एसपी, ट्रैफिक एसपी, सभी डीएसपी और थानेदारों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की।
    इस बैठक में वीआईपी सुरक्षा, रूट प्लानिंग, ट्रैफिक कंट्रोल, और मीटिंग वेन्यू व होटल्स की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विस्तृत निर्देश दिए गए।
    डीआईजी सिन्हा ने कहा,
    “सभी संबंधित विभागों को निर्देश दे दिए गए हैं कि सुरक्षा व्यवस्था में कोई चूक न हो। हर स्तर पर निगरानी रखी जाएगी और सुरक्षा के लिए बहुस्तरीय योजना बनाई गई है।”
    रूट मैप और ट्रैफिक व्यवस्था पर विशेष फोकस.
    गृह मंत्री और अन्य वीआईपी के आगमन के दौरान यातायात को सुगम और सुरक्षित बनाए रखने के लिए विशेष रूट प्लान तैयार किया गया है। पुलिस टीम यह सुनिश्चित करेगी कि सुरक्षा के साथ-साथ आम जनता को भी अनावश्यक परेशानी न हो।
    रांची में इस समय सुरक्षा अभ्यास (Security Drill) भी शुरू हो चुका है, जिसमें बम स्क्वॉड, डॉग स्क्वॉड और स्पेशल ब्रांच की सक्रिय भूमिका रहेगी।
    झारखंड के लिए बड़ी जिम्मेदारी और अवसर.
    केंद्र और राज्यों के शीर्ष नेतृत्व के इस महत्त्वपूर्ण जमावड़े से न केवल नीति-निर्माण में झारखंड की भूमिका सुदृढ़ होगी, बल्कि राज्य को राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से एक सशक्त मंच भी मिलेगा। स्थानीय प्रशासन के लिए यह आयोजन एक चुनौतीपूर्ण परीक्षा भी है, जिसमें सुरक्षा, प्रबंधन और समन्वय की क्षमता को परखा जाएगा।

    10 मई को रांची राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में रहेगा। यह बैठक जहां क्षेत्रीय विकास को नई दिशा दे सकती है, वहीं इसके सफल आयोजन से झारखंड की प्रशासनिक और राजनीतिक साख को भी बल मिलेगा।

  • झारखंड में आतंकी नेटवर्क का खुलासा – रांची से लेकर धनबाद तक फैला था जाल !

    परवेज़ आलम.  

    धनबाद/रांची।  झारखंड आतंकवाद निरोधक दस्ता [एटीएस] ने राज्य में आतंक के खिलाफ बड़ी कामयाबी हासिल की है। वासेपुर से गिरफ्तार की गई महिला संदिग्ध शबनम परवीन न केवल अलकायदा, आईएसआईएस और हिज्ब-उत-तहरीर जैसे अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठनों से जुड़ी रही, बल्कि इन संगठनों के झारखंड मॉड्यूल को सक्रिय रूप से संचालित करने में भी अहम भूमिका निभा रही थी।

    जांच में यह साफ हुआ है कि शबनम युवाओं को कट्टरपंथी विचारधारा के जरिए बहला-फुसलाकर आतंकी संगठनों में भर्ती करने का काम कर रही थी। खासकर 18 से 25 वर्ष की आयु के मुस्लिम युवाओं को वह धर्म के नाम पर गुमराह करती थी।

    चार आधार कार्ड, चार अलग उम्रें – असली पहचान पर सस्पेंस.

    एटीएस की छापेमारी के दौरान शबनम के पास से चार अलग-अलग आधार कार्ड बरामद हुए हैं, जिनमें उसकी उम्र अलग-अलग — 20, 25, 28 और 32 वर्ष दर्ज है। इससे स्पष्ट है कि वह पहचान छिपाने और फर्जी दस्तावेज तैयार करने के नेटवर्क से भी जुड़ी हुई थी।

    शबनम धनबाद के गोविंदपुर की रहने वाली बताई जा रही है, लेकिन उसके मूल घर के बारे में पुलिस को कोई पुख्ता जानकारी नहीं मिली है। उसने आयान जावेद नामक युवक से प्रेम विवाह किया था, जो खुद भी एक संदिग्ध आतंकी है। लेकिन शादी के बाद वह जावेद के साथ अमन सोसायटी के घर में न रहकर शमशेर नगर में किराए के मकान में रह रही थी। यहीं से वह साइबर कैफे के माध्यम से युवाओं को प्रभावित करने का कार्य करती थी।

