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  • झारखंड और असम: राजनीति के चाय बागानों में नई बयार!

    रांची से पवन हवाओं के संग आई एक नई खबर, झारखंड की मिट्टी से लेकर असम के चाय बागानों तक सियासी सुगंध फैल रही है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपनी नई पारी की पहली ही कैबिनेट बैठक में चाय बागानों में काम करने वाले आदिवासियों की स्थिति का अध्ययन करने के लिए असम में एक सर्वदलीय टीम भेजने का ऐलान किया। ये फैसला जितना सरल दिखता है, उतना ही गहरा संदेश देता है।

    असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने इस पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा है कि झारखंड के कुछ इलाकों का अध्ययन करने के लिए उनकी सरकार भी दो प्रतिनिधिमंडल भेजेगी। “हम देखेंगे कि आखिर झारखंड में ऐसी कौन-सी ‘विशेष चीजें’ हैं जो ध्यान खींच रही हैं।”

    पिछले विधानसभा चुनावों के दौरान झामुमो और भाजपा के बीच घुसपैठ और आदिवासियों की स्थिति पर तीखे आरोप-प्रत्यारोप देखने को मिले। अब लगता है कि इस राजनीतिक मंथन का ‘अध्ययन यात्रा’ के रूप में नया अध्याय शुरू हो गया है।

    हिमंता बिस्वा सरमा का यह बयान भी दिलचस्प है कि उनकी सरकार 5 दिसंबर को होने वाली कैबिनेट बैठक में इस पर और निर्णय लेगी। लेकिन सवाल उठता है कि यह अध्ययन असल में ज़मीन पर आदिवासियों की स्थिति को बेहतर करने की कोशिश है, या फिर राजनीति के चाय बागानों में सियासी चाय की मिठास बढ़ाने की कवायद?

    हेमंत सोरेन की यह पहल उनके नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री के रूप में पहले कदमों को निर्णायक बनाने की कोशिश है। लेकिन हिमंता बिस्वा सरमा का पलटवार संकेत देता है कि सियासत की इस चाय में खौलने वाले मुद्दे सिर्फ झारखंड या असम तक सीमित नहीं रहने वाले।

    आखिरकार, राजनीति भी तो उसी चाय की तरह है, जिसकी मिठास उसकी कड़वाहट के सही संतुलन से तय होती है। सवाल ये है कि इस बार इस चाय के प्याले में किसकी चीनी कम या ज्यादा पड़ेगी?

  • माले को मंत्री पद का प्रस्ताव नहीं, सरकार को समर्थन जारी रहेगा: दीपंकर भट्टाचार्य

    रांची। भाकपा (माले) के राष्ट्रीय महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने झारखंड में सरकार से मंत्री पद को लेकर कोई प्रस्ताव मिलने की बात से इनकार किया है। उन्होंने कहा, “हमारे पास सदन में सिर्फ दो विधायक हैं। ऐसे में हम सरकार पर दबाव बनाने के बजाय हर कदम पर उसका समर्थन करेंगे।”

    सात गारंटी पर फोकस और समन्वय समिति की मांग
    भट्टाचार्य ने मीडिया से बातचीत में कहा कि इंडिया ब्लॉक ने जनता से सात गारंटी का वादा किया है, जिसे पूरा करने के लिए एक समन्वय समिति बननी चाहिए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर चुनाव में भाकपा (माले) को अधिक सीटें दी जातीं, तो नतीजे और बेहतर हो सकते थे।

    झारखंड का जनादेश देश के लिए संदेश
    दीपंकर भट्टाचार्य ने झारखंड के जनादेश को पूरे देश के लिए प्रेरणा बताया। उन्होंने कहा, “चुनाव के दौरान मैंने ऐसा जहरीला माहौल कभी नहीं देखा था, लेकिन झारखंड की जनता ने एकजुट होकर ऐसी ताकतों को करारा जवाब दिया। केंद्र सरकार को इस जनादेश का सम्मान करना चाहिए और झारखंड को अस्थिर करने की कोशिशें बंद करनी चाहिए।”

    बगोदर की हार का दुख, लेकिन संघर्ष जारी
    भट्टाचार्य ने स्वीकार किया कि धनबाद की दो सीटें जीतने के बावजूद उनकी पार्टी बगोदर में हार गई। उन्होंने कहा, “हमारे दो विधायक सदन के अंदर और बाहर झारखंड की जनता के मुद्दे उठाते रहेंगे।”

    भाजपा की विचारधारा को हराना प्राथमिकता
    भट्टाचार्य ने जोर देकर कहा कि उनकी पार्टी भाजपा की विचारधारा को हराने पर फोकस करेगी और झारखंड में पार्टी के संगठन का विस्तार किया जाएगा। उन्होंने बताया कि 2025 में महेंद्र सिंह की 20वीं बरसी और झारखंड के 25वें साल को एक बड़े अवसर के रूप में लिया जाएगा।

    संविधान के आदर्शों को लेकर देशव्यापी मार्च
    26 नवंबर से 26 जनवरी तक भाकपा (माले) संविधान के आदर्शों को लेकर देशभर में मार्च आयोजित करेगी। भट्टाचार्य ने कहा, “देश में सांप्रदायिक ताकतों के जरिए लोकतंत्र को पीछे ले जाने की कोशिश हो रही है। लोगों को ऐसे झांसे में नहीं आना चाहिए।”

    अडानी पर निशाना, झारखंड में ‘अडानी राज’ का आरोप
    भट्टाचार्य ने भाजपा पर झारखंड में अडानी राज थोपने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “अमेरिका में अडानी समूह के खिलाफ कार्रवाई हो रही है, लेकिन भारत में कोई कदम नहीं उठाया जा रहा। इसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है। बिजली के दाम बढ़ रहे हैं और अडानी समूह के शेयर गिरने से छोटे निवेशक सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।”           भट्टाचार्य ने कहा कि उनकी पार्टी झारखंड में सक्रिय भूमिका निभाएगी और राज्य की जनता के लिए संघर्ष करती रहेगी। उन्होंने झारखंड को देश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण संदेश देने वाला राज्य करार दिया।

  • हेमंत सोरेन के कैबिनेट विस्तार की डेट तय, नए चेहरों को मिलेगी जगह !

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट ……
    झारखंड में हेमंत सोरेन की नई सरकार के गठन के बाद कैबिनेट विस्तार को लेकर अटकलें खत्म होती दिख रही हैं। खबरों के मुताबिक, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का कैबिनेट शीतकालीन सत्र शुरू होने से पहले तैयार हो जाएगा। कांग्रेस कोटे से मंत्रियों के नाम तय करने का अंतिम निर्णय केंद्रीय नेतृत्व करेगा।

    मंगलवार तक फाइनल होंगे नाम । 
    सूत्रों के अनुसार, मंगलवार तक मंत्रियों के नाम फाइनल हो सकते हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इस बार नए चेहरों को तरजीह देने के मूड में हैं। ऐसे में कुछ अनुभवी विधायकों के साथ नए चेहरे मंत्रिमंडल में शामिल किए जा सकते हैं। राजद से केवल एक मंत्री बनाया जाएगा, जिसके नाम पर अंतिम निर्णय लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव करेंगे।

    महिला मंत्री के नाम पर चर्चा । 
    कांग्रेस कोटे से दीपिका पांडेय सिंह का नाम महिला मंत्री के रूप में सबसे आगे चल रहा है। वहीं झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) से लुइस मरांडी का नाम भी चर्चा में है। अनुसूचित जाति के मंत्री के लिए कांग्रेस से राधाकृष्ण किशोर और सुरेश बैठा, जबकि राजद से सुरेश पासवान के नाम की संभावनाएं जताई जा रही हैं।