    झारखंड में आतंकी नेटवर्क का खुलासा – रांची से लेकर धनबाद तक फैला था जाल

    शबनम अकेली नहीं थी। गौरतलब है कि एटीएस की ओर से 26 अप्रैल को धनबाद में छापेमारी कर प्रतिबंध आतंकी संगठन के आतंकी शबनम के साथ गुलफाम हसन, अयान जावेद, और मोहम्मद शहजाद आलम  को गिरफ्तार किया था। इसके बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था।

    इनके पास से दो पिस्तौल, 12 जिंदा कारतूस, आतंकी संगठनों से जुड़े कई दस्तावेज, किताबें, और मोबाइल-लैपटॉप बरामद किए गए हैं।

    हथियारों का लेन देन ये लोग करते ही थे, लेकिन मूल काम युवाओं को आतंकी संगठनों से जोड़ना था। इसी माड्यूल पर रांची से गिरफ्तार हुआ डॉ. इश्तियाक भी काम करता रहा है।

    झारखंड एटीएस की टीम बुधवार को धनबाद के वासेपुर से गिरफ्तार आतंकी संगठन हिज्ब उत तहरीर से जुड़े महिला समेत चार संदिग्धों को तीन दिन की रिमांड पर ली थी । एटीएस की टीम ने न्यायालय में चारों संदिग्धों को रिमांड पर लेने के लिए आवेदन दिया था। आवेदन पर सुनवाई के बाद न्यायालय ने तीन दिन तक रिमांड दी है। अब इनसे एटीएस की टीम तीन दिन तक लगातार पूछताछ करेगी और उनके इरादों के साथ ही उनके संबंधों को की भी जांच की जाएगी। इसके अलावा एटीएस की टीम चारों संदिग्धों के विदेशी संबंधों की भी जांच करेगी।

    रिमांड मिलने के बाद टीम बुधवार को चारों संदिग्धों को बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा से एटीएस की टीम अपने साथ ले गई। इसके तुरंत बाद एटीएस ने चारों संदिग्धों से एटीएस ने पूछताछ शुरू कर दी है। मिली जानकारी के अनुसार, शुक्रवार शाम तक एटीएस उनसे पूछताछ करेगी।

    अम्मार यासर की गिरफ्तारी – इंडियन मुजाहिदीन से लेकर हिज्ब-उत-तहरीर तक का कनेक्शन.

    झारखंड एटीएस ने अम्मार यासर नामक एक संदिग्ध को भी गिरफ्तार किया है, जो पहले इंडियन मुजाहिदीन से जुड़ा रहा है। वर्ष 2014 में जोधपुर से गिरफ्तार हुआ था । यासर, हाल ही में 2024 में जेल से रिहा होने के बाद फिर से आतंकी गतिविधियों में सक्रिय हो गया था और हिज्ब-उत-तहरीर के झारखंड मॉड्यूल का हिस्सा बन गया। अयान जावेद से पूछताछ में अम्मार यासर का नाम सामने आया, जिसके आधार पर उसे गिरफ्तार किया गया। झारखंड के डीजीपी अनुराग गुप्ता ने इसकी गिरफ्तारी की पुष्टि की है

    क्या है ‘हिज्ब-उत-तहरीर‘?

    1953 में यरुशलम में गठित यह आतंकी संगठन एक इस्लामिक खिलाफत स्थापित करने के उद्देश्य से काम करता है। भारत में यह संगठन 2010 में प्रतिबंधित कर दिया गया था। इसका मकसद लोकतांत्रिक सरकारों को गिराकर कट्टरपंथी इस्लामिक शासन लागू करना है।

    एटीएस की सतर्कता से टला खतरा, जांच अब विदेशी लिंक पर. 

    झारखंड एटीएस की सघन कार्रवाई से एक बड़े आतंकी नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। एटीएस अब इन सभी संदिग्धों के विदेशी कनेक्शन की पड़ताल में जुटी है। शुरुआती पूछताछ में कुछ अहम जानकारियां सामने आई हैं, लेकिन यह जांच अभी जारी है।
    झारखंड जैसे शांत राज्य में आतंक की ये घुसपैठ बेहद चिंताजनक है। युवाओं को धर्म के नाम पर भटकाना, फर्जी दस्तावेज बनाना और विदेशी संगठनों से जुड़ना — ये सारी गतिविधियां अब जांच एजेंसियों के रडार पर हैं। सवाल ये है कि क्या ये सिर्फ एक मॉड्यूल था? या फिर एक बड़ा नेटवर्क धीरे-धीरे सामने आने वाला है?