    कांग्रेस नेताओं की दिल्ली दौड़ । 
    शनिवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात के बाद कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश नई दिल्ली रवाना हो गए। वहां वे केंद्रीय नेतृत्व से मिलकर कांग्रेस कोटे के मंत्रियों के नाम फाइनल करेंगे। इस दौरान केंद्रीय नेताओं के साथ मुलाकात में अंतिम नामों पर मुहर लगाई जाएगी।

    शीतकालीन सत्र से पहले होगा विस्तार । 
    कैबिनेट विस्तार शीतकालीन सत्र से पहले किया जाएगा। सभी नए मंत्रियों को एक साथ शपथ दिलाई जाएगी। मुख्यमंत्री का मानना है कि नई कैबिनेट झारखंड के विकास को नई दिशा देगी।

    जनता का अपार समर्थन, विकास प्राथमिकता । 
    कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने कहा, “झारखंड की जनता ने महागठबंधन को भारी बहुमत देकर यह साफ कर दिया है कि यहां विकास राजनीति की प्राथमिकता है। बांटने की राजनीति का समय अब खत्म हो चुका है।”

    सीएम हाउस में बधाई का दौर । 
    गुरुवार को चौथी बार मुख्यमंत्री बने हेमंत सोरेन को शनिवार को प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं ने बधाई दी। कांग्रेस के रवींद्र सिंह, जलेश्वर महतो, सतीश पाल मुंजनी और रियाज अहमद भी इस मौके पर मौजूद रहे।

    क्या झारखंड में दिखेगा नई राजनीति का चेहरा !
    कैबिनेट विस्तार को लेकर चर्चाएं तेज हैं। नए चेहरे और गठबंधन के संतुलन को साधने की कवायद के बीच यह देखना दिलचस्प होगा कि हेमंत सोरेन की नई टीम झारखंड को किस तरह आगे बढ़ाती है। विकास पर जनता का भरोसा बनाए रखना इस कैबिनेट की सबसे बड़ी चुनौती होगी।

  • झारखंड : बालिका गृह में यौन शोषण का शर्मनाक मामला, संचालक और कर्मी गिरफ्तार

    RANCHI: झारखंड के पलामू जिले के सुदना इलाके में स्थित एक बालिका गृह में यौन शोषण का गंभीर मामला सामने आया है। दो बच्चियों ने बालिका गृह के संचालक और एक महिला कर्मी पर यौन शोषण का आरोप लगाया है। इस मामले का खुलासा तब हुआ, जब शुक्रवार को कुछ मानवाधिकार कार्यकर्ता बालिका गृह का दौरा करने पहुंचे।

    आपबीती सुनाते हुए रो पड़ीं बच्चियां
    28 बच्चियों वाले इस बालिका गृह में रह रहीं दो लड़कियों ने मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के सामने अपनी आपबीती सुनाई। उन्होंने बताया कि संचालक ने उनके साथ घिनौनी हरकत की और महिला कर्मी ने इस गुनाह में उसका साथ दिया। एक बच्ची ने कहा कि यह घटना दीपावली और छठ के दौरान हुई, जब उन्हें संचालक के घर ले जाया गया। दूसरी बच्ची ने भी ऐसे ही शोषण के प्रयास का खुलासा किया।

    पुलिस ने की त्वरित कार्रवाई
    इस मामले में पलामू की एसपी रीष्मा रमेशन ने जानकारी देते हुए कहा कि बच्चियों के बयान और मेडिकल जांच के आधार पर आरोपियों के खिलाफ पॉक्सो एक्ट समेत गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। फिलहाल, दोनों आरोपियों—बालिका गृह के संचालक और महिला कर्मी—को गिरफ्तार कर लिया गया है।

    सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट की गईं बच्चियां
    घटना के बाद प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए सभी 28 बच्चियों को बालिका गृह से निकालकर सखी वन स्टॉप सेंटर में स्थानांतरित कर दिया है। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि बच्चियों को एक सुरक्षित माहौल में रखा जाए।

    मुजफ्फरपुर कांड की यादें ताजा
    यह मामला बिहार के कुख्यात मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड की याद दिलाता है, जिसने पूरे देश को हिला कर रख दिया था। मानवाधिकार कार्यकर्ता संध्या सिन्हा ने इस घटना को बाल सुरक्षा व्यवस्था की विफलता करार दिया। उन्होंने कहा, “यह घटना बताती है कि बालिका गृहों की निगरानी और जांच की प्रक्रिया में अब भी गंभीर खामियां हैं।”

    प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती
    इस घटना ने न केवल प्रशासन की सतर्कता पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि बाल सुरक्षा व्यवस्था की कमजोरी को भी उजागर कर दिया है। यह जरूरी है कि ऐसे संवेदनशील संस्थानों की नियमित जांच की जाए और दोषियों को कड़ी सजा मिले, ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

    क्या बाल सुरक्षा अब भी प्राथमिकता नहीं?
    पलामू का यह मामला एक बार फिर हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि आखिर बच्चों की सुरक्षा के नाम पर चलने वाले इन संस्थानों की जवाबदेही कब तय होगी। दोषियों पर कार्रवाई तो हो रही है, लेकिन यह तब क्यों नहीं रोका गया, जब ये बच्चियां पहली बार पीड़ित हुईं?

     

  • झारखंड में विधान सभा सत्र का ऐलान : नये अध्यक्ष का चुनाव

    RANCHI: झारखंड में हेमंत सोरेन सरकार की पहली परीक्षा तय हो गई है। 9 दिसंबर से शुरू हो रहे चार दिवसीय विधानसभा सत्र ने सियासी हलचल को गरमा दिया है।

    पहला दिन: नव निर्वाचित विधायकों का शपथ ग्रहण।
    दूसरा दिन:चुना जाएगा।
    तीसरा दिन: राज्यपाल का अभिभाषण, और फिर सरकार पेश करेगी वित्तीय वर्ष 2024-25 का दूसरा अनुपूरक बजट।
    आखिरी दिन: राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा और बजट पर बहस।

    अब सवाल यह है कि चार दिन में हेमंत सरकार कितना कुछ साध पाएगी?

    बजट से बड़ी उम्मीदें .
    इस सत्र में सरकार न सिर्फ अनुपूरक बजट पेश करेगी, बल्कि मंईयां सम्मान योजना समेत कई जन-कल्याणकारी योजनाओं के लिए अनुदान की मांग भी रखेगी। लेकिन क्या सिर्फ योजनाओं का ऐलान, ज़मीन पर क्रियान्वयन के भरोसे में तब्दील हो पाएगा?

    कैबिनेट विस्तार की अटकलें जारी
    इधर, हेमंत सोरेन सरकार के विस्तार को लेकर भी चर्चा तेज़ है। मुख्यमंत्री दिल्ली में कांग्रेस के आला नेताओं से मुलाकात कर चुके हैं, और कैबिनेट बंटवारे पर घटक दलों से बातचीत जारी है।

    राज्यपाल की सहमति और विपक्ष का सवाल
    राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने 9 से 12 दिसंबर तक सत्र की अधिसूचना जारी कर दी है। लेकिन विपक्ष इस छोटे सत्र को लेकर सवाल उठा सकता है। चार दिन का सत्र—क्या यह जनता की समस्याओं को उठाने और समाधान खोजने के लिए पर्याप्त होगा?

    तो, सत्र शुरू होने वाला है। अब देखना यह है कि यह सत्र जनता के मुद्दों को लेकर कितनी गंभीरता दिखाता है या फिर यह भी महज़ औपचारिकता बनकर रह जाएगा।

  • झारखंड में अगले 3 महीनों में 28,368 पदों पर भर्तियां होंगी, परिणाम का इंतजार जारी है।

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपनी कैबिनेट की पहली बैठक में ही निर्देश दिया है कि नियुक्ति परीक्षाओं का कैलेंडर जारी किया जाए। इसके बाद, जेपीएससी और जेएसएससी लंबित नियुक्ति प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाएंगी। इन नियुक्तियों के पूरी होने से राज्य के करीब 50,000 युवाओं को रोजगार मिलने की संभावना है। इनमें प्रमुख रूप से सहायक आचार्य के 26,001 पद, जेएसएससी सीजीएल के 2025 पद, सिविल सेवा के 342 पद, और झारखंड पुलिस में 4919 आरक्षी पदों पर बहाली महत्वपूर्ण है। सहायक आचार्य, सीजीएल और सिविल सेवा परीक्षाओं का परिणाम अगले तीन महीनों में जारी हो सकता है, क्योंकि इन परीक्षाओं का आयोजन हो चुका है और अभ्यर्थी परिणाम की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

  • भगवान बिरसा मुंडा के वंशज को अंतिम विदाई: पीएम सीएम ने दी श्रद्धांजलि

    रांची से रिपोर्ट …..

    भगवान बिरसा मुंडा के वंशज मंगल मुंडा के निधन की खबर ने झारखंड के आदिवासी समाज को गहरे शोक में डाल दिया। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन खुद रिम्स अस्पताल पहुंचे और श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर मंगल मुंडा को श्रद्धांजलि दी।

    उलिहातू में शोक की लहर। 
    मंगल मुंडा का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव उलिहातू पहुंचते ही पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। बिरसा मुंडा के गांव में श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लग गया। मंगल मुंडा के पिता सुखराम मुंडा, मां लखिमनी देवी और परिवार के अन्य सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है। शुक्रवार को आदिवासी परंपराओं के अनुसार उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

    दुर्घटना के बाद इलाज के लिए भेजा गया था रिम्स । 
    मंगल मुंडा 25 नवंबर को एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उन्हें खूंटी से रांची के रिम्स अस्पताल लाया गया, जहां मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने डॉक्टरों को उनके इलाज में कोई कसर न छोड़ने के निर्देश दिए। उनके इलाज के लिए डॉक्टरों की एक विशेष टीम बनाई गई थी।

    मुख्यमंत्री का रिम्स दौरा  ।
    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी कल्पना सोरेन खुद रिम्स पहुंचे और मंगल मुंडा के स्वास्थ्य की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने डॉक्टरों और अस्पताल प्रबंधन से यह सुनिश्चित करने को कहा कि भगवान बिरसा मुंडा के वंशज को सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधा मिले।

    मंगल मुंडा का निधन । 
    सिर में गंभीर चोटों के कारण तमाम प्रयासों के बावजूद मंगल मुंडा को बचाया नहीं जा सका। 28 नवंबर की रात 12:30 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके छोटे भाई ने सोशल मीडिया पर इस दुखद समाचार को साझा किया, जिसके बाद से आदिवासी समाज में शोक की लहर है।

    भगवान बिरसा के वंशज को अंतिम विदाई । 
    45 वर्षीय मंगल मुंडा के निधन ने एक बार फिर भगवान बिरसा मुंडा की विरासत और आदिवासी समाज के संघर्ष को याद करने का मौका दिया है। झारखंड के मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री तक ने उनके प्रति संवेदना व्यक्त की। लेकिन

  • झारखंड की ‘सोरेन गाथा’

    रिपोर्ट: परवेज़ आलम……..

    हेमंत सोरेन का नाम झारखंड की राजनीति में महज एक नेता का नहीं, बल्कि संघर्ष, दृढ़ता और विजयी संकल्प का प्रतीक बन चुका है। गुरुवार को जब उन्होंने चौथी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, तो यह केवल एक पद ग्रहण करने का अवसर नहीं, बल्कि एक ऐसा क्षण था जो बताता है कि विपरीत परिस्थितियों में भी साहस और प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ा जा सकता है।

    तीन मोर्चों पर अकेले लड़ाई, सबको चौंकाया .

    हेमंत सोरेन के लिए यह चुनावी सफर आसान नहीं था। तीन मोर्चे थे—कानूनी संकट, पार्टी का आंतरिक संघर्ष, और विपक्षी हमले। 2023 में भूमि घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों और गिरफ्तारी ने उनकी राजनीतिक यात्रा को सबसे चुनौतीपूर्ण बना दिया। लेकिन पांच महीने जेल में बिताने के बाद जब उन्होंने जमानत पर रिहाई पाई, तो उनका यह कहना कि “यह साजिश थी, आदिवासियों की आवाज को दबाने की कोशिश,” पूरे झारखंड में गूंज उठा।

    पार्टी के भीतर बगावत से निपटना भी किसी युद्ध से कम नहीं था। झामुमो को संगठित रखते हुए उन्होंने कांग्रेस और राजद जैसे गठबंधन सहयोगियों को भी विश्वास में बनाए रखा। और विपक्ष ? भाजपा के तीखे हमलों और राजनीतिक चालों के बावजूद, सोरेन का लचीला नेतृत्व और अदम्य साहस झारखंड की जनता के लिए भरोसे का आधार बना रहा।

    संघर्षों से सफलता तक की कहानी .

    हेमंत सोरेन का राजनीतिक सफर संघर्षों से भरा रहा है। 10 अगस्त 1975 को झारखंड के नेमरा गांव में जन्मे सोरेन अपने पिता और झामुमो के संस्थापक शिबू सोरेन की राजनीतिक विरासत के उत्तराधिकारी माने गए। लेकिन उनके सफर में कठिनाइयां कम नहीं थीं। 2009 में राज्यसभा सदस्य के तौर पर शुरुआत करने वाले सोरेन को जल्दी ही राज्य की राजनीति में गहराई तक उतरना पड़ा।       2013 में पहली बार मुख्यमंत्री बनने वाले हेमंत, झारखंड के सबसे युवा मुख्यमंत्री बने। लेकिन यह कार्यकाल अधिक लंबा नहीं चला। 2014 में भाजपा सत्ता में आ गई और सोरेन विपक्ष में बैठ गए।

    जनता के लिए नायक, विरोधियों के लिए चुनौती .

    हेमंत सोरेन ने हर बार झारखंड की जनता के मुद्दों को अपने एजेंडे में रखा। उनकी योजनाओं ने सामाजिक सुरक्षा और आदिवासी अधिकारों पर खासा ध्यान दिया। ‘मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना’ के तहत महिलाओं को आर्थिक सहारा, किसानों के ऋण माफी का ऐलान, और ‘आपके अधिकार, आपकी सरकार, आपके द्वार’ जैसी योजनाओं ने उन्हें जनता के बीच खासा लोकप्रिय बना दिया।

    उनकी यह योजनाएं केवल विकास के वादे नहीं, बल्कि सत्ता के केंद्र में जनता को लाने की कोशिश थी। और यही कारण है कि विपक्ष की तमाम कोशिशों के बावजूद वे झारखंड के सबसे प्रभावशाली और भरोसेमंद नेताओं में अपनी जगह बनाए हुए हैं।

    हेमंत की जीत: झारखंड की उम्मीदें

    चुनावों के नतीजों ने साबित कर दिया कि हेमंत सोरेन केवल एक नेता नहीं, बल्कि झारखंड की उम्मीदों का चेहरा बन चुके हैं। उनकी चौथी पारी झारखंड को नई दिशा देने के लिए कितनी सफल होगी, यह तो वक्त बताएगा। लेकिन इस वक्त, उनकी कहानी न केवल झारखंड, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा है।

    झारखंड की जंग में अकेले उतरकर उन्होंने न केवल जीत हासिल की, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि जब जनता का भरोसा साथ हो, तो कोई भी लड़ाई मुश्किल नहीं होती।

     

  • झारखंड में सोरेन युग की नई शुरुआत : स्टीफन मरांडी होगें प्रोटेम स्पीकर

     परवेज़ आलम की रिपोर्ट……..

    हेमंत सोरेन ने गुरुवार शाम शपथ ली और उसी वक्त से झारखंड को बदलने की दिशा में कदम बढ़ा दिए। शपथ ग्रहण के बाद जब वे प्रोजेक्ट भवन स्थित झारखंड मंत्रालय पहुंचे, तो यह महज औपचारिकता नहीं, बल्कि नए इरादों का ऐलान था। डेढ़-दो घंटे की बैठक में फैसले ऐसे हुए, जो न केवल झारखंड के प्रशासन को नई दिशा देंगे, बल्कि सियासत के बदलते मिजाज का भी संकेत दे गए।

    स्टीफन मरांडी फिर बने प्रोटेम स्पीकर
    हेमंत सोरेन ने एलान किया कि झारखंड विधानसभा का पहला सत्र 9 से 12 दिसंबर के बीच आयोजित होगा। नवनिर्वाचित विधायकों को शपथ दिलाने की जिम्मेदारी जेएमएम के वरिष्ठ विधायक स्टीफन मरांडी को दी गई है। यह नाम केवल एक नियुक्ति नहीं, बल्कि गठबंधन की परंपरा और पुराने भरोसे का प्रतीक है।

    मंईयां सम्मान योजना: महिलाओं के लिए बड़ी राहत
    बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने मंईयां सम्मान योजना के तहत महिलाओं को दिसंबर महीने से ₹2500 देने का निर्देश दिया। यह केवल एक योजना नहीं, बल्कि राज्य की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। अगस्त से नवंबर तक ₹1000-1000 ट्रांसफर किए गए थे, अब यह राशि बढ़ाकर ₹2500 कर दी गई है।

    केंद्र से ₹1.36 लाख करोड़ वसूली: कानूनी कार्यवाही शुरू
    हेमंत सोरेन का कहना है कि झारखंड का ₹1.36 लाख करोड़ केंद्रीय सरकारी उपक्रमों पर बकाया है। इस रकम की वसूली के लिए कानूनी लड़ाई शुरू की जाएगी। झारखंड जैसे राज्य के लिए यह पैसा केवल बकाया नहीं, बल्कि विकास की उम्मीद है।

    खनिज टैक्स की समीक्षा और आय के नए स्रोत
    मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड, देश के सबसे पिछड़े राज्यों में है। राज्य की आर्थिक मजबूती के लिए खनन क्षेत्र में टैक्स की समीक्षा की जाएगी। अदालत में लंबित टैक्स मामलों का समाधान भी प्राथमिकता में रहेगा।

    सिपाही भर्ती और परीक्षा कैलेंडर का एलान
    हेमंत सोरेन ने झारखंड के युवाओं को लेकर बड़ा ऐलान किया। सिपाही भर्ती प्रक्रिया को सुधारने के साथ ही उन्होंने सभी सरकारी रिक्तियों के लिए 1 जनवरी 2025 तक परीक्षा कैलेंडर प्रकाशित करने का निर्देश दिया।

    असम के चाय बागान मजदूरों पर सर्वदलीय समिति
    राज्य के आदिवासी समुदाय की दशा-दिशा पर ध्यान देते हुए, असम के चाय बागानों में मजदूरी कर रहे झारखंड के मूलवासियों की स्थिति का अध्ययन करने के लिए सर्वदलीय समिति गठित करने की घोषणा की गई।

    हेमंत सोरेन का यह कार्यकाल झारखंड को आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा देने की दिशा में एक नई शुरुआत है। शपथ से लेकर पहले दिन के फैसलों तक, उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह सरकार केवल सत्ता के लिए नहीं, बल्कि बदलाव के लिए आई है।

    सोरेन के इरादे साफ हैं। फैसले तेज हैं। अब देखना यह होगा कि इस नई दिशा को प्रशासन कितना अमलीजामा पहनाता है।

  • हेमंत सरकार का बड़ा ऐक्शन: प्रशासनिक उलटफेर से सियासी संदेश

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट……..

    राजनीति में वापसी के साथ ही हेमंत सोरेन ने एक बार फिर अपने इरादे साफ कर दिए हैं। झारखंड के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेने के बाद उनके फैसलों ने यह दिखा दिया कि यह केवल शपथ ग्रहण नहीं, बल्कि सत्ता पर उनकी मजबूत पकड़ का ऐलान है।

    मंजूनाथ भजंत्री, जिन्हें विधानसभा चुनाव के दौरान चुनाव आयोग के निर्देश पर रांची डीसी के पद से हटाया गया था, अब फिर से रांची के उपायुक्त बनाए गए हैं। यह फैसला न केवल प्रशासनिक महत्व रखता है, बल्कि इसके पीछे छिपे सियासी संदेश को समझना भी जरूरी है।

    भजंत्री की वापसी: एक रणनीतिक चाल
    भजंत्री, जिनकी पहचान एक सख्त और परिणामोन्मुख अधिकारी के रूप में होती है, को वापस लाने का मतलब है कि सोरेन सरकार पुराने भरोसेमंद सिपाहियों के सहारे नई पारी खेलना चाहती है। इस बदलाव के साथ ही वरुण रंजन को रांची डीसी से हटाकर जुडको का डायरेक्टर बनाया गया है।

    डीजीपी का अतिरिक्त प्रभार: अनुराग गुप्ता को फिर मिली जिम्मेदारी
    अनुराग गुप्ता, जो एसीबी के डीजी के रूप में अपनी काबिलियत साबित कर चुके हैं, को झारखंड डीजीपी का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। मौजूदा डीजीपी अजय कुमार को पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन का एमडी बनाकर एक अलग जिम्मेदारी दी गई है। यह बदलाव दिखाता है कि हेमंत सरकार हर मोर्चे पर नई ऊर्जा और नए नेतृत्व को तरजीह दे रही है।

    वरुण रंजन को दिया नया रोल
    वरुण रंजन, जिनकी प्रशासनिक कार्यशैली को लेकर पहले भी चर्चाएं रही हैं, अब झारखंड औद्योगिक आधारभूत संरचना विकास निगम (JIIDCO) के एमडी बनाए गए हैं। उनके इस नई भूमिका में जाने का मतलब है कि सरकार विकास योजनाओं को प्राथमिकता देना चाहती है।

    शपथ के बाद ऐक्शन में सरकार
    हेमंत सोरेन की सरकार के गठन के बाद यह बड़े फैसले केवल प्रशासनिक फेरबदल नहीं हैं। ये उस बड़े खेल की शुरुआत हैं, जो विधानसभा चुनाव 2024 के पहले से ही तय दिशा में आगे बढ़ाया जा रहा है।

    मंजूनाथ की ताजपोशी और चुनावी संदेश
    सवाल यह है कि मंजूनाथ भजंत्री को दोबारा रांची का डीसी बनाकर क्या हेमंत सोरेन ने विरोधियों को यह संदेश दिया है कि वह अपने लोगों पर भरोसा करते हैं और किसी भी दबाव के आगे झुकने वाले नहीं हैं?

    इस सियासी और प्रशासनिक दांव का असर झारखंड केप्रशासनिक संतुलन पर क्या पड़ेगा, यह तो वक्त ही बताएगा। लेकिन फिलहाल, हेमंत सोरेन सरकार ने यह साफ कर दिया है कि उनके फैसले तेज हैं, रणनीति सटीक है, और इरादे मजबूत।